Category: Health

  • खून और जोड़ों में जमा सारा यूरिकˈ एसिड बाहर निकल देगी 5 रुपये की ये चीज गठिया से भी मिल जाएगा छुटकाराˌ

    खून और जोड़ों में जमा सारा यूरिकˈ एसिड बाहर निकल देगी 5 रुपये की ये चीज गठिया से भी मिल जाएगा छुटकाराˌ

    खून और जोड़ों में जमा सारा यूरिकˈ एसिड बाहर निकल देगी 5 रुपये की ये चीज गठिया से भी मिल जाएगा छुटकाराˌ

    बढ़ती उम्र के साथ शरीर कई बीमारियों की चपेट में आने लगता है। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ-साथ जोड़ों में दर्द, चलने-फिरने में तकलीफ और उंगलियों में अकड़न जैसी समस्याएं भी बहुत आम हो गई हैं।

    शरीर में जब जोड़ों में दर्द या फिर इस तरह की समस्याएं आने लगे तो समझ जाएं कि शरीर में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ गया है। दरअसल, यूरिक एसिड शरीर में प्यूरीन नामक तत्व के टूटने से बनता है, जो आमतौर पर पेशाब के जरिए बाहर निकल जाता है। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद, रेजिडेंट डॉक्टर, डॉ. मनीष जैन ने बताया कि यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए क्या करना चाहिए और इसे कैसे दूर किया जा सकता है।

    डॉ. मनीष जैन के मुताबिक, हम जो खाना खाते हैं, उसमें प्यूरीन नामक तत्व भी होता है, जो आमतौर पर पेशाब के जरिए बाहर निकल जाता है, लेकिन शरीर में यूरिक एसिड का लेवल हाई हो जाता है तो ये जोड़ों में दर्द के साथ-साथ कई समस्याओं का कारण बन सकता है। ऐसे में शरीर में यूरिक एसिड को कंट्रोल करना बहुत ही आवश्यक है। डॉ. मनीष जैन ने बताया कि यूरिक एसिड को जब शरीर सही से बाहर नहीं निकाल पाता, तो यह खून और जोड़ों में जमने लगता है और गठिया, गाउट, सूजन और दर्द जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। ऐसे में कुछ असरदार और घरेलू उपाय अपनाकर भी यूरिक एसिड को नेचुरली बाहर निकाला जा सकता है।

    दलिया और अदरक का उपाय

    दलिया और अदरक का उपाय यूरिक एसिड के लिए बहुत लाभकारी साबित हो सकता है। ओट्स में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो जोड़ों में सूजन और दर्द को कम करते हैं। इसके अलावा अदरक शरीर से विषाक्त पदार्थों यानी टॉक्सिन को बाहर निकालने में भी मदद करती है। दोनों में ही एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो यूरिक एसिड के उत्पादन को सीमित करते हैं। इन दोनों का मिश्रण शरीर के पाचन को बेहतर बनाता है और शरीर को साफ रखता है।

    जोड़ों का दर्द कम होगा

    यूरिक एसिड बढ़ने पर जोड़ों में क्रिस्टल जम जाते हैं, जिससे दर्द और अकड़न होने लगती है। ओटमील और अदरक में प्राकृतिक दर्द निवारक गुण होते हैं। इनके सेवन से जोड़ों में सूजन कम होती है और चलने-फिरने में आसानी होती है। यह उपाय खासकर घुटने या कमर दर्द के लिए फायदेमंद है।

    लिवर और किडनी के लिए फायदेमंद

    यूरिक एसिड मूत्र के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है, लेकिन अगर किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है, तो यह एसिड जमा होता रहता है। अदरक और ओट्स दोनों ही लिवर और किडनी के कामकाज को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इससे शरीर से विषाक्त पदार्थों यानी टॉक्सिन्स को निकालने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हो जाती है।

    पाचन तंत्र अच्छा होगा

    यूरिक एसिड का बढ़ना और जोड़ों में दर्द होना भी खराब पाचन क्रिया के कारण होता है। हल्दी और अदरक दोनों ही पाचन तंत्र के लिए रामबाण माने जाते हैं। ये खाने को आसानी से पचाने, गैस, अपच और एसिडिटी को कम करने में मदद करते हैं।

  • खून गाढ़ा होने पर स्ट्रोक और हार्टˈ अटैक का बढ़ सकता है खतरा, ब्लड थिनर दवाओं के बिना करें Blood को पतला, देखिए कैसेˌ

    खून गाढ़ा होने पर स्ट्रोक और हार्टˈ अटैक का बढ़ सकता है खतरा, ब्लड थिनर दवाओं के बिना करें Blood को पतला, देखिए कैसेˌ

    खून गाढ़ा होने पर स्ट्रोक और हार्टˈ अटैक का बढ़ सकता है खतरा, ब्लड थिनर दवाओं के बिना करें Blood को पतला, देखिए कैसेˌ

    आजकल बहुत से लोगों में खून के गाढ़ेपन (Blood Clotting) की समस्या आम हो गई है। यह परेशानी गलत खानपान और बिगड़ते लाइफस्टाइल की वजह से बढ़ती है। खून का गाढ़ा होना एक ऐसी परेशानी है जिसकी वजह से दिल के रोग, हाई कोलेस्ट्रॉल और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खून का गाढ़ापन (Thick Blood) का मतलब यह नहीं है कि खून सचमुच गाढ़ा या चिपचिपा हो गया है। मेडिकल साइंस में इसे हाइपरकोएगुलेबिलिटी (Hypercoagulability) कहा जाता है। इसका मतलब है कि खून जल्दी जमने लगता है या उसमें क्लॉट बनने की संभावना ज़्यादा होती है।

    खून गाढ़ा होने के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं जैसे शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs), प्लेटलेट्स या प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाना, डिहाइड्रेशन,कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना, धूम्रपान, शराब और खराब लाइफस्टाइल। कुछ मेडिकल कंडीशन्स जैसे पॉलीसाइथीमिया वेरा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर भी खून जमने का कारण बनता है। ब्लड क्लॉट बनने की वजह से  दिल, फेफड़े या दिमाग में जाकर स्ट्रोक या हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

    इस स्थिति में ब्लड सर्कुलेशन स्लो हो जाता है और शरीर के अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंचता है। ब्लड को पतला करने के लिए दवाओं का सेवन किया जाता है, लेकिन कुछ फूड्स भी मौजूद हैं जो खून को पतला कर सकते हैं। दवाइयों के साथ-साथ कुछ घरेलू उपाय और खानपान में बदलाव करके आप इस समस्या से राहत पा सकते हैं।

    खून पतला करने के लिए लाइफस्टाइल में करें बदलाव

    Medical News Today के मुताबिक जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल की परेशानी होती है उन्हें डॉक्टर खून को पतला करने की दवाई देते हैं ताकि बीपी नॉर्मल रहे और दिल के रोगों का खतरा भी कम हो। बीमारियों से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे सुधार करें। नियमित व्यायाम, सही खानपान और पर्याप्त नींद से आप स्वस्थ रह सकते हैं और खून गाढ़ा होने की समस्या से बच सकते हैं।

    फाइबर युक्त डाइट का करें सेवन

    खून को शुद्ध और पतला रखने के लिए फाइबर से भरपूर फूड का सेवन जरूरी है। फाइबर पाचन तंत्र को सही रखता है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। इसके लिए ब्राउन राइस, गाजर, ब्रोकली, मूली और शलजम का सेवन करना बहुत फायदेमंद है।

    पसीना आना जरूरी है

    शरीर से पसीना निकलना खून को साफ रखने और गाढ़ा होने से बचाने के लिए बेहद जरूरी है। इसके लिए नियमित एक्सरसाइज, हार्ड वर्क और योग करना चाहिए।

    गहरी सांस लेना

    सुबह ताजी हवा में लंबी और गहरी सांस लेने से फेफड़ों को ऑक्सीजन अच्छी मात्रा में मिलती है। इससे खून का संचार बेहतर होता है और ब्लड क्लॉटिंग की समस्या कम होती है।

    डेड स्किन हटाना

    स्किन पर जमा डेड स्किन छिद्रों को बंद कर देती है, जिससे रक्त संचार प्रभावित होता है। इसके लिए महीने में एक बार स्क्रब, मैनीक्योर-पेडिक्योर या स्टीम लेना फायदेमंद है। इससे शरीर में खून का दौरा सामान्य हो जाता है।

    हल्दी का सेवन

    हल्दी एक औषधीय गुणों से भरपूर मसाला है। इसे दूध या पानी में घोलकर पीने से खून शुद्ध होता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।

    लहसुन का करें सेवन

    लहसुन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में जमा फ्री रेडिकल्स को खत्म करते हैं। यह खून को पतला करने और ब्लड फ्लो को बेहतर बनाने में मदद करता है।

  • खाने के बाद कितना होना चाहिए आपकाˈ ब्लड शुगर? जानिए डायबिटीज की सही पहचान और बचाव के तरीकेˌ

    खाने के बाद कितना होना चाहिए आपकाˈ ब्लड शुगर? जानिए डायबिटीज की सही पहचान और बचाव के तरीकेˌ

    खाने के बाद कितना होना चाहिए आपकाˈ ब्लड शुगर? जानिए डायबिटीज की सही पहचान और बचाव के तरीकेˌ

    डायबिटीज आज की सबसे तेज़ी से फैलने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन गई है। यह सिर्फ बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं, बल्कि युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। हमारा बदलता खान-पान और लाइफस्टाइल ही इस बीमारी का एक बड़ा कारण है।

    लेकिन घबराइए नहीं! सही समय पर डायबिटीज की पहचान और इसे कंट्रोल करके आप कई बड़े खतरों को टाल सकते हैं। डायबिटीज में अपने ब्लड शुगर लेवल पर नज़र रखना बेहद ज़रूरी है, खासकर खाना खाने के बाद। अक्सर लोग डाइट का ध्यान तो रखते हैं, पर उन्हें यह नहीं पता होता कि खाने के बाद नॉर्मल ब्लड शुगर लेवल कितना होना चाहिए और कब इसे डायबिटीज माना जाता है। आइए, जानते हैं पूरी जानकारी!

    क्या है नॉर्मल ब्लड शुगर लेवल?

    ब्लड शुगर लेवल खून में ग्लूकोज की मात्रा को दर्शाता है, जो हमारे शरीर की ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। यह दिनभर बदलता रहता है, लेकिन एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए सामान्य रेंज इस प्रकार है:

    • खाली पेट (Fasting): 70-100 mg/dL
    • खाने के बाद (Postprandial): 140 mg/dL से कम

    खाना खाने के बाद ब्लड शुगर क्यों बढ़ता है?

    जब हम खाना खाते हैं, तो शरीर भोजन को पचाकर उसे ग्लूकोज में बदलता है। यह ग्लूकोज खून में मिलकर शरीर के अंगों को ऊर्जा देता है। हालांकि, अगर आपका शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। इस स्थिति को हाइपरग्लाइसीमिया (Hyperglycemia) कहते हैं।

    डायबिटीज की पहचान कैसे करें?

    डायबिटीज का पता लगाने के लिए डॉक्टर कुछ ब्लड शुगर टेस्ट की सलाह देते हैं। इनकी सामान्य रेंज इस प्रकार है:

    • खाली पेट ब्लड शुगर टेस्ट:
      • अगर 126 mg/dL या उससे ज़्यादा हो, तो यह डायबिटीज का संकेत है।
    • खाने के बाद ब्लड शुगर टेस्ट:
      • खाना खाने के 2 घंटे बाद ब्लड शुगर 200 mg/dL या उससे ज़्यादा हो, तो इसे डायबिटीज माना जाता है।
    • HbA1c टेस्ट:
      • यह टेस्ट पिछले 3 महीनों के औसत ब्लड शुगर लेवल को बताता है। अगर यह 6.5 प्रतिशत या उससे ज़्यादा हो, तो डायबिटीज का संकेत है।

    क्या है प्रीडायबिटीज? इसे पहचानना क्यों ज़रूरी है?

    प्रीडायबिटीज डायबिटीज से पहले की स्थिति है। इसमें आपका ब्लड शुगर लेवल सामान्य से ज़्यादा होता है, लेकिन इतना ज़्यादा नहीं कि उसे सीधे डायबिटीज कहा जाए।

    • खाली पेट ब्लड शुगर: 100-125 mg/dL
    • खाने के बाद ब्लड शुगर: 140-199 mg/dL

    प्रीडायबिटीज की स्थिति में समय रहते लाइफस्टाइल में सुधार और डाइट पर ध्यान देकर डायबिटीज से बचा जा सकता है! यह एक चेतावनी है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

    खाने के बाद ब्लड शुगर को कंट्रोल में कैसे रखें?

    अपने ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखना बहुत ज़रूरी है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें:

    • संतुलित आहार: अपनी डाइट में फाइबर युक्त भोजन जैसे सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल करें। हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड्स से बचें।
    • नियमित व्यायाम: रोज़ाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी ज़रूर करें।
    • स्ट्रेस मैनेजमेंट: तनाव को कम करने के लिए योग और मेडिटेशन का सहारा लें।
    • ब्लड शुगर मॉनिटरिंग: अपने ब्लड शुगर लेवल की नियमित रूप से जांच करते रहें।

    खाना खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल हमारे स्वास्थ्य का एक बड़ा संकेत है। इसे नियमित रूप से मॉनिटर करने से डायबिटीज और उससे जुड़ी गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। अगर आपका ब्लड शुगर लेवल सामान्य से ज़्यादा है, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें और अपनी लाइफस्टाइल में ज़रूरी सुधार करें।

    डिस्क्लेमर: प्रिय पाठक, यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है। हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है। अपनी सेहत से जुड़ा कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।

  • अंडरआर्म्स और जांघों के कालेपन से मिलˈ जाएगी निजात, बस करना होगा ये कामˌ

    अंडरआर्म्स और जांघों के कालेपन से मिलˈ जाएगी निजात, बस करना होगा ये कामˌ

    अंडरआर्म्स और जांघों के कालेपन से मिलˈ जाएगी निजात, बस करना होगा ये कामˌ

    अंडरआर्म्स और जांघों में कालेपन की समस्या किसी को भी हो सकती है। इनमें कालापन आने से खूबसूरती पर असर पड़ता है। अंडरआर्म्स और जांघ कई कारणों से अपने आप ही काली होने लग जाती हैं। कई बार पसीने से यूरिक एसिड अधिक निकलने लग जाता है। जिसके कारण इनमें कालापन आ जाता है। जो महिलाएं डियो का ज्यादा इस्तेमाल करती हैं और हेयर रिमूवल क्रीम खूब लगाया करती हैं। उनके अंडरआर्म्स और जांघ भी धीरे-धीरे काली होने लग जाते हैं।

    अंडरआर्म्स और जांघों में कालापन होने दुखी न हों। बस नीचे बताए गए उपायों को आजमा लें। इन उपायों को आजमाने से कालापन एकदम दूर हो जाएंगा और त्वचा निखर जाएगी।

    अंडरआर्म्स और जांघों का गोरा करने के उपाय –

    एलोवेरा जेल

    1 चम्मच एलोवेरा जेल के अंदर  1 चम्मच टूथपेस्ट, 1 चम्मच सूजी और थोड़ा सा बेसन डाल दें। इन्हें अच्छे से मिक्स कर लें। इसे 15-20 मिनट के लिए लगा लें। जब सूख जाए तो पानी की मदद से त्वचा को साफ कर लें। ये पैक लगाने से कालापन दूर हो जाएगा और त्वचा पर निखार आ जाएगा।

    बेसन और दही

    एक चम्मच बेसन के अंदर दही मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लें। इस पेस्ट को कालेपन वाली जगह पर लगा दें और सूखने के लिए छोड़ दें। जब ये सूख जाए इसे पानी से साफ कर दें। एक दिन छोड़कर ये पेस्ट लगाएं। दो हफ्ते में ही कालापन दूर हो जाएगा और त्वचा पर निखर आ जाएगा।

    नींबू का रस

    नींबू का रस लगाने से महज एक हफ्ते के अंदर ही त्वचा का कालापन दूर हो जाता है। रोज नहाने से पहले अंडरआर्म्स और जांघों पर नींबू का रस लगा लें। इसे अच्छे से सूखने दें। फिर साफ कर लें। नींबू का रस लगाने से कालापन धीरे-धीरे कम होने लग जाएगा और त्वचा गोरी हो। आप चाहे तो चेहरे पर भी नींबू का रस लगा सकते हैं। कालापन दूर करने का ये सबसे कारगर उपाय है। नींबू के रस की तरह ही आप चाहें तो दही को भी त्वचा पर लगा सकते हैं। दही लगाने से भी कालापन धीरे-धीरे कम हो जाता है।

    हल्दी और एलोवेरा जेल

    एलोवेरा जेल के अंदर एक चम्मच हल्दी और शहद मिलाकर एक पेस्ट बना लें। फिर इसे अंडरआर्म्स और जांघों पर लगा लें और अच्छे से सूखने दें। जब सूख जाए तो पानी की मदद से साफ कर लें। ये पेस्ट लगाने से कालापन दूर हो जाएगा और त्वचा गोरी हो जाएगी।

    चावल और शहद

    चावल लेकर उन्हें थोड़ा पीस लें। याद रहे की चावलों को एकदम से पतला न करें। अब चावल के अंदर शहद मिला दें। फिर इसे अंडरआर्म्स और जांघों पर लगाएं और स्क्रब करें। हफ्ते में तीन बार ऐसे करने से अंडरआर्म्स और जांघों पर जमा कालापन दूर हो जाएगा।

    टमाटर और शहद

    टमाटर का रस निकाल लें और उसके अंदर शहद मिला दें। इस पेस्ट को अंडरआर्म्स और जांघों पर लगाएं और कम से कम 20 मिनट तक लगा रहने दें। ये पेस्ट लगाने से अंडरआर्म्स और जांघों पर चढ़ा हुआ कालापन धीरे-धीरे कम होने लग जाएगा।

  • सास-दादी-नानी डिलीवरी के बाद महिलाओं को गोंदˈ के लड्डू क्यों खिलाती है? वजह चौका देगीˌ

    सास-दादी-नानी डिलीवरी के बाद महिलाओं को गोंदˈ के लड्डू क्यों खिलाती है? वजह चौका देगीˌ

    मां बनने का एहसास किसी भी महिला के लिए बहुत खास होता है। जब वह मां बनती है तो उसे बहुत सी हेल्थी चीजें खिलाई जाती है। इससे उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त पोषण मिलता रहता है। लेकिन सिर्फ गर्भावस्था में ही नहीं बल्कि डिलीवरी के बाद भी महिला को पोषक तत्वों की सख्त जरूरत होती है। बच्चे को जन्म देने के बाद महिला का शरीर बहुत कमजोर पड़ जाता है। उसके शरीर में ज्यादा ताकत नहीं बचती है। ऐसे में उसे पूरी तरह से रिकवर होने में अच्छे खान पान की जरूरत पढ़ती है।

    सास-दादी-नानी डिलीवरी के बाद महिलाओं को गोंदˈ के लड्डू क्यों खिलाती है? वजह चौका देगीˌ

    डिलीवरी के बाद 6 महीने तक मां को नवजात को अपना दूध भी पिलाना पढ़ता है। यह भी एक वजह है कि उसे पोस्ट डिलीवरी हेल्थी खुराक लेनी चाहिए। ऐसे में कई सास, दादी, नानी बच्चे के पैदा होने के बाद उसकी मां को गोंद के लड्डू बनाकर देती है। आप में से कई लोगों ने भी गोंद के लड्डू खाए होंगे या दूसरी महिलाओं को खाते देखा होगा। ऐसे में क्या आप ने कभी सोचा है कि डिलीवरी के बाद महिला को गोंद के लड्डू क्यों खिलाए जाते हैं? आज हम इसी रहस्य से पर्दा उठाने जा रहे हैं।

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद की भी कई प्रकार की वेराइटी होती है। यदि आप महिला को गोंद खिला रहे हैं तो कीकर और बबूल की गोंद सबसे अधिक फायदेमंद होती है। ये गोंद आपको बाजार में आसानी से मिल जाती है। यदि न भी मिल पाए तो आप इन्हें ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं। लड्डू के अलावा इस गोंद को रोज एक गिलास दूध में मिलकर इसका सेवन किया जा सकता है।

    हालांकि गोंद के लड्डू की बात ही कुछ और होती है। इसे बनाने के लिए गोंद के अलावा देसी घी, काजू बादाम जैसे मेवे और अन्य पौष्टिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। इन गोंद के लड्डुओं में बहुत ज्यादा कैलोरी होती है। वहीं ये कई पोषक तत्वों से भी भरा होता है। ये सभी चीजें सेहत के लिहाज से बहुत लाभकारी होती है। खासकर डिलीवरी के बाद महिलाओं को इसे जरूर खिलाना चाहिए। इससे उन्हें कई अच्छे लाभ होते हैं।

    डिलीवरी के बाद गोंद के लड्डू खाने के फायदे

    1. हड्डीयां मजबूत करें: जब कोई महिला बच्चा पैदा करती है तो पोस्ट डिलीवरी उसकी रीढ़ की हड्डी बहुत कमजोर हो जाती है। गोंद के लड्डू खाने से इन हड्डियों को मजबूत होने में मदद मिलती है। इसलिए महिला अपनी हड्डियों में कमजोरी महसूस करे तो उसे रोज गोंद के लड्डू अवश्य खुलाएं। इससे उसकी कमजोर हड्डी की शिकायत दूर हो जाएगी।

    2. इम्यूनिटी बूस्टर: डिलीवरी के बाद महिलाओं का इम्यून सिस्टम भी कमजोर पड़ जाता है। फिर इस कोरोना काल में हम इम्यून सिस्टम के कमजोर होने का रिस्क नहीं उठा सकते हैं। इसलिए गोंद के लड्डू खिलकार महिला का इम्यून सिस्टम बूस्ट किया जा सकता है। इतना ही नहीं ये महिलाओं को सर्दी जुकाम जैसी बीमारियों से भी दूर रखता है।

    3. स्किन में निखार: डिलीवरी के बाद महिला की स्किन भी प्रभावित होती है। ऐसे में उसे गोंद का लड्डू खिलाया जाए तो उसकी त्वचा में निखार आता है। इससे उसकी स्किन में नमी बनी रहती है, साथ ही फेस भी ग्लो करने लगता है।

  • मासिक धर्म के दौरान महिलाएं जरूर करेंˈ धनिये की चाय का सेवन, दर्द से मिल जाएगी निजातˌ

    मासिक धर्म के दौरान महिलाएं जरूर करेंˈ धनिये की चाय का सेवन, दर्द से मिल जाएगी निजातˌ

    मासिक धर्म के दौरान महिलाएं जरूर करेंˈ धनिये की चाय का सेवन, दर्द से मिल जाएगी निजातˌ

    धनिये की चाय सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है और इस चाय के अंदर कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो कि शरीर के लिए उत्तम होते हैं। इसलिए आप अपनी डाइट में धनिये की चाय जरूर शामिल करें और रोज एक कप ये चाय पीया करें। धनिये की चाय बनाना बेहद ही सरल है और ये महज 5 मिनट में बनकर तैयार हो जाती है। धनिये की चाय कैसे बनाए ये जानने से पहले आइए नजर डाल लेते हैं कि इस चाय को पीने से शरीर को कौन-कौन से लाभ मिलते हैं।

    धनिये की चाय के फायदे –
    इम्यून सिस्टम हो मजबूत
    धनिये की चाय पीने से इम्यून सिस्टम पर अच्छा असर पड़ता है और ये मजबूत हो जाता है। इसलिए जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर है, वो लोग इस चाय को जरूर पीएं। ये चाय पीने से शरीर अंदर से मजबूत बन जाएगा और रोगों से रक्षा होगी।

    बाल झड़ना हो बंद
    जिन लोगों के बाल अधिक झड़ रहे हैं, वो धनिये की चाय जरूर पीया करें। इस चाय को पीने से बालों को मजबूत मिलती है और ये गिरना बंद हो जाते हैं। इतना ही नहीं बाल लंबे भी हो जाते हैं। इसलिए लंबे पाने के लिए भी इस चाय का सेवन किया जा सकता है।

    हार्मोनल संतुलित रहे
    धनिये की चाय पीने से असंतुलन हार्मोनल बैलेंस हो जाती है। दरअसल महिलाओं के हार्मोनल कई बार असंतुलन हो जाते हैं। जिसके कारण उनकी सेहत पर असर पड़ता है और वजन बढ़ने लग जाता है। हालांकि अगर धनिये की चाय पी जाए तो हार्मोनल बैलेंस रहते हैं।

    दर्द करे दूर
    शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द होने पर ये चाय पी लें। इस चाय को पीने से फौरन आराम मिल जाएगा और दर्द भाग जाएगी। इसके अलावा ये चाय पीने से शरीर में ऊर्जा भी आ जाती है। इसलिए कमजोरी या थकान होने पर भी आप ये चाय पी सकते हैं।

    मासिक धर्म में न हो दर्द
    जिन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पेट में अधिक दर्द होती है। वो धनिये की चाय पीकर देखें। ये चाय पीने से ये दर्द सही हो जाती है और शरीर को आराम भी मिलता है।

    कैसे बनाएं धनिये की चाय
    जैसे ही हमने आपको लेख की शुरूआत में ही बताया था की ये चाय बनाना बेहद ही सरल है। इस चाय को बनाने के लिए आपक दालचीनी, इलायची, अदरक, सौंफ, हरी चाय की पत्तियां, तुलसी के पत्ते, पुदीना और धनिये के बीज की जरूरत पड़ेगी। सबसे पहले आप एक बर्तन में पानी लें और इस गर्म करने के लिए गैस पर रख दें। जब ये पानी गर्म हो जाए तो इसके अंदर दालचीनी, इलायची, अदरक, सौंफ, हरी चाय की पत्तियां, तुलसी के पत्ते, पुदीना और धनिया के बीच डालें दें। इस पानी को 3 मिनट का उबालें। जब इसका रंग हरा हो जाए तो गैस को बंद कर दें और इसे छान लें। अब इसमें नींबू के रस की कुछ बूंदे डालें। धनिये की चाय तैयार।

    इस चाय को रोज सुबह उठकर पी सकते हैं। इसके अलावा आप चाय तो दिन में भी इस चाय का सेवन कर सकते हैं। हालांकि रात के समय ये चाय पीने से बचें। वहीं ये चाय पीने के बाद इसके ऊपर से तुरंत ठंडा पानी भी न पीएं।

  • शरीर में जाते ही तूफान मचा सकतेˈ हैं कटहल के बीज, करते हैं ये बड़ा नुकसानˌ

    शरीर में जाते ही तूफान मचा सकतेˈ हैं कटहल के बीज, करते हैं ये बड़ा नुकसानˌ

    कटहल की सब्जी कई लोगों को खाना पसंद होता है। सिर्फ सब्जी ही नहीं कई लोग तो कटहल का अचार, पकौड़े जैसे व्यंजन भी बड़े चाव के साथ खाते हैं। कटहल में अन्य सब्जियों की तुलना में प्रोटीन की मात्रा भी अधिक पाई जाती है। प्रोटीन के अलावा इसमें विटामिन ए, सी, थाइमिन, पोटैशियम, कैल्‍शियम, राइबोफ्लेविन, आयरन, नियासिन और जिंक जैसे पौष्टिक तत्‍व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए कटहल एक तरह से शरीर को बहुत फायदा पहुंचता है।

    शरीर में जाते ही तूफान मचा सकतेˈ हैं कटहल के बीज, करते हैं ये बड़ा नुकसानˌ

    कटहल में बहुत से बीज भी होते हैं। कई लोग कटहल के बीजों को उबालकर उसकी सब्जी बना खा जाते हैं। वहीं कुछ सामान्य कटहल की सब्जी में भी बीज रहने देते हैं और इसे शौक से खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये कटहल के बीज आपके शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। ऐसे में आज हम आपको कटहल के बीज खाने के नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं।

    1. पतला खूनः कटहल के बीज खाने से आपका खून पतला हो सकता है। यदि आप इसे ज्यादा खाते हैं तो ये पतला खून चोट लगने पर आपको दिक्कत दे सकता है। इससे रक्त का थक्का देर से बनेगा और आपका खून बहता ही जाएगा। वहीं जो लोग पहले से खून पतला करने की गोली खाते हैं उन्हें भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही कटहल के बीजों का सेवन करना चाहिए।

    2. स्किन एलर्जीः जिन लोगों की स्किन सेंसीटिव होती है उन्हें कटहल के बीज कहकर स्किन एलर्जी भी हो सकती है। कटहल के बीज आपकी त्वचा पर रैशेज बना सकते हैं। इसलिए इन्हें सोच समझकर ही खाएं।

    3. शुगर लेवल: कटहल के बीज खाने से शरीर का शुगर लेवल कम हो जाता है। ऐसे में जो लोग डायबिटीज के मरीज हैं और पहले से ही शुगर लेवल कम करने की दवाइयां खा रहे हैं वे कटहल के बीज डॉक्टर की सलाह के बाद ही खाएं।

    4. ब्लड प्रेशरः कटहल के बीज बलाड प्रेशर को कम करने का काम भी करते हैं। ऐसे में लो बीपी के मरीज इसे न खाएं। वहीं हाई बीपी वाले मरीज यदि गोलियों का सेवन कर रहे हैं तो इसे डॉक्टर की सलाह के बाद ही खाएं।

    5. पेटः कटहल के बीज कमजोर पाचन शक्ति वाले लोगों को नहीं खाना चाहिए। इन बीजों में कुछ ऐसे तत्व भी होते हैं जो आपको उलटी, पेट दर्द की समस्या पैदा कर सकते हैं। इसलिए इन बीजों का ज्यादा मात्रा में सेवन करने से हर हाल में बचना चाहिए।

  • अब बालों को बार-बार डाई करने कीˈ जरूरत नहीं ये देसी नुस्खा करेगा परमानेंट कामˌ

    अब बालों को बार-बार डाई करने कीˈ जरूरत नहीं ये देसी नुस्खा करेगा परमानेंट कामˌ

    अब बालों को बार-बार डाई करने कीˈ जरूरत नहीं ये देसी नुस्खा करेगा परमानेंट कामˌ

    Homemade Oil For White Hair: सफेद बाल होना आजकल एक आम समस्या बन चुकी है चाहे व्यक्ति युवा हो या वृद्ध। बालों को डाई करना न केवल समय और पैसा खर्च करता है बल्कि इसमें उपयोग होने वाले रसायन बालों और स्कैल्प को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

    अगर आप सफेद बालों की समस्या से परेशान हैं और इसका स्थायी और प्राकृतिक समाधान चाहते हैं तो सरसों के तेल और एक विशेष पाउडर का यह नुस्खा आपके लिए है।

    सफेद बालों का कारण

    बाल सफेद होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे:

    1. आनुवंशिक कारण – परिवार में किसी को यह समस्या होने पर संभावना रहती है कि आपको भी हो सकती है।
    2. खराब जीवनशैली – तनाव खराब आहार और नींद की कमी बालों को जल्दी सफेद कर सकती है।
    3. पोषक तत्वों की कमी – विटामिन बी12 आयरन और अन्य पोषक तत्वों की कमी।
    4. रसायनों का अत्यधिक उपयोग – शैंपू डाई और अन्य हेयर प्रोडक्ट्स में मौजूद रसायन।

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    चमत्कारी नुस्खा: सरसों का तेल और पाउडर

    इस घरेलू नुस्खे में हम सरसों के तेल के साथ एक विशेष पाउडर का उपयोग करेंगे जो बालों को प्राकृतिक रूप से काला और मजबूत बनाएगा। यह नुस्खा न केवल सफेद बालों को काला करता है बल्कि नए बालों को सफेद होने से भी रोकता है।

    आवश्यक सामग्री

    1. सरसों का तेल – 100 मिलीलीटर (शुद्ध और ठंडा-प्रेस्ड)।
    2. आंवला पाउडर – 2 चम्मच।
    3. मेहंदी पाउडर – 1 चम्मच।
    4. भृंगराज पाउडर – 1 चम्मच।
    5. काली मिर्च पाउडर – आधा चम्मच।

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    बनाने की विधि

    1. एक पैन में 100 मिलीलीटर सरसों का तेल लें और धीमी आंच पर गर्म करें।
    2. जब तेल हल्का गर्म हो जाए तो उसमें आंवला पाउडर मेहंदी पाउडर और भृंगराज पाउडर डालें।
    3. सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं और इसे धीमी आंच पर 5-7 मिनट तक पकाएं।
    4. जब मिश्रण ठंडा हो जाए तो उसमें काली मिर्च पाउडर डालें और इसे छान लें।
    5. इस तेल को एक कांच की बोतल में भरकर रख लें।

    उपयोग करने की विधि

    1. इस तेल को हल्का गर्म करें।
    2. रात को सोने से पहले इसे स्कैल्प पर लगाएं और हल्के हाथों से मसाज करें।
    3. अगली सुबह बालों को किसी माइल्ड शैंपू से धो लें।
    4. इस प्रक्रिया को हफ्ते में 2-3 बार दोहराएं।

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    इस नुस्खे के फायदे

    1. प्राकृतिक रूप से बाल काले करना: सरसों का तेल और आयुर्वेदिक पाउडर बालों को जड़ों से पोषण देते हैं।
    2. बालों की ग्रोथ बढ़ाना: भृंगराज और आंवला बालों की ग्रोथ को बढ़ाते हैं।
    3. स्कैल्प की समस्याएं खत्म करना: यह मिश्रण डैंड्रफ और खुजली जैसी समस्याओं को भी दूर करता है।
    4. लंबे समय तक स्थायी समाधान: रसायनों की बजाय यह नुस्खा लंबे समय तक बालों की समस्याओं को ठीक करता है।

    सावधानियां

    1. हमेशा शुद्ध और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करें।
    2. यदि आपको किसी सामग्री से एलर्जी हो तो इसका उपयोग न करें।
    3. इस नुस्खे के साथ संतुलित आहार और नियमित योग का पालन करें।

    यह सरल और प्राकृतिक नुस्खा आपके सफेद बालों की समस्या को स्थायी रूप से दूर कर सकता है। सरसों के तेल और पाउडर का यह मिश्रण न केवल बालों को काला करता है बल्कि उन्हें स्वस्थ और चमकदार भी बनाता है। इसे आजमाएं और बालों में होने वाले बदलाव का अनुभव करें।

  • Cancer Symptoms: सुबह उठते ही शरीर देताˈ है कैंसर के ये 3 संकेत, जिन्हें लोग ‘मामूली’ समझकर कर देते हैं नजरअंदाजˌ

    Cancer Symptoms: सुबह उठते ही शरीर देताˈ है कैंसर के ये 3 संकेत, जिन्हें लोग ‘मामूली’ समझकर कर देते हैं नजरअंदाजˌ

    Cancer Symptoms: सुबह उठते ही शरीर देताˈ है कैंसर के ये 3 संकेत, जिन्हें लोग ‘मामूली’ समझकर कर देते हैं नजरअंदाजˌ

    Cancer Symptoms: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर शरीर में होने वाले छोटे-मोटे बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं। थकान,कमजोरी या थोड़ा-बहुत दर्द हमें रोजमर्रा की बात लगती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ बीमारियां,खासकर कैंसर जैसी घातक बीमारी, शरीर में अपनी दस्तक बहुत ही खामोशी से देती है?रिसर्च बताती है कि सुबह के वक्त हमारा शरीर कुछ ऐसे खास संकेत देता है, जो कैंसर की शुरुआती चेतावनी हो सकते हैं।

    अगर इन पर सही समय पर ध्यान दे दिया जाए, तो इस जानलेवा बीमारी को पहले स्टेज में ही पकड़कर इलाज शुरू किया जा सकता है।चलिए जानते हैं सुबह दिखाई देने वाले उन 3शुरुआती संकेतों के बारे में, जिन्हें आपको भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।1.सुबह उठते ही गले में खराश और आवाज में बदलावसर्दी-जुकाम या वायरल में गले में खराश होना आम बात है, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। लेकिन अगर आपको हफ्तों या महीनों से लगातार सुबह उठते ही गले में खरा-खरा सा महसूस होता है,कुछ निगलने में तकलीफ होती है या आपकी आवाज में भारीपन या कोई बदलाव आ गया है जो ठीक ही नहीं हो रहा, तो यह बिल्कुल भी सामान्य नहीं है। यहफेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer)यागले के कैंसर (Throat Cancer)का एक महत्वपूर्ण शुरुआती लक्षण हो सकता है।2.लगातार बनी रहने वाली थकान और कमजोरीरात में7-8घंटे की अच्छी नींद लेने के बाद भी अगर आप सुबह बिल्कुल थका हुआ और टूटा हुआ महसूस करते हैं,और यह सिलसिला हफ्तों तक चलता रहता है, तो इसे सिर्फ’काम का बोझ’समझने की गलती न करें। शरीर में जब कैंसर की कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं,तो वे शरीर की सारी ऊर्जा खींच लेती हैं, जिससे इंसान को बहुत ज्यादा और लगातार थकान महसूस होती है।

    यहब्लड कैंसर (Leukemia)यापेट के कैंसर (Stomach Cancer)सहित कई तरह के कैंसर का एक कॉमन संकेत है।3.सुबह शौच में खून आना या आदतों में बदलावयह एक ऐसा लक्षण है जिसके बारे में बात करने में लोग अक्सर झिझकते हैं, लेकिन यह बेहद गंभीर हो सकता है। अगर आपको सुबह मल त्याग करते समय दर्द होता है, खून आता है, या आपकी शौच की आदत में अचानक कोई बदलाव आ गया है (जैसे कभी कब्ज,कभी दस्त),तो यहकोलोरेक्टल कैंसर (बड़ी आंत का कैंसर)का सबसे स्पष्ट शुरुआती संकेतों में से एक हो सकता है। पाइल्स या बवासीर समझकर इसे नजरअंदाज करना जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हो सकता है।ध्यान दें:यह जरूरी नहीं है कि ये लक्षण कैंसर के ही हों,इनके कुछ और सामान्य कारण भी हो सकते हैं। लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने शरीर की सुनें। अगर इनमें से कोई भी लक्षण आपको दो हफ्ते से ज्यादा समय से महसूस हो रहा है,तो बिना देरी किए किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी जांच करवाएं। याद रखिए,कैंसर में’जल्दी पता चलना’ही ‘बचाव’की पहली और सबसे जरूरी सीढ़ी है।

  • हार्ट अटैक से 1 महीने पहले बॉडीˈ में दिखते हैं ये 5 वॉर्निंग साइन, अभी जान लेंगे इसके लक्षण तो धड़कता रहेगा आपका दिलˌ

    हार्ट अटैक से 1 महीने पहले बॉडीˈ में दिखते हैं ये 5 वॉर्निंग साइन, अभी जान लेंगे इसके लक्षण तो धड़कता रहेगा आपका दिलˌ

    हार्ट अटैक से 1 महीने पहले बॉडीˈ में दिखते हैं ये 5 वॉर्निंग साइन, अभी जान लेंगे इसके लक्षण तो धड़कता रहेगा आपका दिलˌ

    पिछले कुछ वर्षों में हार्ट अटैक के मामलों में तेजी आई है। ये बीमारी युवाओं को तेजी से अपनी चपेट में ले रही है। अनहेल्दी फूड, धूम्रपान, तनाव, नींद की कमी और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार हर साल दुनिया भर में लगभग 1.8 करोड़ लोगों की मौत हृदय रोगों से होती है, जिनमें से बड़ी संख्या हार्ट अटैक से होती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मरीजों को गोल्डन ऑवर यानी पहले एक घंटे के भीतर सही इलाज मिल जाए, तो हजारों जानें बचाई जा सकती हैं।

    हार्ट अटैक तब होता है जब हृदय की मांसपेशियों तक पहुंचने वाला रक्त प्रवाह अचानक रुक या बेहद कम हो जाता है। यह रुकावट धमनियों में वसा, कोलेस्ट्रॉल और कैल्शियम जैसी परतों के जमाव से होती है। जब ये परतें कठोर होकर खून के प्रवाह को रोक देती हैं, तो हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे उनका कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त या नष्ट हो सकता है।

    WebMD के मुताबिक हार्ट अटैक से पहले दिखने वाले आम संकेतों में सीने में दबाव या दर्द होना जो कंधे, जबड़े या हाथ तक फैल सकता है। हेल्थलाइन के मुताबिक हार्ट अटैक से एक महीने पहले ही हमारी बॉडी हार्ट अटैक के लक्षण बताने लगती है। आइए जानते हैं कि हार्ट अटैक आने से पहले हमारी बॉडी में कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं।

    सीने में दर्द या दबाव होना

    दिल का दौरा आने से पहले सबसे आम संकेत सीने में तकलीफ है। यह दबाव, जकड़न या जलन जैसा महसूस हो सकता है। कई बार लोग इसे हार्टबर्न समझ लेते हैं, लेकिन इसमें दर्द कंधे, गले, जबड़े और हाथों तक फैल सकता है। यह तब होता है जब दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त खून नहीं मिलता और धमनियां संकरी हो जाती हैं। ये दर्द कभी आराम करते समय, कभी मेहनत या तनाव में भी हो सकता है। इस संकेत को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।

    बिना वजह थकान होना

    अगर लगातार थकान रहती है और आराम करने के बाद भी कमजोरी दूर नहीं होती तो यह दिल की समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिल खून को सही से पंप नहीं कर पाता और शरीर के अंगों व मांसपेशियों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। लगातार थकान को हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

    सांस फूलना

    अगर हल्की गतिविधियों जैसे चलना या सीढ़ियां चढ़ने पर भी सांस फूलने लगे तो यह दिल की परेशानी का संकेत हो सकता है। जब दिल कमजोर हो जाता है तो फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। अगर ये लक्षण सीने में दबाव के साथ आए तो और भी खतरनाक हो सकता है।

    चक्कर आना

    दिल का खून पंप करने की क्षमता कम होने पर शरीर और दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इससे मरीज को बार-बार चक्कर आने, हल्कापन या बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है। अचानक उठने-बैठने या शरीर की स्थिति बदलने पर यह और बढ़ सकता है। बॉडी में इस तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

    धड़कन का अनियमित होना

    दिल की धड़कन का बहुत तेज, बहुत धीमा या अनियमित होना भी अटैक से पहले का संकेत हो सकता है। कई बार ये लक्षण सिर्फ घबराहट जैसा लगता है, लेकिन असल में यह दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गड़बड़ी है। धड़कन के साथ सीने में दर्द, चक्कर या बेचैनी हो तो यह खतरे का संकेत है।