बढ़ते विज्ञानं और टेक्नोलॉजी के चलते आजकल मार्केट में कई तरह के उपकरण मौजूद हैं, जिससे झट से पता चल जाता है कि महिला गर्भवती है या नहीं | लेकिन पहले के समय में लोग किस तरह से महिला के प्रेग्नेंट होने का पता लगाते थे?
क्या आप जानते है?आज से 3500 साल पहले भी प्रेग्नेंसी टेस्ट किए जाते थे | उस समय लोगों के पास इसका भी पता लगाने का तरीका मौजूद था कि महिला के गर्भ में पल रहा बच्चा बेटी है या बेटा | शोध के मुताबिक मिस्र में कई सौ साल पहले भी प्रेग्नेंसी टेस्ट किए जाते थे |
जानकारी के मुताबिक 1500 से 1300 ईसा पू. के बीच महिलाओं को प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए अपना यूरिन (पेशाब) गेहूं और जौ के एक बैग में डालना होता था | फिर उस बैग को कुछ दिनों तक देखा जाता था और अगर गेहूं और जौ का बीज उगने लगता तो इसका मतलब होता कि महिला गर्भवती हैं और यदि ऐसा कुछ भी नहीं उगता तो इसका मतलब महिला गर्भवती नहीं है |
रिपोर्ट्स की माने तो लड़की और लड़के के जन्म की पहचान के लिए भी तरीके लिखे गए हैं | अगर उस समय अगर बैग में सिर्फ जौ उगता था तो यह समझा जाता कि लड़के का जन्म होने वाला है, और अगर गेहूं उगता तो समझा जाता कि लड़की का जन्म होगा | हालांकि ये तरीका कितना सही था या नहीं अभी इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है |
शादी एक पवित्र बंधन होता है। इस दौरान हिंदू धर्म में कई तरह के रीति रिवाज निभाए जाते हैं। हर परंपरा के पीछे एक कारण भी होता है। शादी के बाद दुलह-दुल्हन सुहागरात मनाते हैं। इस दौरान दुल्हन के लिए बेडरूम को फूलों से सजाया जाता है। लेकिन ऐसा क्यों करते हैं? क्या आप इसकी असली वजह जानते हैं? शर्त लगा लो, आप में से 99% लोगों को इसका असली कारण नहीं पता है।
इस कारण सुहागरात पर फूलों से सजाते हैं दुल्हन का कमरा
1. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुहागरात पर दुल्हन के कमरे को फूलों से सजाने पर उसकी शादीशुदा जिंदगी भी इन फूलों की तरह महकती है। दूल्हा-दुल्हन की पहली रात की शुरुआत एक खुशबूदार माहौल में होती है। इसके बाद इन दोनों का रिश्ता आजीवन ऐसा ही महकता रहता है।
2. फूल माहौल को रोमांटिक बनाने में भी मदद करते हैं। इन्हें अपने आसपास देखकर, इन्हें छूकर और इनकी सुगंध तो महसूस कर इंसान और भी ज्यादा रोमांटिक हो जाता है। यह फूल इंसान की कामेच्छा को और बढ़ाते हैं। इससे दूल्हा और दुल्हन की सुहागरात जोश और रोमांस से भरी रहती है।
3. माना जाता है कि फूल दूल्हा-दुल्हन के जीवन में मिठास और प्यार का रंग घोलते हैं। इसलिए कुछ लोग इन फूलों के साथ कमरे में मिठाई भी रखते हैं। इन फूलों से निकली पॉजिटिव एनर्जी दूल्हा-दुल्हन को रातभर तरोताजा रखती है। वह एक सकारात्मक माहौल में संबंध बनाते हैं। यह चीज इनके रिश्ते को और मजबूत करती है।
4. सुहागरात के कमरे में वैसे तो कई प्रकार के फूल लगाए जाते हैं। लेकिन इस दिन गुलाब के फूलों का खास महत्व होता है। गुलाब पूरी दुनिया में प्यार का प्रतीक माना जाता है। इसलिए सुहागरात का डेकोरेशन लाल रंग के गुलाब के बिना अधूरा है। वैसे आप चाहें तो लैवेंडर की खुशबू के इत्र का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे माहौल और भी रोमांटिक और दिलकश बन जाएगा।
5. शादी के बाद दुल्हन अपना घर छोड़कर एक नए घर में आती है। यहां आने से पहले उसके मन में डर और नर्वसनेस रहती है। ऐसे में यदि हम उसका बेडरूम फूलों से सजा दें तो उसका उदास मन खुश हो जाता है। वह अपना ये शानदार वेलकम देख खुश हो जाती है। उसे स्पेशल होने का एहसास होता है। इससे उसका न सिर्फ दूल्हे से, बल्कि घर के हर सदस्य से लगाव बढ़ जाता है। फिर वह जीवनभर दिल से उनकी सेवा करती है।
वैसे आपकी सुहागरात पर कमरे को किस तरह से सजाय गया था? अपने अनुभव कमेंट में जरूर शेयर करें।
आज कल इंटरनेट का जमाना है तो ज्यादातर लोग अपने हर सवाल का जवाब गूगल पर ढूंढना ही पसंद करते है, क्योंकि इससे आसानी से और सही जवाब मिल जाता है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि गूगल के बिना हमारी जिंदगी अधूरी सी ही लगती है। जी हां यह जानकारी का वो खजाना है जो कई समस्याओं को हल करने का समाधान निकालता है। यहां तक कि कुछ लोग गूगल पर अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी परेशानियों और सवालों के जवाब भी ढूंढते है। तो वही नई नवेली दुल्हन शादी के बाद गूगल पर कई तरह की बातों को लेकर जानकारी हासिल करती है। ऐसे में गूगल भी कभी किसी को निराश नहीं करता और हर सवाल का जवाब बखूबी देता है।
शादी के बाद गूगल पर सबसे ज्यादा ये सर्च करती है नई दुल्हन :
गौरतलब है कि हाल ही में गूगल को लेकर एक रिसर्च की गई थी और खास करके शादीशुदा महिलाओं को लेकर जो परिणाम सामने आएं है, उसके बारे में जान कर आप भी हैरान रह जायेंगे। जी हां शादी के बाद महिलाएं किस तरह की चीजें गूगल पर ढूंढती है, इसके बारे में जान कर पुरुषों को हैरानी जरूर हो सकती है। तो चलिए अब आपको इस बारे में सब कुछ विस्तार से बताते है।
पति को आकर्षित कैसे करे : बता दे कि शादी के बाद लड़कियां चाहती है कि उनके पति हमेशा उनकी तरफ आकर्षित रहे और अध्ययनों से यह बात पता चली है कि विवाहित लड़कियां अपने पति को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए गूगल पर काफी कुछ सर्च करती है।
पति की पसंद और न पसंद : बता दे कि हर शादीशुदा लड़की ये जानना चाहती है कि उसके पति को कौन सी चीजें पसंद है और कौन सी चीजें न पसंद है। हालांकि इन बातों को लेकर पति भी ये सर्च करते है कि पत्नी को कौन सी चीजें परेशान कर सकती है और उन्हें खुश कैसे रखा जा सकता है।
शादी के बाद हर लड़की को होती है इन बातों की फिक्र :
पति का दिल जीतना : गौरतलब है कि शादी के बाद लड़कियों के दिमाग में यह चीज भी घूमती रहती है कि पति का दिल आखिर कैसे जीता जा सकता है। जी हां वे सर्च करती है कि पति को खुश कैसे रखा जाएं और कैसे उनके करीब रहा जाएं, जिससे वे अपने शादी के रिश्ते को उम्र भर प्यार से निभा सके।
परिवार के सदस्यों से तारीफ पाना : बता दे कि ज्यादातर शादीशुदा लड़कियां यह सर्च करती है कि ससुराल वालों को किस तरह से इम्प्रेस किया जा सकता है, ताकि वे उनके काम से खुश रहे। जी हां इसमें परिवार वालों के लिए स्वादिष्ट खाना बनाने से लेकर उनकी हर जरूरत की चीज का ख्याल कैसे रखा जाएं, ये सब बातें शामिल होती है। जिससे लड़की को अपने ससुराल वालों से तारीफ मिल सके।
परिवार की जिम्मेदारी : बता दे कि लड़कियां ये भी सर्च करती है कि शादी के बाद घर की जिम्मेदारी कैसे संभालनी चाहिए और एक शोध के अनुसार यह पता चलता है कि लोग गूगल पर आएं दिन ये सर्च करते रहते है कि परिवार की जिम्मेदारी किस तरह संभालनी चाहिए, ताकि आने वाले समय में उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। बहरहाल अब तो आपको पता चल गया होगा कि शादी के बाद गूगल पर नई दुल्हन क्या क्या सर्च करती है और क्यों। दोस्तों हम उम्मीद करते है कि आपको ये जानकारी जरुर पसंद आई होगी।
मौत एक ऐसी चीज है जिसका रहस्य आज भी अनसुलझा है। इसे लेकर कई सवाल है जिनका जवाब वैज्ञानिक नहीं खोज पाए हैं। मौत के बाद क्या होता है, व्यक्ति कहां जाता है, उसके दिमाग में क्या क्या चलता है ये सब अनसुलझे राज ही हैं।
ऐसे में क्या आप ने कभी सोचा है कि मौत से ठीक पहले के कुछ मिनट में इंसान के दिमाग में क्या क्या चलता है? इस बात का जवाब हाल ही में वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है। इसका जवाब बहुत ही दिलचस्प है।
मौत से ठीक पहले इंसानी दिमाग में चलता है ये सब
वैज्ञानिकों की माने तो मारता हुआ दिमाग अपने अंतिम समय में जिंदगी की अच्छी यादों को याद करता है। इसका खुलासा 87 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत के बाद हुआ। दरअसल इस शख्स को मिर्गी के दौरे पड़ते थे। इसके इलाज के लिए वह अस्पताल में एडमिट हुआ था।
यहां उसके इलाज के दौरान इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम EEG (electroencephalogram) हुआ। हालांकि ठीक इसी दौरान व्यक्ति को हार्ट अटैक आ गया और उसकी जान चली गई। लेकिन इस डायग्नोस्टिक टेस्ट की वजह से अनजाने में व्यक्ति के दिमाग की ब्रेन मैपिंग गो गई। इसमें उसके मरने से 15 मिनट पहले के विचार रिकॉर्ड हो गए।
ब्रेन मैपिंग में जो रिकॉर्डिंग हुई उससे वैज्ञानिकों ने पाया कि शख्स मरने से पहले अपनी लाइफ के अच्छे पलों को याद कर रहा था। इइजी पर हुई इस रिकॉर्डिंग में शख्स की मौत के 30 सेकेंड के दौरान उसकी हार्ट बीट बड़ी तेजी से बढ़ने लगीं। इस दौरान वैज्ञानिकों ने एक यूनिक वेव कैप्चर की।
इस वेव का नाम Gamma Oscillations है। यह शोध ले लुइसविले जेमर विश्वविद्यालय के न्यूरोसर्जन डॉ अजमल जेमर (Louisville Zemmar) ने किया। उन्होंने पाया कि अंतिम समय में हमारा दिमाग सपने देखने की स्थिति में आ जाता है। तब शरीर में जान नहीं रहती, हालांकि दिमाग अंतिम समय में तेजी से काम करता है।
इस मामले पर भारत के डॉक्टर क्या बोलते हैं?
न्यूरो एंड पेन केयर क्लीनिक गुडगांव के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भुपेश कुमार ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि जब मरीज मरा तो गामा वेव सबसे अधिक सक्रिय हुई। वहीं बीटा वेव भी एक्टिव थी। इससे मरीज को एंग्जायटी हुई।
इसके बाद में एल्फा, थीटा भी एक्टिव हो गए। व्यक्ति की डेल्टा वेव एक्टिव होते ही वह गहरी नींद में चला गया। अब चुकी शख्स की गामा वेव अधिक हाई थी, इसलिए वह पुरानी अच्छी यादों को याद करने लगा।
विद्वानों का ऐसा मानना है कि पूरी कायनात में ऊपरवाले ने जो सबसे अच्छी चीज बनाई है वो है मानव शरीर. उन्होंने मानव शरीर को रहस्यमयी तरीकों से बनाया है जिसके बारे में आज भी कई विद्वान विचार-विमर्श करते हैं. हमारा पूरे शरीर के अंग किसी ना किसी पार्ट से जुड़े रहते हैं तभी तो जब हमें डर लगता है तो अचानक पसीना आ जाता है और जब आंखों में कुछ जाता है तो सबसे पहले पलकें बंद हो जाती हैं. इसके अलावा भी मानव शरीर में अचानक होने वाले परिवर्तनों का होता है अपना मकसद, ये हमारे साथ होता तो है लेकिन इसके पीछे की सच्चाई से अक्सर लोग अंजाने ही रह जाते हैं.
मानव शरीर में अचानक होने वाले परिवर्तनों का होता है अपना मकसद
शरीर में होने वाले अचानक परिवर्तन के बारे में हम नहीं जान पाते लेकिन अगर मानव शरीर के बारे में आप जानना चाहते हैं तो इनपर लिखी मोटी-मोटी किताबें आप पढ़ सकते हैं. या फिर आप इस पोस्ट को पढ़िए जिसमें आपको आपकी बॉडी में होने वाले कुछ परिवर्तन के सवाल के जवाब आसानी से मिल जाएंगे. तो चलिए जानते हैं कुछ ऐसे ही लक्षण.
त्वचा का सिकुड़ना
ज्याादातर लोग जब ज्यादा समय तक रहते हैं तो हाथ-पैर की उंगलियों की त्वचा सिकुल जाती है. देर तक पानी में रहने से त्वचा में चिकनाहट हो जाती है और पानी में चीजों पर पकड़ मजबूत करने के लिए सिकुड़ जाती है.
रोंगटे खड़े होना
जब कभी जरूरत से ज्यादा ठंड लगने पर हमारा दिमाग गर्माहट महसूस कराने के लिए संकेत भेजकर शरीर के रोंगटे खड़े कर देता है.
पेट में तितलियां
जबभी हम किसी नये लोगों से मिलते हैं तो हमारे पेट में खलबली मचती है यानि ऐसा लगता है तितलियां उड़ रही हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे पेट में एड्रानिल हार्मोन के निकलने के कारण होता है.
जम्हाई लेना
जम्हाई को बोरियत का नाम दिया गया है लेकिन जम्हाई कम नींद लेने और शरीर के तापमान को जरूरत पड़ने पर कम करने के लिए ली जाती है.
छींक आना
सर्दी-जुकाम ना होने के बाद भी छींकें आती है. जब कभी हमारी सांस के साथ मिट्टी के धूल-कण शरीर में प्रवेश करने लगते हैं तो उन्हें अंदर जाने से रोकने के लिए छींक आती है.
आंखों में आंसू
आंसू को खुशी या गम के रूप में देखा जाता है लेकिन इसके पीछे की सच्चाई ये है कि आंसू आंखों की सफाई करते हैं.
पसीना
जब भी हमारे शरीर में गर्मी का एहसास होता है तो पसीना आने लगता है. मगर इसके पीछे का कारण ये है कि जब हमारे शरीर का तापमान जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो उसे ठंडा करने के लिए शरीर से पसीना आने लगता है.
हिचकी
हिचकी आना लोगों में आम होता है और अक्सर लोग कहते हैं कि हिचकी जब कोई याद करता है इससे आती है लेकिन ये तथ्य गलत ह. जब हम कोई भी चीज गलत तरीके से या जल्दबाजी में खा लेते हैं तो न्यूमोगैस्ट्रिक नर्व पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से हिचकी आती है.
किस देश के लोग सांप का जहर पीते हैं? जानें GK In Hindi General Knowledge. प्राचीन भारत में, साप का ज़हर पंथ एक विशेष धार्मिक और औषधि परंपरा से शुरू हुआ था। विशेष धार्मिक और विद्वतताओं में इस प्रथा का पालन किया जाता था, जहां माना जाता है कि इससे रस की ज़हरीली शक्तियां प्राप्त की जा सकती हैं।
किस देश के लोग सांप का जहर पीते हैं? जानें GK In Hindi
इसके बावजूद, यह आपके स्वास्थ्य के लिए आंशिक रूप से खतरनाक हो सकता है क्योंकि आज यह अधिकतर बंद हो चुका है। सैप के जहर में विषैले पदार्थ होते हैं, जो शरीर में कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
कृपया ध्यान दें कि सैप का ज़हरीला खाना बेहद खतरनाक हो सकता है, इसलिए इसका उपयोग कभी न करें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में आपको एक चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
दक्षिण पूर्व एशिया के देश वियतनाम में सांपों से शराब बनाई जाती है। इसे ‘स्नेक वाइन’ कहते हैं। इसे बनाने के लिए साप को काफी समय तक राइस वाइन या चिप्स में डबकर रखा जाता है। इसे सेहत के लिए काफी जादुई भी माना जाता है।
कहां के लोग सांप को खाते हैं? General Knowledge
भारत सहित विश्व के अनेक देशों के आदिवासी, विशेषत: दक्षिण पूर्व एशिया व चीन के सामान्य लोग भी बडे चाव से जहरीले व बगैर जहर वाले सांप का मांस खाते हैं।
मैंने स्वयं छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के ग्राम “बारसूर” में शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के एक डॉक्टर (आदिवासी समाज के) को एक रैट स्नेक (धामन /पनियल सांप) खाते देखा है।
वियतनाम के उत्तरी पश्चिम में लोग सांप से बने व्यंजन खाते हैं ताकि उनका पाचन दुरुस्त रहे, सिरदर्द न हो और उन्हें दवाइयां न खानी पड़ें। वियतनाम की राजधानी हनोई से तीन घंटे की दूरी पर उत्तरपश्चिम में स्थित प्रांत येन बाई के रेस्टोरेंट में सांप के अनेक व्यंजन परोसे जाते हैं। लोग इन्हें बड़े चाव से खाते हैं। उनका मानना है कि यह बेहद पौष्टिक और स्वाद से भरपूर है।
सांपों का खून क्यों पिया जाता है और किस देश के लोग सांपों का खून पीते हैं?
सबसे पहले यह बताता हूं कि सांपों का खून क्यों पिया जाता है? तो जिस जगह के लोग सांपों का खून पीते है वहां की स्त्रियों का मानना है कि सांपों का खून पीने से उनकी सुंदरता में बढ़ोत्तरी होगी और वह लंबे समय तक जवान रहेंगी और पुरुषों का मानना है कि सांपों का खून पीने से वह स्वस्थ और तंदरुस्त रहेंगे ।
अब मै आपको यह बताता हूं कि किस देश के लोग सांपों का खून पीते है?
तो आपके इस सवाल का जवाब है इंडोनेशिया । इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में लोग सांपों का खून चाय – कॉफी की तरह पीते है और खून पीने के बाद वह 4–5 घंटे तक चाय और कॉफी नहीं पीते है। इस तरह के प्रश्न अक्सर GK In Hindi, General Knowledge, Samanya Gyan के अंतर्गत पूछे जाते है |
आज के समय में कौन नहीं चाहता है कि उसके पास ख़ूब सारा धन-दौलत हो। लेकिन सही कहा गया है कि केवल चाहने भर से सबकुछ नहीं मिल जाता है। इसके लिए व्यक्ति को ख़ूब मेहनत करनी पड़ती है। जो लोग जी-जान से मेहनत करते हैं, वह जीवन में ख़ूब पैसा कमाते हैं। हालाँकि कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो जी-जान से मेहनत करने के बाद भी जीवनभर ग़रीबी में रहते हैं। ऐसे लोगों को अगर ख़ूब सारा धन मिल जाए तो सोचिए क्या होगा।
जी हाँ यह मज़ाक़ की बात नहीं है। किसी को भी बहुत सारा धन मिल सकता है। लेकिन उसके लिए बस आपको इस एक पक्षी के ऊपर अपनी नज़र रखनी होगी। अब आप सोच रहे होंगे कि भला किसी पक्षी के ऊपर नज़र रखकर कोई कैसे करोड़पति बन सकता है? लेकिन जब आप इस पक्षी के बारे में सबकुछ जानेंगे तो शायद आपको भी यक़ीन हो जाएगा कि जो हम कह रहे हैं, वह सही है। इस पक्षी के ऊपर नज़र रखकर आप मिनटों में करोड़पति बन सकते हैं। तो क्या आप तैयार हैं एक मिनट में करोड़पति बनने के लिए?
इस पक्षी की ख़ूबियाँ जानकार हो जाएँगे हैरान:
इस दुनिया में कई अद्भुत चीज़ें हैं। प्रकृति की रचनाओं में सबसे ख़ूबसूरत रचना जीवन है। प्रकृति ने पशु-पक्षियों और इंसानों के रूप में इस पृथ्वी पर जीवन दिया है। पक्षियों की कई प्रजातियाँ पूरी दुनिया में फैली हुई हैं। इनमें से कई पक्षियाँ इतनी ख़ूबसूरत और इतनी विचित्र होती हैं, कि इसके बारे में जानकार आपके होश उड़ सकते हैं इन्ही में से एक सबसे विचित्र पक्षी है टिटहरी। आपको बता दें यह पक्षी दिखने में भले ही बहुत छोटी होती है, लेकिन इसकी ख़ूबियों के बारे में जानकार आप हैरान हो जाएँगे।
टिटहरी पारस पत्थर से तोड़ती है अपने अंडे:
ऐसा कहा जाता है कि टिटहरी जिस दिन पेड़ पर रहने लगेगी, उस दिन धरती पर भूकम्प आ जाएगा। टिटहरी कभी भी पेड़ पर अपना घोसला नहीं बनाती है। वह ज़मीन पर ही अपने अंडे देती है। कोई दूसरा पक्षी जब भी अंडे देता है तो उसपर बैठकर उसे गर्म करता है और बाद में उसे तोड़कर बच्चों को इस दुनिया में लाता है। लेकिन टिटहरी ऐसा नहीं करती है। कहा जाता है कि टिटहरी ज़मीन पर अंडा देने के बाद उसे तोड़ने के लिए पारस पत्थर का इस्तेमाल करती है। पारस पत्थर के बारे में कहा जाता है कि अगर इसे लोहे से छुला दिया जाए तो वह सोना बन जाता है।
कई संत पारस पत्थर दे चुके हैं अपने भक्तों को:
आपको बता दें पारस पत्थर एक रहस्यमयी पत्थर होता है, जो आसानी से नहीं मिलता है, लेकिन टिटहरी इस पत्थर को ढूँढ ही लेती है। यह बहुत ही क़ीमती पत्थर होता है जो बहुत ही दुर्लभ है। धार्मिक कहानियों में भी पारस पत्थर का ज़िक्र मिलता है। इसके अनुसार हिमालय के जंगलों में पारस मणि मिल जाती है। बस किसी व्यक्ति को उसकी पहचान करनी आती हो। हालाँकि आजतक यह किसी व्यक्ति को मिला नहीं है। कई कहानियों में यह भी ज़िक्र मिलता है कि कई संत पारस पत्थर लाकर अपने भक्तों को दे चुके हैं। पारस मणि हिमालय के आस-पास ही पायी जाती है।
वैसे तो भारत जैसे बड़े देश में सड़क दुर्घटना होना बहुत आम सी बात है, लेकिन अगर हम थोड़ी सी सतर्कता दिखाएं और ट्रैफिक नियमों का पालन करे तो बड़ी दुर्घटना से बचा जा सकता है। हालांकि अगर कभी ऐसी परिस्थिति आएं कि आप गाड़ी के अंदर फंस जाएं और आपकी गाड़ी पानी में डूब रहे हो तो आपको घबराने की बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए। तो चलिए आपको बताते है कि ऐसी परिस्थिति से आप खुद के कैसे बचा सकते है। गौरतलब है कि कई बार वाहन के पानी में डूबने से व्यक्ति की जान भी जा सकती है, क्योंकि इस दौरान व्यक्ति के अंदर डर और घबराहट दोनों के संवेदना होती है। जिसके कारण जान जाने की संभावना बढ़ जाती है।
गाड़ी के अंदर फंस जाएं तो ऐसे करे बचाव :
ऐसे में हम आपको इससे बचने के कुछ कारगर तरीके बताना चाहते है जो इस प्रकार है। बता दे कि अगर ऐसी परिस्थिति आएं तो सबसे पहले गाड़ी के पानी में प्रवेश करने से पहले ही गाड़ी का दरवाज़ा खोल कर बाहर निकलने की कोशिश करे, क्योंकि गाड़ी के पानी में जाने के बाद बाहर निकलना थोड़ी मुश्किल होगा। वही अगर दरवाजा न खोले तो सबसे पहले अपनी सीट बेल्ट को खोल दे और गाड़ी के शीशे भी खोल दे। फिर जल्दी से जल्दी बाहर निकलने की कोशिश करे।
इसके इलावा अगर आप ड्राइवर है तो सबसे पहले ब्रेस पोजिशन ले लीजिए और दोनों हाथों को स्टीयरिंग व्हील पर दस तथा दो की स्थिति में रखे। जी हां इस स्थिति में पानी से टकराने के कारण वाहन का प्रभाव वाहन में मौजूद एयरबैग सिस्टम को बंद कर सकता है, जब कि किसी दूसरी ब्रेस पोजिशन से इस तरह की घटना होने पर गंभीर चोट लग सकती है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि अगर गाड़ी धीरे धीरे पानी के अंदर जा रही है तो ऐसी स्थिति में दो गहरी सांसे लीजिए और खुद को बचाने की कोशिश करे।
कम से कम समय में गाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश करे :
बहरहाल इस दौरान कम से कम तीस से साठ सेकंड के अंदर खुद को गाड़ी से बाहर निकालने और बचाने की पूरी कोशिश करे और अपना सारा ध्यान बचाव प्रक्रिया पर रखे। इसके साथ ही खिड़की के स्तर से पानी ऊपर जाने से पहले खिड़की खोलने को कोशिश करे, क्योंकि अगर एक बार पानी ऊपर उठ गया तो खिड़की खोलना या तोड़ना मुश्किल हो जायेगा। इसके इलावा अगर खिड़की तोड़ने की जरूरत पड़े तो किसी भारी चीज़ या फिर सीट से हेडरेस्ट निकाल कर लोहे वाले सिरे से कार के शीशे के निचले कोने पर तब तक वार करे, जब तक शीशा टूट न जाएं।
बता दे कि कार का अगला भाग सबसे भारी होता है और सबसे पहले डूबने की संभावना इसी की होती है। इसलिए विंडशील्ड के माध्यम से भागने की कोशिश कभी न करे, क्योंकि विंडशील्ड को अन्य खिड़कियों के मुकाबले तोड़ना ज्यादा मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में ड्राइवर की साइड विंडो या रियर पैसेंजर विंडो को सबसे पहले तोड़ने की कोशिश करे, क्योंकि कोई भी कार एक से दो मिनट में पूरी तरह से पानी में डूब जाती है। तो इससे पहले ही खुद को बचाने की कोशिश करे।
करते रहे खुद को बचाने का प्रयास :
हालांकि ऐसी परिस्थिति में इंसान खुद को बचाने में असमर्थ ही रहता है, तो जब तक आपके पास पूरी ऑक्सीजन हो, उसी बीच खुद को पॉजिटिव रखे और सतर्कता दिखाते हुए जल्द से जल्द गाड़ी से बाहर निकलने की कोशिश करे। बहरहाल हम तो यही दुआ करते है कि कभी किसी व्यक्ति के जीवन में ऐसी स्थिति ना आएं जब वह गाड़ी के अंदर फंस जाएं या उस व्यक्ति की जान पर बन जाएं। इसलिए सावधानी से वाहन चलाएं और ध्यान रखे।
च्युइंगम खाने की आदत कई लोगों को होती है। कुछ लोग मुंह को बिज़ी रखने के लिए तो कुछ जॉ लाइन के लिए इसे खाना पसंद करते हैं। हालांकि कई बार जाने-अनजाने में लोग इसे निगल जाते हैं। शायद आपने भी कई बार गलती से या जानबूझकर इसे निगल लिया होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि च्युइंगम को निगलने के बाद क्या होता है और आपके स्वास्थ्य पर ये कैसे प्रभाव डालता है, आइए जानते हैं।
वैसे तो च्युइंगम को निगलने के बाद कोई स्वास्थ्य परिणाम देखने को नहीं मिलता, क्योंकि अक्सर ये मल त्याग के दौरान निकल जाता है। लेकिन अगर बार-बार च्युइंगम को निगला जाता है तो यह स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है, जिसका अंदाजा भी शायद आपको नहीं होगा। अगर आप नियमित रूप से च्युइंगम निगलते हैं तो इस बात की संभावना ज्यादा है कि इसकी वजह से आपको आंत्र से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
आंतों में रुकावट पैदा कर सकता है :
च्यूइंगम लचीली और चिपचिपी होती है। आप इन्हें आराम से घंटों तक चबा सकते हैं। हालांकि ये चबाने के बावजूद ठोस बनी रहती है। इनकी बनावट में कोई बदलाव नहीं दिखता। इसी वजह से यह माना जाता है कि कई बार च्यूइंगम पेट की परत में रह जाता है और आंत के कार्यों में रुकावट भी पैदा करता है। सच्चाई तो यह है कि हमारा शरीर च्युइंगम को डाइजेस्ट नहीं कर सकता। सब्जियों और बीजों में पाए जाने वाले फाइबर की तरह ही च्यूइंगम भी अघुलनशील होता है।
इनडाइजेस्टिबल होता है च्युइंगम :
हम सभी ने कभी न कभी यह कहानी जरूर सुनी होगी कि अगर च्युइंगम को निगल लिया जाता है तो यह सात साल तक पेट में मौजूद रहती है। यह बात वैसे तो सच नहीं है, लेकिन इसने कई लोगों को ज्यादा च्युइंगम खाने से रोका जरूर है। च्युइंगम में मौजूद चीजों को आपका डाइजेस्टिव सिस्टम आसानी से तोड़ सकता है। हालांकि ये गम होता है, इसलिए इसे इनडाइजेस्टिबल माना जाता है।
दूसरे अघुलनशील चीजों की तरह च्यूइंगम भी मल के जरिए बाहर निकल जाती है। लेकिन यदि यह किसी वजह से ये आंत में चिपक गई तो ये ब्लॉकेज का कारण बन सकती है. इसलिए अगर ऐसा होता है तो डॉक्टरी परामर्श लेना बेहद जरूरी है। बता दें कि, च्यूइंगम अगर काफी देर तक पेट में रहे तो उल्टी, जी मिचलाना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। च्यूइंगम निगलने के मामले बच्चों के ही नहीं बड़ों के भी देखे जाते हैं इसलिए बेहतर होगा कि इसका कम से कम सेवन किया जाए।
बता दे कि पिछले दिनों कश्मीर पुलिस ने एक सर्कुलर जारी किया है और इस सर्कुलर के बारे में हर किसी का जानना बेहद जरूरी है। जी हां इस सर्कुलर में बताया गया है कि किसी व्यक्ति पर क्रिमिनल केस होने पर क्या उस व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिल सकती है या वह व्यक्ति विदेश यात्रा कर सकता है। बहरहाल फील्ड इंटेलिजेंस यूनिट्स से कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति सरकारी नौकरी या पासपोर्ट के लिए आवेदन करता है तो यह देखा जाएं कि कही वह पत्थरबाजी या सड़कों पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने जैसी गतिविधि में तो शामिल नहीं था। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति का क्रिमिनल रिकॉर्ड मिलता है तो उसे सिक्योरिटी क्लियरेंस न दिया जाएं।
क्रिमिनल केस होने पर विदेश यात्रा की नहीं इजाजत :
दरअसल इंडियन पासपोर्ट एक्ट 1967 के सेक्शन 6(2) के अनुसार पासपोर्ट अधिकारी के पास यह अधिकार है कि वह पासपोर्ट जारी करने से इंकार कर सकता है। जी हां अगर आवेदक भारत का नागरिक नहीं है या आवेदक भारत के बाहर देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ गतिविधियों में शामिल रहा हो या आवेदक का विदेश जाना देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो तो ऐसी स्थिति में आवेदक को मना किया जा सकता है। इसके इलावा अगर आवेदक को पांच साल में कम से कम दो साल की सजा हुई हो तो पासपोर्ट अधिकारी उसे पासपोर्ट देने से इंकार कर सकते है।
इसका मतलब ये है कि अगर आवेदक के खिलाफ किसी क्रिमिनल कोर्ट में कोई मुकदमा लंबित हो या दो साल की सजा वाला कोई अपराध साबित हुआ हो तो पासपोर्ट का आवेदन खारिज हो सकता है। बता दे कि अगर केंद्र सरकार को लगता है कि किसी व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करना जनहित में नहीं है तो उसे पासपोर्ट देने से इंकार किया जा सकता है। गौरतलब है कि पासपोर्ट एक्ट के सेक्शन 22 के संबंध में 1993 में केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी किया था, जो किसी भी व्यक्ति या ग्रुप को निश्चित अवधि के लिए पासपोर्ट जारी करने की अनुमति देता है।
विदेश मंत्रालय का यह नोटिफिकेशन है राहतकारी :
बहरहाल विदेश मंत्रालय का यह नोटिफिकेशन उन लोगों को राहत देता है, जिनके खिलाफ क्रिमिनल केस पेंडिंग है। इसका मतलब ये है कि अगर आवेदक को कोर्ट से अनुमति मिलती है तो आवेदक पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज हासिल कर सकता है। जी हां इस संबंध में अदालतें पासपोर्ट को निश्चित अवधि के लिए जारी करती है और अगर आदेश में कोई अवधि नहीं लिखी है तो यह पासपोर्ट एक साल के लिए जारी हो सकता है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि 1993 के नोटिफिकेशन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगी थी और 2016 में हाईकोर्ट ने नोटिफिकेशन को कायम रखा था।
इस मामले में याचिकाकर्ता सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील भी की थी और उनका तर्क था कि यह सेक्शन गंभीर और गैर गंभीर अपराधों या जमानती और गैर जमानती अपराधों में कोई फर्क नहीं करता है। तो ऐसे में इस आधार पर यह अनुचित है। वही अगर हम सरकारी नौकरी की बात करे तो इस मामले में यह देखा जाता है कि जो व्यक्ति सरकारी नौकरी करने वाला है उसका कैरेक्टर कैसा है। जी हां आमतौर पर आवेदकों को कैरेक्टर सर्टिफिकेट देना ही पड़ता है और उनसे फॉर्म भरवाया जाता है तथा उनसे पूछा जाता है कि क्या उन्हें अतीत में गिरफ्तार किया गया था। क्या उन्हें किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था या उनके खिलाफ कोई केस पेंडिंग है या नहीं।
ऐसे व्यक्ति को नहीं मिल सकती सरकारी नौकरी :
ऐसे में अगर व्यक्ति का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड हो तो वह सरकारी नौकरी नहीं कर सकता। इस बारे में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से बने कानून कहते है कि किसी भी अपराधिक रिकॉर्ड वाले आवेदक को भर्ती करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। हालांकि अगर कोई व्यक्ति अपनी क्रिमिनल रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी छिपाता है तो ऐसी स्थिति में इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाता है और उस व्यक्ति के खिलाफ केस भी चल सकता है। यहां तक कि अगर वह व्यक्ति नौकरी कर रहा हो तो उसे नौकरी से भी हटाया जा सकता है।
बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने कई दशकों में सुनाएं गए कई तरह के फैसलों को एक साथ संक्षेप में रखते हुए अवतार सिंह बनाम भारत संघ में 2016 में गाइडलाइन तय की थी। यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो क्रिमिनल केस होने पर किसी व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की और पासपोर्ट देने की इजाज़त नहीं होती। दोस्तों इस बारे में आपकी क्या राय है, ये हमें जरूर बताइएगा। दोस्तों इस लेख के बारे में आपके क्या विचार है कमेंट करके जरूर बताएं और हिमाचली खबर को फॉलो करना न भूलें।