हावड़ा-दिल्ली एक्सप्रेस में रात का सन्नाटा अचानक एक चीख से टूट गया – ‘मुझे गुदगुदी हो रही है, याह!’ ऊपरी बर्थ से अचानक आई ऐसी चीख ने दूसरे यात्रियों की आंखें चौड़ी कर दीं।
कई लोगों को लगा कि चलती ट्रेन में पति-पत्नी के बीच अंतरंग पल हो रहे हैं!
कुछ ने तो अपने मोबाइल फोन निकालकर वीडियो बनाना भी शुरू कर दिया।
लेकिन जब असली सच्चाई सामने आई तो सबकी आंखें चौड़ी हो गईं! नहीं, यह कोई यौन पल नहीं था, उस चीख की वजह खटमलों का झुंड था। कहा जाता है कि चलती ट्रेन के अंदर गंदी बर्थ पर घूम रहे गंदे कंबल और कीड़ों ने महिला के शरीर पर गुदगुदी पैदा कर दी।
इस घटना के बाद यात्रियों में काफी गुस्सा था। रेल के रख-रखाव और साफ-सफाई को लेकर सवाल उठने लगे। ट्रेन की सफाई व्यवस्था इतनी खराब कैसे हो गई है कि यात्रियों की ‘चीखें’ अब रोमांच की नहीं, बल्कि डर का कारण बन गई हैं! हालांकि रेलवे की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यात्रियों का दावा है कि ऐसी घटनाएं न केवल परेशान करने वाली हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा करती हैं।
Signs of A Genius Kids: हर बच्चा एक सा नहीं होता है. कुछ ज्यादा बोलते हैं, कुछ कम बोलते हैं तो कुछ बिल्कुल अलग होते हैं. वहीं कुछ बच्चे पढ़ाई करने में अच्छे होते हैं तो कुछ को खेलकूद ज्यादा पसंद होता है.
ऐसे में हर पैरेंट्स के मन में सवाल रहता है कि उनका बच्चा कैसा होगा. अगर आप भी अपने बच्चे के बारे में जानना चाहते हैं कि वो एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी यानी जीनियस है या नहीं तो कुछ लक्षण हैं जो उनमें बचपन से ही दिखने लगते हैं. साइकोलॉजी के अनुसार, जीनियस बच्चों का हावभाव, उनकी सोच समझ, जिज्ञासा दूसरे बच्चों से अलग होती है. यहां हम आपको बताते हैं बच्चों की वो आदतें जो उनमें बचपन से ही होती हैं और ये लक्षण उनके जीनियस होने का संकेत देते हैं.
बच्चा जीनियस है तो दिखेंगे ये 5 लक्षण ( Genius Kids ki Pehchan)
अगर आपका बच्चा बहुत ज्यादा चलता फिरता रहता है, हर चीज को जाकर हाथ लगाता रहता है. इसका मतलब है कि बच्चा बहुत एक्टिव है. उसके अंदर का घूमने-फिरने का शौक और बैचेनी है और चीजों को जानने की क्यूरोसिटी है. ये चीजें संकेत देती हैं कि ऐसे बच्चे इंटेलिजेंट होते हैं और हर चीज जानने के लिए बहुत क्यूरियस होते हैं.
वो बात नहीं सुनते. अगर वो कोई काम कर रहे होते हैं तो वो सुनते नही है. आप इस बात से इरिटेट हो रहे होते हैं कि वो बात नहीं सुन रहा है. इसका मतलब है कि वो बहुत फोकस है, वो जो काम करता है वो बहुत फोकस के साथ डेडिकेट होकर करते हैं. जो की एक अच्छा साइन है.
कहानियां बहुत बनाते हैं. ये क्रिएटिविटी का साइन है. उनसे कुछ भी पूछने पर वो तुरंत कोई भी स्टोरी बना लेते हैं या तुरंत जवाब दे देते हैं. ये साइन बताते हैं कि आपका बच्चा क्रिएटिव है जो कि एक अच्छा साइन है.
वो डिफेंड बहुत अच्छा करते हैं. अपने बचाव में उनके पास सब कुछ होता है. वो किसी भी तरह की सिचुएशन में खुद को बचा सकते हैं जो कि एक अच्छी आदत है.
बार-बार बोलते हैं कि उनको हर काम खुद से करता है. वो हर चीज को खुद से ट्राई करते हैं जो कि एक अच्छा साइन है.
यदि शौच के दौरान आपका पेट अच्छी तरह से साफ़ नहीं होता तो समझ लीजिये आपको कब्ज की बीमारी हैं और तरल पदार्थो की कमी आपके शरीर में हो रही हैं। यदि कब्ज हो जाये तब कोई भी खुद को फ्रेश फील नहीं कर पाता हैं। एक बात ध्यान अवश्य रखिये यदि कब्ज होने पर उसको अनदेखा किया गया तब इसके परिणाम काफी घातक होते हैं यह किसी भी जटिल बीमारी का रूप ले लेता हैं।
कब्ज के होते ही पेट में अनेको व्याधिया आ जाती हैं उदाहरण के लिए कब्ज वाले रोगी को पेट दर्द की शिकायत रहती हैं, सुबह शौच करने में परेशानी आती हैं ,तथा मल का शरीर से पूरी तरह ना निकलना जैसी परेशानियो से सामना करना पड़ता है। वैसी तो कब्ज के लिए बहुत उपाय हैं पर कब्ज को जड़ से खत्म करने के लिए मात्र आर्युवैदिक उपाय ही कारगर साबित हुए हैं।
कब्ज को जड़ से मिटाने वाले कुछ करामाती आर्युवैदिक उपाय :
कब्ज का मुख्य कारण यह हैं की शरीर में पानी और दुसरे प्रकार के तरल पदार्थो की कमी हो गयी हैं। इन्ही तरल पदार्थो की कमी के चलते आंतो में मल सुख जता हैं तथा सुबह शौच क्रिया के दौरान बल प्रयोग करना पड़ता हैं। इसके चलते कब्ज रोगी को दिक्कत का सामना करना पड़ता हैं। दलिया, खिचड़ी जैसे और तरल पदार्थो को लेने की कब्ज रोगीयो को अक्सर सलाह दी जाती हैं, इसके अतरिक्त चिकित्सक कब्ज के मरीज को गर्म पानी के सेवन पर जोर देते हैं।
गुड़ और गिलोय : गुड के साथ गिलोय का बारीक़ चूर्ण मिलाकर सोते समय 2 चम्मच लीजिये और ध्यान रखिये गुड तथा गिलोय का चूर्ण बराबर मात्र में मिक्स किया हो ,कब्ज एकदम ठीक होगा।
10 ग्राम सेंधा नमक, 10 ग्राम त्रिफला तथा 10 ग्राम अजवायन को मिलाकर कूट लीजिये और एक बारीक़ चूर्ण बना लीजिये। अब हर रोज हल्के गर्म पानी के साथ 3 से 5 ग्राम चूर्ण का सेवन कीजियेगा ,पुराणी से पुराणी कब्ज भी खत्म हो जाएगी।
हर्र : हर रोज रात में हर्र को पीसकर बारीक चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को कुनकुने पानी के साथ पीजिए। कब्जा दूर होगा और पेट में गैस बनना बंद हो जाएगा।
अमरूद : पका हुआ अमरूद और पपीता कब्जर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। अमरूद और पपीता को किसी भी समय खाया जा सकता है।
किशमिश : किशमिश को पानी में कुछ देर तक डालकर गलाइए, इसके बाद किशमिश को पानी से निकालकर खा लीजिए। इससे कब्जि की शिकायत दूर होती है।
पालक : पालक का रस पीने से कब्ज की शिकायत दूर होती है, खाने में भी पालक की सब्जीि का प्रयोग करना चाहिए।
हैदराबाद. आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के करिवमुला गांव में एक पुरानी इमारत की खुदाई में एक भारी भरकम बक्सा मिला. जहां से यह बक्सा मिला वहां रहने वाले लोग इस बक्से को देखकर काफी ज्यादा खुश हो गए. साथ ही इसे लेकर तरह-तरह के अनुमान लगाने लगे. इस बक्से का वजन करीब 400 किलो के करीब था. जैसे ही इस बक्से के मिलने की खबर फैली तो आस-पास के लोग वहां इकट्ठा हो गए और वहां भीड़ लग गई. तब परिवार के लोगों ने पुलिस को फोन किया.
खुदाई में मिली इस रहस्यमयी तिजोरी को खोलने के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों और पुलिस की एक टीम पहुंची. वहां उन्होंने गैस कटर से इस बक्से का ताला खोला. बक्से का ताला खोले जाने के बाद उसमें रखे सामान की छानबीन होने लगी. बक्से के पूरी तरह खाली होने के बाद वहां मौजूद लोग मायूस हो गए. क्योंकि उस बक्से में सिवाय रद्दी, कागज, रेत, लोहा और स्टील के टुकड़े मिले. ये सब देखने के बाद वहां मौजूद लोग धीरे-धीरे वहां से चले गए.
ट्रैक्टर की मदद से निकाली गई तिजोरी करिवेमुला के स्थानीय निवासी नरसिम्हुलु ने कृष्णा रेड्डी से संबंधित एक पुराना घर खरीदा था. उन्होंने नया घर बनवाने के लिए पुराने हिस्से को तोड़ने की शुरुआत की. इसी दौरान मजदूरों ने नींव से एक पुरानी तिजोरी निकाली. तिजोरी का वजन इतना ज्यादा था कि नरसिम्हुलु और अन्य कर्मचारियों को इसे ट्रैक्टर की मदद से बाहर निकालना पड़ा. हालांकि तब तक बात पूरे गांव में फैल गई और लोग घर के बाहर जमा हो गए.
इस बीच सूचना पाकर पुलिस और राजस्व विभान के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे. यहां कड़ी सुरक्षा के बीच इस बॉक्स को सुरक्षा के बीच खोला गया. अधिकारियों को इस बक्से के अंदर से पुराने दस्तावेज और रेत निकाली. बक्से के अंदर से ये सब मिलने से नरसिम्हुलु निराश हो गए. राजस्व अधिकारियों के मुताबिक बक्से में से मिले सभी दस्तावेज अवैध हैं.
कई बार बारिश के दौरान पानी की बूंदों के साथ बर्फ के छोटे-छोटे गोले भी गिरते हैं। इन्हें हम ओले कहते हैं। इन ओलों को बच्चे उठा कर खा भी लेते हैं। लेकिन अब जरा संभल जाइए, क्योंकि आसमान से गिरे ये बर्फ के गोले प्लेन से गिरे पेशाब के भी हो सकते हैं।
वैसे तो हवाई जहाजों में गंदगी इकठ्ठा करने के लिए एक टैंक बना होता है, पर कई बार इससे गंदगी बाहर भी आ जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ था एंडी और ग्नोर स्वान के साथ, जब साल 2006 में उनकी छत पर एक बर्फ का तुकड़ा आ गिरा, उन्हें लगा की वह ओला है, लेकिन जब ध्यान से देखा तो उनके होश उड़ गए। वो कुछ और नहीं बल्कि प्लेन गिरी पेशाब थी, जो ठंड की वजह से जमकर बर्फ में तब्दील हो गई थी।
सालों से ये अफवाहें उड़ती है कि सभी अपशिष्ट पदार्थ प्लेन के नीचे से बाहर निकलते हैं और कई बार जमीन पर गिर जाते हैं, लेकिन आधुनिक हवाई जहाजों में एक टैंक में इन अपशिष्ट पदर्थों को रखा जाता है। हालांकि कभी-कभी चीजें गलत हो सकती हैं और स्टोर किया सीवेज विमान से बाहर आ जाता है, इसे “ब्लू आइस” कहा जाता है।
कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके है, जब इस तरह से अपशिष्ट पदार्थ जमीन पर आ गिरे हो। कुछ ऐसा ही हुआ था एंडी और गेन्नोर के साथ। दोनों अपने बगीचे में थे जब प्लेन से 18 इंच चौड़ा ब्लॉक उनकी छत पर आकर गिरा।
एंडी ने बताया कि जब वह बर्फ का तुकड़ा उनकी छत पर गिरा, तो एक जोरदार आवाज आई और उनका कभी नुकसान भी हुआ। उन्हें लगा कि शायद ये ओलें होंगे। लेकिन जब बाद में उन्होंने इसे ध्यान से देखा तो पता चला की ये यूरीन का आइस क्यूब है, जो किसी प्लेन में से गिरा है।
ऐसा ही एक वाकया हुआ था ग्रेट ग्लेन होम में रहने वाली स्टेफनी कोल के साथ। जिनके घर के बाहर एक ऐसी ही घटना घटी, जब एक बर्फ का एक गोला उनकी कार के ऊपर आ गिरा। वो कुछ और नहीं बल्कि हवाई जहाज से गिरा यूरीन के बर्फ का गोला ही था।
दोनों ही मामलों में मालिकों का बहुत नुकसान हुआ, लेकिन एयरलाइन की तरफ से उन्हें किसी प्रकार का कोई मुआवजा नहीं मिला।
बता दे कि राम अवतार पांडे उर्फ माथा पांडे जो 60 साल पहले उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव परौली में रहते थे, लेकिन 60 साल पहले ही वह परौली से कानपुर पहुंचे थे और तब उनकी जेब खाली थी। इसके इलावा उनके हाथ में एक बड़ी सी थाली थी और उस थाली में काफी टेस्टी लड्डू थे। जो उनकी पत्नी द्वारा बनाए गए थे। ऐसे में आज हम आपको कानपुर के मशहूर ठग्गू के लड्डू की कहानी से रूबरू करवाना चाहते है, जो काफी दिलचस्प है।
कानपुर के मशहूर ठग्गू के लड्डू की कहानी आखिर क्या है :
गौरतलब है कि राम अवतार पांडे अपने कंधे पर गमछा डाल कर कानपुर की गलियों में घूम घूम कर लड्डू बेचा करते थे। फिर धीरे धीरे उन्होंने काफी पैसे इकट्ठे किए और साल 1973 में कानपुर के परेड इलाके में एक छोटी सी दुकान खरीदी। मगर कुछ सालों बाद जब क्षेत्र में दंगे भड़के तो किसी ने उनकी दुकान जला दी। तब राम अवतार के लिए ये झटका बहुत बड़ा था, लेकिन उनकी किस्मत में कुछ और ही लिखा था। जी हां तभी तो सरकार ने उन्हें मुआवजे के रूप में कानपुर के ही बड़ा चौराहा इलाके में एक दूसरी दुकान दे दी।
बहरहाल 1990 से शुरू हुई ये दुकान आज भी खूब चल रही है। हालांकि यहां लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि कोई व्यक्ति अपनी दुकान का नाम इतना अजीब कैसे रख सकता है। इस बारे में बात करते हुए आदर्श बताते है कि हमारे दादा जी महात्मा गांधी के अनुयायी थे और उनकी सार्वजनिक सभाओं में रोज़ जाते थे। इसके साथ ही वह महात्मा गांधी के भाषणों को सुन कर खूब प्रेरित होते थे और तब एक बार गांधी जी ने चीनी को सफेद जहर कहा था।
बस गांधी जी की यह बात दादा जी के मन में यानि राम अवतार के जहन में बैठ गई थी। हालांकि इस बात से वह परेशान भी होते थे, क्योंकि उनके लड्डू चीनी से ही बनते है। जिसके बाद वे सोचने लगे कि आखिर बिना चीनी के लड्डू कैसे बनाएं। बता दे कि आदर्श, राम अवतार पांडे की तीसरी पीढ़ी है और आगे बात करते हुए उन्होंने बताया कि मेरे दादा जी ने उनके ग्राहकों के प्रति सच्चे रहने का फैसला किया और ग्राहकों को चीनी के बुरे प्रभावों के बारे में चेतावनी देने के लिए अपनी दुकान का नाम ठग्गू के लड्डू रख लिया, ताकि लोगों को ये पता चल सके कि चीनी के लड्डू खा कर उनका नुकसान हो रहा है।
महात्मा गांधी से प्रेरित है राम अवतार पांडे :
जी हां राम अवतार पांडे ने भले ही महात्मा गांधी से प्रेरित हो कर अपनी दुकान का नाम ये रखा हो, लेकिन फिर भी वह जबरदस्त मार्केटिंग कर गए। यही वजह है कि उनकी दुकान की टैगलाइन ऐसा कोई सगा नहीं जिसको हमने ठगा नहीं घर घर में प्रचलित है। हालांकि इसके इलावा वह कई खाने पीने की चीजों का भी दिलचस्प नाम रख चुके है। जैसे कि जब वो कानपुर में पूड़ी बेचते थे, तो वह जगह कपड़ा मिल यूनियन से जुड़ी हुई थी। ऐसे में उन्होंने अपनी पूड़ियों का नाम अपराधी आटे से बनी कम्युनिस्ट पूड़ी रख दिया। केवल इतना ही नहीं, इसके इलावा जब उन्होंने नेता बाजार में दुकान खोली तो अपने लड्डुओं का नाम नेता बाजार के लड्डू रख दिया।
यहां नेताओं के सरकारी आवास थे तो इस की टैगलाइन उन्होंने दिखाने में कुछ और खाने में कुछ और रख दिया। जिसका मतलब है जो जैसा दिखता है वैसा होता नहीं है। बहरहाल ये राजनेताओं पर मीठे लड्डू बनाने वाला तीखा कटाक्ष था। इस बारे में राम अवतार पांडे के पोते आदर्श कहते है कि हमारे दादा जी का विश्वास था कि अगर आप सीधे सीधे लोगों को कोई सामान नहीं बेच सकते तो थोड़े से ट्विस्ट के साथ लोगों को समान बेचने की कोशिश करे, क्योंकि लोगों को ट्विस्ट काफी पसंद आते है। तो दोस्तों कानपुर के मशहूर ठग्गू के लड्डू की ये कहानी आपको कैसी लगी, इस बारे में हमें अपनी राय जरूर दीजियेगा और हिमाचली खबर को फॉलो करना न भूलें।
Haunted Railway Station: भारतीय रेलवे को देश की जीवन रेखा कहा जाता है. यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. जो हर दिन लाखों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाता है. देश के हर कोने में ट्रेनें चलती हैं, और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की चहल-पहल बनी रहती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में कुछ ऐसे रेलवे स्टेशन भी हैं. जहां जाने से लोग डरते हैं? इन स्टेशनों से जुड़े रहस्यों और डरावनी कहानियों ने इन्हें “भूतिया रेलवे स्टेशन” बना दिया है.
बेगुनकोदर रेलवे स्टेशन
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में स्थित बेगुनकोदर रेलवे स्टेशन को भारत का सबसे प्रसिद्ध भूतिया रेलवे स्टेशन माना जाता है. कहा जाता है कि यहां एक महिला के भूत के दिखाई देने के बाद से स्टेशन वीरान हो गया. 1967 में एक रेलवे अधिकारी और उनके परिवार ने स्टेशन पर भूत देखने का दावा किया था. इसके बाद यह स्टेशन लगभग 42 वर्षों तक बंद रहा. हालांकि, 2009 में इस स्टेशन को फिर से शुरू किया गया, लेकिन आज भी यहां लोग रात के समय रुकने से डरते हैं.
नैनी रेलवे स्टेशन
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित नैनी रेलवे स्टेशन भी भूतिया स्टेशनों की सूची में शामिल है. इस स्टेशन के आसपास कई जेलें हैं, जिनमें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कई स्वतंत्रता सेनानियों को कैद किया गया था. कहा जाता है कि कुछ कैदी फांसी के बाद भी यहां की जेलों और स्टेशन के आसपास भटकते हैं. कई लोगों ने रात के समय स्टेशन पर अजीबोगरीब आवाजें सुनने और छायाएं देखने की बात कही है.
मुलुंड रेलवे स्टेशन
मुलुंड रेलवे स्टेशन मुंबई की लोकल ट्रेन सेवा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. लेकिन इसे लेकर कई डरावनी कहानियां प्रचलित हैं. कुछ यात्रियों का कहना है कि उन्होंने यहां ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या करने वाली आत्माओं को घूमते हुए देखा है. रात के समय इस स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर अजीब घटनाएं होने की खबरें आती रहती हैं.
बड़ोग रेलवे स्टेशन
कालका-शिमला रेलवे रूट पर स्थित बड़ोग रेलवे स्टेशन भी भूतिया जगहों में गिना जाता है. कहा जाता है कि जब ब्रिटिश शासनकाल में इस स्टेशन का निर्माण हो रहा था, तो ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बड़ोग ने गलती से एक सुरंग को गलत दिशा में बनवा दिया. इस गलती के कारण उन्हें अपमानित किया गया, और उन्होंने आत्महत्या कर ली. इसके बाद से लोगों का दावा है कि उनकी आत्मा इस स्टेशन और सुरंग के आसपास भटकती रहती है.
रवींद्र सरोबर मेट्रो स्टेशन
कोलकाता के रवींद्र सरोबर मेट्रो स्टेशन को भी भूतिया माना जाता है. यह स्टेशन मेट्रो के ब्लू लाइन के उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर पर स्थित है. कहा जाता है कि इस स्टेशन पर कई लोगों ने आत्महत्या की है, और उनकी आत्माएं आज भी यहां मौजूद हैं. कई यात्रियों और मेट्रो कर्मचारियों ने स्टेशन पर सफेद साया देखने और अजीब आवाजें सुनने का दावा किया है.
क्या सच में रेलवे स्टेशन भूतिया होते हैं?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो भूतिया घटनाओं की कोई ठोस पुष्टि नहीं है, लेकिन कई लोगों के अनुभव और दावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अक्सर डरावनी घटनाएं हमारी मानसिकता और माहौल के कारण भी महसूस होती हैं. कई रेलवे स्टेशन पुरानी और सुनसान जगहों पर बने होते हैं, जहां रात में अजीब आवाजें या घटनाएं महसूस होना आम बात हो सकती है.
जब भी कोई लड़की अपने लिए लाइफ पार्टनर ढूंढती है तो वह अपने जैसा पढ़ा लिखा और अधिक पैसे कमाने वाला लड़का खोजती है। आप भी इस बात से वाकिफ होंगे कि आजकल लड़कियों के कितने नखरे होते हैं। खासकर जब लड़की ज्यादा पढ़ी लिखी और कोई अच्छी पोस्ट पर हो तो उसे अपने लिए लड़का भी वैसा ही स्टैन्डर्ड वाला चाहिए होता है। हालांकि सभी लड़कियां ऐसी नहीं होती है। अब इस लैडी डॉक्टर को ही देख लीजिए।
चाय वाले को दिल दे बैठी डॉक्टर
आज हम आपको एक ऐसी महिला से मिलाने जा रहे हैं जो पेशे से एक डॉक्टर हैं। लेकिन उन्होंने अपने लिए जो पति चुना है वह एक चाय वाला और सफाईकर्मी है। यह अनोखी लव स्टोरी पाकिस्तान के ओकारा के दीपालपुर की है। यहां एक अस्पताल में डॉ. किश्वर और छावला शहजाद साथ काम करते थे। किश्वर यहां एक डॉक्टर थी जबकि शहजाद एक चायवाला और सफाईकर्मी था।
शहजाद अक्सर डॉ. किश्वर को चाय लाकर देता था। वह उनके केबिन की साफ सफाई भी करता था। एक बार डॉ. किश्वर ने शहजाद का मोबाइल नंबर मांग लिया। इसके बाद दोनों की बातचीत होने लगी। इस दौरान डॉ. किश्वर को शहजाद से प्यार हो गया। उन्होंने ही आगे रहकर शहजाद को प्रपोज किया। एक डॉक्टर का शादी का प्रपोजल सुनकर शहजाद हैरान रह गया। हालांकि उसने इस प्रपोजल को खुशी-खुशी स्वीकार किया।
चायवाले की इस खूबी ने जीत दिल
डॉ. किश्वर को शहजाद का शालीन व्यवहार पसंद आया। वे बताती हैं कि शहजाद उनसे बहुत अदब से पेश आते थे। जब भी चाय लाते थे तो ऊपर नजर उठाकर नहीं देखते थे। वह मेरी बहुत इज्जत करते थे। मुझे मान सम्मान देते थे। बस इसी खूबी को देखते हुए मैंने उनसे शादी का निर्णय लिया। इस शादी के बाद डॉ. किश्वर को कई ताने सुनने को मिले। इस कारण उन्होंने वह अस्पताल छोड़ दिया।
अब डॉ. किश्वर अपना खुद का क्लिनिक खोलने पर विचार कर रही है। दोनों की लव स्टोरी ‘मेरा पाकिस्तान’ यूट्यूब चैनल पर मौजूद है। यहां दोनों अपनी प्रेम कहानी को विस्तार में बता रहे हैं। आप भी इस अजब प्रेम की गजब कहानी को विस्तार से यहां देख सकते हैं।
इस लव स्टोरी ने साबित कर दिया कि प्यार सचमुच अंधा होता है। वैसे भी कहा जाता है कि एक सच्चा प्यार अमीरी गरीबी, जात पात और रंग रूप देखकर नहीं होता है। और यदि आप सच में शादी के बाद खुश रहना चाहते हैं तो उस शख्स से शादी करना चाहे जो आपकी इज्जत करे।
सर्दियों का मौसम आते ही शादियों का सीजन शुरू होता है, जिससे दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के लोग शॉपिंग के लिए दिल्ली आते हैं। अगर आप भी इस दौरान शॉपिंग का प्लान बना रहे हैं, तो दिल्ली के कई बाजारों में आपकी पसंद का सामान मिल जाएगा। यहां सस्ती कीमतों पर कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध हैं। ये बाजार एक ही स्थान पर आपको सभी जरूरत का सामान उपलब्ध कराते हैं, जिससे आप आसानी से अपनी खरीदारी कर सकते हैं। (Delhi best shopping markets)
क्लासिक और डिजाइनर लहंगे (चांदनी चौक)-
शादी की शॉपिंग के लिए चांदनी चौक (chandani chowk) पहला नाम है। यह दिल्ली का सबसे प्रसिद्ध लहंगा मार्केट है, जहां बेहतरीन डिजाइनर लहंगे 2500 से 30000 रुपये तक मिलते हैं। यहां बजट-फ्रेंडली लहंगे से लेकर सब्यसाची जैसे बड़े डिजाइनरों की कॉपी भी आसानी से उपलब्ध है। चांदनी चौक पर आपको विविधता और गुणवत्ता दोनों मिलते हैं, जिससे आप अपनी शादी के लिए कुछ यूनिक और खास चुन सकते हैं। इस बाजार की खासियत यह है कि यहां हर उम्र और बजट के लिए कुछ न कुछ अवश्य मिलेगा। (Dehi best shopping places)
सस्ता और शानदार (शाहदरा)-
शाहदरा का छोटा बाजार (Shahdara’s Chota Bazaar) अपने सस्ते ब्राइडल लहंगे (cheap bridal lehengas) के लिए जाना जाता है। यहां 3000 रुपये से 15000 रुपये तक के लहंगे मिलते हैं। इसके अलावा यहां पर ज्वेलरी और फुटवियर के लिए भी एक से एक बेहतरीन ऑप्शन मिल जाते हैं। अगर सर्दियों में शॉपिंग करते हैं तो उसके लिए नया कलेक्शन आपको मिल जाता है।
न्यू सलीमपुर मार्केट-
दिल्ली की न्यू सलीमपुर बाजार (New Salimpur Market, Delhi) ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। यहां सस्ते ब्राइडल लहंगे बहुतायत में मिलते हैं, जिनकी कीमत 500 रुपये से शुरू होती है। बजट-फ्रेंडली होने के साथ-साथ, यहां गुणवत्ता भी बेहतरीन होती है। अगर आप अच्छे लहंगे की तलाश में हैं, तो 10,000 रुपये तक के खूबसूरत ब्राइडल और पार्टी वियर लहंगे भी उपलब्ध हैं। इस बाजार की अनोखी विशेषता इसे शादी की तैयारियों के लिए एक प्रमुख स्थान बनाती है, जहां ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार शानदार लहंगे खरीद सकते हैं।
सदर बाजार-
अगर आप उचित दाम में एक खूबसूरत लहंगा चाहते हैं, तो सदर बाजार (sadar bazaar) एक जा सकते हैं। यहां पर 2000 रुपये से लेकर 50,000 तक के लहंगे मिल जाते हैं। हर बजट वाला इंसान यहां पर शॉपिंग कर सकता है। इसके अलावा दिल्ली का सरोजिनी नगर बाजार (sarojani nagar market) भी सस्ती शॉपिंग के लिए जाना जाता है। यहां पर 1500 से 25000 तक के बेहतरीन लहंगे (Bridal lehnga market) खरीद सकते हैं।
भारत जुगाड़ का देश है। यहां लोगों के पास हर चीज का जुगाड़ है। कोई अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते जुगाड़ अपनाता है तो कोई कम संसाधनों में अधिक प्रोडक्टिविटी करने के लिए जुगाड़ का सहारा लेता है। फिर कुछ ऐसे भी होते हैं जो आलसी होने के चलते ऐसा जुगाड़ खोजते हैं जिससे कम मेहनत से सारा काम हो जाए। आज हम आपको ऐसा ही एक जुगाड़ दिखाने जा रहे हैं।
इस जुगाड़ से आसानी से साफ होगी पानी की टंकी
घर में अधिकतर लोगों के घर पानी की टंकी जरूर होती है। इस एक पानी की टंकी से पूरे घर की रोज की पानी की जरूरत पूरी होती है। हर कोई इसका पूरा लाभ लेता है। लेकिन जब इस पानी की टंकी को साफ करने की बारी आती है तो घर के सभी लोग पिछे हट जाते हैं। बदलते मौसम के चलते पानी की टंकी साफ करने का ख्याल हर किसी के मन में आता है। इसमें मौजूद गंदगी को साफ करना आपकी सेहत के लिए भी अच्छा होता है।
पानी की टंकी साफ करना बहुत मेहनत का काम होता है। इसमें बहुत समय बर्बाद होता है। इसके लिए आपको पानी भी पूरा टंकी से खाली करना पड़ता है। लेकिन आज हम आपको इसे साफ करने की एक बहुत ही अच्छी और सरल जुगाड़ बता रहे हैं। यह जुगाड़ सोशल मीडिया पर बड़ी पसंद की जा रही है। इस जुगाड़ में शख्स एक देसी यंत्र से पानी की टंकी को बड़ी आसानी से साफ कर देता है।
शख्स का कारनामा देख दंग रह गए लोग
वायरल हो रहा ये वीडियो लगभग चार मिनट लंबा है। इसे आप पूरा जरूर देखना। तभी पानी की टंकी साफ करने का आसान ट्रिक सीख पाएंगे। यहां एक शख्स पानी की आधी बोतल, पीवीसी पाइप और नॉर्मल पाइप लेकर कुछ चीजों से एक देसी यंत्र तैयार करता है। फिर वह यंत्र के एक हिस्से को गंदी पानी की टंकी में डालता है। फिर धीरे–धीरे थोड़े से पानी के साथ वह टंकी में मौजूद गंदगी को बाहर निकाल देता है।
शख्स की ये क्रिएटिविटी देख बड़े–बड़े इंजिनियर भी दंग हो जाते हैं। वहीं सोशल मीडिया पर लोग इस शख्स की जुगाड़ देख उसकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। एक यूजर बोला “भाई तुमने मेरी सबसे बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व कर दी। मैं घर में सबसे छोटा हूं और सब हर बार मुझे ही टंकी साफ करने के लिए पकड़ते थे।” दूसरा यूजर बोला “यार तुम अब तक कहां थे? मुझे बार बार टंकी साफ करने में आलस आता था। लेकिन इस जुगाड़ से मेरा काम फटाफट ही जाएगा।”
यहां देखें टंकी साफ करने का आसान जुगाड़
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