अभी सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसे देखने के बाद आप खुद कहेंगे कि यहां तो गजब गोलमाल चल रहा है। आइए फिर आपको वीडियो के बारे में बताते हैं।
Image Source : IG/LITTLESUNSHINETALESवायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट
आज के समय में ऐसे बहुत कम लोग मिलेंगे जो सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं हो वरना बच्चे तक आपको सोशल मीडिया पर मिल जाएंगे और वो भी दिन में कुछ देर स्क्रोलिंग में बिताते ही हैं। आप भी सोशल मीडिया पर जरूर एक्टिव रहते होंगे और अगर ऐसा है तो फिर आपकी फीड पर हर दिन एक से बढ़कर एक और कमाल के वीडियो आते ही होंगे। कई सारे वीडियो ऐसे भी आते होंगे जो सबसे हटके होते हैं और उसी कारण वायरल भी होते हैं। अभी भी एक वीडियो वायरल हो रहा है। आइए आपको बताते हैं कि वीडियो में ऐसा क्या है।
वायरल वीडियो में क्या नजर आया?
अभी जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें नजर आता है कि एक महिला पानी के दो बोतल को दिखाती है। इसके बाद वीडियो में शुरू से कहानी शुरू होती है। वीडियो में दिखता है कि पहले बोतल को धोकर अच्छे से सुखाया गया। इसके बाद उन बोतलों में पानी की जगह स्नैक्ट्स वाले आइटम भरे गए और यह सब इसलिए किया गया ताकि वो हॉल के अंदर उस बोतल को ले जा सकें और फिल्म देखते हुए आराम से उन्हें खा सकें क्योंकि बाहर से सीधे तौर पर कुछ ले जाने नहीं देंगे और वहां तो सब कुछ महंगा ही बिकता है। ये लोग अपने प्लान में सफल भी हो जाते हैं।
यहां देखें वायरल वीडियो
आपने अभी जो वीडियो देखा उसे इंस्टाग्राम पर littlesunshinetales नाम के अकाउंट से पोस्ट किया गया है। खबर लिखे जाने तक वीडियो को 12 हजार से अधिक लोगों ने लाइक किया है। वीडियो देखने के बाद एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा- वाटर बोतल चेक नहीं किया क्या? दूसरे यूजर ने लिखा- अच्छा आइडिया है। तीसरे यूजर ने लिखा- मगर हमारे यहां तो बोतल खोलकर चेक करते हैं। वहीं बहुत सारे यूजर्स ने हंसने वाला रिएक्शन दिया है।
फिल्मों में आपने कई बार देखा और सुना होगा कि नायिका के पीछे-पीछे कैसे नायक सात समंदर पार पहुँच जाता है। यह कहानी किसी फ़िल्म का हिस्सा तो नहीं, लेकिन किसी फ़िल्मी स्टोरी से कम भी नहीं। जी हां यह कहानी है एक ऐसे लड़के की। जो अपने दृढ़संकल्प और कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति लिए जयपुर से जिनेवा तक का सफर तय किया है। बता दें कि यह कहानी है जयपुर के रंजीत सिंह राज की।
एक रिपोर्ट के मुताबिक़, राज ने बचपन से ही समाजिक पूर्वाग्रहों का सामना किया है। वह गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे और रंग भी सांवला है। उन्हें हमेशा ताने सुनने को मिलते थे। इससे उन्हें गुस्सा आता था। लेकिन, आज वह जिस मुकाम पर हैं तो वहां से इन चीजों को याद करते हैं तो हर पहलुओं पर गौर करते हैं।
जी हां कभी जयपुर की गलियों में भटकने वाले राज आज स्विटजरलैंड के जिनेवा में हैं। वह वहां एक रेस्ट्रां में काम करते हैं और उनका सपना है कि वह अपना भी रेस्ट्रां खोलें। वह अपना एक यूट्यूब चैनल चलाते हैं, जहां वह लोगों को अलग-अलग जगह दिखाते हैं।
बता दें कि राज ने जयपुर में 16 साल की उम्र से ऑटोरिक्शा चलाना शुरू किया और कई साल तक वह चलाते रहे। साल 2008 का समय था जब कई ऑटो ड्राइवर इंग्लिश, फ्रेंच, स्पैनिश भाषा में बात करते थे और टूरिस्ट को अट्रैक्ट करते थे। फिर क्या था राज भी इंग्लिश सीखने की कोशिश करने लगे। राज ने इस दौरान एक टूरिस्ट बिजनेस की शुरुआत की, जिसके जरिए वह फॉरेनर्स को राजस्थान घुमाते थे। यहीं उनकी मुलाकात एक विदेशी महिला से हुई, जिससे आगे चलकर उन्होंने शादी कर ली और 10वीं फेल इस शख्स की पूरी जिंदगी ही बदल गई।
राज ने एक गाइड के रूप में उन्हें जयपुर घुमाया था और दोनों में प्यार हो गया। उसके फ्रांस लौटने के बाद भी दोनों स्काइप पर जुड़े रहे। राज ने फ्रांस जाने की कई कोशिश की लेकिन, हर बार वीजा रिजेक्ट हो जाता था। उनकी प्रेमिका जब अगली बार फ्रांस से आई तो दोनों फ्रेंच एंबेसी के बाहर धरने पर बैठ गए। एंबेसी के अधिकारियों ने मुलाकात की और उन्हें 3 महीने का फ्रांस का टूरिस्ट वीजा मिल गया।
जिसके बाद साल 2014 में दोनों ने शादी कर ली और उन्हें एक बच्चा भी है। राज ने लॉन्ग टर्म वीजा अप्लाई किया तो उन्हें फ्रेंच सीखने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्होंने एक क्लास किया और फ्रेंच सीख गए। वह अभी जिनेवा में रहते हैं और एक यूट्यूब चैनल भी चलाते हैं। वह खूब घूमते हैं और उसके बारे में बातें करते हैं। उनका मानना है कि घूमने से वह बहुत कुछ सीखते हैं। वास्तव में यह कहानी हमें बहुत कुछ सिखाती है।
आख़िर हर व्यक्ति के जीवन में कहीं न कहीं से टर्निंग पॉइंट जरूर आता है। ऐसे में भले समस्याएं कितनी भी बड़ी क्यों न हो, व्यक्ति को कभी घबराना नहीं चाहिए। बस कोशिश करना चाहिए तो कुछ नया करने की कोशिश। जो राज ने किया। फिर समय तो अपने-आप करवट लेता है और यही हुआ जयपुर के राज के साथ।
उपभोक्ता फोरम ने ‘फेयर एंड हैंडसम’ क्रीम बनाने वाली कंपनी इमामी पर ₹15 लाख का जुर्माना ठोंका है। यह जुर्माना गलत प्रचार पर ठोंका गया है।
उपभोक्ता फोरम ने ‘फेयर एंड हैंडसम’ क्रीम बनाने वाली कंपनी इमामी पर ₹15 लाख का जुर्माना ठोंका है।
यह जुर्माना गलत प्रचार पर ठोंका गया है। इस कंपनी के खिलाफ एक ग्राहक ने मामला दायर किया था। ग्राहक इस बात से नाराज था कि कंपनी के दावे के अनुसार वह क्रीम लगाने से तीन सप्ताह के भीतर गोरा क्यों नहीं हुआ।
फोरम ने आदेश दिया है कि इमामी कंपनी शिकायत करने वाले ग्राहक को ₹50 हजार का हर्जाना दे और साथ ही में ₹14.5 लाख की धनराशि दिल्ली के उपभोक्ता कल्याण विभाग में जमा करवाए। फोरम ने इमामी को यह भी आदेश दिया है कि वह शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति को ₹10 हजार अलग से दे। यह धनराशि मुकदमे में हुए खर्चे के लिए दी गई है। फोरम ने पाया कि इमामी क्रीम को लेकर जो दावा कर रही थी, वह भ्रामक था और विज्ञापन में किए गए दावे भी सही नहीं थे।
क्या था मामला?
दिल्ली रहने वाले निखिल जैन ने ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने वाली कम्पनी इमामी के खिलाफ यह मामला फरवरी, 2013 में दायर किया था। निखिल जैन ने आरोप लगाया कि उन्होंने अक्टूबर में ₹79 की फेयर एंड हैंडसैम मेंस क्रीम खरीदी थी। इसको लेकर इमामी का दावा था कि यदि यह दिन में दो बार लगातार तीन सप्ताह तक लगाई जाए तो इससे वह गोरे हो जाएँगे।
निखिल जैन ने बताया कि इमामी ने इस क्रीम पर लिखा, “तेजी से चमकते गोरेपन के लिए चेहरे और गर्दन पर दिन में दो बार साफ करने के बाद लगाएँ। अच्छे परिणामों के लिए नियमित उपयोग की सलाह दी जाती है।” निखिल जैन ने आरोप लगाया कि जैसा कम्पनी ने क्रीम के पैक पर जैसा बताया गया था, वैसा ही उन्होंने किया।
निखिल जैन ने आरोप लगाया कि इसके बाद भी उनको ऐसा कोई फायदा नहीं हुआ, जैसा कंपनी का दावा था। निखिल जैन ने बताया कि दावे के अनुसार, उन्हें 3 सप्ताह में कोई भी संतोषजनक परिणाम हासिल नहीं हुआ। निखिल जैन ने आरोप लगाया कि यह झूठे दावे उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन हैं।
उन्होंने कहा कि ना सिर्फ क्रीम पर बल्कि ऐसे ही दावे क्रीम को लेकर वेबसाईट और टीवी पर भी किए। निखिल जैन ने आरोप लगाया कि इस मामले में परिणाम ना पाने के बाद उन्होंने इमामी कम्पनी को तमाम इमेल लिखे लेकिन कोई भी जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद बाद उन्होंने कम्पनी पर केस कर दिया।
निखिल जैन ने इमामी पर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाते हुए ₹20 लाख के हर्जाने की माँग की थी। निखिल जैन का यह मामला 2013 से ही से ही चल रहा था। निखिल जैन ने इस मामले में अपनी तरफ से फेयर एंड हैंडसम क्रीम के प्रचार की सीडी समेत बाकी सबूत भी रखे।
इमामी ने क्या कहा?
इमामी ने फोरम में दावा किया कि निखिल जैन का क्रीम खरीदने का दावा झूठा है। इमामी के वकील ने कहा कि निखिल जैन यह नहीं सिद्ध कर सके कि उन्होंने खुद ही यह क्रीम खरीदी क्योंकि बिल पर कोई सीरियल नंबर नहीं है। इमामी ने कहा कि दुनिया में किसी भी क्रीम का परिणाम कई कारकों पर निर्भर करता है।
इमामी ने कहा कि सही परिणाम पाने के लिए क्रीम का उचित उपयोग और पौष्टिक आहार, व्यायाम, स्वस्थ आदतें, स्वच्छ रहने की स्थिति आदि कारक भी जरूरी हैं। इमामी ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि निखिल जैन ने अपनी त्वचा की स्थिति के लिए नियमित रूप से क्रीम का इस्तेमाल किया या इससे कोई सुधार नहीं हुआ।
इमामी ने कहा कि निखिल जैन का दावा त्वचा विशेषज्ञ से उचित मेडिकल सलाह के बिना किया गया है। इमामी ने कहा कि निखिल जैन ने अपनी जीवनशैली के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। ऐसे में यह शिकायत ठीक नहीं है। इमामी ने यह भी दलील दी कि यह मुकदमा कंपनी की छवि बिगाड़ने के लिए दायर किया गया है।
क्या बोला उपभोक्ता फोरम?
उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में सुनवाई के बाद 9 दिसम्बर, 2024 को फैसला दिया। फोरम ने कहा कि इमामी फेयर एंड हैंडसम क्रीम की पैकेजिंग और लेबलिंग पर थोड़े से निर्देशों के साथ यह कह रही है कि इसके तीन सप्ताह तक नियमित उपयोग से किसी पुरुष की त्वचा में गोरापन आ जाएगा, यह जानते हुए भी कि इस पर दिए गए निर्देश अधूरे हैं।
फोरम ने कहा कि अगर क्रीम खरीदने वाला बाकी चीजों का पालन नहीं करता, तो वह गोरा नहीं हो पाएगा, इसके बाद भी कोई निर्देश नहीं दिया गया। फोरम ने कहा कि ऐसे में कोई भी सामान्य बुद्धि वाला व्यक्ति यही मानेगा कि यदि वह तीन सप्ताह तक क्रीम लगाए तो गोरा हो जाएगा। फोरम ने कहा कि यह भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यवहार है।
फोरम ने कहा कि इमामी ने ऐसा प्रचार अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए अपनाई थी। फोरम ने गलत प्रचार करने के चलते इमामी पर ₹15 लाख का जुर्माना ठोंका। इसमें से ₹14.5 लाख की धनराशि राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष दिल्ली और बाकी ₹50 हजार शिकायतकर्ता निखिल जैन को देने का आदेश दिया गया है। फोरम ने कहा है कि यह पैसा 45 दिन के भीतर देना होगा। निखिल जैन को इसके साथ ही ₹10 हजार भी मिलेंगे। यह धनराशि मुकदमे में खर्च की भरपाई के रूप में दी जाएगी।
आज के समय में लगभग हर किसी के घर में आपको वाशिंग मशीन देखने को मिल ही जाएगा। आपके घर में भी वाशिंग मशीन जरूर होगा तो फिर आपको हम वाशिंग मशीन से जुड़ी एक गजब की जानकारी देने वाले हैं।
Image Source : IG/JAISWALELECTRONICS_वाशिंग मशीन में क्यों होती हैं ये लाइनें?
हर दिन इंसान कई सारी चीजों को देखता है और उन्हें यूज करता है मगर उन्हीं चीजों से जुड़ी कुछ जानकारियां इंसान को नहीं होती है। अकसर लोग उसे डिजाइन समझकर ऐसे ही इग्नोर कर देते हैं और जब कोई तीसरा आदमी उसके बारे में बताता है तो फिर वो आदमी हैरान हो जाता है कि अरे यह तो मुझे पता ही नहीं था। आपके साथ भी ऐसा कभी न कभी या फिर कई बार हुआ होगा और आज एक बार फिर से होगा। दरअसल एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और उस वीडियो में शख्स वाशिंग मशीन को लेकर कुछ ऐसा बताया जो आपको पता नहीं होगा। आइए फिर आपको बताते हैं कि उसमें ऐसा क्या है।
वाशिंग मशीन में क्या होती हैं लाइनें?
अभी जो वीडियो वायरल हो रहा है उसमें शख्स ने वाशिंग मशीन को लेकर कुछ ऐसा बताया जो किसी को नहीं पता होगा। वायरल वीडियो में शख्स सेमी-ऑटोमैटिक वाशिंग मशीन दिखाता है। इसके बाद वो उन लाइनों को दिखाता है जो बीच में बनी हैं और लोगों से पूछता है कि क्या कोई यह जानता है कि वो क्यों होते हैं। इसके बाद वो खुद बताता भी है। वो बोलता है कि कई बार कपड़े ज्यादा गंदे हो जाते हैं जैसे कॉलर और हाथ के कब्जे तो वो वाशिंग मशीन में सीधे डालने पर वो साफ नहीं होते हैं। ऐसे में उन्हें इन लाइनों पर रगड़ सकते हैं जिससे मैल ढीली हो जाएगी और फिर कपड़े अच्छे से साफ हो जाएंगे।
जैसा कि हम लोग जानते हैं दुनिया में हर तरह के इंसान रहते हैं। कुछ अच्छे होते हैं, तो कुछ बुरे भी होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इंसान के अंदर भगवान और शैतान दोनों ही मौजूद होता है। चाहे इंसान ऊंचा उठकर भगवान बन जाए, चाहे नीचे गिरकर शैतान बन जाए। वैसे तो इस घोर कलयुग में इंसान के शैतान बनने की मिसाल तो भरी पड़ी हुई है। लेकिन आज हम आपको इस लेख के माध्यम से इंसान से भगवान की तरफ बढ़ने की मिसाल बताने जा रहे हैं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के एआरटीओ आरसी भारती का एक ऐसा मानवीय चेहरा सामने आया है जिसे देख कर उनमें लोग भगवान का रूप देख सकते हैं। जी हां, हल ही में एआरटीओ कार्यालय में कुछ ऐसा हुआ, जिसे, जिसने भी सुना वह द्रवित हो गया और एआरटीओ की प्रशंसा करते हुए नहीं थके।
पिता जी के ऑटो का हुआ था चलाना
मिली जानकारी के अनुसार, पुरंदरपुर थाना क्षेत्र के सिंहपुर ताल्ही गांव में विजय कुमार नाम का युवक रहता है। उसके पिताजी का नाम राजकुमार है, जो ऑटो चलाते हैं। कुछ दिनों पहले ही उनका ARTO ने 24,500 रुपए का चालान काट दिया था। लेकिन राजकुमार के पास इतने पैसे नहीं थे, कि वह चालान की राशि भर पाते। ऐसी स्थिति में उनका बेटा विजय कुमार अपने पिताजी के चालान के पैसे भरने के लिए एआरटीओ कार्यालय पहुंच गया।
मां का मंगलसूत्र बेचकर बेटा पहुंचा चालान भरने
आर्थिक रूप से कमजोर युवक के ऑटो चालक पिता का जब 24,500 रुपए का चालान कट गया था, तब उसने अपनी मां का मंगलसूत्र बेच दिया लेकिन इसके बावजूद भी विजय के पास रुपए कम पड़ रहे थे। एआरटीओ कार्यालय में सिंहपुर ताल्ही गांव के विजय पहुंचे तो उन्हें परेशान देख एआरटीओ ने पास बुलाकर परेशानी का कारण पूछने लगे।
ARTO ने खुद भरा जुर्माना
विजय कुमार ने पूछने पर यह बताया कि उसके पिता राजकुमार ऑटो चलाते हैं और उन्हें एक आंख से कम नजर आता है। विजय ने यह बताया कि 24,500 रुपए ऑटो का चालान जमा करना है। मां का मंगलसूत्र बेचने के बाद भी सिर्फ ₹13000 ही जमा हो पाए। उसने बताया कि परिवार में 6 बहने हैं। जब विजय की पूरी कहानी एआरटीओ ने सुनी तो उनका दिल पिघल गया और एआरटीओ आरसी भारती ने चालान की राशि खुद अपनी सैलरी से भर दी और पढ़ाई छोड़ चुके युवक को पढ़ाई की पेशकश भी की।
आपको बता दें कि विजय कुमार ने बताया कि वह मजदूरी करता है। फेल होने के बाद हाई स्कूल की पढ़ाई भी नहीं कर सका। जब एआरटीओ आरसी भारती ने उसकी पूरी कहानी सुनी तो उन्होंने खुद चालान की पूरी रकम स्वयं जमा करने के साथ ही टेंपो का इंश्योरेंस भी कराया। उन्होंने युवक की पढ़ाई का खर्च उठाने की भी पेशकश की। एआरटीओ की दरियादिली देखकर कार्यालय में मौजूद सभी कर्मी एवं अन्य लोगों ने उनकी सराहना की।
हालांकि, इस मामले में एआरटीओ आरसी भारती ने मीडिया से ज्यादा बातचीत नहीं की, सिर्फ उन्होंने इतना ही कहा है कि मैंने उसकी पीड़ा सुनी और वह मुझे वाजिब लगी। इस वजह से मैंने उसका जुर्माना खुद ही भर दिया है।
दोस्तों आज हम आपको एक ऐसी तिजोरी के बारे में बताने जा रहे हैं जो बेहद बेशकीमती है। यह तिजोरी नॉर्वे में स्थित है। इसका नाम स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट (Svalbard Global Seed Vault) है। यह एक बेहद खुफिया जगह पर है। इसकी जानकारी दुनिया में बेहद कम लोगों को है। कहा जाता है ये आर्कटिक में सबसे ऊंचे स्थान पर है। यह एक बर्फीले द्वीपसमूह पर परमाफ्रॉस्ट में गहरी दबी हुई है।
प्रलय के दिन के लिए तैयार की गई है ये तिजोरी
अब आप सोच रहे होंगे कि इस तिजोरी में बहुत सारा सोना, हीरा जैसी बेशकिशमती चीजें होंगी। लेकिन नहीं। इसमें इससे भी ज्यादा अहम और कीमती चीज है। इस तिजोरी में दुनिया भर का कृषि उपलब्धियों का भंडार जमा है। इसे आप एक तरह के दुर्घटनाग्रस्त अंतरिक्ष यान जैसा समझ सकते हैं। इसे फ्यूचर के लिए सिक्योरिटी के रूप में बनाया गया है। मतलब यदि कभी दुनिया का विनाश होता है या कोई प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा (युद्ध) आती है तो इस तिजोरी में सभी कृषि संबंधित चीजों के बीज सुरक्षित रहेंगे।
आसान शब्दों में कहे तो इस तिजोरी को “प्रलय का दिन” के लिए बनाया गया है। इसका इस्तेमाल साल 2008 से खाद्य फसलों के बीजों को संग्रहीत करने के लिए होता आ रहा है। यह जगह इतनी खुफिया है कि अधिकतर लोगों नए इसका अंदर का नजारा नहीं देखा है। बस इसकी बाहर के प्रवेश द्वार की कुछ तस्वीरें ही सामने आ पाई है। इस तिजोरी का मुख्य उद्देश्य यही है कि कोई भी बड़ी आपदा आने पर यदि सभी फसलें नष्ट होती है तो उन्हें इसमें रखे बीजों द्वारा पुनर्जीवित किया जा सके।
ये है तिजोरी की खासियत
इस तिजोरी को वर्जिन ठोस चट्टान से बनाया गया है। इसमें पहाड़ के अंदर 100 मीटर से अधिक की गहराई पर बीज भंडारण क्षेत्र बनाया गया है। यह तिजोरी 40 से 60 मीटर मोटी चट्टानों की परतों के बीच स्थित है। इसमें जो भी बीज जमा किये जाते हैं उन्हें बीज जमा करने वाली संस्था और नार्वेजियन कृषि और खाद्य मंत्रालय के बीच जमाकर्ता समझौते के मुताबिक जमा किया जाता है। इन्हें कथित “ब्लैक बॉक्स शर्तों” के अंतर्गत डिपाजिट किया जाता है। मतलब इस तिजोरी में रखे बॉक्स और कंटेनर को खोलने की अनुमति नहीं है।
यह सीड वॉल्ट 26 फरवरी 2008 को खोला गया था। इसमें तीन हॉल हैं। इन सभी का आधार लगभग 9.5 x 27 मीटर है। हर हॉल में करीब 1.5 मिलियन बीज के नमूने रखने की क्षमता है। इस तरह इस तिजोरी में 4.5 मिलियन बीज प्राप्तियों को संग्रहीत किया जा सकता है। इसमें अभी तक करीब 900,000 बीज के नमूने रखे हैं। अभी सिर्फ 3 में से एक ही हॉल का इस्तेमाल हुआ है। इस हाल का तापमान माइनस 18 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा रखा जाता है।
दरअसल यह तिजोरी जिस पहाड़ में स्थित है उसमें पहले से माइनस 3 और 4 डिग्री सेल्सियस तापमान होता है। लेकिन तिजोरी में एक एक्स्ट्रा कूलिंग सिस्टम भी लगाया गया है। यह सिस्टम यहां का तापमान शून्य से 18 डिग्री सेल्सियस निचे रखने में हेल्प करता है। इस तापमान में बीज लंबे अरसे तक सुरक्षित रहते हैं। वह खराब नहीं होते हैं। इस तिजौरी में एक जनरेटर भी है जो बिजली जाने की स्थिति में काम आता है।
भारत का है तिजोरी पर सबसे ज्यादा हिस्सा
सबसे खास बात ये है कि इस तिजोरी में बीजों का भंडार रखने वाले देशों की लिस्ट में इंडिया पहले नंबर पर आता है। भारत ने अपनी फ़ूड सिक्योरिटी को मजबूत बनाने के लिए इस तिजोरी में अभी तक रखे कुल बीजों का 15% हिस्सा अपने नाम कर रखा है। मेक्सिको इसमें दूसरे स्थान पर 6.1 प्रतिशत के साथ आता है। वहीं अमेरिका कप 3.8% बीजों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त है।
जिंदगी कब कैसी करवट लेती है ये कभी कोई नहीं जान पाता, फिर वो जितने हाथ-पैर मार ले होता वही है जो ऊपरवाले ने किस्मत में लिख दिया हो. जब किस्मत अच्छी होती है तो छोटे से छोटा इंसान बड़ी बुलंदियों को छू सकता है और अगर किस्मत अच्छी ना हो तो वे जितना अच्छा काम कर ले उनका भला नहीं हो पाता. कुछ ऐसा ही हुआ गांव में रहने वाली एक महिला के साथ, जिसके साथ कभी एक काफिला चलता था आज वो बिल्कुल अकेली और बेसहारा है.
कभी लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूमती थी ये महिला, मगर आज उस महिला को कोई भी पूछने वाला ही नहीं है. उसके बच्चे पढ़ाई नहीं बल्कि मजदूरी में अपनी मां का हाथ बंटाते हैं. मगर इतनी उपलब्धियां पाने के बाद उस महिला का ये हाल ऐसा कैसे हो गया, चलिए बताते हैं आपको इस पूरे आर्टिकल में.
कभी लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूमती थी ये महिला
किस्मत सच में बहुत ही अजीब खेल खेलती है इंसानों के साथ, वो किसी को भी नहीं छोड़ती. अगर बुरा करने में आ जाए तो बहुत कुछ कर जाती है और अगर सही करना चाहे तो रंक भी राजा बन सकता है. उदाहरण के तौर पर आप इस महिला को ही ले लीजिए. ये कहानी मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की बदरवास में रहने वाली जूली आदिवासी की है जो कभी जिला पंचायत अध्यक्ष हुआ करती थीं. तस्वीरों में दिखाई गईं जूली आज बकरी चराकर और मजदूरी करके अपना और अपने बच्चों का पेट भर रही हैं.
मगर एक समय था जब इनका रुतबा ऐसा था जब बड़े-बड़े अधिकारी इन्हें मैडम कहकर बुलाते थे, और सभी का इनके सामने सिर झुका ही रहता था. इनके बच्चे भी अच्छे स्कूल में पढ़ते और अच्छे से जीवन यापन कर रहे थे लेकिन बाद में समय ने ऐसी करवट ली कि सबकुछ बदल गया. इनका रुतबा ऐसा हो गया कि इनका प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उठाने के लिए जूली जब दफ्तर पहुंची तो वहां से इन्हें भगा दिया गया.
जब मीडिया ने उन अफसरों से ऐसे बर्ताव की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि जूली के पास सरकारी मकान है इसलिए उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता. जबकि जूली के अनुसार एक समय था जब उनके पास सरकारी आवास हुआ करता था उनकी एक कार के साथ कारों का पूरा काफिला निकलता था लेकिन अब उनके पास कोई सरकारी आवास नहीं है. सब उनसे छीन लिया गया आज वे एक छोटे से घर में अपने बच्चों और एक बकरी के साथ जी रही हैं और बकरी का दूध बेचने के साथ-साथ मजदूरी भी कर रही हैं.
जूली के साथ ऐसा कैसे हो गया इस बारे में जूली ने कुछ नहीं बताया लेकिन ये बात तो तय है कि उनके साथ कुछ गलत हुआ ही होगा. ऐसे में क्या सरकार को उनका साथ नहीं देना चाहिए ? उनकी इस तकलीफ को समझते हुए कम से कम उन्हें रहने के लिए एक पक्का मकान और दो वक्त की रोटी के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष के तौर पर ही पेंशन भी मिलनी चाहिए. अगर ऐसा हो जाए तो जूली आदिवासी का जीवन आसान हो जाए और उसके बच्चे भी स्कूल जाने के लिए सक्षम हो जाएं.
कई बार सोशल मीडिया पर हमें ऐसी खबरें पढ़ने को मिल जाती हैं, जिन्हें पढ़ने के बाद हम अपनी हंसी को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं. अभी हाल ही में यूपी के बांदा से एक अजीबो-गरीब खबर सामने आई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, यहां सांप ने एक किसान को काट लिया था, बदले में किसान ने भी सांप को काट लिया. इतना ही नहीं, सांप को काट कर दांत से ही कच्चा चबाने लगा. जब ये ख़बर घरवालों को पता चली तो आनन-फानन में किसान को अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों के अनुसार, किसान ख़तरे से बाहर है.
जानकारी के मुताबिक, 55 साल के मातबदल यादव किसान है. वो अपने गांव स्योहट गांव में खेती करते हैं. वह अपने घर में चारपाई पर आराम से लेटे हुए थे, तभी एक सांप ने उनके हाथ में काट लिया. जिससे मातबल यादव को बहुत तेज़ गुस्सा आया. सांप से नाराज़ होकर उन्होंने सांप को हाथ से पकड़ा और काटकर खा गए. जब ये मामला घरवालों को पता चला तो उन्होंने अस्पताल में भर्ती करवाई.
सोशल मीडिया पर कई लोग इस ख़बर को शेयर भी कर रहे हैं. देखा जाए तो सांप बहुत ही ख़तरनाक होता है. कोई भी इंसान सांप के बिल्कुल नज़दीक नहीं जाना चाहता है, ऐसे में मातलब यादव ने गज़ब का कारनामा कर दिखाया है.
लड़की जब लाइफ टाइम के लिए पार्टनर चुनती है तो वो खुद से बड़ी उम्र का पार्टनर (life partner tips) चुनती है। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों?लड़कियां बड़ी उम्र के मर्दों की समझदारी और व्यक्तित्व से कई बार इतनी आकर्षित हो जाती है कि उन्हीं के साथ जिंदगी बिताने का सपना देखने लगती हैं। आईये आपको कुछ और कारण भी बताते हैं जिनकी वजह से लड़कियां बड़ी उम्र के मर्दों को डेट (Relationship) करना पसंद करती हैं ।
ज्यादा अनुभव
पहला कारण तो ये है कि बड़ी उम्र के व्यक्ति को जीवन के लगभग सभी अनुभव होते हैं क्योंकि उम्र के साथ वो उन सभी हालातों से गुजर चुके होते हैं जो जीवन में बाधाएं डालने का काम करती हैं। इस कारण वो बाकी लोगों से ज्यादा समझदार और परिस्थितियों से संभालने में भी भी हो जाते है, इसी वजह से लड़कियां उनके साथ रहना पसंद करती हैं और रिलेशन (Relation) में आती हैं।
Relationship में मैच्योरिटी
बढ़ती उम्र के साथ लोग मैच्योर भी हो जाते है और समझदारी की बातें भी करने लगते हैं। इतना ही नहीं ये लोग रिश्तों को काफी काफी गंभीरता से लेते हैं इसलिए उनके साथ रिलेशनशिप (Relationship Tips) को लंबे समय तक निभाना आसान हो जाता है। ये न केवल मैच्योर बाते करते हैं बल्कि सोच को भी उसी तरह बना लेते हैं। अपने भविष्य और साथी को साथ लेकर चलना पसंद करते हैं, इसलिए भी लड़कियों को बड़ी उम्र के मर्द अट्रेक्ट करते हैं।
अच्छे लिस्नर
बड़ी उम्र के पुरुष अच्छे लिस्नर भी होते है। ये पहले अपने पार्टनर को बातों को अच्छे से समझते हैं, फिर उनका जवाब देते हैं। और लड़कियां अपने पार्टनर में इस तरह की क्वालिटी ही चाहती हैं। इसलिए ऐसे मर्द उनको जल्दी आकर्षित कर लेते हैं क्योंकि वो उनकी बातों को अच्छे से सुनते और समझते हैं ।
खुद लेते हैं सारे फैसले
बड़ी उम्र के मर्द एक पड़ाव पर आकर अपने निर्णय खुद लेते हैं ना कि मां के बच्चे की तरह बर्ताव करते । इसलिए वो अपने विचार या निर्णय लेने के लिए बिल्कुल स्वतंत्र होते हैं और घर संभालने से लेकर अपने फैसले लेने तक हर चीज अपने बलबूते पर करते हैं। बस पुरुषों की यही खूबी लड़कियों को झट से इम्प्रेस कर देती है।
अधिक पैसा
ये कारण भी सबसे महत्वपूर्ण है, बड़ी उम्र के पुरुष आर्थिक तौर से भी स्वतंत्र होते हैं क्योंकि उम्र के एक पड़ाव पर आकर वो अपने करियर के उस मुकाम पर पहुंच गए होते हैं जो वो करना चाहते हैं। इसलिए वो फाइनेंशली खुद पर डिपेंड (financially dependent) होते हैं। लड़कियों की पहली ख्वाहिश भी यहीं होती है कि उनका पार्टनर उन्हें बेहतर लाइफ एन्जॉय करवाए।
स्वभाव में केयरिंग
बड़ी उम्र के पुरुष अनुभवी होने के साथ ही केयरिंग भी होते हैं। ऐसे मर्द पार्टनर की केयर बिल्कुल मां-बाप की तरह करते हैं। सही और गलत की सलाह देते हैं और गलतियों को सुधारने का मौका भी। बात-बात पर पार्टनर (life partner) की केयर करना लड़कियों को खूब पसंद होता । इसलिए लड़कियां खुद से ज्यादा उम्र के पुरुषों को को अपना लाइफपार्टनर बनाती हैं।
ना उम्र की सीमा हो और ना जन्म का हो बंधन, जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन… जी हां, जब कोई इंसान प्यार में होता है तो वो पार्टनर की उम्र नहीं देखता। बस प्यार करता है। बॉलीवुड की बड़ी बड़ी एक्ट्रेस को आपने देखा होगा की वो अपने से कहीं ज्यादा उम्र के पुरुषों से रिलेशन (Relationship) में होती हैं।
पिछले साल सुष्मिता सेन और ललित मोदी के रिलेशन (Relation) को लेकर काफी सुर्खियां बनी थी। एक तरफ सुष्मिता सेन 46 साल की है तो वहीं, ललित मोदी की उम्र 62 साल से भी ज्यादा है। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर औरतें या लड़कियों को अपनी उम्र से ज्यादा बड़े आदमियों की ओर क्यों आकर्षित होती हैं? आईये नीचे जानते हैं इसका जवाब…..
पहला कारण तो, मैच्योरिटी
सबसे पहले तो ये बात है कि लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में मैच्योरिटी (Maturity) थोड़ी देर से आती है। हालांकि लड़कियों को मैच्योर मर्द ज्यादा पसंद होते हैं। ऐसे में वो अपनी उम्र से बड़े मर्दों को को डेट (Relationship Tips ) करना पसंद करती हैं और वो ऐसे पार्टनर्स के साथ सेफ फील करती हैं। लड़कियों को लगता है कि समझदार पार्टनर उन्हें आसानी से संभाल सकते हैं।
एक्सपीरियंस
बड़ी उम्र के पुरूषों में एक्सपीरियंस काफी ज्यादा होता है और लड़कियों को अनुभवी मर्द (Seasoned Men) बहुत पसंद होते हैं। उनका सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा होता है इसलिए वो अपने से बड़े उम्र के मर्दों की ओर आकर्षित (Relation) हो जाती हैं।
फाइनेंशियल स्टेबिलिटी
लड़कियां अपने से बड़े उम्र के आदमियों की तरफ इसलिए आकर्षित होती है, क्योंकि वो फाइनेंशली इंडिपेंडेंट (financially independent) होते हैं और लड़कियों के खर्चों को आसानी से उठा सकते हैं। ऐसे में महिलाएं समझदारी दिखाते हुए Financially Independent आदमियों के करीब आ जाती है , ताकि वो लाइफ अच्छी तरह से अपनी लाइफ जी पाएं।
कॉन्फिडेंस (Self-confidence)
ज्यादा उम्र के पुरुषों का कॉन्फिडेंस (Confidence Man) का लेवल काफी ज्यादा होता है और अक्सर लड़कियों को ये काफी प्रभावित करता है। ऐसे में कम उम्र की लड़कियां अक्सर अनुभव और आत्मविश्वास (Self-confidence) से भरे आदमियों को अपना दिल देना पसंद करती है।