Category: Crime

  • कपल को आया कॉल कहा- जय हिंदˈ जय भारतीय सेना… फिर अकाउंट से गायब हो गए 200000ˌ

    कपल को आया कॉल कहा- जय हिंदˈ जय भारतीय सेना… फिर अकाउंट से गायब हो गए 200000ˌ

    कपल को आया कॉल कहा- जय हिंदˈ जय भारतीय सेना… फिर अकाउंट से गायब हो गए 200000ˌ

    बेंगलुरु के बांदीपल्या में रहने वाली हरिणी (बदला हुआ नाम) को एक व्हाट्सएप ग्रुप में एक मैसेज मिला. इस ग्रुप में देश भर के प्रशिक्षक शामिल थे जिसमें अक्सर नौकरी के अवसरों की जानकारी शेयर की जाती थी. एक दिन ग्रुप में मैसेज आया कि बेंगलुरु का आर्मी पब्लिक स्कूल (एपीएस) में अनुशासन और संचार कौशल के लिए एक प्रशिक्षक की तलाश में है. साथ ही एक एक फोन नंबर भी दिया गया था.

    हरिणी ने उत्साह में उस नंबर पर कॉल किया. दूसरी ओर से एक व्यक्ति ने खुद को एपीएस का प्रशासनिक कर्मचारी बताया. उसने नौकरी की आवश्यकताओं को समझाया और हरिणी की फीस पर चर्चा की दो घंटे के काम के लिए प्रति घंटे 5,000 रुपये. उसने वादा किया कि स्कूल का प्रभारी जल्द ही उनसे संपर्क करेगा. हरिणी को यह अवसर सुनहरा लगा.

    जल्द ही एक और नंबर से व्हाट्सएप वॉयस कॉल आया. कॉल करने वाले ने दावा किया कि वह एमजी रोड पर स्थित एपीएस कैंपस से बोल रहा है. उसने हरिणी की प्रोफाइल की तारीफ की और कहा कि स्कूल उनकी सेवाएं लेना चाहता है. लेकिन उसने एक ‘प्रोटोकॉल’ की बात की. चूंकि यह एक सैन्य संस्थान था हरिणी को वेंडर के रूप में पंजीकरण करना होगा. विश्वास में आकर हरिणी ने अपनी आधार नंबर शेयर कर दी. इसके बाद ठग ने अगला कदम बताया डिजिटल भुगतान पंजीकरण. उसने कहा कि हरिणी को अपना यूपीआई आईडी लिंक करना होगा और एक ओटीपी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. हरिणी ने निर्देशों का पालन किया और ओटीपी के साथ अपना पिन डाला. कुछ ही सेकंड में उनके खाते से 26,000 रुपये निकाल लिए गए.

    हरिणी ने जब विरोध किया तो ठग ने उन्हें कॉल पर बनाए रखा. अपनी बात को विश्वसनीय बनाने के लिए उसने एक नकली सैन्य आईडी भेजी और बार-बार देशभक्ति का सहारा लिया. ‘जय हिंद’, ‘जय इंडियन आर्मी’ इस बात से हरिणी को उस आदमी पर पूरा भरोसा हो गया. इसके बाद ठग ने एक वैकल्पिक फोन नंबर मांगा. हरिणी ने अपने पति दिनेश का नंबर दे दिया. लेकिन ठगों ने वही चाल दिनेश के साथ दोहराई. देशभक्ति की भावनाओं का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने दिनेश को भी उसी प्रक्रिया में फंसाया. इस बार चार लेनदेन में उनके खाते से लगभग 1.9 लाख रुपये निकाल लिए गए.

    एक घंटे के भीतर दंपति ने 2.1 लाख रुपये से अधिक गंवा दिए. सदमे में डूबे दिनेश ने शुक्रवार को बांदीपल्या पुलिस में शिकायत दर्ज की. दंपति ने अपने बैंक और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन (1930) से भी संपर्क किया. पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत मामला दर्ज किया और ठगों के खातों को फ्रीज करने की कोशिश शुरू की.

  • विकलांग माँ और बुजुर्ग बाप को बेटोंˈ ने किया घर से बेदखल, 15 साल बाद बाप ने ऐसे सिखाया सबक

    विकलांग माँ और बुजुर्ग बाप को बेटोंˈ ने किया घर से बेदखल, 15 साल बाद बाप ने ऐसे सिखाया सबक

    विकलांग माँ और बुजुर्ग बाप को बेटोंˈ ने किया घर से बेदखल, 15 साल बाद बाप ने ऐसे सिखाया सबक

    माता-पिता अपनी कई संतानों को एक साथ रखकर उनका पालन-पोषण कर लेते हैं लेकिन कई बच्चे अपने माता पिता को नहीं रख पाते. शहर के चखली चौक में पांच कलयुगी बेटों ने अपने बुजुर्ग मां और 86 साल के पिता को झोपड़ी में रहने पर मजबूर कर दिया. उसके माता-पिता पिछले 15 सालों से झोपड़ी में गुजारा कर रहे थे. पिता का नाम हीरालाल साहू है और उन्होंने बताया कि खरीदी जमीन पर उनके पांच बेटे सुमरन लाल, हुकूम साहू, प्रमोद साहू, उमांशकर और कीर्तन साहू ने मिलकर एक मकान बना लिया है और विकलांग माँ और बुजुर्ग बाप को बेटों ने किया घर से बेदखल, इस केस के सात ही हीरालाल साहू ने ऐसा कदम उठाया जो हर माता-पिता और बच्चों के लिए सबक है.

    विकलांग माँ और बुजुर्ग बाप को बेटों ने किया घर से बेदखल

    86 साल के हीरालाल अपनी पत्नी के साथ पिछले 15 सालों से एक झोपड़ी में रह रहे हैं. उन्होंने कई बार अपने बेटों से मिन्नतें कीं कि वो उन्हें उस घर में रखें लेकिन बेटे नहीं माने. मानना तो दूर कोई भी बेटा बात करने को भी तैयार नहीं था और जैसे-तैसे हीरालाल ने हिम्मत जुटाकर अपने बेटों के खिलाफ चिखली थाने में अपने पांचों बेटों के साथ मामला दर्ज कराया है. चिखली पुलिस ने वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2007 की धारा 24 के अंतर्गत पांचों बेटों पर मामला दर्ज कर लिया और कार्यवाही शुरु कर दी है. हीरालाल पहले शासकीय प्रेस के कर्मचारी थे और उन्होंने नौकरी के दौरान ही अपने नाम जमीन ये सोचकर खरीदा कि भविष्य में बेटों और पोतों के साथ जिंदगी फिर से बिताएंगे. मगर इसी जमीन पर बेटों ने उनकी असहमति से मकान बनवा लिया और परिवार के बुजुर्ग माता-पिता को घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया. कार्यवाही होने के बाद अब हीरालाल अपने जमीन पर बने मकान में जीवन बिता पाएंगे जबकि पिछले 15 साल से बेटों की वजह से झोपड़ी में रह रहे थे.

    पुलिस में शिकायत के बाद उनके चारों बेटों को गिरफ्तार कर लिया गया है. हीरालाल का एक बेटा भोपाल में रहता है जिसके चलते पुलिस नहीं पहुंच पाई लेकिन बाकी बेटों को गिरफ्तार किया गया और इन सबमें अहम बात ये है कि बेटों को अब जमानत भी मिल गई है. जमानत के बाद चारों बेटे ने अपने माता को घर ले जाने की बात में हामी भरी है.

    हीरालाल ने किया था बाढ़ पीड़ित को दान

    15 सालों से झोपड़ी में रहने वाले हीरालाल ने भी कई अच्छे काम किए हैं लेकिन उनका सबसे बड़ा परोपकार का काम तब हुआ जब उन्होंने केरल बाढ़ पीड़ितों को 70 हजार रुपये का दान किया था. जिला प्रशासन के माध्मय से उन्होंने अपने नौकरी के दौरान जुटाई रकम को बाढ़ पीड़ितो को दान दिया. माता-पिता इंसान की सबसे बड़ी प्रॉपर्टी होते हैं और उन्हें किसी भी हाल में खुश रखना चाहिए. इस खबर में आज के नौजवानों को कुछ सीखना चाहिए और इसके अलावा ऐसे बुजुर्गों से खुलकर सामने आने की अपील करते हुए उन दंपत्ति को ये नसीहत दी गई कि अगर आप भी अपने बच्चों के सताए हुए हैं तो उन्हें कानून के मुताबकि हक मिलेगा.

  • नर्क से भी बदतर बन गई नवविवाहिताˈ की ज़िंदगी, पति और सास ने कहा- ये शर्त पूरी करो तब घर में घुसना

    नर्क से भी बदतर बन गई नवविवाहिताˈ की ज़िंदगी, पति और सास ने कहा- ये शर्त पूरी करो तब घर में घुसना

    नर्क से भी बदतर बन गई नवविवाहिताˈ की ज़िंदगी, पति और सास ने कहा- ये शर्त पूरी करो तब घर में घुसना

    भारत में शादी करना बहुत जरूरी माना जाता है फिर आप चाहें नहीं चाहे, अगर शादी की उम्र हो गई है तो कुछ अपने आप शादी करना चाहते हैं तो कुछ की रिश्तेदार पकड़कर करवा देते हैं. यहां पर शादी एक जुआं माना जाता है क्योंकि हिंदू धर्म के हिसाब से एक बार शादी हो गई तो उसे निभाना ही पड़ता है लेकिन अगर शादी आप उस शादी मे खुश नहीं है तो भी समाज के डर से उसे सहना ही पड़ता है. कुछ ऐसा ही हाल हुआ मध्यप्रदेश के इंदौर में जब नर्क से भी बदतर बन गई नवविवाहिता की ज़िंदगी, उसके पति और सास ने उसके साथ ऐसा-ऐसा बर्ताव किया कि कोई कमजोर लड़की होती तो शायद सुसाइड कर लेती लेकिन उसने हिम्मत दिखाई और अपनी उस परेशानी का खुलकर सामना किया.

    नर्क से भी बदतर बन गई नवविवाहिता की ज़िंदगी

    ये घटना है इंदौर की जहां पर द्वारकापुरी में रहने वाली 25 साल की युवती खुशबू मिश्रा ने अपने पति सौरभ और सास रेणुका की दहेज प्रताड़ना को लेकर केस दर्ज कराया. शादी के 6 महीने के बाद से पति उसके साथ मारपीट करता था, सास ने दहेज की मांग को लेकर बहू को गर्म तवे से जलाया. टीआई आरएन भदौरिया ने बताया कि महिला की शादी को 6 महीने हुआ है कुछ दिनों तक सब ठीक चला लेकिन बाद में उसका पति उससे मारपीट करने लगा. पति का किसी और से अफेयर था जिसके चलते वो उससे कहता था कि तुम ना उसके जैसी सुंदर हो और ना ही पढ़ी-लिखी हो. महिला को ये सब करीब 5 महीनों से सहना पड़ रहा था. खुशबू ने बताया, ” शादी के सिर्फ 6 महीने ही हुए और इन महीनों में मैंने सारे नर्क देख लिये हैं. पति से ज्यादा हैवानियत सास ने दिखाई.”

    खुशबू ने आगे बताया कि उसकी सास ने उसे गर्म तवे से जलाया और घर से ये कहते हुए निकाला कि ऊपर का मकान बनाने के लिए अपने पिता से डेढ़ लाख रुपये लेकर आन, तभी घर में घुसना नहीं तो वापस आने की जरूरत नहीं है. इस पर वह मायके चली गई और फिर वहां हिम्मत दिखाई और सीधे द्वारिकापुरी पुलिस स्टेशन पहुंच गई. अन्नपूर्णा पुलिस ने खुशबू के पिता राम तलरेजा निवासी सच्चिदानंद नगर की शिकायत पर उसके ससुराल पक्ष के राम, पूनम, कैलाश और रुपाली के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कर लिया है. ये सभी खुशबू को दहेज के लिए बारी-बारी प्रताडित करते थे.

    बहुत हिम्मत दिखाई खुशबू ने

    भारत में खासकर हिंदू धर्म में शादी को एक ऐसा महान दर्जा दे दिया गया है जिसमें एक बार शादी कर लो तो पति को परमेश्वर ही मान लो. फिर वो आपको गाली दे मारे या फिर कुछ भी करे वो पति है कर सकता है ऐसी अवधारणा दी जाती है. आज भी बहुत से घरों में लड़कियां अपने ससुराल वालों की प्रताड़ना सह रही हैं. मगर आज का जमाना बदल गया है और अगर आपकी शादीशुदा जिंदी में ऐसी कोई परेशानी आ रही है तो आपको अवेयर होना चाहिए और खुशबू जैसा कदम उठाना चाहिए जिससे दहेज के लोभी लोगों को सबक मिल सके.

  • सऊदी से वापस आकर महिला ने खोलीˈ शेखों की पोल, सुनाई आप बीती कहानी

    सऊदी से वापस आकर महिला ने खोलीˈ शेखों की पोल, सुनाई आप बीती कहानी

    सऊदी से वापस आकर महिला ने खोलीˈ शेखों की पोल, सुनाई आप बीती कहानी

    कई बार सऊदी जाना सबके लिए बहुत अच्छा संकेत नहीं होता, क्योंकि वहां के शेख लोग महिलाओ को तो छोड़ो पुरुषों को भी नहीं छोड़ते हैं. वे भारतीय लोगों का किसी ना किसी रूप में शोषण करते ही रहते हैं. इस बात पर पुख्ता सबूत तब मिले जब एक भारतीय महिला वहां के शेख की कैद से भागकर आई. सऊदी से वापस आकर महिला ने खोली शेखों की पोल, वहां से बहुत मुश्किल से उसे छुड़ाया गया और अब वो वापस आकर सऊदी अरब में अपने साथ हुए अत्याचारों को पुलिस के सामने स्वीकार की.

    आज का समय इतना तेज और आगे चला गया है कि किसी पर भी भरोसा करना बहुत ही मुश्किल हो गया है. ऐसा करके उस महिला ने भी बहुत बड़ी गलती कर दी थी जब उसने अपने परिवार की खुशी के लिए अपने आपको ऐसे नरक में भेज दिया. एक ऐसी महिला जिसका परिवार आर्थिक रूप से जूझ रहा था और उसके पति को सऊदी जाना था लेकिन सेहत सही ना होने की वजह से वो जा नहीं सका.

    इसलिए उसकी महिला ने जाने की जिद की, फिर एक एजेंट के जरिए वो सऊदी अरब पहुंच गई. वहां वो एक शेख के घर गई जहां उसे कुछ दिन तो ठीक से रखा गया वो अपने काम से काम रखती थी लेकिन कुछ समय के बाद उसका हर तरह से शोषण होने लगा. उस महिला ने वापस आकर अपनी सारी स्थिति कुछ इस तरह बताई कि वहां उसे लोगों के जूठे बर्तन में जूठे खाने को दिया जाता था फिर शेख लोग उसके साथ दिन-रात शोषण करते थे और 24 घंटे में सिर्फ 3 घंटे ही सोने देते थे.

    कई बार वो अगर सुबह उठ नहीं पाती थी तो वहां की मैडम उसे लात मारकर उठाती थीं और शेख के अलावा उसके बच्चे भी उस महिला के साथ गलत काम करने की कोशिश किया करते थे. उस महिला का हाल बहुत ज्यादा खराब सा हो गया था और सभी उसे एक जानवर की तरह ही रखते थे और कुछ समय पहले से उसे उसके परिवार में बात भी नहीं करने देते थे. वो दिन रात रोती बिलखती लेकिन कोई वहां ऐसा नहीं था जो उसकी फरियाद सुन सके.

    उस महिला की स्थिति जानने के लिए उसका पति एजेंट के पास गया और बताया कि कुछ दिनों से उसकी पत्नी से बात नहीं हो पा रही है तो क्या वो बता सकता है कि उसकी पत्नी कैसी है. उस एजेंट ने बहुत बार बात को टाल दिया लेकिन जब बात बढ़ी तो उस आदमी ने पुलिस का सहारा लिया. फिर छानबीन में पता चला कि वो एजेंट महिलाओं को झांसा देकर अरब भेजता है और वहां के शेखों से खूब पैसा बनाता था. जैसे ही पुलिस को इस सारी घटना के बारे में पता चला तो पुलिस ने उन शेखों का नंबर पता किया और उन नंबर के आधार पर भारतीय दूतावास की मदद से उस महिला को आजाद कराया गया.