Category: Dharam

  • दिखें ये संकेत तो समझ जाइये आनेˈ वाली है बड़ी मुसीबतˌ

    दिखें ये संकेत तो समझ जाइये आनेˈ वाली है बड़ी मुसीबतˌ

    दिखें ये संकेत तो समझ जाइये आनेˈ वाली है बड़ी मुसीबतˌ

    किसी भी इंसान की जिंदगी आसान नहीं होती. इंसान को अगर सुख मिलते आए हैं तो यकीनन दुःख भी जरुर मिलेंगे. क्यूंकि जिंदगी का दूसरा नाम ही सुख और दुःख है. यदि इंसानों को भगवान ने केवल सुख दिए होते तो आज इंसानों से अधिक मतलबी कोई और नहीं होता. इसके इलावा सुखों में कोई भगवान को याद भी नहीं करता. मनुष्य भगवान के नाम को मरते दम तक याद रखें शायद यही सोच कर भगवान ने सुखों के बाद इंसानों को दुःख दिए हैं. इसलिए हर इंसान की जिंदगी में परेशानियाँ आती जाती ही रहती हैं. मगर कईं बार संकट आने के बाद इंसान सोचते हैं कि काश! हमे इस मुसीबत के आने का पहले ही पता चल जाता तो आज हम खुद को संभाल लेते.

    इस बात में कोई शक नहीं कि बुरे समय के बाद अच्छा समय जरुर आता है और अच्छे समय के बाद बुरा समय भी आवश्य आता है. परन्तु आपको ये जानकर हैरानी होगी कि बुरा समय आने से पहले व्यक्ति को कुछ संकेत मिलते हैं जिनसे वह अनजान रहता है. मगर अगर आप इन संकेतों को अच्छे से समझ लें तो भविष्य में चल कर आपको बुरा समय देखने और उसका सामना करने की ताकत मिलेगी. तो चलिए जानते हैं ऐसे ही कुछ संकेतों के बारे में जो आगे चल कर आपके लिए उपयोगी सिद्ध होंगे.

    ये है बुरा समय आने के कुछ ख़ास संकेत

    इंसान की तरह पेड़ पौधों में भी जान बसती है, उनकी पौधे भी सांस लेते हैं और जीते हैं. मुसीबत के समय भले ही हम इंसान अनजान रहे मगर पौधे मुसीबत आने से पहले ही उसके बारे में अनुमान लगा लेते हैं. यदि आपके घर में तुलसी का पौधा है और वह अचानक से बिल्कुल सूख जाता है, तो समझ लीजिए कि आपके घर बहुत जल्द कोई मुसीबत आने वाली है और आपको जल्द से जल्द सुचेत रहने की आवश्यकता है.

    बीमारियां भी एक प्रकार से बुरा समय आने का संकेत देती हैं. इसलिए जब आपके घर का कोई सदस्य अचानक से बीमार पड़ जाए और लाख प्रयत्न करने पर भी उसको आराम ना मिल जाए तो समझिए बहुत जल्द आपके भाग फूटने वाले हैं.

    किसी भी घर में खुशियां आने के लिए लक्ष्मी मां का हमसे प्रसन्न होना बेहद जरूरी है. लक्ष्मी मां को प्रसन्न करने के लिए हमें घर में साफ सफाई रखनी चाहिए. मगर घर में लाख साफ-सफाई करने के बावजूद भी अगर गंदगी छाई रहती है, तो समझ लीजिए देवी मां आपसे रूठने वाली हैं और आप पर धन की कमी का संकट आने वाला है.

    अक्सर आपने देखा होगा कि चीटियां एवं कीड़े मीठी चीजों की ओर आकर्षित होते हैं. मगर इसके विपरीत अगर आपके घर में नमकीन पदार्थों में चीटियां पड़ रही हैं तो समझ जाइए आपका बुरा समय आपके नजदीक है.

    कांच एवं चीनी मिट्टी के बर्तनों को काफी शुभ माना जाता है. ऐसे में अगर आपके यह बर्तन बार-बार तड़क कर टूट रहे हैं तो समझिए आपका बुरा समय आप पर जल्द ही मंडराने वाला है.

    कईं बार भोजन का सेवन करते समय आपको पहला निवाला कड़वा प्रतीत होता है और दूसरा निवाला ठीक लगता है. अगर आपके साथ ऐसा हो तो समझिये आपका कोई अपना आपके लिए बुरा समय लेकर आने वाला है और रिश्तों में खटास पड़ने वाली है.

  • इन राशि वालों के लिए सोने कीˈ अँगूठी पहनना होता है बहुत फायदेमंद चमक जाती है सोने की तरह किस्मतˌ

    इन राशि वालों के लिए सोने कीˈ अँगूठी पहनना होता है बहुत फायदेमंद चमक जाती है सोने की तरह किस्मतˌ

    इसमें कोई शक नहीं कि महिलाएं बड़ी आसानी से सोने की आभूषणों की तरफ आकर्षित हो जाती है। जैसे कि सोने के गहने या सोने की किसी भी वस्तु की तरफ महिलाओं की नजर सबसे पहले जाती है। वैसे सोने के प्रति ऐसा आकर्षण केवल कलयुग में ही नहीं देखने को नहीं मिलता, बल्कि ये आकर्षण तो प्राचीन समय से चला आ रहा है। जी हां तभी तो हमारे देवी देवता भी स्वर्ण आभूषणों से सजे हुए नजर आते है। हालांकि सोने के आभूषण पहनने के पीछे की वजह केवल खूबसूरत दिखना ही नहीं है, बल्कि इसे पहनने से स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ भी होते है। यहाँ तक कि कुछ लोगों को सोने की अंगूठी धारण करने से ज्योतिषीय तरीके से भी कई तरह के लाभ प्राप्त होते है।

    इन राशि वालों के लिए सोने कीˈ अँगूठी पहनना होता है बहुत फायदेमंद चमक जाती है सोने की तरह किस्मतˌ

    स्वर्ण धातु पहनने के लाभ :

    सबसे पहले तो हम आपको ये बता दे कि अध्यात्म जगत में स्वर्ण धातु संबंधी कई लाभ बताएं गए है। जी हां ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ऐसा माना जाता है कि तर्जनी अंगुली में सोने की अंगूठी पहनने से एकाग्रता बढ़ती है और मन को शांति मिलती है। इसके इलावा ऐसी मान्यता है कि अनामिका ऊँगली में सोने की अंगूठी पहनने से दाम्पत्य जीवन में खुशहाली आती है और जो लोग संतान सुख की प्राप्ति से वंचित है उन्हें संतान सुख की प्राप्ति भी होती है। वही दूसरी तरफ ज्योतिषशास्त्र में शादी होने के बाद एक संतान होने तक हीरा पहनना काफी अशुभ माना जाता है, लेकिन सोना पहनना काफी शुभ माना जाता है। अब तो आप समझ गए होंगे कि स्वर्ण का कितना ज्यादा महत्व है। तो चलिए अब हम आपको उन चार राशियों के बारे में बताते है।

    इन राशि वालों के लिए स्वर्ण धातु पहनना है शुभ :

    सिंह राशि: बता दे कि इस राशि के लोगों को सोने की अंगूठी तो जरूर पहननी चाहिए, क्यूकि यह अग्नि तत्व की राशि होती है। तो ऐसे में इसके स्वामी सूर्य के साथ स्वर्ण के कारक ग्रह गुरु का अच्छा संबंध होता है। जिसके चलते सोना इस राशि के लोगों के लिए शुभ माना जाता है और सोने की अंगूठी पहनने से इस राशि के लोगों भरपूर ऊर्जा और उत्साह से लाभ की प्राप्ति होती है।

    कन्या राशि: इसके बाद हम कन्या राशि वालों की बात करते है। वैसे तो इस राशि के लोगों को चेन या कड़ा जरूर पहनना चाहिए, लेकिन अगर आपको ये चीजें पहनना पसंद न हो तो आप अंगूठी भी पहन सकते है। बता दे कि आपकी राशि के अनुसार गुरु पांचवे और सातवें घर के स्वामी होते है। तो ऐसे में गुरु के इस धातु को धारण करना आपके लिए काफी शुभ माना जाता है।

    तुला राशि : बता दे कि इस राशि के लोग अगर सोने की अंगूठी पहनेंगे तो इनकी सोई हुई किस्मत जाग सकती है। दरअसल इनकी राशि के स्वामी शुक्र ग्रह है और स्वर्ण धातु गुरु ग्रह से संबंधित होती है। अब यूँ तो इन दोनों ग्रहों की आपस में नहीं बनती, लेकिन फिर भी आपकी कुंडली में गुरु तीसरे और छठवें स्थान के स्वामी होने से आपको शुभ फल की प्राप्ति होती है। जी हां यह रोग और दुश्मनों दोनों से आपकी रक्षा करते है।

    धनु राशि : अब आखिर में हम धनु राशि वाले लोगों की बात करते है। बता दे कि ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सोने की अंगूठी पहनने से इनके अधूरे काम पूरे होते है। हालांकि यहाँ इस बात का ध्यान रखे कि सोने का कोई भी आभूषण पैरों में न पहने। वो इसलिए क्यूकि आपकी राशि के स्वामी गुरु ग्रह है और स्वर्ण गुरु से ही संबंधित धातु है।

    अब अगर हम उन लोगों की बात करे जिन्हे स्वर्ण धातु नहीं पहननी चाहिए, तो जिन लोगों को कुदरती रूप से ज्यादा गुस्सा आता है या जो लोग ज्यादा बोलते है, उन्हें स्वर्ण धातु धारण नहीं करनी चाहिए। दोस्तों अगर आपकी राशि भी इनमे से एक है तो आपको स्वर्ण धातु जरूर पहननी चाहिए।

  • ऐसी नाभि वाली महिलाएं होती हैं बेहदˈ भाग्यशाली बनती है श्रेष्ठ पत्नी मिलता है राजयोग का सुखˌ

    ऐसी नाभि वाली महिलाएं होती हैं बेहदˈ भाग्यशाली बनती है श्रेष्ठ पत्नी मिलता है राजयोग का सुखˌ

    बता दे कि सामुद्रिक शास्त्रों में शरीर के विभिन्न अंगों के रंग और आकार को देख कर व्यक्ति के भविष्य और स्वभाव का अनुमान लगाया जाता है। ऐसे में नाभि को स्त्री का सबसे खूबसूरत अंग माना जाता है और ऐसा कहा जाता है कि जिनकी नाभि इस तरह की होती है, वे स्त्रियां अपने पति के लिए काफी भाग्यशाली होती है। जी हां ये नाभि वाली स्त्रियां न केवल सर्वश्रेष्ठ पत्नी बनती है बल्कि अपने पति का भाग्य चमकाने में भी सक्षम होती है। यहाँ गौर करने वाली बात ये है कि इंसान का जन्म माँ की नाभि से जुड़ कर होता है और सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यही वजह है कि स्त्री की नाभि उसके सभी राज खोलती है। तो चलिए अब आपको इसके बारे में विस्तार से बताते है।

    ऐसी नाभि स्त्रियां बनती है अच्छी पत्नी :

    ऐसी नाभि वाली महिलाएं होती हैं बेहदˈ भाग्यशाली बनती है श्रेष्ठ पत्नी मिलता है राजयोग का सुखˌ

    1. बता दे कि जिन स्त्रियों की नाभि गोल और चारों तरफ से उठी हुई होती है, वे धन से संपन्न होती है और उन्हें धन की कभी कमी नहीं होती।

    2. वही जिन स्त्रियों की नाभि गोल आकार की होती है, उनका स्वास्थ्य सामान्य रूप से अच्छा रहता है और शादी के बाद वे सुखमय जीवन व्यतीत करती है। ऐसी स्त्रियां स्वभाव से दयालु होती है और जिस परिवार में जाती है वहां सम्मान पाती है। जी हां ये स्त्रियां शादी के बाद श्रेष्ठ पत्नी बनती है।

    3. गौरतलब है कि जिन स्त्रियों की नाभि बायीं तरफ मुड़ी हुई होती है, उनसे जरा सावधान रहना चाहिए, क्यूकि ऐसी स्त्रियां या पुरुष दोनों ही भरोसे के लायक नहीं होते। यहाँ तक कि ये अपने फायदे के लिए दूसरों को नुक्सान भी पहुंचा सकते है।

    इस तरह की नाभि वाली स्त्रियां होती है भाग्यशाली :

    4. बता दे कि अगर नाभि छोटी और नीची हो तो व्यक्ति को जीवन भर संघर्ष करना पड़ता है और ऐसा इंसान हमेशा दुखी रहता है। हालांकि ऐसे लोगों की पहली संतान काफी भाग्यशाली होती है, लेकिन जिन पुरुषों की नाभि ऐसी होती है, उनके वैवाहिक जीवन में काफी समस्या आती है। यहाँ तक कि इनके दाम्पत्य जीवन में मतभेद बना रहता है और वैवाहिक जीवन टूटने तक की सम्भावना होती है।

    5. वही जिनकी नाभि ऊपर उठी हुई और गहरी होती है, वे काफी रोमांटिक और मिलनसार होते है। जहाँ एक तरफ इन्हें सुंदर जीवनसाथी मिलता है, वही दूसरी तरफ इन्हें अचानक धन लाभ भी होता है। जी हां जिस स्त्री की नाभि गहरी होती है, वे सभी सुख सुविधाओं को भोगती है।

    6. बता दे कि जिस स्त्री की नाभि केंद्र से हटी हुई होती है, वे काफी उत्साही होती है। ऐसी स्त्रियां अपने कार्यक्षेत्र में कामयाब होती है और अगर ये किसी खेल में अपना करियर बनाएं तो सफल जरूर होती है।

    7. जिन स्त्रियों की नाभि का मध्य भाग अंदर की तरफ होता है, उनका वैवाहिक जीवन काफी सुखमय होता है। जी हां ऐसी स्त्रियों को गर्भधारण से संबंधित मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता और इन्हें सामान्य रूप से दो संतानों का सुख मिलता है। तो ये नाभि वाली स्त्रियां स्वभाव से कैसी होती है, ये तो आपको पता चल ही गया होगा। बहरहाल आपको ये जानकारी कैसी लगी, इस बारे में हमें अपनी राय जरूर दीजियेगा।

  • न करे इस दिन भूलकर भी पैसोंˈ का लेन देन नहीं लगती राजा से रंक बनते देर आर्थिक रूप से ये दिन माना जाता है शुभˌ

    न करे इस दिन भूलकर भी पैसोंˈ का लेन देन नहीं लगती राजा से रंक बनते देर आर्थिक रूप से ये दिन माना जाता है शुभˌ

    न करे इस दिन भूलकर भी पैसोंˈ का लेन देन नहीं लगती राजा से रंक बनते देर आर्थिक रूप से ये दिन माना जाता है शुभˌ

    बता दे कि ज्योतिष शास्त्र में हर काम के लिए शुभ दिन और शुभ समय जरूर निर्धारित होता है, जिसके आधार पर व्यक्ति अपना कार्य संपन्न करता है। जी हां अगर शुभ दिन और शुभ समय के अनुसार काम किया जाएं तो उस कार्य का अच्छा फल जरूर मिलता है। बहरहाल पैसों का लेन देन करने के लिए भी ज्योतिष शास्त्र में शुभ दिन बताया गया है, जिसके अनुसार ही आपको इंवेस्टमेंट करनी चाहिए। वैसे भी पैसों के मामले में किसी भी तरह का रिस्क लेना सही नहीं है, इसलिए ये जरूरी है कि पैसों से संबंधित कोई भी काम शुभ समय देख कर ही करना चाहिए।

    पैसों का लेन देन इस दिन न करे :

    यहां गौर करने वाली बात ये है कि ज्योतिष शास्त्र में पैसों का लेन देन करने के लिए शुभ समय, नक्षत्र, तिथि और सूर्य सक्रांति का दिन शुभ माना जाता है। तो चलिए अब आपको इस बारे में विस्तार से बताते है। गौरतलब है कि ज्योतिष के अनुसार अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, स्वाती, अनुराधा, चित्रा, विशाखा और रेवती इन बारह नक्षत्रों में पैसों का व्यापार करना बेहद शुभ माना जाता है। जब कि इनमें से चर संज्ञक मेष, कर्क, तुला और मकर में लग्न से पांच, आठ और नौ स्थान शुभ हो तो इसमें पैसों से संबंधित लेन देन करना, निवेश करना, पैसे जमा करना आदि सब करना शुभ माना जाता है।

    पैसों से संबंधित निवेश करने के लिए ये दिन माना जाता है शुभ :

    हालांकि अगर आप पैसे उधार ले रहे है तो इसके लिए मंगलवार का दिन भूल कर न चुने, वो इसलिए क्योंकि इस दिन दिया गया उधार जल्दी वापिस नहीं मिलता, लेकिन कर्ज चुकाने के लिए मंगलवार का दिन शुभ जरूर माना जाता है। जी हां ऐसा माना जाता है कि इस दिन कर्ज या बैंक लोन आदि चुकाने से कर्ज से मुक्ति मिलती है।

    ज्योतिष शास्त्र में बताई गई इन बातों का रखे ध्यान :

    बता दे कि ज्योतिष का ज्ञान रखने वालों का कहना है कि बुधवार के दिन किसी भी व्यक्ति को पैसे उधार नहीं देने चाहिए, क्योंकि इस दिन पैसे देना अशुभ माना जाता है और ऐसा माना जाता है कि बुधवार के दिन दिया गया पैसा जल्दी वापिस नहीं मिलता। इसके साथ ही किसी भी तरह का निवेश करने के लिए बुधवार का दिन बेहद शुभ माना जाता है और इस दिन निवेश करने से चार गुना ज्यादा लाभ भी होता है। बहरहाल अब तो आपको पता चल गया होगा कि किस दिन पैसों से संबंधित कार्य करना उचित और शुभ माना जाता है। दोस्तों आपको ये जानकारी कैसी लगी, इस बारे में हमें अपनी राय जरूर दीजियेगा।

  • किस्मत चमकते देर नहीं लगेगी यदि करेंगेंˈ सिर्फ एक रोटी का ये उपायˌ

    किस्मत चमकते देर नहीं लगेगी यदि करेंगेंˈ सिर्फ एक रोटी का ये उपायˌ

    किस्मत चमकते देर नहीं लगेगी यदि करेंगेंˈ सिर्फ एक रोटी का ये उपायˌ

    कुछ लोग होते हैं जो हमेशा अपनी नाकामयाबियों के लिए किस्मत को दोष देते हैं। कुछ भी हो इन्हें सिर्फ अपनी किस्मत पर ही रोना आता है। जब भी इन पर कोई संकट आता है, तो भी ये अपनी किस्मत को ही दोष देते हैं। अगर आप भी यही समझते हैं कि आपकी किस्मत आपका साथ नहीं दे रही है तो आज हम आपको रोटी का एक ऐसा छोटा और अचूक उपाय बता रहे हैं, जिसे रोज करने से न सिर्फ आपकी किस्मत आपका साथ देने लगेगी बल्कि आने वाले संकट भी टल जाएंगे। ये उपाय इस प्रकार है-

    अचूक उपाय

    सुबह जब घर में भोजन बने तो सबसे पहले वाली रोटी अलग निकाल लें। इस बात का ध्यान रखें कि ये रोटी अन्य रोटियों से थोड़ी बड़ी हो ताकि आसानी से इसके चार टुकड़े किए जा सकें। अब इस रोटी के बराबरी से चार टुकड़े कर लें और इन चारों पर कुछ मीठा जैसे- खीर, गुड़ या शक्कर रख दें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बाहर का कोई व्यक्ति आपको यह टोटका करते हुए न देख पाए।

    रोटी के चार टुकड़ों में से सबसे पहला वाला गाय को खिला दें और भगवान से प्रार्थना करें कि आपकी समस्याओं का निदान जल्दी से जल्दी हो जाए और आपकी मनोकामना पूरी हो। धर्म ग्रंथों के अनुसार गाय में ही सभी देवताओं का निवास होता है इसलिए सबसे पहले रोटी गाय को ही दी जाती है।

    अब दूसरा टुकड़ा कुत्ते को खिला दें। शिवमहापुराण के अनुसार कुत्ते को रोटी खिलाते समय बोलना चाहिए कि- यमराज के मार्ग का अनुसरण करने वाले जो श्याम और शबल नाम के दो कुत्ते हैं, मैं उनके लिए यह अन्न का भाग देता हूं। वे इस बलि (भोजन) को ग्रहण करें। इसे कुक्कर बलि कहते हैं।

    अब रोटी के तीसरे भाग को कौओं को खिला दें और बोलें- पश्चिम, वायव्य, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में रहने वाले जो पुण्यकर्मा कौए हैं, वे मेरी इस दी हुई बलि को ग्रहण करें। धर्म ग्रंथों में इसे काक बलि कहते हैं।

    अब रोटी का अंतिम टुकड़ा जो बचा है उसे घर पर आए किसी भिक्षु को दे दें। इस प्रकार ये छोटा सा उपाय रोज करने से आपकी किस्मत कुछ ही दिनों में बदल जाएगी और किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आएगी।

  • श्मशान घाट के पास से गुजरते हुएˈ इन खास बातों का जरूर रखे ध्यान अन्यथा हो सकता है अनर्थˌ

    श्मशान घाट के पास से गुजरते हुएˈ इन खास बातों का जरूर रखे ध्यान अन्यथा हो सकता है अनर्थˌ

    ये तो सब जानते है कि हिन्दू धर्म में जब किसी की मृत्यु होती है, तब उसका अंतिम संस्कार नदी के किनारे श्मशान घाट पर किया जाता है। जी हां श्मशान घाट में ही व्यक्ति के मृत शरीर को लेकर उसका अंतिम संस्कार किया जाता है, यानि ये वो जगह है जहाँ आत्माओं का डेरा होता है। यही वजह है कि श्मशान घाट के पास से गुजरते हुए भी लोगों को काफी डर लगता है और महिलाओं का तो श्मशान घाट में जाना भी मना है। केवल इतना ही नहीं इसके इलावा बिना किसी वजह के किसी का भी इस जगह पर जाना सही नहीं माना जाता। तो चलिए अब आपको बताते है कि अगर आपको किसी वजह से श्मशान घाट से होते हुए गुजरना भी पड़े तो आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    श्मशान घाट के पास से गुजरते हुएˈ इन खास बातों का जरूर रखे ध्यान अन्यथा हो सकता है अनर्थˌ

    श्मशान घाट के पास से गुजरते हुए ध्यान रखे ये खास बातें:

    गौरतलब है कि श्मशान को आत्माओं का डेरा माना जाता है और यही वजह है कि जब आसमान में चन्द्रमा दिखाई देने लगे, तब से लेकर सुबह सूर्य उदय होने तक किसी जीवित व्यक्ति को वहां से नहीं जाना चाहिए। वो इसलिए क्यूकि रात के समय नकारात्मक शक्तियां ज्यादा प्रभावशाली होती है और ऐसी शक्तियां मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति को जल्दी अपना शिकार बना लेती है। जी हां ऐसी परिस्थिति में जो व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर होता है, उस व्यक्ति पर बुरी शक्तियों का प्रभाव जल्दी पड़ता है। जिसके बाद वह व्यक्ति आत्माओं के काबू में भी आ सकता है।

    इस वजह से माँ काली के प्रकोप का करना पड़ सकता है सामना :

    हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि श्मशान घाट पर शिव जी और माता काली का अधिपत्य होता है और ऐसा माना जाता है कि अंतिम संस्कार के बाद भगवान् शिव मृत आत्माओं को अपने अंदर समाहित कर लेते है। बहरहाल किसी जीवित व्यक्ति की उपस्थिति से इस प्रक्रिया में बाधा भी पड़ सकती है और ऐसे में उस व्यक्ति को माता काली के प्रकोप का सामना भी करना पड़ सकता है। वही श्मशान घाट में जो आत्माओं का डेरा होता है, उनसे सबसे ज्यादा खतरा महिलाओं को होता है। जी हां ऐसा कहा जाता है कि बुरी आत्माएं महिलाओं को जल्दी अपना निशाना बना लेती है और यही वजह है कि इस जगह पर महिलाओं का जाना मना है।

    इन कारणों से महिलाओं को श्मशान घाट में जाने से किया जाता है मना :

    इसके इलावा इसका दूसरा कारण ये भी है कि जो लोग अंतिम संस्कार करवाने के लिए श्मशान घाट जाते है, उन्हें बाद में अपने बाल मुंडवाने पड़ते है और इसलिए महिलाओं को श्मशान घाट नहीं ले जाया जाता, ताकि उन्हें इस प्रथा का हिस्सा न बनने पड़े। इसके साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि महिलाएं काफी कोमल होती है, तो श्मशान घाट में मृत व्यक्ति को जलता देख वे अधिक रोने लगती है और इससे मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति प्राप्त नहीं होती। इसलिए महिलाओं को श्मशान घाट जाने की इजाजत नहीं होती। फ़िलहाल तो श्मशान घाट के पास से गुजरते हुए आप इस बात का ध्यान जरूर रखे कि जब आप वहां से गुजरे तब आसमान में चाँद नजर न आ रहा हो और हो सके तो दिन के समय ही उस तरफ पड़ने वाले अपने सभी काम निपटा ले।

  • कलियुग की आखिरी रात क्या होगा? विष्णुˈ पुराण की ये 4 भविष्यवाणियों को सुनकर दहल जायेंगे आपˌ

    कलियुग की आखिरी रात क्या होगा? विष्णुˈ पुराण की ये 4 भविष्यवाणियों को सुनकर दहल जायेंगे आपˌ

    कलियुग की आखिरी रात क्या होगा? विष्णुˈ पुराण की ये 4 भविष्यवाणियों को सुनकर दहल जायेंगे आपˌ

    आम बोलचाल की भाषा में हम अक्सर घोर कलियुग के बारे में बात करते हैं। दुनिया में बढ़ते पाप या अपराध को देखकर लोग कलियुग की चरम सीमा के बारे में बात करते हैं।

    आज की दुनिया में आपको अक्सर लोग कहते हुए मिल जाएंगे कि पता नहीं! कलियुग कब खत्म होगा? चलिए, हम आपको बताते हैं कि कलियुग की आखिरी रात के बारे में विष्णु पुराण में क्या लिखा है।

    कलियुग की आखिरी रात कैसी होगी
    विष्णु पुराण में कलियुग के सभी चरणों के बारे में लिखा गया है। विष्णु पुराण की भविष्यवाणी के अनुसार कलियुग जब अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएगा, तो हर रात पहले से ज्यादा अंधकार भरी होगी। इसका अर्थ यह है कलियुग की रातों में पाप और अपराध बढ़ते जाएंगे। लोग आपकी आंखों के सामने देखी हुई चीजों को भी साफ झूठ बता देंगे। वहीं, कलियुग की आखिरी रात सभी रातों में सबसे ज्यादा लंबी होगी। कलियुग की आखिरी रात इतनी ज्याद अंधकारमय होगी कि दीया दिखाने पर भी पर्याप्त रोशनी नहीं हो पाएगी। लोग इस रात के कटने के इंतजार में बैचेन नजर आएंगे लेकिन चारों तरफ विनाश के संकेत नजर आएंगे।

    कलियुग की आखिरी रात प्रकृति दिखाएगी अपना रौद्र रूप
    कलियुग की आखिरी रात प्रकृति अस्थिर हो जाएगी। मूसलाधार बारिश होने से धरती पर हर तरफ पानी ही पानी होगा। पूरी धरती जलमग्न नजर आएगी। तेज बारिश के साथ आंधी, तूफान से पूरी धरती तांडव करती हुई नजर आएगी। मनुष्य की हृदय की धड़कनें बढ़ जाएगी। कलियुग की आखिरी रात इतनी लंबी होगी कि किसी साल जैसी लगने लगेगी।

    कलियुग की आखिरी रात में ज्यादातर लोग बीमारी से ग्रस्त रहेंगे
    कलियुग की चरम सीमा में लोग शारीरिक और मानसिक रूप से इतने कमजोर हो जाएंगे कि उनके भीतर शारीरिक रूप से मेहनत करने की क्षमता भी नहीं बचेगी। मानसिक रूप से लोग इतने कमजोर हो जाएंगे कि कठोर वाणी सुनते ही अस्थिर हो जाएंगे। कलियुग की आखिरी रात जब हर तरफ भीषण बारिश होगी, तो लोग बचकर भागने की कोशिश भी नहीं कर पाएंगे क्योंकि उनके भीतर शक्ति ही नहीं बचेगी।

    कलियुग की आखिरी रात अन्न की हो जाएगी भीषण कमी
    कलियुग की आखिरी रात अन्न की कमी भी हो जाएगी। बारिश, भूकंप, आंधी की मार से गोदामों में रखा ज्यादातर अन्न बह जाएगा और बाकी अन्न खाने लायक नहीं रहेगा। कलियुग की आखिरी रात लोग भूख-प्यास से व्याकुल नजर आएंगे। भूख की वजह से लोगों की सोचने-समझने की शक्ति नष्ट होने लग जाएगी। लोगों में क्रोध, भय जैसे नकारात्मक भाव उत्पन्न होने लग जाएंगे।

  • कहानी: रावण की नहीं थी सोने कीˈ लंका शिवजी ने मां पार्वती के लिए बनाई थी लंकापति ने ऐसे छीनीˌ

    कहानी: रावण की नहीं थी सोने कीˈ लंका शिवजी ने मां पार्वती के लिए बनाई थी लंकापति ने ऐसे छीनीˌ

    रामायण की कथा में आप सभी ने सोने की लंका का जिक्र जरूर सुना होगा। अक्सर रावण के साथ सोने की लंका का नाम जोड़ा जाता है। कहते हैं कि ये लंका सचमुच के सोने की बनी थी। इसकी सुंदरता देखते ही बनती थी। लेकिन फिर हनुमान जी ने रावण की इस सोने कि लंका को आग लगाकर नष्ट कर दिया। अब इतनी कहानी तो हर कोई जानता है।

    लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सोने की लंका किसने और किसके लिए बनाई थी? आपको जान हैरानी होगी कि ये सोने की लंका रावण की नहीं थी, बल्कि उसने धोखे से इसे लिया था।

    मां पार्वती के लिए भोलेनाथ ने बनाई थी सोने की लंका

    हिंदू धर्म की मान्यताओं की माने तो सोने की इस लंका को भगवान शिव ने माता पार्वती के लिए बनवाया था। वैसे तो मां पार्वती और भगवान भोलेनाथ हिमालय में रहा करते थे। वह वहां सामान्य जीवन जीते थे। इससे वह खुश भी थे। उन्हें किसी आलीशान महल की जरूरत भी नहीं थी। लेकिन एक बार यूं ही बाकी देवी देवताओं के राज महलों को देखकर माता पार्वती के मन में भी अपना एक महल होने का विचार आया। ऐसे में उन्होंने भगवान शिव को देवताओं की तरह कोई महल बनवाने के लिए कहा।

    रावण ने ऐसे धोखे से ली सोने की लंका

    कहानी: रावण की नहीं थी सोने कीˈ लंका शिवजी ने मां पार्वती के लिए बनाई थी लंकापति ने ऐसे छीनीˌ

    अब भगवान शिव भला मां पार्वती की बात कैसे टालते। उन्होंने विश्वकर्मा और कुबेर को बुलाकर समुद्र के बीच में सोने का का एक शानदार महल खड़ा करवा दिया। इसे सोने की लंका कहा जाने लगा। जल्द सोने की लंका के चर्चे दूर-दूर तक होने लगे। फिर रामायण काल में एक बार रावण सोने की लंका के पास से गुजर रहा था। वह इस लंका को देखकर अत्यंत मोहित हुआ। सोने की लंका को देख उसकी नियत बिगड़ गई। उसके मन में लालच आया और उसने इसे हासिल करने का मन बना लिया।

    रावण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण किया और भगवान शिव के पास चला गया। उसने शिवजी से दान में सोने की लंका मांग ली। भोलेनाथ एक ब्राह्मण को ना नहीं कर सके। और इस तरह रावण ने धोखे से भगवान शिव और माता पार्वती की सोने की लंका हथिया ली। वैसे एक अन्य कथा के अनुसार रावण ने धनपति कुबेर से सोने की लंका बलस्वरूप छीन ली थी। कुल मिलाकर बात यही है कि रावण ने इस लंका को खुद नहीं बनाया बल्कि दूसरी से छीना है।

    पार्वती ने दिया था रावण को श्राप और जल गई लंका

    उधर जब माता पार्वती को रावण के इस छल का पता चला तो वह बड़ी नाराज हुई। उन्होंने रावण को श्राप दिया कि एक दिन तेरी लंका जलकर भस्म हो जाएगी। फिर रामायण काल में जब हनुमान जी सीता माता को ढूंढते हुए लंका आए तो उन्होंने अपनी पूंछ में आग लगाकर सारी लंका जलाकर खाक कर दी। और इस तरह माता पार्वती का श्राप सच साबित हुआ।

    दोस्तों उम्मीद करते हैं कि आपको ये जानकारी पसंद आई होगी। यदि हाँ तो इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर कर पहुंचाए। ताकि बाकी लोग भी सोने की लंका का असली सच जान सके।

  • अपनी जन्म तारीख से जानें आपके इष्टˈ देवता कौन हैं जिनकी पूजा से दूर होंगे सभी दुखˌ

    अपनी जन्म तारीख से जानें आपके इष्टˈ देवता कौन हैं जिनकी पूजा से दूर होंगे सभी दुखˌ

    अपनी जन्म तारीख से जानें आपके इष्टˈ देवता कौन हैं जिनकी पूजा से दूर होंगे सभी दुखˌ

    अंक ज्योतिष में जन्म तारीख के अंकों का जोड़ हमें हमारा मूलांक प्रदान करता है। मूलांक न केवल हमारे व्यक्तित्व और स्वभाव को दर्शाता है, बल्कि यह हमारे इष्ट देव को पहचानने में भी मदद करता है।

    आइए, जानते हैं 1 से 9 तक के सभी मूलांकों और उनके इष्ट देवों के बारे में।

    मूलांक 1: सूर्य देव

    जिनका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 और 28 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 1 होता है। सूर्य देव इनके इष्ट देव होते हैं। 

    उपाय:

    • नियमित रूप से सूर्य देव को अर्घ्य दें।
    • सूर्य नमस्कार करें।
    • लाल या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें।

    मूलांक 2: भगवान शिव

    जिनका जन्म 2, 11, 20 और 29 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 2 होता है। इनके इष्ट देव भगवान शिव हैं। उपाय:

    • शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं।
    • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
    • सोमवार का व्रत रखें।

    मूलांक 3: भगवान विष्णु

    जिनका जन्म 3, 12, 21 और 30 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 3 होता है। इनके इष्ट देव भगवान विष्णु हैं। 

    उपाय:

    • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
    • तुलसी के पौधे की पूजा करें।
    • गुरुवार का व्रत रखें।

    मूलांक 4: मां दुर्गा और देवी सरस्वती

    जिनका जन्म 4, 13, 22 और 31 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 4 होता है। इनके इष्ट देव मां दुर्गा और देवी सरस्वती हैं। उपाय:

    • मां दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाएं।
    • सरस्वती वंदना करें।
    • नवरात्रि में उपवास रखें।

    मूलांक 5: भगवान श्री कृष्ण

    जिनका जन्म 5, 14 और 23 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 5 होता है। इनके इष्ट देव भगवान श्री कृष्ण हैं। 

    उपाय:

    • श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने माखन और मिश्री का भोग लगाएं।
    • “ॐ क्लीं कृष्णाय नमः” मंत्र का जाप करें।
    • जन्माष्टमी का व्रत रखें।

    मूलांक 6: मां लक्ष्मी

    जिनका जन्म 6, 15 और 24 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 6 होता है। इनके इष्ट देव मां लक्ष्मी हैं। 

    उपाय:

    • शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा करें।
    • “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
    • घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

    मूलांक 7: भगवान गणेश

    जिनका जन्म 7, 16 और 25 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 7 होता है। इनके इष्ट देव भगवान श्री गणेश हैं। 

    उपाय:

    • श्री गणेश को दूर्वा (दूब) अर्पित करें।
    • “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
    • बुधवार का व्रत रखें।

    मूलांक 8: हनुमान जी और शनि देव

    जिनका जन्म 8, 17 और 26 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 8 होता है। इनके इष्ट देव हनुमान जी और शनि देव हैं। 

    उपाय:

    • हनुमान चालीसा का पाठ करें।
    • शनि मंदिर में तेल का दीपक जलाएं।
    • शनिवार का व्रत रखें।

    मूलांक 9: हनुमान जी

    जिनका जन्म 9, 18 और 27 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 9 होता है। इनके इष्ट देव हनुमान जी हैं। उपाय:

    • मंगल वार को हनुमान जी की पूजा करें।
    • सुंदरकांड का पाठ करें।
    • लाल रंग के वस्त्र पहनें।

    मूलांक और इष्ट देव का सही ज्ञान आपके जीवन को सरल और सुखद बना सकता है। अपनी पूजा पद्धति और नियमित उपायों के द्वारा आप अपने इष्ट देव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और जीवन में आने वाली समस्याओं से बच सकते हैं।

  • शादी के बाद भी आखिर क्यों भटकताˈ है मर्दों का मन? पराई औरतों में दिलचस्पी की ये वजह जानकर रह जाएंगे हैरानˌ

    शादी के बाद भी आखिर क्यों भटकताˈ है मर्दों का मन? पराई औरतों में दिलचस्पी की ये वजह जानकर रह जाएंगे हैरानˌ

    शादी के बाद भी आखिर क्यों भटकताˈ है मर्दों का मन? पराई औरतों में दिलचस्पी की ये वजह जानकर रह जाएंगे हैरानˌ

    आचार्य चाणक्य ने आम जिंदगी से जुड़े कई सारी बातों को लेकर लोगों का मार्गदर्शन किया है। जिन्हें एकत्रित करके जिन किताबों में रखा गया है, उसे नीतिशास्त्र कहा गया है। जिसमें जिंदगी से जुड़े उन सभी रहस्यों पर से पर्दा हटाने का काम किया गया है।

    जिसको लेकर हम पब्लिक रूप से कुछ नहीं कर पाते हैं। बोल पाते हैं। और इन्ही सब चीजों में है सम्बंध। जिसको लेकर हम हमेशा संशय में रहते हैं। और इसी को देखते हुए नीति शास्त्र में स्त्री पुरुष के बीच के संबंधों के बारे में भी बताया गया है।

    इस वजह से स्त्री के प्रति मोहभंग हो जाता है
    जिसमें संबन्धों को मजबूत बनाने के नियम का भी ज़िक्र किए गये हैं। और वजह भी बतायी गयी है कि आख़िर क्या वज़ह हो सकता है किसी के रिश्तों में दरारें आने की ? क्या वज़ह है जिसके चलते पुरुष का स्त्री के प्रति मोहभंग हो जाता है। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, परिवार, समाज के साथ ही कई अन्य मुद्दों के प्राकृतिक नियम की बात की है। जो सभी नियम वर्तमान समय में भी हैं और ये काफी अधिक प्रांसगिंक भी है। आखिर क्यों किसी पुरुष का अपनी पत्नी से मोहभंग हो जाता है ? इसके बावजूद भी क्यों वो दूसरी स्त्री के प्रति सम्मोहित हो जाता है?

    शादी के बाद किसी अन्य के लिए आकर्षण
    शादी के बाद स्त्री-पुरुष का किसी अन्य के लिए आकर्षण होना एक सामान्य रूप से प्राकृतिक घटना है। ये गलत नहीं है लेकिन हम जिस समाज में रह रहे हैं हमारे समाज में यह स्वीकार्य नहीं है। और इसके मुख्य कारण ये हो सकते है।

    वाणी में मधुरता की कमी
    वैवाहिक रिश्ते में कड़वाहट की मुख्य वजह वाणी की मधुरता में कमी होना ही होता है। किसी भी ऐसे घर में जहाँ स्त्री हो या फिर पुरुष आपका में मनमुताबिक रहने के लिए घर के बाहर वो मधुरता की तलाश करते है, वहाँ ये हक़ीक़त हो जाती है। क्योंकि एक वैवाहिक रिश्ते में एक दूसरे सुखों के साथ साथ ही मानसिक सुख भी बड़े मायने रखता है। जिसकी कमी रिश्ते तोड़ देती है और मधुरता से उसे पाया जा सकता है।

    संतान की नई जिम्मेदारी
    अक्सर देखा जाता है कि वैवाहिक जीवन में पति पत्नी के बीच सन्तान के होने के बाद कभी कभी रिश्तों में बदलाव आ ही जाता है। ऐसे में चंचल स्वभाव वाले पुरुष घर से बाहर अन्य स्त्रियों के प्रति आकर्षित हो जाते हैं और यहीं से एक्ट्रा मैरिटल अफेयर की शुरुआत हो जाती है जिसके बाद उन्हें इस तरह की परेशानी का सबब बनना पड़ता है।

    आकर्षण की कमी होना
    जब पति पत्नी एक दूसरे पर ध्यान नहीं देते या फिर एक दूसरे को पूरा समय नहीं देते या फिर सिर्फ एक दूसरे की कमियों को गिनाते रहते हैं तो ऐसे में रिश्तों में खटास आने लगती है। ऐसे में पति, पत्नी की जगह किसी और स्त्री की तरफ आकर्षित हो जाता है।

    भरोसे की कमी होना
    वैवाहिक जीवन की सबसे बड़ी ताकत ही भरोसा है। अगर स्त्री ये भरोसा तोड़ती है तो पुरुष और अगर पुरुष ये भरोसा तोड़ता है तो स्त्री, घर के बाहर रिश्तों की तलाश करने लगती है। अपनी जरुरतों के लिए ऐसे स्त्री पुरुष एक्ट्रा मैरिटल अफेयर में कहीं आगे बढ़ जाते हैं।