जब भी बात जुगाड़ की होती है तो हम भारतीय हमेशा से आगे होते हैं। जुगाड़ हमारे खून में होती है। जरूरत के हिसाब से हम एक से बढ़कर एक जुगाड़ बनाते रहते हैं। अब महाराष्ट्र के लातूर के रहने वाले किसान मकबूल शेख को ही ले लीजिए। इनके पास खेती करने के लिए ट्रैक्टर खरीदने के पैसे नहीं थे। ऐसे में इन्होंने बुलेट बाइक को ही ट्रैक्टर में बदल दिया। अब उनकी जुगाड़ इतनी फेमस हो गई कि दूर दूर से किसान उनके पास बुलेट ट्रैक्टर बनवाने आ रहे हैं।
दरअसल लातूर निवासी मकबूल शेख एक किसान होने के साथ साथ एक ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट भी हैं। गाँव में जब भी किसी की गाड़ी खराब हो जाती है तो वे फटाक से उसे ठीक कर देते हैं। यही वजह है कि वे एक ऐसा सस्ता ट्रैक्टर बनाने में कामयाब रहे जिससे की गरीब किसानों को फायदा हो सकता है।
मकबूल बताते हैं कि मार्केट में एक ट्रैक्टर की कीमत 9 से 10 लाख के आसपास होती है। एक गरीब या मिडिल क्लास किसान इसे खरीद खेती नहीं कर सकता है। वे खुद भी इस परेशानी से गुजर चुके हैं। इसलिए उन्हें बुलेट ट्रैक्टर का आइडिया आया। बुलेट ट्रैक्टर आम ट्रैक्टर की तुलना में काफी सस्ते होते हैं। इसके लिए किसानों को डेढ़ लाख के आसपास ही खर्च करने पड़ते हैं।
इस सस्ते बुलेट ट्रैक्टर से खेती बहुत आसान हो जाती है। इसकी मदद से किसान खेतों की जुताई, फसल की बुनाई और केमिकल्स का छिड़काव जैसी चीजें कर सकता है। मकबूल अभी तक लगभग 140 बुलेट ट्रैक्टर बनाकर डिलीवर कर चुके हैं।
मकबूल को बुलेट ट्रैक्टर का आइडिया 2016 में आया था। उन्होंने इस पर करीब दो साल काम किया। पहले इसे बनाने में की दिक्कतें आई। बुलेट ट्रैक्टर कई बार बीच में बंद पड़ जाता था। हालांकि मकबूल ने हार नहीं मानी और इसकी सभी कमियों को दूर कर दिया।
इस बुलेट ट्रैक्टर में 10 होर्स पॉवर का इंजन लगा होता है। मकबूल को दूर दूर से किसान आकर इस तरह के बुलेट ट्रैक्टर बनाने का ऑर्डर दे जाते हैं। उनके इस आइडिया के चलते आज कई गरीब किसान काम पैसे खर्च कर खेती कर पा रहे हैं।
ट्रैक्टर नहीं तो क्या हुआ? किसान ने बुलेट को ही बना लिया खेती का साथी, जुगाड़ देख आप भी कहेंगे वाह रे देसी दिमाग
मकबूल जैसे जुगाड़ू लोगों कि बदौलत ही आज भारत दिन दुगुनी और रात चौगुनी तरक्की कर रहा है। वैसे आप लोगों को इस इस बुलेट ट्रैक्टर का आइडिया कैसा लगा? अपनी राय हमे कमेन्ट सेक्शन में जरूर दें। क्या आप भी सामान्य ट्रैक्टर की बजाय इस बुलेट ट्रैक्टर को चुनना पसंद करेंगे?
भूत, प्रेत, पिशाच और आत्माओं जैसी चीजें सच में होती है या नहीं इस पर अभी भी बहस जारी है। कुछ लोगों का तर्क है कि यदि आप भगवान में यकीन रखते हैं तो भूत प्रेतों में भी यकीन करना होगा। दुनिया में अच्छी और बुरी दोनों ही शक्तियां रहती है। वैसे यदि आप इंटरनेट खँगालोगे तो आपको यहां भूत प्रेत से जुड़े कई वीडियो और तस्वीरें मिल जाएंगी। इनमें से कुछ तो सच्चाई के इतने करीब होते हैं कि एक पल के लिए हम भी इन बुरी शक्तियों पर विश्वास करने लग जाते हैं।
कई बार ऐसा होता है कि ऑन कैमरा ही कोई भूतिया हरकत कैद हो जाती है। ऐसा ही एक वीडियो आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं। जब आप इस वीडियो को देखेंगे तो एक पल के लिए आप भी भूतों के अस्तित्व पर सोचने को मजबूर हो जाएंगे। दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो इन दिनों बड़ा वायरल हो रहा है। वैसे तो ये वीडियो थोड़ा पुराना है लेकिन एक बार फिर ये लोगों के मन में भूतों को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
इस वीडियो में एक शख्स अपनी पत्नी का नहाते हुए वीडियो बनाता है। सबसे पहले वह पत्नी की बाथरूम में चुपके से अंदर घुस जाता है। इस दौरान उसकी पत्नी पर्दे के पीछे मजे से नहा रही होती है। उसे इस बात का कोई अंदाजा नहीं रहता है कि उसका पति बातरूम में कैमरा लेकर घुस आया है। लेकिन जैसे ही बीवी को पता चलता है कि उसका पति उसका नहाते हुए वीडियो बना रहा है तो वह टोलिया लपेटकर, शावर बंद कर, बाथरूम से बाहर चली जाती है।
बीवी के जाने से पति निराश हो जाता है। इसके बाद वह पलट कर बाथरूम से बाहर जाने लगता है, लेकिन तभी उसे बाथरूम में लगे पर्दे के पीछे से एक आवाज सुनाई देती है। फिर बाथरूम में लगा शावर अचानक से चालू हो जाता है। पति को लगता है कि बाथरूम में उसकी पत्नी के साथ कोई और भी शावर ले रहा था। ऐसे में वह चेक करने के लिए पर्दे के पास जाता है। लेकिन तभी अचानक से वहाँ एक डरावनी लड़की की आकृति उभर के सामने आती है। यह देख पति डर जाता है। हालांकि बाद में वह हिम्मत कर वापस जाता है और पर्दा हटाता है, लेकिन अंदर कोई भी नहीं होता है।
अब वीडियो बनाने वाले शख्स का दावा है कि उसके अपने कैमरे में एक आत्मा को कैद किया है। वहीं कुछ लोग इसे फेक भी बता रहे हैं। हालांकि वीडियो बनाने वाले शख्स का दावा है कि यह सत्य घटना है। वहाँ जरूर कोई बुरी शक्ति मौजूद थी। अब क्या सच है और क्या झूठ उसका पता आप खुद ही ये वीडियो देखकर लगा लीजिए।
देखें वीडियो
वैसे इस वीडियो को देखने के बाद आपकी भूत प्रेतों के ऊपर क्या राय है? क्या आपको आत्माओं पर यकीन है? क्या आपके साथ कभी कोई ऐसी भूतिया घटना हुई है? यदि हां तो अपने डरावने अनुभवों को कमेन्ट सेक्शन में जरूर शेयर करें। वीडियो पसंद आया हो तो इसे दूसरों को भी बताएं।
पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) पर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स के कारण इन फ्यूल्स की कीमतें बहुत अधिक हो जाती हैं। इन पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी, वैट और डीलर कमीशन जैसे शुल्क पेट्रोल-डीजल की वास्तविक कीमत को बढ़ा देते हैं। इसलिए क्या आप जानते हैं, कि पेट्रोल पंप (Petrol Pump) डीलर को पेट्रोल कितने में मिलता है और इन शुल्कों के बाद ग्राहक को इसे कितने में खरीदना पड़ता है? आइए जानते हैं, इस लेख में कि दिल्ली में 96.72 रुपये प्रति लीटर मिलने वाले पेट्रोल की असली कीमत क्या है, और इसमें शामिल टैक्स व अन्य चार्जेस कितने होते हैं।
बिना टैक्स के 1 लीटर पेट्रोल की असली कीमत क्या है? जानें डीलर कमीशन और टैक्स की पूरी जानकारी
भारत में पेट्रोल और डीजल पर मुख्य रूप से चार प्रकार के शुल्क लागू होते हैं। सबसे पहले, केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी वसूल करती है, और राज्य सरकारें इन पर वैट (Value Added Tax) वसूल करती हैं। इसके अलावा, पेट्रोल डीलर कमीशन और अन्य चार्जेस भी शामिल होते हैं, जो फ्यूल की कीमत को और अधिक बढ़ा देते हैं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये प्रति लीटर होती है, लेकिन यह टैक्स, डीलर कमीशन और अन्य शुल्कों के कारण इतना महंगा हो जाता है।
मार्किट में पेट्रोल की वास्तविक कीमत
दिल्ली में पेट्रोल की खुदरा कीमत 94.72 रुपये प्रति लीटर होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं, कि इस कीमत में शामिल टैक्स और अन्य शुल्कों का कितना योगदान है? पेट्रोल डीलर को पेट्रोल 55.66 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से मिलता है। यह वह कीमत है, जिस पर पेट्रोल डीलर्स को पेट्रोल मिलता है, लेकिन जब इसमें केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्य सरकार का वैट, डीलर कमीशन और अन्य चार्जेस जोड़ते हैं, तो पेट्रोल की खुदरा कीमत बढ़कर 94.72 रुपये प्रति लीटर हो जाती है।
इन टैक्सों के अलावा, पेट्रोल पर क्रूड ऑयल की लागत भी एक महत्वपूर्ण घटक है। वर्तमान में क्रूड ऑयल की कीमत 40 रुपये प्रति लीटर है, और इसके अलावा तेल कंपनियां 5.66 रुपये प्रति लीटर प्रोसेसिंग चार्ज लगाती हैं। इसके साथ ही बफर इंफ्लेशन का असर भी होता है, जो 10 रुपये प्रति लीटर होता है। इस प्रकार, पेट्रोल डीलर्स को 55.66 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से पेट्रोल मिलता है।
पेट्रोल पर टैक्स और चार्जेस की संरचना
पेट्रोल पर टैक्स और अन्य चार्जेस मार्किट प्राइस के हिसाब से काफी महंगे होते हैं, केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल पर लगाई गई एक्साइज ड्यूटी 19.90 रुपये प्रति लीटर होती है। इसके बाद, राज्य सरकारों द्वारा वसूला जाने वाला वैट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो दिल्ली में 15.39 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से होता है। इसके अलावा, पेट्रोल डीलर को पेट्रोल पर 3.77 रुपये प्रति लीटर का कमीशन भी मिलता है। इन सभी शुल्कों के बाद, पेट्रोल की खुदरा कीमत 94.72 रुपये प्रति लीटर हो जाती है।
टैक्स और कमीशन के बिना पेट्रोल की कीमत
अगर इन सभी टैक्सों और कमीशन को हटा दिया जाए, तो पेट्रोल की वास्तविक कीमत केवल 55.66 रुपये प्रति लीटर होती है। यह वह कीमत है, जिस पर पेट्रोल डीलर्स को पेट्रोल मिलता है। हालांकि, इन शुल्कों की वजह से पेट्रोल की कीमत बढ़ जाती है, और यह ग्राहकों के लिए महंगा हो जाता है।
राज्य सरकारों के वैट की भूमिका
राज्य सरकारों का वैट पेट्रोल-डीजल की कीमत में एक अहम भूमिका निभाता है। विभिन्न राज्यों में वैट की दरें अलग-अलग होती हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी राज्यों में अलग-अलग होती हैं। कुछ राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादा होती हैं, जबकि कुछ राज्यों में यह थोड़ी सस्ती होती हैं। इसलिए, यदि आप किसी अन्य राज्य में यात्रा करते हैं, तो पेट्रोल की कीमत में फर्क देख सकते हैं।
घरों में अक्सर यह पूछा जाता है कि क्या एक पत्नी अपनी प्रॉपर्टी अपने पति से पूछे बिना बेच सकती है। यह बात हमारे समाज में बहुत समय से चल रही है, लेकिन इसको लेकर कई गलत बातें भी फैली हुई हैं। इस लेख में हम कानून के हिसाब से और आसान भाषा में इस सवाल का जवाब देंगे।
पत्नी की व्यक्तिगत संपत्ति पर उसका पूरा हक होता है
अगर कोई संपत्ति केवल पत्नी के नाम पर है और वह उसकी खुद की खरीदी हुई या उसे उपहार/विरासत में मिली है, तो उसे बेचने के लिए उसे किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है – न पति की और न परिवार के किसी अन्य सदस्य की। यह कानूनी अधिकार है जिसे भारतीय कानून और हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट के एक फैसले ने भी पूरी तरह से मान्यता दी है।
ऐसी किसी संपत्ति को महिला जब चाहे बेच सकती है, ट्रांसफर कर सकती है या किसी को गिफ्ट में दे सकती है। पति का इस पर कोई हस्तक्षेप नहीं होता, क्योंकि यहां संपत्ति का मालिकाना हक पूरी तरह पत्नी का होता है।
संयुक्त संपत्ति में दोनों की सहमति अनिवार्य
यदि संपत्ति पति-पत्नी दोनों के नाम पर है यानी वह संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति है, तो उसमें किसी एक पक्ष द्वारा स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं लिया जा सकता। ऐसी स्थिति में बेचने या ट्रांसफर करने के लिए दोनों की सहमति जरूरी होती है। चाहे संपत्ति के कागजों में कोई एक नाम प्रमुख हो, लेकिन वास्तविक स्वामित्व में दोनों का बराबर अधिकार होता है।
पति की संपत्ति पर पत्नी का अधिकार सीमित होता है
पति की स्वयं अर्जित संपत्ति पर पत्नी का तब तक कोई कानूनी अधिकार नहीं होता जब तक कि पति उसे अपनी वसीयत के माध्यम से नहीं दे देता या वह संपत्ति उपहार में नहीं दे। पत्नी को यह अधिकार केवल विशेष परिस्थितियों में मिलता है जैसे पति की मृत्यु या तलाक के बाद। हालांकि, पत्नी को पति की आय में जीवनयापन के लिए हिस्सा मिल सकता है और इसके लिए वह अदालत में गुजारा भत्ता (Maintenance) का दावा कर सकती है।
अलगाव की स्थिति में संपत्ति अधिकार कैसे बदलते हैं?
अगर पति-पत्नी के बीच तलाक हो गया है या वे केवल अलग रह रहे हैं, तो भी संपत्ति अधिकार पूरी तरह खत्म नहीं होते। पत्नी, अगर बेरोजगार है या उसके पास आय का साधन नहीं है, तो वह पति से गुजारा भत्ता मांग सकती है। वहीं अगर पत्नी नौकरीपेशा है और पति बेरोजगार है, तो ऐसे दुर्लभ मामलों में पति भी गुजारा भत्ता मांग सकता है। कोर्ट दोनों पक्षों की आय और संपत्ति का गहन मूल्यांकन कर निर्णय देता है।
कौन-सी संपत्ति किसकी मानी जाती है?
यदि कोई व्यक्ति शादी से पहले कोई संपत्ति खरीदता है, तो वह उसकी व्यक्तिगत संपत्ति मानी जाती है। शादी के बाद अगर कोई संपत्ति दोनों की आय से खरीदी जाती है, भले ही वह सिर्फ पति या पत्नी के नाम पर हो, तब भी उसमें दूसरे पक्ष का हक साबित किया जा सकता है। वहीं, उपहार या विरासत में मिली संपत्ति पूरी तरह से प्राप्तकर्ता की मानी जाती है, और उसमें दूसरे जीवनसाथी का कोई दावा नहीं होता।
गलत धारणाएं और उनका समाधान
यह धारणा कि महिलाएं संपत्ति बेचने के लिए पति की इजाजत की मोहताज होती हैं, अब पुरानी सोच बन चुकी है। आज के कानून महिलाओं को हर तरह से संपत्ति पर समान अधिकार देते हैं। यह जरूरी है कि हम कानून की सही जानकारी रखें ताकि सामाजिक दबाव या अज्ञानता की वजह से कोई गलत निर्णय न लें।
विवादों से बचाव के लिए कानूनी सतर्कता जरूरी
अगर आप कोई संपत्ति बेच रहे हैं या खरीदने जा रहे हैं, तो जरूरी है कि सभी दस्तावेजों की जांच कर लें और संयुक्त संपत्तियों में सभी पक्षों की लिखित सहमति लें। किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए किसी अनुभवी वकील की सलाह अवश्य लें। यह न सिर्फ आपके हित की रक्षा करेगा बल्कि भविष्य में कानूनी उलझनों से भी बचाएगा।
‘वाघ बकरी चाय’ एक जाना माना ब्रांड है। देश में करोड़ों लोग ‘वाघ बकरी चाय’ पीया करते हैं। ‘वाघ बकरी’ कंपनी की शुरूआत साल 1934 में नारनदास देसाई ने की थी। नारनदास देसाई ने दक्षिण अफ़्रीका से गुजरात आकर इस व्यापार को शुरू किया था। दरअसल ये चाय का व्यापार करने के लिए दक्षिण अफ़्रीका गए थे और यहां पर इन्होंने 500 एकड़ का एक चाय का बागान खरीदा था। हालांकि अंग्रेज़ी हुकूमत और रंग व नस्ल भेदभाव के कारण ये भारत वापस आ गए।
ये महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानते थे और जब ये भारत लौटे तो इनके पास कुछ सामान और बापू की लिखी हुई एक चिट्ठी थी। जो कि प्रमाण पत्र था। इसकी मदद से ही ये गुजरात में आसानी से अपना चाय का व्यापार शुरू कर पाए थे। ये पत्र 12 फरवरी, 1915 को गांधी जी ने लिखा था। इस चिट्ठी में गांधी जी ने देसाई की तारीफ़ की थी और लिखा था कि ‘मैं नारनदास देसाई को दक्षिण अफ़्रीका में जानता था। जहां वो कई सालों से सफ़ल चाय बागान के मालिक रहे।
गांधी जी का ये पत्र दिखाकर ही ये अपने सपने को पूरा कर सके और कम समय के अंदर ही गुजरात में इन्होंने चाय की अपनी कंपनी शुरू कर दी।
खोली गुजरात टी डिपो कंपनी
अपने जन्म राज्य गुजरात में आकर इन्होंने चाय के व्यापार को नए सिरे से शुरू किया। साल 1915 में भारत लौटे नारानदास देसाई ने गुजरात टी डिपो कंपनी की स्थापना की। वहीं 1934 में गुजरात टी डिपो कंपनी का नाम ‘वाघ बकरी’ रख दिया गया। फिर धीरे-धीरे ये ब्रांड पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गया।
कंपनी का Logo हुआ फेमस
नारनदास की कंपनी वाघ बकरी चाय का Logo काफी अलग था और उस दौरान इनकी कंपनी का ये लॉगो काफी फेमस हुआ था। चाय के पैकेट में बनें लॉगो में एक बाघ और एक बकरी बनीं हुई थी। ये दोनों एक ही प्याली से चाय पी रहे थे। इस लॉगो को नारनदास जी ने काफी सोच समझकर बनाया था। दरअसल गुजराती भाषा में बाघ को ‘वाघ’ कहते हैं। इसलिए चाय के पैकेट पर बाघ की जगह वाघ लिखा हुआ है।
ये लॉगो एकता और सौहार्द का प्रतीक है। इस चिह्न में बाघ यानी उच्च वर्ग के लोग और बकरी यानी निम्न वर्ग के लोग दिखाए गए हैं। ये दोनों एक साथ चाय पी रहे हैं। जो कि सामाजिक एकता का प्रतीक है।
भारत में ये कंपनी 15 चाय लाउंज का स्वामित्व और संचालन करती है। इसके उत्पाद अमेरिका, कनाडा, मध्य पूर्व, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिजी, मलेशिया और सिंगापुर में भी बेचे जाते हैं। मार्च 2021 तक कंपनी द्वारा कुल बिक्री में निर्यात का योगदान 5% था।
आज ये ब्रांड 1,500 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार और 40 मिलियन किलोग्राम से अधिक की चाय पत्ति का वितरण करता है। राजस्थान, गोवा से लेकर कर्नाटक तक, पूरे भारत में, वाघ बकरी चाय का सेवन किया जाता है। इस कंपनी में पांच हजार लोग काम करते हैं और ये आज भारत का एक जाना माना ब्रांड बन गया है।
UP Worship Dog: दुनियाभर में अलग-अलग जाति और धर्म के लोग रहते हैं. हर तरफ हजारों ऐसी जातियां है जो किसी न किसी को अपना देवता मानती हैं. वहीं भारत में तो सूर्य से लेकर पेड़ों तक को देवता के रूप में देखा जाता है.
आज हम आपको यूपी के ही एक ऐसे ही मामले की जानकारी देने जा रहे हैं जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे. दरअसल, ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चिपियाना बुजुर्ग गांव में भैरव बाबा मंदिर के प्रांगण में कुत्ते की मूर्ति लंबे समय से लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है. मान्यता है कि कुत्ते के काटने पर अगर मंदिर प्रांगण के पास बने तालाब में स्नान किया जाए तो कुत्ते के काटने का असर वहां कम हो जाता है. बताया जा रहा है कि इस मंदिर की मान्यता इतनी है कि लोग दूर-दूर से कुत्ते की मूर्ति की पूजा करने आते हैं और प्रसाद भी चढ़ाते हैं. वहीं कहा जा रहा है कि इलाके के रहने वाले लाखा बंजारे नाम के एक व्यक्ति ने अपने कुत्ते की मौत के बाद उसे यहीं दफनाया था. बाद में गांव वालों ने कुत्ते की कब्र पर एक मंदिर का निर्माण करवा दिया, जिसे आज देवता के रूप में देखा जाता है.
जादुई तालाब की कहानी
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चिपियाना गांव में भैरव मंदिर के पास मौजूद इस कुत्ते की समाधि की कहानी काफी हैरान कर देगी. वहीं कुत्ते की समाधि के पास एक तालाब बनाया गया है. कहा जाता है कि तालाब में नहाने से कुत्ते के काटने का असर खत्म हो जाता है. इतना ही नहीं हर शनिवार यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ आती है. आज भी मान्यता है कि कुत्ते के काटने के बाद मंदिर परिसर के पास स्थित तालाब में नहाने से रेबीज का असर कम हो जाता है. दिलचस्प बात ये है कि मंदिर के बाहर एक कुंड भी बनाया गया है. जो लोग तालाब में नहीं नहाते, वो कुंड में जाकर नहा लेते हैं.
जानिए इसके पीछे का रहस्य
ऐसे ही वहां के लोग कुत्ते की पूजा नहीं करते बल्कि इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है. ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 150 साल पहले, लाखा नाम के एक खानाबदोश ने अपने कुत्ते के लिए एक मकबरा बनवाया था. कहानी के पीछे की कहानी यह है कि खानाबदोश के पास एक कुत्ता था. उसने एक व्यापारी से कुछ पैसे उधार लिए थे. समय पर कर्ज न चुका पाने पर, उसने अपना कुत्ता व्यापारी के पास गिरवी रख दिया. कुछ दिनों बाद, व्यापारी के घर चोरी हो गई. इस दौरान, कुत्ते ने न तो लुटेरों पर भौंका और न ही अपने मालिक को जगाया. सुबह जब व्यापारी को चोरी का पता चला, तो वो कुत्ते पर भड़क उठा. कुछ ही देर बाद, कुत्ते ने अपने मालिक की धोती पकड़ ली और उसे उस जगह ले गया जहां लुटेरों ने चोरी का सामान छिपा रखा था.
चोरी का सामान पाकर व्यापारी बहुत खुश हुआ. उसने इनाम के तौर पर कुत्ते को आज़ाद किया और लाखा को लौटा दिया. गाँव वालों का कहना है कि जैसे ही कुत्ता लाखा के पास पहुँचा, खानाबदोश को लगा कि कुत्ते ने व्यापारी से किया वादा तोड़ दिया है. गुस्से में आकर उसने कुत्ते को गोली मार दी. जब उसे सच्चाई पता चली, तो उसे बहुत पछतावा हुआ. पश्चाताप के प्रतीक के रूप में उन्होंने भैरव बाबा मंदिर में कुत्ते के लिए समाधि बनवाई.
बारात खाली लौट चुकी थी , शादी के मेहमान भी सारे लौट चुके थे। इस बार शादी दहेज के लिए नहीं लड़की के सावले पन की वजह से टूटी थी। लड़की का बाप सबके पैरों मे गिरा था। आखिर बाप था बेटी का और बेटे से ज्यादा बेटी सम्मानित करती है बाप को और एक बाप हमेशा अपनी बेटी के कारण सम्मानित होना चाहता है।
सगाई के दिन तक लड़का को श्वेता (लड़की का नाम) पसंद थी मगर शादी के वक्त उसने लड़की को उसके सावलेपन के कारण छोड़ दिया। श्वेता के पिता खाली कुर्सीयो के बिच बैठकर बहुत देर तक रोते रहे। घर मे बस दो ही लोग , बाप और बेटी श्वेता। जब श्वेता पांच साल की थी तब माँ चल बसी थी। अचानक उन्हें ख्याल आया अपनी बेटी श्वेता का, कहीं बारात लौटने की वजह से मेरी बेटी…?s?????। दौड़कर जाते हैं श्वेता के कमरे की ओर.. मगर ये क्या.? श्वेता दो कप चाय लेकर मुस्कुराती हुई आ रही थी अपने पापा की ओर। दुल्हन के जोड़े की जगह घर मे काम करते पहनने वाले कपड़े थे शरीर पर। पापा हैरान उसको इस हालत मे देखकर ,
गम की जगह मुस्कुराहट , निराशा की जगह खुशी , कुछ समझ पाते इससे पहले श्वेता बोल पडी। बाबा चलो जल्दी से चाय पिओ और फटाफट ये किराये की पांडाल और कुर्सीया , बर्तन सब पहुँचा देते हैं जिनका है , वरना बेकार मे किराया बढ़ता रहेगा। इधर पापा के लिए श्वेता पहेली बन चुकी थी। बस पापा तो अपनी बेटी को खुश देखना चाहते थे ।
वजह कोई भी हो। इसलिए वजह नही पूछा उन्होंने। फिर वह बेटी से बोलते हैं :– बेटी.. चल गाँव वापस जाते है , यहां शहर मे अब दम घुटता है। श्वेता मान जाती है। फिर कुछ दिनों बाद वह शहर छोड़ गाँव वापस आ जाते हैं। गाँव मे वह मछली पकड़ने का काम करते थे मगर श्वेता की मां के गुजर जाने के बाद ।
उनकी यादों से पिछा छुड़ाने के लिए शहर जाकर मजदूरी का काम करते थे। अब फिर उन्होंने वही पेशा अपनाया था। श्वेता भी पहले की तरह अपने बाबा के साथ मछली मारने जाने लगी। इधर उस लड़के का एक खूबसूरत गोरी लड़की से शादी तय हो चुका थी , लड़का बेहद खुश था। मगर उसे भी शौक था कि दोस्तों के साथ शहर से दूर घूमने का।
एक दिन ऐसे ही घूमने निकले थे और नदी किनारे मजाक मस्ती कर रहे थे दोस्तो के साथ कि अचानक पैर फिसल कर गहरे पानी मे लड़का गिर जाता है। नदी का बहाव तेज भी था और गहरा भी। नदी लड़के को बहा ले जाती है। उसके दोस्त बचाने की बहुत कोशिश करते हैं , मगर सब व्यर्थ। इधर एक सुबह श्वेता के पापा अकेले नदी जाते हैं तो वहां रात को बिछाये उनके जाल में लड़का फँसा मिलता है ।
वह तुरंत अंधेरे मे ही लड़के को अपने कंधे पे उठाकर अपने घर लाते हैं। जंहा बहुत मसक्कत के बाद लड़के को होश आता है। मगर सामने श्वेता और उसके पापा को देखकर बहुत शर्मा जाता है और तुरंत यादश्त जाने की एक्टिंग करता है। पापा :– बेटी… लड़के को कुछ पता नहीं , शायद अपनी यादस्त खो चुका है और इसे कुछ चोटे भी आई हैं। मैं इसको शहर पहुँचा देता हूँ। श्वेता :– रहने दीजिए दो चार दिन पापा.!
जब घाव भर जायेगी तो तब छोड़ देना। पापा :– तू जानती है , ये कौन है.? श्वेता मुस्कुराकर अपने बाबा से लिपटकर कहती है.. क्यों नहीं बाबा , जानती हूँ। मगर वह पुरानी हैं बातें जो बीत चुकी हैं। अब नया ये है कि इनके घाव का इलाज किया जाये। वैसे भी इन्हें अब सावलेपन से कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये अपनी यादस्त खो चुके हैं। ये हमारे घर आये घायल मेहमान हैं , इसलिए इन्हें पूरी तरह ठीक करना हमारा धर्म है।
मगर श्वेता के पापा ने मुस्कुराहट के बिच भी बेटी के पलकों पर कुछ नमी महसूस जरूर की थी। इधर लड़का सारी बाते सुन लेता है। वह बेहद हैरान था इस वक्त। लड़के का इलाज शुरू होता है। इधर हर समय लड़की लड़के की देखभाल करती है। श्वेता के ख्याल रखने के तरीके को देखकर लड़के को प्यार हो जाता है श्वेता से।
हंसी मजाक तकरार होती रहती है दोनों में। एक दिन जब लड़के का घाव भर जाता है तो लड़का श्वेता से कहता है :– मैं कौन हूँ , कहां से आया , मेरा नाम क्या है , मैं कुछ नहीं जानता मगर तुम्हारा अपनापन देखकर मेरा यहीं रहने को दिल करता है हमेशा के लिए। श्वेता :– आप चिंता न करो , हमारे बाबा आपको कल शहर छोड़ देंगे और आपको गाड़ी की छत पर बिठाकर निचे लिख देंगे कि एक खूबसूरत नौजवान को माता पिता के घर का पता बताने वाले को एक लाख दिया जायेगा ।
लड़का :– मेरा मजाक उड़ा रही हो..? श्वेता :– अरे नहीं नहीं , हमारी इतनी औकात कहां जो हम किसी का मजाक उडा़ सकें। लड़का :– तुमने कभी किसी से प्यार किया है श्वेता.? श्वेता :– नहीं , मगर किसी एक को मैंने अपनी दुनिया मानी थी मगर उसने मुझे अपना बनाने से इंकार कर दिया। लड़का :– जरूर वह कोई पागल ही होगा जिसने तुम्हें ठुकराने की गलती की है। श्वेता :– नहीं नहीं , वह एक समझदार लड़का था ।
पागल होता तो मुझे जरूर अपना बनाता। लड़का :– यदि वह लड़का फिर से अपनी गलती को स्वीकार करके तुम्हें अपनाने आ जाये तो क्या उसे माफ करके उसके साथ शादी करोगी..? श्वेता के पापा दुसरे कमरे से दोनों की बातें सुन रहे थे। श्वेता :– गलती उनकी कुछ भी नहीं थी तो मैं कैसे बिना गलती के उन्हें माफ कर दूँ।
गलती तो मेरी थी। लड़का खुश होकर कहता है कि इसका मतलब तुम उस लड़के से शादी कर सकती हो.? श्वेता :– बिलकुल नहीं। अब दोबारा उनसे शादी के बारे मे सोच भी नहीं सकती। लड़का :– मगर क्यों..? अब फिर क्या उलझन है..? श्वेता कुछ देर खामोश रहती है और खिड़की की ओर देखने लगती है। शायद कुछ कहने से पहले खुद को सम्भालना चाहती थी। शायद पलकों पे दर्द पिघल रहा था।
अंदर उसके पापा भी हैरान चकित होकर वजह सुनने को बेताब हैं। लड़का पास जाकर श्वेता को अपनी तरफ करता है मगर श्वेता की पलकों पर आसुंओं का सैलाब देखकर कुछ कहने की हिम्मत नहीं होती। श्वेता अपनी पलको को उँगली से साफ करते हुए कहती है :– उस दिन मैंने अपने बाबा को उस इंसान के पैरों पर सर रखकर मेरे लिए गिडगिडाकर रोते हुये देखा था , मेरे उस बाप को जो मेरा अभीमान , मेरा घमंड है। पता है उस दिन मैं अकेले मे रोयी थी। बारात लौट चुकी थी।
लोग आस्ते आस्ते जा चुके थे , मगर एक शख्स ऐसा भी था जो अपनी बेटी के लिए सबके पैर पकड़ पकड़ कर थक सा गया था। वह सिर्फ अकेला बैठा था अपनी तक्दीर पर रोने के लिए। खिड़की से बहुत देर तक मेरे उस बेबस बाबा को नमी आखो से देखती रही जो मेरा सबकुछ था।
मैंने अचानक अपनी पलकों को पोंछा फिर ठीक से धोया और दुल्हन के वस्त्र खोलकर दूसरी पहन ली , फिर चाय बनाई। कितना मुश्किल था उस वक्त खुद के आसुंओ को रोकना। क्योंकि उस दिन मेरी जिंदगी लौटी थी मुझे एक लाश समझकर। ये लेख हिमाचली खबर से। जरूरी था मुस्कुराना , क्योंकि सामने वह शख्स था जो मेरे आँसू देखता तो शायद जी नहीं पाता।
मुझे मुस्कुराना था अपने बाबा के लिए , क्योंकि मेरी खूबसूरत राजगद्दी के मेरे बाबा , मेरे राजा हैं और मैं उनकी राजकुमारी। मुझे सावली मानकर एक शख्स ने ठुकरा दिया मगर मेरे बाबा मेरे लिए वह शख्स थे जब मेरे पाँच साल की उम्र मां गुजर गयी तब भी इन्होंने दूसरी शादी नहीं की ।
कहीं उनकी राजकुमारी को कोई दूसरी औरत आकर न सताये। अंदर श्वेता के पापा का बुरा हाल था। पहली बार वह अपनी बेटी के मुँह से वह दर्द की कहानी सुन रहे थे , जिस दर्द को बाप की खातिर झूठे मुस्कान की चादर से बेटी ने ढक के रखा था। मर्द था वह बाप मगर बेटी के दर्द ने मोम की तरह पिघला के रख दिया था। इधर श्वेता रोते रोते आगे कहती है
:– हर बेटी के अच्छे बाप की जिंदगी और मौत बेटी के पलकों पर छुपी होती है। जंहा बेटी मुस्कुराई वहाँ एक पिता को दोगुनी जिंदगी मिलती है और जंहा बेटी रोयी बाप एक तरह से मर ही जाता है। मैं सावली थी उनके लिए मगर मै अपने पापा के लिए एक परी, एक राजकुमारी हूँ। उन्होंने बारात लौटी दी मेरी दहलीज से , मगर मेरे पापा ने उस शहर को ठोकर मार दी जहाँ उनकी राजकुमारी का अपमान हुआ था।
अब आप ही सोचो , कैसे कर लूँ शादी दोबारा उस शख्स से जिसने मेरे खुदा को अपने कदमों मे झुकाया हो। माना सावली हूँ मैं मगर हूँ तो एक बेटी ही। लड़का पलके झूकाये सुनता रहा। सर उठाया तो वो भी रो रहा था एक सावली लड़की के दर्द को सुनकर। लड़के को कुछ नहीं सुझा तो अपने आप एक हाथ उठाकर श्वेता को सल्यूट कर बैठा और धीमे से कहा.. क्या मै तुम्हें एक बार गले से लगा सकता हूँ..? श्वेता कुछ नहीं कहती ।
मगर लड़का तुरंत श्वेता से गले लगकर बस इतना ही कहता है… भगवान करे मुझे एक सावली लड़की मिले। अरदास है मेरी कि मुझे तुम ही मिलो। फिर श्वेता को उसी हालत में छोड़ कर श्वेता के पिता के कमरे मे आता है। जंहा श्वेता के पिता बैठकर रो रहे थे। लड़के को देखकर अचानक खड़े हो जाते हैं।
मगर तब तब लड़का उनके पैरों मे गिरकर माफी माँगता है और खड़े होकर कहता है :– मेरी याददास्त बिलकुल ठीक है मगर आप ये बात श्वेता को मत बताना वरना ये गुनाह पहले गुनाह से बड़ा होगा , शायद मेरी याददास्त उस वक्त गयी थी जब मैंने श्वेता को ठुकराया था और आपको झुकाया था।
मैं कोई सफाई नहीं दूंगा अपनी बेगुनाही की। हाँ मैंने गुनाह किया है मगर कोई मुझे सजा तो दे… कहते कहते लड़का रोने लगता है। मुझे मेरे गुनाहो की सजा के रूप मे श्वेता दे दिजीए। मुझे आपकी परी चाहिए , आपकी राजकुमारी चाहिए। मैं इंतजार करूँगा कि कब मेरे गुनाहो की पैरवी होती है। उस दिन जज भी श्वेता होगी और वकील भी श्वेता।
सजा दे या रिहा करे… मैं बस उसका ही हूँ। इतना कहकर लड़का कहता है … बाबा अब आज्ञा दीजिए हमें। हम निकलते हैं , एक दिन और यंहाँ रहा तो मैं जी नहीं सकूँगा श्वेता का गुनाहगार बनके। लड़का निकल जाता है। श्वेता दूर तक जाते देखती रहती है अपनी जिंदगी को। मगर पलकों मे एक उम्मीद की नमी थी , उसके वापस आने की। क्योंकि श्वेता , लड़के और अपने बाबा की बात सुन चुकी थी।
बाबा :- – श्वेता तू एक बार और सोच ले क्योंकि वह पश्चाताप की आग मे जल रहा है। तेरी खुशी किसमे है पता नहीं मगर मेरी खुशी तो तू है और तेरे बाबा का दिल कहता है कि चल फिर तुझे सजा दू दुल्हन के रूप मे उसी लड़के के साथ जिसने तूझे सावली कहा था।
श्वेता :– बाबा.. हम तो बस आपको खुश देखना चाहते हैं , लोग जितना भी नफरत क्यों न करे हमसे। जीतना भी सतायेगा क्यों न , हमें कोई फर्क नहीं पड़ता मगर जिस दिन आपको दुखी देखा मैंने उस दिन टूट जाउगी मै। इधर श्वेता बाप की खुशी मे तैयार हो जाती है। उधर लड़का अपने मा बाप को लाता है। लड़का जिद करता है कि शादी शहर में हो , उसी घर मे हो जहाँ से मैंने मेरी सावली को ठुकराया था। इसके बाद दोनों की शादी हो गई। तो दोस्तों किसी के रंग पर जाकर उसे जज नहीं करना चाहिए। कहानी अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करना।
मंडप में सांवली लड़की देख लड़के ने तोड़ी शादी. किस्मत ऐसी पलटी की लड़की के आगे गिड़गिड़ाया लड़का
नूंह | हरियाणा के नूंह के रहने वाले राजेश जिंदल (Rajesh Jindal) ने दुर्लभ प्रजाति की दो गायों को खरीदा है, जो अब आसपास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है. तावडू के रहने वाले राजेश जिंदल ने कुछ दिनों पहले ही फेसबुक पर एक पोस्ट देखी थी, जिसमें डेढ़ फुट से 2 फुट के गोवंश के बारे में जिक्र किया गया था, उनकी हाइट मात्र 22 इंच थी. उन्होंने इसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से पता लगाया कि खुद प्रधानमंत्री मोदी भी इस दुर्लभ पुंगनूर गोवंश प्रजाति को बचाने की अपील कर चुके हैं.
6 लाख रूपए में खरीदी गाय
उन्होंने निर्णय लिया कि वह भी इसी नस्ल के गौवंश को घर लाएंगे. वह एक साथी को लेकर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में पहुंच गए और वहां से एक गौशाला में पल रहे अद्भुत नस्ल के गोवंश को 6 लाख रूपए में खरीद लिया.
सिर्फ 22 इंच की ये खास नस्ल की दो गायें बनीं इंटरनेट सेंसेशन, देखने के लिए उमड़ पड़ा गांव से शहर तक का मेला
राजेश जिंदल ऐसा दावा करते हैं कि दुर्लभ पुंगनूर नस्ल की गोवंश को लाने का प्रदेशभर में यह ऐसा पहला मामला है. इन गोवंशों की उम्र महज 19 महीने है. इनकी चर्चा आसपास के इलाकों में इतनी ज्यादा हो चुकी है कि रेवाड़ी गोकुलपुरा धाम के महंत धीरज गिरी महाराज, पूर्व राज्य मंत्री कुंवर संजय सिंह, मनोनीत पार्षद सतपाल सहरावत समेत तमाम लोग इनके दर्शन करने आ चुके हैं. स्वयं महंत धीरज गिरी महाराज ने भी इसी नस्ल के गौवंशों को मंगवाने की मांग की है.
गुणों से भरपूर हैं ये गौवंश
यह नल शारीरिक रूप से बेहद छोटी होती है, लेकिन यह अब विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी है. छोटे कद और दुर्लभ गुणों के चलते यह काफी प्रसिद्ध प्रजाति मानी जाती है. इस नस्ल के गौवंशों का मूत्र और गोबर बेचकर भी अच्छे खासे पैसे कमाए जा सकते हैं.
एक गाँव के एक जमींदार ठाकुर बहुत वर्षों से बीमार थे। इलाज करवाते हुए कोई डॉक्टर कोई वैद्य नहीं छोड़ा कोई टोने टोटके करने वाला नहीं छोड़ा।
लेकिन कहीं से भी थोड़ा सा भी आराम नहीं आया !
एक संत जी गाँव में आये उनके दर्शन करने वो ज़मींदार भी वहाँ गया और उन्हें प्रणाम किया।
उसने बहुत दुखी मन से कहा – महात्मा जी मैं इस गाँव का जमींदार हूँ का सैंकड़ों बीघे जमीन है इतना सब कुछ होने के बावजूद मुझे एक लाइलाज रोग है जो कहीं से भी ठीक नहीं हो रहा !
महात्मा जी ने पूछा भाई, क्या रोग है आपको।
जी मुझे मल त्याग करते समय बहुत खून आता है और इतनी जलन होती है जो बर्दाश्त नहीं होती। ऐसा लगता है मेरे प्राण ही निकल जायेंगे। आप कुछ मेहरबानी करो।
महात्मा जी बाबा ने आँख बंद कर ली शांत बैठ गये थोड़ी देर बाद बोले -बुरा तो नहीं मानोगे एक बात पूछूँ ?
नहीं महाराज पूछिये !
तुमने कभी किसी का दिल इतना ज़्यादा तो नहीं दुखाया कि उसने तुम्हें जी भरके बद्दुआऐं दी हों जिसका दण्ड आज तुम भोग रहे हो? तुम्हारे दुःख देने से वो इतना अधिक दुखी हुआ हो जिसके कारण आज तुम इतनी पीड़ा झेल रहे हो ?
नहीं बाबा !
जहाँ तक मुझे याद है, मैंने तो कभी किसी का दिल नहीं दुखाया।
याद करो और सोचो कभी किसी का हक तो नहीं छीना, किसी की पीठ में छुरा तो नहीं मारा किसी की रोज़ी रोटी तो नहीं छीनी? किसी का हिस्सा ज़बरदस्ती, तुमने खुद तो नहीं संभाला हुआ ?
महात्मा जी की बात पूरी होने पर वो ख़ामोश और शर्मसार हो कर बोला।
जी मेरी एक विधवा भाभी है जो कि इस वक्त अपने मायके में रहती है वो जमीन में से अपना हिस्सा मांगती थी।
यह सोचकर मैंने उसे कुछ भी नहीं दिया कि कल को ये सब कुछ अपने भाईयों को ही दे देगी, इसका क्या पता ?
बाबा ने कहा -आज से ही उसे हर महीने सौ रूपए भेजने शुरू करो ! यह उस समय की बात है जब सौ रूपए में पूरा परिवार पल जाता था !
उसने कुछ रूपए भेजना शुरू कर दिया ! दो तीन हफ़्तों के बाद उसने बाबा से आकर कहा – जी मै पचहत्तर प्रतिशत ठीक हूँ ! महात्मा जी ने सोचा कि इसे तो पूरा ठीक होना चाहिये था ऐसा क्यों नहीं हुआ ?
उससे पूछा तुम कितने रूपए भेजते हो ?
जी पचहत्तर रूपए हर महीने भेजता हूँ
इसी कारण तेरा रोग पूरा ठीक नहीं हुआ !
सन्त जी ने कहा, उसका पूरा हक उसे इज़्जत से बुला कर दे दो, वो अपने पैसे को जैसे मर्जी खर्च करे, अपनी ज़मीन जिसे चाहे दे दे । यह उसकी मिल्कीयत है इसमें तुम्हारा कोई दख़ल नहीं है ! जानते हो वो कितना रोती रही है, जलती रही है तभी आपको इतनी जलन हो रही है।
ज़रा सोचो, मरने के बाद हमारे साथ क्या जायेगा ?
ज़मींदार को बहुत पछतावा हुआ। उसने फौरन ही अपनी विधवा भाभी और उसके भाईयों को बुलाकर, सारे गाँव के सामने, उसकी ज़मीन, उसके हक का पैसा उसे दे दिया और हाथ जोड़कर अपने ज़ुल्मों की माफी माँगी।
उसकी भाभी ने उसे माफ कर दिया और उसके परिवार को खूब आशीर्वाद दिये
जमींदार का रोग शीघ्र ही पूरी तरह से ठीक हो गया !
अगर आपको भी ऐसा कोई असाध्य रोग है तो ज़रूर सोचना, कहीँ मैंने किसी का हक तो नहीं छीना है ? किसी की पीठ में छुरा तो नहीं घोंपा है ? किसी का इतना दिल तो नहीं दुखाया हुआ कि वो बेचारा इतना बेबस था कि तुम्हारे सामने कुछ कहने की हिम्मत भी ना कर सका होगा ?
लेकिन उस बेचारे के दिल से आहें निकली होंगी जो आपके अंदर रोग पैदा कर रही है जलन पैदा कर रही हैं।
इन दिनों भारत और पाकिस्तान के बीच माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है. दुनिया भर के एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि आने वाले समय में ये दोनों देश आमने-सामने युद्ध के मैदान में उतर सकते हैं.
सिर्फ यही नहीं, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे कई एशियाई देशों में भी असंतोष और अशांति का माहौल देखा जा रहा है. यूरोप के हालात भी ठीक नहीं हैं, जबकि यूक्रेन और रूस के बीच जंग जारी है.
इसी बीच दुनिया के सबसे मशहूर भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस की एक पुरानी भविष्यवाणी एक बार फिर चर्चा में आ गई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है.
नास्त्रेदमस ने भविष्यवाणी की थी कि भारत को अपनी सेना मजबूत करनी चाहिए, वरना उसका दुश्मन उसे आश्चर्यचकित कर सकता है. उन्होंने संकेत दिए कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध की स्थिति बन सकती है, अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई.
नास्त्रेदमस ने भविष्यवाणी की थी कि साल 2025 में भीषण गर्म हवाएं चलेंगी और दुनिया जलवायु परिवर्तन से बुरी तरह प्रभावित होगी. खासकर यूरोप में इसका असर बहुत ज्यादा दिखाई देगा.
सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाली बात यह है कि नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों में हिंदू धर्म के उत्थान और भारत के विश्वगुरु बनने की बात भी कही गई है. उन्होंने लिखा है कि:
एक महान हिंदू नेता दक्षिण भारत से उभरेगा, जो पूरी दुनिया पर असर डालेगा.
यह नेता गुरुवार के दिन को पवित्र मानेगा और पूजा-पाठ से जुड़ा रहेगा.
यह दक्षिण भारतीय नेता शांति के साथ-साथ शत्रुओं का सफाया भी करेगा.
भारत की संस्कृति, योग और वेदांत पूरी दुनिया में फैलेंगे.
रूस जैसे शक्तिशाली देश भी हिंदू धर्म को अपनाने में आगे आएंगे.
उन्होंने अपनी एक कविता (Quatrain 95, Century III) में लिखा: ‘The creed of the Moor will perish, Followed be another more popular still, The Dnieper will be the first to relish, The wisdom which imposes its will.’
इसका मतलब निकाला जा रहा है कि एक पुराना धर्म खत्म होगा और उसकी जगह एक नया, ज्यादा लोकप्रिय धर्म उभरेगा और यह धर्म हिंदू संस्कृति से जुड़ा होगा. नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी साफ कहती है कि 21वीं सदी भारत की होगी. भारत न सिर्फ एक ताकतवर देश के रूप में उभरेगा, बल्कि उसकी संस्कृति, ज्ञान और दर्शन पूरी दुनिया में फैलेगा. योग और वेदों की बातें हर कोने में सुनाई दें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Himachali Khabar इसकी पुष्टि नहीं करता है।