Category: Health

  • बस 1 महीने तक सरसों के तेलˈ में ये एक चीज मिलाकर लगाए गंजे सिर में उगने लगेंगे नए बाल लोग कहने लगेंगे जुल्फी जुल्फीˌ

    बस 1 महीने तक सरसों के तेलˈ में ये एक चीज मिलाकर लगाए गंजे सिर में उगने लगेंगे नए बाल लोग कहने लगेंगे जुल्फी जुल्फीˌ

    बस 1 महीने तक सरसों के तेलˈ में ये एक चीज मिलाकर लगाए गंजे सिर में उगने लगेंगे नए बाल लोग कहने लगेंगे जुल्फी जुल्फीˌ

    How To Grow New Hair Naturally: आज के समय में बाल झड़ना और गंजापन एक आम समस्या बन गई है. कम उम्र में ही गंजापन आना किसी बुरे सपने जैसा है. बहुत से लोग बालों की झड़ने से परेशान हैं और नए बाल उगाने के उपाय तलाश रहे हैं.

    तनाव, खराब खान-पान और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का ज्यादा उपयोग बालों के गिरने का बड़ा कारण बनता है, लेकिन अगर आप प्राकृतिक तरीकों से अपने बालों को घना और लंबा बनाना चाहते हैं, तो सरसों के तेल के साथ एक खास चीज मिलाकर इसका उपयोग किया जा सकता है. यह न केवल बालों के झड़ने को रोकता है, बल्कि गंजे सिर पर भी नए बाल उगाने में मदद करता है.

    बालों की ग्रोथ बढ़ाने में सरसों के तेल के फायदे | Benefits of Mustard Oil In Increasing Hair Growth

    सरसों का तेल प्राचीन समय से ही बालों की देखभाल के लिए उपयोग किया जाता रहा है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो स्कैल्प को हेल्दी रखते हैं. यह बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें मजबूत बनाता है और बालों की ग्रोथ को तेज करता है.

    कौन सी चीज मिलाएं?

    सरसों के तेल में प्याज का रस मिलाने से इसके गुण और प्रभाव बढ़ जाते हैं. प्याज में सल्फर और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो बालों के फॉलिकल्स को सक्रिय करते हैं और डैमेज बालों को रिपेयर करते हैं.

    बनाने और उपयोग की विधि:

    • 2 बड़े चम्मच सरसों का तेल
    • 2 बड़े चम्मच प्याज का ताजा रस
    • 1 विटामिन ई कैप्सूल (वैकल्पिक)

    कैसे करें तैयार?

    • एक कटोरी में सरसों का तेल लें.
    • इसमें प्याज का ताजा रस मिलाएं.
    • अगर आपके पास विटामिन ई कैप्सूल है, तो इसे भी मिश्रण में डालें.
    • इन सभी चीजों को अच्छे से मिलाकर हल्का गुनगुना कर लें.

    उपयोग करने का तरीका:

    • इस मिश्रण को अपनी स्कैल्प पर लगाएं और हल्के हाथों से मसाज करें.
    • मसाज के बाद इसे कम से कम 1 घंटे तक लगा रहने दें.
    • फिर किसी माइल्ड शैंपू से धो लें.
    • हफ्ते में 2-3 बार इस प्रक्रिया को दोहराएं.

    इस नुस्खे से होने वाले फायदे:

    • बालों का झड़ना रुकेगा: सरसों का तेल और प्याज का रस जड़ों को पोषण देकर बालों की मजबूती बढ़ाएंगे.
    • गंजे सिर पर नए बाल: प्याज का रस स्कैल्प को उत्तेजित करता है, जिससे गंजे सिर पर भी नए बाल उगने लगते हैं.
    • बाल होंगे घने और चमकदार: इस मिश्रण से बालों की क्वालिटी में सुधार होता है और वे घने व चमकदार बनते हैं.
    • स्कैल्प के संक्रमण से छुटकारा: सरसों का तेल और प्याज बैक्टीरिया व फंगल संक्रमण को दूर रखते हैं.

    सावधानियां:

    • प्याज का रस इस्तेमाल करने से पहले एक बार पैच टेस्ट करें, ताकि एलर्जी का पता चल सके.
    • सरसों का तेल और प्याज का रस अच्छी क्वालिटी का ही इस्तेमाल करें.
    • ज्यादा मात्रा में न लगाएं, वरना यह चिपचिपा हो सकता है.

    अगर आप गंजेपन और बालों की अन्य समस्याओं से परेशान हैं, तो सरसों के तेल और प्याज के रस का यह प्राकृतिक उपाय आजमाएं. इसका नियमित उपयोग आपको 1 महीने में असर दिखाना शुरू कर सकता है. न केवल आपके बाल घने और लंबे होंगे, बल्कि यह बालों को अंदर से मजबूत और हेल्दी बनाएगा.

  • थाइराइड का इलाज आसान: रोज 21 दिनˈ लें ये पत्तियां और पाएं स्थायी राहतˌ

    थाइराइड का इलाज आसान: रोज 21 दिनˈ लें ये पत्तियां और पाएं स्थायी राहतˌ

    थाइराइड का इलाज आसान: रोज 21 दिनˈ लें ये पत्तियां और पाएं स्थायी राहतˌ

    इस आधुनिक युग में थायराइड की समस्या आजकल एक गंभीर समस्या बनी हुई है। थाइराइड गर्दन के सामने और स्वर तंत्र के दोनों तरफ होती है। ये तितली के आकार की होती है।

    गले में पायी जाने वाली इस थायराइड ग्रंथि से थायरोक्सिन हॉर्मोन निकलता है।

    जब इस ग्रंथि से निकलने वाले थायरोक्सिन हॉर्मोन का बैलेंस बिगड़ जाता है, जब शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियां होने लगती है।

    जब ग्रंथि से निकलने वाले थायरोक्सिन हॉर्मोन की मात्रा कम हो जाती है, तब शरीर में मेटाबोलिज़्म तेज होने लगते है, जिससे हमारी बॉडी की एनर्जी जल्दी ख़त्म हो जाती है।

    इसके विपरीत इसकी मात्रा बढ़ने के कारण, मेटाबोलिज़्म कम हो जाते है, जिसके कारण शरीर सुस्त और थका हुआ हो जाता है। थायराइड ग्रंथि के कारण शरीर के अनेक हिस्से प्रभावित होते है।

    थायराइड किसी भी उम्र के लोगो में हो सकता है। बच्चो में थायराइड की समस्या होने पर उनकी लंबाई कम हो जाती है, और शरीर फैलने लगता है।

    महिलाओं पर इसका प्रभाव कभी कभी सामने से नजर आता है कुल मिलाकर यही कहना होगा कि आमतौर ओर थाइरोइड की बीमारी जान तो नहीं लेता पर हां ये परेशान बहुत ज्यादा कर देता है साथ हमारी लुक को भी भद्दा कर देता। तो अब थाइरोइड की समस्या से भागने या इसे झेलने की जरूरत नहीं बस आप हमारे बताए गए इस इलाज को अपनाएं और जल्द से जल्द थाइराइड नाम की बला से राहत पाएं।

    महिलाओं के साथ-साथ पुरूषों में भी आजकल थायराइड की दिक्कत बढ़ती जा रही है। थायराइड में वजन अचानक से बढ़ जाता है या कभी अचानक से कम हो जाता है। इस रोग में काफी दिक्कत होती है।

    आयुर्वेद में थायराइड को बढ़ने से रोकने के बेहद सफल प्रयोग बताएं गए हैं। जिनमे से ज्यादातर उपचार की वस्तुएं हमारे गाँव में ही मिल जाती हैं तो आइए जानते हैं All Ayurvedic के माध्यम से थाइराइड से छुटकारा पाने के लिए सबसे कारगर घरेलू उपचार। आइए जानते है सबसे पहले थाइराइड के प्रकार, लक्षण, कारण और परहेज।

    कितने तरह के होते हैं थाइराइड | Thyroid

    थायराइड से जुड़ी आम समस्याओं की बात करे तो इसमें थायराइड के पांच प्रकार के विकार होते हैं। इसमें हाइपोथायराइडिज्म, हाइपरथायराइडिज्म, आयोडीन की कमी के कारण होने वाले विकार जैसे गॉयटर/गलगंड, हाशिमोटो थायराइडिटिस और थायराइड कैंसर शामिल हैं।

    थायराइड ग्रंथि से दो हॉर्मोन बनते हैं- टी 3 (ट्राई आयडो थायरॉक्सिन) और टी 4 (थायरॉक्सिन)। यह हार्मोन शरीर के तापमान, मेटाबोलिज्म और हार्ट रेट को नियंत्रित करते हैं. थायराइड ग्रंथि पर पीयूष/ पिट्यूटरी ग्लैंड का नियंत्रण होता है जो दिमाग में मौजूद होती है। इससे थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) निकलता है. जब शरीर में इन हार्मोन का संतुलन गड़बड़ होता है तो व्यक्ति थायराइड का शिकार हो जाता है।

    हाइपोथायराइडिज्म स्थिति में थायराइड हार्मोन का स्रवा कम होता है, जिससे शरीर का मेटाबोलिज्म बिगड़ (धीमा हो) जाता है। इसके विपरीत हाइपरथायराइडिज्म तब होता है जब थायराइड हार्मोन की मात्रा शरीर में ज्यादा बनती है, जिससे मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है।

    थाइराइड के लक्षण | Thyroid’s Symptoms

    प्रतिरोधक क्षमता कमजोर : शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर बिना दवाइयों के छोटे-छोटे रोगों से निजात पाना मुश्किल हो जाता है। थाइराइड में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होनी शुरू हो जाती है।

    थकावट महसूस होना : आराम करने के बाद भी थकावट महसूस होना थाइराइड का लक्षण हो सकता है। इसमें शरीर की एनर्जी कम होने लगती है और काम करने में आलस आता है।

    बालों का झड़ना : थाइराइड होने पर बाल झड़ने लगते हैं कई बार को भौहों के बाल भी बहुत हल्के हो जाते हैं।

    कब्ज की परेशानी : इसमें खाना आसानी से पचाने में भी परेशानी होती है। जिससे पेट से संबंधित परेशानियां भी आनी शुरू हो जाती हैं, कब्ज इस रोग में होने वाली आम दिक्कतों में से एक है। लगातार कब्ज हो रही है तो थाइराइड का चेकअप जरूर करवाएं।

    त्वचा का रूखापन : थाइराइड होने पर त्वचा में रूखापन आना शुरू हो जाता है। इस परेशानी में स्किन के ऊपरी हिस्से के सैल्स डैमेज होने लगते हैं।

    हाथ-पैर ठंडे रहना : इस समस्या में हाथ पैर ठंड़े रहने लगते हैं। शरीर का तापमान सामान्य होने पर भी हाथ-पैरों में ठंड़क महसूस होती है।

    वजन बढ़ना या घटना : किसी भी बीमारी से पहले शरीर संकेत देने शुरू कर देता है। इसमें वजन एकदम से घटना या बढ़ाना शुरू हो जाता है।

    थायराइड होने के कारण | Thyroid’s Causes

    स्ट्रेस में रहना : थायराइड बढ़ने का सबसे पहला कारण आपका बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेना ही है। इसके अलावा इससे याद्दाश्त कमजोर होने का खतरा भी बन रहता है। इसलिए अगर आपको थायराइड की समस्या है तो ज्यादा स्ट्रेस न लें।

    स्मोकिंग करना : सिर्फ थायराइड ही नहीं, स्मोकिंग तो वैसे भी सेहत के लिए हानिकारक होती है। इसलिए आज ही अपनी इस गलत आदत को बदल लें। कहीं ऐसा न हो आपकी यह आदत थायराइड बढ़ने और बीमारियों का कारण बन जाए।

    सोया का सेवन : थायराइड की समस्या में सोया बीन्स या अन्य सोया चीजों का सेवन आपको लिए हानिकारक होता है। थायराइड ग्लेंड को बढ़ाने वाली इन चीजों से आपकी कंडीशन और भी खराब हो सकती है।

    डॉक्टरी सलाह पर ध्यान ना देना : इस समस्या में अपनी डाइट से लेकर नियमित दिनचर्या का खास ख्याल रखना पड़ता है। बहुत से लोग इस प्रॉब्लम को छोटा समझकर डॉक्टर की सलाह पर भी ध्यान नहीं देते। मगर आपकी यह गलती आप पर भारी पड़ सकती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर पूरी तरह अमल करें।

    कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन न करना : बहुत से लोग वजन बढ़ने के डर से कार्बोहाइड्रेट्स युक्त चीजों का सेवन बंद कर देते हैं लेकिन यह थायराइड ग्लेंड के लिए सही नहीं है। थायराइड को कंट्रोल (Thyroid Control) में रखने के लिए हैल्दी लाइट लेना बहुत जरूरी है। इसलिए आपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट्स युक्त चीजों को शामिल करें।

    ग्लूटेन वाले आहारों का सेवन : अगर आप ग्लूटेन वाले आहारों का सेवन ज्यादा करते हैं तो आपको हाशीमोटोज रोग हो सकता है, जोकि थायराइड से ही जुड़ा रोग है। इसलिए ग्लूटेन वाले आहार जैसे गेंहूं का आटा, पास्ता, ब्रेड्स, बिस्किट्स, सीजनिंग्स और कई तरह के मसाले, बाजरा, चिकन, नूडल्स, बर्गर, पिज्जा, सोया सॉस आदि से दूर रहें।

    शुगर कंट्रोल न करना : शरीर में शुगर की मात्रा को कंट्रोल में न रखने से इंसुलिन बिगड़ जाता है, जोकि थायराइड की समस्या को बढ़ा देता है। इसलिए अपनी शुगर को कंट्रोल में रखें।

    ज्यादा डाइट और सप्लीमेंट लेना : कैल्शियम आयरन प्रोटीन और सोया सप्लीमेंट ज्यादा मात्रा में लेने से भी बॉडी में थायराइड हार्मोन का बैलेंस बिगड़ सकता है। इसलिए अपनी डाइट को थायराइड के हिसाब से मेंटेन करें।

    ज्यादा नमक और सी फूड खाना : ज्यादा नमक और सी फूड लेने से बॉडी में आयोडीन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे इससे हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है। इसलिए नमक और सी फूड का कम से कम सेवन करें।

    फालतू दवाएं लेना : कुछ दवाएं ऐसी होती है जो थायराइड ग्लेंड को नुकसान पहुंचाती है। इसलिए बेहतर होगा कि कोई भी फालतू दवाई लेने से पहले आप अपने डॉक्टर से सलाह लें।

    थायराइड की सबसे कारगर औषधि निर्गुण्डी | Thyroid’s Home Remedy

    निर्गुण्डी के पत्तों का रस 14 से 28 मिलीलीटर दिन में 3 बार सेवन करें या निर्गुण्डी के 21 पत्ते लेकर उसका रस निकाल कर उस रस को 3 बराबर भागो में बांट कर दिन में 3 बार ले यह प्रयोग 21 दिन करने से थाइराइड से निजात मिलती है। निर्गुण्डी की जड़ों को पीसकर इसका रस नाक में डालना चाहिए इससे भी फायदा मिलता है। यह थाइराइड से बने गले मे घेंघा या गोइटर बनने पर भी काम करता है।

    लाल प्याज होता है थाइराइड में गुणकारी | Onion in Thyroid

    रात को सोने से पहले मध्यम आकार के लाल प्याज को लेकर दो हिस्सों में काट लें। इन कटे हुए हिस्सों को गर्दन में थाइराइड ग्लैंड के आसपास रगड़ें। इसे रात भर ऐसे ही रहने दें। रोजाना लगातार इसका इस्तेमाल करने से आराम मिलेगा। प्याज खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत लाभकारी है। इसमें एंटी बैक्टिरियल,एंटी फंगल के अलावा और भी बहुत से जरूरी तत्व होते हैं।

    थाइराइड में क्या खाएं और क्या नही खाना फायदेमंद है

    1. हाइपोथाइराइड | Hypothyroid : इसमें थायराइड ग्लैंड सक्रिय नहीं होता, जिससे शरीर में जरूरत के मुताबिक T3, T4 हार्मोन नहीं पहुंच पाता। इसकी वजह से शरीर का वजन अचानक बढ़ जाता है। सुस्ती महसूस होने लगती है। शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। अनियमित पीरियड, कब्ज की शिकायत, चेहरे और आंखों पर सूजन आ जाता है। यह बीमारी 30 से 60 साल की महिलाओं में अधिक होती है।

    क्या खाएं? : आयोडिन नमक, आयोडिन से भरपूर चीजें, सी फूड, फिश, चिकेन, अंडा, टोंड दूध और उससे बनी चीजें जैसे दही, पनीर, टमाटर, मशरुम, केला, संतरे आदि, फिजिशियन की सलाह पर विटामिन, मिनिरल्स, आयरन सप्लीमेंट्स।

    क्या नहीं खाएं? : सोयाबीन और सोया प्रोडक्ट रेड मीट, पैकेज्ड फूड, ज्यादा क्रीम वाले प्रोडक्ट जैसे केक, पेस्ट्री, स्वीट पोटैटो, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, मूंगफली, बाजरा आदि, फूलगोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, शलगम आदि।

    2. हाइपरथाइराइड | Hyperthyroid : इसमें थायराइड ग्लैंड बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाता है। T3, T4 हार्मोन जरुरत से अधिक मात्रा में निकलकर ब्लड में घुलने लगता है। इस हालत में शरीर का वजह एकाएक कम हो जाता है। मांशपेशियां कमजोर हो जाती है। भूख ज्यादा लगती है, ठीक से नींद नहीं आती, स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। पीडियड्स में अनियमितता, अधिक ब्लीडिंग की समस्या, गर्भपात का भी खतरा बना रहता है।

    क्या खाएं? : हरी सब्जियां, साबूत अनाज, ब्राउन ब्रेड, ओलिव ऑयल, लेमन, हर्बल और ग्रीन टी, अखरोट, जामुन, स्ट्रॉबेरी, गाजर, हरी मिर्च, शहद।

    क्या नहीं खाएं? : मैदा से बने प्रोडक्ट जैसे पास्ता, मैगी, व्हाइट ब्रेड, सॉफ्ट ड्रिंक, अल्कोहल, कैफीन, रेड मीट, ज्यादा मीठी चीजें जैसे मिठाई, चॉकलेट।

  • बवासीर को जड़ से खत्म करेगा गेंदेˈ के फूल और काली मिर्च का ये प्रयोगˌ

    बवासीर को जड़ से खत्म करेगा गेंदेˈ के फूल और काली मिर्च का ये प्रयोगˌ

    बवासीर बेहद तकलीफदेह होती है। यह रोग प्राय गलत खान पान से और पेट में कब्ज रहने की समस्या से शुरू होता है, जितना पुराना यह रोग होता जाता है वैसे वैसे यह रोग फिशर, भगंदर आदि में बदलता जाता है. बवासीर मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण विकसित होता है।देर तक कुर्सी पर बैठना और बिना किसी शेड्यूल के कुछ भी खा लेना इसका प्रमुख कारण है।बवासीर दो प्रकार की होती है, खूनी बवासीर और बादी वाली बवासीर, खूनी बवासीर में मस्से खूनी सुर्ख होते है और उनसे खून गिरता है, जबकि बादी वाली बवासीर में मस्से काले रंग के होते है और मस्सों में खाज पीडा और सूजन होती है।

    बवासीर को जड़ से खत्म करेगा गेंदेˈ के फूल और काली मिर्च का ये प्रयोगˌ

    हम आपको यहाँ पर कुछ घरेलू नुस्‍खों के बारे में बताते हैं जिससे बवासीर और इससे होने वाले दर्द में राहत मिल सकती है।ऐसे में गेंदे के फूल और काली मिर्च का यह प्रयोग बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

    बवासीर में गेंदे के फूल और काली मिर्च का सफल प्रयोग :

    1. बवासीर में गेंदे के हरे पत्तों को काली मिर्च के साथ पीसकर चार दिन तक नित्य एक बार सेवन करें (गेंदे के फूल के नीचे डाली पर हरे पत्ते मिलेंगे) 10 ग्राम पत्ते और 7 काली मिर्च को मिला कर पीसीए।
    2. गेंदे के फूल 10 ग्राम (पीले वाले), काली मिर्च के 7 दाने, दोनों को ठंडाई की तरह पीसकर आधा गिलास पानी में मिलाकर छानकर पीने से रक्तस्त्रावी बवासीर में लाभ होता है।
    3. रक्तस्त्रावी बवासीर में फूलों को पीस लीजिये, इस फूलों की लुगदी को देसी घी में भून लीजिये, इसमें मिश्री व् सौंफ भी मिला लीजिये, इसको दिन में एक बार भोजने के दो घंटे पहले या बाद में सेवन करें। सेवन के एक घंटे तक कुछ भी खाएं ना पिए।

    बवासीर में विशेष :

    • बवासीर को दूर करने के लिए सर्व प्रथर्म आप कब्ज को दूर करें, कब्ज को दूर करने के लिए आप रात को सोते समय एक गिलास गर्म दूध के साथ एक चम्मच छोटी हरड का चूर्ण या एक चम्मच इसबगोल का छिलका खा कर सोयें। और सुबह शौच जाने के बाद कम से कम 15 मिनट कपाल भाति ज़रूर करें. अगर समस्या भयंकर हो तो कपाल भाति आधा घंटा तक करें. आपको आराम ज़रूर आएगा। और भोजन में फाइबर का भरपूर प्रयोग करें. अनाज भी मोटा पिसवाएं और चोकर का भरपूर प्रयोग करें।
    • एक पके केले को बीच से चीरकर उसके दो टुकडे कर लें फिर उन टुकड़ों के बीच गेहूं के दाने के बराबर कपूर डालकर इसके बाद उस केले को खुले आसमान के नीचे शाम को रख दें,सुबह को उस केले को शौच करने के बाद खालें। एक हफ़्ते तक लगातार इसको करने के बाद भयंकर से भयंकर बवासीर भी समाप्त हो जाती है।
    • नीम का तेल मस्सों पर लगाने से और 4- 5 बूँद रोज़ पीने से बवासीर में बहुत लाभ होता है।
    • एक चाय का चम्मच धुले हुए काले तिल ताजा मक्खन के साथ लेने से भी बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।
    • नारियल की जटा को माचिस से जला दीजिए फिर उस भस्म से बिना जले हुए रेशो को अलग निकालकर साफ भस्म को किसी शीशी में रख लें। फिर इसमें से 3 ग्राम भस्म एक गिलास छाछ या एक कटोरी दही के साथ सुबह खाली पेट सेवन करें और उसके लगभग 2 घंटे तक कुछ भी ना खाएं । फिर इसे दोपहर में खाना खाने के दो घंटे बाद और रात को बहुत हल्का खाने के 2 घंटे बाद अर्थात केवल एक ही दिन, दिन में तीन बार लेना है और लेने के बाद फिर 2 घंटे तक कुछ भी ना लें । इस बात का ख्याल रखे की दही या छाछ ताजी हो, दही कई दिन पुरानी और खट्टी न हो। इस प्रयोग से कैसी और पुरानी से पुरानी बवासीर की बीमारी भी अति शीघ्र ठीक हो जाती है।
  • जुबान पर चम्मच से इलाज? 1 मिनटˈ में जानिए वो तरीका जो बदल देगा आपकी सेहत का खेलˌ

    जुबान पर चम्मच से इलाज? 1 मिनटˈ में जानिए वो तरीका जो बदल देगा आपकी सेहत का खेलˌ

    जुबान पर चम्मच से इलाज? 1 मिनटˈ में जानिए वो तरीका जो बदल देगा आपकी सेहत का खेलˌ

    आजकल के बिगड़ते लाइफस्टाइल के कारण लोग किसी न किसी बीमारी के शिकार है. इन बीमारियों का पता लगाने के लिए लोग महंगे से मंहगा टेस्ट करवाते है, ताकि उन्हें समय पर बीमारियों का पता चल जाए. कुछ लोग तो इन टेस्ट को करवा लेते है लेकिन बिजी होने के कारण कुछ लोगों को टेस्ट करवाने का समय नहीं मिल पाता. आज हम आपको एक ऐसा तरीका बताएंगे, जिससे कि आप बिना किसी टेस्ट के अपनी शरीर की बीमारियों का आसानी से पता लगा सकते है.

    इस ट्रिक से आप घर बैठे-बैठे ही कई गंभीर बीमारियों का पता लगाकर उनका इलाज शुरू करवा सकते है. यूनिवर्सिटी ऑफ टोरोनटो की असिस्टेंट प्रोफेसर और ब्रॉडकास्ट मेडिकल जर्नलिस्टने एक रिसर्च के दौरान बीमारियों का पता लगाने के लिए यह आसान ट्रिक निकाली है. तो चलिए जानते है किस तरह बिना टेस्ट करवाए आप अपनी बीमारियों के बारे में जान सकते है.

    कैसे करें इस्तेमाल :-
    चम्मच की उभरी हुई परत को जीभ पर रखकर इसे धीरे-धीरे रगड़ें और चम्मच को तब तक रगड़ते रहे जब तक चम्मच पर अच्छी तरह से मुंह की लार नहीं लग जाए. इसके बाद चम्मच को मुंह में से निकाल कर पॉलिथीन मे डालकर बल्ब के सामने रख दे. इसे दो-तीन मिनट तक ऐसे ही रखे रहने दे.

    बीमारियों को पहचानना :-

    • अगर पॉलिथीन में से मीठी गंध आ रही है तो आपको शुगर की बीमारी है.
    • अगर चम्मच का रंग पीला हो गया है तो आपको थायराइड की बीमारी है.
    • यदि चम्मच का रंग बैंगनी हो गया हो तो वह शरीर में रक्त का संचरण ठीक से नहीं हो रहा और शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ गई है।.
    • अगर चम्मच का रंग सफेद हो गया है तो आपके शरीर में संक्रमण की बीमारी है.
    • अगर आप चम्मच का रंग नारंगी हो गया है तो आपकी किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही है.
  • जितनी उम्र उतने ही लो इस देसीˈ चीज के दाने फिर देखिए कैसे जड़ से खत्म हो जाते हैं 18 बड़ी बीमारियाँˌ

    जितनी उम्र उतने ही लो इस देसीˈ चीज के दाने फिर देखिए कैसे जड़ से खत्म हो जाते हैं 18 बड़ी बीमारियाँˌ

    जितनी उम्र उतने ही लो इस देसीˈ चीज के दाने फिर देखिए कैसे जड़ से खत्म हो जाते हैं 18 बड़ी बीमारियाँˌ

    Benefits of Fenugreek Seeds: मेथी (Fenugreek), एक साधारण और आसानी से उपलब्ध होने वाली औषधीय वनस्पति है, जो भारतीय रसोई में आमतौर पर मसाले के रूप में उपयोग होती है।

    लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेथी के छोटे-छोटे दाने स्वास्थ्य के लिए कितने फायदेमंद हो सकते हैं? यह सिर्फ खाने में स्वादिष्ट नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी एक अमूल्य रत्न साबित हो सकती है।

    मेथी के फायदे:

    1. डायबिटीज के नियंत्रण में मदद:मेथी के दानों में कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो रक्त में शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित करने में मदद करती है। खासतौर पर टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए यह लाभकारी हो सकता है। मेथी में पाए जाने वाले हाइड्रोक्सी-आईसोलेनोट्रिल्स (Hydroxyisoleucine) शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल बेहतर होता है।

    2. पाचन तंत्र को सुधारें:मेथी के दाने पाचन क्रिया को सुधारने में मदद करते हैं। इसके सेवन से कब्ज (Constipation) की समस्या दूर होती है और पेट की गैस और एसिडिटी भी कम होती है। इसके अलावा, मेथी का सेवन आंतों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।

    3. वजन घटाने में सहायक:अगर आप वजन घटाने की सोच रहे हैं, तो मेथी आपके लिए मददगार साबित हो सकती है। मेथी के दाने शरीर में जमा वसा को कम करने में मदद करते हैं और पेट की भूख को नियंत्रित करते हैं, जिससे अधिक खाने की इच्छा कम होती है। यह वजन को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।

    4. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करें:मेथी के दाने रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम करने में मददगार होते हैं। यह “खराब” कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करके “अच्छे” कोलेस्ट्रॉल (HDL) के स्तर को बढ़ाता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा कम होता है।

    5. हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा:मेथी में मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। यह रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है और दिल के दौरे के जोखिम को भी कम करता है।

    6. त्वचा की समस्याओं में राहत:मेथी का उपयोग त्वचा की समस्याओं जैसे मुंहासे, झुर्रियां, और खुजली में किया जा सकता है। मेथी में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा की सूजन को कम करने में मदद करते हैं और उसे निखारने का काम करते हैं।

    7. बालों के लिए फायदेमंद:मेथी के दानों का तेल बालों के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। यह बालों के झड़ने को रोकने में मदद करता है और उन्हें मजबूत बनाता है। मेथी में विटामिन और मिनरल्स की प्रचुरता होती है, जो बालों की वृद्धि को बढ़ावा देते हैं।

    8. हड्डियों को मजबूत बनाए:मेथी में कैल्शियम और आयरन की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होती है। नियमित रूप से मेथी का सेवन हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।

    9. मासिक धर्म की समस्याओं में राहत:मेथी का सेवन महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं जैसे दर्द, असमान चक्र, और अत्यधिक रक्तस्राव में भी सहायक हो सकता है। मेथी में एंटी-इंफ्लेमेटरी और दर्द निवारक गुण होते हैं जो इन समस्याओं में राहत दिलाते हैं।

    10. शरीर की गर्मी को नियंत्रित करें:गर्मियों में शरीर में अत्यधिक गर्मी हो सकती है, लेकिन मेथी के सेवन से शरीर की आंतरिक गर्मी को नियंत्रित किया जा सकता है। यह शरीर को ठंडा करने का काम करता है और डिहाइड्रेशन को भी रोकता है।

    11. स्तनपान में सहायक:मेथी का सेवन स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए फायदेमंद हो सकता है। यह दूध उत्पादन को बढ़ाता है और स्तनपान को प्रोत्साहित करता है।

    12. हैवी मेटल्स के प्रभाव को कम करें:मेथी में एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो शरीर में जमा होने वाले हानिकारक भारी धातुओं (heavy metals) के प्रभाव को कम करते हैं और शरीर से इन्हें बाहर निकालने में मदद करते हैं।

    13. कैंसर की रोकथाम:कुछ अध्ययन बताते हैं कि मेथी के दाने में एंटी-कैंसर गुण होते हैं, जो शरीर में कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोक सकते हैं। विशेष रूप से, यह आंतों और स्तन कैंसर के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

    14. शरीर की इन्फ्लेमेशन कम करें:मेथी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन और जलन को कम करने में मदद करते हैं। यह गठिया और अन्य सूजन संबंधी बीमारियों के इलाज में सहायक हो सकता है।

    15. शारीरिक थकान को दूर करें:मेथी का सेवन शारीरिक थकान को कम करने और ऊर्जा स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। यह शरीर को ताजगी और स्फूर्ति प्रदान करता है।

    16. ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करें:मेथी का सेवन उच्च रक्तचाप (high blood pressure) को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से रक्तचाप संतुलित रहता है और हृदय रोगों का खतरा कम होता है।

    17. वजन बढ़ाने में सहायक:कुछ लोग वजन बढ़ाने के लिए मेथी का उपयोग करते हैं। मेथी के दानों में पोटेशियम, आयरन और अन्य मिनरल्स होते हैं, जो शरीर को मजबूती देते हैं और वजन बढ़ाने में मदद करते हैं।

    18. नसों और मांसपेशियों के दर्द में राहत:मेथी का सेवन नसों और मांसपेशियों के दर्द में राहत दिलाने में सहायक हो सकता है। इसके सेवन से सूजन कम होती है और दर्द से आराम मिलता है। मेथी के दाने छोटे होते हुए भी असीमित स्वास्थ्य लाभों से भरपूर होते हैं। इसका सेवन न केवल शरीर के विभिन्न अंगों और तंत्रों को स्वस्थ रखता है, बल्कि यह विभिन्न रोगों से बचाव करने में भी मदद करता है। तो अगली बार जब आप मेथी का उपयोग करें, तो सोचिए कि आप अपने स्वास्थ्य को एक बहुमूल्य उपहार दे रहे हैं!

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    सोचिए, अगर 59 साल की उम्र में भी कोई बिजली की रफ्तार से दौड़ रहा हो, बाल घने और काले हों, और शरीर में वही जोश-ओ-जुनून बरकरार हो-तो क्या आप जानना नहीं चाहेंगे कि इसका राज़ क्या है?

    योग गुरु स्वामी रामदेव की फिटनेस और ऊर्जा किसी रहस्य से कम नहीं। लेकिन इस रहस्य का जवाब खुद उन्होंने हाल ही में एक पॉडकास्ट में दिया, जहां उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली और खानपान से जुड़ी अहम बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि कुछ चीजें हमारी सेहत के लिए जहर से कम नहीं, जिनसे हर हाल में बचना चाहिए।इतना ही नहीं, दो ऐसी चीजें भी हैं, जिन्हें वे पूरी दुनिया की दौलत के बदले भी नहीं खाएंगे! तो अगर आप भी लंबी उम्र, जबरदस्त फिटनेस और बेहतरीन हेल्थ चाहते हैं, तो उनकी ये बातें ज़रूर जान लें।

    गेहूं-चावल से परहेज करने की सलाह

    स्वामी रामदेव ने एक पॉडकास्ट में कहा कि जो गेहूं और चावल खाएगा, वह जल्दी ऊपर जाएगा। उन्होंने इन अनाजों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इनका अधिक सेवन करने से शरीर में कई तरह की बीमारियां जन्म ले सकती हैं।

  • ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल करने के लिएˈ आजमाएं ये प्राकृतिक और आसान घरेलू उपचारˌ

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    शुगर की बीमारी को कई लोग डायबिटीज़ , कुछ लोग मधुमेह, कुछ शक्कर की बीमारी  के नाम से जानते हैं । कुछ समय पहले तक तो  सिर्फ 3 बीमारियाँ ही ऐसी थी जिसका कोई इलाज़ संभव  नहीं था । पर अब यह बीमारियाँ बढ़ कर 4 हो गई है जिसमे से एक डायबिटीज़ है । डायबिटीज़ की बीमारी को लोग बहुत ही हल्के में बहुत ही सामान्य में  लेले लेते हैं । जबकि यह एक जानलेवा बीमारी है ।  लोगों को यह तक पता ही नहीं है की यह बहुत गंभीर रोग है जिसके कारण सबसे ज्यादा जान जाने का खतरा होता है । भारत में लगभग 70% से 75 %लोग डायबिटीज़ की बीमारी से ग्रसित हैं । 

    आपको जानकार हैरानी होगी की उन लोगों को जिन्हेयह डायबिटीज़ की बीमारी हैं उन्हे इस बीमारी से जुड़े गंभीर तथ्यों के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है । लोगों को यही ही पता है की डायबिटीज़ की बीमारी सिर्फ चीनी खाने से होती है या फिर चीनी खाना बंद कर देने से कम हो जाती है । 

    शुगर की बीमारी हमारे शरीर में तब होती है जब या तो अग्नाशय हमारे शरीर में ठीक से इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या फिर हमारे शरीर की कोशिकाएं उस इंसुलिन को ठीक से स्वीकृत नहीं कर पाती है । इसका असर बहुत तरह के खानपान से भी पड़ता है । आपने यह भी देखा होगा की कई लोग खाना खाने से पहले शुगर की दवा का सेवन करते हैं और इस बीमारी में गंभीर से जुंझ रहे लोग इंसुलिन का इंजेक्शन लेते हैं । इंसुलिन का इंजेक्शन लेने वाले लोगों से यदि जरा सी भी चूक हो जाये तो वह समय पर खाना नहीं खाएं  या इंजेक्शन नहीं लें तो यह उनकी मौत का कारण बन जाता है  । 

    क्या होते हैं डायबिटीज़ के लक्षण :

    ( Diabetes Symptoms in Hindi )

    • अधिक भूख एवं प्यास लगना

    • अधिक पेशाब आना

    • हमेशा थका महसूस करना

    • वजन बढ़ना या कम होना

    • मुंह का बार बार सुखना 

    • संक्रमण के प्रति शरीर का ज्यादा संवेदनशील होना 

    • आँखों से जुड़ी परेशानी होना , आँखों का धुंधला होने लगना 

    • शरीर पर कोई भी घाव लगने  पर जल्द ठीक ना होना 

    • घाव का पकने लगाना 

    • महिलाओं में बार बार केंडिड इन्फेक्शन होना 

    • ब्लड  में अतिरिक्त शर्करा  से तंत्रिका क्षतिग्रस्त हो सकता है। व्यक्ति अपने हाथ और पैरों में झनझनाहट महसूस करता है साथ ही हाथ-पैरों में दर्द एवं जलन हो सकती है। जिसे बार बार हाथ पैरों का सुन्न  भी कह सकते हैं । 

    • डायबिटीज में व्यक्ति की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है जिससे कि मसूड़ों का संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और मसूड़े कमजोर होकर दाँत ढीले हो सकते है। मुंह से बदबू आने की परेशानी का भी खतरा रहता है । 

    वैसे तो मधुमेह 4 प्रकार का होता है पर ज़्यादातर लोग या तो हाई ब्लड शुगर या लो ब्लड शुगर से ही ग्रसित होते हैं । इस बीमारी की कोई दवा नहीं है । जो दवा इस बीमारी में दी जाती है वह आपके इंसुलिन को नियंत्रित करने के लिए दी जाती है । आप इस बीमारी से राहत कुछ आसान घरेलू उपायों के जरिये भी पा सकते हैं । इसके लिए आपको कोई दवा का सेवन नहीं करना होगा । 

    शुगर कम करने के उपाय :

    ( Treatment of diabetes in hindi )

    आंवला :

    10 मिलीग्राम आंवले के जूस को 2 ग्राम हल्दी के पाउडर में मिलाकर सेवन सरने से डायबीटीज पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इस घोल को दिन में दो बार लीजिए।

    तुलसी :

    तुलसी की पत्त‍ियों में एंटी-ऑक्सीडेंट,एंटीबायोटिक , एंटीबैक्टीरियल , एंटीएजिंग,एंटीफ़ंगल गुण  पाए जाते हैं। जिनसे इजिनॉल, मेथिल इजिनॉल और कैरियोफ़ैलिन बनते हैं। ये सारे तत्व मिलकर इन्सुलिन जमा करने वाली और छोड़ने वाली कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो पैंक्रियाटिक बीटा सेल्स को इंसुलिन के प्रति सक्रिय बनाती हैं।  ये सेल्स इंसुलिन के स्त्राव को बढ़ाती हैं।  

    सुबह उठकर खाली पेट दो से तीन तुलसी की पत्ती चबाएं,या फिर आप चाहें तो तुलसी का रस भी पी सकते हैं । इससे आपका ब्लड शुगर नियंत्रण में आ जाएगा । तुलसी के सेवन के साथ में यदि आप शुगर को कम करने वाली दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो  ध्यान रखें और डॉक्टर्स से परामर्श जरूर लें । क्योंकि शुगर को तेजी से कम करने का काम करती है । 

    जामुन :

    जामुन के सीजन में जामुन को काला नमक लगा कर खाना डायबिटीज़ की बीमारी को कम करने में सहायक होता है । इसके अलावा जामुन की गुठली को सूखा कर उसको पीस कर चूर्ण  बना लें और सुबह शाम हल्के गरम पानी के साथ 2 -2 चम्मच सेवन करने से आपको डायबिटीज़ की बीमारी में बहुत फायदा होगा । 

    सहजन :

    सहजन जिसको ज़्यादातर लोग ड्रमस्टिक्स के नाम से भी जानते हैं । यह दक्षिण भारत के भोजन में काम आती है  और साथ ही आयुर्वेदिक दवाओं में काम आती है । सहजन की फली का सेवन और या फिर सहजन की पत्तियों के रस का सेवन भी डायबिटीज़ की परेशानी को कम करने में सहयोगी होता है । 

    शलजम :

    शलजम को सलाद के रुप में या सब्जी बनाकर खाएँ। शुगर के इलाज के दौरान शलजम का सेवन काफी फायदेमंद होता है।

    अलसी :

    प्रतिदिन सुबह खाली पेट अलसी का चूर्ण गरम पानी के साथ लेने से डायबीटीज को कम किया जा सकता है। अलसी में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिसके कारण यह फैट और शुगर का उचित अवशोषण करने में सहायक होता है। अलसी के बीज डाइबीटीज़ के मरीज़ की भोजन के बाद की शुगर को लगभग 28 प्रतिशत तक कम कर देते हैं।

    करेले का रस :

    रोजाना सुबह में करेले के रस का सेवन करना या करेले की सब्जी का सेवन करना भी डायबिटीज़ की बीमारी को नियंत्रित करने का काम करता है । 

    मेथी के दानें :

    मेथी के दानें को रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में डालकर रख दें। सुबह उठकर खाली पेट इस पानी को पिएँ और मेथी के दानों को चबा लें। नियमित रुप से इसका सेवन करने से डायबिटीज नियंत्रण में रहता है।

    एलोवीरा :

    आंवले के रस में एलोवीरा का जूस मिला कर सुबह में सेवन करने से भी डायबिटीज़ की बीमारी में बहुत फायदा मिलता है । 

    दालचीनी :

    रक्त में शुगर के स्तर को कम रखने के लिए एक महीने तक अपने प्रतिदिन के आहार में एक ग्राम दालचीनी का प्रयोग करें। दालचीनी का इस्तेमाल आप शुगर की घरेलू दवा के रूप में कर सकते हैं। 

    आम के पत्ते :

    शुगर का स्तर कम करने के लिए आम के पत्तों का भी इस्तेमाल बहुत अच्छा होता है । रात भर 10-15 आम के पत्तों को 1 ग्लास पानी में भिगो कर रख दें और सुबह उस पानी का सेवन करें । यह डायबिटीज़ को कम करने में मददगार साबित होता है ।  

    अमलतास :

    अमलतास की कुछ पत्तियाँ धोकर उनका रस निकालें। इसका एक चौथाई कप प्रतिदिन सुबह खाली पेट पीने से शुगर के इलाज में फायदा मिलता है।

    ग्रीन टी :

    ग्रीन टी में उच्च मात्रा में पॉलीफिनॉल पाया जाता है।  ये एक सक्रिय एंटी-ऑक्सीडेंट है।  जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मददगार है।  प्रतिदिन सुबह और शाम ग्रीन टी पीने से फायदा होगा । 

    सौंफ :

    नियमित तौर पर भोजन के बाद सौंफ का सेवन करें । सौंफ खाने से डायबिटीज नियंत्रण में रहता है। शुगर के रोगियों को इन घरेलू उपायों को अपनाने के साथ साथ परहेज का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    6 बेलपत्र, 6 नीम के पत्ते, 6 तुलसी के पत्ते, 6 बैगनबेलिया के हरे पत्ते, 3 साबुत कालीमिर्च पीसकर खाली पेट, पानी के साथ लेने से डायबीटीज पर कन्ट्रोल किया जा सकता है। ध्यान रहे, इसे पीने के बाद कम से कम आधे घंटे तक कुछ भी न खाएं।

    डॉक्टर्स के पास जाने की जरूरत कब :

    डॉक्टर के पास जाने पर वह टेस्ट करने की सलाह देते है और रिपोर्ट आने पर ही इलाज निर्धारित करते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह लिए शुगर की दवा का सेवन ना करें।   यह सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है । 

    डायबिटीज़ के टेस्ट दो होते हैं एक फास्टिंग यानि की खाली पेट और एक कना खाने के बाद । खाना खाने के बाद वाले किए गए शुगर टेस्ट में यदि शुगर की मात्रा बढ़ी हुई आती है तब फास्टिंग टेस्ट पर बहुत ज्यादा ध्यान  दिया जाता है । फास्टिंग टेस्ट में यदि शुगर ज्यादा आती है तो यह गंभीर बात है ।

    आपको डॉक्टर्स से परामर्श की बहुत आवश्यकता है और सेहत पर भी ध्यान देने की आवश्यकता ज्यादा है ।साथ ही खानपान को लेकर बहुत  ज्यादा सतर्कता बरतने की भी । पर यदि आपका फास्टिंग शुगर सामान्य या उससे कम आता है तो आपको बहुत अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।  बस अपने खानपान पर थोड़ा नियंत्रण रखने की आवश्यकता होगी । समय समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच करवाते रहें । खास कर प्रेग्नेंसी और 40 की उम्र के बाद अपनी स्वास्थ्य जांच करना नियमित रखें । 

    नोट :

    आलू , चावल , गन्ना , केला , आम , चीकू , अनार , ऑरेंज जैसे आहारों का सेवन करने से बचे । इनमे ग्लूकोज की मात्रा बहुत ज्यादा पाई जाती है । यदि आप बाज़ारों में मिलने वाले शुगर फ्री लिक्विड और टेबलेट्स का उपयोग करते हैं चीजों को मीठा बनाने के लिए तो बहुत ही सीमित मात्रा में कम में लें । लंबे समय तक और ज्यादा मात्रा में इसका सेवन भी सेहत के बिगड़ने का कारण बन सकता है । इसके साथ ही आप अपने खानपान को लेकर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें । आपकी जरा सी लापर वाही और खानपान की जरा सी चूक आपके जान जाने का कारण बन सकती है । 

  • ना डॉक्टर ना खर्चा… बस ये देसीˈ पेस्ट बना लें और देखें कैसे पीले दांतों की जगह दिखेगी सफेद चमकˌ

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    Tips for Teeth Cleaning: दांतों की सफाई और उनकी सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। अक्सर लोग खाना खाने के बाद दांतों में जमी गंदगी को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर पायरिया और मसूड़ों की समस्याओं का कारण बन सकती है।

    जब दांत सड़ने लगते हैं या मसूड़ों में दर्द होता है, तो लोग डॉक्टर के पास जाते हैं। लेकिन अगर समय रहते दांतों का ख्याल रखा जाए, तो इन समस्याओं से बचा जा सकता है। दांतों की देखभाल के लिए सबसे बेहतरीन और प्राचीन तरीका है ऑयल पुलिंग। यह न केवल दांतों को साफ और चमकदार बनाता है, बल्कि ओरल हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखता है।

    ऑयल पुलिंग क्या है?ऑयल पुलिंग एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जिसमें सरसों के तेल, नमक और नींबू के मिश्रण का उपयोग करके मुंह की सफाई की जाती है।

    डेंटिस्ट की सलाहरांची की डेंटिस्ट रिचा मित्रा का कहना है कि यदि आप रोज़ाना सरसों के तेल में नमक और नींबू डालकर ऑयल पुलिंग करते हैं, तो इससे दांत साफ हो जाते हैं। यह प्रक्रिया एक महीने तक नियमित रूप से करने से दांत चमकने लगते हैं और जमी हुई गंदगी आसानी से निकल जाती है। यही गंदगी दांतों की समस्याओं की मुख्य वजह बनती है।

    तेल, नमक और नींबू का लाभ

    1. सरसों का तेल:
      • सरसों का तेल दांतों को चिकनाई प्रदान करता है, जिससे गंदगी जमने की संभावना कम हो जाती है।
    2. नमक:
      • नमक में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं।
    3. नींबू:
      • नींबू का सिट्रिक एसिड प्लैक को हटाने और दांतों को चमकाने का काम करता है।

    ऑयल पुलिंग कैसे करें?

    1. एक चम्मच सरसों का तेल लें।
    2. उसमें चुटकी भर नमक और कुछ बूंदें नींबू का रस मिलाएं।
    3. इस मिश्रण को मुंह में डालें, लेकिन ध्यान रखें इसे निगलना नहीं है।
    4. इसे 5 से 10 मिनट तक मुंह के भीतर चारों तरफ घुमाएं।
    5. इस प्रक्रिया के दौरान उंगलियों का भी सहारा लें ताकि मिश्रण हर दांत तक पहुंचे।
    6. प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल्ला कर लें।
    7. इसे रात के समय करना अधिक फायदेमंद होता है।

    ऑयल पुलिंग के फायदे

    1. ओरल हेल्थ में सुधार: दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।
    2. पायरिया से बचाव: जमी गंदगी को हटाने से पायरिया का खतरा कम होता है।
    3. मुंह की दुर्गंध से छुटकारा: नियमित रूप से ऑयल पुलिंग करने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है।
    4. दांतों का टूटना रोके: दांत मजबूत और स्वस्थ बने रहते हैं।
    5. दांत चमकदार बनें: सिट्रिक एसिड और नमक के गुण दांतों को प्राकृतिक चमक प्रदान करते हैं।

    ऑयल पुलिंग दांतों की सफाई और ओरल हेल्थ के लिए एक सरल और प्रभावी उपाय है। इसे अपनाने से न केवल दांत मजबूत और चमकदार बनते हैं, बल्कि मसूड़ों और दांतों से जुड़ी कई समस्याओं से भी बचा जा सकता है। रोजाना इस प्रक्रिया को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और अपने दांतों को स्वस्थ बनाए रखें।

  • डायबिटीज को जड़ से खत्म कर सकतीˈ है ये 1 चीज! सुबह खाली पेट खाने से कंट्रोल में रहेगा ब्लड शुगरˌ

    डायबिटीज को जड़ से खत्म कर सकतीˈ है ये 1 चीज! सुबह खाली पेट खाने से कंट्रोल में रहेगा ब्लड शुगरˌ

    डायबिटीज को पूरी तरह खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन सही आदतें ब्लड शुगर को शानदार तरीके से कंट्रोल कर सकती हैं। सुबह खाली पेट ली जाने वाली एक सरल चीज मेथी दाना इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाकर शुगर स्पाइक रोकने में बहुत प्रभावी है। रोज़ाना इसका सेवन प्री-डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज के प्रबंधन में बेहतरीन परिणाम दे सकता है।

    डायबिटीज को जड़ से खत्म कर सकतीˈ है ये 1 चीज! सुबह खाली पेट खाने से कंट्रोल में रहेगा ब्लड शुगरˌ

    अक्सर उम्र बढ़ने के साथ लोगों को कई स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती है, भारत में तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक बिमारी है “Diabetes “। Diabetes जिसे मधुमेह के नाम से जाना जाता है एक क्रोनिक बिमारी है, यह आमतौर पर तब देखी जाती है जब पैंक्रियाज प्रयाप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या शरीर इंसुलिन का सही ढंग से उपयोग नहीं कर पाता। डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसे पूरी तरह जड़ से खत्म करना संभव नहीं है। लेकिन इसे नियंत्रित करना बिकुल संभव है।

    कई लोगों अपने लाइफस्टाइल, डाइट और नियमित रूटीन को सुधारकर अपने ब्लड शुगर को इतनी अच्छी तरह मैनेज कर लेते हैं की उनका शरीर फिर से नार्मल रेंज में काम करने लगता है, जिसे ही रिवर्सल भी कहा जाता है। ऐसे में हेल्थी लाइफस्टाइल और डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए आप रोजाना यदि सुबह खाली पेट मेथी दाने का सा सेवन करते हैं तो यह इससे आपको अच्छा रिजल्ट देखने को मिलता है। तो चलिए जानते हैं Diabetes Reversal में कैसे काम करता है मेथी दाना और इसके फायदे।

    क्यों है डायबिटीज में मेथी दाना फायदेमंद

    मेथी दाना अपने औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में सेहत के लिए बेहद ही फायदेमंद माना जाता है, इसके बीजों में मौजूद सॉल्युबल फाइबर कर्बोहैड्रेट्स के अवशोषण (Absorption) को धीमा कर देता है। जिसके कारण भोजन के बाद शुगर अचानक नहीं बढ़ती। इतना ही नहीं यह इन्सुलिन सेंसेटिविटी को बेहतर बनाकर शरीर को ग्लूकोज का सही उपयोग करने में भी मदद करता है। ऐसे में आयुर्वेद से लेकर मॉडर्न रिसर्च दोनों में ही मेथी दाना को ब्लड शुगर नियंत्रण करने में बेहद फायदेमंद माना गया है।

    ऐसे करें मेथी दाना का सेवन

    मेथी दाना का सेवन बेहद ही आसान है इसके लिए आप रात में एक चम्मच मेथी दाना एक गिलास पानी में भिगों दें। इसके बाद सुबह खाली पेट इसे चबाकर खाएं और पानी भी पी लें, रोजाना यह छोटा सा रूटीन ब्लड शुगर को स्टेबल रखने में काफी असरदार माना जाता है।

    डायबिटीज कंट्रोल के लिए अन्य फायदेमंद चीजें

    मेथी दाना के अलावा डायबिटीज कंट्रोल के लिए यहाँ बताई गई अन्य चीजों का सेवन बेहद फायदेमंद हो सकता है, जैसे:

    • भीगे हुए बादाम: रोजाना सुबह भीगे हुए बादाम खाना आपकी सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है, बादाम हेल्थी फैट्स और फाइबर से भरपूर होते हैं, इनका सेवन शुगर स्पाइक को रोकने में बेहद ही सहायक होता है।
    • आंवला: एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी से भरपूर आंवला इंसुलिन कम करने में मदद करता है, ऐसे में इसका रस या कच्चा सेवन करना सेहत के ले बेहद ही लाभकारी होता है।
    • दालचीनी का पानी: दालचीनी ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से उपयोग करने में मदद करती है, ऐसे में गुनगुने पानी में आधा चम्मच दालचीनी मिलाकर पीने से स्वास्थ्य बेहतर होता है।
  • सोने से पहले कमरे में जलाएं सिर्फˈ 1 तेज पत्ता, इसके बाद जो होगा उस पर यकीन करना हो जाएगा मुश्किलˌ

    सोने से पहले कमरे में जलाएं सिर्फˈ 1 तेज पत्ता, इसके बाद जो होगा उस पर यकीन करना हो जाएगा मुश्किलˌ

    सोने से पहले कमरे में जलाएं सिर्फˈ 1 तेज पत्ता, इसके बाद जो होगा उस पर यकीन करना हो जाएगा मुश्किलˌ

    आपको किसी तरह का कोई तनाव न हो। आपका मन शांत हो। आप सुकून महसूस करें। लेकिन अमूमन ये हो नहीं पाता। दिनभर चाहे आप दफ्तर में रहें, कॉलेज जाएं या घर के कामों में उलझे रहें… तनाव हो ही जाता है। तनाव यानी स्ट्रेस। ये तनाव आपको रात को सोने नहीं देता। ये आपको मानसिक और शारीरिक तरीके से नुकसान पहुंचाता है। अगर आप छोटी सी कोशिश करें तो तनाव को मिनटों में दूर कर सकते हैं। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं बस एक तेज़ पत्ता चाहिए ।

    तेज़ पत्ता हर किसी की किचन में बड़े ही आराम से मिल जाता है।

    ये सिर्फ 5 मिनट में आपके तनाव को दूर करने की क्षमता रखता है। एक रशियन साइंटिस्ट ने इस पर स्टडी की और पाया कि यह हमारे तनाव को दूर कर सकता है। यही वजह है कि तेज पत्‍ते को अरोमाथैरेपी के लिये इस्‍तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, तेज़ पत्ता यह त्‍वचा की बीमारियों और सांस से संबन्‍धित समस्‍याओं को भी ठीक करने के लिये जाना जाता है।

    कैसे करें इस्तेमाल :

    एक तेज पत्‍ता लें और उसे किसी कटोरी या एैशट्रे में जला लें। अब इसे कमरे के अंदर लाकर 15 मिनट के लिए रख देंगे। आप पाएंगे कि तेज पत्‍ते की खुशबू पूरे कमरे में भर जाएगी। साथ ही आपको कमरे का माहौल काफी सुकून वाला लगेगा। ये आपको स्पा एक्सपीरियेंस देगा। कुछ देर इस कमरे में रिलेक्स होकर बैठ जाएं, आपको अपने अंदर सुकून बहता हुआ महसूस होगा और आपका तनाव कम होने लगेगा।

    तेज पत्ते को जलाने के फायदे :

    हमारा अच्छा , बुरा व्यवहार हमारे आस पास के वातावरण पर निर्भर करता है, हमारे आस पास की सुगंध–दुर्गन्ध हमारे व्यवहार को प्रभावित करती है | हमारे आस पास की नकारात्मक उर्जा हमारे अच्छे व्यवहार को बुरे व्यवहार की तरफ तब्दील कर देती है

    आज हम आपको बताये गे प्राचीन काल से चला आ रहा नकारात्मक वायु के परभाव को कम करने वाला नुख्सा  तेज पत्ते को जलाने से आपके व्यवहार में हैरानीजनक बदलाव आ जायेगा 

    तेज पत्ते को जलाने से निकलने वाला धुआं आपके आस पास के वातावरण को कुछ इस तरेह से बदल देगा के आपका और आपके आस पास के लोग का व्यवहार खुशमिजाज हो जायेगा  अपने घर में या अपने आप पास की किसी भी जगह पर तेज पत्ते को जलाये और इस का जादू देखें

    तेज पत्ते के जलाने के फायदे बस यही पर ही ख़त्म नहीं होते तेज पत्ता प्राचीन काल से बिमारिओ को ठीक करने के लिए रामबाण माना जाता है आप इसको अपने खाने में पका सकते है तथा पानी में उबाल कर पी सकते है !

    अच्छी नींद के लिए –

    रात को सोने से पहले तेजपत्ते का इस्तेमाल करना अच्छी नींद के लिए बहुत फायदेमंद है. तेजपत्ते के तेल की कुछ बूंदों को पानी में मिलाकर पीने से अच्छी नींद आती है.

    पेट के लिए –

    अगर आपको पाचन से जुड़ी समस्याएं हैं तो आप तेजपत्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं. पेट से जुड़ी कई समस्याओं में ये कारगर उपाय है. चाय में तेजपत्ते का इस्तेमाल करके कब्ज, एसिडिटी और मरोड़ जैसी समस्याओं से राहत पा सकते हैं.

    डायबिटीज रोगियों के लिए –

    तेजपत्ते का इस्तेमाल टाइप 2 डायबिटीज में करना फायदेमंद होता है. ये ब्लड शुगर के लेवल को सामान्य बनाए रखता है और दिल की क्रियाशीलता पर भी सकरात्मक प्रभाव डालता है. ऐसे में जो लोग मधुमेह से पीड़ित हैं उनके लिए इसका सेवन करना बहुत ही फायदेमंद है.

    पथरी में लाभदायक –

    किडनी स्टोन और किडनी से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं के लिए तेजपत्ते का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है. तेजपत्ते को उबालकर उस पानी को ठंडा करके पीने से किडनी स्टोन और किडनी से जुड़ी दूसरी समस्याओं में फायदा मिलता है.

    सर दर्द में –

    दर्द में राहत के लिए भी तेजपत्ता एक कारगर उपाय है. तेजपत्ते के तेल से प्रभावित जगह पर मसाज करना बहुत फायदेमंद होता है. इसके अलावा अगर तेज सिर दर्द हो रहा हो तो भी इसके तेल से मसाज करना अच्छा रहता है.

    मिर्गी के रोगियों के लिए – 

    तेज पत्ता Anti Inflammatory होता है, अगर आप मिर्गी के मरीज हो तो तेज पत्ते का धुआ आपके लिए वरदान है 

    काकरोच को दूर भगाने के लिए – 

    काकरोच को भगाने के लिए बाजार में बहुत सारे प्रोडक्ट्स पाए जाते है जो के बेहद महंगे और हमारे लिए तथा बचों की सेहत के लिए नुकसानदायक होते है
    अगर आप काकरोच से परेशान है तो तेज पत्तो को जला कर अपनी रसोई , गार्डन के कोनो में रखे और यह आपकी सेहत के लिए बिलकुल भी हानिकारक नहीं है!