Category: Dharam

  • अगर सड़क पर दिखे ये 5 चीजेंˈ तो भूलकर भी न करें पार वरना जीवन में आने लगती हैं परेशानियाँˌ

    अगर सड़क पर दिखे ये 5 चीजेंˈ तो भूलकर भी न करें पार वरना जीवन में आने लगती हैं परेशानियाँˌ

    अगर सड़क पर दिखे ये 5 चीजेंˈ तो भूलकर भी न करें पार वरना जीवन में आने लगती हैं परेशानियाँˌ

    आपने अक्सर अपने घर के बड़ों के मुंह से सुना होगा कि चौराहा मत लांघना, चौराहे के बीच से मत जाना साइड से होकर जाना, सड़क पर पड़ी इन चीजों पर पैर मत रखना आदि। जहां एक ओर इन बातों का कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है तो वहीं, दूसरी ओर इन बातों का ज्योतिष शास्त्र में बहुत महत्व माना जाता है। कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो अगर सड़क पर पड़ी दिख जाएं तो इस बात का ख्याल रखना बहुत जरूरी है कि भूल से भी उन वस्तुओं पर आपका पैर न पड़े।

    सड़क पर पड़े मरे जीव को न लांघें :

    ऐसा माना जाता है कि मरे हुए जीव पर अगर गलती से भी पैर पड़ जाए तो यह न सिर्फ पाप की गिनती में आता है बल्कि मरे हुए जीव के शरीर से निकने वाली नकारात्मकता भी व्यक्ति पर हावी होने लगती है।

    सड़क पर पड़ी जली लकड़ी को न लांघें :

    जली हुई लकड़ी दो चीजों का प्रतीक होती है, एक या तो उस लकड़ी से किसी का अंतिम संस्कार हुआ हो या फिर उस लकड़ी से कोई तांत्रिक प्रयोग किया गया हो। एस एमें जली हुई लकड़ी पर भी पैर न रखें।

    सड़क पर पड़े बालों को न लांघें :

    व्यक्ति के शरीर में अच्छी या बुरी दोनों ही ऊर्जा का प्रवेश सबसे पहले सिर के माध्यम से होता है। ऐसे में व्यक्ति के बालों में भी वह ऊर्जा पनपने लगती है। इसलिए सड़क पर पड़े बालों पर पैर रखने से बचें।

    सड़क पर पड़े खाने को न लांघें :

    अन्न का अनादर तो स्वयं भगवान का अनादर माना गया है। इसके अलावा, अनाज का इस्तेमाल टोने-टोटके के लिए भी होता है। ऐसे में अगर सड़क पर आप खाना पड़ा देखें तो उस पर पैर रखने से बचें।

    सड़क पर पड़ी ऐसी चीजें भी न लांघें :

    सड़क पर पड़े वस्त्र खास तौर पर अगर वह काले रंग का है, कटा-फटा जूता, चूड़ियां, कुमकुम-सिंदूर, नींबू, मिर्च, लौंग, कपूर आदि चीजें भी भूल से भी पैरों से स्पर्श न करें नहीं तो नकारात्मक ऊर्जा हावी होती है।

  • इतने बड़े तपस्वी होकर भी परशुराम जीˈ ने क्यों काटा अपनी मां का गला? यहां पढ़िए पूरी कथा…ˌ

    इतने बड़े तपस्वी होकर भी परशुराम जीˈ ने क्यों काटा अपनी मां का गला? यहां पढ़िए पूरी कथा…ˌ

    इतने बड़े तपस्वी होकर भी परशुराम जीˈ ने क्यों काटा अपनी मां का गला? यहां पढ़िए पूरी कथा…ˌ

    भगवान परशुराम ने सदा ही धर्म के लिए अपना परशु उठाया, उनके क्रोध से देवी-देवता थर-थर कांपते थे। पर क्या आप जानते हैं कि भगवान परशुराम जी ने अपनी ही मां रेणुका का गला काट दिया था, वो भी अपने पिता ऋषि जमदग्नि के आदेश पर।

    यह कथा बहुत मार्मिक और धार्मिक शिक्षाओं से जुड़ी हुई है। जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

    भगवान परशुराम पराक्रम के प्रतीक माने जाते हैं. वह अपने माता-पिता के परम भक्त थे। उनकी मां रेणुका अत्यंत पवित्र, पतिव्रता और तेजस्विनी थीं। एक दिन वे नदी से पानी भरने गईं, तभी उन्होंने एक राजा और रानी को प्रेम भाव में देखा, जिससे उनके मन में क्षणभर के लिए मोह भाव उत्पन्न हो गया। ऋषि जमदग्नि को यह ज्ञात हो गया, क्योंकि वे तपस्वी और त्रिकालज्ञ थे। इस “मानसिक विचलन” को उन्होंने पाप माना और अपने पुत्रों को आदेश दिया कि वे अपनी मां का सिर काट दें।

    पहले चारों पुत्रों (व्यासु, विश्ववासु, शुतसन और वसु) ने मना कर दिया, तो ऋषि ने उन्हें श्राप दे दिया। परशुराम ने अपने पिता की आज्ञा मानकर अपनी मां का सिर काट दिया। ऋषि जमदग्नि अपने पुत्र परशुराम से प्रसन्न हुए और कहा कि जो वर मांगना हो, मांग लो। तब परशुराम ने कहा था- ‘मुझे मेरी मां को पुनर्जीवित करने का वर दीजिए और मेरे भाइयों को भी उनके पुराने स्वरूप में लौटा दीजिए।’ ऋषि ने यह वरदान दे दिया और रेणुका माता पुनः जीवित हो गईं।

    हालांकि परशुराम जी ने अपने पिता की आज्ञा मानी थी, लेकिन मां का गला काटने के अपराध का उन्हें अत्यंत पश्चाताप हुआ। मान्यता है कि भगवान परशुराम जी ने पश्चाताप स्वरूप उत्तर भारत में स्थित “महादेव मंदिर” या “पशुपतिनाथ मंदिर” (कुछ मान्यताओं में नेपाल का पशुपतिनाथ) जाकर घोर तपस्या की थी। इसके अलावा, भारत के कई स्थानों पर “परशुराम कुण्ड” और “परशुराम तपस्थल” मौजूद हैं, जहां वे प्रायश्चित के लिए गए थे, जैसे:परशुराम कुंड (अरुणाचल प्रदेश), जनपाव (मध्यप्रदेश) और रेणुका तीर्थ (हिमाचल प्रदेश)।

  • भिखारी बना देते हैं पुरुषों द्वारा किएˈ गए ये काम, घर में नहीं टिकता रुपया-पैसा, पूरी फैमिली ढोती है कर्ज का बोझ!!ˌ

    भिखारी बना देते हैं पुरुषों द्वारा किएˈ गए ये काम, घर में नहीं टिकता रुपया-पैसा, पूरी फैमिली ढोती है कर्ज का बोझ!!ˌ

    भिखारी बना देते हैं पुरुषों द्वारा किएˈ गए ये काम, घर में नहीं टिकता रुपया-पैसा, पूरी फैमिली ढोती है कर्ज का बोझ!!ˌ

    वास्‍तु शास्‍त्र में धन को लेकर कुछ बातें बताई गई हैं. कई बार लोग जाने-अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे लक्ष्‍मी जी रूठ जाती हैं.

    पुरुषों द्वारा की गई गलितयां भी मां लक्ष्‍मी को नाराज कर सकती हैं, जिससे घर की बरकत चली जाती है.

    आर्थिक तंगी, कर्ज और नकारात्‍मकता घेर लेती हैं. लिहाजा ये काम ना करें.

    पुरुष ना करें ये ग‍लतियां

    – कई बार शाम को पुरुष ऑफिस से आकर सो जाते हैं, ऐसा करना ठीक नहीं है. कभी भी शाम के समय या गोधूली बेला में ना सोएं. चाहें तो अधलेटे रहकर हल्‍का सा आराम कर सकते हैं लेकिन शाम के समय सोना ठीक नहीं है.

    – पैसे और वॉलेट हमेशा जगह पर और सम्‍मानपूर्वक रखें. यहां-वहां वॉलेट फेंक देना धन की देवी लक्ष्‍मी जी को नाराज कर देता है. साथ ही पर्स या वॉलेट में नुकीली चीजें, फालतू कागज, बेवजह के बिल आदि ना रखें.

    – पर्स-वॉलेट अच्‍छी स्थिति में हो. फटा हुआ, कलर निकला खराब पर्स ना रखें.

    – अकेले रहें या परिवार के साथ ना तो गंदे कपड़े पहनें और ना गंदगी से रहें. हमेशा अपने आपको और आसपास के माहौल को व्‍यवस्थित रखें.

    – कभी भी पत्‍नी, मां, बहन का अपमान ना करें. घर की महिलाओं के साथ अभद्र भाषा का उपयोग करना, उनका अपमान करना आपको लक्ष्‍मी जी की हमेशा की नाराजगी दिला सकती है. ऐसी गलती कभी ना करें.

    – घर का मुखिया कभी भी दक्षिण दिशा में मुंह करके खाना ना खाएं. इससे उसकी सेहत और करियर पर बुरा असर पड़ता है.

    दूसरा बड़ा मंगल आज, कर लें ये उपाय, छू भी नहीं पाएंगी कोई परेशानी-कष्‍ट

    (Disclaimer – प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है.

  • सिर्फ रात को ही क्यों निकाली जातीˈ है किन्नरों की शव यात्रा, वजह जानकर चौंक जायेंगे आपˌ

    सिर्फ रात को ही क्यों निकाली जातीˈ है किन्नरों की शव यात्रा, वजह जानकर चौंक जायेंगे आपˌ

    सिर्फ रात को ही क्यों निकाली जातीˈ है किन्नरों की शव यात्रा, वजह जानकर चौंक जायेंगे आपˌ

    किन्नरों को हमारे समाज में तीसरे लिंग यानी ‘थर्ड जेंडर’ का दर्जा प्राप्त है। हम सभी ने देखा है कि इनकी जिंदगी हमारी तरह सामान्य नहीं होती। इनके जीवन जीने के तरीके, रहन-सहन सब कुछ अलग-अलग होते हैं। शायद आप इनकी रहस्यमयी दुनिया के बारे में जानते भी न हों, इसलिए आज हम आपको इनकी दुनिया से रूबरू कराएंगे जहां बहुत से रिवाज है। क्या आप जानते हैं जन्म से लेकर मरण तक इनके अलग-अलग नियम है। जी हां, आपने इनके जन्म की खबरें देखी होंगी या इन घटनाओं से वाकिफ होंगे लेकिन क्या कभी आपने किसी किन्नर की शव यात्रा देखी है..?

    शायद नहीं। है न… ऐसा क्यों है यह हम आपको बताते हैं। शव को सभी से छुपा कर रखा जाता है। जी हां, जहां ज्यादातर शव यात्रा दिन में निकाली जाती है, वहीं किन्नरों की शव यात्रा रात में निकाली जाती है। दरअसल, किन्नरों की शव यात्रा रात में इसलिए निकाली जाती है ताकि कोई इंसान इनकी शव यात्रा ना देख सके। ऐसा क्यों किया जाता है यहां जान लें… किन्नर समाज में ऐसा रिवाज रहा है। साथ में ये भी मान्यता है कि इस शव यात्रा में इनके समुदाय के अलावे दूसरे समुदाय के किन्नर भी मौजूद नहीं होने चाहिए। किन्नर समाज में किसी की मौत होने पर ये लोग बिल्कुल भी मातम नहीं मनाते, क्योंकि इनका रिवाज है कि मरने से उसे इस नर्क वाले जीवन से छुटकारा मिल गया।

    इसलिए ये लोग चाहे जितने भी दुखी हों, किसी अपने के चले जाने से मौत पर खुशियां ही मनाते हैं। ये लोग इस खुशी में पैसे भी दान में देते हैं। ये कामना करते हैं कि ईश्वर जाने वाले को अच्छा जन्म दे। सबसे अजीब बात तो ये है कि ​किन्नरों के समाज में किसी की मौत होने पर ये लोग शव को अंतिम संस्कार से पहले जूते-चप्पलों से पीटते हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा करने से मरने वाले के सारे पापों का प्रायश्चित हो जाता है। हालांकि किन्नर हिन्दू धर्म को मानते हैं, लेकिन ये लोग शव को जलाते नहीं हैं बल्कि उन्हें दफनाते हैं।

  • चुटकी भर नमक है चमत्कारी बना देगाˈ आपको करोड़पति जानिए कैसे? क्लिक करके जाने पूरी खबरˌ

    चुटकी भर नमक है चमत्कारी बना देगाˈ आपको करोड़पति जानिए कैसे? क्लिक करके जाने पूरी खबरˌ

    चुटकी भर नमक है चमत्कारी बना देगाˈ आपको करोड़पति जानिए कैसे? क्लिक करके जाने पूरी खबरˌ

    हर किसी के घर में किचन के अंदर नमक का प्रयोग किया जाता है नमक का प्रयोग खाने को स्वादिष्ट बनाने में किया जाता है खाने में नमक की एक अलग ही जगह होती है यदि नमक का इस्तेमाल खाने में कम या ज्यादा हो जाए तो इससे खाने का स्वाद खराब भी हो जाता है परंतु क्या आप इस बात को जानते हैं कि नमक सिर्फ खाने में ही काम नहीं आता है अपितु इसके और भी बहुत से फायदे होते हैं यदि हम ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखे तो नमक का ताल्लुक आपके घर की सुख समृद्धि से भी होता है चुटकी भर नमक व्यक्ति की बहुत सारी परेशानियों का समाधान कर सकता है यदि व्यक्ति के घर में दरिद्रता की परेशानी है तो चुटकी भर नमक आपकी समस्याओं को दूर कर सकता है आज हम आपको इस लेख के माध्यम से नमक के कुछ उपाय के बारे में बताने जा रहे हैं जिसको आप प्रयोग में लाकर धन लाभ के साथ-साथ सुख समृद्धि भी प्राप्त कर सकते हैं।

    आइए जानते हैं नमक के इन उपायों के बारे में:-

    घर से दरिद्रता दूर करने के लिए:-

    यदि किसी व्यक्ति के घर में दरिद्रता फैली हुई है तो घर से दरिद्रता को दूर करने और धन लाभ प्राप्त करने के लिए हर सुबह के समय एक बेहद आसान और छोटा सा उपाय करना पड़ेगा इसके लिए आप रोजाना सुबह के वक्त घर में पोछा लगाते समय पानी में थोड़ा सा साबुत खड़ा नमक मिला लीजिए यदि आप इस उपाय को करते हैं तो इससे घर से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती है इसके साथ ही धन लाभ और परिवार में शांति और सुख समृद्धि का वातावरण भी बनता है।

    घर में बरकत के लिए:-

    आप लोगों ने देखा होगा कि घर में पैसा आता तो है मगर टिक नहीं पाता है तो ऐसे में अपने घर में बरकत लाने के लिए एक कांच के पात्र में या आप किसी कांच की कटोरी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं पात्र में थोड़ा सा मोटा नमक लीजिए और उस कटोरी में नमक के साथ चार पांच लौंग भी रखिए और उसके बाद आपको यह कटोरी घर के किसी भी कोने में रख देना है यदि आप इस उपाय को करते हैं तो इससे घर में बरकत होती है।

    पैसों के प्रवाह के लिए:-

    कभी-कभी घर में ऐसा हो जाता है कि घर के खर्चे के लिए ठीक से पैसे नहीं होते हैं और कभी-कभी इतना अधिक पैसा आ जाता है कि उसका किस प्रकार इस्तेमाल किया जाए यह सोचना कठिन हो जाता है यदि आप अपने घर में पैसों का प्रवाह सामान्य रूप से बनाए रखना चाहते हैं तो वास्तु शास्त्र के अनुसार कांच का एक गिलास लेकर उसमें पानी भरकर नमक मिला लीजिए और घर के दक्षिण पश्चिम कोने में रख दीजिए और आप गिलास के पीछे किसी लाल रंग के बल्ब को लगा दीजिए बल्ब को इस तरीके से लगाएं जिससे बल्ब जले तो कांच के गिलास पर सीधी रोशनी पड़े जब भी गिलास में पानी सूख जाए तो गिलास को साफ करके उसमें दोबारा नमक मिलाकर पानी भर दीजिए यदि आप इस उपाय को करते हैं तो आपके घर में नियमित रूप से पैसो का सामान्य प्रवाह होता रहता है।

  • लातों के भूत होते हैं ये 5ˈ लोग, प्यार की भाषा नहीं समझते, इनसे विनम्रता से पेश आना मूर्खता हैˌ

    लातों के भूत होते हैं ये 5ˈ लोग, प्यार की भाषा नहीं समझते, इनसे विनम्रता से पेश आना मूर्खता हैˌ

    लातों के भूत होते हैं ये 5ˈ लोग, प्यार की भाषा नहीं समझते, इनसे विनम्रता से पेश आना मूर्खता हैˌ

    कहते हैं प्यार से बात करने से सारी मुश्किलें हल हो जाती है। लेकिन कुछ लोग प्यार की भाषा नहीं समझते हैं। वह कहते हैं ना कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते, बस ऐसा ही हाल इन लोगों का भी होता है। ऐसे में आज हम आपको उन पांच लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके साथ आपको कभी भी प्यार से बात नहीं करनी चाहिए। इन लोगों का जिक्र गरुड़ पुराण में भी किया गया है।

    गरुड़ पुराण सनातन धर्म में 18 महापुराणों में से एक मानी जाती है। इसमें जीवन जीने के तरीकों को बताया गया है। साथ ही कर्मों के अनुसार मौत के बाद आपके साथ क्या क्या होता है इसका जिक्र भी पढ़ने को मिलता है। कहा जाता है कि एक बार यदि व्यक्ति गरुड़ पुराण में कही गई बातों को जीवन में उतार ले तो उसका वर्तमान जीवन और मौत के बाद की लाइफ दोनों ही अच्छी हो जाती है।

    इन लोगों से प्यार से बात करना है बेकार

    1. जो लोग बहुत गुस्सा करते हैं उनके साथ आप प्यार से पेश ना आए। यदि आप उनसे शांत स्वभाव में रहकर बात करेंगे तो वह आपको कमजोर समझेंगे। फिर वह आपको दबाने का प्रयास करेंगे। आपके ऊपर हावी होने लगेंगे। ऐसे दुष्ट और क्रोधित नेचर के व्यक्ति संग कठोरता से पेश आना ही सही होता है। इससे वह भी अपनी सीमा में रहते हैं।

    2. लापरवाह लोगों के साथ भी विनम्रता और प्यार से पेश आना मूर्खता होती है। ये लोग अक्सर आपके काम को किसी ना किसी बात का बहाना बनाकर टाल देते हैं। इसलिए इन पर दया और प्यार दिखाने से आपका काम कभी नहीं होगा। वहीं थोड़ी कठोरता दिखाकर आप इनसे अपना काम जल्दी निकलवा सकते हैं।

    3. नौकरों के साथ भी प्रेम से पेश नहीं आना चाहिए। इनसे यदि आप नम्र बनकर रहेंगे तो ये अपको अपना दोस्त समझ लेंगे। फिर आपका अपमान करने से लेकर आपकी आज्ञा का पालन ना करने तक, कई काम करेंगे। इसलिए इनसे सख्ती से पेश आने पर ये आपका काम समय पर और पूर्ण ईमानदारी से करेंगे।

    4. महिलाओं के साथ भी हद से ज्यादा प्यार से बात नहीं करनी चाहिए। इनसे समय-समय पर थोड़ा सख्त होकर बात करना चाहिए। इस तरह ये घर को एकजुट कर के चलेंगी। वहीं अधिक प्यार से पेश आने पर ये निरंकुश हो जाएंगी और अपनी मनमानी करेंगी। गलतियां करने पर भी इन्हें पछतावा नहीं होगा।

    5. ढोलक और अन्य वाद्य यंत्रों के साथ भी प्यार से पेश आना मूर्खता होती है। इन्हें प्यार से बजने पर ये अच्छी आवाज नहीं देंगे। वहीं इन्हें कठोरता से पीटने पर और तेज थाप देने पर ये आपकी पसंद की आवाज निकालेंगे।

  • खाने से पहले थाली के चारों ओरˈ जल क्यों छिड़कते हैं? जाने इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारणˌ

    खाने से पहले थाली के चारों ओरˈ जल क्यों छिड़कते हैं? जाने इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारणˌ

    हमारे हिंदू धर्म में कर प्रकार के रीति विवाज और परम्पराएं हैं। इनमें से कई का आध्यात्मिक कारण होने के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी होता है। आप ने देखा होगा कि जब भी बड़े बुजुर्ग भोजन शुरू करते हैं तो पहले थाली के चारों ओर पानी छिड़कते हैं। ऐसे में क्या आप ने कभी सोचा है कि आखिर ये जल का छिड़कवाव क्यों किया जाता है? इसकी क्या वजह है? चलिए जानते हैं।

    क्यों छिड़का जाता है भोजन के पहले जल?

    खाने से पहले थाली के चारों ओरˈ जल क्यों छिड़कते हैं? जाने इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारणˌ

    सबसे पहले बता दें कि भोजन की थाली के चारों ओर जल का छिड़कना या भोजन शुरू करने से पूर्व मंत्रों का उच्चारण करना काफी पुरानी परंपरा है। इसे हर क्षेत्र में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे नॉर्थ इंडिया में इसे आमचन और चित्र आहुति कहा जाता है। तमिलनाडु की बात करें तो वहाँ ये परंपरा परिसेशनम नाम से फेमस है।

    धार्मिक कारण

    आज हम आपको भोजन की थाली के चारों ओर जल का छिड़काव करने की असली वजह बताने जा रहे हैं। इसे जानने के बाद आप यह जानकारी युवा पीढ़ी को भी देना ताकि वे भी इस परंपरा को आगे तक ले जाए। इस परंपरा की धार्मिक वजह की बात करें तो ये एक तरह से अन्न देवता के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक तरीका होता है। इससे अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा खुश होती हैं। उनके आशीर्वाद से भक्तों के घर हमेशा बरकत बनी रहती है। उन्हें धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है।

    वैज्ञानिक कारण

    आपको जान हैरानी होगी कि भोजन से पहले जल छिड़कने का वैज्ञानिक कारण भी है। दरअसल पुराने लोग अक्सर जमीन पर बैठकर खाना खाया करते थे। ऐसे में उनके खाने की खुशबू से छोटे मोटे कीड़े मकोड़े भी आकर्षित होकर उनके पास चले आते थे। ऐसे में जब थाली के चारों ओर पानी छिड़क दिया जाता था तो वे भोजन थाली में प्रवेश नहीं कर पाते थे। इसके अलावा जमीन पर थाली के आसपास मौजूद धूल मिट्टी भी पानी से बैठ जाया करती थी।

    खाने से जुड़ी अन्य परंपराएं

    खाने से जुड़ी एक और प्रचलित परंपरा है। जब भी लोग भोजन करना शुरू करते हैं तो उसका कुछ हिस्सा थाली में या बाहर रख देते हैं। ऐसे वह भगवान को पहला भोग लगाने को करते हैं। हालांकि कुछ लोगों का ये भी मानना होता है कि यह पहला हिस्सा हमारे आसपास मौजूद अलौकिक शक्तियों या मृत पूर्वजों के नाम होता है।

    इसी तरह जब हम घर से बाहर किसी पार्क या अन्य खुली जगह पर खाना शुरू करते हैं तो भोजन का कुछ हिस्सा आसपास डाल देते हैं। इससे बुरी शक्तियां खाने की खुशबू से हमारी ओर आकर्षित नहीं होती है। उन्हें लगता है हमने ये हिस्सा उनके सम्मान में दिया है। फिर वह हमे परेशान नहीं करती हैं।

  • इस राशि के पुरूषों की अपनी पत्नीˈ से कभी नहीं बनती हैं कहीं आप भी तो नहीं है शामिलˌ

    इस राशि के पुरूषों की अपनी पत्नीˈ से कभी नहीं बनती हैं कहीं आप भी तो नहीं है शामिलˌ

    इस राशि के पुरूषों की अपनी पत्नीˈ से कभी नहीं बनती हैं कहीं आप भी तो नहीं है शामिलˌ

    यूं तो शादी दो दिलों का मेल होता है, लेकिन हर कपल का दिल मिले ये जरूरी नहीं होता है। कई बार शादियां दबाव में हो जाती है, तो कई बार मेल होने के बाद भी कई तरह की अनबन देखने को मिलती है। पति पत्नी के बीच छोटी मोटी अनबन होती ही रहती हैं, लेकिन कई बार ये अनबन बहुत ही बढ़ हो जाती है, जिसकी वजह से कुछ समस्या पैदा हो जाती है। आज हम आपको कुछ ऐसी राशियों  के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी अपनी पत्नी से कभी नहीं बनती है। चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में क्या खास है?

    आज हम आपको उन राशियों के बारे में बताएंगे, जिनमें 80 प्रतिशत लोग ऐसे होते हैं, जिनकी उनकी पत्नी के साथ बिल्कुल नहीं बनती है। इसके पीछे की वजह सिर्फ अपना नेचर होता है। ऐसा नहीं है कि उनके बीच प्यार नहीं होता है, बल्कि प्यार तो कूट कूट के भऱा होता है, लेकिन व्यवहार की वजह से अनबन होती ही रहती है।

    वृषभ राशि

    इस राशि के जातक थो़ड़े शकी स्वभाव के होते हैं, ये अपनी पत्नी सिर्फ शक ही करते हैं। लेकिन ये प्यार भी बहुत ज्यादा करते हैं। बता दें कि इनकी आदत की वजह से इनकी पत्नियां इनसे नाखुश रहती हैं, जिसकी वजह से इनके बीच काफी झगड़ा भी होता है। यहाँ तक कि ये अपनी बीवी का मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट भी चेक करते रहते हैं, ऐसे में इनकी अपनी पत्नी के साथ बहुत ही कम बनती है। ये बहुत ही ज्यादा रोक टोक करते रहते हैं।

    मिथुन राशि

    मिथुन राशि के जातक की भी अपनी पत्नी से नहीं बनती है। इनका स्वभाव थोड़ा गुस्सा वाला होता है। जिसकी वजह से ये अक्सर अपनी पत्नी पर गुस्सा ही करते रहते हैं। इनका गुस्सा इतना ज्यादा हो जाता कि नौबत मार पीट पर आ जाती है, जिसकी वजह से इनकी पत्नी इन्हें छोड़कर भी चली जाती है। इतना ही नहीं, इनके अंदर घंमड भी होता है, ऐसे में ये अपनी गलती होने के बावजूद भी ये माफी मांगने की कोशिश तक भी नहीं करते हैं।

    मकर राशि

    इस राशि के पुरूष बहुत ही ज्यादा जिद्दी स्वभाव के होते हैं, जिसकी वजह से इनका रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चल पाता है। ये अपनी पत्नी को हमेशा दबा के रखना चाहते हैं, जिसकी वजह से इनकी पत्नी भी इनकी इज्जत नहीं करती है। बता दें कि ये अपनी पत्नी के विचारों को भाव नहीं देते हैं। इनके बीच प्यार कम और लड़ाई झगड़ा ज्यादा देखने को मिलता है, ऐसे में इन्हें अपने स्वभाव को बदलने की सख्त जरूरत होती है।

  • हर पत्नी में रहती है ये गंदीˈ आदत, पति हो या मां बाप कोई नहीं सुधार पाताˌ

    हर पत्नी में रहती है ये गंदीˈ आदत, पति हो या मां बाप कोई नहीं सुधार पाताˌ

    कहते हैं इंसान का बेसिक नेचर उसके बचपन से ही तय हो जाता है। जैसे कोई शख्स बड़ा होकर कितना क्रोधित, चंचल, शरारती, मजाकिया, बुद्धिमान, मूर्ख, ईमानदार, बेईमान इत्यादि होगा उसका अंदाजा उसके बचपन से ही लगाया जा सकता है। पत्नियों को लेकर भी कुछ आदतें बचपन से तय हो जाती है। इनमें कुछ ऐसी बुरी आदतें होती है जो इनका बेसिक नेचर होता है। फिर इसे बाद में मां-बाप या पति कोई भी नहीं बदल सकता है।

    आचार्य चाणक्य ने भी इन आदतों का जिक्र अपनी चाणक्य नीति में किया है। उन्होंने स्त्री की कुछ ऐसी आदतों को बताया है जो हमेशा एक जैसी रहती है। उसे वह जीवनभर नहीं सुधार पाती है। स्त्रियों का यह स्वभाव बचपन से ही तय हो जाता है। तो चलिए जानते हैं कि ये बुरी आदतें कौन-कौन सी हैं।

    1. झूठ बोलकर अपना उल्लू सीधा करना

    हर पत्नी में रहती है ये गंदीˈ आदत, पति हो या मां बाप कोई नहीं सुधार पाताˌ

    आचार्य चाणक्य की माने तो स्त्री हर बात पर झूठ बोलने में माहिर होती हैं। उनका यह अवगुण बचपन से ही रहता है। वह अपनी जरूरत के अनुसार झूठ बोलती हैं। कभी खुद को बचाने के लिए तो कभी अपना काम निकलवाने के लिए उनके मुंह से झूठ निकल आता है। हालांकि ये झूठ कभी-कभी किसी के भले के लिए भी होता है। वहीं कभी निजी स्वार्थ के लिए होता है।

    2. बिना सोचे समझे बहादुरी दिखाना

    आचार्य चाणक्य की माने तो स्त्री बहुत साहसी होती है। लेकिन कई बार उनकी ये बहादुरी उन्हें मुसीबत में भी डाल देती है। वह अपना साहस दिखाने से पहले उसके परिणाम का आकलन नहीं करती है। इस चक्कर में कई बार उनकी बहादुरी उन्हें खतरे में डाल देती है। इसलिए बिना सोचे समझे साहस दिखाने वाली स्त्रियों से दूर रहना चाहिए, वरना वह आपको भी खतरे में डाल सकती है।

    3. हमेशा अपना स्वार्थ देखना

    चाणक्य नीति के अनुसार महिलाएं अपने निजी स्वार्थ को हमेशा प्राथमिकता देती है। वह दूसरों के अनुसार कम चलती है। वह आपको चिकनी-चुपड़ी बातों से फंसाती है। अपने फायदे के लिए किसी का भी इस्तेमाल कर लेती है या उन्हें छोड़ देती है। वह धोखा देने में भी माहिर होती है। हालांकि सभी स्त्री ऐसी नहीं होती है।

    4. मूर्खता भरे काम करना

    चाणक्य नीति की माने तो स्त्रियां अक्सर ऐसे काम भी कर देती हैं जिनका कोई लॉजिक नहीं होता है। फिर वह ऐसे कामों को करने के बाद पछताती हैं। ये महिलाएं बाकी लोगों की बातों में आ जाती है। खुद के दिमाग से नहीं सोचती हैं। इनके माइंड को कोई भी चेंज कर देता है। ये दूसरों की नकल भी करती हैं।

    5. पैसों का लालच

    आचार्य चाणक्य की माने तो हर स्त्री धन की लालची होती है। उन्हें बस अपने पास ज्यादा से ज्यादा पैसा चाहिए होता है। कई बार इस धन की चाहत में वह सारी हदें पार कर देती हैं। दूसरों को हानि तक पहुंचा देती हैं। पैसों के मोह में वह गलत राह पर निकल पड़ती हैं। उन्हें सही गलत की समझ नहीं होती है।

  • जहरीले सांप होते हैं ये 3 लोग,ˈ ये मर भी रहे हो तो इनकी मदद मत करनाˌ

    जहरीले सांप होते हैं ये 3 लोग,ˈ ये मर भी रहे हो तो इनकी मदद मत करनाˌ

    अक्सर यही सीख दी जाती है कि उदार बनो। दूसरों की मदद करो। उन पर दया दिखाओ। लेकिन ये सभी चीजों कुछ खास तरह के लोगों के लिए की जाए तो ही अच्छा होता है। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके ऊपर भूलकर भी दया नहीं करनी चाहिए। इनकी मदद करना मतलब खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारना। इन तीन लोगों के बारे में नीति शास्त्र के ज्ञाता आचार्य चाणक्य ने भी अपनी चाणक्य नीति (Chanakya Niti) बात की है।

    दुष्ट और चरित्रहीन महिला

    जहरीले सांप होते हैं ये 3 लोग,ˈ ये मर भी रहे हो तो इनकी मदद मत करनाˌ

    आचार्य चाणक्य की माने तो हमे ऐसी महिला की मदद करने से परहेज करना चाहिए जो स्वभाव से दुष्ट और चरित्रहीन है। जो स्त्री हमेशा दूसरों का अपमान करती है उनकी मदद ना करने में ही आपकी भलाई है। यदि आप ने मदद की तो वह आपका भी फायदा उठा सकती है। ऐसी महिलाओं को अक्सर धन का मोह होता है।

    ये स्त्री समाज में एक जहरीले सांप की तरह होती है। जो कभी भी आपको डस सकती है। ऐसी स्त्री अपनी आने वाली संतानों को भी यही गुण देती है। फिर उसकी संतान भी समाज के लिए आपदा बन जाती है। इसलिए इनकी मदद भूलकर भी ना करें।

    मूर्ख व्यक्ति

    आचार्य चाणक्य की माने तो कभी किसी मूर्ख शख्स की मदद नहीं करना चाहिए। इनसे कभी कोई दोस्ती या बहस भी नहीं करना चाहिए। इन्हें सलाह देना पूरी तरह से समय की बर्बादी है। यह मूर्ख शख्स अपने तर्क वितर्क से आपको हराने की कोशिश करेगा। आपकी बात नहीं समझेगा।

    आप चाहे उसके भले के लिए उसे समझाए, लेकिन वह बात अपने ईगो पर लेगा। यहां तक कि आपको अपना दुश्मन तक बना लेगा। फिर वह आपका कुछ बुरा भी कर सकता है। उससे रिश्ता रख आप भी मानसिक तनाव में रहेंगे। इसलिए ऐसे मूर्ख लोगों से जितना दूर रहें उतने आप खुश रहेंगे।

    नेगेटिव और हमेशा दुखी रहने वाले लोग

    आचार्य चाणक्य की माने तो हमे नेगेटिव विचारों वाले और हमेशा दुख का रोना रोने वाले लोगों से दूर रहना चाहिए। एक बुद्धिमान शख्स खुद को विकट स्थिति में भी पॉजिटिव सोच संतुष्ट कर सकता है। लेकिन एक मूर्ख और नेगेटिव इंसान कभी संतुष्ट नहीं होता है। वह हमेशा बुरा ही सोचता है।

    उसके मन में बुरे भाव रहते हैं। उसका दुख आपको भी दुखी कर सकता है। वह आपकी खुशी से जलन भी कर सकता है। कई बार वह सिर्फ दुखी होना का दिखावा करता है और माहौल में नेगेटिविटी फैला देता है। आपको ऐसे लोगों से जितना हो सके दूर ही रहना चाहिए। इनकी मदद भी नहीं करना चाहिए।