Category: Dharam

  • रामायण का डरावना सच! भगवान राम नेˈ कलयुग को लेकर की थी ये भविष्यवाणी! आज सही साबित हो रही है हर बात पढ़कर खड़े हो जाएंगे रोंगटेˌ

    रामायण का डरावना सच! भगवान राम नेˈ कलयुग को लेकर की थी ये भविष्यवाणी! आज सही साबित हो रही है हर बात पढ़कर खड़े हो जाएंगे रोंगटेˌ

    रामायण का डरावना सच! भगवान राम नेˈ कलयुग को लेकर की थी ये भविष्यवाणी! आज सही साबित हो रही है हर बात पढ़कर खड़े हो जाएंगे रोंगटेˌ

    हालांकि, रामायण के कुछ हिस्सों हैं जो अनकही बने हुए हैं और इस बारे में अध्ययन करते हैं। रामायण में एक हिस्सा है जिसमें भगवान राम ने कलयुग का वर्णन किया था।

    शास्‍त्रों में रामायण को सबसे पवित्र ग्रंथ बताया गया है। सतयुग में जन्‍मे भगवान श्रीराम की जन्‍मगाथा के बारे में हर हिंदू जानता है। इस युग में श्रीराम ने सदा सत्‍य और धर्म का पालन किया और माता सीता को मुक्‍त करवाने के लिए रावण का वध किया।

    श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध को आज भी बुराई पर अच्‍छाई की जीत के रूप में जाना जाता है। आज हम आपको रामायण से संबंधित एक वाक्‍ये के बारे में बताने जा रहे हैं।

    दरअसल, एक बार माता सीता ने भगवान राम से पूछा कि किस प्रकार कलयुग का समय आएगा। एक बार भगवान राम ने वैष्‍णो देवी को भी आशीर्वाद दिया था कि कलयुग के अंत में आएंगें और सभी राक्षसों और दुष्‍टों का नाश करेंगें। पृथ्‍वी के अंत में राम जी प्रकट होंगें। मां सीता ने बार-बार ऐसे प्रश्‍नों को भगवान राम से पूछा।

    तब माता सीता की उत्‍सुकता को जानते हुए भगवान राम ने कहा –

    कलयुग के अंत को लाने के लोगों को बुराई की तरफ आकर्षित किया जाएगा, कोई भी सत्‍य और ईमानदारी पर भरोसा नहीं करेगा। हर कोई बुरे कर्मों में लिप्‍त रहेगा। वासना सबसे बड़ा अधर्म बन जाएगा। भ्रष्‍ट और क्रूर लोग सुख-सुविधा से लबरेज़ जीवन जीएंगें। वासना से भरे लोग प्रचारक बनेंगें जैसे कि बाबा राम रहीम। अधर्म के वर्चस्‍व के कारण अच्‍छी आत्‍माएं पीडित होंगीं। कोई भी महिलाओं और लड़कियों का सम्‍मान नहीं करेगा। कानून केवल पैसे वालों की तिजोरी में बंद रहेगा। सभी की पहली जरूरत भौतिक सुख पाना होगा और किसी की भी भक्‍ति में दिलचस्‍पी नहीं होगी। संतान अपने माता-पिता को बहिष्‍कार उन्‍हें अकेला छोड़ देगी। विवाह जैसे पवित्र संस्‍कार भी कोई मायने नहीं रखेंगें। लोग अपने माता-पिता, गुरु और शिक्षकों का अनादर करेंगें। सामूहिक हत्‍याएं और आतंकवाद बढ़ेगा। पृथ्‍वी पर पानी सबसे महंगा हो जाएगा।

    आप भी कहीं ना कहीं भगवान राम की कलयुग के बारे में इन बातों से सहमत होंगें। आज कलयुग में ये सब होने लगा है। आप खुद इन चीज़ों को अपने आसपास होते हुए देख सकते हैं। बच्‍चे अपने माता-पिता को बुढापे में ओल्‍ड एज होम भेज रहे हैं और हर दिन हज़ारों महिलाएं रेप का शिकार हो रही हैं। अब तो वासना ही सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। यहां तक कि इस जरूरत को पूरा करने के लिए बच्‍चों तक का इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

    भगवान राम द्वारा बताई गई सारी बातें अब सच हो गई हैं। ऐसा लगता है कि कलयुग का अंत अब बहुत निकट आ गया है और कभी भी पृथ्‍वी पर ये युग भी इतिहास का पात्र बन सकता है। शास्‍त्रों की मानें तो कलयुग के अंत में भगवान विष्‍णु कल्कि अवतार में अवतरित होंगें। सभी को भगवान विष्‍णु के इस अवतार का इंतज़ार है और जिस तरह से धरती पर बेसहारा और गरीब लोगों पर अत्‍याचार बढ़ रहा है उससे तो इसका अंत जल्‍द ही हो जाना चाहिए, इसी में सबकी भलाई है।

  • रात को सोने से पहले करें येˈ टोटका उसके बाद जिंदगी में कभी भी पैसों की कमी नहीं होगीˌ

    रात को सोने से पहले करें येˈ टोटका उसके बाद जिंदगी में कभी भी पैसों की कमी नहीं होगीˌ

    रात को सोने से पहले करें येˈ टोटका उसके बाद जिंदगी में कभी भी पैसों की कमी नहीं होगीˌ

    इस दुनिया में पैसा बहुत महत्वपूर्ण चीज मानी जाती हैं और बहुत से व्यक्तियों को पैसों की कमी रहती है ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब घर में किसी प्रकार की समस्या या फिर किसी अन्य तरह की दिक्कत होती है तो घर में आया हुआ पैसा भी चला जाता है आज हम आपको इस लेख के माध्यम से एक ऐसे टोटके के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं यदि आप रात को सोने से पहले इस टोटके को करते हैं तो उसके पश्चात आपको कभी भी धन संबंधी परेशानी महसूस नहीं होगी।

    आइए जानते हैं इस टोटके के बारे में:-

    टोटका करने की सामग्री:-

    1. दो नींबू
    2. सूखी हुई लाल मिर्च
    3. 6 लौंग
    4. दो अगरबत्ती

    इस तरह कीजिए इस टोटके को:-

    आप सबसे पहले दो नींबू ले लीजिए उसके पश्चात आप एक छोटी सी सुई लीजिए और निम्बू में थोड़ा छेद कर दीजिये उसके पश्चात् आपको लौंग लेना होगा आप तीन लौंग को निम्बू में डाल दें इसके अतिरिक्त दूसरे निम्बू में आप तीन लौंग डाल दें इसके पश्चात् आपको धागा लेना होगा और लाल मिर्च लेनी होगी आप लाल मिर्च को धागे में बांध दें।

    जब आप यह सभी विधि कर ले तो उसके पश्चात धागे को नींबू के साथ बांध दें एक मिर्ची को पहले नींबू के साथ और दूसरे को दूसरे के साथ बांध दीजिए इसके पश्चात आपको रात को सोने से पहले अपने घर के मुख्य द्वार से थोड़ी सी बगल में उस नींबू को रख दीजिए इसके अतिरिक्त उसके सामने दो अगरबत्ती जला दीजिए यदि आप इस टोटके को करते हैं तो इससे आपके घर में जितने भी दोष हैं वह सभी दूर हो जाएंगे।

    नोट:- यदि आपको हमारे द्वारा दी गई जानकारी अच्छी लगी तो आप नीचे दिए हुए कमेंट बॉक्स में हमको कमेंट कर सकते हैं और इस पोस्ट को अपने परिवार के सदस्य और दोस्तों व साथियों के बीच शेयर भी कर सकते हैं हम आगे भी इसी प्रकार से जानने योग्य जानकारियां लेख के माध्यम से लाते रहेंगे धन्यवाद।

  • प्रेम की सबसे दर्दनाक कहानी! पुष्पवती औरˈ गंधर्व माल्यवान को इंद्र ने दिया था ये भयानक श्राप… रुला देगा सचˌ

    प्रेम की सबसे दर्दनाक कहानी! पुष्पवती औरˈ गंधर्व माल्यवान को इंद्र ने दिया था ये भयानक श्राप… रुला देगा सचˌ

    प्रेम की सबसे दर्दनाक कहानी! पुष्पवती औरˈ गंधर्व माल्यवान को इंद्र ने दिया था ये भयानक श्राप… रुला देगा सचˌ

    पुष्‍पवती और गंधर्व माल्‍यवान – पौराणिक समय की अनेक कथाओं का वर्णन शास्‍त्रों में मिल जाएगा।

    आज हम आपको एक पौराणिक कथा के बारे में ही बताने जा रहे हैं जोकि देवराज इंद्र से जुड़ी है। देवलोक की इस रोचक कथा की शुरुआत इंद्र की सभा से हुई थी और मिलन के लिए दो प्रेमियों को भयंकर श्राप से गुज़रना पड़ा था।

    इस प्रेम कथा में नायक माल्‍यवान हैं और नायिका पुष्‍पवती हैं। इंद्र की सभा में माल्‍यवान गायन किया करते थे और पुष्‍पवती एक गंधर्व की कन्‍या थी जो सभा में नृत्‍य किया करती थी। एक समय की बात है जब इन दोनों को ही इंद्र की सभा में एकसाथ अपनी-अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए बुलाया गया था।

    पुष्‍पवती और गंधर्व माल्‍यवान अपनी-अपनी कला से सभी का मन मोह रहे थे लेकिन कामदेव की ऐसी लीला हुई कि सभा में मौजूद सभासदों का मन मोहते-मोहते दोनों एक-दूसरे की कला और रूप से खुद ही मोहित होने लगे। परिणाम ये हुआ कि दोनों के सुर ताल अचानक से बिगड़ने लग गए।

    देवराज इंद्र ने पुष्‍पवती और गंधर्व माल्‍यवान की भाव-भंगिमा को देखकर तुरंत जान लिया कि वो दोनों एक-दूसरे के प्रति मोहित हो रहे हैं और अब उनका ध्‍यान कला से हट रहा है। क्रोधित होकर इंद्र ने दोनों को पिशाच योनि में जाने का श्राप दे दिया। श्राप के कारण दोनों स्‍वर्ग से बाहर होकर पिशाच बनकर हिमालय पर वास करने लगे।

    पुष्‍पवती और गंधर्व माल्‍यवान एकसाथ हिमालय पर रह कर अनेक तरह के कष्‍टों को सहन कर रहे थे। एक दिन माघ के महीने की शुक्‍ल पक्ष की एकादशी तिथि आई और इस दिन संयोग से दोनों को कहीं कुछ भोजन नहीं मिला। रात को दोनों ही भूखे रह गए। इस पर सर्दी के मौसम में दोनों ठिठुर रहे थे और ठंड की वजह से ही दोनों की मृत्‍यु हो गई।

    मृत्‍यु के पश्‍चात् दोनों वापिस स्‍वर्ग में पहुंच गए और वहां इन दोनों को देखकर देवराज इंद्र बहुत हैरान हुए। उन्‍होंने दोनों से पूछा कि श्राप के कारण तो तुम दोनों पिशाच योनि में चले गए थे फिर तुम्‍हें वापिस कैसे मुक्‍ति मिली। तब उन दोनों ने बताया कि अनजाने में ही उनसे जया एकादशी का व्रत हो गया था जिससे भूत, पिशाच की योनि से मुक्‍ति दिलवाने वाला कहा गया है।

    पुष्‍पवती और गंधर्व माल्‍यवान ने बताया कि भगवान विष्‍णु की कृपा से उन्‍हें फिर से गंधर्व बना दिया गया। ये सब सुनकर इंद्र ने कहा कि जब भगवान विष्‍णु ने ही तुम्‍हें क्षमा दे दी है तो मैं कौन होता हूं दंड देने वाला। दोनों प्रेमियों को देवराज इंद्र ने स्‍वर्ग में साथ रहने का वरदान दिया।

    तो कुछ इस तरह इस पौराणिक प्रेम कथा का सुखद अंत हुआ। देखा जाए तो प्राचीन समय में लोग बड़े ईमानदार और सत्‍य वचन बोलने वाले हुआ करते थे और इसी वजह से उनका श्राप फलित हो जाया करता था।

    आज के ज़माने में सभी ने अपने जीवन में कोई ना कोई पाप किया ही होता है और इसी वजह से अब ये श्राप वाली फिलॉस्‍फी नहीं चलती है। अब आप ऐसे ही गुस्‍से में आकर किसी को श्राप नहीं दे सकते हैं।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी इंटरनेट पर मौजूद स्रोतों से ली गई है। हमारा मकसद सिर्फ जानकारी देना है, इसमें दी गई बातों से हमारी अपनी कोई राय नहीं है। किसी भी जानकारी को अपनाने से पहले खुद सोच-समझकर फैसला लें

  • इस मंदिर के घड़े से असुर आजˈ भी पीते हैं पानी लेकिन दूध डालते ही हो जाता है ये चमत्कारˌ

    इस मंदिर के घड़े से असुर आजˈ भी पीते हैं पानी लेकिन दूध डालते ही हो जाता है ये चमत्कारˌ

    इस मंदिर के घड़े से असुर आजˈ भी पीते हैं पानी लेकिन दूध डालते ही हो जाता है ये चमत्कारˌ

    Sheetla Mata Temple: राजस्थान के महलों के साथ-साथ वहां के मंदिर भी रहस्यों से भरे हुए हैं. आज शीतलाअष्टमी के मौके पर चलिए आपको राजस्थान के शीतला माता मंदिर के रहस्यों से रूबरू कराते हैं.

    दूध का भोग लगते ही भर जाता है घड़ा
    हालांकि शीतला सप्तमी के मौके पर घड़े से पत्थर हटाया जाता है. जैसे ही माता के चरणों से लगाकर इस घड़े में दूध का भोग डाला जाता है, तो ये घड़ा पूरा ऊपर तक भर जाता है. वहीं इस घड़े पर कई रिसर्च हो चुकी हैं, लेकिन इस घड़े का रहस्य नहीं जाना जा सका है.

    असुर पी जाते हैं पानी
    स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां पर इस चमत्कार को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं. कहानी के मुताबिक जब भी घड़े में पानी भरा जाता है तो ये सारा पानी असुर पी जाता है. इसलिए घड़ा नहीं भरता है. माता के मंदिर में ये घड़ा सदियों से है, लेकिन कभी नहीं भरा है.

    घड़ा है चमत्कारी
    स्थानीय लोगों के मुताबिक ये घड़ा चमत्कारिक है. कहा जाता है कि इसमें कितना भी पानी डालो ये घड़ा कभी भी पूरा नहीं भरता. लेकिन जैसे ही इसमें दूध डाला जाता है तो फुल हो जाता है. इस चमत्कारिक घड़ा हमेशा ढका रहता है.

    8 सदी पुराना है मंदिर
    लगभग 8 सदी पुराने इस मंदिर को लेकर भक्तों में बहुत अधिक श्रद्धा है. यहां एक भूमिगत घड़ा है, जिसमें रखा हुआ पत्थर साल में सिर्फ दो बार बाहर निकाला जाता है. इन्हीं दोनों मौकों पर मंदिर में बड़े मेले को आयोजित किया जाता है.

    शीतला माता का मंदिर
    जयपुर के पाली जिले में स्थित शीतला माता मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है. यह न सिर्फ चमत्कारिक है बल्कि यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं को लेकर माता के दरबार में माथा टेकने आते हैं.

  • अद्भुत चमत्कार! इस मंदिर का मगरमच्छ नहींˈ खाता मांस मरने के बाद फिर जिंदा हो जाता है… वैज्ञानिक भी हैरानˌ

    अद्भुत चमत्कार! इस मंदिर का मगरमच्छ नहींˈ खाता मांस मरने के बाद फिर जिंदा हो जाता है… वैज्ञानिक भी हैरानˌ

    अद्भुत चमत्कार! इस मंदिर का मगरमच्छ नहींˈ खाता मांस मरने के बाद फिर जिंदा हो जाता है… वैज्ञानिक भी हैरानˌ

    शाकाहारी मगरमच्‍छ – जीवन के कई ऐसे सत्‍य हैं जिनके बारे में जानकर आपको हैरानी होगी।

    भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां की मान्‍यताओं के बारे में स्‍थानीय लोगों के अलावा और किसी को जानकारी नहीं है।

    आज हम आपको एक ऐसी ही मान्‍यता के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आपको उस पर विश्‍वास ही नहीं होगा। अमूमन जानवर मांसाहारी ही होते हैं और मगरमच्‍छ जैसा विशाल और खतरनाक जानवर भी मांस को ही अपना आहार बनाता है लेकिन धरती पर एक मगरमच्‍छ ऐसा भी है जो शाकाहारी है। दुनिया का ये अनोखा मगरमच्‍छ सिर्फ प्रसाद खाता है।

    भारत के इस शाकाहारी मगरमच्‍छ के बारे में हर कोई जानना चाहता है। आपको बता दें कि केरल के प्रसिद्ध मंदिर पद्मनाभास्‍वामी मंदिर के बीच एक तालाब स्थित है और ये शाकाहारी मगरमच्‍छ इसी तालाब में रहता है। पद्मनाभास्‍वामी मंदिर भगवान विष्‍णु का है और ये मंदिर की झील के बीच बना है। इस मगरमच्‍छ का नाम बबिआ है और ये मंदिर की रखवाली करता है।

    बबिआ नाम के मगरमच्‍छ से प्रसिद्ध इस मंदिर के बारे में यह भी मान्‍यता है कि जब इस झील में एक मगरमच्‍छ की मृत्‍यु होती है तो बड़े ही रहस्‍यमयी ढंग से दूसरा मगरमच्‍छ यहां प्रकट हो जाता है।

    मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के बाद उसे बबिआ को खिलाया जाता है किंतु प्रसाद खिलाने की अनुमति सिर्फ मंदिर के पुजारियों को ही है। बबिआ मगरमच्‍छ शाकाहारी है और वह झील के अन्‍य जीवों को नुकसान भी नहीं पहुंचाता है।

    क्‍या है इस मगरमच्‍छ का रहस्‍य

    ये मगरमच्‍छ अनंतपुर मंदिर की झील में करीब 60 सालों से रह रहा है। स्‍थानीय लोगों की मानें तो इस मगरमच्‍छ की सन् 1945 में अंग्रेजों ने गोली मारकर हत्‍या कर दी थी लेकिन दूसरे ही दिन फिर से ये मगरमच्‍छ फिर से वहां प्रकट हो गया। अब ये वही मगरमच्‍छ या फिर कोई और, ये तो पता नहीं लेकिन ये बात तो सच है कि ये शाकाहरी मगरमच्‍छ है जोकि अपने आप में काफी अनोखा है।

    भारत के सबसे धनी मंदिरों में शुमार पद्मनाभस्वामी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित केरल का सुप्रसिद्ध मंदिर हैं। कहा जाता है की यहां भगवान विष्णु स्वयंभू रूप में विराजमान हैं। हजारों भक्त दूर-दूर से शयन मुद्रा में विराजमान भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति के दर्शनों के लिये यहां आते हैं। किवदंती हैं कि इस मंदिर में इंद्र व चंद्र ने भी भगवान पद्मनाभास्वामी की पूजा अर्चना की थी। इस मंदिर में 12008 शालिग्राम स्थापित किये गये हैं। घंटी, शंखनाद व मंत्रों की पवित्र ध्वनि से गुंजायमान यह स्थल भक्तों को मोह लेता हैं। यह मंदिर वैष्णवों के 108वें तीर्थ स्थल के रूप में भी जाना जाता हैं।

    कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह मंदिर 5000 साल पुराना है।

    ताड पत्तों पर लिखे गये एक प्राचीन ग्रंथ अनंत्सयाना महात्मय में वर्णित है कि इस मंदिर की स्थापना कलियुग के 950वें दिन तुलु ब्राह्मण दिवाकर मुनी ने की थी। मंदिर का पुनर्निमाण कई बार हुआ है। अंतिम बार 1733 ई. में इस मंदिर का पुनर्निर्माण त्रावनकोर के महाराजा मार्तड वर्मा ने करवाया था। मंदिर में बना स्वर्णस्तं‍भ और गलियारे में बने स्तंभ जिन पर सुंदर नक्काशी की गई है, मंदिर की भव्यता में चार चांद लगाते हैं।

  • महाभारत का वो चौंकाने वाला राज! 100ˈ कौरवों और 5 पांडवों की इकलौती बहन के पति ने किया था द्रौपदी का अपमान फिर…ˌ

    महाभारत का वो चौंकाने वाला राज! 100ˈ कौरवों और 5 पांडवों की इकलौती बहन के पति ने किया था द्रौपदी का अपमान फिर…ˌ

    महाभारत का वो चौंकाने वाला राज! 100ˈ कौरवों और 5 पांडवों की इकलौती बहन के पति ने किया था द्रौपदी का अपमान फिर…ˌ

    द्रौपदी पर बुरी नज़र – महाभारत की गाथा में पांडवों, कौरवों और द्रौपदी का जिक्र आपने कई बार सुना होगा लेकिन क्या आप पांडवों और कौरवों की इकलौती बहन के बारे में जानते हैं.

    जी हां, हम हमेशा से यही सुनते आ रहे हैं कि महाभारत में 5 पांडव और 100 कौरव थे. लेकिन उनकी बहन के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं.

    आखिर कौन थी 5 पांडवों और 100 कौरवों की इकलौती बहन और क्या हुआ था जब उसके पति ने द्रौपदी पर बुरी नज़र डाली थी.

    द्रौपदी पर बुरी नज़र –

    कौरवों और पांडवों की इकलौती बहन थी दुशाला

    पांडवों और कौरवों की बहन दुशाला धृतराष्ट्र और गांधारी की बेटी थी. कहा जाता है कि वो बचपन से बड़े होने तक सभी की चहेती हुआ करती थी. सबकी दुलारी बहन होने के बावजूद शादी के बाद उसके जीवन में कई सारी मुसीबतें आनी शुरू हो गई.

    दुशाला का विवाह सिंदु राज्य के राजा जयद्रथ से हुआ था. जयद्रथ को उसकी शूरवीरता के अलावा उसके दोहरे व्यक्तित्व के लिए भी जाना जाता था.

    पति जयद्रथ के व्यहार से दुखी रहती थी दुशाला

    कहा जाता है कि दुशाला के पति जयद्रथ कभी महिलाओं के साथ बहुत अच्छे से व्यवहार करते थे तो कभी इतनी हदें पार कर देते थे कि महिलाओं की नज़रों में उनकी छवि एक बुरे इंसान की बन जाती और जयद्रथ के इसी व्यवहार के चलते दुशाला उनसे काफी दुखी रहती थी.

    लेकिन हद तो तब हो गई जब अपने इसी व्यवहार के कारण जयद्रथ ने उस वक्त अपनी सारी हदें पार कर दी और पांडवों की पत्नी द्रौपदी पर अपनी बुरी नजर डालते हुए उनका अपहरण कर लिया.

    जयद्रथ ने द्रौपदी पर बुरी नज़र डाली और किया था द्रौपदी का अपहरण

    कहा जाता है कि जब द्रौपदी के अपहरण की खबर पांडवों को लगी तो वो जयद्रथ की इस हरकत से काफी क्रोधित हुए और वो द्रौपदी को बचाने के लिए निकल पड़े.

    जब पांडव जयद्रथ तक पहुंचे तो वो सभी मिलकर उसका सिर धड़ से अलग करना चाहते थे लेकिन तभी द्रौपदी ने उन्हें रोक दिया. द्रौपदी ने अपने पतियों को रोकते हुए कहा कि जयद्रथ उनकी बहन दुशाला के पति हैं अगर जयद्रथ की मृत्यु हो जाती है तो उनकी इकलौती बहन विधवा हो जाएगी.

    द्रौपदी की बात सुनकर पांडवों ने जयद्रथ का वध तो नहीं किया लेकिन सजा के तौर पर उसका सिर गंजा करवा दिया.

    अर्जुन ने किया था जयद्रथ का सिर धड़ से अलग

    इस घटना के बाद जयद्रथ के मन में पांडवों से अपने अपमान का बदला लेने की भावना तेजी से बढ़ने लगी थी. कुछ समय बाद दुर्योधन ने जयद्रथ को अपनी सेना के साथ युद्ध में शामिल होने के लिए आमंत्रण भेजा.

    जयद्रथ ने दुर्योधन के आमंत्रण को स्वीकार किया और युद्ध के लिए निकल पड़ा. युद्ध के दौरान जयद्रथ ने धोखे से अर्जुन के बेटे अभिमन्यु की हत्या कर दी. जिसके बाद अपने बेटे की हत्या का प्रतिशोध लेने के लिए अर्जुन ने श्रीकृष्ण की मदद से एक बार में ही जयद्रथ का सिर धड़ से अलग कर दिया.

    गौरतलब है कि द्रौपदी पर बुरी नज़र वाले जयद्रथ को पांडवों ने सिर गंजा करके सजा दी थी लेकिन जब उसने युद्ध में अर्जुन के बेटे अभिमन्यु की हत्या कर दी तो अर्जुन ने अपने जीजा जयद्रथ का सिर धड़ से अलग करके अपनी बहन दुशाला को विधवा बना दिया.

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी इंटरनेट पर मौजूद स्रोतों से ली गई है। हमारा मकसद सिर्फ जानकारी देना है, इसमें दी गई बातों से हमारी अपनी कोई राय नहीं है। किसी भी जानकारी को अपनाने से पहले खुद सोच-समझकर फैसला लें

  • बुरी से बुरी नज़र से बचाएगा फिटकरीˈ और रुई का उपाय ऐसे करें इसक उपयोगˌ

    बुरी से बुरी नज़र से बचाएगा फिटकरीˈ और रुई का उपाय ऐसे करें इसक उपयोगˌ

    बुरी से बुरी नज़र से बचाएगा फिटकरीˈ और रुई का उपाय ऐसे करें इसक उपयोगˌ

    जब घर में किसी को नजर लग जाती है तो उस नजर को उतारने के लिए घर वाले बहुत सारे अलग आलग घरेलु उपाए करते है. नजर लगना किसी के लिए भी अच्छा नही होता क्युकी नजर एक ऐसा दोष है जिससे हमारे शारीर से लेकर घर परिवार में बहुत सारी परेशानिया आ सकती है. अगर किसी व्यक्ति को नजर लग जाती है तो ऐसे में उसकी आंख का निचला पलक सूज जाता है, शारीर में थकन और बीमारी भी लग जाती है. धन हानि भी हो जाती है कुल मिलकर हमे बुरी से बुरी नजर से खुदको बचाना चाहिए जिससे हम और हमारा परिवार धन सम्पत्ति सब ठीक रहे.

    आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलु उपाए बताने वाले है जिससे बुरी से बुरी नजर आपका कुछ भी नही बिगाड़ पायेगी. ये उपाए फिटकिरी और रुई से किया जाता है. जिसे करना का तरीका हम आपको बता रहे है.

    जानिए इन नजर को खत्म करने का उपाय

    सबसे पहले आप रुई ले और उसकी एक बाती बना ले फिर उस बाती को तेल में डूबा के भिगो ले और फिर उस बत्ती को ले और जिस इंसान को नजर लगी है उसके ऊपर सात बार उतारे और फिर उस बाती को जला दे.

    इस प्रकार बत्ती जलने लगेगी आपको बता दे की अगर किसी व्यक्ति को नजर लगी है तो वह रुई की बत्ती बहुत तेज भभक भाभक के जलने लगेगी और फिर कुछ देर बाद बत्ती जैसे जैसे जलना बंद होगी वैसे वैसे उस व्यक्ति की बाजार उतन्रने लगेगी.

    इसी प्रकार आप फिटकरी से भी बुरी से बुरी नजर उतार सकते है उसके लिए आपको एक फिटकरी का टुकड़ा लेना है और फिर उस टुकड़े को नजर लगे हुए व्यक्ति के ऊपर सात बार गुमाना है और फिर वह टुकड़ा जलती हुयी आग में फेक देना है ऐसा करने से नजर लगे व्यक्ति की नजर बहुत जल्दी उतर जाएगी.

  • काशी को जलाकर भस्म करने वाला वोˈ रहस्य! जब श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र ने ली थी भयानक प्रतिशोध की अग्निˌ

    काशी को जलाकर भस्म करने वाला वोˈ रहस्य! जब श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र ने ली थी भयानक प्रतिशोध की अग्निˌ

    काशी को जलाकर भस्म करने वाला वोˈ रहस्य! जब श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र ने ली थी भयानक प्रतिशोध की अग्निˌ

    श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र – देवों के देव महादेव की नगर काशी को हिंदू धर्म में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है.

    मान्यता है कि इस पावन नगरी को स्वयं भगवान शिव ने बनाया था और यह नगरी भगवान शिव के त्रिशूल पर थमी हुई है.

    भगवान शिव इस नगरी में काशी विश्वनाथ के रुप में आज भी विराजमान है जिनके दर्शन के लिए देश और दुनिया से भक्त खींचे चले आते हैं. लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भगवान शिव की इस नगरी को एक बार भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से जलाकर राख कर दिया था.

    आखिर श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र जिससे इस नगरी को जलाकर भस्म क्यों कर दिया, इसके पीछे द्वापर युग की एक कथा बेहद प्रचलित है.

    श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र –

    जरासंध ने अपनी बेटियों की शादी कराई थी कंस से

    पौराणिक कथा के अनुसार द्वापर युग में मगध पर राजा जरासंध का राज हुआ करता था उनके आतंक के चलते उनकी पूरी प्रजा डर के साये में जीने को मजबूर थी. राजा जरासंध की क्रूरता और उसकी विशाल सेना से आसपास के ज्यादातर राजा खौफ खाते थे. यही वजह है कि जरासंध ने अपनी दोनों बेटियों अस्थि और प्रस्थि का विवाह मथुरा के दुष्ट राजा और श्रीकृष्ण के मामा कंस से करा दी.

    विष्णु अवतार श्रीकृष्ण के मामा थे कंस  

    पौराणिक कथा के अनुसार राजा कंस को ये श्राप मिला था कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान ही कंस की मौत का कारण बनेगी. जैसे ही कंस को इसका पता चला उसने अपनी बहन देवकी और उसके पति वासुदेव को बंदी बनाकर रखा. कंस ने अपनी बहन के सभी संतानों का वध कर दिया लेकिन उनकी आठवीं संतान को जीवित रहने से कोई नहीं रोक पाया. कृष्ण के जन्म के तुरंत बाद अपनी संतान को कंस से बचाने के लिए वासुदेव ने उसे यशोदा के घर में छोड़ा, जिसके बाद माता यशोदा ने ही श्रीकृष्ण का पालन पोषण किया.

    श्रीकृष्ण ने किया था अपने मामा कंस का वध

    जब श्रीकृष्णा बड़े हुए तो वही अपने मामा की मौत का कारण बनें. श्रीकृष्ण द्वारा कंस की हत्या किए जाने की खबर जब मगध के राजा जरासंध को मिली तो क्रोध में आकर उन्होंने श्रीकृष्ण को मारने की योजना बनाई, लेकिन वो अकेले इस काम में सफल न हो पाए.

    इसलिए जरासंध ने काशी के राजा के साथ मिलकर कृष्ण को मारने की फिर से योजना बनाई और कई बार मथुरा पर आक्रमण किया. इन आक्रमणों से भी मथुरा और भगवान कृष्ण को कुछ नहीं हुआ लेकिन इन आक्रमणों के दौरान काशी नरेश की मृत्यु हो गई.

    काशी नरेश के पुत्र ने मांगा श्रीकृष्ण के वध का वरदान

    अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए काशी नरेश के पुत्र ने काशी के रचयिता भगवान शिव की कठोर तपस्या की. जब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर दर्शन दिया तो काशी नरेश के पुत्र ने शिवजी से श्रीकृष्ण का वध करने का वर मांगा.

    हालांकि भगवान शिव ने उन्हें काफी समझाया बावजूद इसके वो अपनी जिद पर अड़े रहे जिसके चलते भगवान शिव को यह वर देना पड़ा. वरदान के रुप में भगवान शिव ने काशी नरेश के पुत्र को एक कृत्या दी और कहा कि इसे जहां मारोगे वह स्थान नष्ट हो जाएगा. लेकिन किसी ब्राह्मण भक्त पर उसे फेंकने पर इसका प्रभाव निष्फल हो जाएगा.

    श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से जलकर राख हुई काशी

    भगवान शिव से वरदान में मिली कृत्या से काशी नरेश के पुत्र ने द्वारका में श्रीकृष्ण  पर प्रहार किया लेकिन वो ये भूल गए कि श्रीकृष्ण खुद एक ब्राह्मण भक्त हैं. जिसके चलते वह कृत्या द्वारका से वापस होकर काशी गिरने के लिए लौट गई. हालांकि इसे रोकने के लिए श्रीकृष्ण ने अपना सुदर्शन चक्र कृत्या के पीछे छोड़ दिया.

    काशी तक सुदर्शन चक्र ने कृत्या का पीछा किया और काशी पहुंचते ही उस कृत्या को भस्म कर दिया. लेकिन सुदर्शन चक्र का वार अभी शांत नहीं हुआ था, यही वजह है कि सुदर्शन चक्र से काशी नरेश के पुत्र के साथ-साथ पूरी काशी जलकर राख हो गई.

    श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र – सुदर्शन चक्र से जलकर भस्म हुई भगवान शिव की इस नगरी को फिर से बसाया गया. बताया जाता है कि वारा और असि नदियों के बीच में होने के कारण इस नगरी का नाम वाराणसी रखा गया और इसे ही काशी नगरी का पुनर्जन्म माना जाता है.

  • 907 साल तक चला ये अद्भुत प्रेम!ˈ ऋषि कंडु और अप्सरा की वो रोमांचक कहानी जिसे छुपाते हैं पुराणˌ

    907 साल तक चला ये अद्भुत प्रेम!ˈ ऋषि कंडु और अप्सरा की वो रोमांचक कहानी जिसे छुपाते हैं पुराणˌ

    907 साल तक चला ये अद्भुत प्रेम!ˈ ऋषि कंडु और अप्सरा की वो रोमांचक कहानी जिसे छुपाते हैं पुराणˌ

    जहाँ कही भी अप्सराओं का नाम आता है वहां पर स्वतः ही इंद्र देव का भी नाम आता है।

    ये बात वेद-पुराणों में भी वर्णित है कि इंद्र स्वर्ग के देवता थे और अपने काम निकालने के लिए छल और कपट करने से भी बाज नही आते थे। एक बार ऐसा ही हुआ जब ऋषियों में श्रेष्ठ ऋषि कंडु गोमती नदी के किनारे घोर तपस्या कर रहे थे। तब उनकी तपस्या से दुखी होकर इंद्र ने अत्यंत सुंदर अप्सरा प्रम्लोचा को चुना और ऋषि कंडु की तपस्या भंग करने के लिए भेजा।

    प्रम्लोचा बला की खुबसूरत थी उसके तीखे नैन-नक्श के आगे ऋषि कंडु की एक नहीं चली और वे प्रम्लोचा के सम्मोहन में डोल गए।

    अब ऋषि कंडु पूजा-पाठ और तपस्या भूल कर पूरी तरह से गृहस्थ आश्रम के मोह में फंस गए और अपनी कड़ी तपस्या भंग कर बैठे।

    योजना के अनुसार इंद्र और प्रम्लोचा का काम हो चूका था। अब प्रम्लोचा स्वर्ग वापस लौटना चाहती थी। लेकिन प्रम्लोचा के प्रेम में ऋषि कंडु ऐसे डूबे की उन्होंने उसे कही जाने नहीं दिया। लेकिन प्रम्लोचा अब किसी भी तरह स्वर्ग लौटना चाहती थी लेकिन वो कंडु के श्राप से भी डरती थी इसलिए चाहकर भी कही जा नहीं सकती थी।

    फिर एक दिन अचानक ऋषि कंडु को अपनी पूजा-पाठ और तपस्या याद आई तो वे अपनी कुटिया से निकल कर बोले मैं पूजा-पाठ करने के लिए जा रहा हूँ।

    तब प्रम्लोचा बोली इतने सालों में आज आपको साधना सूझी है इतने दिन से तो आप गृहस्थ आश्रम में जी रहे थे।

    ऋषि कंडू बोले तुम सुबह ही आई हो और मुझे साधना और तपस्या के बारे में बता रही हो। तब प्रम्लोचा ने इंद्र के बारे में सब सच बताया और कहा कि मुझे यहाँ आये हुए पूरे 907 साल हो चुके है। ये सुनकर ऋषि कंडु कहने लगे धिक्कार है मुझे अपने आप पर मेरी सारी साधना और तपस्या भंग हो गई।

    बाद में ऋषि कंडु को अपनी स्थिति का भान हुआ और उन्होंने अप्सरा का त्याग कर फिर से तपस्या करना आरम्भ कर दिया।

  • अगर आपके घर में भी नहीं टिकताˈ है धन, तो आजमाएं तुलसी के ये टोटके, नहीं होगी धन-धान्य की कमीˌ

    अगर आपके घर में भी नहीं टिकताˈ है धन, तो आजमाएं तुलसी के ये टोटके, नहीं होगी धन-धान्य की कमीˌ

    हिंदू धर्म शास्त्रों में तुलसी के पौधे को बेहद पूजनीय माना जाता है। तुलसी के पौधे से ना सिर्फ भाग्य चमकता है बल्कि इसकी मौजूदगी से घर के वास्तु दोष भी दूर होते हैं। दरअसल तुलसी भगवान विष्णु का प्रिय है, यही वजह है कि तुलसी पूजनीय और बेहद चमत्कारिक है।

    धार्मिक दृष्टिकोण से तो तुलसी का महत्व है ही, साथ ही स्वास्थ्य के लिहाज से भी तुलसी का सेवन करना काफी लाभदायक होता है। इसके अलावा तंत्रशास्त्र की मानें तो तुलसी के कुछ विशेष उपायों से किस्मत चमक ही उठती है। आइए जानते हैं, आखिर क्या हैं तुलसी से जुड़े ये टोटके…

    इस उपाय से नहीं होगी धन-धान्य की कमी

    तंत्रशास्त्र की मानें तो तुलसी मंगल ग्रह के साथ जुड़ी हुई है। ऐसे में आप अपने पर्स या फिर आलमारी में एक तुलसी का पत्ता हमेशा रख लें, इससे पैसा आपकी ओर आकर्षित होगा। इसके अलावा आप जहां पैसा का लेखा जोखा रखते हैं, वहां भी कुछ तुलसी के पत्ते रख दें। ऐसा करने से धन धान्य की कभी कमी नहीं होती है।

    अगर आपके घर में भी नहीं टिकताˈ है धन, तो आजमाएं तुलसी के ये टोटके, नहीं होगी धन-धान्य की कमीˌ

    गेहूं पिसवाने के लिए शनिवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है। ऐसे में अगर आप गेहूं पिसवाते हैं तो शनिवार के दिन पिसवाएं और पिसवाने से पहले उसमें 100 ग्राम काले चने, 11 तुलसी के पत्ते और दो दाने केसर के मिला लें और पिसवाने के लिए दे आएं। इससे आर्थिक समृद्धि आती है और परिवार में सुख शांति का वास होता है। इसके अलावा तुलसी के सामने सुबह शाम गाय के घी का दीपक जलाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    व्यापार में हो रहा हो घाटा तो अपनाएं ये उपाय

    अगर आपको व्यापार में घाटा हो रहा है तो तुलसी के कुछ पत्तों को तीन दिनों तक पानी में रख दें। इसके बाद इस पानी को अपने कार्यस्थल पर छिड़क दें। ऐसा करने से व्यापार में फायदा पहुंचता है।

    अगर बाजार की मंदी की वजह से आपको नौकरी छूट जाने का डर सता रहा है या फिर आपका प्रमोशन पिछले कई दिनों से रूका हुआ है तो गुरूवार को तुलसी के पौधे को पीले कपड़े में बांधकर अपने कार्यस्थल पर रख दें।

    इसके अलावा सोमवार के दिन सुबह-सुबह सफेद कपड़े में तुलसी के 16 बीजों को ऑफिस की मिट्टी में दबा दें। इस उपाय से आपके नौकरी छूट जाने का डर दूर होगा, साथ ही आपके प्रमोशन के चांसेज भी बढ़ जाएंगे।

    इन उपायों से होगा पारिवारिक कलह का अंत

    अगर परिवार में कलह और सदस्यों के बीच प्रेम भाव कम हो गया हो तो अपने रसोई घर में कुछ तुलसी के पत्ते रख दें। तंत्र शास्त्र के अनुसार ऐसा करने से घर में सुख शांति रहती है और सदस्यों के बीच रिश्ते में मिठास बढ़ती है। इसके अलावा  घर के सभी सदस्य नहाने के दौरान पानी में तुलसी के कुछ पत्ते डाल दें। इससे प्रेम भाव बढ़ता है और कलह से मुक्ति मिलती है।

    अगर आपके घर के छोटे बच्चों को अक्सर बुरी नजर लग जाती है या फिर कोई सदस्य मानसिक रूप से परेशान रहता हो तो तुलसी के कुछ पत्तों और सात काली  मिर्च को अपनी  मुट्टी में लेकर 21 बार उसके शरीर पर ऊपर से नीचे तक वार लें।साथ ही ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करें।

    इसके बाद तुलसी के पत्तों और काली मिर्च को उस व्यक्ति को खाने के लिए दे दें, फिर उसे उल्टा करके पांव के तलवों को किसी कपड़े से 7 बार झाड़ लगा दें। इससे सभी कष्ट दूर होते हैं।