Category: Gazab

  • 100 साल पहले हुई थी वाघ बकरीˈ चाय की स्थापना, ऊंच नीच के भेदभाव के खिलाफ देती है संदेशˌ

    100 साल पहले हुई थी वाघ बकरीˈ चाय की स्थापना, ऊंच नीच के भेदभाव के खिलाफ देती है संदेशˌ

    100 साल पहले हुई थी वाघ बकरीˈ चाय की स्थापना, ऊंच नीच के भेदभाव के खिलाफ देती है संदेशˌ

    ‘वाघ बकरी चाय’ एक जाना माना ब्रांड है। देश में करोड़ों लोग ‘वाघ बकरी चाय’ पीया करते हैं। ‘वाघ बकरी’ कंपनी की शुरूआत साल 1934 में नारनदास देसाई ने की थी। नारनदास देसाई ने दक्षिण अफ़्रीका से गुजरात आकर इस व्यापार को शुरू किया था। दरअसल ये चाय का व्यापार करने के लिए दक्षिण अफ़्रीका गए थे और यहां पर इन्होंने 500 एकड़ का एक चाय का बागान खरीदा था। हालांकि अंग्रेज़ी हुकूमत और रंग व नस्ल भेदभाव के कारण ये भारत वापस आ गए।

    ये महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानते थे और जब ये भारत लौटे तो इनके पास कुछ सामान और बापू की लिखी हुई एक चिट्ठी थी। जो कि प्रमाण पत्र था। इसकी मदद से ही ये गुजरात में आसानी से अपना चाय का व्यापार शुरू कर पाए थे। ये पत्र 12 फरवरी, 1915 को गांधी जी ने लिखा था। इस चिट्ठी में गांधी जी ने देसाई की तारीफ़ की थी और लिखा था कि ‘मैं नारनदास देसाई को दक्षिण अफ़्रीका में जानता था। जहां वो कई सालों से सफ़ल चाय बागान के मालिक रहे।

    गांधी जी का ये पत्र दिखाकर ही ये अपने सपने को पूरा कर सके और कम समय के अंदर ही गुजरात में इन्होंने चाय की अपनी कंपनी शुरू कर दी।

    खोली गुजरात टी डिपो कंपनी

    अपने जन्म राज्य गुजरात में आकर इन्होंने चाय के व्यापार को नए सिरे से शुरू किया। साल 1915 में भारत लौटे नारानदास देसाई ने गुजरात टी डिपो कंपनी की स्थापना की। वहीं 1934 में गुजरात टी डिपो कंपनी का नाम ‘वाघ बकरी’ रख दिया गया। फिर धीरे-धीरे ये ब्रांड पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गया।

    कंपनी का Logo हुआ फेमस

    नारनदास की कंपनी वाघ बकरी चाय का Logo काफी अलग था और उस दौरान इनकी कंपनी का ये लॉगो काफी फेमस हुआ था। चाय के पैकेट में बनें लॉगो में एक बाघ और एक बकरी बनीं हुई थी। ये दोनों एक ही प्याली से चाय पी रहे थे। इस लॉगो को नारनदास जी ने काफी सोच समझकर बनाया था। दरअसल गुजराती भाषा में बाघ को ‘वाघ’ कहते हैं। इसलिए चाय के पैकेट पर बाघ की जगह वाघ लिखा हुआ है।

    ये लॉगो एकता और सौहार्द का प्रतीक है। इस चिह्न में बाघ यानी उच्च वर्ग के लोग और बकरी यानी निम्न वर्ग के लोग दिखाए गए हैं। ये दोनों एक साथ चाय पी रहे हैं। जो कि सामाजिक एकता का प्रतीक है।

    भारत में ये कंपनी 15 चाय लाउंज का स्वामित्व और संचालन करती है। इसके उत्पाद अमेरिका, कनाडा, मध्य पूर्व, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी, मलेशिया और सिंगापुर में भी बेचे जाते हैं। मार्च 2021 तक कंपनी द्वारा कुल बिक्री में निर्यात का योगदान 5% था।

    wagh bakri tea history

    आज ये ब्रांड 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार और 40 मिलियन किलोग्राम से अधिक की चाय पत्ति का वितरण करता है। राजस्थान, गोवा से लेकर कर्नाटक तक, पूरे भारत में, वाघ बकरी चाय का सेवन किया जाता है। इस कंपनी में पांच हजार लोग काम करते हैं और ये आज भारत का एक जाना माना ब्रांड बन गया है।

  • UP के इस मंदिर में होती हैˈ कुत्ते की पूजा, यहां के जादुई तालाब का रहस्य जान रह जाएंगे हैरानˌ

    UP के इस मंदिर में होती हैˈ कुत्ते की पूजा, यहां के जादुई तालाब का रहस्य जान रह जाएंगे हैरानˌ

    UP के इस मंदिर में होती हैˈ कुत्ते की पूजा, यहां के जादुई तालाब का रहस्य जान रह जाएंगे हैरानˌ

    UP Worship Dog: दुनियाभर में अलग-अलग जाति और धर्म के लोग रहते हैं. हर तरफ हजारों ऐसी जातियां है जो किसी न किसी को अपना देवता मानती हैं. वहीं भारत में तो सूर्य से लेकर पेड़ों तक को देवता के रूप में देखा जाता है.

    आज हम आपको यूपी के ही एक ऐसे ही मामले की जानकारी देने जा रहे हैं जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे. दरअसल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चिपियाना बुजुर्ग गांव में भैरव बाबा मंदिर के प्रांगण में कुत्ते की मूर्ति लंबे समय से लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है. मान्यता है कि कुत्ते के काटने पर अगर मंदिर प्रांगण के पास बने तालाब में स्नान किया जाए तो कुत्ते के काटने का असर वहां कम हो जाता है. बताया जा रहा है कि इस मंदिर की मान्यता इतनी है कि लोग दूर-दूर से कुत्ते की मूर्ति की पूजा करने आते हैं और प्रसाद भी चढ़ाते हैं. वहीं कहा जा रहा है कि इलाके के रहने वाले लाखा बंजारे नाम के एक व्यक्ति ने अपने कुत्ते की मौत के बाद उसे यहीं दफनाया था. बाद में गांव वालों ने कुत्ते की कब्र पर एक मंदिर का निर्माण करवा दिया, जिसे आज देवता के रूप में देखा जाता है.

    जादुई तालाब की कहानी

    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चिपियाना गांव में भैरव मंदिर के पास मौजूद इस कुत्ते की समाधि की कहानी काफी हैरान कर देगी. वहीं कुत्ते की समाधि के पास एक तालाब बनाया गया है. कहा जाता है कि तालाब में नहाने से कुत्ते के काटने का असर खत्म हो जाता है. इतना ही नहीं हर शनिवार यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ आती है. आज भी मान्यता है कि कुत्ते के काटने के बाद मंदिर परिसर के पास स्थित तालाब में नहाने से रेबीज का असर कम हो जाता है. दिलचस्प बात ये है कि मंदिर के बाहर एक कुंड भी बनाया गया है. जो लोग तालाब में नहीं नहाते, वो कुंड में जाकर नहा लेते हैं.

    जानिए इसके पीछे का रहस्य

    ऐसे ही वहां के लोग कुत्ते की पूजा नहीं करते बल्कि इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है. ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 150 साल पहले, लाखा नाम के एक खानाबदोश ने अपने कुत्ते के लिए एक मकबरा बनवाया था. कहानी के पीछे की कहानी यह है कि खानाबदोश के पास एक कुत्ता था. उसने एक व्यापारी से कुछ पैसे उधार लिए थे. समय पर कर्ज न चुका पाने पर, उसने अपना कुत्ता व्यापारी के पास गिरवी रख दिया. कुछ दिनों बाद, व्यापारी के घर चोरी हो गई. इस दौरान, कुत्ते ने न तो लुटेरों पर भौंका और न ही अपने मालिक को जगाया. सुबह जब व्यापारी को चोरी का पता चला, तो वो कुत्ते पर भड़क उठा. कुछ ही देर बाद, कुत्ते ने अपने मालिक की धोती पकड़ ली और उसे उस जगह ले गया जहां लुटेरों ने चोरी का सामान छिपा रखा था.

    चोरी का सामान पाकर व्यापारी बहुत खुश हुआ. उसने इनाम के तौर पर कुत्ते को आज़ाद किया और लाखा को लौटा दिया. गाँव वालों का कहना है कि जैसे ही कुत्ता लाखा के पास पहुँचा, खानाबदोश को लगा कि कुत्ते ने व्यापारी से किया वादा तोड़ दिया है. गुस्से में आकर उसने कुत्ते को गोली मार दी. जब उसे सच्चाई पता चली, तो उसे बहुत पछतावा हुआ. पश्चाताप के प्रतीक के रूप में उन्होंने भैरव बाबा मंदिर में कुत्ते के लिए समाधि बनवाई.

  • मंडप में सांवली लड़की देख लड़के नेˈ तोड़ी शादी. किस्मत ऐसी पलटी की लड़की के आगे गिड़गिड़ाया लड़काˌ

    मंडप में सांवली लड़की देख लड़के नेˈ तोड़ी शादी. किस्मत ऐसी पलटी की लड़की के आगे गिड़गिड़ाया लड़काˌ

    मंडप में सांवली लड़की देख लड़के नेˈ तोड़ी शादी. किस्मत ऐसी पलटी की लड़की के आगे गिड़गिड़ाया लड़काˌ


    बारात खाली लौट चुकी थी , शादी के मेहमान भी सारे लौट चुके थे। इस बार शादी दहेज के लिए नहीं लड़की के सावले पन की वजह से टूटी थी। लड़की का बाप सबके पैरों मे गिरा था। आखिर बाप था बेटी का और बेटे से ज्यादा बेटी सम्मानित करती है बाप को और एक बाप हमेशा अपनी बेटी के कारण सम्मानित होना चाहता है।

    सगाई के दिन तक लड़का को श्वेता (लड़की का नाम) पसंद थी मगर शादी के वक्त उसने लड़की को उसके सावलेपन के कारण छोड़ दिया। श्वेता के पिता खाली कुर्सीयो के बिच बैठकर बहुत देर तक रोते रहे। घर मे बस दो ही लोग , बाप और बेटी श्वेता। जब श्वेता पांच साल की थी तब माँ चल बसी थी।
    अचानक उन्हें ख्याल आया अपनी बेटी श्वेता का, कहीं बारात लौटने की वजह से मेरी बेटी…?s?????। दौड़कर जाते हैं श्वेता के कमरे की ओर.. मगर ये क्या.? श्वेता दो कप चाय लेकर मुस्कुराती हुई आ रही थी अपने पापा की ओर। दुल्हन के जोड़े की जगह घर मे काम करते पहनने वाले कपड़े थे शरीर पर। पापा हैरान उसको इस हालत मे देखकर ,

    गम की जगह मुस्कुराहट , निराशा की जगह खुशी , कुछ समझ पाते इससे पहले श्वेता बोल पडी। बाबा चलो जल्दी से चाय पिओ और फटाफट ये किराये की पांडाल और कुर्सीया , बर्तन सब पहुँचा देते हैं जिनका है , वरना बेकार मे किराया बढ़ता रहेगा। इधर पापा के लिए श्वेता पहेली बन चुकी थी। बस पापा तो अपनी बेटी को खुश देखना चाहते थे ।

    वजह कोई भी हो। इसलिए वजह नही पूछा उन्होंने। फिर वह बेटी से बोलते हैं :– बेटी.. चल गाँव वापस जाते है , यहां शहर मे अब दम घुटता है। श्वेता मान जाती है। फिर कुछ दिनों बाद वह शहर छोड़ गाँव वापस आ जाते हैं। गाँव मे वह मछली पकड़ने का काम करते थे मगर श्वेता की मां के गुजर जाने के बाद ।

    उनकी यादों से पिछा छुड़ाने के लिए शहर जाकर मजदूरी का काम करते थे। अब फिर उन्होंने वही पेशा अपनाया था। श्वेता भी पहले की तरह अपने बाबा के साथ मछली मारने जाने लगी। इधर उस लड़के का एक खूबसूरत गोरी लड़की से शादी तय हो चुका थी , लड़का बेहद खुश था। मगर उसे भी शौक था कि दोस्तों के साथ शहर से दूर घूमने का।

    एक दिन ऐसे ही घूमने निकले थे और नदी किनारे मजाक मस्ती कर रहे थे दोस्तो के साथ कि अचानक पैर फिसल कर गहरे पानी मे लड़का गिर जाता है। नदी का बहाव तेज भी था और गहरा भी। नदी लड़के को बहा ले जाती है। उसके दोस्त बचाने की बहुत कोशिश करते हैं , मगर सब व्यर्थ। इधर एक सुबह श्वेता के पापा अकेले नदी जाते हैं तो वहां रात को बिछाये उनके जाल में लड़का फँसा मिलता है ।

    वह तुरंत अंधेरे मे ही लड़के को अपने कंधे पे उठाकर अपने घर लाते हैं। जंहा बहुत मसक्कत के बाद लड़के को होश आता है। मगर सामने श्वेता और उसके पापा को देखकर बहुत शर्मा जाता है और तुरंत यादश्त जाने की एक्टिंग करता है। पापा :– बेटी… लड़के को कुछ पता नहीं , शायद अपनी यादस्त खो चुका है और इसे कुछ चोटे भी आई हैं। मैं इसको शहर पहुँचा देता हूँ। श्वेता :– रहने दीजिए दो चार दिन पापा.!

    जब घाव भर जायेगी तो तब छोड़ देना। पापा :– तू जानती है , ये कौन है.? श्वेता मुस्कुराकर अपने बाबा से लिपटकर कहती है.. क्यों नहीं बाबा , जानती हूँ। मगर वह पुरानी हैं बातें जो बीत चुकी हैं। अब नया ये है कि इनके घाव का इलाज किया जाये। वैसे भी इन्हें अब सावलेपन से कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये अपनी यादस्त खो चुके हैं। ये हमारे घर आये घायल मेहमान हैं , इसलिए इन्हें पूरी तरह ठीक करना हमारा धर्म है।

    मगर श्वेता के पापा ने मुस्कुराहट के बिच भी बेटी के पलकों पर कुछ नमी महसूस जरूर की थी। इधर लड़का सारी बाते सुन लेता है। वह बेहद हैरान था इस वक्त। लड़के का इलाज शुरू होता है। इधर हर समय लड़की लड़के की देखभाल करती है। श्वेता के ख्याल रखने के तरीके को देखकर लड़के को प्यार हो जाता है श्वेता से।

    हंसी मजाक तकरार होती रहती है दोनों में। एक दिन जब लड़के का घाव भर जाता है तो लड़का श्वेता से कहता है :– मैं कौन हूँ , कहां से आया , मेरा नाम क्या है , मैं कुछ नहीं जानता मगर तुम्हारा अपनापन देखकर मेरा यहीं रहने को दिल करता है हमेशा के लिए। श्वेता :– आप चिंता न करो , हमारे बाबा आपको कल शहर छोड़ देंगे और आपको गाड़ी की छत पर बिठाकर निचे लिख देंगे कि एक खूबसूरत नौजवान को माता पिता के घर का पता बताने वाले को एक लाख दिया जायेगा ।

    लड़का :– मेरा मजाक उड़ा रही हो..? श्वेता :– अरे नहीं नहीं , हमारी इतनी औकात कहां जो हम किसी का मजाक उडा़ सकें। लड़का :– तुमने कभी किसी से प्यार किया है श्वेता.? श्वेता :– नहीं , मगर किसी एक को मैंने अपनी दुनिया मानी थी मगर उसने मुझे अपना बनाने से इंकार कर दिया। लड़का :– जरूर वह कोई पागल ही होगा जिसने तुम्हें ठुकराने की गलती की है। श्वेता :– नहीं नहीं , वह एक समझदार लड़का था ।

    पागल होता तो मुझे जरूर अपना बनाता। लड़का :– यदि वह लड़का फिर से अपनी गलती को स्वीकार करके तुम्हें अपनाने आ जाये तो क्या उसे माफ करके उसके साथ शादी करोगी..? श्वेता के पापा दुसरे कमरे से दोनों की बातें सुन रहे थे। श्वेता :– गलती उनकी कुछ भी नहीं थी तो मैं कैसे बिना गलती के उन्हें माफ कर दूँ।

    गलती तो मेरी थी। लड़का खुश होकर कहता है कि इसका मतलब तुम उस लड़के से शादी कर सकती हो.? श्वेता :– बिलकुल नहीं। अब दोबारा उनसे शादी के बारे मे सोच भी नहीं सकती। लड़का :– मगर क्यों..? अब फिर क्या उलझन है..? श्वेता कुछ देर खामोश रहती है और खिड़की की ओर देखने लगती है। शायद कुछ कहने से पहले खुद को सम्भालना चाहती थी। शायद पलकों पे दर्द पिघल रहा था।

    अंदर उसके पापा भी हैरान चकित होकर वजह सुनने को बेताब हैं। लड़का पास जाकर श्वेता को अपनी तरफ करता है मगर श्वेता की पलकों पर आसुंओं का सैलाब देखकर कुछ कहने की हिम्मत नहीं होती। श्वेता अपनी पलको को उँगली से साफ करते हुए कहती है :– उस दिन मैंने अपने बाबा को उस इंसान के पैरों पर सर रखकर मेरे लिए गिडगिडाकर रोते हुये देखा था , मेरे उस बाप को जो मेरा अभीमान , मेरा घमंड है। पता है उस दिन मैं अकेले मे रोयी थी। बारात लौट चुकी थी।

    लोग आस्ते आस्ते जा चुके थे , मगर एक शख्स ऐसा भी था जो अपनी बेटी के लिए सबके पैर पकड़ पकड़ कर थक सा गया था। वह सिर्फ अकेला बैठा था अपनी तक्दीर पर रोने के लिए। खिड़की से बहुत देर तक मेरे उस बेबस बाबा को नमी आखो से देखती रही जो मेरा सबकुछ था।

    मैंने अचानक अपनी पलकों को पोंछा फिर ठीक से धोया और दुल्हन के वस्त्र खोलकर दूसरी पहन ली , फिर चाय बनाई। कितना मुश्किल था उस वक्त खुद के आसुंओ को रोकना। क्योंकि उस दिन मेरी जिंदगी लौटी थी मुझे एक लाश समझकर। ये लेख हिमाचली खबर से। जरूरी था मुस्कुराना , क्योंकि सामने वह शख्स था जो मेरे आँसू देखता तो शायद जी नहीं पाता।

    मुझे मुस्कुराना था अपने बाबा के लिए , क्योंकि मेरी खूबसूरत राजगद्दी के मेरे बाबा , मेरे राजा हैं और मैं उनकी राजकुमारी। मुझे सावली मानकर एक शख्स ने ठुकरा दिया मगर मेरे बाबा मेरे लिए वह शख्स थे जब मेरे पाँच साल की उम्र मां गुजर गयी तब भी इन्होंने दूसरी शादी नहीं की ।

    कहीं उनकी राजकुमारी को कोई दूसरी औरत आकर न सताये। अंदर श्वेता के पापा का बुरा हाल था। पहली बार वह अपनी बेटी के मुँह से वह दर्द की कहानी सुन रहे थे , जिस दर्द को बाप की खातिर झूठे मुस्कान की चादर से बेटी ने ढक के रखा था। मर्द था वह बाप मगर बेटी के दर्द ने मोम की तरह पिघला के रख दिया था। इधर श्वेता रोते रोते आगे कहती है

    :– हर बेटी के अच्छे बाप की जिंदगी और मौत बेटी के पलकों पर छुपी होती है। जंहा बेटी मुस्कुराई वहाँ एक पिता को दोगुनी जिंदगी मिलती है और जंहा बेटी रोयी बाप एक तरह से मर ही जाता है। मैं सावली थी उनके लिए मगर मै अपने पापा के लिए एक परी, एक राजकुमारी हूँ। उन्होंने बारात लौटी दी मेरी दहलीज से , मगर मेरे पापा ने उस शहर को ठोकर मार दी जहाँ उनकी राजकुमारी का अपमान हुआ था।

    अब आप ही सोचो , कैसे कर लूँ शादी दोबारा उस शख्स से जिसने मेरे खुदा को अपने कदमों मे झुकाया हो। माना सावली हूँ मैं मगर हूँ तो एक बेटी ही। लड़का पलके झूकाये सुनता रहा। सर उठाया तो वो भी रो रहा था एक सावली लड़की के दर्द को सुनकर। लड़के को कुछ नहीं सुझा तो अपने आप एक हाथ उठाकर श्वेता को सल्यूट कर बैठा और धीमे से कहा.. क्या मै तुम्हें एक बार गले से लगा सकता हूँ..? श्वेता कुछ नहीं कहती ।

    मगर लड़का तुरंत श्वेता से गले लगकर बस इतना ही कहता है… भगवान करे मुझे एक सावली लड़की मिले। अरदास है मेरी कि मुझे तुम ही मिलो। फिर श्वेता को उसी हालत में छोड़ कर श्वेता के पिता के कमरे मे आता है। जंहा श्वेता के पिता बैठकर रो रहे थे। लड़के को देखकर अचानक खड़े हो जाते हैं।

    मगर तब तब लड़का उनके पैरों मे गिरकर माफी माँगता है और खड़े होकर कहता है :– मेरी याददास्त बिलकुल ठीक है मगर आप ये बात श्वेता को मत बताना वरना ये गुनाह पहले गुनाह से बड़ा होगा , शायद मेरी याददास्त उस वक्त गयी थी जब मैंने श्वेता को ठुकराया था और आपको झुकाया था।

    मैं कोई सफाई नहीं दूंगा अपनी बेगुनाही की। हाँ मैंने गुनाह किया है मगर कोई मुझे सजा तो दे… कहते कहते लड़का रोने लगता है। मुझे मेरे गुनाहो की सजा के रूप मे श्वेता दे दिजीए। मुझे आपकी परी चाहिए , आपकी राजकुमारी चाहिए। मैं इंतजार करूँगा कि कब मेरे गुनाहो की पैरवी होती है। उस दिन जज भी श्वेता होगी और वकील भी श्वेता।

    सजा दे या रिहा करे… मैं बस उसका ही हूँ। इतना कहकर लड़का कहता है … बाबा अब आज्ञा दीजिए हमें। हम निकलते हैं , एक दिन और यंहाँ रहा तो मैं जी नहीं सकूँगा श्वेता का गुनाहगार बनके। लड़का निकल जाता है। श्वेता दूर तक जाते देखती रहती है अपनी जिंदगी को। मगर पलकों मे एक उम्मीद की नमी थी , उसके वापस आने की। क्योंकि श्वेता , लड़के और अपने बाबा की बात सुन चुकी थी।

    बाबा :- – श्वेता तू एक बार और सोच ले क्योंकि वह पश्चाताप की आग मे जल रहा है। तेरी खुशी किसमे है पता नहीं मगर मेरी खुशी तो तू है और तेरे बाबा का दिल कहता है कि चल फिर तुझे सजा दू दुल्हन के रूप मे उसी लड़के के साथ जिसने तूझे सावली कहा था।

    श्वेता :– बाबा.. हम तो बस आपको खुश देखना चाहते हैं , लोग जितना भी नफरत क्यों न करे हमसे। जीतना भी सतायेगा क्यों न , हमें कोई फर्क नहीं पड़ता मगर जिस दिन आपको दुखी देखा मैंने उस दिन टूट जाउगी मै। इधर श्वेता बाप की खुशी मे तैयार हो जाती है। उधर लड़का अपने मा बाप को लाता है। लड़का जिद करता है कि शादी शहर में हो , उसी घर मे हो जहाँ से मैंने मेरी सावली को ठुकराया था। इसके बाद दोनों की शादी हो गई। तो दोस्तों किसी के रंग पर जाकर उसे जज नहीं करना चाहिए। कहानी अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करना।

  • सिर्फ 22 इंच की ये खास नस्लˈ की दो गायें बनीं इंटरनेट सेंसेशन देखने के लिए उमड़ पड़ा गांव से शहर तक का मेलाˌ

    सिर्फ 22 इंच की ये खास नस्लˈ की दो गायें बनीं इंटरनेट सेंसेशन देखने के लिए उमड़ पड़ा गांव से शहर तक का मेलाˌ

    सिर्फ 22 इंच की ये खास नस्लˈ की दो गायें बनीं इंटरनेट सेंसेशन देखने के लिए उमड़ पड़ा गांव से शहर तक का मेलाˌ

    नूंह | हरियाणा के नूंह के रहने वाले राजेश जिंदल (Rajesh Jindal) ने दुर्लभ प्रजाति की दो गायों को खरीदा है, जो अब आसपास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है. तावडू के रहने वाले राजेश जिंदल ने कुछ दिनों पहले ही फेसबुक पर एक पोस्ट देखी थी, जिसमें डेढ़ फुट से 2 फुट के गोवंश के बारे में जिक्र किया गया था, उनकी हाइट मात्र 22 इंच थी. उन्होंने इसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से पता लगाया कि खुद प्रधानमंत्री मोदी भी इस दुर्लभ पुंगनूर गोवंश प्रजाति को बचाने की अपील कर चुके हैं.

    6 लाख रूपए में खरीदी गाय

    उन्होंने निर्णय लिया कि वह भी इसी नस्ल के गौवंश को घर लाएंगे. वह एक साथी को लेकर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में पहुंच गए और वहां से एक गौशाला में पल रहे अद्भुत नस्ल के गोवंश को 6 लाख रूपए में खरीद लिया.

    राजेश जिंदल ऐसा दावा करते हैं कि दुर्लभ पुंगनूर नस्ल की गोवंश को लाने का प्रदेशभर में यह ऐसा पहला मामला है. इन गोवंशों की उम्र महज 19 महीने है. इनकी चर्चा आसपास के इलाकों में इतनी ज्यादा हो चुकी है कि रेवाड़ी गोकुलपुरा धाम के महंत धीरज गिरी महाराज, पूर्व राज्य मंत्री कुंवर संजय सिंह, मनोनीत पार्षद सतपाल सहरावत समेत तमाम लोग इनके दर्शन करने आ चुके हैं. स्वयं महंत धीरज गिरी महाराज ने भी इसी नस्ल के गौवंशों को मंगवाने की मांग की है.

    गुणों से भरपूर हैं ये गौवंश

    यह नल शारीरिक रूप से बेहद छोटी होती है, लेकिन यह अब विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी है. छोटे कद और दुर्लभ गुणों के चलते यह काफी प्रसिद्ध प्रजाति मानी जाती है. इस नस्ल के गौवंशों का मूत्र और गोबर बेचकर भी अच्छे खासे पैसे कमाए जा सकते हैं.

  • एक गाँव के एक जमींदार ठाकुर बहुतˈ वर्षों से बीमार थे। इलाज करवाते हुए कोई डॉक्टर कोई वैद्य नहीं छोड़ा कोई टोने टोटके करने वाला नहीं छोड़ा। लेकिन कहीं से भी थोड़ा सा भी आराम नहीं आया ! एक संत जी गाँव में आये उनके दर्शन करने वो ज़मींदार भी वहाँ गया और उन्हें प्रणाम किया। उसने बहुत दुखी मन से कहा – महात्माˌ

    एक गाँव के एक जमींदार ठाकुर बहुतˈ वर्षों से बीमार थे। इलाज करवाते हुए कोई डॉक्टर कोई वैद्य नहीं छोड़ा कोई टोने टोटके करने वाला नहीं छोड़ा। लेकिन कहीं से भी थोड़ा सा भी आराम नहीं आया ! एक संत जी गाँव में आये उनके दर्शन करने वो ज़मींदार भी वहाँ गया और उन्हें प्रणाम किया। उसने बहुत दुखी मन से कहा – महात्माˌ

    एक गाँव के एक जमींदार ठाकुर बहुतˈ वर्षों से बीमार थे। इलाज करवाते हुए कोई डॉक्टर कोई वैद्य नहीं छोड़ा कोई टोने टोटके करने वाला नहीं छोड़ा। लेकिन कहीं से भी थोड़ा सा भी आराम नहीं आया ! एक संत जी गाँव में आये उनके दर्शन करने वो ज़मींदार भी वहाँ गया और उन्हें प्रणाम किया। उसने बहुत दुखी मन से कहा – महात्माˌ

    एक गाँव के एक जमींदार ठाकुर बहुत वर्षों से बीमार थे। इलाज करवाते हुए कोई डॉक्टर कोई वैद्य नहीं छोड़ा कोई टोने टोटके करने वाला नहीं छोड़ा।

    लेकिन कहीं से भी थोड़ा सा भी आराम नहीं आया !

    एक संत जी गाँव में आये उनके दर्शन करने वो ज़मींदार भी वहाँ गया और उन्हें प्रणाम किया।

    उसने बहुत दुखी मन से कहा – महात्मा जी मैं इस गाँव का जमींदार हूँ का सैंकड़ों बीघे जमीन है इतना सब कुछ होने के बावजूद मुझे एक लाइलाज रोग है जो कहीं से भी ठीक नहीं हो रहा !

    महात्मा जी ने पूछा भाई, क्या रोग है आपको।

    जी मुझे मल त्याग करते समय बहुत खून आता है और इतनी जलन होती है जो बर्दाश्त नहीं होती। ऐसा लगता है मेरे प्राण ही निकल जायेंगे। आप कुछ मेहरबानी करो।

    महात्मा जी बाबा ने आँख बंद कर ली शांत बैठ गये थोड़ी देर बाद बोले -बुरा तो नहीं मानोगे एक बात पूछूँ ?

    नहीं महाराज पूछिये !

    तुमने कभी किसी का दिल इतना ज़्यादा तो नहीं दुखाया कि उसने तुम्हें जी भरके बद्दुआऐं दी हों जिसका दण्ड आज तुम भोग रहे हो? तुम्हारे दुःख देने से वो इतना अधिक दुखी हुआ हो जिसके कारण आज तुम इतनी पीड़ा झेल रहे हो ?

    नहीं बाबा !

    जहाँ तक मुझे याद है, मैंने तो कभी किसी का दिल नहीं दुखाया।

    याद करो और सोचो कभी किसी का हक तो नहीं छीना, किसी की पीठ में छुरा तो नहीं मारा किसी की रोज़ी रोटी तो नहीं छीनी? किसी का हिस्सा ज़बरदस्ती, तुमने खुद तो नहीं संभाला हुआ ?

    महात्मा जी की बात पूरी होने पर वो ख़ामोश और शर्मसार हो कर बोला।

    जी मेरी एक विधवा भाभी है जो कि इस वक्त अपने मायके में रहती है वो जमीन में से अपना हिस्सा मांगती थी।

    यह सोचकर मैंने उसे कुछ भी नहीं दिया कि कल को ये सब कुछ अपने भाईयों को ही दे देगी, इसका क्या पता ?

    बाबा ने कहा -आज से ही उसे हर महीने सौ रूपए भेजने शुरू करो ! यह उस समय की बात है जब सौ रूपए में पूरा परिवार पल जाता था !

    उसने कुछ रूपए भेजना शुरू कर दिया ! दो तीन हफ़्तों के बाद उसने बाबा से आकर कहा – जी मै पचहत्तर प्रतिशत ठीक हूँ !
    महात्मा जी ने सोचा कि इसे तो पूरा ठीक होना चाहिये था ऐसा क्यों नहीं हुआ ?

    उससे पूछा तुम कितने रूपए भेजते हो ?

    जी पचहत्तर रूपए हर महीने भेजता हूँ

    इसी कारण तेरा रोग पूरा ठीक नहीं हुआ !

    सन्त जी ने कहा, उसका पूरा हक उसे इज़्जत से बुला कर दे दो, वो अपने पैसे को जैसे मर्जी खर्च करे, अपनी ज़मीन जिसे चाहे दे दे । यह उसकी मिल्कीयत है इसमें तुम्हारा कोई दख़ल नहीं है !
    जानते हो वो कितना रोती रही है, जलती रही है तभी आपको इतनी जलन हो रही है।

    ज़रा सोचो, मरने के बाद हमारे साथ क्या जायेगा ?

    ज़मींदार को बहुत पछतावा हुआ। उसने फौरन ही अपनी विधवा भाभी और उसके भाईयों को बुलाकर, सारे गाँव के सामने, उसकी ज़मीन, उसके हक का पैसा उसे दे दिया और हाथ जोड़कर अपने ज़ुल्मों की माफी माँगी।

    उसकी भाभी ने उसे माफ कर दिया और उसके परिवार को खूब आशीर्वाद दिये

    जमींदार का रोग शीघ्र ही पूरी तरह से ठीक हो गया !

    अगर आपको भी ऐसा कोई असाध्य रोग है तो ज़रूर सोचना, कहीँ मैंने किसी का हक तो नहीं छीना है ? किसी की पीठ में छुरा तो नहीं घोंपा है ? किसी का इतना दिल तो नहीं दुखाया हुआ कि वो बेचारा इतना बेबस था कि तुम्हारे सामने कुछ कहने की हिम्मत भी ना कर सका होगा ?

    लेकिन उस बेचारे के दिल से आहें निकली होंगी जो आपके अंदर रोग पैदा कर रही है जलन पैदा कर रही हैं।

    याद रखिये, परमात्मा की लाठी बिल्कुल बे आवाज़ है।

  • दुनिया भर में हिंदू धर्म का होगाˈ ‘राज’, रूस भी करेगा प्रचार, पाकिस्तान का युद्ध में होगा सत्यानाश…!ˌ

    दुनिया भर में हिंदू धर्म का होगाˈ ‘राज’, रूस भी करेगा प्रचार, पाकिस्तान का युद्ध में होगा सत्यानाश…!ˌ

    दुनिया भर में हिंदू धर्म का होगाˈ ‘राज’, रूस भी करेगा प्रचार, पाकिस्तान का युद्ध में होगा सत्यानाश…!ˌ

    इन दिनों भारत और पाकिस्तान के बीच माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है. दुनिया भर के एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि आने वाले समय में ये दोनों देश आमने-सामने युद्ध के मैदान में उतर सकते हैं.

    सिर्फ यही नहीं, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे कई एशियाई देशों में भी असंतोष और अशांति का माहौल देखा जा रहा है. यूरोप के हालात भी ठीक नहीं हैं, जबकि यूक्रेन और रूस के बीच जंग जारी है.

    इसी बीच दुनिया के सबसे मशहूर भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की एक पुरानी भविष्यवाणी एक बार फिर चर्चा में आ गई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है.

    नास्त्रेदमस ने भविष्यवाणी की थी कि भारत को अपनी सेना मजबूत करनी चाहिए, वरना उसका दुश्मन उसे आश्चर्यचकित कर सकता है. उन्होंने संकेत दिए कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की स्थिति बन सकती है, अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई.

    नास्त्रेदमस ने भविष्यवाणी की थी कि साल 2025 में भीषण गर्म हवाएं चलेंगी और दुनिया जलवायु परिवर्तन से बुरी तरह प्रभावित होगी. खासकर यूरोप में इसका असर बहुत ज्यादा दिखाई देगा.

    सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाली बात यह है कि नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों में हिंदू धर्म के उत्थान और भारत के विश्वगुरु बनने की बात भी कही गई है. उन्होंने लिखा है कि:

    • एक महान हिंदू नेता दक्षिण भारत से उभरेगा, जो पूरी दुनिया पर असर डालेगा.
    • यह नेता गुरुवार के दिन को पवित्र मानेगा और पूजा-पाठ से जुड़ा रहेगा.
    • यह दक्षिण भारतीय नेता शांति के साथ-साथ शत्रुओं का सफाया भी करेगा.
    • भारत की संस्कृति, योग और वेदांत पूरी दुनिया में फैलेंगे.
    • रूस जैसे शक्तिशाली देश भी हिंदू धर्म को अपनाने में आगे आएंगे.

    उन्होंने अपनी एक कविता (Quatrain 95, Century III) में लिखा:
    ‘The creed of the Moor will perish,
    Followed be another more popular still,
    The Dnieper will be the first to relish,
    The wisdom which imposes its will.’

    इसका मतलब निकाला जा रहा है कि एक पुराना धर्म खत्म होगा और उसकी जगह एक नया, ज्यादा लोकप्रिय धर्म उभरेगा और यह धर्म हिंदू संस्कृति से जुड़ा होगा. नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी साफ कहती है कि 21वीं सदी भारत की होगी. भारत न सिर्फ एक ताकतवर देश के रूप में उभरेगा, बल्कि उसकी संस्कृति, ज्ञान और दर्शन पूरी दुनिया में फैलेगा. योग और वेदों की बातें हर कोने में सुनाई दें.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Himachali Khabar इसकी पुष्टि नहीं करता है।

  • सांप बनकर पुलिसवाले को ही डसने लगˈ पड़ा शख्स फिर जो हुआ उसकी नहीं थी किसी को भी उम्मीदˌ

    सांप बनकर पुलिसवाले को ही डसने लगˈ पड़ा शख्स फिर जो हुआ उसकी नहीं थी किसी को भी उम्मीदˌ

    सांप बनकर पुलिसवाले को ही डसने लगˈ पड़ा शख्स फिर जो हुआ उसकी नहीं थी किसी को भी उम्मीदˌ

    सोशल मीडिया एक ऐसी जगह है जहां आए दिन कुछ न कुछ वायरल होता रहता है। कभी-कभी तो यहां ऐसी अनोखी और अजीब चीजें वायरल हो जाती है जिसे देखकर हमारा भी दिमाग हिल जाता है। अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस अनोखे वीडियो को ही देख लीजिए। इसमें एक शख्स ने नाग बनकर पुलिसवाले को ऐसा डराया कि आप भी हैरान रह जाएंगे। यह वीडियो बड़ा ही अजीब और अनोखा है। इसे देखकर आपका भी दिमाग घूम जाएगा।

    बंदे ने नाग बनकर पुलिस को डराया

    दरअसल सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पुलिसवाले का वीडियो बड़ा वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस कंट्रोल रूम की गाड़ी राउंड पर निकलती है। रात का समय भी है। एक पुलिस वाला बाइक पर बैठा है। तभी अचानक से एक आदमी जमीन पर रेंगता हुआ आता है। वह रेंगते हुए बाइक पर बैठे पुलिसवाले के पास जाता है और उसकी टांग से चिपक जाता है। जब पुलिस वाले को कुछ महसूस होता है कि उसके पैर में कुछ है तो वह ऐसे डरकर भाग जाता है मानो कोई नाग उसके पैर में लिपट गया हो।

    पुलिस वाला भागकर अपने वहान के पास जाता है और उसमें से कुछ निकालने लगता है। इधर ये शख्स जमीन पर अभी भी नाग बनकर रेंगता रहता है। उधर आसपास खड़े लोग भी इस शख्स को देखकर हैरान रह जाते हैं। यह पूरा वीडियो ही बड़ा अजीब होता है। यहां क्या हो रहा है एक पल के लिए कुछ समझ भी नहीं आता है। जमीन पर रेंग रहे इस शख्स की क्या समस्या है? वह पुलिस वाले के साथ कोई मजाक कर रहा है या फिर उसे कोई दिक्कत है या फिर वह मानसिक रूप से बीमार है? इन सभी सवालों के जवाब सामने आना बाकी है।

    पुलिसवाले का रिएक्शन देख लोटपोट हुए लोग

    फिलहाल तो ये भी जानकारी नहीं है कि ये वीडियो कब का और कहां का है। बरहाल आप बस वीडियो ही देख लीजिए। क्योंकि इसे देखने मात्र से अपका पूरा शरीर हिल जाएगा। इस वीडियो को funny_sandip नाम के इंस्टाग्राम हैंडल ने शेयर किया है। वीडियो पर लोगों के कई तरह के कमेंट्स आ रहे हैं। एक यूजर ने कहा “ये आखिर चल क्या रहा है?” दूसरे ने कहा “भाई की हिम्मत को सलाम। आखिर पुलिसवाले के साथ ऐसा मजाक कौन करता है।” फिर एक कमेंट आता है “लगता है भाई सस्ते नशे कर के आया है।”

    एक शख्स कहने लगा “वाह क्या बात है। भाई ने तो पुलिसवाले को ही डरा दिया। वह भी बिना किसी हथियार के उसे भागने पर मजबूर कर दिया।” एक और शख्स कहने लगा “मुझे तो लगता है यह जमीन पर रेंग रहा शख्स मुसीबत में है और पुलिस वाले से कोई मदद चाहता है।” बस इसी तरह लोग और भी कई मजेदार कमेंट्स करने लगे। तो चलिए आप भी बिना किसी देरी के ये मजेदार वीडियो देख लीजिए।

    यहां देखें वीडियो


    वैसे इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? क्या आप किसी पुलिसवाले के साथ ऐसा मजाक करने की हिम्मत कर सकते हैं? वीडियो पसंद आए तो शेयर भी करें।

  • ये भविष्यवाणी टलेगी नहीं चाहे कोई कुछˈ भी कर ले – अब सब बदलने वाला है, सारी दुनिया एक दिन कर लेगी हिन्दू धर्म स्वीकारˌ

    ये भविष्यवाणी टलेगी नहीं चाहे कोई कुछˈ भी कर ले – अब सब बदलने वाला है, सारी दुनिया एक दिन कर लेगी हिन्दू धर्म स्वीकारˌ

    ये भविष्यवाणी टलेगी नहीं चाहे कोई कुछˈ भी कर ले – अब सब बदलने वाला है, सारी दुनिया एक दिन कर लेगी हिन्दू धर्म स्वीकारˌ

    फ्रांस के भविष्‍यवक्ता मिशेल द नोस्त्रदाम, भारत के भविष्य वक्ता संद अच्युतानंद दास और बुल्गारिया की भविष्‍यवक्ता बाबा वेंगा की भष्यिवाणी तो सभी ने पढ़ी और सुनी होगी, लेकिन बहुत कम लोगों ने एक भविष्यवाणी पर ध्यान दिया होगा।

    इसके अलावा भी देश और विदेश के लोगों ने भी यह कहा है। आखिर वह भविष्वाणी क्या है?

    कॉमन भविष्यवाणी:

    नास्त्रेदमस और अच्युतानंद दोनों ही कहते हैं कि अंतरिक्ष से गिरेगा विशालकाय उल्कापिंड जो कई देशों को समुद्र में डूबो देगा। दोनों की भविष्यवाणी में भारत में किसी महान नेता के जन्म की बात कही है जो कि दुनिया को बदल कर रख देगा। तीनों भविष्यवक्ता कहते हैं कि तीसरा विश्व युद्ध होगा। बाबा वेन्गा के अनुसार महान युद्ध होगा जिसमें ड्रेगन दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बन जाएगा, लेकिन हम इस भविष्यवाणी की चर्चा नहीं कर रहे हैं। यह एक अगल की भविष्यवाणी है।

    इस भविष्यवाणी को कोई टाल नहीं सकता

    नास्त्रेदम: ‘सागरों के नाम वाला धर्म चांद पर निर्भर रहने वालों के मुकाबले तेजी से पनपेगा और उसे भयभीत कर देंगे, ‘ए’ तथा ‘ए’ से घायल दो लोग।’ (x-96)… ‘सांप्रदायिकता और श‍त्रुता के एक लंबे दौर के बाद सभी धर्म तथा जातियां एक ही विचारधारा को मानने लगेंगी।’ (6-10)। ‘तीन ओर घिरे समुद्र क्षेत्र में वह जन्म लेगा, जो बृहस्पतिवार को अपना अवकाश दिवस घोषित करेगा। उसकी प्रसंशा और प्रसिद्धि, सत्ता और शक्ति बढ़ती जाएगी और भूमि व समुद्र में उस जैसा शक्तिशाली कोई न होगा।’ (सेंचुरी 1-50वां सूत्र). ‘लाल के खिलाफ एकजुट होंगे लोग, लेकिन साजिश और धोखे को नाकाम कर दिया जाएगा।’ ‘पूरब का वह नेता अपने देश को छोड़कर आएगा, पार करता हुआ इटली के पहाड़ों को और फ्रांस को देखेगा। वह वायु, जल और बर्फ से ऊपर जाकर सभी पर अपने दंड का प्रहार करेगा।’बलूचिस्तान के बारे में 5 खास बातें, भविष्यवाणी- पाकिस्तान से होगा अलग?

    अच्युदानंद: सभी श्रीकृष्‍ण के भक्त होंगे। रूस एक हिन्दू देश बन जाएगा। रशिया से सैंकड़ों लोग जगन्नाथजी के दर्शन करने आएंगे और ढेर सारा सोना अर्पित करेंगे। भविष्यवाणी के अनुसार एक संत के हाथों में होगी देश की बागडोर जो अविवाहित होगा। वही संपूर्ण क्षत्रप होगा। वहीं दुनिया में सनातन धर्म की स्थापना करेगा। यह तब होगा जब गगन गादी पर होंगे और ओड़िसा के दिव्यसिंह राजा गादी पर होंगे।

    एनी वेसेंट: एनी वेसेंट ने हिन्दू धर्म को विश्व का सर्वोच्च धर्म बतलाया। उन्होंने उसे सभी मत-पंथों की जननी कहा। उसने हिन्दू धर्म में पूर्णत: विज्ञान तथा धर्म में सामंजस्य पाया। उसका कथन है कि बिना हिन्दुत्व के भारत का कोई भविष्य नहीं है।…इसका यह मतलब है कि यदि कुछ लोग यह सोचते हैं कि धर्मन्तरण करके या अपना पितृधर्म छोड़कर उसे खतरे में डाल देंगे तो यह भी तय है कि उनका अस्तित्व भी खतरे में ही होगा। विदे‍शी आक्रमणकारियों और धर्माचायों के कारण अपना धर्म बदलने वाले जितनी जल्दी इस बात को समझ लें तो अच्‍छा है।

    रोमां रोला : फ्रांस के नोबल पुरस्कार विजेता दार्शनिक रोमां रोला ने विश्व में हिन्दू धर्म को सर्वश्रेष्ठ माना है। उन्होंने लिखा, ‘मैंने यूरोप और मध्य एशिया के सभी मतों का अध्ययन किया है, परंतु मुझे उन सब में हिन्दू धर्म ही सर्वश्रेष्ठ दिखाई देता है…मेरा विश्वास है कि इसके सामने एक दिन समस्त जगत को झुकना पड़ेगा। पृथ्वी पर केवल एक स्थान है जहां के जीवित व्यक्तियों ने प्राचीन काल में अपने स्वप्नों को साकार किया, वह है भारत।- (प्रोफेट्स ऑफ द न्यू इंडिया, प्रील्यूड, पृ. 51)

    क्या Nuclear की मौत मरेगा पाकिस्तान, जानिए भविष्यवाणी का सच

    भविष्यवक्ता ऑर्थर चाल्‍​र्स क्लार्क: ‘जिस प्रकार इस समय संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय अमेरिका में है। उसी प्रकार संयुक्त ग्रह राज्य संघ का मुख्यालय मंगल ग्रह या गुरु पर हो सकता है। सन् 1981 तक भारत अपने आप में शक्तिशाली हो जाएगा तथा वहां से एक ऐसी जबरदस्त विचार क्रांति उठेगी, जो पूरे विश्व को प्रभावित करेगी। भारत का धर्म और अध्यात्म पूरा विश्व स्वीकार करेगा।’ 20वीं सदी के अन्त से पहले एक देश विज्ञान की उन्नति में सब देशों को पछाड़ देगा परन्तु भारत की प्रतिष्ठा विषेशकर इसके धर्म और दर्शन से होगी, जिसे पूरा विश्व अपना लेगा। यह धार्मिक क्रान्ति 21वीं सदी के प्रथम दशक में सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित करेगी और मानव को आध्यात्मिकता पर विवश कर देगी।

    पीटर हरकौस: इस शताब्दी के महानतम भविष्यवक्ता पीटर हरकौस ने अपनी भविष्यवाणी में लिखा है कि ‘भारत में आध्यात्मिकता तथा धार्मिकता की जो लहर उठेगी, वह सारे विश्व में छा जाएगी।’

    क्रूजर: फ्रांस के प्रसिद्ध विद्वान क्रूजर ने भारत के बारे में कहा था, ‘यदि पृथ्वी पर कोई ऐसा देश है, जो स्वयं को मानव जाति का पालना होने की घोषणा करने का अधिकारी है अथवा प्रारंभिक सभ्यता का द्रष्टा है, जिसकी सभ्यता की किरणों ने प्राचीन विश्व के सभी भागों को आलोकित किया है, जिसने ज्ञान के वरदान से मनुष्य को द्विज बनाया है, प्राकृत से संस्कृत किया है, तो वह देश वास्तव में भारतवर्ष है।’

    जूल्स वर्ने : विज्ञान कथाकार जूल्स के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ेगी। बांग्लादेश बनेगा। अंत में पाकिस्तान एक छोटे से टापू जैसा रह जाएगा। इसका कुछ भाग अफगानिस्तान ले लेगा और कुछ में स्वतंत्र बलूचिस्तान बन जाएगा। भारत, चीन की ली गई भूमि वापस ले सकेगा। इसी समय तक तिब्बत भी स्वतंत्र हो जाएगा। बाद में चीन एटम बम बनाएगा। संपन्न देशों को हर्षल, प्लूटो आदि ग्रहों की भी विस्तृत जानकारी मिल जाएगी और मनुष्य शुक्र तथा मंगल ग्रह तक पहुंच जाएगा। भारत अत्यधिक शक्तिशाली बनकर उभरेगा। विश्व में उसका सम्मान बढ़ता चला जाएगा।

    दुनिया में कितने मुस्लिम इस्लाम धर्म छोड़ रहे हैं?

    लियो टॉल्स्टॉय (1828-1910): हिन्दू और हिन्दुत्व ही एक दिन पूरी दुनिया पर राज करेगा क्योंकि इसी में ज्ञान और बुद्धि का संयोजन है।’

    अल्बर्ट आइंस्टीन (1879-1955): मैं समझता हूं कि हिंदुओं ने अपनी बुद्धि और जागरूकता के माध्यम से वह किया है जो यहूदी न कर सकें, हिन्दुत्व में ही वह शक्ति है जिससे शांति स्थापित हो सकती है।’

    जोहान गीथ (1749-1832): ‘हम सभी को अभी या बाद में हिन्दू धर्म स्वीकार करना ही होगा। यही असली धर्म है, मुझे कोई हिन्दू कहे तो मुझे बुरा नहीं लगेगा। मैं इस सही बात को स्वीकार करती हूं।

    हर्बर्ट वेल्स (1846-1946): हिन्दुत्व का प्रभावीकरण फिर होने तक अनगिणत पीढ़ियां अत्याचार सहेंगी। तभी एक दिन पूरी दुनिया इसकी ओर आकर्षित हो जाएगी और उसी दिन ही दिल शाद होंगे और उसी दिन दुनिया आबाद होगी सलाम हो उस दिन को।

    हसटन स्मिथ (1919-2016): ‘जो विश्वास हम पर है और हम से बेहतर कुछ भी दुनिया में है तो वो हिन्दुत्व है। अगर हम अपना दिल और दिमाग इसके लिए खोलें तो उसमें हमारी ही भलाई होगी।’

    माइकल नोस्टरीडाम (1503-1566): ‘हिन्दुत्व ही यूरोप में शासक धर्म बन जाएगा बल्कि यूरोप का प्रसिद्ध शहर हिन्दू राजधानी बन जाएगा।’

    बर्ट्रेंड रसेल (1872-1970): ‘मैंने हिन्दुत्व को पढ़ा और जान लिया कि यह सारी दुनिया और सारी मानवता का धर्म बनने के लिए है, हिन्दुत्व पूरे यूरोप में फैल जाएगा और यूरोप में हिन्दुत्व के बड़े विचारक सामने आएंगे। एक दिन ऐसा आएगा कि हिन्दू ही दुनिया की वास्तविक उत्तेजना होगा।

    ‘ईरान क्यों छोड़ रहा है इस्लाम?

    गोस्टा लोबोन (1841-1931): ‘हिन्दू ही सुलह और सुधार की बात करता है। सुधार ही के विश्वास की सराहना में ईसाइयों को आमंत्रित करता हूँ।’

    बर्नाड शॉ (1856-1950): ‘सारी दुनिया एक दिन हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेगी, अगर यह वास्तविक नाम स्वीकार नहीं भी कर सकी तो रूपक नाम से ही स्वीकार कर लेगी। पश्चिम एक दिन हिन्दुत्व स्वीकार कर लेगा और हिन्दू ही दुनिया में पढ़े लिखे लोगों का धर्म होगा।

  • अब हाईवे और गांवों में नहीं खुलेंगेˈ शराब के ठेके, ठेके खोलने का टाइम भी बदलाˌ

    अब हाईवे और गांवों में नहीं खुलेंगेˈ शराब के ठेके, ठेके खोलने का टाइम भी बदलाˌ

    अब हाईवे और गांवों में नहीं खुलेंगेˈ शराब के ठेके, ठेके खोलने का टाइम भी बदलाˌ

    अब हाईवे और गांवों में नहीं खुलेंगे शराब के ठेके—हरियाणा सरकार की नई आबकारी नीति 2025-27 में इस विषय को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। नीति के अनुसार नेशनल और स्टेट हाईवे पर किसी भी प्रकार की शराब की दुकान खोलने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा 500 से कम आबादी वाले गांवों में भी शराब के ठेके बंद कर दिए जाएंगे। यह निर्णय सामाजिक नियंत्रण और शराब की खुलेआम उपलब्धता को सीमित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

    आबकारी नीति में शराब की दुकानों को लेकर बड़ा बदलाव

    नई Excise Policy के तहत राज्य में शराब बिक्री व्यवस्था को पुनः व्यवस्थित किया गया है। जहां पहले हाईवे के किनारे बड़ी संख्या में शराब की दुकानें देखने को मिलती थीं, अब वे पूरी तरह से हटाई जाएंगी। साथ ही कम जनसंख्या वाले गांवों में, जहां सार्वजनिक असुविधा और सामाजिक विकृति का खतरा अधिक होता है, वहां शराब की दुकानें नहीं खोली जाएंगी। यह निर्णय ग्रामीण समाज की संरचना को संरक्षित रखने के प्रयास का हिस्सा है।

    ठेकों के समय और संचालन में बदलाव

    हरियाणा सरकार ने शराब की दुकानों के खुलने और बंद होने के समय में भी बदलाव किया है। अब ठेके सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक ही खुले रह सकेंगे। पहले यह समय 6 बजे तक था। इस संशोधन का उद्देश्य न केवल शराब की अनावश्यक खपत को नियंत्रित करना है, बल्कि पुलिस प्रशासन की निगरानी को भी सुविधाजनक बनाना है।

    शराब की कीमतों में संभावित वृद्धि

    नई नीति के प्रभाव में आने के बाद शराब की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभावित है। सरकार का उद्देश्य इस कदम से राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अनावश्यक खपत को हतोत्साहित करना है। विभिन्न श्रेणियों की शराब पर लगने वाले करों और शुल्कों में पुनः संशोधन किए गए हैं, जिससे ब्रांडेड शराब और देशी दोनों के रेट प्रभावित हो सकते हैं।

    ठेकों के विज्ञापन और सार्वजनिक डिस्प्ले पर प्रतिबंध

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि शराब के ठेकों पर बड़े-बड़े विज्ञापन और होर्डिंग्स नहीं लगाए जा सकेंगे। अब सभी दुकानों पर यह लिखना अनिवार्य होगा कि “शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है” और “ड्रिंक एंड ड्राइव न करें”। जो दुकानें इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं करेंगी, उन पर पहले ₹1 लाख, फिर ₹2 लाख और तीसरी बार ₹3 लाख तक का जुर्माना लगेगा, जिसके बाद लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

    शराब की दुकानों की जोनिंग व्यवस्था

    नई नीति के अनुसार राज्य को 1,200 जोन में बांटा जाएगा और प्रत्येक जोन में दो-दो दुकानों का आवंटन किया जाएगा। इस प्रकार, दुकानों की संख्या यथावत रहेगी लेकिन उनका वितरण अधिक संतुलित और व्यवस्थित होगा। यह परिवर्तन शराब व्यापार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने और कालाबाजारी को रोकने के लिए किया गया है।

    आहतों और बार पर सख्त नियम

    नई नीति में आहतों यानी ओपन बार और रेस्टोरेंट्स में शराब परोसने की व्यवस्था को भी नियंत्रित किया गया है। अब केवल बंद परिसरों में ही शराब परोसी जा सकेगी। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरी क्षेत्रों में लाइसेंस शुल्क 4 प्रतिशत होगा, जबकि अन्य जिलों में यह 1 प्रतिशत तय किया गया है। इसके अतिरिक्त, लाइव डांस, सिंगिंग और किसी भी प्रकार के मंचीय कार्यक्रमों पर पूर्णतः रोक लगाई गई है।

  • छात्रा को एग्जाम में मिले इतने शानदारˈ नंबर कि देखते ही टीचर ने कर दिया मौत का ऐलान जाने पूरा माजराˌ

    छात्रा को एग्जाम में मिले इतने शानदारˈ नंबर कि देखते ही टीचर ने कर दिया मौत का ऐलान जाने पूरा माजराˌ

    छात्रा को एग्जाम में मिले इतने शानदारˈ नंबर कि देखते ही टीचर ने कर दिया मौत का ऐलान जाने पूरा माजराˌ

    सोशल मीडिया पर कई ऐसी मजेदार ऑनसर शीट वायरल हुई जिसमें बच्चों ने पास होने के लिए टीचर के लिए मजेदार बातें लिखी। किसी ने अपनी गरीबी का हवाला दिया तो कोई पैसे ऑफर करने लगा। इसे देख लोगों ने छात्रों का खूब मजाक उड़ाया। लेकिन अब टीचर की बारी है।

    छात्रा के लिए ये क्या बोल गई टीचर?

    दरअसल सोशल मीडिया पर इन दिनों एक स्कूल का रिपोर्ट कार्ड वायरल हो रहा है। इस रिपोर्ट कार्ड में एक बच्ची ने परीक्षा में काफी अच्छे अंक लाए। लेकिन बदले में टीचर ने जो किया वह देख मां बाप की रूह कांप उठी। बच्ची के अच्छे अंकों को देखते हुए स्कूल टीचर ने उसे मृत घोषित कर दिया। हालांकि उसने ये अनजाने में किया। उसकी एक लापरवाही उसे भारी पड़ गई।

    इस वायरल रिपोर्ट कार्ड में देखा जा सकता है कि एक छात्रा ने अपनी क्लास में 7वीं रैंक हासिल की है। उसके मैथ में 60, इंग्लिश में 52, एग्रीकल्चर में 65, सोशल में 60, लाइफ स्किल में 65, आर्ट्स में 80 अंक आए हैं। उसने टोटल 800 में से 532 अंक हासिल किए हैं। इसे देखते हुए टीचर बच्ची को प्रोत्साहित करना चाहती थी। इसलिए उसने एक नोट लिखा। लेकिन यहां वह गलती कर गई।

    जीते जी कर दिया मृत घोषित

    दरअसल टीचर ने रिमार्क वाले सेक्शन में लिख दिया “She Has Passed Away” (वह गुजर गई)। अक्सर यह वाक्य लोगों के निधन के बाद इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि टीचर यह कहना चाहती थी कि बच्ची पास हो गई है। लेकिन लगता है उसकी अंग्रेजी कुछ खास नहीं है। इस कारण यह गलती हो गई। अब यह मजेदार रिपोर्ट कार्ड सोशल मीडिया पर बड़ा वायरल हो रहा है।