Category: HB

  • दुनिया में नाई होते ही नहीं हैंˈ बाल कटवाने गए शख्स ने ऐसा क्यों बोला?ˌ

    दुनिया में नाई होते ही नहीं हैंˈ बाल कटवाने गए शख्स ने ऐसा क्यों बोला?ˌ

    कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें हर बात का सबूत चाहिए होता है। जब तक उन्हें सबूत न मिले वह हर चीज को अंधविश्वास का नाम दे देते हैं। ऐसा अधिकतर नास्तिक लोग करते हैं। वे भगवान के अस्तित्व को मानने तक से इनकार कर देते हैं।

    उनका तर्क होता है कि भगवान को आज तक किसी ने देखा नहीं है। हालांकि कई लोगों का मानना है कि दुनिया में एक परम शक्ति अवश्य है जो सबका पालन करती है। लेकिन कुछ लोग अज्ञानता के चलते सच्चाई से अनजान रहते हैं।

    नाई ने भगवान को मानने से किया इनकार

    दुनिया में नाई होते ही नहीं हैंˈ बाल कटवाने गए शख्स ने ऐसा क्यों बोला?ˌ

    एक बार एक शख्स नाई की दुकान पर बाल कटवा रहा था। बातों ही बातों में दोनों के बीच भगवान को लेकर बहस छिड़ गई। नाई बोला “मैं भगवान के अस्तित्व को नहीं मानता। तुम मुझे नास्तिक भी बोल सकते हो।” इस पर शख्स ने पूछा “तुम भगवान को आखिर क्यों नहीं मानते?” इस पर नाई ने बोला “एक बार सड़क पर निकलो और देखों कि भगवान का अस्तित्व कहाँ है? यदि भगवान होते तो क्या इतने लोग भूखे मरते? बीमार पड़ते? दुनिया में हिंसा होती?”

    यह सुन शख्स भी दुविधा में पड़ गया। उसके पास नाई की इन बातों का कोई जवाब नहीं था। इसलिए वह चुपचाप ही नाई की बातें सुनता रहा। जब नाई ने उसके बाल काटकर सेट कर दिए तो वह दुकान से बाहर चला गया। दुकान से बाहर आते ही उसे सड़क पर एक लम्बे-घने बालों वाला व्यक्ति दिखा। उसकी दाढ़ी और बाल बहुत बड़े थे। उसे देख लग रहा था कि उसने महीनों से बाल नहीं कटवाए हैं।

    शख्स ने नाई के अस्तित्व पर उठाए सवाल

    अब शख्स वापस नाई की दुकान में घुसा। उसने नाई से कहा “क्या तुम जानते हो कि नाइयों का कोई अस्तित्व नहीं है।” इस पर नाई बोला “ये क्या फालतू बातें कर रहे हो? क्या तुम देख नहीं सकते, मैं भी एक नाई हूं। कुछ देर पहले ही तुम्हारे बाल काटे।” इस पर शख्स बोला “नहीं नाई नहीं होते हैं। यदि होते तो बाहर उस बंदे जैसे कई लोग लम्बे बाल व बढ़ी हुई दाढ़ी लेकर नहीं घूम रहे होते।”

    नाई ने कहा “यदि वह शख्स नाई के पास बाल कटवाने जाएगा ही नहीं, तो नाई उसके बाल कैसे काटेगा?” इस पर शख्स बोला “हां तुम एकदम सही बोल रहे हो। यही बात तो है। भगवान भी होते हैं। अब कुछ लोग उन पर यकीन ही नहीं करते तो भगवान उनकी मदद कैसे करेगा?”

  • 2 का पहाड़ा नहीं बता पाया दूल्हाˈ दुल्हन बोली नहीं लूंगी फेरे. जाने फिर क्या हुआˌ

    2 का पहाड़ा नहीं बता पाया दूल्हाˈ दुल्हन बोली नहीं लूंगी फेरे. जाने फिर क्या हुआˌ

    2 का पहाड़ा नहीं बता पाया दूल्हाˈ दुल्हन बोली नहीं लूंगी फेरे. जाने फिर क्या हुआˌ

    शादी किसी भी व्यक्ति की लाइफ का सबसे अहम पल होता है। ऐसे में कोई भी ये नहीं चाहेगा कि उसकी शादी एक ऐसे इंसान से हो जाए जिसकी खूबियाँ उसे पसंद नहीं हो। अरेंज मैरिज में वर वधू को एक दूसरे को जानने का मौका नहीं मिल पाता है। ऐसे में कई बार शादी के बाद इनके बीच तलाक हो जाता है। फिर कुछ मामले ऐसे भी आते हैं जहां शादी वाले दिन ही दुल्हन को दूल्हे की कोई ऐसी आदत या कमी के बारे में पता लग जाता है जिसके चलते वह शादी तोड़ देती है।

    अब उत्तर प्रदेश के महोबा जिले का यह मामला ही ले लीजिए। यहां दुल्हन ने दूल्हे से सिर्फ इसलिए शादी तोड़ दी क्योंकि वह उसके एक सिंपल से सवाल का जवाब नहीं दे पाया था। दरअसल दुल्हन ने दूल्हे से दो का पहाड़ा पूछ लिया था। दूल्हा यह पहाड़ा नहीं बता सका। इसके बाद दुल्हन शादी न करने की जिद पर अड़ गई। रातभर सभी लोग उसे मनाते रहे लेकिन वह नहीं मानी।

    दूल्हा वरमाला के समय कुछ अजीब हरकतें कर रहा था। ऐसे में दुल्हन को दूल्हे के दिमाग पर शक हुआ। इसलिए उसने दूल्हे से दो का पहाड़ा पूछ लिया। हालांकि दूल्हा कई कोशिशों के बावजूद दो का सही पहाड़ा नहीं बोल पाया। बस फिर क्या था दुल्हन ने वहीं शादी से इनकार कर दिया।

    दुल्हन के मना करते ही बवाल हो गया। जल्द ही पुलिस भी बुलानी पड़ी। पुलिस के आने पर दोनों पक्ष शादी में हुए खर्च की मांग करने लगे। थानाध्यक्ष विनोद कुमार ने पहले दोनों पक्षों को शांति से सुना और फिर उनका समझौता करवा दिया। दोनों पक्षों ने शादी के गहनें और सभी गिफ्ट्स एक-दूसरे को वापस कर दिए। चुकी दोनों पक्षों में सहमति हो गई थी इसलिए मामले को वहीं छोड़ते हुए कोई भी केस दर्ज नहीं किया गया।

    यह मामला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक तरफ कुछ लोग दुल्हन के फैसले की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ निंदा भी कर रहे हैं। लोगों का तर्क है कि यदि दुल्हन अनपढ़ होती और दूल्हा उसे इस बात के लिए छोड़ देता तो उसकी बुराई होती। सिर्फ कम पढ़ा लिखा होने पर किसी को छोड़ देना सही नहीं है। वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना था कि दूल्हे की एजुकेशन की बात पहले से क्लियर हो जाना चाहिए थी।

    वैसे इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है हमे कमेंट कर जरूर बताएं।

  • दर्जी हमेशा सुई टोपी में और कैंचीˈ पैरों में रखता था बेटे ने वजह पूछी तो मिला शानदार जवाबˌ

    दर्जी हमेशा सुई टोपी में और कैंचीˈ पैरों में रखता था बेटे ने वजह पूछी तो मिला शानदार जवाबˌ

    इंसान में अच्छाई और बुराई दोनों होती है। लेकिन कुछ लोग सामने वाले में सिर्फ बुराई देखते हैं। वे उसकी बुराई समाज में अन्य लोगों को बताकर नफरत फैलाते हैं। उन्हें एक दूसरे के खिलाफ खड़ा कर देते हैं। इससे समाज बंटने लगता है। जबकि होना ये चाहिए कि हमे लोगों की अच्छाई को दूसरों के साथ साझा कर उन्हें जोड़ने की कोशिश करनी चाहिए। समाज को बांटने वालों को कोई पसंद नहीं करता है। वे अक्सर पीछे रह जाते हैं।

    दर्जी के बेटे को मिला जिंदगी का अहम ज्ञान

    दर्जी हमेशा सुई टोपी में और कैंचीˈ पैरों में रखता था बेटे ने वजह पूछी तो मिला शानदार जवाबˌ

    एक बार की बात है। एक शहर में बड़ा फेमस दर्जी रहता था। उसके यहां कपड़े सिलवाने वालों की भीड़ लगी रहती थी। दर्जी का एक बेटा भी था। एक दिन स्कूल की छुट्टी थी, तो वह पिता की दुकान चला गया। यहां उसने काम करते पिता की एक अनोखी बात नोटिस की। उसने देखा कि पापा कैंची से कपड़ा काटने के बाद उसे पैर के पास दबा लेते हैं, जबकि सुई से कपड़े सिलने के बाद उसे टोपी में लगा लेते हैं।

    पापा की इस आदत से बेटे के मन में जिज्ञासा उत्पन्न हुई। उसने बड़े प्यार से पूछा “पापा मैं कब से देख रहा हूं, आप जब कपड़ा काटते हो तो कैंची पैर के नीचे दबा लेते हो, लेकिन सुई से कपड़ा सिलने के बाद उसे टोपी में लगा लेते हो। ऐसा क्यों?” इस पर पिता मुस्कुराए और बोले “इसके पीछे एक बड़ा रहस्य है। ये राज तुम्हारी लाइफ बदल सकता है। क्या तुम सुनना चाहोगे?” बेटे ने उत्साहित होकर कहा “हां, हां। जरूर। बताइए ना।”

    पिता बोले “बेटा देखों, ये कैंची सिर्फ काटने का काम करती है। जबकि सुई जोड़ने का कार्य करती है। काटने वालों का स्थान हमेशा नीचे ही होता है। वहीं जोड़ने वाले को सम्मान के साथ हमेशा ऊपर रखा जाता है। बस यही वजह है कि मैं सुई को टोपी पर जबकि कैंची को पैरों के नीचे रखता हूं।” पिता की ये बातें सुन बच्चे को जिंदगी का अहम सबक मिल गया।

    कहानी की सीख

    समाज और लोगों को जोड़ने वाले लोगों को हमेशा सम्मान मिलता है। उनका स्थान अक्सर ऊपर होता है। वहीं समाज को बांटने वालों या लोगों को तोड़ने वालों की इज्जत नहीं होती है। इसलिए उन्हें लोग समाज में निचला स्थान देते हैं। उनकी इज्जत नहीं करते हैं। इसलिए हमे हमेशा अपने व्यवहार से लोगों को एक करने की कोशिश करनी चाहिए।

  • दो बीवियों ने अपनी मर्जी से करˈ लिया पति का बंटवारा जानें किस पत्नी के हिस्से में क्या आयाˌ

    दो बीवियों ने अपनी मर्जी से करˈ लिया पति का बंटवारा जानें किस पत्नी के हिस्से में क्या आयाˌ

    बंटवारे की जब भी बात सामने आती है तो हम अक्सर चीजों का बंटवारा ही सुनते हैं। जैसे किसी मकान का बंटवारा हो या दुकान का या फिर जमीन और घर को बांट दिया जाए। इन चीजों के बंटवारे की खबरें तो अक्सर सामने आती हैं और बेहद सामान्य भी हैं। अगर हम आपसे पूछे कि क्या कभी पति के बंटवारे की खबर आपने सुनी है।

    जी हां हम कोई मजाक नहीं कर रहे हैं। बिहार में पति का बंटवारा हो गया है। सुनने में भले ही ये मामला बेहद अजीब लग रहा हो लेकिन है एकदम सच। यहां दो बीवियों ने अपने पति का बंटवारा कर लिया। सबसे बड़ी बात है कि दोनों ने ये बंटवारा आपसी सहमति के साथ किया है। चलिए जानते हैं पूरा मामला क्या है और किसके हिस्से में क्या आया है।

    बिहार के पूर्णिया का है मामला

    ये अजीबो-गरीब मामला बिहार राज्य के पूर्णिया जिले से सामने आया है। यहां दो पत्नियों ने आपसी सहमति से अपने पति को ही बांट लिया है। इसी वजह से पूरे इलाके में इस मामले की चर्चा हो रही है और लोग जमकर मजे भी ले रहे हैं। सबसे हैरानी की बात है कि ये बंटवारा परिवार परामर्श केन्द्र ने करवाया है।

    दो बीवियों ने अपनी मर्जी से करˈ लिया पति का बंटवारा जानें किस पत्नी के हिस्से में क्या आयाˌ

    मामला भवानीपुर थाने का है। यहां के गोडियारी इलाके में रहने वाली एक महिला शिकायत लेकर पहुंची थी। उस महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति की पहले ही शादी हो चुकी थी। उसके 6 बच्चे भी थे। इसके बाद भी उसने झूठ बोलकर उसको बरगलाया और उसके साथ भी शादी कर ली।

    साथ नहीं रखना चाहता था पति

    महिला का आरोप था कि उसने शादी तो कर ली लेकिन वो अब उसे अपने साथ नहीं रखना चाहता है। महिला का कहना था कि वो उसे इस्तेमाल करके अलग करने की फिराक में है। वहीं आरोपी युवक की पहली पत्नी भी उसका साथ नहीं छोड़ना चाहती और वो भी पति के साथ ही रहना चाहती है।

    दोनों महिलाओं की जिद सुनकर परिवार परामर्श केन्द्र के अफसर भी हैरान रह गए। उनकी भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर इस मसले का हल कैसे निकाला जाए। इसके बाज केन्द्र ने एक अजीब फैसला सुनाया जिसको दोनों ही बीवियों ने मान भी लिया। केन्द्र ने पति का दोनों बीवियों में बंटवारा कर दिया।

    जानें कैसे हुआ पति का बंटवारा

    अब हम आपको बताते हैं कि आखिर दोनों बीवियों के बीच पति का बंटवारा कैसे हुआ। केन्द्र के फैसले के अनुसार पति को अपनी दोनों बीवियों को साथ रखना होगा। इतना ही नहीं उनके खाने से लेकर पहनने तक का इंतजाम उसको ही करना होगा। पति दोनों बीवियों को अलग-अलग घरों में रखना होगा।

    परिवार परामर्श केन्द्र के निर्णय के मुताबिक अब पति को पहली पत्नी को 15 दिन का समय देना होगा। यानि वो पहली पत्नी के साथ घर में 15 दिन रहेगा। वहीं दूसरी पत्नी के लिए भी उसको इतना ही समय देना होगा। वो दूसरी बीवी के साथ भी 15 दिन ही रहेगा। केन्द्र ने फैसले के बाद तीनों लोगों से बॉन्ड भी भरवाया है ताकि भविष्य में कोई मुकर न सके।

  • कामुक मां की घिनौनी हरकतें: ‘काश तुमˈ 18 साल के होते’ गर्दन पर किया Kiss कपड़े उतारे और…ˌ

    कामुक मां की घिनौनी हरकतें: ‘काश तुमˈ 18 साल के होते’ गर्दन पर किया Kiss कपड़े उतारे और…ˌ

    इंटरनेशनल डेस्क। फ्लोरिडा के ओकाला से हाल ही में एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। एक शख्स ने अपनी पत्नी को अपने ही 15 साल के बेटे के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा।

    कामुक मां की घिनौनी हरकतें: ‘काश तुमˈ 18 साल के होते’ गर्दन पर किया Kiss कपड़े उतारे और…ˌ

    रिपोर्ट के अनुसार महिला जिसकी पहचान येट्स के रूप में हुई है और जो पेशे से नर्स है ने शाम को अपने दो बच्चों को सुला दिया। इसके बाद उसने लिविंग रूम के सोफे पर अपने 15 वर्षीय सौतेले बेटे के साथ घिनौनी हरकत को अंजाम दिया जिसे पति ने अचानक घर लौटने पर रंगे हाथों पकड़ लिया। इस घटना ने परिवार और आसपास के लोगों को स्तब्ध कर दिया है।

    रिपोर्ट के अनुसार यह घिनौनी घटना पिछले साल जुलाई में फ्लोरिडा के ओकाला में हुई थी जब लड़का गर्मियों की छुट्टियों में अपने पिता से मिलने गया था। पीड़ित लड़के ने पुलिस को बताया कि आरोपी येट्स ने कई हफ्तों तक उसे बहकाया। गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक घटना की रात उन्होंने पहले साथ में वीडियो गेम खेले और फिल्म देखी जबकि लड़के का पिता काम पर था। लड़के ने बताया कि फिल्म देखने के दौरान जब उसने येट्स को बोरिंग कहा तो उसने उसे चूमा और कहा कि वह कामवासना से भरी हुई है क्योंकि उसने दो हफ्ते से योन संबंध नहीं बनाए थे। उसने कथित तौर पर यह भी कहा, “काश तुम 18 साल के होते, क्योंकि तुम अभी बहुत छोटे हो।” इसके बाद महिला ने लड़के के साथ यौन संबंध स्थापित किए उसी दौरान लड़के का पिता घर लौटा और उन्हें आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया।

    लड़के के पिता ने तुरंत उसे उसके दादा-दादी के घर भेज दिया। अगले दिन येट्स ने लड़के को फिर से फोन किया और कथित तौर पर कहा कि काश उसके पिता ने उन्हें न पकड़ा होता। लड़के ने पुलिस को यह भी बताया कि इस घटना से पहले भी येट्स कई बार उसके साथ अत्यधिक छेड़खानी करती थी और लगातार अपनी कामेच्छा के बारे में बात करती थी। लड़के के पिता ने खुद पुलिस को इस घटना की सूचना नहीं दी थी बल्कि एक चिंतित रिश्तेदार ने पुलिस को जानकारी दी जिसके बाद येट्स को गिरफ्तार किया गया। लड़के के पिता लाइनमैन का काम करते हैं और घटना के समय वह काम पर थे।

    खबर के मुताबिक महिला और उसका सौतेला बेटा रात लगभग 1 बजे एक हॉरर फिल्म देख रहे थे। इसी दौरान महिला धीरे-धीरे अपने सौतेले बेटे की ओर बढ़ी। पुलिस को दिए बयान में महिला ने बताया कि फिल्म देखते समय उसने खुद को कामुक महसूस किया था। उसने यह भी कहा कि उसे दो हफ्ते से पीरियड्स नहीं हो रहे थे और उसने इस दौरान कोई यौन संबंध भी नहीं बनाया था जिसके कारण वह उत्तेजित हो गई थी।

    इन भावनाओं के वशीभूत होकर महिला ने कथित तौर पर 15 वर्षीय लड़के की गर्दन पर किस किया। इसके बाद उसने अपने कपड़े उतार दिए और लड़के के साथ यौन संबंध बनाना शुरू कर दिया। दुर्भाग्य से इसी दौरान महिला का पति जो इन सब हरकतों से अनजान था काम से घर लौट आया। उसने अपनी पत्नी को अपने 15 वर्षीय बेटे के साथ पूरी तरह नग्न अवस्था में देखकर होश खो बैठे। पिता को देखते ही नाबालिग लड़का डर के मारे घर से भाग गया।

    फिलहाल पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है और आरोपी को कड़ी सजा दिलाने की तैयारी में है।

  • पत्नी पर ग़ुस्सा करना इस व्यक्ति कोˈ पड़ गया बहुत महँगा महिला ने चबा लिए 4 लाख रुपए करवाना पड़ा अस्पताल में भर्तीˌ

    पत्नी पर ग़ुस्सा करना इस व्यक्ति कोˈ पड़ गया बहुत महँगा महिला ने चबा लिए 4 लाख रुपए करवाना पड़ा अस्पताल में भर्तीˌ

    पत्नी पर ग़ुस्सा करना इस व्यक्ति कोˈ पड़ गया बहुत महँगा महिला ने चबा लिए 4 लाख रुपए करवाना पड़ा अस्पताल में भर्तीˌ

    अक्सर यह कहा जाता है कि अपनी बीबी को ग़ुस्सा दिलाना अच्छा नहीं होता है। बीबी को अगर एक बार ग़ुस्सा आ आ जाए तो वह जल्दी ठंडा नहीं होता है और इसका ख़ामियाज़ा व्यक्ति को भुगतना पड़ता है। कई बार पत्नी को ग़ुस्सा दिलाना इतना महँगा पड़ जाता है कि आप सपने में भी इसके बारे में नहीं सोच सकते हैं। कई बार ग़ुस्सा दिलाने पर बीबी पति को छोड़ देती है तो कई बार वह कुछ ग़लत क़दम भी उठा लेती है।

    पति-पत्नी का रिश्ता बहुत ही प्यारा होता है। पति-पत्नी के बीच काफ़ी प्यार होता है, लेकिन कई बार दोनो के बीच नोक-झोकि भी होती है। नोक-झोक के बीच भी पति-पत्नी का प्यार कम नहीं होता है। इससे दोनो का प्यार बढ़ता ही है। कहा जाता है कि पति-पत्नी के बीच हल्की-फुल्की नोक-झोक होती रहनी चाहिए, इससे दोनो के रिश्ते में तजग़ी बनी रहती है। लेकिन कई बार जब ये नोक-झोक ज़्यादा बढ़ जाती है तो दोनो को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार यह नोक-झोक दोनो के अलगाव की भी वजह बन जाता है।

    झगड़े की वजह से होता है दोनो का नुक़सान:

    नोक-झोक तभी तक अच्छा होता है, जब तक इससे किसी का नुक़सान नहीं होता है। लेकिन जब यह नोक-झोक एक-दूसरे के नुक़सान की वजह बन जाए तो यह अच्छा नहीं होता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि पति-पति का झगड़ा बढ़ जाने के बाद बहुत ज़्यादा नुक़सान झेलना पड़ता है। हाल ही में ऐसी ही एक घटना देखने को मिली है, जिसमें पति-पत्नी के झगड़े की वजह से पति को काफ़ी नुक़सान झेलना पड़ा। पति ने पत्नी को डाँट दिया, और इसके बाद पत्नी ने जो क़दम उठाया उसे देखकर पति की हालत ही ख़राब हो गयी।

    महिला ने चबा लिए 4 लाख रुपए:

    जानकारी के अनुसार कोलंबिया के एक दम्पति के बीच छोटी सी बहस हो जाती है, जो धीरे-धीरे एक झगड़े में बदल जाती है। इससे पत्नी को बहुत ज़्यादा ग़ुस्सा आ जाता है। उसके बाद पत्नी ने घर में रखे 7000 डॉलर लगभग 4 लाख रुपए को चबा लिया। कहा जाता है कि ग़ुस्सा ख़ुद का ही दुश्मन होता है, जिसे इस महिला ने साबित कर दिया। नोट चबाने की वजह से महिला की तबियत काफ़ी बिगड़ गयी। इसके बाद तुरंत ही महिला को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहाँ डॉक्टरों ने सर्जरी करके महिला के पेट से पैसे निकाले। इसके बाद डॉक्टर ने दम्पति को झगड़ा ना करने के लिए कहा।

    करवाना पड़ा अस्पताल में भर्ती:

    जानकारी के अनुसार पत्नी अपने पति के साथ कहीं घूमने जाना चाहती थी। टूर के लिए वह कई महीने से पैसे एकत्र कर रही थी। बाद में किसी वजह से टूर की प्लानिंग को लेकर दम्पति में बस हो गयी। इसके बाद महिला को इतना ग़ुस्सा आया कि टूर के लिए एकत्र किए पैसे को वह खा गयी। बाद में सेहत बिगड़ने पर उसे अस्पताल एम भर्ती करवाया गया। अस्पताल में महिला की तुरंत सर्जरी की गयी और पेट से सारे पैसे निकाले गए। इसके बाद महिला की जान बच पायी।

  • मात्र 312 रुपए के लिए 41 वर्षोंˈ तक कोर्ट के लगाती रही चक्कर 11 जज भी नही दिलवा पाए इंसाफˌ

    मात्र 312 रुपए के लिए 41 वर्षोंˈ तक कोर्ट के लगाती रही चक्कर 11 जज भी नही दिलवा पाए इंसाफˌ

    मात्र 312 रुपए के लिए 41 वर्षोंˈ तक कोर्ट के लगाती रही चक्कर 11 जज भी नही दिलवा पाए इंसाफˌ

    भारतीय कानून किस तरह से काम करता है यह तो आप सब जानते ही हैं। अदालत में किसी भी फैसले पर आसानी से सुनवाई नहीं होती है, जब तक पूरी तरह से गवाहों और सबूतों को ना तराश लिया जाए तब तक कानून कोई फैसला नहीं सुनाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं हमारी कानून व्यवस्था इतनी धीरे चलती है कि उसमें सालों तक केस पेंडिंग पड़े रहते है, फैसला आने तक तो मुकदमा करने वालों की मौत हो जाती है। ऐसा ही कुछ एक महिला के साथ हुआ, 41 सालों से एक केस के चक्कर में करत के दिन रात चक्कर लगाते लगाते थक गयी मगर उसको कभी इंसाफ नहीं मिला। वहीँ अब शुक्रवार को आखिरकार कोर्ट ने इस पूरे मामले की गड़बड़ी पकड़ी और महिला को इंसाफ दिलवाया। जी हां आज हम आपको ऐसी ही एक सच्ची घटना के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसे सुनकर आपको भी एक बार सदमा जरूर लगेगा।

    साल 1975 में 37 साल की गंगा देवी पर जिला जज द्वारा एक प्रॉपर्टी अटैचमेंट के खिलाफ नोटिस जारी किया गया था। गंगा ने उस केस के खिलाफ सिविल जज के खिलाफ कोर्ट में अपनी याचिका दायर की। साल 1977 में गंगा के पक्ष में इस केस की सुनवाई हुई, लेकिन उनकी मुसीबतें यहीं पर खत्म नहीं हुई थी।

    केस दर्ज कराने पर अदालत द्वारा उन्हें फीस जमा कराने के लिए कहा, उन्होंने अदालत की फीस 312 रुपए जमा करा भी दी। लेकिन उनके दस्तावेजों के साथ उन्हें फीस की राशि जमा करने वाली पर्ची नहीं मिली क्योंकि वह कहीं खो गई थी। हालांकि गंगा फीस की राशि अदालत में जमा कर चुकी थी, लेकिन अदालत में वह पर्ची कहीं गायब हो गयी।

    साल 1975 में 312 रुपए की कीमत किसी बड़ी रकम के बराबर मानी जाती थी। गंगा देवी द्वारा फीस की रकम अदालत में जमा करा दी गई, लेकिन पर्ची खो जाने की वजह से उनसे दोबारा से फीस की मांग की गई जिसे भरने से उन्होंने इंकार कर दिया। भले ही इस केस की सुनवाई 31 अगस्त 2018 को पूरी हो गई और गंगादेवी इस केस को जीत गई, और अदालत द्वारा यह निष्कर्ष पाया गया कि प्रशासन द्वारा ही कुछ भूल हो गई थी, जिसकी वजह से वह पर्ची नहीं मिली। लेकिन गंगा देवी को शायद ही अब कभी कानून पर विश्वास हो पाएगा। इस पूरे केस के दौरान काम करने वाले वकील ने बताया कि गंगादेवी की यह फाइल 11 जजों के पास गई, लेकिन सुनवाई किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची। 41 साल पहले 312 रुपए की कीमत सिर्फ वही लोग समझ सकते हैं, जो बहुत मेहनत करके पैसा कमाया करते थे। इसलिए गंगा देवी ने दोबारा अदालत की फीस भरने से मना कर दिया था जिसके चलते इतना लंबा केस चला, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

    मिर्जापुर के सिविल जज के सामने यह मामला आते ही उन्होंने जांच पड़ताल में पाया की फीस गंगादेवी द्वारा जमा करा दी गई थी, लेकिन प्रशासन द्वारा ही फाइल में कुछ गड़बड़ी हुई थी जिसकी वजह से पर्ची खो गई थी। हालांकि इस खबर को सुनने के लिए कोर्ट में गंगा देवी का कोई भी रिश्तेदार मौजूद नहीं था। उस फीस की पर्ची उनके परिवार वालों को स्पीड पोस्ट से पहले ही हफ्ते भेज दी गई। 41 साल में इस मामले की फाइल 11 जजों के सामने से होकर गुजरी, लेकिन कोई भी गलती को नहीं पकड़ पाया। ऐसे में अब जाकर गंगा देवी को राहत की सांस मिल चुकी है.

  • गांव का नाम शारीरिक संबंध पर रखाˈ ग्रामीण हुए परेशान.. किसी को बताओं को शर्म से हो जाते हैं लालˌ

    गांव का नाम शारीरिक संबंध पर रखाˈ ग्रामीण हुए परेशान.. किसी को बताओं को शर्म से हो जाते हैं लालˌ

    गांव का नाम शारीरिक संबंध पर रखाˈ ग्रामीण हुए परेशान.. किसी को बताओं को शर्म से हो जाते हैं लालˌ

    ‘नाम में क्या रखा है?’ आप लोगों ने ये कहावत कई बार सुनी होगी। लेकिन यदि नाम ऐसा हो जिसे बोलने में भी शर्म आए तो बेहतर यही होता है कि उस नाम को बदल दिया जाए। अब स्वीडन के एक गांव (Swedish Village) की इस अजीबोगरीब समस्या को ही ले लीजिए। यहां एक गाँव के लोग अपने गाँव के नाम को लेकर बड़ी शर्मिंदगी महसूस करते हैं। उन्हें अपने गाँव का नाम किसी को भी बताने में शर्म आती है। क्योंकि उसका नाम किसी अश्लील चीज से मेल खाता है।

    गाँव का नाम बोलने में आती है शर्म

    हम यहां जिस गाँव की बात कर रहे हैं वह स्वीडन (Sweden) का Fucke गांव है। इस गाँव के शुरुआती चार अक्षर अंग्रेजी की गाली से मिलते हैं। जिसका यदि हिंदी अनुवाद करें तो अर्थ शारीरक संबंध बनाने से मिलता जुलता होता है। गाँव वालों का कहना है कि उन्हें इस नाम से बड़ी दिक्कत होती है। यहां तक कि वे  सोशल मीडिया पर भी अपने गाँव का नाम नहीं लिख सकते हैं। सोशल मीडिया सेंसरशिप (Social Media Censorship) उन्हें इस नाम को लिखने की अनुमति नहीं देती है।

    नाम बदलने के लिए छेड़ा अभियान

    अपने गाँव के नाम से परेशान होकर यहां के राहवासियों ने एक अभियान छेड़ दिया है। उन्होंने अपने गाँव का नाम बदलकर Dalsro (शांत घाटी) रखने की मांग की है। हालांकि गाँव का नाम बदला जाएगा या नहीं यह निर्णय नेशनल लैंड सर्वे विभाग लेगा। इसके पहले इस विभाग ने Fjuckby गांव का नाम बदलने की मांग को खारिज कर दिया था। विभाग का कहना था कि ये एक एतिहासिक नाम है इसलिए इसे बदला नहीं जा सकता है। Fucke नाम भी दशकों पहले रखा गया था। ये भी एक एतिहासिक नाम है। ऐसे में इस बात के चांस ज्यादा है कि विभाग इस गाँव का नाम भी ना बदले।

    फ़ेसबुक भी रिजेक्ट कर देता है नाम

    यहां रहने वाले एक स्थानीय ग्रामीण ने एक लोकल टीवी चैनल को अपना दर्द बयां किया। उसने बताया कि हमे इस नाम से बहुत शर्म महसूस होती है। सोशल मीडिया सेंसरशिप को भी ये नाम आपत्तिजनक या अश्लील लगते हैं। Facebook Algorithms हमारे गाँव के नाम को हटा देती है। ऐसे में हम इस पर अपने गाँव से जुड़ा कोई विज्ञापन भी नहीं डाल पाते हैं।

    weird village name

    अब इस मामले पर नेशनल लैंड ट्रस्ट स्वीडन के नेशनल हेरिटेज बोर्ड और भाषा एवं लोककथा संस्थान से मिलकर कोई फैसला ले सकता है। बताते चलें कि Fucke गाँव में महज 11 परिवार रहते हैं।

    वैसे क्या आपको कभी किसी अजीब नाम की वजह से शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है?

  • यहाँ पुलिस में भर्ती होने के लिएˈ लड़कियों को देना पड़ता है अपनी वर्जीनिटी का सबूतˌ

    यहाँ पुलिस में भर्ती होने के लिएˈ लड़कियों को देना पड़ता है अपनी वर्जीनिटी का सबूतˌ

    यहाँ पुलिस में भर्ती होने के लिएˈ लड़कियों को देना पड़ता है अपनी वर्जीनिटी का सबूतˌ

    इस दुनिया में कई ऐसी चीज़ें होती हैं जो सच में बहुत ही अजीब होती हैं। कई बार उन चीज़ों के बारे में जानकर काफ़ी हैरानी होती है। लेकिन कई देश ऐसे भी हैं, जो अजीब हरकतें करने के मामले में सबको पीछे छोड़ देते हैं। जी हाँ आज हाम आपको एक ऐसे ही देश के बारे में बताने जा रहे हैं, जहाँ कुछ ऐसा काम किया जाता है, जिसके बारे में आप सपने में भी नहीं सोच सकते हैं।

    इंडोनेशिया में महिलाओं का पुलिस बनना है बहुत ही मुश्किल:

    दरअसल हमारे देश में महिलाओं का पुलिस बनना बहुत ही आसान होता है, लेकिन अगर बात इंडोनेशिया की हो तो वहाँ महिलाओं का पुलिस बनना बहुत ही मुश्किल होता है। वहाँ पुलिस बनने के लिए महिलाओं की आयु 17.5 से 22 के बीच होनी चाहिए। इसके साथ ही वो शादीशुदा नहीं होनी चाहिए और उन्हें उच्च शिक्षा भी हासिल किया हुआ होना चाहिए। यहाँ तक तो समझ में आता है, लेकिन इसके बाद की जो प्रक्रिया है, वह सुनकर आपका दिमाग़ ही हिल जाएगा। जी हाँ यहाँ महिलाओं को पुलिस में भर्ती होने से पहले अपनी वर्जीनिटी का सबूत भी देना होता है।

    आपको जानकर हैरानी होगी कि यहाँ की महिलाओं की वर्जीनिटी टेस्ट के लिए जाँच भी किया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें वर्जीनिटी टेस्ट वह टेस्ट होता है जब किसी महिला के साथ ज़्यादती होती है तो उसके बाद सच्चाई जानने के लिए यह टेस्ट किया जाता है कि, सच में उसके साथ ज़्यादती हुई है या नहीं। इस टेस्ट को टू फ़िंगर टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है। केवल यही नहीं इंडोनेशिया में महिलाओं को पुलिस में भर्ती होने के लिए चयन अधिकारियों के सामने अपनी सुंदरता का प्रदर्शन भी करना पड़ता है।

    चयन अधिकारियों में कोई महिला नहीं होती है, बल्कि सभी के सभी पुरुष होते हैं। यहाँ उन्ही लड़कियों का चुनाव किया जाता है, जो दिखने में बहुत सुंदर होती है। इंडोनेशिया में आज़ादी के बाद 1946 में पुलिस फ़ोर्स का गठन किया गया था। आपको बता दें टू फ़िंगर टेस्ट की मदद से बलात्कार पिड़िता महिला के वजाइना के लचीलेपन की जाँच की जाती है। अंदर प्रवेश की गयी उँगलियों की संख्या से डॉक्टर अपनी राय देते हैं कि महिला सक्रिय यौन लाइफ़ में है या नहीं।

    आपको बता दें भारत में ऐसा कोई क़ानून नहीं है, जो डॉक्टर को ऐसा करने की अनुमति देता हो। लेकिन इंडोनेशिया में जो महिलाएँ पुलिस में भर्ती होना चाहती हैं, उन्हें अपने कुंवारेपन का सबूत देना पड़ता है। अगर कोई लड़की पुलिस में भर्ती होना चाहती है तो उसे शारीरिक सम्बंध नहीं बनाना होता है। आपको बता दें टू फ़िंगर टेस्ट बहुत ही विवादित जाँच है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे बहुत ही अपमानजनक और मानव अधिकारों का उलंघन बताया है। कई देशों में टू फ़िंगर टेस्ट अवैध घोषित किया गया है।

  • 116 बच्चों का बाप है ये शख्स,ˈ महिलाएं फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज करती है बच्चों की डिमांडˌ

    116 बच्चों का बाप है ये शख्स,ˈ महिलाएं फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज करती है बच्चों की डिमांडˌ

    116 बच्चों का बाप है ये शख्स,ˈ महिलाएं फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज करती है बच्चों की डिमांडˌ

    आज के इस युग में कोई इंसान आखिर कितने बच्चों का पिता बन सकता है? दो, चार, आठ या दस? लेकिन आज हम आपको 65 साल के एक ऐसे शख्स से मिलाने जा रहे हैं जो 116 बच्चे पैदा कर चुका है। दरअसल इंग्लैंड के डर्बी में रहने वाले क्लीवे जोंस एक स्पर्म डोनर हैं। बीते आठ सालों में उनके स्पर्म द्वारा 116 रजिस्टर्ड बच्चे पैदा हो चुके हैं।

    क्लीवे जोंस इतने अधिक फेमस है कि उन्हें फेसबुक पर मां बनने की इच्छुक महिलाओं की फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है। दरअसल कोरोना काल में आईवीएफ इंडस्ट्री बेहद नुकसान में रही है। वहीं स्पर्म डोनेट करने वालों में भी भारी कमी देखने को मिली है। ब्रिटेन में 35 के ऊपर पहुंच गई कई महिलाएं शादी की बजाय आईवीएफ से प्रेग्नेंट होना पसंद करती है।

    कोरोना काल में हुई स्पर्म डोनर की कमी की वजह से फेसबूक पर स्पर्म डोनर को खोजा जा रहा है। ऐसे में कई लोगों ने अपनी प्रोफ़ाइल में स्पर्म डोनर लिख रखा है। ब्रिटेन में आईवीएफ डोनर को 35 यूरो की रकम दी जाती है। वहीं जब बच्चा 18 साल का होता है तो उसे अपने बायोलॉजिकल पिता के बारे में जानने का राइट मिलता है।

    एक सर्वे के अनुसार यूके में हर साल 7 हजार स्पर्म बेचे जाते हैं। हालांकि इस कोरोना काल में यहां के 400 प्रतिशत आईवीएफ सेंटर्स पर ताला लग गया है। ऐसे में स्पर्म डोनेशन से गर्भवती होने वाली महिलाओं को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

    पहले यूके की महिलाएं अमेरिका और डेनमार्क से स्पर्म मंगाती थी लेकिन अब फेसबुक इनका नया अड्डा बन गया है। ये रास्ता काफी सस्ता भी है। 65 साल के क्लीवे जोंस ने भी फेसबूक पर अपनी प्रोफ़ाइल बना रखी है। वे महिलाओं को मुफ़्त में अपना स्पर्म डोनेट करते हैं। उन्हें ऐसा कर खुशी मिलती है। जब कोई महिला उनकी वजह से मां बनने का सुख प्राप्त करती है तो उन्हें एक अलग लेवल की संतुष्टि मिलती है।

    क्लीवे जोंस इस काम को कुछ और सालों तक करना चाहते हैं। उन्होंने अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल में महिलाओं को आकर्षित करने के लिए फिजिकल डिटेल्स सहित अपनी कई क्वालिटीज़ मेंशन कर रखी है। इनसे महिलाएं इतनी इंप्रेस हो जाती है कि कईयों ने तो उन्हें दोबारा स्पर्म डोनेट करने की विनती कर डाली।

    क्लीवे जोंस ने अब तक 116 स्पर्म डोनेट कर बच्चों कि नई ज़िंदगी दी है। इसमें से वे 10 अपने पैदा किए हुए बच्चों से मिल भी चुके हैं। ब्रिटेन में इन दिनों स्पर्म डोनर की बहुत डिमांड चल रही है।