Category: Dharam

  • अद्भुत चमत्कार! इस मंदिर का मगरमच्छ नहींˈ खाता मांस मरने के बाद फिर जिंदा हो जाता है… वैज्ञानिक भी हैरानˌ

    अद्भुत चमत्कार! इस मंदिर का मगरमच्छ नहींˈ खाता मांस मरने के बाद फिर जिंदा हो जाता है… वैज्ञानिक भी हैरानˌ

    अद्भुत चमत्कार! इस मंदिर का मगरमच्छ नहींˈ खाता मांस मरने के बाद फिर जिंदा हो जाता है… वैज्ञानिक भी हैरानˌ

    शाकाहारी मगरमच्‍छ – जीवन के कई ऐसे सत्‍य हैं जिनके बारे में जानकर आपको हैरानी होगी।

    भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां की मान्‍यताओं के बारे में स्‍थानीय लोगों के अलावा और किसी को जानकारी नहीं है।

    आज हम आपको एक ऐसी ही मान्‍यता के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आपको उस पर विश्‍वास ही नहीं होगा। अमूमन जानवर मांसाहारी ही होते हैं और मगरमच्‍छ जैसा विशाल और खतरनाक जानवर भी मांस को ही अपना आहार बनाता है लेकिन धरती पर एक मगरमच्‍छ ऐसा भी है जो शाकाहारी है। दुनिया का ये अनोखा मगरमच्‍छ सिर्फ प्रसाद खाता है।

    भारत के इस शाकाहारी मगरमच्‍छ के बारे में हर कोई जानना चाहता है। आपको बता दें कि केरल के प्रसिद्ध मंदिर पद्मनाभास्‍वामी मंदिर के बीच एक तालाब स्थित है और ये शाकाहारी मगरमच्‍छ इसी तालाब में रहता है। पद्मनाभास्‍वामी मंदिर भगवान विष्‍णु का है और ये मंदिर की झील के बीच बना है। इस मगरमच्‍छ का नाम बबिआ है और ये मंदिर की रखवाली करता है।

    बबिआ नाम के मगरमच्‍छ से प्रसिद्ध इस मंदिर के बारे में यह भी मान्‍यता है कि जब इस झील में एक मगरमच्‍छ की मृत्‍यु होती है तो बड़े ही रहस्‍यमयी ढंग से दूसरा मगरमच्‍छ यहां प्रकट हो जाता है।

    मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के बाद उसे बबिआ को खिलाया जाता है किंतु प्रसाद खिलाने की अनुमति सिर्फ मंदिर के पुजारियों को ही है। बबिआ मगरमच्‍छ शाकाहारी है और वह झील के अन्‍य जीवों को नुकसान भी नहीं पहुंचाता है।

    क्‍या है इस मगरमच्‍छ का रहस्‍य

    ये मगरमच्‍छ अनंतपुर मंदिर की झील में करीब 60 सालों से रह रहा है। स्‍थानीय लोगों की मानें तो इस मगरमच्‍छ की सन् 1945 में अंग्रेजों ने गोली मारकर हत्‍या कर दी थी लेकिन दूसरे ही दिन फिर से ये मगरमच्‍छ फिर से वहां प्रकट हो गया। अब ये वही मगरमच्‍छ या फिर कोई और, ये तो पता नहीं लेकिन ये बात तो सच है कि ये शाकाहरी मगरमच्‍छ है जोकि अपने आप में काफी अनोखा है।

    भारत के सबसे धनी मंदिरों में शुमार पद्मनाभस्वामी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित केरल का सुप्रसिद्ध मंदिर हैं। कहा जाता है की यहां भगवान विष्णु स्वयंभू रूप में विराजमान हैं। हजारों भक्त दूर-दूर से शयन मुद्रा में विराजमान भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति के दर्शनों के लिये यहां आते हैं। किवदंती हैं कि इस मंदिर में इंद्र व चंद्र ने भी भगवान पद्मनाभास्वामी की पूजा अर्चना की थी। इस मंदिर में 12008 शालिग्राम स्थापित किये गये हैं। घंटी, शंखनाद व मंत्रों की पवित्र ध्वनि से गुंजायमान यह स्थल भक्तों को मोह लेता हैं। यह मंदिर वैष्णवों के 108वें तीर्थ स्थल के रूप में भी जाना जाता हैं।

    कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह मंदिर 5000 साल पुराना है।

    ताड पत्तों पर लिखे गये एक प्राचीन ग्रंथ अनंत्सयाना महात्मय में वर्णित है कि इस मंदिर की स्थापना कलियुग के 950वें दिन तुलु ब्राह्मण दिवाकर मुनी ने की थी। मंदिर का पुनर्निमाण कई बार हुआ है। अंतिम बार 1733 ई. में इस मंदिर का पुनर्निर्माण त्रावनकोर के महाराजा मार्तड वर्मा ने करवाया था। मंदिर में बना स्वर्णस्तं‍भ और गलियारे में बने स्तंभ जिन पर सुंदर नक्काशी की गई है, मंदिर की भव्यता में चार चांद लगाते हैं।

  • महाभारत का वो चौंकाने वाला राज! 100ˈ कौरवों और 5 पांडवों की इकलौती बहन के पति ने किया था द्रौपदी का अपमान फिर…ˌ

    महाभारत का वो चौंकाने वाला राज! 100ˈ कौरवों और 5 पांडवों की इकलौती बहन के पति ने किया था द्रौपदी का अपमान फिर…ˌ

    महाभारत का वो चौंकाने वाला राज! 100ˈ कौरवों और 5 पांडवों की इकलौती बहन के पति ने किया था द्रौपदी का अपमान फिर…ˌ

    द्रौपदी पर बुरी नज़र – महाभारत की गाथा में पांडवों, कौरवों और द्रौपदी का जिक्र आपने कई बार सुना होगा लेकिन क्या आप पांडवों और कौरवों की इकलौती बहन के बारे में जानते हैं.

    जी हां, हम हमेशा से यही सुनते आ रहे हैं कि महाभारत में 5 पांडव और 100 कौरव थे. लेकिन उनकी बहन के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं.

    आखिर कौन थी 5 पांडवों और 100 कौरवों की इकलौती बहन और क्या हुआ था जब उसके पति ने द्रौपदी पर बुरी नज़र डाली थी.

    द्रौपदी पर बुरी नज़र –

    कौरवों और पांडवों की इकलौती बहन थी दुशाला

    पांडवों और कौरवों की बहन दुशाला धृतराष्ट्र और गांधारी की बेटी थी. कहा जाता है कि वो बचपन से बड़े होने तक सभी की चहेती हुआ करती थी. सबकी दुलारी बहन होने के बावजूद शादी के बाद उसके जीवन में कई सारी मुसीबतें आनी शुरू हो गई.

    दुशाला का विवाह सिंदु राज्य के राजा जयद्रथ से हुआ था. जयद्रथ को उसकी शूरवीरता के अलावा उसके दोहरे व्यक्तित्व के लिए भी जाना जाता था.

    पति जयद्रथ के व्यहार से दुखी रहती थी दुशाला

    कहा जाता है कि दुशाला के पति जयद्रथ कभी महिलाओं के साथ बहुत अच्छे से व्यवहार करते थे तो कभी इतनी हदें पार कर देते थे कि महिलाओं की नज़रों में उनकी छवि एक बुरे इंसान की बन जाती और जयद्रथ के इसी व्यवहार के चलते दुशाला उनसे काफी दुखी रहती थी.

    लेकिन हद तो तब हो गई जब अपने इसी व्यवहार के कारण जयद्रथ ने उस वक्त अपनी सारी हदें पार कर दी और पांडवों की पत्नी द्रौपदी पर अपनी बुरी नजर डालते हुए उनका अपहरण कर लिया.

    जयद्रथ ने द्रौपदी पर बुरी नज़र डाली और किया था द्रौपदी का अपहरण

    कहा जाता है कि जब द्रौपदी के अपहरण की खबर पांडवों को लगी तो वो जयद्रथ की इस हरकत से काफी क्रोधित हुए और वो द्रौपदी को बचाने के लिए निकल पड़े.

    जब पांडव जयद्रथ तक पहुंचे तो वो सभी मिलकर उसका सिर धड़ से अलग करना चाहते थे लेकिन तभी द्रौपदी ने उन्हें रोक दिया. द्रौपदी ने अपने पतियों को रोकते हुए कहा कि जयद्रथ उनकी बहन दुशाला के पति हैं अगर जयद्रथ की मृत्यु हो जाती है तो उनकी इकलौती बहन विधवा हो जाएगी.

    द्रौपदी की बात सुनकर पांडवों ने जयद्रथ का वध तो नहीं किया लेकिन सजा के तौर पर उसका सिर गंजा करवा दिया.

    अर्जुन ने किया था जयद्रथ का सिर धड़ से अलग

    इस घटना के बाद जयद्रथ के मन में पांडवों से अपने अपमान का बदला लेने की भावना तेजी से बढ़ने लगी थी. कुछ समय बाद दुर्योधन ने जयद्रथ को अपनी सेना के साथ युद्ध में शामिल होने के लिए आमंत्रण भेजा.

    जयद्रथ ने दुर्योधन के आमंत्रण को स्वीकार किया और युद्ध के लिए निकल पड़ा. युद्ध के दौरान जयद्रथ ने धोखे से अर्जुन के बेटे अभिमन्यु की हत्या कर दी. जिसके बाद अपने बेटे की हत्या का प्रतिशोध लेने के लिए अर्जुन ने श्रीकृष्ण की मदद से एक बार में ही जयद्रथ का सिर धड़ से अलग कर दिया.

    गौरतलब है कि द्रौपदी पर बुरी नज़र वाले जयद्रथ को पांडवों ने सिर गंजा करके सजा दी थी लेकिन जब उसने युद्ध में अर्जुन के बेटे अभिमन्यु की हत्या कर दी तो अर्जुन ने अपने जीजा जयद्रथ का सिर धड़ से अलग करके अपनी बहन दुशाला को विधवा बना दिया.

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी इंटरनेट पर मौजूद स्रोतों से ली गई है। हमारा मकसद सिर्फ जानकारी देना है, इसमें दी गई बातों से हमारी अपनी कोई राय नहीं है। किसी भी जानकारी को अपनाने से पहले खुद सोच-समझकर फैसला लें

  • बुरी से बुरी नज़र से बचाएगा फिटकरीˈ और रुई का उपाय ऐसे करें इसक उपयोगˌ

    बुरी से बुरी नज़र से बचाएगा फिटकरीˈ और रुई का उपाय ऐसे करें इसक उपयोगˌ

    बुरी से बुरी नज़र से बचाएगा फिटकरीˈ और रुई का उपाय ऐसे करें इसक उपयोगˌ

    जब घर में किसी को नजर लग जाती है तो उस नजर को उतारने के लिए घर वाले बहुत सारे अलग आलग घरेलु उपाए करते है. नजर लगना किसी के लिए भी अच्छा नही होता क्युकी नजर एक ऐसा दोष है जिससे हमारे शारीर से लेकर घर परिवार में बहुत सारी परेशानिया आ सकती है. अगर किसी व्यक्ति को नजर लग जाती है तो ऐसे में उसकी आंख का निचला पलक सूज जाता है, शारीर में थकन और बीमारी भी लग जाती है. धन हानि भी हो जाती है कुल मिलकर हमे बुरी से बुरी नजर से खुदको बचाना चाहिए जिससे हम और हमारा परिवार धन सम्पत्ति सब ठीक रहे.

    आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलु उपाए बताने वाले है जिससे बुरी से बुरी नजर आपका कुछ भी नही बिगाड़ पायेगी. ये उपाए फिटकिरी और रुई से किया जाता है. जिसे करना का तरीका हम आपको बता रहे है.

    जानिए इन नजर को खत्म करने का उपाय

    सबसे पहले आप रुई ले और उसकी एक बाती बना ले फिर उस बाती को तेल में डूबा के भिगो ले और फिर उस बत्ती को ले और जिस इंसान को नजर लगी है उसके ऊपर सात बार उतारे और फिर उस बाती को जला दे.

    इस प्रकार बत्ती जलने लगेगी आपको बता दे की अगर किसी व्यक्ति को नजर लगी है तो वह रुई की बत्ती बहुत तेज भभक भाभक के जलने लगेगी और फिर कुछ देर बाद बत्ती जैसे जैसे जलना बंद होगी वैसे वैसे उस व्यक्ति की बाजार उतन्रने लगेगी.

    इसी प्रकार आप फिटकरी से भी बुरी से बुरी नजर उतार सकते है उसके लिए आपको एक फिटकरी का टुकड़ा लेना है और फिर उस टुकड़े को नजर लगे हुए व्यक्ति के ऊपर सात बार गुमाना है और फिर वह टुकड़ा जलती हुयी आग में फेक देना है ऐसा करने से नजर लगे व्यक्ति की नजर बहुत जल्दी उतर जाएगी.

  • काशी को जलाकर भस्म करने वाला वोˈ रहस्य! जब श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र ने ली थी भयानक प्रतिशोध की अग्निˌ

    काशी को जलाकर भस्म करने वाला वोˈ रहस्य! जब श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र ने ली थी भयानक प्रतिशोध की अग्निˌ

    काशी को जलाकर भस्म करने वाला वोˈ रहस्य! जब श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र ने ली थी भयानक प्रतिशोध की अग्निˌ

    श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र – देवों के देव महादेव की नगर काशी को हिंदू धर्म में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है.

    मान्यता है कि इस पावन नगरी को स्वयं भगवान शिव ने बनाया था और यह नगरी भगवान शिव के त्रिशूल पर थमी हुई है.

    भगवान शिव इस नगरी में काशी विश्वनाथ के रुप में आज भी विराजमान है जिनके दर्शन के लिए देश और दुनिया से भक्त खींचे चले आते हैं. लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भगवान शिव की इस नगरी को एक बार भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से जलाकर राख कर दिया था.

    आखिर श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र जिससे इस नगरी को जलाकर भस्म क्यों कर दिया, इसके पीछे द्वापर युग की एक कथा बेहद प्रचलित है.

    श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र –

    जरासंध ने अपनी बेटियों की शादी कराई थी कंस से

    पौराणिक कथा के अनुसार द्वापर युग में मगध पर राजा जरासंध का राज हुआ करता था उनके आतंक के चलते उनकी पूरी प्रजा डर के साये में जीने को मजबूर थी. राजा जरासंध की क्रूरता और उसकी विशाल सेना से आसपास के ज्यादातर राजा खौफ खाते थे. यही वजह है कि जरासंध ने अपनी दोनों बेटियों अस्थि और प्रस्थि का विवाह मथुरा के दुष्ट राजा और श्रीकृष्ण के मामा कंस से करा दी.

    विष्णु अवतार श्रीकृष्ण के मामा थे कंस  

    पौराणिक कथा के अनुसार राजा कंस को ये श्राप मिला था कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान ही कंस की मौत का कारण बनेगी. जैसे ही कंस को इसका पता चला उसने अपनी बहन देवकी और उसके पति वासुदेव को बंदी बनाकर रखा. कंस ने अपनी बहन के सभी संतानों का वध कर दिया लेकिन उनकी आठवीं संतान को जीवित रहने से कोई नहीं रोक पाया. कृष्ण के जन्म के तुरंत बाद अपनी संतान को कंस से बचाने के लिए वासुदेव ने उसे यशोदा के घर में छोड़ा, जिसके बाद माता यशोदा ने ही श्रीकृष्ण का पालन पोषण किया.

    श्रीकृष्ण ने किया था अपने मामा कंस का वध

    जब श्रीकृष्णा बड़े हुए तो वही अपने मामा की मौत का कारण बनें. श्रीकृष्ण द्वारा कंस की हत्या किए जाने की खबर जब मगध के राजा जरासंध को मिली तो क्रोध में आकर उन्होंने श्रीकृष्ण को मारने की योजना बनाई, लेकिन वो अकेले इस काम में सफल न हो पाए.

    इसलिए जरासंध ने काशी के राजा के साथ मिलकर कृष्ण को मारने की फिर से योजना बनाई और कई बार मथुरा पर आक्रमण किया. इन आक्रमणों से भी मथुरा और भगवान कृष्ण को कुछ नहीं हुआ लेकिन इन आक्रमणों के दौरान काशी नरेश की मृत्यु हो गई.

    काशी नरेश के पुत्र ने मांगा श्रीकृष्ण के वध का वरदान

    अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए काशी नरेश के पुत्र ने काशी के रचयिता भगवान शिव की कठोर तपस्या की. जब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर दर्शन दिया तो काशी नरेश के पुत्र ने शिवजी से श्रीकृष्ण का वध करने का वर मांगा.

    हालांकि भगवान शिव ने उन्हें काफी समझाया बावजूद इसके वो अपनी जिद पर अड़े रहे जिसके चलते भगवान शिव को यह वर देना पड़ा. वरदान के रुप में भगवान शिव ने काशी नरेश के पुत्र को एक कृत्या दी और कहा कि इसे जहां मारोगे वह स्थान नष्ट हो जाएगा. लेकिन किसी ब्राह्मण भक्त पर उसे फेंकने पर इसका प्रभाव निष्फल हो जाएगा.

    श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से जलकर राख हुई काशी

    भगवान शिव से वरदान में मिली कृत्या से काशी नरेश के पुत्र ने द्वारका में श्रीकृष्ण  पर प्रहार किया लेकिन वो ये भूल गए कि श्रीकृष्ण खुद एक ब्राह्मण भक्त हैं. जिसके चलते वह कृत्या द्वारका से वापस होकर काशी गिरने के लिए लौट गई. हालांकि इसे रोकने के लिए श्रीकृष्ण ने अपना सुदर्शन चक्र कृत्या के पीछे छोड़ दिया.

    काशी तक सुदर्शन चक्र ने कृत्या का पीछा किया और काशी पहुंचते ही उस कृत्या को भस्म कर दिया. लेकिन सुदर्शन चक्र का वार अभी शांत नहीं हुआ था, यही वजह है कि सुदर्शन चक्र से काशी नरेश के पुत्र के साथ-साथ पूरी काशी जलकर राख हो गई.

    श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र – सुदर्शन चक्र से जलकर भस्म हुई भगवान शिव की इस नगरी को फिर से बसाया गया. बताया जाता है कि वारा और असि नदियों के बीच में होने के कारण इस नगरी का नाम वाराणसी रखा गया और इसे ही काशी नगरी का पुनर्जन्म माना जाता है.

  • 907 साल तक चला ये अद्भुत प्रेम!ˈ ऋषि कंडु और अप्सरा की वो रोमांचक कहानी जिसे छुपाते हैं पुराणˌ

    907 साल तक चला ये अद्भुत प्रेम!ˈ ऋषि कंडु और अप्सरा की वो रोमांचक कहानी जिसे छुपाते हैं पुराणˌ

    907 साल तक चला ये अद्भुत प्रेम!ˈ ऋषि कंडु और अप्सरा की वो रोमांचक कहानी जिसे छुपाते हैं पुराणˌ

    जहाँ कही भी अप्सराओं का नाम आता है वहां पर स्वतः ही इंद्र देव का भी नाम आता है।

    ये बात वेद-पुराणों में भी वर्णित है कि इंद्र स्वर्ग के देवता थे और अपने काम निकालने के लिए छल और कपट करने से भी बाज नही आते थे। एक बार ऐसा ही हुआ जब ऋषियों में श्रेष्ठ ऋषि कंडु गोमती नदी के किनारे घोर तपस्या कर रहे थे। तब उनकी तपस्या से दुखी होकर इंद्र ने अत्यंत सुंदर अप्सरा प्रम्लोचा को चुना और ऋषि कंडु की तपस्या भंग करने के लिए भेजा।

    प्रम्लोचा बला की खुबसूरत थी उसके तीखे नैन-नक्श के आगे ऋषि कंडु की एक नहीं चली और वे प्रम्लोचा के सम्मोहन में डोल गए।

    अब ऋषि कंडु पूजा-पाठ और तपस्या भूल कर पूरी तरह से गृहस्थ आश्रम के मोह में फंस गए और अपनी कड़ी तपस्या भंग कर बैठे।

    योजना के अनुसार इंद्र और प्रम्लोचा का काम हो चूका था। अब प्रम्लोचा स्वर्ग वापस लौटना चाहती थी। लेकिन प्रम्लोचा के प्रेम में ऋषि कंडु ऐसे डूबे की उन्होंने उसे कही जाने नहीं दिया। लेकिन प्रम्लोचा अब किसी भी तरह स्वर्ग लौटना चाहती थी लेकिन वो कंडु के श्राप से भी डरती थी इसलिए चाहकर भी कही जा नहीं सकती थी।

    फिर एक दिन अचानक ऋषि कंडु को अपनी पूजा-पाठ और तपस्या याद आई तो वे अपनी कुटिया से निकल कर बोले मैं पूजा-पाठ करने के लिए जा रहा हूँ।

    तब प्रम्लोचा बोली इतने सालों में आज आपको साधना सूझी है इतने दिन से तो आप गृहस्थ आश्रम में जी रहे थे।

    ऋषि कंडू बोले तुम सुबह ही आई हो और मुझे साधना और तपस्या के बारे में बता रही हो। तब प्रम्लोचा ने इंद्र के बारे में सब सच बताया और कहा कि मुझे यहाँ आये हुए पूरे 907 साल हो चुके है। ये सुनकर ऋषि कंडु कहने लगे धिक्कार है मुझे अपने आप पर मेरी सारी साधना और तपस्या भंग हो गई।

    बाद में ऋषि कंडु को अपनी स्थिति का भान हुआ और उन्होंने अप्सरा का त्याग कर फिर से तपस्या करना आरम्भ कर दिया।

  • अगर आपके घर में भी नहीं टिकताˈ है धन, तो आजमाएं तुलसी के ये टोटके, नहीं होगी धन-धान्य की कमीˌ

    अगर आपके घर में भी नहीं टिकताˈ है धन, तो आजमाएं तुलसी के ये टोटके, नहीं होगी धन-धान्य की कमीˌ

    हिंदू धर्म शास्त्रों में तुलसी के पौधे को बेहद पूजनीय माना जाता है। तुलसी के पौधे से ना सिर्फ भाग्य चमकता है बल्कि इसकी मौजूदगी से घर के वास्तु दोष भी दूर होते हैं। दरअसल तुलसी भगवान विष्णु का प्रिय है, यही वजह है कि तुलसी पूजनीय और बेहद चमत्कारिक है।

    धार्मिक दृष्टिकोण से तो तुलसी का महत्व है ही, साथ ही स्वास्थ्य के लिहाज से भी तुलसी का सेवन करना काफी लाभदायक होता है। इसके अलावा तंत्रशास्त्र की मानें तो तुलसी के कुछ विशेष उपायों से किस्मत चमक ही उठती है। आइए जानते हैं, आखिर क्या हैं तुलसी से जुड़े ये टोटके…

    इस उपाय से नहीं होगी धन-धान्य की कमी

    तंत्रशास्त्र की मानें तो तुलसी मंगल ग्रह के साथ जुड़ी हुई है। ऐसे में आप अपने पर्स या फिर आलमारी में एक तुलसी का पत्ता हमेशा रख लें, इससे पैसा आपकी ओर आकर्षित होगा। इसके अलावा आप जहां पैसा का लेखा जोखा रखते हैं, वहां भी कुछ तुलसी के पत्ते रख दें। ऐसा करने से धन धान्य की कभी कमी नहीं होती है।

    अगर आपके घर में भी नहीं टिकताˈ है धन, तो आजमाएं तुलसी के ये टोटके, नहीं होगी धन-धान्य की कमीˌ

    गेहूं पिसवाने के लिए शनिवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है। ऐसे में अगर आप गेहूं पिसवाते हैं तो शनिवार के दिन पिसवाएं और पिसवाने से पहले उसमें 100 ग्राम काले चने, 11 तुलसी के पत्ते और दो दाने केसर के मिला लें और पिसवाने के लिए दे आएं। इससे आर्थिक समृद्धि आती है और परिवार में सुख शांति का वास होता है। इसके अलावा तुलसी के सामने सुबह शाम गाय के घी का दीपक जलाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    व्यापार में हो रहा हो घाटा तो अपनाएं ये उपाय

    अगर आपको व्यापार में घाटा हो रहा है तो तुलसी के कुछ पत्तों को तीन दिनों तक पानी में रख दें। इसके बाद इस पानी को अपने कार्यस्थल पर छिड़क दें। ऐसा करने से व्यापार में फायदा पहुंचता है।

    अगर बाजार की मंदी की वजह से आपको नौकरी छूट जाने का डर सता रहा है या फिर आपका प्रमोशन पिछले कई दिनों से रूका हुआ है तो गुरूवार को तुलसी के पौधे को पीले कपड़े में बांधकर अपने कार्यस्थल पर रख दें।

    इसके अलावा सोमवार के दिन सुबह-सुबह सफेद कपड़े में तुलसी के 16 बीजों को ऑफिस की मिट्टी में दबा दें। इस उपाय से आपके नौकरी छूट जाने का डर दूर होगा, साथ ही आपके प्रमोशन के चांसेज भी बढ़ जाएंगे।

    इन उपायों से होगा पारिवारिक कलह का अंत

    अगर परिवार में कलह और सदस्यों के बीच प्रेम भाव कम हो गया हो तो अपने रसोई घर में कुछ तुलसी के पत्ते रख दें। तंत्र शास्त्र के अनुसार ऐसा करने से घर में सुख शांति रहती है और सदस्यों के बीच रिश्ते में मिठास बढ़ती है। इसके अलावा  घर के सभी सदस्य नहाने के दौरान पानी में तुलसी के कुछ पत्ते डाल दें। इससे प्रेम भाव बढ़ता है और कलह से मुक्ति मिलती है।

    अगर आपके घर के छोटे बच्चों को अक्सर बुरी नजर लग जाती है या फिर कोई सदस्य मानसिक रूप से परेशान रहता हो तो तुलसी के कुछ पत्तों और सात काली  मिर्च को अपनी  मुट्टी में लेकर 21 बार उसके शरीर पर ऊपर से नीचे तक वार लें।साथ ही ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करें।

    इसके बाद तुलसी के पत्तों और काली मिर्च को उस व्यक्ति को खाने के लिए दे दें, फिर उसे उल्टा करके पांव के तलवों को किसी कपड़े से 7 बार झाड़ लगा दें। इससे सभी कष्ट दूर होते हैं।

  • रावण का वो अनसुना रहस्य! सीता सेˈ पहले क्यों अपहरण किया था राम की माता कौशल्या का? जानकर उड़ जाएंगे होशˌ

    रावण का वो अनसुना रहस्य! सीता सेˈ पहले क्यों अपहरण किया था राम की माता कौशल्या का? जानकर उड़ जाएंगे होशˌ

    रावण का वो अनसुना रहस्य! सीता सेˈ पहले क्यों अपहरण किया था राम की माता कौशल्या का? जानकर उड़ जाएंगे होशˌ

    रामायण की कथा के अनुसार आप इस बात को जानते हैं कि लंकापति रावण ने अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए माता सीता का अपहरण किया था.

    लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता सीता पहली स्त्री नहीं थीं जिनका रावण ने बलपूर्वक अपहरण किया था. बल्कि माता सीता के अपहरण से पहले रावण ने भगवान श्रीराम की माता कौशल्या का भी अपहरण किया था.

    आखिर दशानन रावण ने श्रीराम की माता कौशल्या का अपहरण क्यों किया था. चलिए उस प्रकरण के बारे में हम आपको बताते हैं.

    मौत की भविष्यवाणी सुनकर किया अपहरण

    आनंद रामायण के अनुसार सीता से पहले रावण ने श्रीराम की माता कौशल्या का अपहरण किया था. रामायण की एक कथा के मुताबिक रावण अपनी मौत की भविष्यवाणी को सुनकर डर गया था और अपनी मौत को टालने के लिए उसने माता कौशल्या का अपहरण कर लिया था.

    भगवान ब्रह्मा ने रावण को पहले ही बता दिया था कि दशरथ और कौशल्या का पुत्र ही उसकी मौत का कारण बनेगा. अपनी मौत की भविष्यवाणी को टालने के लिए दशरथ और कैकेयी के विवाह के दिन ही रावण ने कौशल्या का अपहरण कर लिया था.

    दशरथ ने बचाई थी कौशल्या की जान

    अपहरण करने के बाद रावण कौशल्या को डब्बे में बंद करके उन्हें एक सुनसान द्वीप पर छोड़ आया था. रावण के द्वारा किए गए इस कृत्य के बारे में नारद ने राजा दशरथ को बताया. इसके साथ ही उन्होंने उस स्थान के बारे में भी बताया जहां कौशल्या को रखा गया था.

    जैसे ही नारद ने इस अपहरण की जानकारी दी वैसे ही राजा दशरथ रावण से युद्ध करने के लिए अपनी सेना लेकर उस द्वीप पर पहुंच गए.

    हालांकि रावण की शक्तिशाली सेना के सामने दशरथ की सेना ढ़ेर हो गई थी. लेकिन दशरथ ने हार नहीं मानी और एक लकड़ी के तख्ते की मदद से समुद्र में तैरते हुए उस बक्से तक पहुंचे जिसमें कौशल्या को बंद करके रखा गया था.

    वहां जाकर दशरथ ने कौशल्या को उस बक्से से बंधनमुक्त किया और सकुशल अपने महल ले गए. माता कौशल्या का अपहरण करके रावण ने श्रीराम के जन्म से पहले ही अपनी मौत को टालने की कोशिश की थी. लेकिन इसमें रावण असफल रहा.

    गौरतलब है कि लाख कोशिशों के बावजूद भी रावण अपनी मौत की भविष्यवाणी को टाल नहीं सका. आखिरकार कौशल्या और राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम ने रावण का अंत कर इस भविष्यवाणी को सही साबित कर दिखाया.

  • गांधारी का अनसुना सच! पिता ने पहलाˈ विवाह बकरे से क्यों कराया? आंखों पर पट्टी बांधने की वजह जानकर रह जाएंगे दंगˌ

    गांधारी का अनसुना सच! पिता ने पहलाˈ विवाह बकरे से क्यों कराया? आंखों पर पट्टी बांधने की वजह जानकर रह जाएंगे दंगˌ

    गांधारी का अनसुना सच! पिता ने पहलाˈ विवाह बकरे से क्यों कराया? आंखों पर पट्टी बांधने की वजह जानकर रह जाएंगे दंगˌ

    अभी तक हम सभी यही जानते थे कि गांधारी का विवाह हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र से हुआ था.

    लेकिन लेकिन यह बहुत कम लोगों को मालूम है कि गांधारी की दो शादी हुई थी. बहुत से लोंगों ने गांधारी के पहले विवाह की यह कहानी नहीं सुनी होगी कि गांधारी का विवाह पहले हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र के साथ नहीं बल्कि एक बकरे के साथ हुआ था.

    ये तो हम सभी जानते ही हैं कि गांधारी गांधार के सुबल नामक राजा की बेटी थीं. गांधार की राजकुमारी होने के कारण उनका नाम गांधारी पड़ा. यह हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र की पत्नी और दुर्योधन आदि कौरवों की माता थीं.

    बताया जाता है कि जब गंगापुत्र भीष्म नेत्रहीन धृतराष्ट्र के साथ गांधारी के विवाह का प्रस्ताव लेकर गंधार पहुँचे, तो वहां के राजा सुबल ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.

    बहराल, शादी के बाद जब धृतराष्ट्र को गांधारी की पहले विवाह और उसके विधवा होने की बात का पता चली तो वह आगबबूला हो गया और पूरे गांधार राज्य को समाप्त करने के लिए उस पर आक्रमण कर दिया.

    बताया जाता है कि गांधारी की जन्म के समय जब उसकी कुंडली बनाई गई तो उसकी कुंड़ली में एक दोष सामने आया. पंड़ितों ने गांधारी के पिता सुबल को बताया कि शादी के बाद उनकी पुत्री विधवा हो जाएगी. क्योंकि जिस व्यक्ति से गांधारी की शादी होगी उसकी मौत निश्चित है. गांधारी का सुहाग बचा रहे इस समस्या का हल निकालने के लिए उसके पिता ने  पंडितों की सलाह पर उसका विवाह एक बकरे से करवाकर उसकी बलि दे दी.

    ऐसा करने के बाद गांधारी की कुंड़ली से विधवा होने का दोष हट गया. बाद में गांधारी का विवाह हस्तिानपुर के धृतराष्ट्र से करवाया गया. विवाह से पूर्व गांधारी को नहीं पता था कि धृतराष्ट्र दृष्टिहीन है लेकिन अपने माता-पिता की लाज रखने के लिए उसने शादी कर ली.

    जैसे ही भगवान शिव में विशेष आस्था रखने वाली गांधारी को यह पता चला कि जिस व्यक्ति से गांधारी का विवाह हो रहा है.  वह नेत्रहीन है तो तभी से गांधारी ने भी अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली. क्योंकि गंधारी का मानना था कि यदि उसके पति नेत्रहीन हैं, तब उसे संसार को देखने का अधिकार नहीं है.

    लेकिन से सब गंधारी के भाई शकुनि को अच्छा नहीं लगा. शकुनि नहीं चाहता था कि उसकी बहन की शादी एक दृष्टिहीन से हो. उसने इसका विरोध भी किया.

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी इंटरनेट पर मौजूद स्रोतों से ली गई है। हमारा मकसद सिर्फ जानकारी देना है, इसमें दी गई बातों से हमारी अपनी कोई राय नहीं है। किसी भी जानकारी को अपनाने से पहले खुद सोच-समझकर फैसला लें

  • इन 4 आदतों वाली लड़कियों बनती हैंˈ बेकार पत्नियां कर देती हैं घर और परिवार को बर्बादˌ

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    आप सभी जानते हैं कि हर व्यक्ति अपने जीवन में शादी करता है क्योंकि यह कई समय से परंपरा चलती हुई आ रही है और जिस भी इंसान की शादी होती है वह अवश्य है अपने मन में यह सोचता है कि शादी के बाद उसके जीवन में बहार आ जाएगी और वह अपने दांपत्य जीवन में बहुत सारी खुशियां व्यतीत करेगा। किंतु आज कल की दुनिया में देखा गया है कि शादी के बाद कई लोगों की जिंदगी नर्क से भी बदतर हो जाती है क्योंकि उनके जीवन से हर प्रकार की खुशियों की समाप्ति हो जाती है और वह अपने पुराने जीवन को जीना तो दूर चेहरे पर मुस्कुराहट भी नहीं ला पाते हैं। इन चीजों के पीछे क्या कारण होते हैं वह किसी को बताते भी नहीं है किंतु मुख्यता देखा गया है कि इसका मुख्य कारण उनके पत्नी की होती है।

    तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि जिन लड़कियों में यह 4 आदतें देखने को मिलती है उनसे आप शादी ना करें तो चलिए जानते हैं वह कौन सी आदत है।

    लड़ाकू किस्म की लड़कियां:- वैसे तो आजकल के जमाने में लड़कियों को बोलने का पूरा हक प्राप्त है किंतु जो लड़कियां स्वभाव से ही लड़ाकू होती है छोटी या बड़ी बात किसी पर भी अपने पति या अन्य लोगों से लड़ने को तैयार रहती है उन लड़कियों से कभी शादी नहीं करनी चाहिए क्योंकि यदि इस प्रकार की लड़की से शादी कर लेते हैं तो उनका दांपत्य जीवन से खुशियां नष्ट हो जाती है क्योंकि वह अपने स्वभाव से हमेशा लड़ने-झगड़ने में ही भरोसा रखती है। परिवार के बारे में बिलकुल नहीं सोचती।

    अधिक लव अफेयर:- आप आज के जमाने में देख सकते हैं कि लड़कियों के कई सारे लड़कों के साथ अफेयर एक ही समय पर चलते हैं। यदि इस प्रकार की महिलाएं शादी के बाद भी यही स्वभाव रखती हैं तो उनके जीवन में हमेशा ही दुखी रहती हैं और वह एक अच्छी पत्नी नहीं बन पाती हैं इसीलिए इस प्रकार की लड़कियों से शादी ना करें।

    स्वार्थी लड़कियां:- जो महिलाएं अपने जीवन में स्वार्थी होती हैं या उनकी आदत होती है वह एक बहुत ही बेकार पत्नियां बन कर सामने आती है क्योंकि इस प्रकार की सोच रखने वाली महिलाएं कभी भी अपने पति या अपने परिवार के बारे में नहीं सोचती हैं केवल यदि उनको कोई काम होगा तभी वह रिश्तो की अहमियत को समझेंगे अन्यथा उनके लिए यह सब व्यर्थ है केवल अपनी ही खुशी के लिए यह कोई भी कार्य करना पसंद करती है।

    अपने पति को प्यार ना करने वाली:- आजकल के जमाने में अधिकतर यह देखा गया है कि यह लड़कियां अपने पुराने प्रेमी से ही शादी करना पसंद करती हैं किंतु घरवालों के नाम आने के बाद वह जबरदस्ती किसी और के साथ शादी कर लेती हैं किंतु यह महिलाएं शादी के बाद जिसके साथ पति पत्नी के संबंध में आई है उसे अपना पति तक स्वीकार नहीं करती हैं और ना ही पति कहना भी उन्हें पसंद होता है इसीलिए इस प्रकार की स्त्रियों के साथ कभी भी आप शादी ना करें अन्यथा आपकी शादी के बाद जीवन से खुशियां समाप्त हो जाएंगी।

  • निधिवन का डरावना सच 99 साल कीˈ महिला बोली- ‘श्री कृष्ण…’ सुन खड़े हो जाएंगे रोंगटेˌ

    निधिवन का डरावना सच 99 साल कीˈ महिला बोली- ‘श्री कृष्ण…’ सुन खड़े हो जाएंगे रोंगटेˌ

    निधिवन का डरावना सच 99 साल कीˈ महिला बोली- ‘श्री कृष्ण…’ सुन खड़े हो जाएंगे रोंगटेˌ

    मथुरा. वृंदावन का निधिवन एक ऐसी रहस्यमई जगह, जहां आज भी कई लोगों का दावा हैं कि शाम ढलने के बाद भगवान श्री कृष्ण और राधारानी रास करने आते हैं. निधिवन के पड़ोस में रहने वालों का कहना है कि मैंने महसूस किया है बांसुरी और पायल की रात को आवाज सुनी है. निधिवन के पड़ोस में बने ज्यादातर घरों में खिड़कियां नहीं है, क्योंकि मान्यता है कि अगर जो भी राधा-रानी को देखता है वह या तो पागल हो जाता है या उसके साथ कुछ इससे भी ज्यादा बुरा हो सकता है. वहीं इन सब के बीच वृंदावन में रहने वाली निधिवन के पड़ोसी घर की एक बुजुर्ग महिला ने कई रहस्यमई खुलासे किए हैं. बुजुर्ग महिला की उम्र लगभग 99 साल बताई जा रही है.

    पड़ोस की बुजुर्ग महिला सेवा देवी का दावा है कि रात को राधिका जी आती है और श्रंगार करती हैं, उनके कपड़े बिखरे हुए मिलते हैं, पान चबा हुआ मिलता है. उनका यह भी दावा है कि रात को उन्होंने अक्सर घुंघरू, पायल और बंसुरी की आवाज सुनी है. जिसके बाद बुजुर्ग महिला अपनी छत पर गई जहां की दिवआल निधिवन से लगी हुई थी. छत पर बुजुर्ग महिला की बहु भी पहुंची. बुजुर्ग महिला ने यह भी दावा किया कि राधा-रानी के चलने की आवाज आती है लेकिन वह दिखते किसी को नहीं है.

    वहीं बुजुर्ग महिला की बहु राज कुमारी ने दावा किया है कि रात में यह पेड़ सखी बन जाते हैं और इन पेड़ों में कालापन आ जाता है और शाम होते ही सभी जानवर पक्षी यहां से बाहर निकल जाते हैं. राज कुमारी ने यह भी दावा किया कि अगर कोई यहां भगवान को देख ले वह खत्म हो जाता है, 2 साल पहले एक परदेशी निधिवन में रुकने आया था लेकिन सुबह तक वह खत्म हो गया था. बता दें यह दावा निधिवन के पड़ोस में रहने वालों का है न्यूज18 इस बात की किसी भी तरह से पुष्टि नहीं करता है.