Category: Dharam

  • पूजा घर से आज ही हटा लेंˈ ये चीजें वरना हो जाएंगे कंगाल छीन जाएगी सुख-शांति भी घर कीˌ

    पूजा घर से आज ही हटा लेंˈ ये चीजें वरना हो जाएंगे कंगाल छीन जाएगी सुख-शांति भी घर कीˌ

    पूजा घर से आज ही हटा लेंˈ ये चीजें वरना हो जाएंगे कंगाल छीन जाएगी सुख-शांति भी घर कीˌ

    हमारे घर में स्थित पूजा घर सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इसी स्थान से मिलने वाली ऊर्जा से घर संचालित होता है। हमारे घर का मंदिर वह स्थान होता है जहां से सबसे अधिक सकारात्मक ऊर्जा निकलती है, जिसका प्रभाव घर के सभी सदस्य और घर की बरकत पर पड़ता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर में रखी हर एक चीज का विशेष महत्व है। देवी-देवताओं के इस घर में यदि छोटी सी भी गलती हो जाए तो जीवन में कई बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    अगर पूजा घर में कोई भी गड़बड़ी होती है, तो इससे बड़ा नुकसान हो सकता है। ऐसी स्थिति में बहुत ही आवश्यक है कि पूजा घर से जुड़े कुछ जरूरी वास्तु नियमों को जान लीजिए। वास्तु के अनुसार, पूजा घर में कभी भी कोई ऐसी चीज नहीं रखनी चाहिए जिससे नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है। आज हम आपको पूजा घर से कौन सी चीजें तुरंत हटा देनी चाहिए, इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

    पूजा घर से हटा दें ये चीजें

    रौद्र रूप वाली मूर्ति-तस्वीरें

    वास्तु शास्त्र में इस बात का जिक्र मिलता है कि पूजा घर में कभी भी देवी-देवताओं की रौद्र रूप वाली तस्वीरों या मूर्तियों को नहीं रखना चाहिए। माना जाता है कि तस्वीर या मूर्ति रखने से अनिष्ट होता है। अगर आप यह गलती करते हैं, तो इसके कारण घर की सुख-शांति छिन जाती है। ऐसा करने से घर में लड़ाई झगड़े बढ़ने लगते हैं। घर में हमेशा अशांति का वातावरण ही फैला रहता है। अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में कोई कलह ना हो और सुख-शांति बनी रहे, तो इसके लिए पूजा घर में हमेशा देवी देवताओं के सौम्य रूप वाली आशीर्वाद देती हुई मूर्ति व तस्वीरें ही रखें।

    खंडित मूर्तियां

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर में कभी भी टूटी या खंडित मूर्ति नहीं रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि ऐसी मूर्तियां रखने से पूजा का फल प्राप्त नहीं हो पाता है और नकारात्मक ऊर्जा अधिक फैलती है। आपको हमेशा पूजा घर में भगवान की अच्छी और सुंदर मूर्तियां या तस्वीरें ही रखना चाहिए ताकि उनके दर्शन करके सकारात्मक और सुकून का एहसास हो सके।

    एक से अधिक मूर्तियां

    अक्सर देखा गया है कि लोग घर के मंदिर में एक ही देवी-देवता की कई तस्वीरें या मूर्ति रख लेते हैं परंतु ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि ऐसा करने से बुरा असर पड़ता है। विशेष तौर पर पूजा घर में दो शिवलिंग भूलकर भी नहीं रखना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति ऐसी गलती करता है तो इसकी वजह से घर की सुख-समृद्धि छिन जाती है।

    आमने-सामने ना रखें देवी-देवताओं की तस्वीरें

    वहीं भूलकर भी देवी-देवताओं की मूर्ति या तस्वीर आमने-सामने नहीं रखना चाहिए क्योंकि इसके कारण घर में झगड़े-कलह होने लगते हैं। इसके अलावा देवी-देवता को कभी भी खंडित अक्षत यानि टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाने चाहिए। अगर मंदिर में ऐसे चावल हैं, तो उन्हें हटाकर साबुत चावल रख दें। वहीं पूजा घर में पितरों की तस्वीर लगाने से अशुभ प्रभाव पड़ता है।

  • महिलाओं के पायल पहनने के पीछे भीˈ छुपा है गहरा राज़ जिसे हर कोई नहीं जनताˌ

    महिलाओं के पायल पहनने के पीछे भीˈ छुपा है गहरा राज़ जिसे हर कोई नहीं जनताˌ

    महिलाओं के पायल पहनने के पीछे भीˈ छुपा है गहरा राज़ जिसे हर कोई नहीं जनताˌ

    पैरों में पहनी जानी वाली पायल 16 श्रृंगार में से एक ये भी माना गया हैं, पायल पैरों की खूबसूरती तो बढ़ाती ही हैं साथ ही साथ ये स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी हैं !   वास्तुशास्त्र के मुताबिक भी पायल पहनाना शुभ माना गया हैं , कहा जाता हैं की पायल के स्वर से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो  जाती हैं ! पुराने  समय से  ही पायल को महिलाओं के लिए विशेष माना गया हैं ! इसका अर्थ पुराने समय में ये  होता था की  पायल के संकेत  से पता चल जाता था की वो कही जा रही हैं !

    पायल पैरों की खूबसूरती तो बढ़ाती ही हैं साथ ही साथ पायल पहनने से महिलाओं के  शरीर को भी लाभ मिलता हैं ! अगर महिलाएं सोने,चाँदी की चीजें पहनती हैं जिससे चलने या हिलने के कारण शरीर से रगड़ती हैं ! तो शरीर की हड्डियाँ काफी मजबूत हो जाती हैं ! परन्तु पायल हमेशा चाँदी की ही पहने ये अधिक शुभ मानी  जाती हैं और साथ ही साथ वास्तुशास्त्र के अनुसार सोने को पैरों में कभी भी नही पहनना चाहिए ! सोना हमेशा हाथों या गले में ही पहने ये शुभ माना जाता हैं !

     चांदी  ठंडी धातु  होती है,  आयुर्वेद के मुताबिक इंसान का सिर ठंडा और पैर गर्म होना चाहिए !इसलिए शरीर के ऊपरी हिस्से में सोना और पैरों में चांदी पहनी जाती है ! इससे सिर से उत्पन्न गर्म ऊर्जा पैरों में और पैरों से पैदा हुई ठंडी ऊर्जा सिर में चली जाती है जिससे पूरे शरीर का तापमान संतुलित रहता है !

    हिंदू धर्म की मान्यताओं के  अनुसार पायल पहनना काफी शुभ माना जाता हैं , जबकि वास्तुशास्त्र के अनुसार पायल की आवाज से घर की नकारात्मक शक्तियां कम हो जाती है और दैवीय शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं, इसलिए घर की नकारात्मकता को दूर भगाने के लिए भी पायल पहनना जरूरी होता है !

    महिलाओं के पैरों में पायल पहनने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, कहा जाता है कि पायल की आवाज से घर के पुरुषों को पहले ही पता चल जाता था कि घर की कोई महिला उनकी तरफ आ रही है और वो उनके आने से पहले सतर्क हो जाते थे !

    महिलाओं के पायल की आवाज पुरुषों को किसी भी असहज होने वाली स्थिति से बचा लेती थी!

    पुराने समय में स्त्रियों को पति के घर में कहीं आने-जाने के लिए पूरी स्वतंत्रता नहीं रहती थी !साथ ही, वह किसी से खुलकर बात भी नहीं कर पाती थी ! ऐसे में जब वह घर में कही आती-जाती तो बिना उसके बताए भी पायल की आवाज से सभी सदस्य समझ जाते थे कि उनकी बहु वहां आ रही है या कहीं जा रही है!

    आधुनिक युग में भी महिलाएं और कुवारी लड़कियाँ पायल पहनती हैं !आज भी ये परम्परा निभाई जा रही हैं ! कई लडकियाँ फ़ैशन के तौर से एक पैर में भी पायल पहनती हैं !

  • भूलकर भी इन 5 लोगों के पैरˈ मत छूना ऐसा करने से लगता है पाप बर्बाद हो जाएंगेˌ

    भूलकर भी इन 5 लोगों के पैरˈ मत छूना ऐसा करने से लगता है पाप बर्बाद हो जाएंगेˌ

    भूलकर भी इन 5 लोगों के पैरˈ मत छूना ऐसा करने से लगता है पाप बर्बाद हो जाएंगेˌ

    भारतीय संस्कृति में बहुत ही परंपराएं प्राचीन काल से ही चली आ रही हैं, जिनको भारतीय संस्कृति में आज तक निभाया जाता है। इन्हीं परंपराओं में से एक चरण स्पर्श करना है। ऐसी मान्यता है कि अगर व्यक्ति अपने दिन की शुरुआत बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर करता है, तो इससे उसका पूरा दिन बहुत ही अच्छा बीतता है।

    भारतीय संस्कृति में बड़े बुजुर्गों के पैर छूने की महान परंपरा है, जो शिष्टाचार और दूसरों का सम्मान करने का प्रतीक होता है। लेकिन वैदिक शास्त्र में ऐसा बताया गया है कि कुछ लोगों के पैर छूना वर्जित होता है। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है, तो उसे पाप लगता है और अशुभ फलों का भागी भी बनना पड़ता है। आखिर किन लोगों के और किन जगहों पर दूसरों के पैर नहीं छूने चाहिए, चलिए हम आपको इस विषय में बताते हैं।

    मंदिर में नहीं छूना चाहिए किसी के पैर

    हम सभी अक्सर मंदिर में भगवान की पूजा अर्चना करने जाते हैं। अगर आप कभी मंदिर में पूजा करने के लिए गए हों और वहां पर आपको कोई सम्मानित व्यक्ति या बड़ा बुजुर्ग मिल जाए तो आप उनके पैर गलती पर भी ना छुएं। जी हां, इसके पीछे का कारण यह है कि मंदिर में भगवान से बड़ा कोई भी व्यक्ति नहीं होता है। ऐसे में अगर आप भगवान के सामने किसी मनुष्य के पैर छूते हैं, तो यह ईश्वर और मंदिर दोनों का अपमान माना जाता है। इससे दोनों को ही पाप लगता है। इसलिए आपको इस बात का ध्यान रखना होगा।

    सोते हुए व्यक्ति के चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए

    ऐसा व्यक्ति जो सो रहा हो या फिर लेटा हो, तो उसके बिल्कुल भी चरण स्पर्श ना करें क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से उस व्यक्ति की उम्र घट जाती है। वैदिक शास्त्र के अनुसार देखा जाए तो सिर्फ मृत व्यक्ति के ही लेटे हुए अवस्था में चरण स्पर्श किया जा सकता है। इसलिए आप ऐसी गलती भूल कर भी मत कीजिए अन्यथा पाप के भागी बन जाएंगे।

    श्मशान से लौटे व्यक्ति के पैर छूना नहीं चाहिए

    श्मशान में या शमशान घाट से लौट रहे व्यक्ति के पैर भूलकर भी नहीं छूना चाहिए क्योंकि अंतिम संस्कार से लौटने पर व्यक्ति अशुद्ध हो जाता है। ऐसे में उसके पैर छूना वर्जित है। जब वह व्यक्ति स्नान कर ले, तो उसके बाद आप उसके पैर छू सकते हैं।

    पत्नी के पैर नहीं छूना चाहिए

    शास्त्रों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि पत्नी को अपने पति के चरण स्पर्श करने चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जो पत्नी ऐसा करती है, इससे उसके परिवार का सौभाग्य बढ़ता है। लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पति को भूलकर भी पत्नी के पैर नहीं छूना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से परिवार पर संकट के बादल छाने की संभावना रहती है। इतना ही नहीं बल्कि परिवार को आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।

    बेटी से नहीं छुआना चाहिए पैर

    किसी भी पिता को अपनी बेटियों से पैर नहीं छूआना चाहिए। धार्मिक विद्वानों के मुताबिक, किसी भी पिता को अपनी बेटी, भतीजी, नतिन या पोती से पैर नहीं छूआने चाहिए क्योंकि यह सब देवियों का बाल रूप होती हैं। इससे पिता को पाप लगता है।

  • सांप के बिल से लेकर तोता तकˈ अच्छे भाग्य और बेशुमार दौलत का संकेत देते हैं ये 7 सपनेˌ

    सांप के बिल से लेकर तोता तकˈ अच्छे भाग्य और बेशुमार दौलत का संकेत देते हैं ये 7 सपनेˌ

    सपने सभी को आते हैं। हर कोई इन्हें बंद आँखों से देखता है। ये सपने अच्छे, बुरे या डरावने हो सकते हैं। जब भी हमे कोई सपना आता है तो मन में विचार जरूर आता है कि आखिर इस सपने का क्या मतलब है। कहीं ये सपना हमे किसी बात का संकेत तो नहीं दे रहा है। स्वप्न शास्त्र की माने तो सपने में कुछ खास चीजों का दिखना अच्छी या बुरी किस्मत का संकेत होता है। आज हम आपको उन चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें सपने में देखने का मतलब है आपको भाग्य और पैसा मिलने वाला है।

    सांप के बिल से लेकर तोता तकˈ अच्छे भाग्य और बेशुमार दौलत का संकेत देते हैं ये 7 सपनेˌ

    तोता

    स्वप्न शास्त्र की माने तो सपने में तोता दिखना काफी शुभ माना जाता है। यदि ये सपने में दिख गया तो समझ जाइए कि आपके करियर में उछाल आने वाला है। आपको नौकरी में प्रमोशन मिलने वाला है। आपको बीजनेस में बड़ा मुनाफा होने वाला है। आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आने वाली है।

    जलता हुआ दीपक

    दीपक को हिंदू धर्म में काफी शुभ और पवित्र चीज माना जाता है। किसी भी देवी या देवता को प्रसन्न करने के लिए हम इसे प्रज्वलित करते हैं। यह घर में पॉजिटिव एनर्जी भी बढ़ाता है। सपने में दीपक देखना काफी शुभ माना जाता है। इसे देखने का मतलब है कि आपको जल्द कोई बड़ा धन लाभ होने वाला है।

    सांप का बिल

    सपने में सांप का बिल देखना भी शुभ संकेत होता है। सांप को शिवजी से जोड़ा जाता है। इसे सपने में देखने का अर्थ है कि आपको जल्द कोई बड़ा धन लाभ होने वाला है। आपको उधार का पैसा मिल जाएगा। पैसा निवेश करने पर लाभ होगा। रिश्तेदारों से पैसों की प्राप्ति होगी। घर बैठे पैसा मिलेगा।

    गुलाब का फूल

    सपने में गुलाब का फूल दिखाई देना भी शुभ माना जाता है। गुलाब के फूल को मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। लाल रंग का गुलाब मां लक्ष्मी का प्रिय होता है। इसे सपने में देखने का अर्थ है कि मां लक्ष्मी की कृपा आपके ऊपर बरसने वाली है। आपके घर खुशियों की बहार आने वाली है।

    फल से लदा पेड़

    सपने में यदि आप फल से भरा हुआ पेड़ देख लें तो ये भी बड़ा शुभ माना जाता है। इस सपने का अर्थ है कि आपको जल्द धन की बड़ी प्राप्ति होने वाली है। आपका अटका हुआ पैसा वापस मिलने वाला है। बिगड़े हुए काम बनने वाले हैं। घर में पैसों की आवक बढ़ने वाली है।

    गोल्ड

    सपने में सोना यानि गोल्ड देखने भी शुभ माना जाता है। इसका मतलब है कि आपके ऊपर मां लक्ष्मी की कृपा आने वाली है। आप जल्द अमीर बनने वाले हैं। आपकी तिजोरी धन से भरने वाली है। आपको घर बैठे कहीं से बड़े धन की प्राप्ति होने वाली है।

    देवी देवता

    सपने में देवी-देवताओं को देखना अत्यंत शुभ होयता है। इसका मतलब है कि आपको जल्द कोई बड़ी खुशखबरी मिलने वाली है। आपको भविष्य में बड़े धन की प्राप्ति होने वाली है। आपकी लाइफ में सुख बढ़ने वाला है। भगवान का आशीर्वाद आपके ऊपर रहने वाला है। सभी काम अच्छे से होने वाले हैं।

  • 100 साल से भी ज्यादा जिओगे बसˈ ये खास उपाय कर लो पंडित प्रदीप मिश्रा का बड़ा दावाˌ

    100 साल से भी ज्यादा जिओगे बसˈ ये खास उपाय कर लो पंडित प्रदीप मिश्रा का बड़ा दावाˌ

    100 साल से भी ज्यादा जिओगे बसˈ ये खास उपाय कर लो पंडित प्रदीप मिश्रा का बड़ा दावाˌ

    एक जमाना हुआ करता था जब इंसान 100 साल तक जीता था। लेकिन आज के जमाने में लोग 70 की उम्र पार कर जाए वही बड़ी बात होती है। हमारी खराब जीवनशैली और खान-पान ने हमारी आयु पर बड़ा बुरा असर डाला है। लेकिन यदि आप आज के जमाने में 100 साल तक जीने की इच्छा रखते हैं तो आपको ईश्वर की शरण में जाना होगा। उनकी भक्ति कर उनसे दीर्घायु का आशीर्वाद लेना होगा। ये बात हम नहीं कह रहे बल्कि सीहोर के रहने वाले आध्यात्मिक गुरु पंडित प्रदीप मिश्रा बोल रहे हैं।

    पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया 100 साल जीने का उपाय

    पंडित प्रदीप मिश्रा भक्तों के बीच बड़े पॉपुलर रहते हैं। वह शिव भगवान के बड़े भक्त हैं। वह जीवन की कई समस्याओं के निवारण के लिए शिवजी से जुड़े उपाय बताते हैं। लंबी आयु पाने के लिए भी उन्होंने कुछ खास उपाय बताए हैं। आज हम आपको उन्ही में से कुछ उपाय बताने जा रहे हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा यह दावा करते हैं कि इन उपायों को आजमाने के बाद आप 100 साल तक जी सकेंगे। तो चलिए जानते हैं कि आपको ऐसा क्या करना होगा।

    पंडित प्रदीप मिश्रा का कहना है कि दीर्घायु पाने के लिए आपको रोज शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव को जल चढ़ाना चाहिए। इस दौरान उनसे लंबी उम्र का वरदान मांगना चाहिए। शिवजी से ऐसी प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमारे शरीर को इस तरह बना दें कि वह इसी तरह 100 सालों तक भगवान को जल अर्पित करते रहें। आप महादेव से प्रार्थना करें कि उनके मंदिर में आप इसी तरह अगले 100 सालों तक भजन कीर्तन करते रहें। उनके गुणगान यूं ही गाते रहें।

    शिवजी के आगे लगानी होगी ऐसी अर्जी

    पंडित प्रदीप मिश्रा का कहना है कि आपको शिवजी से जल चढ़ाते समय ये भी मांगना होगा कि आपको वह शिव भक्ति करते रहने के लिए हमेशा निरोगी बनाए रखें। आप को कभी अस्पताल न जाना पड़े। आप किसी दुर्घटना का शिकार न बनें। पंडित प्रदीप मिश्रा का दावा है कि यदि एक बार आपकी अर्जी भगवान के दरबार में स्वीकृत हो गई तो आपको 100 सालों तक जीने से कोई नहीं रोक सकता है। आपको शिवजी की कृपा से दीर्घायु का वरदान प्राप्त हो जाएगा।

    जल अर्पित करने के अलावा आपको महादेव को जल, दूध, भांग, शहद, चंदन और बेलपत्र जैसी चीजें चढ़ानी चाहिए। आप जब भी महादेव से लंबी उम्र की प्रार्थना करें तो उन्हें ये सारी चीजें जरूर चढ़ाएं। इससे आपको उनका आशीर्वाद मिलेगा। आप इन चीजों को चढ़ाने के लिए सालों साल जीवित रहेंगे।

    अब पंडित प्रदीप मिश्रा का उपाय सोशल मीडिया पर बड़ा वायरल हो रहा है। इस पर लोग अपनी अलग अलग प्रातक्रियाएं भी दे रहे हैं। किसी को ये बात सच्ची लग रही है तो कोई कह रहा है कि 100 साल जीना संभव नहीं है। इसलिए लिए आपको हेल्थी लाइफ स्टाइल जीना होगा। वैसे इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है हमे कमेंट कर जरूर बताएं।

  • बुरी नजर से परेशान है घर? जानिएˈ इसके 5 साफ़ संकेत और तुरन्त असरदार समाधान. Nazar Dosh Upayˌ

    बुरी नजर से परेशान है घर? जानिएˈ इसके 5 साफ़ संकेत और तुरन्त असरदार समाधान. Nazar Dosh Upayˌ

    बुरी नजर से परेशान है घर? जानिएˈ इसके 5 साफ़ संकेत और तुरन्त असरदार समाधान. Nazar Dosh Upayˌ

    Nazar Dosh Upay: बुरी नजर अच्‍छे-भले जीवन को तबाह कर सकती है. घर पर लगी बुरी नजर मुसीबतों का अंबार लगा देती है. जानिए, बुरी नजर के लक्षणों को कैसे पहचानें और कैसे उससे निजात पाएं.Nazar Dosh ke Lakshan and Upay: बुरी नजर लगना घर में, जीवन में नकारात्‍मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ना है. ये आपके जीवन में मुसीबतों का अंबार लगा सकती है. बुरी नजर कई अनचाही घटनाओं का कारण बनती है. व्‍यक्ति की ऊर्जा कम हो जाती है, हमेशा थकान, उदासी महसूस होती है. बनते काम बिगड़ जाते हैं. चौतरफा हानि होती है. समय रहते बुरी नजर से निजात पाने के उपाय कर लेने चाहिए. आइए जानते हैं कि बुरी नजर या नजर दोष के लक्षण और उससे निजात पाने के उपाय.

    बुरी नजर या नजर दोष के लक्षण

    – यदि हर समय बिना किसी कारण के सिर में दर्द बना रहता है. भारीपन रहता है. बिना किसी बीमारी के यदि ऐसा हो तो यह बुरी नजर का लक्षण हो सकता है.

    – अचानक जीवन में निराशा महसूस होने लगे, हर समय उदासी लगे, तनाव रहे. नींद ना आए, बिना वजह घबराहट हो तो यह बुरी नजर लगने का संकेत है.

    – सकारात्‍मक व्‍यक्ति भी नजर दोष के कारण नकारात्‍मक हो जाता है. उसे कुछ अच्‍छा नहीं लगता है और हर समय थका व निराश महसूस करता है.

    – घर पर बुरी नजर का साया हो तो हर समय घर में झगड़े-कलह होते हैं. बिना वजह सदस्‍यों में वाद-विवाद होते रहते हैं.

    – घर के लोग कितनी भी मेहनत करें, उन्‍हें सफलता नहीं मिलती. काम बनते-बनते रह जाते हैं. तरक्‍की नहीं होती.

    – बीमारी, चोरी और कई बार बिना कारण ही धन हानि होती है.

    – बच्‍चे को नजर लग जाए तो वह बीमार पड़ जाता है. बच्‍चा कुछ खाता-पीता नहीं है और बिना बात के रोता रहता है.

    नजर दोष से निजात पाने के उपाय

    – नजर दोष से बचाव के लिए बुधवार को सप्त धान्य यानी सात प्रकार के अनाज का दान करना चाहिए. नजर दोष से बचाव के लिए घर में राहु यंत्र की स्‍थापना करके उसकी पूजा करें. इससे नकारात्‍मक शक्तियां दूर रहती हैं.

    – यदि बार-बार नजर लगती है तो नौ मुखी रुद्राक्ष धारण कर लें.

    – बुरी नजर उतारने के लिए या बचाव के लिए भैरव मंदिर में मिलने वाला काला धागा गले या हाथ में धारण करें.

    – जिस घर में रोजाना पूरे भक्ति-भाव से हनुमान चालीसा का पाठ होता है, वहां पर कभी नजर दोष नहीं ठहरता.

    – बुरी नजर उतारने के लिए हनुमान जी के मंदिर में जाकर उनके कंधों का सिंदूर माथे पर लगाएं.

    – तुरंत बुरी नजर उतारना हो तो एक रोटी बनाएं और उसे केवल एक तरफ से ही सेंकें. फिर उस रोटी के सिके हुए हिस्‍से पर तेल लगाकर उस पर लाल मिर्च और नमक डालें. फिर इस रोटी को नजर दोष से पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से 7 बार घुमाकर चुपचाप से किसी चौराहे पर रख आएं.

    – नजर उतारने का सबसे प्रचलित तरीका है कि 2 लाल सूखी मिर्च, थोड़ा सेंधा नमक, थोड़े सरसो के बीज लें. फिर इसे नजर लगे व्‍यक्ति के सिर के ऊपर से 7 बार वारकर आग में जला दें. कुछ ही देर में राहत मिल जाएगी.

    – यदि आग से नहीं जला पा रहे हों तो थोड़ा सा नमक और राई के दाने लें. जिस व्‍यक्ति को नजर लगी हो, उसके सिर के ऊपर से 7 बार वार कर फ्लश कर दें. इसके बाद हाथ-पैर धोकर अपने ऊपर साफ पानी छिड़क लें.

  • ये आदमी था दुनिया का पहला इंसानˈ जिससे हुई थी सृष्टि की रचना जानिए पूरी कहानीˌ

    ये आदमी था दुनिया का पहला इंसानˈ जिससे हुई थी सृष्टि की रचना जानिए पूरी कहानीˌ

    ये आदमी था दुनिया का पहला इंसानˈ जिससे हुई थी सृष्टि की रचना जानिए पूरी कहानीˌ

    दुनिया में विज्ञान कितनी भी तरक्की कर लें मगर अभी तक यह पता नहीं लगा पाया है कि इस संसार को किसने बनाया है और संसार में मुनष्य की उत्पती किस प्रकार से हुई है। यह सवाल कई बार हमारे मन में आता है। मगर इसका उत्तर हमें कई धार्मिक पुस्तकें और विज्ञान द्वारा खोजे गए तथ्य देते तो जरूर है मगर वह आधे अधूर होते हैं।

    किसने बनाया हमें

    हिन्दू मान्यताओं के अनुसार हमारे संसार को ईश्वर ने ही बनाया है मगर एक युग के विकास के बाद किस तरह से मनुष्य जाति का जन्म हुआ और कैसे इस जाति ने धरती पर अपने रहन सहन का तरीका बनाया यह हमारे लिए सबसे अहम सवाल है। मगर वो कौन सा इसान था जो हमें धरती पर लेकर आया।

    कौन था पहला मानव

    मगर इस सवाल से भी उपर एक ओर सवाल यह भी है कि आखिरकार पहला मनुष्य कौन था । वो कहां से आया था और उसे बनाने वाला यानी उसका रचिता कौन था। उसका संसार में आना और किस समय पर आना यह सभी कुछ ऐसे सवाल है जिनका जवाब हर इसान जानना चाहता है। क्योंकि हम सब का वहीं आधार है जिसके कारण हम सब की उत्पती हुई है।

    क्या कहता है पुराण

    हमारे हिंदू धर्म के अनुसार संसार में सबसे पहले जन्म लेने वाला मनुष्य मनु था। या फिर पश्चिम सभ्यता के अनुसार एडेम था और उनके आने बाद ही मनुष्य जाति का आंरभ हुआ। मगर इन दोनों को बनाने वाला कौन था।

    पुराण में मनु

    एक पौराणिक कथा के अनुसार मनु की रचना स्वयं भगवान ब्रहा ने की थी। ऐसा कहा जाता है कि मानव जाति की रचना के लिए भगवान ब्रहमा ने दो लोगों को बनाया था। एक तो पुरूष और दूसरा स्त्री। क्योंकि मानव जाति को आगे बढाने के लिए ब्रहमा के लिए जरूरी था कि वह पुरूष ओर स्त्री की भी रचना करें।

    ब्रह्मा द्वारा हुई रचना

    भगवान ब्रहमा द्वारा बनाए गए पुरूष थे मुन और स्त्री। आज हमारी सांसारिक दुनिया में जितने भी लोग मौजूद हैं यह सभी मनु से उत्पन्न हुए हैं।

    मनु से बना मानव

    संसार में आने वाला सबसे पहला इंसान मुन था इसलिए इस जाति का नाम मानव पडा था। संस्कृत में इसे मुनष्य कहा जाने लगा और अंग्रेजी भाषा में भी मिलते जुलते नाम मैन का प्रयोग हुआ। आपको बता दे कि यह सभी नाम पहले मुनष्य मनु से ही जुडे हुए हैं।

    पौराणिक कथा

    पुराणों में दर्ज एक कथा के अनुसार एक समय था जब भगवान ब्रहा देवों और असरों तथा पत्रिं का निर्माण करने के काफी शक्तिहीन महसूस करने लगे थे। इसके आगे उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि अब किसकी रचना की जाए। जिसके बाद उन्होंने काफी विचार करके मन तथा मस्तिक को कुछ शांति हासिल हो सके।

    क्या थी वो काया

    उस क्षण ब्रहा जी अपने कुछ कार्यो में व्यस्थ ही थे कि अचानक उनके अंदर एक काया उत्पन्न हुइ्र ओर उनके सामने आकर खडी हो गई । जिसे देखने के बाद उन्हे काफी अंचभा हो रहा था कि वह कोई मामूली काया नहीं बल्कि बिल्कुल उनके ही जैसे दिखाई देने वाली थी।

    भगवान ब्रह्मा हुए हैरान

    उस परछाई को देख कर कुछ देर तक तो भगवान ब्रहमा समझ नहीं सके कि उनके साथ आखिरकार हुआ क्या है। आपको बता दें कि यही मानव संसार का पहला मुनष्य था जिसे स्वयंभु मनुष्य के नाम से जाना जाता है। अब इसके बाद एक और सवाल मन में आता है कि यदि हिंनू मान्यताओं कें अनुसार मनु पहला मनुष्य था तो पश्चिमी सयता के अनुसार पहला मानव कौन था।

    बाइबल और मनु

    अगर हम बाइबल की बात करें तो जिस तरह से पौराणिक कथा में भगवान ब्रहा के शरीर से मनु ने जन्म लिया था उसी प्रकार बाइबल में भी ईश्वर के शरीर की परछाई ने जन्म लिया था और यही परछाई मुन की तरह ईश्वर की छाया थी और उनकी तरह ही दिखाई भी देती थी।

    एडेम का जन्म

    बाइबल में इस परछाई का नाम एडेम दिया गया है। बताया जा रहा है कि बाइबल में एडेम के जन्म पर एक वाक्या भी लिखा गया है। मैन वाज क्रिएटेड इन दि इमेज ऑफ हिज मेकर जिसका मतलब होता है कि भगवान की परछाई में मनुष्य ने जन्म लिया है। इन दोनों कथाओं से यह साबिता होता है। कि मुन ही वह पहला इंसान है जिसने मनुष्य के रूप में धरती पर जन्म लिया।

    मनु और वह स्त्री

    मनु के साथ इस संसारिक दुनिया में भगवान ब्रहा द्वारा एक स्त्री शतरूपा की भी रचना की गई थी। जहां पर पुराणों के अनुसार वर्णित कथाओं के अनुसार शतरूपा का जन्म हुआ था और बाइबल के अनुसार एडेम के साथ एम्बेला का जन्म हुआ था।

    लेकिन हैं कुछ अंतर

    मगर इन सभी तथ्यों को जानने के बाद यह साबित होता है कि हिन्दू इतिहास तथा पश्चिमी सभ्यता की बाते काफी हद तक समान है। मगर इसके बावजूद भी दोनों सभ्यताओं में काफी भिन्नता है।

    बाइबल में मनु का जन्म

    बाइबल में लिखी गई कहानी के अनुसार एडेम का निर्माण खुद ईश्वर ने किया था मगर दूसरी और मनु तो स्वयं भगवान ब्रहमा के शरीर से काया बनकर बाहर आए थे। दूसरी ओर मुनष्य का पहला स्त्री रूप बाइबल के अनुसार मुन की पसली से बनाया गया था। मगर पुराणों के अनुसार शतरूपा का जन्म भी भगवान ब्रहमा की निकली काया से ही हुआ था।

    जन्म के बाद समानता

    पुराण के अनुसार मनु तथा शतरूपा के जन्म के बाद भगवान ब्रह्मा द्वारा उन्हें धरती पर मानवीय संसार को स्थापित करने का आदेश दिया गया था। ठीक इसी तरह बाइबल में भी इस तरह की घटना का वर्णन है।

    पूर्ण विकसित रूप से जन्म

    इसके साथ ही बाइबल में एडेम के बिना किसी गर्भ द्वारा इस संसार में आने की बात पुराण के तथय से मिलती है। जिस प्रकार मनु की उत्पती ब्रहमा के भीतर से निकली काया से हुआ है ठीक उसी प्रकार एडेम की उत्पती भी ईश्वर के शरीर से हुई है।

    एक से ज्यादा मनु

    हिन्दू पुराण के अनुसार बताया गया है कि केवल एक ही नहीं बल्कि एक से भी ज्यादा मनु ने जन्म लिया था। यदि पुराण में दर्ज आंकडे यह बताते हैं कि उस समय एक नहीं 10 मनु ने जन्म लिया था।

  • काले और जहरीले सांप के बराबर होतेˈ हैं ऐसे व्यक्ति, इनसे दूर रहेंगे तो होगा फायदा ही फायदाˌ

    काले और जहरीले सांप के बराबर होतेˈ हैं ऐसे व्यक्ति, इनसे दूर रहेंगे तो होगा फायदा ही फायदाˌ

    काले और जहरीले सांप के बराबर होतेˈ हैं ऐसे व्यक्ति, इनसे दूर रहेंगे तो होगा फायदा ही फायदाˌ

    आचार्य श्री चणक के शिष्य रहे आचार्य चाणक्य की बताई और कही गई बातें हर किसी के लिए काफी फायदेमंद साबित होती है. सदियों पहले आचार्य चाणक्य ने कई ऐसी बातें बताई थी जो आज भी लोगों के बहुत काम आती है. चाणक्य ने सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक आदि जीवन की हर परि​स्थिति का बारीकी से अध्ययन किया है.

    आचार्य चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे. आज भी उन्हें भारतीय इतिहास में प्रमुख स्थान प्राप्त है. आज की दुनिया के हिसाब से चाणक्य नीति में लिखे गए उनके विचार काफी हद तक सटीक साबित होते हैं. उन्होंने कई तरह की बातें बताई है और ऐसे ही उन्होंने बताया है कि किस तरह के व्यक्ति काले और जहरीले नाग से भी ज्यादा हानिकारक और खतरनाक होते हैं. चाणक्य नीति में चाणक्य ने इस तरह के लोगों से दूर रहने के लिए ही कहा है. जिससे कि सामने वाले व्यक्ति को कोई नुक्सान न हो. आइए जानते हैं कि चाणक्य ने किस तरह के लोगों से बचने की बात कही है.

    आचार्य चाणक्य ने जीवन भर के अनुभव के आधार पर अपने कुछ विचार और नीतियों को चाणक्य नीति में लिखा. चाणक्य नीति की चर्चा दुनियाभर में होती है. अपने बुद्धि कौशल के दम पर एक साधारण से बालक को सम्राट के पद पर पहुँचाने वाले चाणक्य ने कहा है कि, ”काले मन वाला काले नाग से भी बुरा होता है.” उनके इस कथन का अर्थ है कि, जो व्यक्ति मन में मैल रखता हो, वह व्यक्ति काले और जहरीले सांप के बराबर है.

    आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में इस तरह के लोगों को काले मन का बताया है जो दोहरा व्यक्तित्व जीते हैं. दोहरा व्यक्तित्व अर्थात जो लोग मुंह पर कुछ और होते हैं और पीठ पीछे कुछ और होते हैं. ऐसे लोगों से हमेशा ही बचकर रहना चाहिए. इस तरह के लोगों को दूसरे लोगों से जलन भी होती है. ऐसे लोग कभी किसी की तरक्की से खुश नहीं होते हैं और जब कोई इनसे आगे निकलता है तो ये उनसे सहन नहीं हो पाता है और उन्हें नीचे गिराने की कोशिश में ये लग जाते हैं. इनका जीवन सफल नहीं होता है और ये जीवन में कुछ ख़ास हासिल भी नहीं कर पाते हैं.

    आचार्य चाणक्य ने कहा है कि काला नाग किसी पर तब ही वार करता है या किसी व्यक्ति को तब ही परेशान करता हो जब उसे कोई छेड़ता है. वहीं काले मन वाले व्यक्ति काले नाग से भी एक कदम आगे रहते हैं. इस तरह के व्यक्ति बगैर किसी कारण ही आपके जीवन को बर्बाद कर लेते हैं. ये लोग किसी के जीवन को बर्बाद करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और इसमें नुकसान उनका खुद का ही रहता है.

    जो लोग बहुत मीठी मीठी और चिकनी चुपड़ी बातें करते हैं उनसे भी बचकर रहना चाहिए. चाणक्य कहते हैं कि कुछ लोग मुंह पर मीठा बोलते हैं वहीं पीठ पीछे ये कुछ और होते हैं. ये लोग दो लोगों को आपस में लड़ाने का काम करते हैं और एक दूसरे के प्रति उनके मन में जहर घोल देते हैं.

  • ये हैं भारत के 7 आश्रम जहांˈ ठहर सकते हैं मुफ्त में नहीं लगता एक भी पैसा खाना-पीना सब कुछ फ्री यहां खूबसूरती भी है और दिल का सुकून भीˌ

    ये हैं भारत के 7 आश्रम जहांˈ ठहर सकते हैं मुफ्त में नहीं लगता एक भी पैसा खाना-पीना सब कुछ फ्री यहां खूबसूरती भी है और दिल का सुकून भीˌ

    ये हैं भारत के 7 आश्रम जहांˈ ठहर सकते हैं मुफ्त में नहीं लगता एक भी पैसा खाना-पीना सब कुछ फ्री यहां खूबसूरती भी है और दिल का सुकून भीˌ

    नंबर 1 गीता भवनऋषिकेश –

    अगर किसी घुमक्कड़ व्यक्ति से यह पूछा जाए कि क्या वे ऋषिकेश घूमने गए हैं, तो वह शायद ही ‘ना’ कहें। उत्तराखंड का ऋषिकेश एक ऐसी जगह है, जहां हर महीने लाखों सैलानी घूमने के लिए आते हैं। इसलिए, अगर आप भी ऋषिकेश घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो गीता भवन में मुफ्त में ठहर सकते हैं। ऋषिकेश वास्तव में एक बेहद सुंदर जगह है। यहां कई आश्रम हैं, और नदी के किनारे स्थित गीता भवन में ठहरने की बहुत अच्छी व्यवस्था है। इस आश्रम में 1000 से ज्यादा कमरे हैं, और यहां रुकने के लिए आपको कोई पैसा नहीं देना पड़ता। आश्रम में लक्ष्मी नारायण मंदिर, एक आयुर्वेदिक विभाग, और एक पुस्तकालय भी है। यहां आने वाले अतिथि शुद्ध शाकाहारी भोजन का आनंद ले सकते हैं।

    नंबर  2 आनंदाश्रम, केरल –

    आनंदाश्रम केरल की हरी-भरी हरियाली के बीच एक बहुत ही सुुंदर आश्रम है। यहां आकर आप वास्तव में एक अलग ही शांति का अनुभव करेंगे। यहां आप पक्षियों की चहचहाहट सुन सकते हैं। सबसे अच्छी बात है कि यहां आपको एकदम घर जैसा कम मसाले वाला भोजन खाने को मिलेगा। वो भी बिना कोई कीमत चुकाए । यह आश्रम पूरी तरह से देहाती शैली में बना हुआ है। चारों तरफ प्रकृति से घिरा होने के कारण पर्यटक यहां आकर सुकून पाते हैं।

    नंबर  3 भारत 

    ऋषिकेश में बसे इस आश्रम की अपनी अलग कहानी है। यह आश्रम और संस्थान स्वस्थ जीवनशैली के लिए शरीर और मन के उपचार के लिए कोर्स उपलब्ध कराता है। स्वयंसेवी कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर कोई भी यहां मुफ्ते में ठहरने की सुविधा का लाभ ले सकता है। यहां आपको विदेश से आए लोगों के बीच रहने और उनसे बातचीत करने का मौका भी मिलेगा। अच्छी बात यह है कि आश्रम स्वयंसेवी गतिविधियों में भाग लेने वालों को सम्मान प्रमाण पत्र भी प्रदान करता है।

    नंबर  4 ईशा फाउंडेशन, कोयंबटूर

    अक्सर आपने तस्वीरों में काले रंग के पत्थर की शिवजी की विशाल मूर्ति देखी होगी। दरअसल, मूर्ति स्थापित है कोयंबट्टर के ईशा फाउंडेशन में। वेल्लियांगिरी पहाड़ों से घिरा यह सद्गुरू का आध्यात्मिक केंद्र है। इसके बैकग्राउंड को कभी आप ध्यान से देखें, तो आपको प्राचीन पहाड़ों के साथ आदियोगी शिव की विशाल मूर्ति देखने को मिलेगी। इस आश्रम में आने वाले आगुंतकों के लिए सभी सेवा निशुल्क है। ईशा फाउंडेशन में खाने-पीने और ठहरने की उचित व्यवस्था की गई है। खासकर, महाशिवरात्रि के अवसर पर जश्न और उत्स्व जैसा माहौल रहता है। ।

    नंबर  5 श्री रामनाश्रामम , तमिलनाडु

    तिरूवन्नामलाई की पहाड़ियों में स्थित इस आश्रम में श्री भगवान का विशाल मंदिर है। आश्रम में एक बहुत बड़ा बगीचा और एक लाइब्रेरी है। श्री भगवान के भक्तों को यहां ठहरने के लिए कोई किराया नहीं देना पड़ता। फायदे की बात यह है कि यहां आप शुद्ध शाकाहारी भोजन का आनंद ले सकते हैं। उन्हें अपनी यात्रा से कम से कम छह सप्ताह पहले यहां ठहरने के लिए बुकिंग करानी होती है।

    नंबर  6 गुरुद्वारा मणिकरण साहिब

    भारत के हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्य में हर दिन हजारों लोग घूमने के लिए जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश की मणिकर्ण जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यहां मौजूद गुरुद्वारा मणिकरण साहिब में फ्री में ठहर सकते हैं। यहां ठहरने या खाना खाने के लिए आपको पैसा नहीं देना होता है। कहा जाता है कि यहां सुबह-शाम लंगर का व्यवस्था किया जाता है जहां कोई भी खाने के लिए जा सकता है।

    नंबर  7 आर्ट ऑफ लिविंग

    आर्ट ऑफ लिविंग के आश्रम बेंगलुरु, ऋषिकेश, केरल, पुणे, असम और नागपुर जैसे शहरों के अलावा भारत में हर जगह हैं। उनके स्वयंसेवी कार्यक्रम को सेवा और योग फ़ेलोशिप कहा जाता है। यहां रहने वाले स्वयंसेवक को विभिन्न अवसरों में प्रतिदिन कम से कम 5 घंटे सेवा प्रदान करनी होती है। इन कार्यों के अंतर्गत हाउसकीपिंग, सामग्री डेवलपर, आउटरीच गतिविधियां, अतिथि सेवाएं, जैविक फार्म और बागवानी, भोजन सेवाएं और लंबी पैदल यात्रा शामिल है। ये केंद्र स्वयंसेवकों के लिए आवास और भोजन प्रदान करता है। निजी बाथरूम और पौधों पर आधारित शाकाहारी भोजन के साथ कमरे दिये जाते हैं।

    तो यह थी उन आश्रमों की लिस्ट जहां आप मुफ्त में ठहर सकते हैं , आप को मौक़ा मिला तो आप किन आश्रम में जाना चाहेंगे , कमेंट में ज़रूर बताएं.

  • हजारों में सिर्फ एक इंसान के प्राइवेटˈ पार्ट पर होता है तिल जानिए क्या कहता है ज्योतिष और इसका असरˌ

    हजारों में सिर्फ एक इंसान के प्राइवेटˈ पार्ट पर होता है तिल जानिए क्या कहता है ज्योतिष और इसका असरˌ

    हजारों में सिर्फ एक इंसान के प्राइवेटˈ पार्ट पर होता है तिल जानिए क्या कहता है ज्योतिष और इसका असरˌ

    इंटरनेट डेस्क। आपने कई बार देखा होगी की लोगों शरीर पर कई जगहों पर तिल होते है। लेकिन क्या आपको पता हैं कि तिल होने के क्या संकेत हैं और किस हिस्से पर तिल का क्या मतलब होता है। तो आज जानने की कोशिश करेंगे की शरीर के प्राइवेट पार्ट वाले हिस्से पर तिल होने का क्या मतलब होता है।

    योनि पर तिल अगर किसी महिला के योनि की बाईं ओर तिल है तो महिला बहुत ही कामुक स्वभाव की होती है और कई लोगों से उसके अफेयर भी हो सकते हैं। दाईं ओर तिल होने पर महिलाओं की सेक्स ड्राइव कमजोर होती है और उन्हें पार्टनर के साथ रिश्ते में दिक्कतें आ सकती हैं। योनि के ठीक ऊपर तिल होने पर महिला दिखने में आकर्षक होती है और जल्दी ही लोगों को अपने व्यवहार से मोहित कर लेती है।

    ब्रेस्ट पर तिल तिल अगर लेफ्ट ब्रेस्ट पर है तो इसका अर्थ है कि महिला कामुक स्वभाव की है। अगर लेफ्ट ब्रेस्ट पर एक से अधिक तिल होते हैं, तो ऐसी महिलाएं स्वभाव से बहुत ही चालाक और तेज बुद्धि की भी हो सकती हैं। तिल का रंग भी अलग-अलग महत्व रखता है। अगर तिल लाल रंग कहा है, तो महिला का स्वभाव अच्छा होगा। तिल शहद के रंग का है तो महिला चालाक होगी। काला तिल होने पर महिला स्वाभिमानी हो सकती है।