Category: Health

  • जल्द बाजार में बिकने लगेगा ये जहर,ˈ मौत खरीदेंगे लोग, खाते ही होगा ऐसा हाल, खाते ही होगा ऐसा हालˌ

    जल्द बाजार में बिकने लगेगा ये जहर,ˈ मौत खरीदेंगे लोग, खाते ही होगा ऐसा हाल, खाते ही होगा ऐसा हालˌ

    जल्द बाजार में बिकने लगेगा ये जहर,ˈ मौत खरीदेंगे लोग, खाते ही होगा ऐसा हाल, खाते ही होगा ऐसा हालˌ

    पहले बाजार में अंगूर खरीदना रिस्की काम होता था. अंगूर खट्टे निकल जाते थे. लेकिन अब तो जिस अंगूर को खाए, वो मीठा ही होगा. आखिर ऐसा कैसे हो गया कि अब अंगूर खट्टे नहीं होते. इसकी एक खास वजह है.

    आज अंगूर दिखने में जितना मीठा होता है, उतना ही अंदर से खतरनाक होता है. इसकी मिठास केमिकल से आती है. बाजार में चमचमाते काले-हरे अंगूर देखकर मुंह में पानी आ जाता है. लेकिन ये मिठास प्राकृतिक नहीं, केमिकल की देन है. किसान फसल को जल्दी बड़ा करने, चमकदार बनाने और कीटों से बचाने के लिए पेस्टिसाइड, फंगीसाइड और ग्रोथ हार्मोन का छिड़काव करते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) की रिपोर्ट कहती है कि क्लोरपाइरीफॉस, कार्बेंडाजिम, प्रोफेनोफॉस जैसे खतरनाक केमिकल अंगूर में 50 गुना तक ज्यादा पाए जाते हैं. इसके अलावा लेड और आर्सेनिक की मात्रा WHO लिमिट से 200% ऊपर तक पाई जाती है.

    इन केमिकलों को अंगूर की पतली छिलके सोख लेती है. ऊपर से वैक्स की चमकदार कोटिंग की जाती है जो दिखने में तो अच्छी लगती है, लेकिन अंदर जहर छिपाए रखती है. अगर इसे अच्छे से ना धोया जाए तो खाना बेहद नुकसानदायक होगा. अगर इन अंगूरों को लाकर सादे पानी से धोया तो इससे कोई फायदा नहीं हैं. ये केमिकल गहराई तक घुस चुके होते हैं. FSSAI की लैब टेस्टिंग में पता चला कि 80% बाजारू अंगूर पेस्टिसाइड लिमिट से ज्यादा दूषित होते हैं. बिना धोए 10-15 अंगूर खाने से शरीर में 0.5 mg क्लोरपाइरीफॉस जाता है जो एक बच्चे के लिए घातक हो सकता है. इससे पांच तरह के प्रभाव हो सकते हैं. 5 मिनट में के अंदर ही मुंह में जलन होने लगेगी और जीभ में सूजन आ जाएगा. इसके अलावा उल्टी, चक्कर, पेट दर्द तक होने लगता है. साथ ही सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. लंबे समय तक इसे खाने से लीवर-किडनी फेल होने की संभावना भी हो जाती है.

    बच्चों के लिए सबसे खतरनाक
    बच्चे और बुजुर्ग इनका सबसे आसान शिकार होते हैं. बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. 5-6 अंगूर भी उनके लिए जहर के समान है. बुजुर्गों की किडनी पहले से कमजोर होती है. एक बार ये वाला जहर गया तो वापसी मुश्किल है. FSSAI ने इसे लेकर चेतावनी भी दी है लेकिन बाजार में फिर भी धड़ल्ले से इसकी बिक्री होती है. FSSAI ने अलर्ट जारी किया है कि सर्दी के अंगूर खरीदने के बाद उसे सात बार धोएं.

  • घुटनों में दर्द है? नहीं बचे चलनेˈ लायक? बस 7 दिन करें ये उपाय फर्क होगा खुद महसूसˌ

    घुटनों में दर्द है? नहीं बचे चलनेˈ लायक? बस 7 दिन करें ये उपाय फर्क होगा खुद महसूसˌ

    घुटनों में दर्द है? नहीं बचे चलनेˈ लायक? बस 7 दिन करें ये उपाय फर्क होगा खुद महसूसˌ

    आज हम आपको बबूल की फली अर्थात उसके फल के बारे में बताएंगे। वैसे तो बबूल का हर भाग पत्तीयाँ, फूल, छाल और फली सभी औषधि है। यह कांटेदार पेड़ होता है। सम्पूर्ण भारत वर्ष में बबूल के लगाये हुए तथा जंगली पेड़ मिलते हैं।

    बबूल के पेड़ बड़े व घने होते हैं। ये कांटेदार होते हैं।

    गर्मी के मौसम में इस पर पीले रंग के फूल गोलाकार गुच्छों में लगते है तथा सर्दी के मौसम में फलियां लगती हैं। इसकी लकड़ी बहुत मजबूत होती है। बबूल के पेड़ पानी के निकट तथा काली मिट्टी में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। इनमें सफेद कांटे होते हैं जिनकी लम्बाई 1 सेमी से 3 सेमी तक होती है। इसके कांटे जोड़े के रूप में होते हैं। इसके पत्ते आंवले के पत्ते की अपेक्षा अधिक छोटे और घने होते हैं।

    बबूल के तने मोटे होते हैं और छाल खुरदरी होती है। इसके फूल गोल, पीले और कम सुगंध वाले होते हैं तथा फलियां सफेद रंग की 7-8 इंच लम्बी होती हैं। इसके बीज गोल धूसर वर्ण (धूल के रंग का) तथा इनकी आकृति चपटी होती है।

    विभिन्न भाषाओं में बबूल का नाम : संस्कृत में बबूल, बर्बर, दीर्घकंटका, हिन्दी में बबूर, बबूल, कीकर, बंगाली में बबूल गाछ, मराठी में माबुल बबूल, गुजराती में बाबूल, तेलगू में बबूर्रम, नक दुम्मा, नेला, तुम्मा, पंजाबी में बाबला, तमिल में कारुबेल। बबूल कफ (बलगम), कुष्ठ रोग (सफेद दाग), पेट के कीड़ों-मकोड़ों और शरीर में प्रविष्ट विष का नाश करता है।

    बबूल का गोंद यह गर्मी के मौसम में एकत्रित किया जाता है। इसके तने में कहीं पर भी काट देने पर जो सफेद रंग का पदार्थ निकलता है। उसे गोंद कहा जाता है।लेकिन आज हम आपको बबूल की फली, फूल, छाल आदि के फायदे बताएंगे। आइये जानते है इसके बारे में…

    बबूल की फली के फायदे | Babool

    घुटनों का दर्द और अस्थि भंग : बबूल के बीजों को पीसकर तीन दिन तक शहद के साथ लेने से घुटनों के दर्द और अस्थि भंग दूर हो जाता है और हडि्डयां वज्र के समान मजबूत हो जाती हैं। घुटनों में चिकनाई आजाती है जिन्हें डॉक्टर ने घुटनों के रिप्लेसमेंट की बोल दिया उनको भी यह ठीक करने का सामर्थ्य रखते है।

    टूटी हड्डी जल्द जोड़ने के लिए : बबूल की फलियों का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से टूटी हड्डी जल्द ही जुड़ जाती है। यह उपाय बहुत की प्रभावी और कारगर है।

    दांत का दर्द : बबूल की फली के छिलके और बादाम के छिलके की राख में नमक मिलाकर मंजन करने से दांत का दर्द दूर हो जाता है।

    पेशाब का अधिक मात्रा में आना : बबूल की कच्ची फली को छाया में सुखाकर उसे घी में तलकर पाउडर बना लें। इस पाउडर की 3-3 ग्राम मात्रा रोजाना सेवन करने से पेशाब का ज्यादा आना बंद होता है।

    शारीरिक शक्ति और कमज़ोरी मिटाएँ : बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें और इसमें बराबर की मात्रा मे मिश्री मिलाकर पीस लेते हैं। इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से पानी के साथ सेवन से करने से शारीरिक शक्ति में इज़ाफ़ा होता है और सभी कमज़ोरी वाले रोग दूर हो जाते हैं।

    रक्त बहने पर : बबूल की फलियां, आम के बौर, मोचरस के पेड़ की छाल और लसोढ़े के बीज को एकसाथ पीस लें और इस मिश्रण को दूध के साथ मिलाकर पीने से खून का बहना बंद हो जाता है।

    मर्दाना ताक़त : बबूल की कच्ची फलियों के रस में एक मीटर लंबे और एक मीटर चौडे़ कपड़े को भिगोकर सुखा लेते हैं। एक बार सूख जाने पर उसे दुबारा भिगोकर सुखा लेते है। इसी प्रकार इस प्रक्रिया को 14 बार करते हैं। इसके बाद उस कपड़े को 14 भागों में बांट लेते हैं, और रोजाना एक टुकड़े को 250 ग्राम दूध में उबालकर पीने से मर्दाना ताक़त बढ़ती है।

    अतिसार (दस्त) : बबूल की दो फलियां खाकर ऊपर से छाछ (मट्ठा) पीने से अतिसार में लाभ मिलता है।

    बबूल की छाल, पत्ती और फूल के फायदे :

    मुंह के रोग : बबूल की छाल को बारीक पीसकर पानी में उबालकर कुल्ला करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।

    पीलिया : बबूल के फूलों को मिश्री के साथ मिलाकर बारीक पीसकर चूर्ण तैयार कर लें। फिर इस चूर्ण की 10 ग्राम की फंकी रोजाना दिन में देने से ही पीलिया रोग मिट जाता है। या बबूल के फूलों के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 10 ग्राम रोजाना खाने से पीलिया रोग मिट जाता है।

    माता-बहनो के मासिक-धर्म संबन्धी विकार : 20 ग्राम बबूल की छाल को 400 मिलीलीटर पानी में उबालकर बचे हुए 100 मिलीलीटर काढ़े को दिन में तीन बार पिलाने से भी मासिक-धर्म में अधिक खून का आना बंद हो जाता है। या लगभग 250 ग्राम बबूल की छाल को पीसकर 8 गुने पानी में पकाकर काढ़ा बना लेते हैं। जब यह काढ़ा आधा किलो की मात्रा में रह जाए तो इस काढ़े की योनि में पिचकारी देने से मासिक-धर्म जारी हो जाता है और उसका दर्द भी शान्त हो जाता है।

    आंखों से पानी बहना : बबूल के पत्ते को बारीक पीस लेते हैं। इसके बाद उसमें थोड़ा सा शहद मिला लें, फिर इसे काजल के समान आंखों पर लगाने से आंखों से पानी निकलना खत्म हो जाता है।

    कंठपेशियों का पक्षाघात : बबूल की छाल के काढ़े से रोजाना दो बार गरारा करने से गले की शिथिलता समाप्त हो जाती है।

    गले के रोग : बबूल के पत्ते और छाल एवं बड़ की छाल सभी को बराबर मात्रा में मिलाकर 1 गिलास पानी में भिगो देते हैं। इस प्रकार तैयार हिम से कुल्ले करने से गले के रोग मिट जाते हैं।

    अम्लपित्त या एसीडिटी : बबूल के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसमें 1 ग्राम आम का गोंद मिला देते हैं। इस काढ़े को शाम को बनाते हैं और सुबह पीते हैं। इस प्रकार से इस काढ़े को सात दिन तक लगातार पीने से अम्लपित्त का रोग मिट जाता है।

  • ऊंटनी का दूध इन 20 गंभीर बीमारीˈ को करता है जड़ से खत्म अगर किसी मंद बुध्दि को इसका दूध पिला दिया जाए तो दिमाग कंप्यूटर से भी तेज़ हो जाता हैˌ

    ऊंटनी का दूध इन 20 गंभीर बीमारीˈ को करता है जड़ से खत्म अगर किसी मंद बुध्दि को इसका दूध पिला दिया जाए तो दिमाग कंप्यूटर से भी तेज़ हो जाता हैˌ

    ऊंटनी का दूध इन 20 गंभीर बीमारीˈ को करता है जड़ से खत्म अगर किसी मंद बुध्दि को इसका दूध पिला दिया जाए तो दिमाग कंप्यूटर से भी तेज़ हो जाता हैˌ

    यदि आप ऊंटनी के दूध (camel milk) से परहेज करते हैं तो उसके फायदे जान लीजिए। ऊंटनी का दूध अनेक रोगों में फायदेमंद तो होता ही है, साथ यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। ऊंटनी का दूध दिमागी बीमारी में रामबाण सिद्ध हो सकता है।

    बीकानेर के राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र ने हाल ही में एक स्टडी कराई है। इसमें पाया गया है कि ऊंटनी का दूध मंद बुद्धि बच्चों के लिए अमृत के समान है। राज्य सरकार ने भी ऊंट को राज्य पशु भी घोषित किया है। उधर राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र ने ऊंटनी के दूध से बने अनेक प्रॉडक्ट को भी बाजार में उतारा है और लोगों तक इस फायदेमंद दूध पहुंचाने के लिए किसानों को मोटिवेट भी कर रहा है।केंद्र के डायरेक्टर एनवी पाटिल ने बताया कि पंजाब के फरीदकोट में स्पेशल चिल्ड्रन के एक केंद्र में तीन महीने लगातार करीब 10 मंद बुद्धि बच्चों को रोजाना 300 एमएल सुबह और 300 एमएल शाम को ऊंटनी का दूध दिया गया। इन बच्चों में दूसरे मंदबुद्धि बच्चों के मुकाबले ज्यादा ग्रोथ पाई गई।

     ऊंटनी के दूध के फायदे :

    1. इसका नियमित इस्तेमाल करने वाले बच्चों का मस्तिष्क सामान्य बच्चों की तुलना में तेजी से विकसित होता है। इतना ही नहीं उसकी सोचने-समझने की झमता में भी सामान्य लोग बहुत पीछे होते हैं। कुल मिलाकर यह बच्चों को एक ओर कुपोषण से बचाता है तो दूसरी ओर उसमें बौद्धिक क्षमता के विकास में भी सहायक है।
    2. ऊंटनी का दूध बहुत ही जल्दी पच जाने वाला होता है। इसमें दुग्ध शर्करा, प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट,सुगर, फाइबर, लैक्टिक अम्ल, आयरन, मैग्निशियम, विटामिन ए, विटामिन ई, विटामिन बी 2, विटामिन सी, सोडियम, फास्फोरस, पोटैशियम, जिंक, कॉपर, मैग्नीज जैसे बहुत सारे तत्व पाए जाते हैं जो कि हमारे शरीर को सुंदर और निरोगी बनाते हैं।
    3. ऊंटनी के दूध में कैल्शियम बड़ी मात्रा में पाया जाता है। जिससे इसके सेवन से हड्डियां मजबूत हो जाती हैं। तो वहीं इसमें लेक्टोफेरिन नामक तत्व पाए जाने से कैंसर जैसी घातक बीमारी से भी लड़ने की क्षमता शरीर में तैयार होती है। इतना ही नहीं यह खून से टॉक्सिन्स दूर करता है और लिवर को साफ करता है। पेट से जुड़ी समस्याओं में आराम पाने के लिए भी लोग इसका सेवन करते हैं। यह वायरल संक्रमणों से लड़ने में भी मददगार है।
    4. ऊंटनी के एक लीटर दूध में लगभग 52 यूनिट इंसुलिन की मात्रा पायी जाती है। जो कि अन्य पशुओं के दूध में पायी जाने वाली इंसुलिन की मात्रा से बहुत ज्यादा होता है। इंसुलिन शरीर में प्रतिरोधक क्षमता तैयार करने का काम करती है।
    5. ऊंटनी का दूध विटामिन और खनिज तत्वों से भरपूर होता है। इसमें एंटीबॉडी भी मौजूद होता है जो शरीर को संक्रामक रोगों से बचाता है। नियमित इस्तेमाल करने से ब्लड सुगर से राहत मिलती है, इंफेक्शन रोकने में भी मददगार है। तपेदिक, आंत में जलन होने पर भी इसका इस्तेमाल गुणकारी है। यह छोटी-मोटी बीमारियों के लिए लाभकारी तो है ही, गैस्ट्रिक कैंसर की घातक कोशिकाओं को रोकने में भी मदद करता है। इसमें हैपेटाइटिस सी, एड्स, मधुमेह, अल्सर, हृदय रोग, गैंगरीन, किडनी संबंधी, बीमारियों से शरीर की बचाव की प्रतिरोधी क्षमता होती है। यह शरीर में ऐसी कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद करता है जो संक्रामक रोगों के खिलाफ एंटीबॉडी के रूप में काम करती हैं।
    6. ऊंटनी के दूध में अल्फा हाइड्रोक्सिल अम्ल पाया जाता है। जो कि त्वचा को निखारने का काम करता है। इसीलिए इसका इस्तेमाल सौंदर्य संबंधी सामग्री बनाने में किया जाता है। यह कुपोषण से ग्रसित बच्चों के लिए संतुलित आहार का काम करता है। यह उन लोगों में दिनभर काम करने की क्षमता पैदा कर देता है जो थोड़ा काम करने के बाद थक जाते हैं।
    7. ऊंटनी के दूध से बनी क्रीम त्वचा में निखार लाती है।
    8. ऊंटनी का दूध (camel milk) मधुमेह, दमा, ऑटिज्म, बच्चों में दूध की एलर्जी, ब्लड प्रेशर सहित विभिन्न रोगों से लड़ने में कारगर साबित हो रहा है। इसके अलावा मलेरिया के लिए भी यह दूध काफी कारगर है। ऊंटनी के दूध में प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा होता है जिसे पीने के बाद लोगों को अनेक रोगों से लड़ने की क्षमता मिलती है।
  • क्या होगा अगर रोजाना 14 दिनों तकˈ पिएंगे नींबू पानी? हमसे नहीं वीडियो में डॉक्टर से सुन लीजिए सचˌ

    क्या होगा अगर रोजाना 14 दिनों तकˈ पिएंगे नींबू पानी? हमसे नहीं वीडियो में डॉक्टर से सुन लीजिए सचˌ

    क्या होगा अगर रोजाना 14 दिनों तकˈ पिएंगे नींबू पानी? हमसे नहीं वीडियो में डॉक्टर से सुन लीजिए सचˌ

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।क्या आप जानते हैं कि अगर आप 14 दिनों तक रोज नींबू पानी पीते हैं, तो आपकी सेहत में क्या-क्या बदलाव नजर आ सकते हैं (Lemon Water Health Benefits)? अगर नहीं, तो आपको यह आर्टिकल जरूर पढ़ना चाहिए।

    हार्वर्ड के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने बताया कि अगर आप 14 दिनों तक रोज नींबू पानी पिएंगे, तो आपके शरीर में क्या-क्या बदलाव देखने को मिल सकते हैं। आइए जानें इस बारे में।

    नींबू में लगभग 30 तरह के फाइटोन्यूट्रिएंट्स होते हैं। साथ ही, यह विटामिन-सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स का भी बेहतरीन सोर्स होता है। इसलिए लगातार 14 दिनों तक नींबू पानी पीने से आपके शरीर में कई पॉजिटिव बदलाव (Lemon Water Benefits) देखने को मिलेंगे।

    14 दिनों तक नींबू पानी पीने से क्या होगा? (What Happens When You Drink Lemon Water for 14 Days)

    आयरन अब्जॉर्प्शन बढ़ाता है

    नींबू में मौजूद विटामिन-सी, आयरन के अब्जॉरप्शन को बढ़ाता है। जो लोग एनीमिया से पीड़ित हैं या आयरन सप्लीमेंट्स लेते हैं, उन्हें नींबू पानी जरूर पीना चाहिए। यह शरीर में हीमोग्लोबिन के लेवल को बढ़ाने में मदद करता है।

    त्वचा को ग्लोइंग बनाता है

    नींबू पानी पीने से कोलेजन प्रोडक्शन बढ़ता है, जो स्किन की इलास्टिसिटी और चमक के लिए जरूरी है। 14 दिनों तक रोज नींबू पानी पीने से मुंहासे, झुर्रियां और डार्क स्पॉट्स कम होते हैं और त्वचा पर निखार आता है।

    टेंडन्स मजबूत होता है

    नींबू कोलेजन बढ़ाने में मदद करता है, जो लिगामेंट्स और टेंडन्स के लिए काफी जरूरी होता है। कोलेजन कम होने की वजह से जोड़े कमजोर होने लगते हैं। इसलिए रोजाना 14 दिनों तक नींबू पानी पीने से लिगामेंट्स मजबूत होते हैं।

    शरीर को डिटॉक्स करता है

    नींबू पानी एक नेचुरल डिटॉक्स ड्रिंक है। यह लिवर को टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है और यूरिन के जरिए टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर करता है। 14 दिन तक नींबू पानी पीने से ब्लड प्यूरिफिकेशन होता है और शरीर हल्का व एनर्जेटिक महसूस करता है।

    इम्युनिटी बूस्ट करता है

    नींबू में मौजूद 30 फाइटोन्यूट्रिएंट्स और विटामिन-सी शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को मजबूत बनाते हैं। रोजाना नींबू पानी पीने से सर्दी-जुकाम, इन्फेक्शन और वायरल बीमारियों से बचाव होता है।

    वजन घटाने में मददगार

    नींबू पानी मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और फैट बर्न करने में मदद करता है। साथ ही, यह भूख को कंट्रोल करने में भी मदद करता है। अगर आप 14 दिन लगातार सुबह नींबू पानी पीते हैं, तो वजन कम करने में आसानी होगी।

    सूजन कम करता है

    नींबू में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर की सूजन कम करने में मदद करते हैं। यह यूरिक एसिड को घोलकर जोड़ों के दर्द और गठिया से भी राहत दिलाता है।

    एनर्जी लेवल बढ़ाता है

    नींबू पानी पीने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है। यह मूड को फ्रेश करता है और थकान दूर करता है। 14 दिन तक इसे पीने से आप ज्यादा एक्टिव और तरोताजा महसूस करेंगे।

  • सांप के ज़हर का सबसे बड़ा दुश्मनˈ है ये पौधा 10 मिनट में कर देता है ज़हर का खात्माˌ

    सांप के ज़हर का सबसे बड़ा दुश्मनˈ है ये पौधा 10 मिनट में कर देता है ज़हर का खात्माˌ

    सांप के ज़हर का सबसे बड़ा दुश्मनˈ है ये पौधा 10 मिनट में कर देता है ज़हर का खात्माˌ

    आपने अपने आसपास ऐसा बहुत बार देखा हुआ कि जब किसी व्यक्ति को किसी जहरीले सांप ने काट लिया होता है। तब हम उसका इलाज कराने के लिए सीधे हॉस्पिटल ले जाते हैं ।लेकिन कभी-कभी हॉस्पिटल ले जाने से पहले ही व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।इसीलिए आज हम आपको एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रही हैं अगर आप उस पौधे का रस सांप के काटने वाले स्थान पर लगाएंगे ।

    तो सांप का जहर पहले से बहुत कम हो जाएगा और फिर आप उस व्यक्ति का इलाज आसानी से करा सकते हैं।

    हम जिस पौधे के बारे में बात करने जा रहे हैं उस पौधे का नाम ककोड़ा है। यह पौधा आपको अपने घर के आस-पास आसानी से मिल जाएगा ।अगर आपके आसपास किसी को भी जहरीले सांप ने काट लिया है । तो आपको सिर्फ इस पौधे के फल का रस सांप के काटने वाले स्थान पर लगाना है। ऐसा करने से सांप का विष कुछ हद तक कम हो जाएगा।

    द्रोणपुष्पी- दोस्तों इस पौधे को लगभग सभी लोग जानते होगे। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे गुम्मा भी कहा जाता है। यह लगभग सभी क्षेत्रों में मिल जाता है और एक प्रकार का खरपतवार है। अगर किसी को सांप काट लें तो द्रोणपुष्पी का सवरस निकाल कर रोगी को पिला देने से रोगी का जहर सिर्फ दस मिनट में उतर जाता है। सबरस का मतलब होता है इसके सम्पूर्ण पौधे का रस। इसके अलावा भी मैं आपको और भी चीजे बताता हूँ जो सांप के जहर को उतार देतीं हैं।

    बिना बुझा चूना – अगर किसी व्यक्ति को सांप काट लेता है तो ,सबसे पहले उस स्थान पर एक प्लस के आकार का कट लगा दे। उसके बाद बिना बुझे हुए चूने को बारीक पीस कर उस स्थान पर लगा दें और उसपर एक से दो बूद पानी दाल दें। ऐसा करने से चूना सांप के जहर को खींच लेता है और रोगी ठीक हो जाता है।

    मोर पंख – कितना भी जहरीला सांप काट ले इसके लिए मोर पंख बहुत ही रामबाण उपाय हैं। आपको करना क्या है कि मोर के पंख के आँख वाले भाग को काट लें और उसे अच्छी तरह से पीस कर पानी के साथ पिलाने से सांप का जहर खत्म हो जाता है।

  • जाने अनजाने में अगर आप भी करˈ रहे हो इस पत्ते का सेवन तो एक बार जरूर पढ़ लें ये खबरˌ

    जाने अनजाने में अगर आप भी करˈ रहे हो इस पत्ते का सेवन तो एक बार जरूर पढ़ लें ये खबरˌ

    जाने अनजाने में अगर आप भी करˈ रहे हो इस पत्ते का सेवन तो एक बार जरूर पढ़ लें ये खबरˌ

    आपने अरबी की सब्जी जरूर खाई होगी। भारत में सभी राज्यों में अरबी खायी जाती हैं। इसमें विटामिन, पोटेशियम, कैल्शियम, प्रोटीन के अलावा आयरन आदि महत्वपूर्ण पोषक तत्व रहते हैं।अरबी शरीर को ताकत देती है।अरबी में भारी फाइबर और कैलोरी की कम मात्रा की वजह से यह वजन घटाने का काम करती है। अरबी के और क्या-क्या फायदे हैं वैदिकवाटिका आपको जानकारी दे रही है।

    अरबी शीतल, अग्निदीपक (भूख को बढ़ाने वाली), बल की वृद्धि करने वाली और माताओं में शिशु के लिए दूध बढ़ाने वाली है। अरबी के सेवन से पेशाब अधिक मात्रा में होता है एवं कफ और वायु की वृद्धि होती है।

    अरबी के फल में धातुवृद्धि की भी शक्ति है। अरबी के पत्तों का साग वायु तथा कफ बढ़ाता है। इसके पत्तों में बेसन लगाकर बनाया गया पकवान स्वादिष्ट और रुचिकर होता है, फिर भी उसका अधिक मात्रा में सेवन उचित नहीं है।

    आपने अरबी की सब्जी का सेवन तो किया ही होगा, यह हर घर में बनती हुई देखी जा सकती है। पर क्या आप जानते है कि अरबी के पत्ते भी आपके स्वास्थ के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। वैसे इसका सेवन लोग पकौड़े बनाकर या फिर इसमें बेसन के पेस्ट को लगाकर ज्यादा करते है।

    अरबी के पत्तों में अधिक मात्रा में विटामिन ए, बी, सी के अलावा कैल्शियम और पोटेशियम, एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है। जो आपके शरीर के लिए काफी फायदेमंद है। आसानी से मिल जाने के बावजूद अरबी बहुत अधिक लोकप्रिय सब्जी नहीं है।

    अरबी को कई नामों से जाना जाता है। इसे सभी बहुत ही पसंद करते है। अरबी के पत्तों से बनी सब्जी के रुप में खाया जाता है जोकि बहुत ही स्वादिष्ट होती है। आदिवासियों के अनुसार अरबी का कभी भी कच्चा सेवन नहीं करना चाहिए।

    अरबी और अरबी पत्ता के फायदे

    जोड़ों के दर्द : यदि आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं, तो इस समस्या से निजात पाने के लिए आप रोज अरबी के पत्तों का सेवन। इससे जोड़ों के दर्द में काफी राहत मिलती है।

    शरीर पर दाने : अगर आपके शरीर पर दाने हो गए है। जिसके लिए आपने जाने कितना उपचार कराया, लेकिन आराम नहीं मिला तो एक बार अरबी के पत्ते ट्राई करें। इसके लिए इसके पत्तों को जलाकर इसकी राख को नारियल के तेल में मिलाकर लगाए। आपको खुद ही फायदा नजर आने लगेगा।

    तनाव दूर करे : अरबी में सोडियम की अच्छी मात्रा पायी जाती है। इसके अलावा ये पोटैशियम और मैग्नीशि‍यम के गुणों से भी भरपूर है जिसके चलते ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है. साथ ही ये तनाव दूर रखने में भी मददगार है।

    गुर्दे, मांसपेशियां और शरीर की नसों : अरबी में मौजूद गुण चेहरे से सबंधित समस्या को ठीक करते हैं। और त्वचा पर पड़ी झुर्रियों को भी ठीक करते हैं। अरबी खाने से गुर्दे, मांसपेशियां और शरीर की नसें सभी ठीक रहकर काम करती हैं। इसमें मौजूद पोटेशियम शरीर को कमजोरी नहीं आने देता है।

    चेहरे की झुर्रियां : अरबी त्वचा के सूखेपन और झुर्रियों को भी दूर करती है। सूखापन चाहे आंतों में हो या सांस-नली में अरबी खाने से लाभ होता है।

    हृदय रोग : हृदय रोग के रोगी को अरबी की सब्जी प्रतिदिन खाते रहने से लाभ होता है।

    ट्यूमर : अरबी के पत्तों के डाली को पीसकर लेप करने से रोग में लाभ होता है।

    ब्ल्डप्रेशर : ब्ल्डप्रेशर के रोगियों को रोज अपने खाने में अरबी का प्रयोग करना चाहिए। अरबी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखती है। अरबी डायबिटीज के रोगियों के लिए फायदेमंद होती है।

    डिप्रेशन व अवसाद : अरबी आपको डिप्रेशन व अवसाद से भी बचाती है। जिस वजह से आपको अच्छी नींद भी आती है।

    पेशाब की जलन : अरबी के पत्तों का रस 3 दिन तक पीने से पेशाब की जलन मिट जाती है।

    माँ और बच्चा : अरबी की सब्जी खाने से दुग्धपान कराने वाली माताओं में दूध बढ़ता है।

    रक्तपित्त : अरबी के पत्तों का साग रक्तपित्त के रोगी के लिए लाभकारी है।

    फोड़े-फुंसी : अरबी के पत्ते के डंठल जलाकर उनकी राख तेल में मिलाकर लगाने से फोड़े मिटते हैं।

    कोलेस्ट्राल : दिल की बीमारियों से बचने के लिए अरबी की सब्जी का सेवन करना चाहिए। यह कम वसा और कम कोलेस्ट्राल वाली होती है। विटामिन ई और फाइबर की अधिक मात्रा होने से यह दिल की सेहत अच्छी रखती है।

    इन कुछ बातों का ध्यान रखें

    जिन लोगों को गैसबनती हो,घुटनों के दर्दकी शिकायत औरखांसीहो, उनके लिए अरबी का अधिक मात्रा में उपयोग हानिकारक हो सकता है।

    अरबी की सब्जी को हमेशा कम तेल में ही बनाएं। अरबी को आप करी और फ्राई करके भी खा सकते हैं। अरबी को कच्चा नहीं खाना चाहिए।

  • सोने से पहले कमरे में जलाएं सिर्फˈ 1 तेज पत्ता, फिर देखिये कमाल !ˌ

    सोने से पहले कमरे में जलाएं सिर्फˈ 1 तेज पत्ता, फिर देखिये कमाल !ˌ

    आपको किसी तरह का कोई तनाव न हो। आपका मन शांत हो। आप सुकून महसूस करें। लेकिन अमूमन ये हो नहीं पाता। दिनभर चाहे आप दफ्तर में रहें, कॉलेज जाएं या घर के कामों में उलझे रहें… तनाव हो ही जाता है। तनाव यानी स्ट्रेस। ये तनाव आपको रात को सोने नहीं देता। ये आपको मानसिक और शारीरिक तरीके से नुकसान पहुंचाता है। अगर आप छोटी सी कोशिश करें तो तनाव को मिनटों में दूर कर सकते हैं। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं बस एक तेज़ पत्ता चाहिए ।

    सोने से पहले कमरे में जलाएं सिर्फˈ 1 तेज पत्ता, फिर देखिये कमाल !ˌ

    तेज़ पत्ता हर किसी की किचन में बड़े ही आराम से मिल जाता है।

    ये सिर्फ 5 मिनट में आपके तनाव को दूर करने की क्षमता रखता है। एक रशियन साइंटिस्ट ने इस पर स्टडी की और पाया कि यह हमारे तनाव को दूर कर सकता है। यही वजह है कि तेज पत्‍ते को अरोमाथैरेपी के लिये इस्‍तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, तेज़ पत्ता यह त्‍वचा की बीमारियों और सांस से संबन्‍धित समस्‍याओं को भी ठीक करने के लिये जाना जाता है।

    कैसे करें इस्तेमाल :

    एक तेज पत्‍ता लें और उसे किसी कटोरी या एैशट्रे में जला लें। अब इसे कमरे के अंदर लाकर 15 मिनट के लिए रख देंगे। आप पाएंगे कि तेज पत्‍ते की खुशबू पूरे कमरे में भर जाएगी। साथ ही आपको कमरे का माहौल काफी सुकून वाला लगेगा। ये आपको स्पा एक्सपीरियेंस देगा। कुछ देर इस कमरे में रिलेक्स होकर बैठ जाएं, आपको अपने अंदर सुकून बहता हुआ महसूस होगा और आपका तनाव कम होने लगेगा।

    तेज पत्ते को जलाने के फायदे :

    हमारा अच्छा , बुरा व्यवहार हमारे आस पास के वातावरण पर निर्भर करता है, हमारे आस पास की सुगंध–दुर्गन्ध हमारे व्यवहार को प्रभावित करती है | हमारे आस पास की नकारात्मक उर्जा हमारे अच्छे व्यवहार को बुरे व्यवहार की तरफ तब्दील कर देती है

    आज हम आपको बताये गे प्राचीन काल से चला आ रहा नकारात्मक वायु के परभाव को कम करने वाला नुख्सा  तेज पत्ते को जलाने से आपके व्यवहार में हैरानीजनक बदलाव आ जायेगा 

    तेज पत्ते को जलाने से निकलने वाला धुआं आपके आस पास के वातावरण को कुछ इस तरेह से बदल देगा के आपका और आपके आस पास के लोग का व्यवहार खुशमिजाज हो जायेगा  अपने घर में या अपने आप पास की किसी भी जगह पर तेज पत्ते को जलाये और इस का जादू देखें

    तेज पत्ते के जलाने के फायदे बस यही पर ही ख़त्म नहीं होते तेज पत्ता प्राचीन काल से बिमारिओ को ठीक करने के लिए रामबाण माना जाता है आप इसको अपने खाने में पका सकते है तथा पानी में उबाल कर पी सकते है !

    अच्छी नींद के लिए –

    रात को सोने से पहले तेजपत्ते का इस्तेमाल करना अच्छी नींद के लिए बहुत फायदेमंद है. तेजपत्ते के तेल की कुछ बूंदों को पानी में मिलाकर पीने से अच्छी नींद आती है.

    पेट के लिए –

    अगर आपको पाचन से जुड़ी समस्याएं हैं तो आप तेजपत्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं. पेट से जुड़ी कई समस्याओं में ये कारगर उपाय है. चाय में तेजपत्ते का इस्तेमाल करके कब्ज, एसिडिटी और मरोड़ जैसी समस्याओं से राहत पा सकते हैं.

    डायबिटीज रोगियों के लिए –

    तेजपत्ते का इस्तेमाल टाइप 2 डायबिटीज में करना फायदेमंद होता है. ये ब्लड शुगर के लेवल को सामान्य बनाए रखता है और दिल की क्रियाशीलता पर भी सकरात्मक प्रभाव डालता है. ऐसे में जो लोग मधुमेह से पीड़ित हैं उनके लिए इसका सेवन करना बहुत ही फायदेमंद है.

    पथरी में लाभदायक –

    किडनी स्टोन और किडनी से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं के लिए तेजपत्ते का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है. तेजपत्ते को उबालकर उस पानी को ठंडा करके पीने से किडनी स्टोन और किडनी से जुड़ी दूसरी समस्याओं में फायदा मिलता है.

    सर दर्द में –

    दर्द में राहत के लिए भी तेजपत्ता एक कारगर उपाय है. तेजपत्ते के तेल से प्रभावित जगह पर मसाज करना बहुत फायदेमंद होता है. इसके अलावा अगर तेज सिर दर्द हो रहा हो तो भी इसके तेल से मसाज करना अच्छा रहता है.

    मिर्गी के रोगियों के लिए – 

    तेज पत्ता Anti Inflammatory होता है, अगर आप मिर्गी के मरीज हो तो तेज पत्ते का धुआ आपके लिए वरदान है 

    काकरोच को दूर भगाने के लिए – 

    काकरोच को भगाने के लिए बाजार में बहुत सारे प्रोडक्ट्स पाए जाते है जो के बेहद महंगे और हमारे लिए तथा बचों की सेहत के लिए नुकसानदायक होते है
    अगर आप काकरोच से परेशान है तो तेज पत्तो को जला कर अपनी रसोई , गार्डन के कोनो में रखे और यह आपकी सेहत के लिए बिलकुल भी हानिकारक नहीं है!

  • इन बर्तनों में भूलकर भी ना उबालेˈ दूध वरना शरीर में बन जाएगा जहरˌ

    इन बर्तनों में भूलकर भी ना उबालेˈ दूध वरना शरीर में बन जाएगा जहरˌ

    इन बर्तनों में भूलकर भी ना उबालेˈ दूध वरना शरीर में बन जाएगा जहरˌ

    जब भी खाना बनाने की बात आती है तो हर कोई सब्जियों को अच्छे तरीके से साफ करते हैं और बर्तनों की सफाई का भी ध्यान रखते हैं. हमारा पूरा ध्यान इस पर होता है कि हम क्या खा रहे हैं. पर क्या आप जानते हैं कि आप किस धातु के बर्तन में खाना बना रहे हैं, इसका भी आपकी सेहत पर बहुत असर पड़ता है.वहीं दूध हर घर में इस्तेमाल होता है. जिसे की हर घर में उबाला जाता है, लेकिन इसे गलत बर्तन में उबालने से शरीर को काफी नुकसान होते है. आइए आपको बताते हैं कि किस बर्तन में दूध उबालना सही होता है.

    तांबे का बर्तन

    तांबे के बर्तन में पानी रखकर पीने के कई सारे फायदे हैं. लेकिन भूलकर भी तांबे के बर्तन में दूध या दूध से बनी चीजों को नहीं पकाना चाहिए और ना ही रखना चाहिए. तांबे में दूध को गर्म करते ही ये दूध में घुलने लगता है जिससे दूध प्वाइजनस हो जाता है.
    पीतल का बर्तन

    पीतल के बर्तन में अगर इनर लाइनिंग नहीं लगी है और सीधे पीतल का सरफेस है तो भूलकर भी इसमे दूध को पकाना नहीं चाहिए. किसी भी तरह से चाहे दूध की चाय बनानी हो या फिर दूध की खीर पीतल के बर्तन में बनी दूध की चीजें खराब हो जाती हैं.


    एल्यूमिनियम के बर्तन

    आमतौर पर एल्यूमिनियम के बर्तन में दूध को उबालना या पकाना सेफ माना जाता है. लेकिन ऐसा नही है. लांग टाइम में दूध को एल्यूमिनियम के बर्तन में पकाने से दूध में एल्यूमिनियम की मात्रा आ जाती है. जो अल्जाइमर डिसीज जैसे खतरे को बढ़ाती है. वहीं एल्यूमिनियम को साफ करने के लिए खुरचना पड़त है. जिससे इसके तत्व लीच होकर दूध में पहुंच जाते हैं.

    स्टील की क्वालिटी

    जिन स्टील की क्वालिटी फूड ग्रेड सेफ नहीं होती है. उनमे भी दूध को पकाना और उबालना सेफ नहीं होता है. ऐसे बर्तनों में मौजूद मेटल दूध में पहुंचकर इसे जहरीला बना सकते हैं.

    कांच का बर्तन

    कांच के बर्तनों में दूध को पकाना सेफ होता है. क्योंकि ये नॉन रिएक्टिव होते हैं और किसी भी तरीके के मेटल लीच होकर दूध में नहीं पहुंचते. हाई क्वालिटी और फूड ग्रेड वाले स्टेनलेस स्टील में दूध को उबालना और पकाना सेफ होता है.

  • लो जी! मिल गया इस बिमारी काˈ इलाज इस पत्‍ते को रात में अपने पैर पर लगा लें जड़ से खत्‍म हो जाएगी शुगर जैसी गंभीर बीमारीˌ

    लो जी! मिल गया इस बिमारी काˈ इलाज इस पत्‍ते को रात में अपने पैर पर लगा लें जड़ से खत्‍म हो जाएगी शुगर जैसी गंभीर बीमारीˌ

    लो जी! मिल गया इस बिमारी काˈ इलाज इस पत्‍ते को रात में अपने पैर पर लगा लें जड़ से खत्‍म हो जाएगी शुगर जैसी गंभीर बीमारीˌ

    आजकल के भागदौड़ भरी लाइफ में हर व्‍यक्ति किसी न किसी बिमारी से जरूर परेशान रहता है। इन बीमारियों से बचने के लिए हर तरह की दवाइयों का सेवन करते हैं। इन बीमारियों में कुछ ऐसी बीमारियाँ होती हैं।

    जिनका इलाज करने पर वो ठीक हो जाती हैं लेकिन कुछ ऐसी बीमारियाँ होती हैं जिनका इलाज करने के बावजूद उन्हें जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता हैं।

    वहीं अगर बात करें शुगर जैसी बिमारी की तो इस समय इस बिमारी लगभग आधे से ज्‍यादा लोग ग्रसित हैं। ये बीमारी भी कुछ ऐसी है कि कितना भी इसका इलाज कर लें ये जड़ से खत्‍म नहीं होता है। वहीं आपको बता दें कि शुगर से ग्रसित व्यक्ति को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ता हैं खान पान से लेकर अन्‍य कई तरह की समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है।

    बताते चलें कि शुगर में अक्‍सर व्‍यक्ति का शरीर निर्जलित हो जाता है ऐसे में व्‍यक्ति को बहुत प्यास लगती है। इसके अलावा ये भी बता दें कि खून में अतिरिक्त शुगर की उपस्थिति होने की वजह से गुर्दे खून को साफ करने के लिए अधिक काम करने लगते हैं और मूत्र के द्वारा अतिरिक्त शुगर को शरीर से बाहर निकालते हैं। इस कारण बार बार पेशाब भी लगता है और इसके साथ ही अत्यधिक प्यास भी लगता है आपको बता दें कि बार बार पेशाब आना यह मधुमेह होने के प्रमुख लक्षण हैं। दरअसल शुगर के दौरान शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज़ नहीं पहुंचने के कारण शरीर की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह से नही हो पाती है जिसकी वजह से शुगर का रोगी हमेशा थकान महसूस करता है और उसे जल्दी भूख लगने लगती है।

    लेकिन आज हम आपको आज हम आपको एक ऐसे घरेलू नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका इस्तेमाल करके आप शुगर की बीमारी से छुटकारा पा सकते हैं। इतना ही नहीं इसका कोई साइड इफेक्‍ट भी नहीं होगा। जी हां आपको बता दें कि शुगर के बीमारी के ये घरेलू इलाज सबसे बेहतरीन है इसके लिए आपको आंक के पत्‍ते की आवश्‍यकता पड़ेगी।

    अब आइए जानते हैं कि कैसे करें इसका प्रयोग

    सबसे पहले आप एक आक के पत्ता ले लीजिये और अब इसके ऊपर के हल्की लकड़ी को काट लें फिर अब आप आक के चिकने वाले हिस्से को अपने तलवो पर बांध ले। आक का पत्ता आपके तलवो पर टीका रहना चाहिए इसलिए ध्‍यान रहे कि इसे अच्छे से बांध लीजिये।

    इसके बाद आप आक के पत्ते को रात भर बांध इसी प्रकार से अपने तलवे से बंधे रहने दें जैसा कि आप तस्‍वीरों में भी देख सकते होंगे और फिर सुबह इस पत्‍ते को खोल दीजिये। इस प्रक्रिया को लगातार 20 दिनों तक करे। ऐसा करने से आपकी शुगर की समस्या जल्द ही खत्म हो जाएगी।

    इसके अलावा ये भी बता दें कि जिन व्यक्तियों को हाइ ब्लड शुगर हो उन्हें, ये सब खाद्य पदार्थ और अन्य कोई भी खाद्य पदार्थ, जिनमें फाइबर अधिक और फैट कम हो, लेने चाहिये। हर उस व्यक्ति, जिसे हाइ ब्लड शुगर हो, के लिये खड़ा अनाज उचित नहीं हो सकता।

  • अगर कान पर दिख रहे हैं अचानकˈ मोटे बाल, तो तुरंत हो जाएँ सावधान यह रहस्यमयी लक्षण दे सकता है खतरनाक बीमारी की चेतावनीˌ

    अगर कान पर दिख रहे हैं अचानकˈ मोटे बाल, तो तुरंत हो जाएँ सावधान यह रहस्यमयी लक्षण दे सकता है खतरनाक बीमारी की चेतावनीˌ

    अगर कान पर दिख रहे हैं अचानकˈ मोटे बाल, तो तुरंत हो जाएँ सावधान यह रहस्यमयी लक्षण दे सकता है खतरनाक बीमारी की चेतावनीˌ

    कानों पर बाल होना आम बात नहीं है. ये देखने में तो खराब लगते ही हैं साथ ही यह आपको एक गंभीर बीमारी की सूचना भी देते हैं. हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार जिन लोगों के कान पर बाल दिखाई देने लगे हैं उन्हें सावधान होने की जरूरत है क्योंकि कान पर बाल आना जानलेवा बीमारी का दस्तक हो सकता है.

    हम में से कुछ लोगों के कान पर बाल होते हैं. अगर ज्योतिषों की माने तो जिनके कान पर बाल होते हैं ऐसे व्यक्ति चतुर, दंभी, स्वार्थी और व्यवहारकुशल होते हैं. ज्योतिष से परे विज्ञान इस बात को स्वास्थ्य से जोड़कर देखता है. रिसर्च के अनुसार जिन लोगों के कान पर बाल होते हैं, वह हृदय रोग से पीड़ित होते हैं. खासतौर पर ऐसे लोगों को कभी भी हार्ट अटैक आ सकता है.

    अक्सर आपने देखा होगा कि फलां इंसान को अचानक से हार्ट अटैक आ गया है और जबकि वह दिखने में एकदम स्वस्थ थे. कई बार हम अपने शरीर में दिखने वाले बीमारी के लक्षणों को पहचान ही नहीं पाते. दिल की बीमारी के ऐसे ही कुछ लक्षण हम नजरंदाज कर देते हैं.

    कान पर बाल आने की समस्या आज के समय में जैनेटिक से ज्यादा भागदौड़ भरे जीवन के कारण होती है लेकिन सबसे ज्यादा ये समस्या सिगरेट पीने वाले लोगों के साथ देखी जा रही है. रिसर्च के अनुसार आपके कान और हार्ट अटैक में गहरा कनेक्शन होता है. अगर आपके कान पर भी बाल आते हैं तो इसे साधारण बात समझ कर नजरअंदाज न करें. 

    आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोगों के कान पर बाल होते हैं जो देखने में अजीब से लगते हैं. कई बार तो कान के बाल देख कर बच्‍चे भी मजाक तक उड़ाने लगते हैं. वहीं दूसरी ओर अगर हम ज्योतिषों की माने जिनके कान पर बाल होते हैं वे ऐसे व्यक्ति चतुर, दंभी, स्वार्थी तथा व्यवहारकुशल होते हैं. धन संचय करने में सत्य-असत्य की परवाह नहीं करते. लेकिन एक शोध के अनुसार अगर आपके कान पर बाल दिखाई देते हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकि आप एक जानलेवा बीमारी का शिकार हो सकते हैं. एक रिसर्च के अनुसार….
     

    कान पर जिन लोगों के बाल होते हैं, वह हृदय रोग से पीड़ित होते हैं. खासतौर पर ऐसे लोगों को कभी भी हार्ट अटैक आ सकता है.

    कान पर बाल आने की समस्या आज के समय में जैनेटिक से ज्यादा भागदौड़ भरे जीवन के कारण होती है. लेकिन सबसे ज्यादा ये समस्या सिगरेट पीने वाले लोगों के साथ देखी जा रही है.

    रिसर्च के अनुसार आपके कान और हार्ट अटैक में गहरा कनेक्शन होता है. 1973, Dr. Sanders T. Frank और उनकी टीम ने या पाया कि ऐसे लोगों में हार्ट अटैक का समस्या ज्यादा पाई गई जिनके कान पर अधिक बाल थे. अगर आपके कान पर भी बाल आते हैं तो इसे साधारण बात समझ कर इग्नोर न करें.