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  • ये हैं देश के सबसे बड़े वकील!ˈ एक-एक सुनवाई की फीस भरने में बिक जाते हैं घर-द्वार। जानिए हैरान करने वाले कुछ नामˌ

    ये हैं देश के सबसे बड़े वकील!ˈ एक-एक सुनवाई की फीस भरने में बिक जाते हैं घर-द्वार। जानिए हैरान करने वाले कुछ नामˌ

    ये हैं देश के सबसे बड़े वकील!ˈ एक-एक सुनवाई की फीस भरने में बिक जाते हैं घर-द्वार। जानिए हैरान करने वाले कुछ नामˌ

    Best and Top Paid Lawyers in India: कहते हैं कि न्याय की राह के रक्षक हैं वकील, सच और कानून का रखते हैं दिल से साथ इतना ही नहीं बल्कि हर मुद्दे को तर्क से सुलझाते हैं और इंसाफ की उम्मीद उन्हीं से जगाते हैं।

    खबर है कानून और न्याय के बीच की कड़ी वकीलों पर। न्यूजट्रैक की इस रिपोर्ट में पढ़िए कि देश के वकीलों यानी लॉयर्स की टॉप लिस्ट में कौन-कौन से नाम शामिल हैं? इनकी फीस इतनी है कि एक-दो सुनवाई की कमाई मात्र से एक सामान्य इंसान के घर और गाड़ी का सपना पूरा हो जाए। पढ़ें पूरी रिपोर्ट-

    हरीश साल्वे: कानूनी विरासत और चमकदार करियर की कहानी

    भारत के प्रतिष्ठित वकीलों में शुमार हरीश साल्वे न सिर्फ देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी कानूनी प्रतिभा के लिए पहचाने जाते हैं। उनका जन्म 22 जून 1955 को एक मराठी परिवार में हुआ था, जहां कानून की समझ और सेवा भावना उन्हें विरासत में मिली। उनके पिता एन.के.पी. साल्वे पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट थे, जो बाद में कांग्रेस पार्टी में एक प्रमुख नेता बने। उनकी मां अम्ब्रिति साल्वे डॉक्टर थीं। दिलचस्प बात यह है कि उनके दादा पी.के. साल्वे एक प्रसिद्ध आपराधिक वकील रहे हैं, जबकि उनके परदादा एक न्यायिक अधिकारी (मुंसिफ) थे। यह कहना गलत नहीं होगा कि कानून साल्वे के खून में था और उन्होंने इस पारिवारिक परंपरा को बखूबी आगे बढ़ाया।

    हरीश साल्वे ने अपने करियर की शुरुआत वरिष्ठ वकीलों की सहायता करते हुए की, जिनमें नानी पाल्खीवाला और पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी जैसे कानूनी जगत के दिग्गज शामिल हैं। उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, जिनमें कुलभूषण जाधव केस प्रमुख है। इसके अलावा उन्होंने कई भारतीय बैंकों, कॉर्पोरेट्स और डिफॉल्टर्स के पक्ष में भी पैरवी की है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी अदालती लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।

    Harish Salve (Photo: Social Media)

    1999 से 2002 तक साल्वे ने भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में भी सेवाएं दीं, और अपनी रणनीतिक सोच व कानूनी समझ से देश की न्याय व्यवस्था में अहम योगदान दिया। उनकी कमाई और संपत्ति हमेशा से चर्चा में रही है। इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल में एक मामले के दौरान उन्होंने 2010-11 में अपनी सालाना आय 35 करोड़ रुपये बताई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आज उनकी फीस हाई-प्रोफाइल केस में 35 लाख रुपये तक जाती है, जबकि एक दिन की कमाई 15-20 लाख रुपये तक मानी जाती है। अनुमान है कि उनकी कुल संपत्ति 200 से 250 करोड़ रुपये के बीच है। टाटा ग्रुप, रिलायंस इंडस्ट्रीज, और ITC जैसी देश की दिग्गज कंपनियां उन्हें अपना कानूनी सलाहकार मानती हैं।

    मुकुल रोहतगी: अदालतों के गलियारों में चार दशकों से गूंजता एक सशक्त नाम

    देश के कानूनी परिदृश्य में एक प्रभावशाली नाम मुकुल रोहतगी का है, जिनका जन्म 1955 में मुंबई में हुआ था। हालांकि उनकी स्कूली पढ़ाई मुंबई और दिल्ली-दोनों जगह हुई, लेकिन कानून की पढ़ाई उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से पूरी की। दिलचस्प बात यह रही कि लॉ की डिग्री मुंबई से लेने के बावजूद उन्होंने वकालत की शुरुआत दिल्ली बार काउंसिल से पंजीकरण कराकर की। एक केस की फीस एक से दो करोड़ रुपए है।

    महज 38 साल की उम्र में 1993 में मुकुल रोहतगी दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट के रूप में नियुक्त किए गए, जो उनके तेज़ी से उभरते करियर की पहली बड़ी उपलब्धि थी। इसके बाद 1999 में वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में उन्हें एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बनाया गया। कानूनी क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और निष्पक्ष छवि के कारण उन्हें 2014 से 2017 तक भारत का अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया। खास बात यह रही कि 2017 के बाद उन्हें दोबारा इस पद के लिए प्रस्ताव दिया गया, जिसे उन्होंने विनम्रता से ठुकरा दिया।

    अपने करीब चार दशक लंबे करियर में रोहतगी ने कई हाई-प्रोफाइल मामलों में देश का प्रतिनिधित्व किया है। इनमें 2002 के गुजरात दंगे, और 2022 में अभिनेता शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान का ड्रग्स केस प्रमुख हैं। इसके अलावा उन्होंने कई कॉर्पोरेट मामलों में भी बड़ी कंपनियों की ओर से पैरवी की है। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज, फ्यूचर ग्रुप जैसे दिग्गज कॉर्पोरेट्स का प्रतिनिधित्व किया है। फ्यूचर ग्रुप केस में उनके सामने प्रतिद्वंद्वी के रूप में अमेज़ॉन जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनी थी। इसके अलावा, उन्होंने फेसबुक और व्हाट्सऐप का भी दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में बचाव किया है।

    Mukul Rohtagi (Photo: Social Media)

    पी. चिदंबरम: कोर्टरूम से संसद तक, वकील से देश के गृहमंत्री बनने का सफर

    भारत के वरिष्ठ अधिवक्ताओं में गिने जाने वाले पी. चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर देश के कई हाईकोर्टों में अपनी वकालत के दम पर एक मजबूत पहचान बनाई। लेकिन उनका करियर सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं रहा – उन्होंने कानूनी पेशे के साथ-साथ राजनीति की दुनिया में भी कदम रखा, और ट्रेड यूनियनों के कई अहम मुकदमों में पैरवी करते हुए एक राजनीतिक चेहरे के रूप में उभरना शुरू किया।

    राजनीति में उनकी सक्रिय भागीदारी की शुरुआत 1984 से मानी जाती है, जब उन्होंने तमिलनाडु की शिवगंगा लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर पहली बार संसद में प्रवेश किया। यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। बता दें कि इनकी फीस 10-12 लाख रुपए प्रति सुनवाई है।

    इसके बाद चिदंबरम का कद लगातार बढ़ता गया। कांग्रेस पार्टी के प्रमुख चेहरों में शुमार होते हुए, उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में वित्तमंत्री और बाद में गृहमंत्री जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। आज भी पी. चिदंबरम को एक ऐसे नेता और वकील के रूप में देखा जाता है जिन्होंने कानून, प्रशासन और राजनीति – तीनों क्षेत्रों में अपनी गहरी समझ और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है।

    P Chidambram (Photo: Social Media)

    अभिषेक मनु सिंघवी: राज्यसभा सांसद और मशहूर वकील, फीस और नेटवर्थ के मामले में भी टॉप पर

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के नामचीन वकील अभिषेक मनु सिंघवी इन दिनों तेलंगाना से 2024-26 के लिए राज्यसभा सांसद हैं। राजनीति के साथ-साथ कानून के क्षेत्र में भी उनका योगदान शानदार रहा है। जोधपुर (राजस्थान) में 24 फरवरी 1959 को जन्मे सिंघवी ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की और 1997-98 में भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल रहे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सबसे पहले वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया था। वे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।

    40 वर्षों से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से लेकर अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं का अदालत में प्रतिनिधित्व किया है। हाल ही में उन्होंने केजरीवाल को शराब घोटाले में जमानत दिलाई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंघवी 6 से 11 लाख रुपये प्रति पेशी चार्ज करते हैं और उनकी नेटवर्थ अरबों रुपये में है। खुद सिंघवी का दावा है कि वे हर साल करोड़ों रुपये इनकम टैक्स के रूप में अदा करते हैं।

    Abhishek Manu Singhvi (Photo: Social Media)

    कपिल सिब्बल: कानून और राजनीति दोनों में दमदार उपस्थिति

    देश के जाने-माने वकील और वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल का जन्म 8 अगस्त 1948 को जालंधर, पंजाब में हुआ था। एक शिक्षित और कानूनी पृष्ठभूमि वाले परिवार से आने वाले सिब्बल के पिता हीरा लाल सिब्बल भी एक प्रतिष्ठित वकील थे।

    1972 में वकालत की शुरुआत करने वाले सिब्बल ने 1973 में आईएएस परीक्षा पास की, लेकिन नौकरी छोड़कर कानून को ही अपना करियर बनाया। 1983 में वरिष्ठ अधिवक्ता बने और 1989 में भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए गए। इनकी एक सुनवाई की फीस 10-12 लाख रुपए है।

    वे 1994 में संसद में पेश होने वाले पहले वकील बने जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग के दौरान सफलतापूर्वक बचाव किया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के वे तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं। कपिल सिब्बल ने कई हाई-प्रोफाइल केस लड़े हैं, जिनमें राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद, 2जी स्पेक्ट्रम, ट्रिपल तलाक, राफेल डील, और नेशनल हेराल्ड मामला प्रमुख हैं। आज भी देश के सबसे अनुभवी और चर्चित वकीलों में गिने जाते हैं।

    Kapil Sibble (Photo: Social Media)

  • क्यों इतना ग्लो करता है जया किशोरीˈ का चेहरा? जाने उनकी दमकती स्किन का राजˌ

    क्यों इतना ग्लो करता है जया किशोरीˈ का चेहरा? जाने उनकी दमकती स्किन का राजˌ

    क्यों इतना ग्लो करता है जया किशोरीˈ का चेहरा? जाने उनकी दमकती स्किन का राजˌ

    जया किशोरी भारत की जानी मानी कथावाचक और मोटिवेशनल स्पीकर हैं। युवाओं में उनकी दीवानगी सिर चढ़कर बोलती है। सोशल मीडिया पर जया किशोरी की तस्वीरें और वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं। उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग का एक बड़ा कारण उनकी सादगी और सुंदरता भी है। वह हमेशा सिंपल अवतार में नजर आती हैं। लेकिन फिर भी उनका चेहरा सूरज की तरह चमकता है।

    जया किशोरी की सुंदरता देख कई मर्द और पुरुष मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। वह सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर जया किशोरी की स्किन इतनी ग्लो क्यों करती है। आज हम इस राज से पर्दा उठाने जा रहे हैं। अब जया कोशोरी का स्किन केयर रूटीन आपको बताएंगे। इन्हें आजमाकर आप भी उनके जैसी सुंदर और चमकदार स्किन प्राप्त कर सकते हैं।

    ये है जया किशोरी की दमकती त्वचा का राज

    1. आपको जान हैरानी होगी कि जया किशोरी सुंदर दिखने के लिए कोई भी मेकअप का इस्तेमाल नहीं करती हैं। बाजार में मिलने वाले ब्यूटी प्रॉडक्ट्स में कई तरह के केमिकल भी मिले होते हैं। इनका ज्यादा इस्तेमाल आपकी स्किन डैमेज कर सकता है। इसलिए नेचुरल उपाय बेहतर होते हैं।

    2. जया किशोरी का खान पान भी उनकी दमकती त्वचा में अहम भूमिका निभाता है। वह अधिक तेल मसाले वाले भोजन नहीं खाती हैं। इसके अलावा वह जंक फूड और नॉन-वेज खाने से भी बचती हैं। हेल्थी चीजें अधिक खाती हैं। पानी ज्यादा पीती हैं।

    3. जया किशोरी को यदि मेकअप लगाना भी पड़ जाए तो वह बेहद न्यूड मेकअप लगाती हैं। इससे उनकी असली सुंदरता बाहर आती है। जबकि कई महिलाएं ओवरमेकअप कर लेती हैं। इसमें वह कार्टून लगती हैं। ऐसी महिलाओं को जया किशोरी से सीख लेनी चाहिए।

    4. आंखें किसी भी इंसान की सुंदरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए जया किशोरी को काजल लगाना पसंद है। वह अपनी आँखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए काजल लगाती हैं। यह उनके न्यूड मेकअप पर बहुत अच्छे से जचता है।

    5. जया किशोरी का पहनावा भी उनकी सुंदरता में चार चांद लगाता है। वह बहुत ही सादगी के साथ रहना पसंद करती हैं। उनका फैशन सेंस दिल को भाता है। उन्हें देख लगता है कि एक भारतीय महिला का असली लुक यही होता है।

    6. जया किशोरी योगा और मेडिटेशन भी करती हैं। इससे वह शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रहती हैं। इसका असर उनकी ग्लोइंग स्किन पर साफ नजर आता है। वह लाइफ में स्ट्रेस को एंटर ही नहीं होने देती हैं। सदा मुस्कुराती रहती हैं।

  • 50 रुपये के ऑर्डर पर डिलीवरी बॉयˈ को क्या मिलता है? हकीकत जानकर चौंक जाएंगे आपˌ

    50 रुपये के ऑर्डर पर डिलीवरी बॉयˈ को क्या मिलता है? हकीकत जानकर चौंक जाएंगे आपˌ

    Delivery Boy Income : आजकल के समय में ऑनलाइन शॉपिंग और फूड डिलीवरी का चलन बढ़ गया है, और इसके साथ ही डिलीवरी बॉयज की संख्या भी बढ़ी है। हालांकि, जब हम डिलीवरी के लिए भुगतान करते हैं, तो क्या हम यह जानते हैं कि उस 50 रुपये के ऑर्डर पर डिलीवरी बॉय को कितनी कमाई होती है? इस लेख में हम आपको बताएंगे कि डिलीवरी बॉय की कमाई का पूरा सिस्टम क्या है और इस काम में क्या-क्या चुनौतियां होती हैं।

    50 रुपये के ऑर्डर पर डिलीवरी बॉयˈ को क्या मिलता है? हकीकत जानकर चौंक जाएंगे आपˌ

    डिलीवरी बॉय की कमाई का गणित


    जब आप किसी ऐप से फूड या सामान ऑर्डर करते हैं, तो उस पर जो खर्च आता है, उसका कुछ हिस्सा डिलीवरी बॉय की कमाई में बदलता है। उदाहरण के लिए, अगर आपका ऑर्डर 50 रुपये का है, तो डिलीवरी बॉय को इसकी पूरी राशि नहीं मिलती। इसमें से कुछ राशि कंपनी के पास जाती है, जबकि डिलीवरी बॉय को उस ऑर्डर के लिए जो राशि मिलती है, वह विभिन्न फैक्टर्स पर निर्भर करती है।

    आमतौर पर, एक डिलीवरी बॉय को बेस पेमेंट के साथ-साथ डिलीवरी पर आधारित एक निश्चित कमीशन भी मिलता है। यदि कंपनी का तय कमीशन 30% है, तो डिलीवरी बॉय को 50 रुपये के ऑर्डर पर लगभग 15 रुपये मिल सकते हैं। इसके अलावा, डिलीवरी के दौरान जो अतिरिक्त खर्च जैसे पेट्रोल, समय की लागत, और मेहनत को ध्यान में रखते हुए, डिलीवरी बॉय की कमाई उतनी अधिक नहीं होती जितनी हम सोचते हैं।

    किस प्रकार के इंसेन्टिव्स मिलते हैं?


    कई कंपनियां डिलीवरी बॉयज को अपने टारगेट पूरा करने पर अतिरिक्त बोनस देती हैं। यह बोनस उस बॉय की मासिक कमाई में इजाफा कर सकता है। अगर डिलीवरी बॉय जल्दी-जल्दी और सही समय पर ऑर्डर डिलीवर करता है, तो उसे अतिरिक्त लाभ भी मिलता है।

    इसके अलावा, अगर कोई डिलीवरी बॉय समय से पहले अपनी निर्धारित टारगेट को पूरा करता है या ज्यादा ऑर्डर करता है, तो उसे एक इंसेन्टिव मिल सकता है। लेकिन यह बोनस भी अक्सर छोटा ही होता है और इस पर टैक्स भी लगता है।

    डिलीवरी के दौरान की चुनौतियां


    डिलीवरी बॉय का काम केवल पैसों की कमाई के बारे में नहीं है, बल्कि इसमें बहुत सारी चुनौतियां भी होती हैं। जैसे कि खराब मौसम में काम करना, ट्रैफिक में फंसना, और कभी-कभी ग्राहकों से भी गुस्से का सामना करना। इसके अलावा, कभी-कभी सामान खो जाने या डैमेज होने पर डिलीवरी बॉय को ही दोषी ठहराया जाता है, जिससे उनका वेतन घट सकता है।

    क्या है डिलीवरी बॉय के लिए इंश्योरेंस?


    कई कंपनियां अपने डिलीवरी बॉय के लिए इंश्योरेंस की सुविधा भी देती हैं, ताकि किसी दुर्घटना की स्थिति में वे आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें। हालांकि, यह इंश्योरेंस सभी कंपनियों में नहीं होता, और कुछ कंपनियां केवल राइडर्स के लिए ये फायदे देती हैं।

    तो अब आप समझ गए होंगे कि एक 50 रुपये के ऑर्डर पर डिलीवरी बॉय कितने कमाते हैं। यह कमाई एक साधारण काम नहीं है; इसमें जोखिम, मेहनत और समय का भी खर्चा होता है। बावजूद इसके, अगर डिलीवरी बॉय अच्छा काम करता है, तो उसे अतिरिक्त बोनस और इंसेन्टिव्स मिल सकते हैं, जिससे उसकी कमाई में इजाफा हो सकता है।

    अंत में, अगर आप एक डिलीवरी बॉय के तौर पर काम करने का विचार कर रहे हैं, तो आपको इसके सारे पहलुओं को समझना होगा, ताकि आप इस काम में संतुष्ट रह सकें और अपनी कमाई को बढ़ा सकें।

  • क्या आपने कभी सोचा है ट्रेन कीˈ जनरल बोगी हमेशा आगे या पीछे ही क्यों होती है? जानिए इसके पीछे छिपे रेलवे के खास नियम और तकनीकी कारण ˌ

    क्या आपने कभी सोचा है ट्रेन कीˈ जनरल बोगी हमेशा आगे या पीछे ही क्यों होती है? जानिए इसके पीछे छिपे रेलवे के खास नियम और तकनीकी कारण ˌ

    क्या आपने कभी सोचा है ट्रेन कीˈ जनरल बोगी हमेशा आगे या पीछे ही क्यों होती है? जानिए इसके पीछे छिपे रेलवे के खास नियम और तकनीकी कारण ˌ

    हम में से ज्यादातर लोगों ने ट्रेन से यात्रा की है, कभी पास के शहरों या गांवों के लिये, तो कभी लंबी दूरी के लिये। ट्रेनों में अक्सर, जनरल, स्लीपर और एसी कोच होते हैं। अगर आपने गौर किया होगा, तो आपको पता होगा कि जनरल बोगियां अक्सर ट्रेनों के आगे या पीछे होती हैं।

    इस वजह से आपके मन में कभी न कभी यह सवाल अवश्य आया होगा कि एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों में अनारक्षित/सामान्य कोच केवल आगे और पीछे ही क्यों लगाए जाते हैं? ट्रेन के बीच में जनरल बोगियां क्यों नहीं लगाई जाती हैं? अगर हां, तो आज के इस लेख में हम आपके इस सवाल का जवाब लेकर आये हैं।

    बोगियों की इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। हाल ही में एक युवक ने टि्वटर पर बोगियों की स्थिति को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और यही सवाल किया। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ’24 बोगी वाली ट्रेन में जनरल बोगी दो ही क्यों होती हैं? और सबसे अहम बात ये है कि ये बोगियां ट्रेन के आगे और पीछे ही क्यों होती हैं? क्या इसलिए कि जब ट्रेन का एक्सीडेंट होगा तो जनरल बोगियों में सफर करने वाले गरीब सबसे पहले मरेंगे?” उन्होंने अपने ट्वीट पर रेल विभाग को भी टैग किया।

    उनके सवाल का जवाब देते हुए रेलवे अधिकारी संजय कुमार ने लिखा, ‘पूछताछ करना अच्छा, है लेकिन सनक खराब है। यह यात्रियों की सुविधा के लिए है। जनरल कोच में भीड़ ज्यादा होती है। कल्पना कीजिए कि अगर यह बीच में है तो बीच में पूरा प्लेटफॉर्म यात्रियों द्वारा चढ़ने और उतरने की कोशिश करने से अवरुद्ध हो जाएगा, बाकी दोनों दिशाओं में जाने में सक्षम नहीं होंगे।

    जनरल बोगियों के आगे और पीछे होने का मुख्य कारण प्लेटफॉर्म पर लोगों की भीड़ से बचना है। इस प्रकार, भीड़ दो समूहों में विभाजित हो जाएगी; कुछ पीछे की ओर जाएंगे और कुछ ट्रेन के आगे। यह रेलवे अधिकारियों को आपात स्थिति और दुर्घटनाओं के दौरान लोगों की मदद करने और प्लेटफॉर्म में खराब स्थितियों को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।”

  • 1936 में जन्म और 1936 में हीˈ मौत फिर भी उम्र 70 साल? सबको चकरा देती है ये पहेलीˌ

    1936 में जन्म और 1936 में हीˈ मौत फिर भी उम्र 70 साल? सबको चकरा देती है ये पहेलीˌ

    GK Quiz In Hindi: चाहे एग्जाम स्कूल-कॉलेज में एडमिशन के लिए हो या फिर किसी नौकरी के लिए लिखित परीक्षा देना हो या इंटरव्यू. इन सभी में भी जनरल नॉलेज के सवाल जरूर होते हैं. आपकी जीके स्ट्रॉन्ग होना जरूरी है, क्योंकि इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और पर्सनालिटी निखरती है.

    1936 में जन्म और 1936 में हीˈ मौत फिर भी उम्र 70 साल? सबको चकरा देती है ये पहेलीˌ

    आपको सार्थक बातचीत में शामिल होने और सही फैसला लेने में मदद देता है. आप किताबों, समाचारों पत्रों आदि को पढ़कर अपडेट रह सकते हैं. इसके अलावा कहीं से भी मिलने वाली अच्छी जानकारी कभी भी काम आती सकती है. यहां आपके लिए एक जीके क्विज दी गई है…

    सवाल – कौन सी मछली नर से मादा बन सकती है?
    जवाब – क्लाउनफिश ऐसी मछली है जो नर से मादा बन सकती है.

    सवाल – कौन सा जीव दुखी होता है तो लाल रंग का पसीना छोड़ता है ?
    जवाब – हिप्पो नाम का जीव जब दुखी होता है तो लाल रंग का पसीना छोड़ता है.

    सवाल – भारत की नदियां में कौनसी है पुरुष नदी?
    जवाब – भारत की नदियां में ब्रह्मपुत्र पुरुष नदी है.

    सवाल – शरीर के किस अंग में खून नहीं पाया जाता है?
    जवाब – दरअसल, वह हमारी आंखों का हिस्सा कॉर्निया है, जिसमें खून नहीं पाया जाता है.

    सवाल – मिर्च का सबसे ज्यादा उत्पादन भारत के किस राज्य में होता है?
    जवाब – मिर्च का सबसे ज्यादा उत्पादन आंध्र प्रदेश में होता है.

    सवाल – एक औरत 1936 में पैदा हुई और 1936 में ही मर गई, पर मरते वक्त उसकी उम्र 70 साल थी, बताओ कैसे?
    जवाब – वो औरत साल 1936 में पैदा हुई थी और मरते वक्त जिस हॉस्पिटल के कमरे में वो एडमिट थी उस कमरे का नंबर 1936 था. साथ ही उस वक्त उस औरत की उम्र 70 साल थी.

  • यह अनोखा सवाल UPSC इंटरव्यू में पूछाˈ गया कौन सा पक्षी सिर्फ बरसात का पानी पीता है और कभी भी किसी और स्रोत से नहीं? जानिए इसका चौंकाने वाला जवाबˌ

    यह अनोखा सवाल UPSC इंटरव्यू में पूछाˈ गया कौन सा पक्षी सिर्फ बरसात का पानी पीता है और कभी भी किसी और स्रोत से नहीं? जानिए इसका चौंकाने वाला जवाबˌ

    यह अनोखा सवाल UPSC इंटरव्यू में पूछाˈ गया कौन सा पक्षी सिर्फ बरसात का पानी पीता है और कभी भी किसी और स्रोत से नहीं? जानिए इसका चौंकाने वाला जवाबˌ

    नमस्कार दोस्तों सवालों भरे लेख मैं आपका स्वागत है आज हम आपके सामने कुछ नए प्रश्न लेकर आए हैं जिनका उत्तर आप जान सकेंगे। बचपन में अपने पक्षियों को तो बहुत पानी पिलाया होगा किंतु क्या आप जानते हैं कि पृथ्वी पर एक ऐसा भी पक्षी है जो केवल बरसात का ही पानी पीता है किसी और पानी को नहीं पीता। यदि आपको उसका उत्तर पता है तो हमें उसका जवाब कमेंट में दीजिए अन्यथा हमारे इस लेख के माध्यम से आप इसका उत्तर जान सकेंगे आइए जानते हैं वह कौन सा पक्षी है जो केवल बरसात का ही पानी पीता है।

    1. किस देश ने 918 किलो की खिचड़ी के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाया है ?
    जवाब – भारत ने ये रिकॉर्ड बनाया हुआ है।

    2. सबसे बड़ी आँखें किस स्तनधारी प्राणी की होती है ?
    जवाब – हिरण की सबसे बड़ी आँखे होती है।

    3. अमेरिका द्वारा प्रथम परमाणु बम कब गिराया गया था ?
    जवाब – 6 अगस्त, 1945 ई. में गिराया गया था।

    4. विद्युत प्रेस का आविष्कार किसने किया था ?
    जवाब – क्रोम्पटन ने विद्युत प्रेस का आविष्कार किया था।

    5. विजय स्तंभ कहाँ स्थित है ?
    जवाब – चित्तौड़गढ़ में स्तिथ है।

    6. कौन-सा शहर चोल राजाओं की राजधानी था ?
    जवाब – तंजौर का सेहर चोल राजाओ की राजधानी था।

    7. रानी पद्मनी का नाम खिलजी की चित्तौड़ विजय से जोड़ा जाता है रानी पद्मनी किसकी पत्नी थीं ?
    जवाब – राणा रतन सिंह की पत्नी थी महारानी पद्मावती।

    8. एक रुपये का नोट कौन जारी करता है ?
    जवाब – वित्त मंत्रालय जारी करता है।

    9. ऐसा कौन सा पक्षी है जो केवल बरसात का ही पानी पीता है ?
    जवाब – चातक एक ऐसा पक्षी है जो केवल बरसात का ही पानी पीता है।

    10. वह कौन सा देश है जिसने पहली बार फीफा विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया है ?
    नोट:- इस सवाल का उत्तर हमें नीचे कमेंट में अवश्य दें हम आशा करते हैं कि हमारे द्वारा लिखा गया लेख आपके लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा एवं आप हमारे लेखों से रुचि लेकर पढ़ते हैं आप अपना सहयोग हमारे साथ बनाए रखें धन्यवाद।

  • ऐसी कौन सी चीज है जिसे आगेˈ से भगवान और पीछे से इंसान ने बनाया? जवाब इतना अनोखा कि हर कोई रह गया हैरानˌ

    ऐसी कौन सी चीज है जिसे आगेˈ से भगवान और पीछे से इंसान ने बनाया? जवाब इतना अनोखा कि हर कोई रह गया हैरानˌ

    ऐसी कौन सी चीज है जिसे आगेˈ से भगवान और पीछे से इंसान ने बनाया? जवाब इतना अनोखा कि हर कोई रह गया हैरानˌ

    1). भारतीय रासायनिक जीव विज्ञान संस्थान कहाँ स्थित है ?
    जवाब : कोलकाता में।

    2). बताइये लक्षद्वीप किस प्रकार के द्वीप हैं ?
    जबाब – कोरल निमित्त प्रवाल द्वीप

    3). राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कब मनाया जाता है ?
    जवाब – 28 को

    4). विश्व रेडक्रास दिवस कब मनाया जाता है ?
    जवाब – 8 मई को

    5). ऐसी कौन सी चीज है जिसे आगे से भगवान ने बनाया है और पीछे से इन्सान ने बनाया है?…
    जवाब – बैल-गाड़ी

    6). सवाल – भारत का सबसे बड़ा मूँगफली उत्पादक राज्य कौन सा है ?
    जवाब – गुजरात

    7). सवाल – गाय का वैज्ञानिक नाम क्या है ?
    जवाब – बॉस इंडिकस

    8). सवाल – भारत के कौन से राज्य में आधार कार्ड नही बनते है ?
    जवाब – जम्मू कश्मीर में

    9.) इसका जवाब कमेंट बॉक्स दें ?

  • होटल में इस्तेमाल हुआ साबुन आखिर जाताˈ कहां है? जानिए उस राज़ को जो 90% लोग नहीं जानतेˌ

    होटल में इस्तेमाल हुआ साबुन आखिर जाताˈ कहां है? जानिए उस राज़ को जो 90% लोग नहीं जानतेˌ

    होटल में इस्तेमाल हुआ साबुन आखिर जाताˈ कहां है? जानिए उस राज़ को जो 90% लोग नहीं जानतेˌ

    आमतौर पर सभी बड़े होटल्स में व्यक्ति की रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल होने वाली सभी चीजें उपलब्ध होती है। यानि साबुन से लेकर टूथपेस्ट तक हर चीज का प्रबंध होता है। अब कुछ होटल्स में तो शैम्पू और साबुन हर रोज बदले जाते है, लेकिन कुछ होटल्स में ऐसा नहीं होता। मगर क्या आपने कभी ये सोचा है कि होटल में बचे हुए साबुन का आखिर क्या किया जाता है। जी हां होटल में जो शैम्पू और साबुन आदि का हम इस्तेमाल नहीं करते या थोड़ा सा इस्तेमाल करके छोड़ देते है, उनका हमारे होटल से जाने के बाद क्या किया जाता है। बहरहाल आज हम आपको इसी जानकारी से रूबरू करवाना चाहते है। अब अगर हम इसका सीधा और साफ जवाब दे तो ऐसा हो सकता है कि जो चीजें हम आधी इस्तेमाल करते है, उन्हें हमारे जाने के बाद फेंक दिया जाता है।

    होटल में बचे हुए साबुन का ऐसे होता है इस्तेमाल :

    तो वही जिन चीजों का हम इस्तेमाल नहीं करते और जो पैक्ड होती है उन्हें दूसरे मेहमानो को दे दिया जाता है। मगर आपको जान कर हैरानी होगी कि ये पूरा सच नहीं है। दरअसल एक रिपोर्ट के अनुसार यह सच सामने आया है कि जहाँ एक तरफ इन चीजों को कूड़े के ढेर में मिला दिया जाता है, वही ये चीजें कई गरीब लोगों की स्वच्छता की समस्या को दूर करने में मदद कर सकती है। इसका मतलब ये है कि जो गरीब लोग ऐसी चीजें नहीं खरीद सकते और गंदगी के कारण कई बीमारियों का सामना करते है, उन्हें ये चीजें दी जा सकती है। बता दे कि साल 2009 में कुछ एनजीओ ने इस मुद्दे को लेकर मुहिम भी चलाई थी।

    रिसाइकल किया जाता है बचे हुए सभी प्रोडक्ट्स को :

    इसके इलावा अगर रिपोर्ट की माने तो भारत में हर रोज लाखों की गिनती में ऐसे प्रोडक्ट्स होटल्स के कमरों से बाहर निकाले जाते है, जिनसे गरीबों का भला हो सकता है। गौरतलब है कि इस समस्या को खत्म करने के लिए पूरी दुनिया में क्लीन द वर्ल्ड और कई संस्थाओं ने ग्लोबल सोप प्रोजक्ट के साथ मिल कर एक मुहिम शुरू की थी। जिसके तहत आधे इस्तेमाल किए गए साबुन को नया साबुन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके इलावा बाकी प्रोडक्ट्स के साथ भी ऐसा ही होता है। फिर इन रिसाइकल किए गए प्रोडक्ट्स को विकासशील देशों में भेज दिया जाता है। यहाँ तक कि इस मुहिम का लाभ उन क्षेत्रों में रह रहे लोग भी उठा पाते है, जिनके पास स्वच्छ पानी, साबुन और सैनिटेशन की सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होती।

    गरीबों की स्वच्छता का रखा जाता है ध्यान :

    यहाँ गौर करने वाली बात ये है कि स्थानीय स्तर पर ऐसे कई एनजीओ काम करते है जो बड़े बड़े होटल्स से हर रोज कई तरह के प्रोडक्ट्स इकट्ठे करते है और उन्हें गरीबों में बाँट देते है। हालांकि जरूरतमंद लोगों को देने से पहले इन्हे रिसाइकल जरूर किया जाता है। जी हां रिसाइकल के दौरान बचे हुए साबुन और सभी प्रोडक्ट्स को कीटाणुरहित किया जाता है, ताकि लोग बिना किसी दिक्क्त के इनका इस्तेमाल कर सके। यहाँ तक कि इनकी शुद्धता की जांच भी की जाती है। अब यूँ तो होटल में बचे हुए साबुन का दोबारा इस्तेमाल करने का यह सबसे बढ़िया तरीका है, लेकिन अब भी ऐसे बहुत से होटल्स है, जिनमें बचे हुए साबुन को कचरे के रूप में फेंक दिया जाता है।

    दोस्तों हम तो आपसे यही कहेंगे कि जिस चीज का इस्तेमाल दोबारा किया जा सकता है, उन्हें फेंकने की बजाय जरूरतमंद लोगों की जरूरतें पूरी करने में उनका इस्तेमाल करे।

  • ना सोनोग्राफी ना टेस्ट प्राचीन समय मेंˈ ऐसे पता लगाते थे गर्भ में बेटा है या बेटी! 3500 साल पुरानी तकनीक जानिए यहांˌ

    ना सोनोग्राफी ना टेस्ट प्राचीन समय मेंˈ ऐसे पता लगाते थे गर्भ में बेटा है या बेटी! 3500 साल पुरानी तकनीक जानिए यहांˌ

    ना सोनोग्राफी ना टेस्ट प्राचीन समय मेंˈ ऐसे पता लगाते थे गर्भ में बेटा है या बेटी! 3500 साल पुरानी तकनीक जानिए यहांˌ

    बढ़ते विज्ञानं और टेक्नोलॉजी के चलते आजकल मार्केट में कई तरह के उपकरण मौजूद हैं, जिससे झट से पता चल जाता है कि महिला गर्भवती है या नहीं | लेकिन पहले के समय में लोग किस तरह से महिला के प्रेग्नेंट होने का पता लगाते थे?

    क्या आप जानते है?आज से 3500 साल पहले भी प्रेग्नेंसी टेस्ट किए जाते थे | उस समय लोगों के पास इसका भी पता लगाने का तरीका मौजूद था कि महिला के गर्भ में पल रहा बच्चा बेटी है या बेटा | शोध के मुताबिक मिस्र में कई सौ साल पहले भी प्रेग्नेंसी टेस्ट किए जाते थे |

    जानकारी के मुताबिक 1500 से 1300 ईसा पू. के बीच महिलाओं को प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए अपना यूरिन (पेशाब) गेहूं और जौ के एक बैग में डालना होता था | फिर उस बैग को कुछ दिनों तक देखा जाता था और अगर गेहूं और जौ का बीज उगने लगता तो इसका मतलब होता कि महिला गर्भवती हैं और यदि ऐसा कुछ भी नहीं उगता तो इसका मतलब महिला गर्भवती नहीं है |

    रिपोर्ट्स की माने तो लड़की और लड़के के जन्म की पहचान के लिए भी तरीके लिखे गए हैं | अगर उस समय अगर बैग में सिर्फ जौ उगता था तो यह समझा जाता कि लड़के का जन्म होने वाला है, और अगर गेहूं उगता तो समझा जाता कि लड़की का जन्म होगा | हालांकि ये तरीका कितना सही था या नहीं अभी इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है |

  • क्या आपने कभी सोचा है सुहागरात काˈ कमरा फूलों से ही क्यों सजाया जाता है? इसके पीछे हैं खास धार्मिक और वैज्ञानिक कारणˌ

    क्या आपने कभी सोचा है सुहागरात काˈ कमरा फूलों से ही क्यों सजाया जाता है? इसके पीछे हैं खास धार्मिक और वैज्ञानिक कारणˌ

    क्या आपने कभी सोचा है सुहागरात काˈ कमरा फूलों से ही क्यों सजाया जाता है? इसके पीछे हैं खास धार्मिक और वैज्ञानिक कारणˌ

    शादी एक पवित्र बंधन होता है। इस दौरान हिंदू धर्म में कई तरह के रीति रिवाज निभाए जाते हैं। हर परंपरा के पीछे एक कारण भी होता है। शादी के बाद दुलह-दुल्हन सुहागरात मनाते हैं। इस दौरान दुल्हन के लिए बेडरूम को फूलों से सजाया जाता है। लेकिन ऐसा क्यों करते हैं? क्या आप इसकी असली वजह जानते हैं? शर्त लगा लो, आप में से 99% लोगों को इसका असली कारण नहीं पता है।

    इस कारण सुहागरात पर फूलों से सजाते हैं दुल्हन का कमरा

    1. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुहागरात पर दुल्हन के कमरे को फूलों से सजाने पर उसकी शादीशुदा जिंदगी भी इन फूलों की तरह महकती है। दूल्हा-दुल्हन की पहली रात की शुरुआत एक खुशबूदार माहौल में होती है। इसके बाद इन दोनों का रिश्ता आजीवन ऐसा ही महकता रहता है।

    2. फूल माहौल को रोमांटिक बनाने में भी मदद करते हैं। इन्हें अपने आसपास देखकर, इन्हें छूकर और इनकी सुगंध तो महसूस कर इंसान और भी ज्यादा रोमांटिक हो जाता है। यह फूल इंसान की कामेच्छा को और बढ़ाते हैं। इससे दूल्हा और दुल्हन की सुहागरात जोश और रोमांस से भरी रहती है।

    3. माना जाता है कि फूल दूल्हा-दुल्हन के जीवन में मिठास और प्यार का रंग घोलते हैं। इसलिए कुछ लोग इन फूलों के साथ कमरे में मिठाई भी रखते हैं। इन फूलों से निकली पॉजिटिव एनर्जी दूल्हा-दुल्हन को रातभर तरोताजा रखती है। वह एक सकारात्मक माहौल में संबंध बनाते हैं। यह चीज इनके रिश्ते को और मजबूत करती है।

    4. सुहागरात के कमरे में वैसे तो कई प्रकार के फूल लगाए जाते हैं। लेकिन इस दिन गुलाब के फूलों का खास महत्व होता है। गुलाब पूरी दुनिया में प्यार का प्रतीक माना जाता है। इसलिए सुहागरात का डेकोरेशन लाल रंग के गुलाब के बिना अधूरा है। वैसे आप चाहें तो लैवेंडर की खुशबू के इत्र का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे माहौल और भी रोमांटिक और दिलकश बन जाएगा।

    5. शादी के बाद दुल्हन अपना घर छोड़कर एक नए घर में आती है। यहां आने से पहले उसके मन में डर और नर्वसनेस रहती है। ऐसे में यदि हम उसका बेडरूम फूलों से सजा दें तो उसका उदास मन खुश हो जाता है। वह अपना ये शानदार वेलकम देख खुश हो जाती है। उसे स्पेशल होने का एहसास होता है। इससे उसका न सिर्फ दूल्हे से, बल्कि घर के हर सदस्य से लगाव बढ़ जाता है। फिर वह जीवनभर दिल से उनकी सेवा करती है।

    वैसे आपकी सुहागरात पर कमरे को किस तरह से सजाय गया था? अपने अनुभव कमेंट में जरूर शेयर करें।