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  • अंबानी से भी बड़े बिजनेसमैन हैं संतरेˈ की गोली वाले ये बाबा, पूरी खबर पढ़कर आप भी रह जाएंगे हैरानˌ

    अंबानी से भी बड़े बिजनेसमैन हैं संतरेˈ की गोली वाले ये बाबा, पूरी खबर पढ़कर आप भी रह जाएंगे हैरानˌ

    अंबानी से भी बड़े बिजनेसमैन हैं संतरेˈ की गोली वाले ये बाबा, पूरी खबर पढ़कर आप भी रह जाएंगे हैरानˌ

    ‘ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो, भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी…मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी…।’ ये लाइने शायद आपने पहले भी सुनी होंगी। यानि जवानी या फिर बुढ़ापे में हर कोई अपने बचपन के दिनों को याद करता है। बचपन की कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें इसांन फिर से जीना चाहता है। आज हम आपको आपके बचपन से जुड़ी ऐसी ही याद के बारे में एक खबर बताने जा रहे हैं, जो शायद आपको जरुर जाननी चाहिए। आज हम आपको संतरे की गोली वाले ये बाबा से मिलवाने जा रहे हैं। जी हां, वही संतरे वाली गोली जिसे हम बचपन में बड़े ही चाव से खाते थे।

    इस पीढ़ी में शायद ही कोई ऐसा बच्चा हो जिसने बचपन में इन खट्टी-मीठी गोली का लुत्फ न लिया हो। वो बच्चे समय के साथ बड़े हो गए। कईयों की शादी हो गई। लेकिन, इस बाबा की संतरे वाली गोलियों का स्वाद बड़े हो चुके बच्चों की जुबां पर आज भी है। आपको हैरानी होगी की इतने सालों से ये बाबा आज भी संतरे की गोलियां बेच रहे हैं। संतरे की गोली वाले बाबा आज भी ये गोलियां बेच रहे हैं और छोटे-बड़े बच्चे इसे खरीद रहे हैं।

    हम बात कर रहे हैं ग्वालियर, मप्र के रहने वाले 91 साल के बुजुर्ग मूलचंद्र सोनी परात के बारे में। मूलचंद्र ने सालों पहले संतरे की गोली बनाने का बिजनेस शुरु किया था। शायद आपने भी बचपन में इन गोलियों का स्वाद चखा होगा। लेकिन, इतने सालों बाद भी अब जब समय पूरी तरह से बदल चुका है ये बुजुर्ग आज भी संतरों की गोलियां बेचते हैं। उन्होंने इसे अपना बिजनेस और जीने का जरिया बना लिया है।

    आपको याद होगा कि स्कूल के दिनों में ये संतरे की गोलियां हम सभी बड़े चाव से खाते थे। ये बाबा आज भी उन लड़कियों की शादियों में जाते हैं जो कभी इनसे संतरे की गोलियां खरीदती थी। शहर के लोग भी बाबा की उतनी ही इज्जत करते हैं। बाबा के बारे में बताया जाता है कि वो हर उस लड़की की शादी में एक साड़ी लेकर आशीर्वाद देने जाते हैं, जिसने कभी बचपन में उनके यहां से संतरे वाली गोली खरीदी हो। बाबा का बच्चियों के प्रति ऐसा स्नेह है कि वो गोली बेचने से हुई कमाई से एक-एक रुपया जोड़कर इन बच्चियों के लिए साड़ी खरीदते हैं।

    बता दें कि बाबा ने शादी नहीं की है। बाबा के लिए यहीं बच्चियां ही उनकी बेटियां हैं। मूलचंद्र सोनी नाम के ये बुजुर्ग मप्र के ग्वालियर स्थित बालाबाई के बाजार में रहते हैं। करीब 91 साल के हो चुके मूलचंद्र संतरे की गोलियां बेचते नजर आ जाते हैं। आपको बता दें कि मूलचंद्र सोनी ने उम्र भर यही काम किया है। मूलचंद्र सोनी ने भले ही बहुत अधिक पैसे न कमाए हो लेकिन उन्होंने स्नेह और प्यार का बिजनेस किया है। मूलचंद्र सोनी ने अपने लिए पैसे नहीं बल्कि इज्जत कमाई है। इसलिए वो अंबानी जैसे बिजनेसमैन से भी बहुत बड़ा बिजनेसमैन हैं।

  • इस वजह से लड़कियां खुद से छोटीˈ उम्र के लड़कों से करना चाहती हैं शादी, होते हैं ये फायदेˌ

    इस वजह से लड़कियां खुद से छोटीˈ उम्र के लड़कों से करना चाहती हैं शादी, होते हैं ये फायदेˌ

    इस वजह से लड़कियां खुद से छोटीˈ उम्र के लड़कों से करना चाहती हैं शादी, होते हैं ये फायदेˌ

    भारतीय संस्कृति में विवाह के सम्बंध में कई सारे नियम बनाए गए हैं, ताकि वैवाहिक जीवन सफल और खुशहाल रह सके। ऐसा ही एक नियम है शादी के लिए लड़के की उम्र का लड़की से अधिक होना । इसे भारतीय परम्परा भी कह सकते हैं, सामान्यतया लोगों की धारणा यही रहती है कि शादी के लिए लड़का, लड़की से उम्र में बड़ा होना चाहिए। पर अब समय के साथ-साथ जैसे दूसरी परम्पराओं और विचारधारों में बदलाव देखने को मिल रहा है, वहीं शादी के लिए लड़के-लड़की के उम्र की पारम्परिक सीमाए भी खत्म होती नजर आ रही हैं.. आज के समय में बहुत सी ऐसी शादियां हो रही हैं, जहां लड़की की उम्र लड़के से अधिक होती है।

    खासकर प्रोफेशनल रूप से सफल लड़कियां आजकल खुद से कम उम्र के लड़को का अधिक चुनाव कर रही हैं, बॉलीवुड एक्ट्रेस नेहा धूपिया भी उनमें से ही एक हैं। नेहा ने खुद से दो साल छोटे अपने दोस्त, अंगद बेदी को अपना लाइफ पार्टनर चुना है। नेहा और एक्टर अंगद बेदी की शादी पूरे रीति-रिवाज से दिल्ली में हुई हैं। जिसकी जानकारी नेहा ने ट्विटर पर शादी की फोटो शेयर करके दी है। ऐसे में इस शादी के साथ ही, और अक्सर जब-जब ऐसी शादियां होती हैं, तो लोगों के मन में ये सवाल आता है कि आखिर कोई लड़की खुद से छोटे लड़के को शादी के लिए क्यों चुनती हैं। वहीं कुछ लोगों के मन में ऐसी शादी की सफलता को लेकर भी संशय रहता है। अगर आप भी उनमें से एक हैं तो आज हम आपको ये संशय दूर करने जा रहे हैं। दरअसल खुद से छोटी उम्र के लड़के से शादी करने के भी अपने बहुत सारे फायदे हैं। जैसे कि..

    दरअसल कम उम्र के लड़के अधिक एक्टिव और स्पोर्टी होते हैं। साथ ही उन्हें नई-नई चीजों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है। ऐसे में कम उम्र के लोग के साथ आपको भी अपनी रियल उम्र का पता नहीं चलता और आप खुद को हमेशा जवां महसूस करती हैं। साथ ही आप अपने पार्टनर की एनर्जी को सही दिशा में लगाकर इससे पॉजिटिव परिवेश बना सकती है।

    दरअसल अगर कोई लड़की खुद से कम उम्र के लड़के को लाइफ पार्टनर बना रही है तो जाहिर सी बात होगी कि लड़की को हर चीज का ज्यादा अनुभव होगा। यहां तक कि वो अपने करियर लाइफ में भी सेटल रहेगी। ऐसे में वो प्रोफेशनल और मेंटली काफी मजबूत होती है, जो कि उसे भावनात्मक रूप से भी सशक्त बनाता है। ऐसे महिलाएं अपने पार्नर पर डिपेंड रहने के बजाए उन्हें   अपने एक्सपीरियंस बताकर उनका करियर अच्छे से मोल्ड कर सकती है। जबकि कम उम्र की लड़कियां हर तरह से अपने जीवनसाथी पर निर्भर रहती हैं।

    कम उम्र के लड़कों से प्यार करने पर आपके मन से यह एहसास चला जाता है कि संबंध बनाते समय वह आपको लेकर जजमेंटल हो जाएगा. आप बिना किसी डर के बिंदास तरीके से प्यार करते हैं.

    यह बात बिल्कुल सच है कि यंग ऐज के लड़कों में शारीरिक आकर्षण ज़्यादा होता है. वह आपकी फिजिकल ज़रूरतों को बेहतर तरीके से समझते हैं.

    कम उम्र के पार्टनर के साथ यह चांसेस कम होते हैं कि उनका कोई पिछला हिसाब-किताब बाकी होगा. ऐसे में आपको उनके पुराने प्यार के लौट आने का ख़तरा नहीं रहता.

    यंग ऐज के लड़के उत्साह से भरपूर होते हैं. उनके साथ संबंध बनाने में कोई कमी नहीं आती. आप उनसे खुलकर अपनी सेक्स इच्छाएं ज़ाहिर कर सकती हैं.

    कम उम्र के लड़कों को डेट करने पर ईगो प्रॉब्लम नहीं आती जो अक्सर बड़े उम्र के लड़कों में देखने को मिलती है.

    कम उम्र के लड़कों को आपकी अचीवमेंट्स पर ख़ुशी होगी. क्योंकि उस समय वह भी उसी दौर से गुज़र रहे होते हैं. वह आपको किसी प्रकार से जज नहीं करेंगे बल्कि सपोर्ट करेंगे.


    कम उम्र में लड़कों को घूमने-फिरने का बहुत शौक होता है. इन्हें डेट करने पर आपकी लाइफ भी रोमांच से भरपूर हो जाती है. उनके साथ आप भी एन्जॉय करती हैं.

    वहीं कम उम्र के लड़के के साथ देखा जाए तो शारीरिक संबंध बनाने से कोई नुकसान नहीं होता है। वहीं एक रिसर्च की माने तो लड़कों में खुद से बड़ी उम्र की महिलाओं को देखकर टेस्टेस्टेरोन का लेवल बढ़ जाता है और यही कारण है कि लड़के खुद से बड़ी उम्र की महिलाओं की तरफ आकर्षित होते हैं और उनसे ही शादी करना पसंद करते हैं। ऐसे आकर्षण की वजह से आपकी सेक्स लाइफ भी बेहतर रहती है।

  • युवक को पेट दर्द की थी शिकायत!ˈ अल्ट्रासाउंड कराया तो निकला प्रेगनेंटˌ

    युवक को पेट दर्द की थी शिकायत!ˈ अल्ट्रासाउंड कराया तो निकला प्रेगनेंटˌ

    युवक को पेट दर्द की थी शिकायत!ˈ अल्ट्रासाउंड कराया तो निकला प्रेगनेंटˌ

    क्या कोई लड़का प्रेगनेंट हो सकता है, क्या पुरुषों में भी गर्भ धारण करने की छमता होती है, क्या पुरुषों के फिलोपियन ट्यूब में गर्भ ठहर सकता है। ये तमाम सवाल इसलिए हम पूछ रहे हैं, क्योंकि यूपी का एक युवक प्रेगनेंट हो गया है। वो प्रेगनेंट कैसे हुआ ये तो भगवान ही जाने, लेकिन डॉक्टरों ने तो उसे प्रेगनेंसी का सर्टीफिकेट तो दे ही दिया है। जबसे लड़के को प्रेगनेंसी का सर्टीफिकेट मिला है, वो सदमे में है। रो रहा है माथा पीटकर इस दर्द से छुटकारा पाना चाहता है, क्योंकि जो भी उसकी प्रेगनेंसी की ख़बर सुन रहा है, अपनी हंसी रोक नहीं पा रहा, और उसका मजाक उड़ा रहा है।

    कासगंज जिले के अलीगंज निवासी 22 वर्षीय दर्शन सीमेन्ट फैक्ट्री में काम करता है। कई दिनों से दर्शन के पेट में असहनीय दर्द हो रहा था। जिसको लेकर वो परेशान था। जिसके बाद वो थक हारकर अलीगढ़ के घटना थाना क्वार्सी के रामघाट रोड पर स्थित सनराइज अस्पताल पहुंचा। दर्शन को पेट दर्द की शिकायत थी। पेट में असहनीय दर्द के चलते डॉक्टरों ने युवक को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। जिसके बाद डॉक्टर ने पूरी जांच की, साथ ही अल्ट्रासाउंड भी किया। शाम को जब उसकी जांच रिपोर्ट आई, तो इलाज करने वाला डॉक्टर भी चौक गया क्योंकि उसके पेट दर्द का कारण उसके पेट में पल रहा बच्चा था

    अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में जो कारण और निष्कर्ष निकला है, उसके मुताबिक दर्शन को बच्चेदानी की नली यानी (फिलोपियन ट्यूब) में गर्भ ठहरा है। साथ ही उसके गुर्दे की नली में सूजन भी बताई गई है। जब ये रिपोर्ट दर्शन ने डॉक्टरों को दिखाई तो पता चला की वो प्रेगनेंट है। खुद को प्रेगनेंट सुनकर युवक को होश उड़ गए। वो कैसे प्रेगनेंट हो गया उसकी समझ से बाहर है।

    कुछ लोगों की सलाह पर वो सीएमओ और जिलाधिकारी के पास पहुंचा। जहां उसने अपने साथ अस्पताल के द्वारा मजाक किए जाने की शिकायत की है। युवक अपने साथ इस खिलवाड़ से बेहद नाराज है। नर्सिंग होम के खिलाफ शिकायत जिलाधिकारी व सीएमओ को दी है। जो रिपोर्ट दी गई है उसके मायने है कि बच्चेदानी की नली की प्रैग्नेंसी सफल नहीं होती। अधिकतम 2 से ढाई माह के अंदर ऐसे केस में अबॉर्शन कराना पड़ता है। वरना नाली फटने की आशंका रहती है। वहीं दर्शन की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में सिर्फ निष्कर्ष वाले कॉलम में प्रैग्नेंसी की पुष्टि की है। जबकि इससे पहले गुर्दे की नली में सूजन बताई है।
    वहीं कुछ डॉक्टरों और पैथालॉजी संचालकों का कहना है कि सम्भव है कि कम्प्यूटर पर रिपोर्ट प्रिंट से पूर्व किसी महिला की रिपोर्ट कॉपी पेस्ट हो गयी हो। हालांकि इस घोर लापरवाही से दर्शन खुद मानसिक उत्पीड़न का शिकार है। उसके होश उड़े हुए हैं। रो रो कर बुरा हाल है। हांलाकि दर्शन की जांच रिपोर्ट बनाने वाले डाक्टर आलोक गुप्ता का कहना है कि गलती से रिपोर्ट बन गई है। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की है।

  • ये हैं भारत की 5 सबसे खतरनाकˈ सड़कें, इनपर से गुजरना हो तो कांप जायेगी रुह – देखिएˌ

    ये हैं भारत की 5 सबसे खतरनाकˈ सड़कें, इनपर से गुजरना हो तो कांप जायेगी रुह – देखिएˌ

    ये हैं भारत की 5 सबसे खतरनाकˈ सड़कें, इनपर से गुजरना हो तो कांप जायेगी रुह – देखिएˌ

    नई दिल्ली – आज हम आपको भारत की 5 सबसे खतरनाक सड़कों के बारे में बताने जा रहे हैं। ये सड़कें बेहद खतरनाक हैं और इनपर अक्सर एक्सीडेंट होते रहते हैं। इन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को अक्सर इन सड़कों से होकर गुजरना पड़ता है; इसलिए आप इन खतरनाक सड़कों से गुजरते हुए कितने दिन जीवित रहते हैं ये आपके भाग्य पर निर्भर करता है। ये सड़कें बर्फीले पर्वतों और ऊंची-ऊंची चट्टानों पर बनी हुई हैं। इन रास्तों से गुजरना बेहद रोमांचक होने के साथ साथ डरावना भी है। तो आइये देखते हैं कि भारत की 5 सबसे खतरनाक सड़कें कौन कौन सी हैं?

    ये हैं भारत की 5 सबसे खतरनाक सड़कें

    आज हम आपको भारत की 5 सबसे खतरनाक सड़कों के बारे में बताने जा रहे हैं। बता दें कि ये सड़कें इतनी खतरनाक हैं कि इन सड़कों पर हर साल लगभग 13 लाख लोग दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2011-2021 को “सड़क सुरक्षा का दशक” घोषित किया है। तो चलिए देखते हैं भारत की 5 सबसे खतरनाक सड़कें कौन कौन सी हैं।

    #1. खारडुंग ला

    भारत की 5 सबसे खतरनाक सड़कों की बात करें तो इसमें सबसे पहला नंबर खारडुंग ला का आता है। इसे देश की सबसे खतरनाक सड़क माना गया है। 18,380 फ़ीट की ऊंचाई पर बसी ये सड़क दुनिया की बेहद खतरनाक सड़क मानी जाती है। बता दें कि इस सड़क पर तापमान बहुत कम और ऑक्सीजन की मात्रा भी बहुत कम होती है।

    #2. ज़ोजि ला

    ज़ोजि ला को भारत की सबसे खतरनाक सड़क कहा जा सकता है। यह पर्वतों पर बनी हुई सड़क है जो बेहद खतरनाक नजर आती है। इस सड़क से गुजरना आपको रोमांचित करने के साथ साथ डर का अनुभव भी कराएगा। यह सड़क लेह से श्रीनगर जाते वक्त 11000 फीट ऊपर बनी हुई है। यहां से गुजरने वाले अपनी जान हथेली पर लेकर ही इस रास्ते से गुजरते हैं। यह सड़क मिट्टी से भरी रहती हैं और बर्फ गिरने के कारण बेहद खतरनाक हो जाता है।

    #3. लेह

    इसमें कोई दो राय नहीं कि मनाली हाईवे देश का सबसे खूबसूरत सड़कों में से एक है। यह हाइवे देखने में लाजवाब है। इसके बावजूद इससे गुजरना जान को जोखिम में डालना है। बता दें कि यह हाइवे दोनों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है। यह सड़क बर्फ से ढ़की रहती है जिसकी वजह से इस पर यात्रा करना बेहद खतरनाक हो जाता है।

    #4. माथेरान

    यह सड़क आपको माथेरान से नेरल जाते वक्त मिलेगी। इस सड़क से गुजरने पर हर किसी का दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है। बता दें कि यह सड़क बहुत चिकनी है जिसकी वजह से इसपर अक्सर एक्सीडेंट होते रहते हैं। यह सड़क संकीर्ण, घुमावदार है जो काफी समतल हैं। इन रास्तों से गुजरते हैं अक्सर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।

    #5. किश्वर-कैलाश रोड

    Sheep and goats being herded over the Zojila Pass as a traffic jam idles trucks because of a landslide; Kashmir, Jammu and Kashmir State; India.

    यह एक लेन की रोड है। इसपर चलना खतरनाक हो जाता है। किश्वर-कैलाश रोड के एक ओर खाई और दूसरी ओर पहाड़ है। इस सड़क को एक पहाड़ी पर बनाया गया था। इसपर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के कारण लोग इस सड़क से गुजरना पसंद नही करते हैं।

  • क्या आपकी कमर पर भी पड़ते हैंˈ ऐसे डिंपल? तो इसके फायदे भी जान लीजिएˌ

    क्या आपकी कमर पर भी पड़ते हैंˈ ऐसे डिंपल? तो इसके फायदे भी जान लीजिएˌ

    क्या आपकी कमर पर भी पड़ते हैंˈ ऐसे डिंपल? तो इसके फायदे भी जान लीजिएˌ

    खूबसूरती बढ़ाने वाले गालों के डिंपल को तो आपने कई चेहरों में देखा होगा और इसकी खूबियों के बारे में भी बहुत कुछ सुना होगा, पर क्या आप कमर पर पड़ने वाले डिंपल के बार में जानते हैं। जी हां, डिंपल सिर्फ गालों पर ही नहीं बल्कि कमर पर भी होते हैं और पीठ के निचले हिस्से पर पाए जाने वाले ये डिंपल अगर आपको भी पड़ते हैं तो यकीन मानिए ये आपके लिए बेहद फायदेमंद हैं। क्योंकि इन्हें ‘डिंपल ऑफ वीनस’ भी कहते हैं और महिलाओं में ये खूबसूरती और सौभाग्य का प्रतीक माने जाते हैं। वहीं कमर के डिंपल को अच्छे स्वास्थ्य और बेहतर सेक्स लाइफ का भी संकेत माना जाता है, वैसे पेल्विस एरिया में होने के कारण इसे अपोलो छिद्र भी कहते हैं। तो चलिए जानते हैं कमर पर पड़ने वाले डिंपल का राज और उसके कारण मिलने वाले फायदों के बारें में..

    दरअसल रोम में वीनस को सौंदर्य की देवी हैं माना जाता है और मान्यता है कि सुन्दरता की देवी वीनस की कमर पर भी ऐसे ही डिंपल के निशान पड़ते थे.. इसी वजह से इन छिद्रों को वीनस डिंपल कहते हैं और इन्हें सुन्दरता का प्रतीक माना गया है।

    वहीं ज्योतिष में वीनस यानी शुक्र को सुंदरता और काम इच्छाओं का कारक माना जाता है, ऐसे में वीनस डिंपल खूबसूरती और रोमांस का परिचाचक है। ऐसी महिलाएं बेहद ही खूबसूरत होती हैं और इनमें पुरुषों को आकर्षित करने की अद्भुत क्षमता होती है।

    वहीं जिनके के कमर पर डिंपल पड़ते हैं उन्हें भाग्यशाली भी माना जाता है, ऐसे महिला और पुरुष दोनों ही समान रूप से सौभाग्यशाली माने जाते हैं पर ज्यादातर ये महिलाओं में ही देखने को मिलता है और उनमें भी बेहद दुर्लभ होता है।ऐसे में जिन महिलाओं में ये होता है, वे उत्तम जीवन जीती है, जीवन में इन्हे प्यार, पैसा सभी तरह के भौतिक सुख मिलते हैं।

    कमर पर पड़ने वाले ये डिंपल शारीरिक संरचना के बारे में भीबहुत कुछ बताते है, जैसे कि ये आपके अच्छे रक्त संचार को तो दर्शाते ही है, साथ ही ये शारीरिक फिटनेस का भी परिचायक है, ऐसी महिलाएं बेहद फिट होती हैं और उनका फिगर भी आकर्षक  होता है।

    वहीं कमर पर पड़ने वाले डिंपल बेहतर सेक्स लाइफ का भी संकेत देते हैं, ऐसी महिलाएं काफी कामुक और रोमांटिक मिजाज की होती हैं और इस वजह से इनकी सेक्स लाइफ भी अच्छी रहती है। इस डिंपल के बारे में एक तथ्य से भी है कि ऐसी महिलाओं को ऑर्गेज्म की जल्दी प्राप्ति होती है। दरअसल ये छिद्र अच्छे रक्त संचार को बढ़ावा देते हैं जिससे महिलाओं के पेल्विक एरिया में सक्रियता अधिक होती है और वे आसानी से ऑर्गेज्म तक पहुंच जाती हैं।

    वैसे कमर पर पड़ने वाले डिंपल अनुवांशिक भी हो सकते हैं , जैसे कि अगर आपको कमर पर डिंपल पड़ते हैं तो आपके माता-पिता या आपके भाई-बहनों में भी ये पाए जाने की संभावना अधिक रहती है।

    साथ ही आपको ये भी बता दे कि कमर पर पड़ने वाले डिंपल नेचुरल फीचर हैं यानी कि ये पूरी तरह से कुदरत की देन है और किसी भी तरह के एक्सरसाइज या सर्जरी करके भी बैक पर ऐसे डिंपल नहीं बनवाएं जा सकते है। मतलब अगर नेचुरली आपके कमर ये डिंपल पड़ते दिखते हैं तो समझ जाइए कि आप लाखों में एक हैं ।

  • एक पैर खोया लेकिन हिम्मत नहीं: दिव्यांगˈ की मेहनत देख शर्म से पानी-पानी हो जाएंगे कामचोर लोगˌ

    एक पैर खोया लेकिन हिम्मत नहीं: दिव्यांगˈ की मेहनत देख शर्म से पानी-पानी हो जाएंगे कामचोर लोगˌ

    एक पैर खोया लेकिन हिम्मत नहीं: दिव्यांगˈ की मेहनत देख शर्म से पानी-पानी हो जाएंगे कामचोर लोगˌ

    यह जीवन संघर्षों से भरा हुआ है। यहां आप कब किस मुसीबत में फंस जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है। लेकिन जीवन का असली हीरो वही होता है जो हर मुश्किल का सामना डटकर करता है। कभी हार नहीं मानता है। मेहनत से घबराता नहीं है। कामचोरी के कोई बहाने नहीं बनाता है। आज हम आपको दो ऐसे बंदों से मिलाने जा रहे हैं, जिनके एक-एक पैर नहीं है। लेकिन फिर भी वह बिना किसी शिकायत से मजदूरी जैसा मेहनत भरा काम कर रहे हैं।

    एक पैर नहीं, फिर भी कर रहे मजदूरी
    हम अक्सर देखते हैं कि युवा लोग आलसी और कामचोर हो जाते हैं। उन्हें थोड़ी सी चोट लग जाए या वह बीमार हो जाए तो काम न करने का बहाना बनाते हैं। फिर कुछ ऐसे भी होते हैं जो शरीर से हट्टे कट्टे होने के बावजूद भीख मांगने का काम करते हैं। हालांकि एक खुद्दार इंसान मेहनत की रोटी खाना पसंद करता है। अब इन दो दिव्यांग मजदूरों को ही देख लीजिए। इनका एक पैर नहीं है। ये बैसाखी के सहारे चलते हैं। लेकिन फिर भी मजदूरी और मेहनत कर अपने परिवार का पेट पालते हैं।

    मेहनत और जज्बे की सीख देते ये दो दिव्यांग मजदूर इन दिनों सोशल मीडिया पर बड़े वायरल हो रहे है। इनके वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि दो दिव्यांग मजदूर कंस्ट्रक्शन साइट पर बैसाखी लिए खड़े हैं। एक मजदूर दूसरे मजदूर को तगाड़ी में कच्चा माल देता है। फिर वह दिव्यांग मजदूर बैसाखी के सहारे चलकर कच्चा माल मशीन में डालता है। इस दौरान उनके चेहरे पर कोई तनाव भी नहीं होता है। वह यह काम खुशी-खुशी करते हैं।

    दिव्यांग का संघर्ष देख प्रेरित हुए लोग

    इस वायरल वीडियो को नरेंद्र सिंह (@NarendraNeer007) नाम के ट्विटर यूजर ने साझा किया है। वीडियो के साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा “क्योंकि, जीना इसी का नाम है।” यह वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ा पसंद किया जा रहा है। लोग इस पर कमेंट कर दिव्यांग मजदूरों की तारीफ कर रहे हैं। एक ने बोला ‘ये बहाना बनाकर कामचोरी करने वाले के लिए सीख है।’ दूसरे ने कहा ‘मुझे मेरे देश, मेरी मिट्टी और मेरे देशवासियों से प्यार है।’ वहीं एक बोला ‘आपकी मेहनत और लगन को मेरा सलाम’।

    यहां देखें वीडियो

  • भारत की 5 ऐसी जेल जहां जानेˈ के लिए आपको अपराध नहीं करना पड़ेगाˌ

    भारत की 5 ऐसी जेल जहां जानेˈ के लिए आपको अपराध नहीं करना पड़ेगाˌ

    भारत की 5 ऐसी जेल जहां जानेˈ के लिए आपको अपराध नहीं करना पड़ेगाˌ

    लोगों को अक्सर घूमने का शौक होता है जिसके लिए वे पर्वत, नदियां, पहाड़ या जंगल तक घूमने चले जाते हैं. ज्यादातर लोग मनाली, कश्मीर, शिमला, केरल या गोवा अपने दोस्तों या लवर के साथ जाते हैं लेकिन क्या आपने सुना है कि लोग जेल भी घूमने जाते हैं ? नहीं, चलिए कोई बात नहीं, आज हम आपको भारत की 5 ऐसी जेल के नाम बताएंगे जहां जाने के लिए अपराध करना जरूरी नहीं बल्कि वहां लोग घूमने भी जा सकते हैं. उन जेलों में भारत सरकार ने कुछ ऐसी सुविधा कर रखी है जिसमें ये लाभ शामिल है.

    भारत की 5 ऐसी जेल जहां आप घूम सकते है

    1. सेलुलर जेल (अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह)

    भारतीय इतिहास की सबसे प्रसिद्ध जेल जिसे अंग्रेजों के समय में बनाया गया था. इस जेल में आज़ादी के लिए देश के कई सपूतों ने अपनी ज़िंदगी कुर्बान कर दी थी. बटुकेश्वर दत्त और वीर सावरकर जैसे स्वतंत्रता सेनानी भी इसी जेल में कैद थे. लोग उनकी कुर्बानी को याद रखें इसलिए यहां आम आदमी आराम से जा सकता है लेकिन यहां आप बहुत कम समय ही ठहर सकते हैं.

    2. तिहाड़ जेल (दिल्ली) :

    दिल्ली के पश्चिम में स्थित इस जेल का नाम आपने फिल्मों या न्यूज में बहुत सुना होगा. ये जेल दक्षिणी एशिया की सबसे बड़ी जेल है जिसे पंजाब प्रांत के राजा ने साल 1957 में बनवाया था. अब तक इसमें कई राजनेता और कई नामी मोस्ट वांटेड इस जेल में अपने दिन गुजार चुके हैं. जिसमें लालू प्रसाद यादव और अरविंद केजरीवाल भी शामिल हैं. आप अपनी पहचान दिखा कर कुछ समय के लिए अंदर जा सकते हैं.

    3. हिजली जेल (पश्चिम बंगाल) :

    साल 1930 में हिजली जेल को अविभाजित बंगाल के मिदनापुर में बनाया गया था. साल 1931 में इस जेल का नाम ज्यादा सामने आया क्योंकि इसमें पुलिस द्वारा दो निहत्थों को मार दिया गया था. जिसके विरोध में रवीन्द्र नाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस ने भारी आवाज उठाई थी. इसलिए ये एक ऐतिहासिक जेल है, जिसे देखने के लिए देश के साथ-साथ विदेशी भी आते हैं.

    4. वाइपर आइसलैंड (अंडमान एवं निकोबार द्वीप) :

    इस जेल के लोकप्रिय होने की कोई खास वजह नहीं है लेकिन आजादी के समय इस जेल में कई स्वतंत्रता सेनानियों को प्रताड़ित किया गया था. उनकी कुर्बानी को याद करते हुए कुछ पेंटिंग्स वहां लगाई गई है जिसे देखने लोग इस जेल में घूमने जाते हैं.

    5. अगा खां पैलेस (पुणे) :

    इस जेल को पैलेस इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसे सुल्तान मोहम्मद शाह आगा खां तृतीय ने आगा खां एक पैलेस के रूप में बनवाया था लेकिन अब वो जेल बन गया है. उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं रहा होगा कि उनके इतने मन से बनवाया गया पैलेस कभी भारत की 5 ऐसी जेल में शामिल हो जाएगा जहां लोग घूमने जा सकते हैं लेकिन ये जगह ऐतिहासिक बन गई जिसके कारण इस Jail में लोग घूमने आते हैं और सबको इसकी परमीशन भी है.

  • खुद की जान देने जा रही लड़कीˈ की रिक्शेवाले ने बचाई थी जान 8 साल बाद लड़की ने ऐसे चुकाया एहसानˌ

    खुद की जान देने जा रही लड़कीˈ की रिक्शेवाले ने बचाई थी जान 8 साल बाद लड़की ने ऐसे चुकाया एहसानˌ

    खुद की जान देने जा रही लड़कीˈ की रिक्शेवाले ने बचाई थी जान 8 साल बाद लड़की ने ऐसे चुकाया एहसानˌ

    ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी कि “जिसका कोई नहीं होता, उसका खुदा होता है”. मुसीबत में पड़ने पर लोग अक्सर भगवान को ही याद करते हैं और यदि फरियाद दिल से की जाए तो भगवान उसे बचाने के लिए कोई न कोई फ़रिश्ता भी जरूर भेज देते हैं. आज हम एक ऐसी घटना बताएंगे जिसे जानने के बाद आप भी इस कहावत पर यकीन करने लगेंगे. दुनिया में आज भी भले इंसानों की कमी नहीं हैं और आज हम आपको एक ऐसे ही भले इंसान की कहानी बताने जा रहे हैं. आज के इस पोस्ट में हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे गरीब व्यक्ति की जो रिक्शा चला कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है. बबलू पिछले कई सालों से रिक्शा चला रहा है. आज से करीब 8 साल पहले जब वह रिक्शे से कहीं जा रहा था तब उसे एक आदमी ने बुलाया और अपनी बेटी को रिक्शे पर बिठाते हुए कहा कि इसे ध्यान से स्कूल छोड़ दो. बबलू उस लड़की को स्कूल ले जाने लगा.

    अभी रिक्शा कुछ देर आगे चला ही था कि लड़की अचानक जोर-जोर से रोने लगी. इससे पहले बबलू कुछ समझ पाता लड़की रिक्शे से उतरकर रेल की पटरियों की तरफ तेजी से भागी. बबलू भी उसके पीछे तेजी से भागने लगा. बबलू पर उस लड़की की जिम्मेदारी थी इसलिए उसने लड़की का पीछा किया. बबलू देखता है कि लड़की आत्महत्या करने के लिए रेल की पटरियों के बीचोंबीच जाकर खड़ी हो गयी है. बबलू उस लड़की से पूछता रह गया कि वह आखिर ऐसा क्यों कर रही है लेकिन लड़की ने उसे कुछ नहीं बताया. लड़की ने बबलू को खूब भला बुरा कहा और उसे वहां से चले जाने के लिए बोला. लड़की ने जाहिल, गंवार कहकर बबलू का बहुत अपमान किया लेकिन बबलू ने उसे अकेला नहीं छोड़ा. आख़िरकार, काफी देर बाद जैसे-तैसे समझाने के बाद वह लड़की को उसके घर ले आया. लड़की ने उसे डांट फंटकार कर अपने घर से निकाल दिया और कहा कि अपनी मनहूस शक्ल वह उसे फिर कभी ना दिखाए. लड़की को सही सलामत घर पहुंचकर बबलू वहां से चला गया.

    इस घटना को 8 साल बीत गए. एक दिन रिक्शा चलाते हुए बबलू का भयानक एक्सीडेंट हो गया. आस-पास के लोग उसे अस्पताल लेकर गए. होश आने पर बबलू ने देखा कि एक डॉक्टरनी उसके बगल में खड़ी है. आपको बता दें कि जिस डॉक्टर ने बबलू का इलाज किया वह कोई और नहीं बल्कि वही लड़की थी जिसकी जान बबलू ने 8 साल पहले बचाई थी. लोगों ने जब लड़की से पूछा की क्या वह बबलू को जानती है तो सबके सामने लड़की ने कहा कि वह उसके पापा हैं. लड़की ने ये भी बताया कि अगर 8 साल पहले वह उसकी जान नहीं बचाते तो वह कभी डॉक्टर नहीं बन पाती. ये बात सुनकर बबलू भावुक हो गया और दोनों खूब रोये. आज बबलू और उस लड़की में बाप-बेटी का रिश्ता है और मौका मिलने पर दोनों जरूर मिलते हैं.

    दोस्तों, उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी ये कहानी पसंद आई होगी. पसंद आने पर लाइक और शेयर करना ना भूलें.

  • अपने स्तन के दूध को बेचकर परिवारˈ का सहारा बनी यह महिला बोली- इससे चलता है मेरे परिवार का खर्चˌ

    अपने स्तन के दूध को बेचकर परिवारˈ का सहारा बनी यह महिला बोली- इससे चलता है मेरे परिवार का खर्चˌ

    अपने स्तन के दूध को बेचकर परिवारˈ का सहारा बनी यह महिला बोली- इससे चलता है मेरे परिवार का खर्चˌ

    किसी भी इंसान के जीवन में माँ का योगदान बहुत महत्वपूर्ण होता है। दुनिया में मां की ममता के किस्से बहुत चर्चित हैं। मां की दूध की महत्ता की बात होती है। लेकिन यह सब अब बिकाऊ हो चुका है। पिछले कुछ दशकों से किराए की कोख बिकने लगी। अब मां का दूध भी बिकने लगा।

    बिक रहा है माँ का दूध
    अमेरिका के फ्लोरिडा में एक महिला ने अपना दूध लाखों रुपये में बेचकर लाखों रुपये की कमाई की। 32 वर्षीय इस महिला ने खुद का दूध बेचने के लिए ऑनलाइन इश्तेहार दिया। जूली डेनिस नाम की इस महिला ने पिछले साल अगस्त महीने में एक सरोगेसी के जरिये एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के लिए तो उन्होंने एक जोड़े से लाखों रुपये कमाए ही थे लेकिन उसके बाद उन्होंने अपना दूध बेचना शुरू कर दिया।

    ऐसे करती है दूध तैयार
    उन्होंने कहा कि पंप के लिए मैं घंटों परिवार से दूर रहती हूं, क्योंकि दूध को तैयार करने में भी काफी समय लगता है। सफाई, बैगिंग और स्टरलाइज़ करने की प्रक्रिया भी बेहद समय लेने वाली है। डेनिस कहती है कि वो वह प्रति माह 15,000 औंस दूध पंप करती हैं, उसे अपने फ्रीज़र में स्टोर करती है और इसे आइस पैक से भरे आइस बॉक्स में देश भर में भेजती है।

  • सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर अजीब खुलासा कुत्तोंˈ से बचने के लिए सेना साथ ले गयी थी तेंदुए का पेशाबˌ

    सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर अजीब खुलासा कुत्तोंˈ से बचने के लिए सेना साथ ले गयी थी तेंदुए का पेशाबˌ

    सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर अजीब खुलासा कुत्तोंˈ से बचने के लिए सेना साथ ले गयी थी तेंदुए का पेशाबˌ

    भारतीय सेना द्वारा 28-29 सितम्बर 2016 की रात को की गयी सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में हर किसी को पता है। सर्जिकल स्ट्राइक के काफ़ी समय बाद इस घटना का एक वीडियो सामने आया था। अब सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर एक अन्य रोचक ख़बर सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार पूर्व नगरोटा कोर्प्स कमांडर ले। जनरल राजेंद्र निंबोरकर ने यह क़िस्सा सार्वजनिक किया है। पुणे में थोर्ले बाज़िराव पेशवा प्रतिष्ठान में अपने सम्मान समारोह के दौरान उन्होंने यह क़िस्सा बताया।

    कुत्ते जगा देते पाकिस्तानी सैनिकों को:

    निंबोरकर ने बताया कि किस तरह से पाकिस्तान की सीमा में 15 किलोमीटर अंदर जानें के बाद कुत्तों को शांत रखने के लिए तेंदुए के मल-मूत्र का इस्तेमाल किया था। पूर्व नगरोटा कोर्प्स कमांडर ले. जनरल राजेंद्र निंबोरकर ने बताया कि जीयोलॉजी और एनिमल बिहेवियर पर उनको काफ़ी समझ थी। साथ ही सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक से पहले इलाक़े की रेकी भी की थी। इसके अलावा वहाँ की बायोडाइवर्सिटी को भी बारीकी से समझा था। सर्जिकल स्ट्राइक में दुश्मन सेना के साथ ही एक सबसे बड़ा ख़तरा कुत्तों से भी था। सेना यह समझती थी की कुत्ते भनक लगते ही पाकिस्तानी सेना और आतंकियों को सतर्क कर सकते हैं।

    निंबोरकर ने बताया कि सेना यह जानती थी कि सर्जिकल स्ट्राइक के रास्ते में गाँवों से निकलते समय कुत्ते भौंकना शुरू कर सकते हैं और शायद हमला भी कर सकते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए हमारी टुकड़ियाँ तेंदुएँ का मल-मूत्र लेकर गई थी। मल-मूत्र को गाँव के बाहर छिड़क दिया गया था। यह काम कर गया। क्योंकि अक्सर ही तेंदुएँ कुत्तों पर हमला करते हैं। इसी वजह से तेंदुए की गंध मिलते ही कुत्ते उस इलाक़े से दूर हो जाते हैं। निंबोरकर ने बताया कि इस ऑपरेशन को काफ़ी सीक्रेट रखा गया था। उनकी टुकड़ियों को भी सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में जानकारी थी, लेकिन जगह के बारे में नहीं बताया गया था।। एक दिन पहले ही जगह की जानकारी दी गयी थी।

    आपको बता दे 18-19 सितम्बर 2016 को उरी बेस कैम्प पर आतंकियों ने हमला कर दिया था। इस हमले की वजह से भारत के 19 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद ही भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की घटना को अंजाम दिया था। इसके बाद 28-29 सितम्बर 2016 की रात को सर्जिकल स्ट्राइक की घटना को अंजाम दिया गया। हमले से पहले आतंकियों के लॉंचिंग पैड्स पर ख़ुफ़िया एजेंसियों ने एक हप्ते पहले से ही नज़र रखी हुई थी। रॉ और मिलिट्री इंटेलीजेंस दोनो ने आतंकियों की एक-एक हरकत पर बारीकी से नज़र रखा था।

    ऑपरेशन की जानकारी दी जा रही थी पीएम मोदी को:

    सेना ने हमला करने के लिए कुल 6 कैम्पों को निशाने पर रखा था। हमले के दौरान इनमें से तीन कैम्पों को पूरी तरह से तबाह कर दिया गया। इस हमले में पाकिस्तानी सेना के दो जवान भी मारे गए थे। जानकारी के अनुसार भारत द्वारा की गयी सर्जिकल स्ट्राइक में लगभग 50 आतंकियों के मारे जानें की ख़बर थी।