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  • पेट में गैस, पेट फूलना और बदबूदारˈ गैस को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी: जानिए इसके पीछे की असली वजह और खतरे

    पेट में गैस, पेट फूलना और बदबूदारˈ गैस को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी: जानिए इसके पीछे की असली वजह और खतरे

    पेट में गैस, पेट फूलना और बदबूदारˈ गैस को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी: जानिए इसके पीछे की असली वजह और खतरे

    आजकल पेट में गैस बनना और पेट फूलना बहुत आम समस्या बन चुकी है। ज्यादातर लोग इसे सामान्य डाइजेशन की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर यह समस्या रोज होने लगे, तो यह शरीर के अंदर चल रही किसी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकती है।

    अगर आपको अक्सर पेट भारी लगता है, खाना खाने के बाद असहज महसूस होता है या कपड़े टाइट लगने लगते हैं, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है। कई बार शरीर हमें संकेत देता रहता है, लेकिन हम उसे समझ नहीं पाते।

    गैस और ब्लोटिंग एक जैसी नहीं होती

    गैस का मतलब होता है पेट के अंदर गैस का बनना, जो ज्यादातर हवा निगलने या अधपचा खाना आंतों में सड़ने से बनती है। यह सामान्य रूप से कभी-कभी होना ठीक माना जाता है।

    वहीं ब्लोटिंग एक फीलिंग होती है, जिसमें पेट टाइट, भरा हुआ और भारी महसूस होता है। कई बार लोगों को ज्यादा गैस नहीं होती, फिर भी पेट फूलने की समस्या बनी रहती है, जो गट की मूवमेंट से जुड़ी होती है।

    रोज गैस बनना शरीर का Warning Signal हो सकता है

    अगर आपको रोज गैस बनती है, पेट फूलता है और बदबूदार गैस आती है, तो यह सामान्य नहीं है। यह संकेत हो सकता है कि आपका डाइजेशन सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर रहा।

    लंबे समय तक इस समस्या को नजरअंदाज करने से आगे चलकर बड़ी पेट की बीमारियां भी हो सकती हैं। इसलिए समय रहते कारण समझना बहुत जरूरी होता है।

    गलत खाने का तरीका सबसे बड़ा कारण बनता है

    बहुत तेजी से खाना, जरूरत से ज्यादा खाना या देर रात भारी खाना खाने से गैस बनने की समस्या बढ़ जाती है। कई लोग खाली पेट चाय या कॉफी पीते हैं, जिससे भी पेट में एसिड और गैस बढ़ सकती है।

    खाने का सही तरीका डाइजेशन के लिए उतना ही जरूरी होता है जितना सही खाना। धीरे-धीरे और आराम से खाना पेट को ज्यादा फायदा देता है।

    कब्ज और गैस का गहरा संबंध होता है

    डॉक्टरों के अनुसार, गैस की शिकायत करने वाले बहुत से लोग असल में कब्ज से परेशान होते हैं। जब पेट पूरी तरह साफ नहीं होता, तो खाना आंतों में ज्यादा समय तक रहता है।

    इससे फर्मेंटेशन बढ़ता है और गैस ज्यादा बनती है। इसलिए गैस की समस्या में कब्ज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    कुछ खास फूड्स भी गैस का कारण बनते हैं

    कुछ लोगों को दूध, गेहूं, राजमा, छोले, गोभी या प्याज खाने से ज्यादा गैस बनती है। हर व्यक्ति का गट अलग तरह से काम करता है, इसलिए हर किसी पर फूड का असर अलग होता है। अगर किसी खास फूड के बाद पेट ज्यादा खराब होता है, तो उसे पहचानना और सीमित करना जरूरी होता है।

    तनाव का असर सीधे पेट पर पड़ता है

    बहुत कम लोग जानते हैं कि मानसिक तनाव का असर सीधे पेट पर पड़ता है। जब हम ज्यादा तनाव में होते हैं, तो पेट की मूवमेंट धीमी हो जाती है। इसी कारण कई लोगों को टेंशन या चिंता के समय ज्यादा गैस और पेट फूलने की समस्या होती है।

    कुछ छुपी बीमारियां भी गैस का कारण हो सकती हैं

    IBS जैसी बीमारी में गैस, पेट दर्द और कभी कब्ज तो कभी दस्त की समस्या रहती है। वहीं SIBO में खाना खाते ही पेट फूलने लगता है और ज्यादा गैस बनने लगती है। Celiac बीमारी में ग्लूटेन से समस्या होती है, जिससे गैस के साथ थकान, खून की कमी और वजन कम होने लगता है। ऐसे मामलों में सिर्फ गैस की दवा काम नहीं करती।

    इन लक्षणों के साथ गैस हो तो सावधान रहें

    अगर गैस के साथ वजन तेजी से कम हो रहा है, स्टूल में खून आ रहा है या बार-बार उल्टी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। अगर तेज पेट दर्द, बुखार या रात में गैस की वजह से नींद टूट रही है, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

    गैस और ब्लोटिंग से बचने के आसान तरीके

    खाना हमेशा धीरे-धीरे और चबा कर खाना चाहिए। ओवरईटिंग से बचना चाहिए और थोड़ा पेट खाली छोड़कर उठना चाहिए। डिनर हमेशा सोने से कम से कम 3 घंटे पहले करना चाहिए। साथ ही पानी पीना, हल्की एक्सरसाइज करना और फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाना भी जरूरी है।

    घरेलू उपाय भी काफी मदद कर सकते हैं

    खाने के बाद सौंफ चबाने से गैस कम बनती है और डाइजेशन बेहतर होता है। अजवाइन को भूनकर गुनगुने पानी के साथ लेने से भी राहत मिल सकती है। अदरक वाला पानी पेट की सूजन और गैस दोनों में मदद करता है। अगर गैस के साथ कब्ज भी है, तो त्रिफला जैसे हल्के आयुर्वेदिक उपाय फायदेमंद हो सकते हैं।

    एक जरूरी बात हमेशा याद रखें

    गैस को हमेशा छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार यह शरीर का संकेत होता है कि अंदर कुछ सही नहीं चल रहा। अगर समस्या बार-बार हो रही है, तो कारण समझना और सही इलाज करवाना जरूरी होता है। Health Disclaimer: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। अगर आपकी समस्या लंबे समय से बनी हुई है या गंभीर लक्षण मौजूद हैं, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • ये 8 बीज मोटापे को जड़ सेˈ खत्म कर देंगे, वजन ऐसा घटेगा कि दोबारा पलटकर कभी नहीं आएगा

    ये 8 बीज मोटापे को जड़ सेˈ खत्म कर देंगे, वजन ऐसा घटेगा कि दोबारा पलटकर कभी नहीं आएगा

    ये 8 बीज मोटापे को जड़ सेˈ खत्म कर देंगे, वजन ऐसा घटेगा कि दोबारा पलटकर कभी नहीं आएगा

    आज के समय में मोटापा एक गंभीर समस्या बन चुका है। वजन कम करना जितना आसान सुनाई देता है, असल में उतना ही मुश्किल होता है। सिर्फ वर्कआउट ही नहीं, बल्कि सही और संतुलित आहार भी वजन घटाने में अहम भूमिका निभाता है।

    अगर आपका लक्ष्य स्थायी रूप से वजन कम करना है, तो आपको मजबूत इच्छाशक्ति के साथ सही पोषण की भी जरूरत है। आज हम आपको 8 ऐसे अद्भुत बीजों के बारे में बता रहे हैं, जो न केवल मोटापा कम करने में मदद करते हैं बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी प्रदान करते हैं।

    आइए जानते हैं इन 8 बीजों के बारे में विस्तार से।

    1. चिया बीज (Chia Seeds)

    चिया बीज कम कैलोरी वाले होते हैं लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें आयरन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है।

    चिया बीज पानी को अधिक मात्रा में सोखकर जेल जैसा बन जाते हैं। जब इन्हें खाया जाता है, तो ये पेट में जाकर फैलते हैं जिससे देर तक भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है। वजन घटाने के लिए इन्हें सुपरफूड माना जाता है।

    2. अलसी के बीज (Linseed / Flax Seeds)

    अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, जो इंसुलिन लेवल को संतुलित रखने और फैट बर्न करने में मदद करते हैं। इनमें फाइबर, प्रोटीन और आयरन भी भरपूर मात्रा में होता है।

    अलसी के बीज हार्मोनल असंतुलन को नियंत्रित करते हैं और अनावश्यक वजन बढ़ने से रोकते हैं। कम मात्रा में सेवन करने पर भी ये पेट भरा-भरा रखते हैं।

    3. क्विनोआ के बीज (Quinoa Seeds)

    क्विनोआ देखने में अनाज जैसा लगता है लेकिन यह वास्तव में बीज होता है। यह प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, जिंक और अमीनो एसिड से भरपूर होता है।

    क्विनोआ शरीर को ऊर्जा देता है लेकिन वजन नहीं बढ़ाता। इसे चावल के विकल्प के रूप में, दलिया, सब्जियों या सलाद में शामिल किया जा सकता है। यह वजन घटाने के साथ पोषण की कमी भी नहीं होने देता।

    4. सूरजमुखी के बीज (Sunflower Seeds)

    सूरजमुखी के बीज प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर की सूजन कम करते हैं और विषैले तत्वों को बाहर निकालते हैं।

    इनमें विटामिन B, विटामिन E और मैग्नीशियम पाया जाता है, जो कोर्टिसोल हार्मोन को नियंत्रित कर वजन बढ़ने से रोकता है। साथ ही ये कोलेस्ट्रॉल कम करने, हृदय को स्वस्थ रखने, त्वचा और बालों की सेहत सुधारने में भी मदद करते हैं।

    5. कद्दू के बीज (Pumpkin Seeds)

    कद्दू के बीज कोलेस्ट्रॉल कम करने में बेहद लाभकारी होते हैं। इनमें स्टेरॉल्स और फाइटोस्टेरॉल पाए जाते हैं, जो शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाते हैं।

    ये बीज जिंक, प्रोटीन, कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं, पाचन सुधारते हैं और शरीर की सूजन कम करते हैं।

    6. तिल के बीज (Sesame Seeds)

    तिल के बीज फाइबर, विटामिन E, मैग्नीशियम, जिंक और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। ये शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं और पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं।

    नियमित सेवन से वजन नियंत्रित रहता है और जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है।

    7. भांग के बीज (Hemp Seeds)

    भांग के बीज पूर्ण प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं, क्योंकि इनमें सभी आवश्यक अमीनो एसिड मौजूद होते हैं। ये मांसपेशियों के विकास में मदद करते हैं और कैलोरी बर्न करने में सहायक होते हैं।

    इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, आयरन और मैग्नीशियम होता है, जो सूजन कम करने और वजन घटाने में मदद करता है।

    8. अनार के बीज (Pomegranate Seeds)

    अनार के बीज एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं और इनमें लगभग न के बराबर कैलोरी होती है।

    ये बीज फैट कम करने, दिल को स्वस्थ रखने और मेटाबॉलिज्म सुधारने में मदद करते हैं। वजन घटाने के लिए अनार के दाने बेहद फायदेमंद माने जाते हैं।

    इन 8 बीजों को सेवन करने का सही तरीका

    इन सभी बीजों को हल्का भूनकर खाना सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। भुने हुए बीज स्वाद में भी अच्छे लगते हैं और पचाने में आसान होते हैं। आप इन्हें सलाद, दलिया, सब्जी या स्नैक्स के रूप में भी शामिल कर सकते हैं।

  • एक तुलसी के इतने कमाल 26 रोगोंˈ को जड़ से करे साफ़, बड़े काम के है ये आयुर्वेदिक उपाय जो हर किसी को होने चाहिए पता

    एक तुलसी के इतने कमाल 26 रोगोंˈ को जड़ से करे साफ़, बड़े काम के है ये आयुर्वेदिक उपाय जो हर किसी को होने चाहिए पता

    एक तुलसी के इतने कमाल 26 रोगोंˈ को जड़ से करे साफ़, बड़े काम के है ये आयुर्वेदिक उपाय जो हर किसी को होने चाहिए पता

    1. लिवर की समस्या
    तुलसी की 10–12 पत्तियों को गर्म पानी से धोकर रोज सुबह खाने से लिवर संबंधी समस्याओं में लाभ मिलता है।

    2. पेट दर्द
    एक चम्मच तुलसी की पिसी पत्तियों को पानी में मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं। पेट दर्द होने पर इसे नाभि और पेट के आसपास लगाने से आराम मिलता है।

    3. पाचन संबंधी समस्या
    दस्त, गैस आदि में एक गिलास पानी में 10–15 तुलसी की पत्तियां उबालकर काढ़ा बनाएं। इसमें चुटकी भर सेंधा नमक डालकर पीएं।

    4. बुखार
    दो कप पानी में एक चम्मच तुलसी पाउडर और एक चम्मच इलायची पाउडर डालकर काढ़ा बनाएं। दिन में 2–3 बार पीएं।

    5. खांसी-जुकाम
    तुलसी की कोमल पत्तियां अदरक के साथ चबाने से राहत मिलती है। तुलसी का काढ़ा या चाय गले की खराश में फायदेमंद है।

    6. सर्दी से बचाव
    ठंड या बारिश के मौसम में 10–12 तुलसी की पत्तियां दूध में उबालकर पीएं। यह पौष्टिक पेय भी है।

    7. श्वास संबंधी समस्या
    शहद, अदरक और तुलसी से बना काढ़ा दमा, ब्रोंकाइटिस और कफ में राहत देता है।

    8. गुर्दे की पथरी
    तुलसी का अर्क शहद के साथ नियमित लेने से गुर्दे मजबूत होते हैं और पथरी में लाभ मिलता है।

    9. हृदय रोग
    तुलसी खून में कोलेस्ट्रॉल कम करती है, जिससे हृदय रोगियों को फायदा होता है।

    10. तनाव
    तुलसी की पत्तियों में तनावरोधी गुण होते हैं। रोज 12 पत्ते दो बार सेवन करें।

    11. मुंह का संक्रमण
    रोज तुलसी की कुछ पत्तियां चबाने से अल्सर और मुंह के संक्रमण में राहत मिलती है।

    12. त्वचा रोग
    दाद, खुजली व अन्य त्वचा रोगों में तुलसी का अर्क प्रभावित स्थान पर लगाने से लाभ होता है।

    13. सांसों की दुर्गंध
    सूखी तुलसी की पत्तियों को सरसों के तेल में मिलाकर दांत साफ करने से बदबू दूर होती है।

    14. सिर दर्द
    तुलसी का काढ़ा पीने से सिर दर्द में आराम मिलता है।

    15. आंखों की समस्या
    आंखों की जलन में श्यामा तुलसी के अर्क की 2 बूंदें रात में डालने से लाभ होता है।

    16. कान दर्द
    तुलसी की पत्तियों को सरसों के तेल में भूनकर लहसुन रस मिलाकर कान में डालें।

    17. ब्लड प्रेशर
    तुलसी के पत्तों का नियमित सेवन ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

    18. वात रोग
    पांच तुलसी पत्ते और दो काली मिर्च साथ में खाने से वात रोग में राहत मिलती है।

    19. कैंसर रोग
    तुलसी की पत्तियां चबाकर ऊपर से पानी पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

    20. बच्चों का पेट फूलना
    तुलसी और पान के पत्तों का रस बराबर मात्रा में देने से पेट फूलना ठीक होता है।

    21. पोषण तत्व
    तुलसी का तेल विटामिन C, कैल्शियम और फॉस्फोरस से भरपूर होता है।

    22. मच्छर-मक्खी से बचाव
    तुलसी का तेल प्राकृतिक रूप से मच्छर और मक्खी को दूर रखता है।

    23. वायरल से बचाव
    मौसम बदलते समय चाय में तुलसी की पत्तियां डालकर पीने से वायरल से बचाव होता है।

    24. चक्कर आना
    शहद में तुलसी के रस को मिलाकर चाटने से चक्कर आना बंद होता है।

    25. खूनी बवासीर
    तुलसी के बीजों का चूर्ण दही के साथ लेने से खून आना बंद होता है।

    26. यौन कमजोरी
    तुलसी के बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से यौन शक्ति में वृद्धि होती है।

  • यूरिक एसिड ने शरीर को जकड़ रखाˈ है तो चिंता ना करे, ये पोस्ट आपके लिए वरदान साबित होगी, जरूर पढ़े और शेयर करे

    यूरिक एसिड ने शरीर को जकड़ रखाˈ है तो चिंता ना करे, ये पोस्ट आपके लिए वरदान साबित होगी, जरूर पढ़े और शेयर करे

    यूरिक एसिड ने शरीर को जकड़ रखाˈ है तो चिंता ना करे, ये पोस्ट आपके लिए वरदान साबित होगी, जरूर पढ़े और शेयर करे

    यूरिक एसिड का बढ़ने की समस्या बडी तेजी से बढ़ रही है। आयु बढ़ने के साथ-साथ यूरिन एसिड गाउट आर्थराइटिस समस्या का होना तेजी से आंका गया है। जोकि लाईफ स्टाईल, खान-पान, दिनचर्या के बदलाव से भोजन पाचन प्रक्रिया के दौरान बनने वाले ग्लूकोज प्रोटीन से सीधे यूरिन एसिड में बदलने की प्रक्रिया को यूरिन एसिड कहते हैं। भोजन पाचन प्रक्रिया दौरान प्रोटीन से ऐमिनो एसिड और प्यूरीन न्यूक्लिओटाइडो से यूरिक एसिड बनता है।

    यूरिक एसिड का मतलब है, जो भोजन खाया जाता है, उसमें प्यूरीन पोष्टिकता संतुलन की कमी से रक्त में असंतुलन प्रक्रिया है। जिससे प्यूरीन टूटने से यूरिक एसिड बनता है। यूरिक ऐसिड एक तरह से हड्डियों जोड़ों अंगों के बीच जमने वाली एसिड़ क्रिस्टल है। जोकि चलने फिरने में चुभन जकड़न से दर्द होता है। जिसे यूरिक एसिड कहते हैं। शोध में यूरिक एसिड को शरीर में जमने वाले कार्बन हाइड्रोजन आक्सीजन नाइट्रोजन सी-5, एच-4, एन-4, ओ-3 का समायोजक माना जाता है।

    यूरिक एसिड समय पर नियत्रंण करना अति जरूरी है। यूरिक एसिड बढ़ने पर समय पर उपचार ना करने से जोड़ों गाठों का दर्द, गठिया रोग, किड़नी स्टोन, डायबिटीज, रक्त विकार होने की संभावनाएं ज्यादा बढ़ जाती है। रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा को नियत्रंण करना अति जरूरी है। 

    ➡ यूरिक एसिड (Uric Acid) के लक्षण :

    1. पैरो-जोड़ों में दर्द होना।
    2. पैर एडियों में दर्द रहना।
    3. गांठों में सूजन
    4. जोड़ों में सुबह शाम तेज दर्द कम-ज्यादा होना।
    5. एक स्थान पर देर तक बैठने पर उठने में पैरों एड़ियों में सहनीय दर्द। फिर दर्द सामन्य हो जाना।
    6. पैरों, जोड़ो, उगलियों, गांठों में सूजन होना।
    7. शर्करा लेबल बढ़ना। इस तरह की कोई भी समस्या होने पर तुरन्त यूरिक एसिड जांच करवायें।

    ➡ यूरिक एसिड (Uric Acid) नियत्रंण करने के आर्युवेदिक तरीके :

    1. चोबचीनी का चूर्ण (यह आपको आयुर्वेदिक स्टोर या पंसारी की दुकान पर मिल जायेगा) आधा चम्मच सुबह खाली पेट और रात को सोने के समय पानी से लेने पर कुछ ही दिनों में यूरिक एसिड (Uric Acid) ख़त्म हो जाता है। यह उपाय बहुत चमत्कारी है क्योंकि की यह आजमाया हुआ है।
    2. यूरिक एसिड बढ़ने पर हाईड्रालिक फाइबर युक्त आहार खायें। जिसमें पालक, ब्रोकली, ओट्स, दलिया, इसबगोल भूसी फायदेमंद हैं।
    3. आंवला रस और एलोवेरा रस मिश्रण कर सुबह शाम खाने से 10 मिनट पहले पीने से यूरिक एसिड कम करने में सक्षम है। 
    4. टमाटर और अंगूर का जूस पीने से यूरिक एसिड तेजी से कम करने में सक्षम है।
    5. तीनो वक्त खाना खाने के 5 मिनट बाद 1 चम्मच अलसी के बीज का बारीक चबाकर खाने से भोजन पाचन क्रिया में यूरिक ऐसिड नहीं बनता।
    6. 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच अश्वगन्धा पाउडर को 1 कप गर्म दूध के साथ घोल कर पीने से यूरिक एसिड नियत्रंण में आता है। 
    7. यूरिक एसिड बढ़ने के दौरान जैतून तेल का इस्तेमाल खाने तड़के-खाना बनाने में करें। जैतून तेल में विटामिन-ई एवं मिनरलस मौजूद हैं। जोकि यूरिक एसिड नियत्रंण करने में सहायक हैं।
    8. यूरिक एसिड बढ़ने पर खाने से 15 पहले अखरोट खाने से पाचन क्रिया शर्करा को ऐमिनो एसिड नियत्रंण करती है। जोकि प्रोटीन को यूरिक एसिड़ में बदलने से रोकने में सहायक है।
    9. विटामिन सी युक्त चीजें खाने में सेवन करें। विटामिन सी यूरिक एसिड को मूत्र के रास्ते विसर्ज करने में सहायक है।
    10. रोज 2-3 चैरी खाने से यूरिक एसिड नियत्रंण में रखने में सक्षम है। चेरी गांठों में एसिड क्रिस्टल नहीं जमने देती।
    11. सलाद में आधा नींबू निचोड़ कर खायें। दिन में 1 बार 1 गिलास पानी में 1 नींबू निचैंड कर पीने से यूरिक एसिड मूत्र के माध्यम से निकलने में सक्षम है। चीनी, मीठा न मिलायें।
    12. तेजी से यूरिक एसिड घटाने के लिए रोज सुबह शाम 45-45 मिनट तेज पैदल चलकर पसीना बहायें। तेज पैदल चलने से एसिड क्रिस्टल जोड़ों गांठों पर जमने से रोकता है। साथ में रक्त संचार को तीब्र कर रक्त संचार सुचारू करने में सक्षम है। पैदल चलना से शरीर में होने वाले सैकड़ों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। तेज पैदल चलना एसिड एसिड को शीध्र नियत्रंण करने में सक्षम पाया गया है।
    13. बाहर का खाना पूर्ण रूप से बन्द कर दें। घर पर बना सात्विक ताजा भोजन खायें। खाने में ताजे फल, हरी सब्जियां, सलाद, फाइबर युक्त संतुलित पौष्टिक आहर लें।
    14. रोज योगा आसान व्यायाम करें। योग आसान व्यायाय यूरिक एसिड को घटाने में मद्दगार है। साथ में योगा-आसान-व्यायाम करने से मोटापा वजन नियत्रंण रहेगा।
    15. ज्यादा सूजन दर्द में आराम के लिए गर्म पानी में सूती कपड़ा भिगो कर सेकन करें।
    16. यूरिक एसिड समस्या शुरू होने पर तुरन्त जांच उपचार करवायें। यूरिक एसिड ज्यादा दिनों तक रहने से अन्य रोग आसानी से घर बना लेते हैं।

    ➡ यूरिक ऐसिड (Uric Acid) बढ़ने पर खान-पान : 

    1. यूरिक एसिड बढ़ने पर मीट मछली सेवन तुरन्त बंद कर दें। नॉनवेज खाने से यूरिक एसिड तेजी से बढ़ता है। औषधि दवाईयां असर कम करती है।
    2. यूरिक एसिड बढ़ने पर अण्डा का सेवन पूर्ण रूप से बंद कर दें। अण्डा रिच प्रोटीन वसा से भरपूर है। जोकि यूरिक एसिड को बढ़ता है।
    3. बेकरी से बनी सही खाद्य सामग्री बंद कर दें। बेकरी फूड प्रीजरवेटिव गिला होता है। जैसेकि पेस्ट्री, केक, पैनकेक, बंन्न, क्रीम बिस्कुट इत्यादि।
    4. यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त जंकफूड, फास्ट फूड, ठंडा सोडा पेय, तली-भुनी चीजें बन्द कर दें। जंकफूड, फास्टफूड, सोडा ठंडा पेय पाचन क्रिया को और भी बिगाड़ती है। जिससे एसिड एसिड तेजी से बढता है।
    5. चावल, आलू, तीखे मिर्चीले, चटपटा, तले पकवानों का पूरी तरह से खाना बन्द कर दें। यह चीजें यूरिक एसिड बढ़ाने में सहायक हैं।
    6. बन्द डिब्बा में मौजूद हर तरह की सामग्री खाना पूरी तरह से बंद कर दें। बन्द डब्बे की खाने पीने की चीजों में भण्डारण के वक्त कैम्किल रसायन मिलाया जाता है। जैसे कि तरह तरह के प्लास्टिक पैक चिप्स, फूड इत्यादि। हजारों तरह के बन्द डिब्बों और पैकेट की खाद्य सामग्री यूरिक एसिड तेजी बढ़ाने में सहायक है। 
    7. एल्कोहन का सेवन पूर्ण रूप से बन्द कर दें। बीयर, शराब यूरिक एसिड तेजी से बढ़ती है। शोध में पाया गया है कि जो लोग लगातार बीयर शराब नशीली चीजों का सेवन करते हैं, 70 प्रतिशत उनको सबसे ज्यादा यूरिक एसिड की समस्या होती है। यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त बीयर, शराब पीना बन्द कर दें। बीयर शराब स्वस्थ्य व्यक्ति को भी रोगी बना देती है। बीयर, शराब नशीली चीजें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
  • महिलाओं में स्तनों की मजबूती, कसाव औरˈ सुंदर आकार के लिए असरदार आयुर्वेदिक देखभाल और घरेलू नुस्खे

    महिलाओं में स्तनों की मजबूती, कसाव औरˈ सुंदर आकार के लिए असरदार आयुर्वेदिक देखभाल और घरेलू नुस्खे

    महिलाओं में स्तनों की मजबूती, कसाव औरˈ सुंदर आकार के लिए असरदार आयुर्वेदिक देखभाल और घरेलू नुस्खे

    महिलाओं के शरीर में स्तनों का विकास और उनका सही आकार होना हार्मोनल संतुलन, पोषण और जीवनशैली पर निर्भर करता है। कई महिलाओं को स्तनों का अविकसित रहना, ढीलापन आना या आकार में असंतुलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे आत्मविश्वास पर भी असर पड़ सकता है।

    आयुर्वेद में ऐसी समस्याओं के लिए कुछ प्राकृतिक और सुरक्षित उपाय बताए गए हैं, जिन्हें नियमित रूप से अपनाने पर स्तनों के पोषण, मजबूती और आकार में सुधार देखा जा सकता है।

    स्तनों से जुड़ी सामान्य समस्याओं के लिए घरेलू आयुर्वेदिक उपाय

    1. बादाम के तेल से मालिश

    यदि स्तन अविकसित या छोटे हैं, तो शुद्ध बादाम के तेल से नियमित रूप से हल्की मालिश करने से रक्त संचार बेहतर होता है और ऊतकों को पोषण मिलता है। इससे स्तनों की वृद्धि और मजबूती में सहायता मिलती है।

    2. अश्वगंधा और शतावरी का सेवन

    अश्वगंधा और शतावरी दोनों ही आयुर्वेद में स्त्री स्वास्थ्य के लिए उपयोगी मानी जाती हैं।

    • दोनों को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें।
    • सुबह और शाम एक-एक चम्मच चूर्ण गुनगुने दूध के साथ लें।
    • इसका सेवन 45 से 60 दिनों तक नियमित रूप से करें।

    यह उपाय हार्मोनल संतुलन बनाने और स्तनों के विकास में सहायक माना जाता है।

    3. महानारायण तेल से मालिश

    महानारायण तेल से हल्के हाथों से नियमित मालिश करने पर स्तनों की त्वचा में कसाव आता है और ढीलापन कम होने में मदद मिलती है।

    4. आयुर्वेदिक चूर्ण का उपयोग

    स्तनों के पोषण के लिए निम्न सामग्री से बना मिश्रण उपयोगी माना जाता है—

    • पीपरी चूर्ण
    • काली मिर्च चूर्ण
    • अश्वगंधा चूर्ण
    • सोंठ चूर्ण

    इन सभी को शुद्ध घी में हल्का भूनकर पुराने गुड़ की चाशनी में मिलाया जाता है। इस मिश्रण को प्रतिदिन सीमित मात्रा में गुनगुने दूध के साथ लेने से शरीर को पोषण मिलता है और स्तनों की मजबूती में सहायता मिल सकती है।

    (ध्यान दें: किसी भी आयुर्वेदिक मिश्रण को लेने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित होता है।)

    5. संतुलित और पोषक आहार

    स्तनों के अच्छे विकास और स्वास्थ्य के लिए आहार का सही होना बहुत जरूरी है। अपने भोजन में शामिल करें—

    • ताजे फल और हरी सब्जियां
    • दालें और प्रोटीन युक्त आहार
    • दूध, दही और घी
    • काजू, बादाम जैसे सूखे मेवे
    • नारियल और नींबू

    यह सभी पोषक तत्व शरीर को आवश्यक ऊर्जा और हार्मोन संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।

    महत्वपूर्ण सलाह

    ये उपाय धीरे-धीरे असर दिखाते हैं, इसलिए धैर्य और नियमितता जरूरी है। किसी भी प्रकार की असहजता या समस्या होने पर आयुर्वेदिक चिकित्सक या डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

  • इस पौधे की एक पत्ती दूर करˈ देती है बांझपन, बिना महंगे इलाज के घर में गूंज उठती है किलकारी

    इस पौधे की एक पत्ती दूर करˈ देती है बांझपन, बिना महंगे इलाज के घर में गूंज उठती है किलकारी

    इस पौधे की एक पत्ती दूर करˈ देती है बांझपन, बिना महंगे इलाज के घर में गूंज उठती है किलकारी

    यह इतना गुणी पौधा हैं कि कितना भी पुराना घाव हो या दाद ,खाज, खुजली हो उसे चुटकियों ठीक कर देता है। सबसे बड़ी बात ये पौधा बांझपन को बिल्कुल दूर कर देता है।

     कहाँ मिलता है ये पौधा : ये पौधा भारत में सभी स्थानों पर पाया जाता है है और मुख्य रूप से शुष्क क्षेत्रों में इसका बाहुल्य होता है। यह आपको खेत ,खलिहान ,नदी ,नाला हर जगह मिल जायेगा। यह दो प्रकार के फूलों वाला होता है एक पीले फूल और दूसरा सफ़ेद फूल वाला। यह दोनों प्रकार के पौधे औषधीय रूप से सामान होते हैं।

    इसके पत्ते कटीले और इसे तोड़ने पर सुनहरे रंग का दूध निकालता है। सत्यानासी के औषधीय गुण और उनका उपयोग : दोस्तों वैसे तो यह पौधा औषधीय गुणों से भरा पड़ा है किन्तु मैं आपको को इसके प्रमुख घरेलू उपचारों के बारे में बताएंगे। निसंतानता अथवा बांझपन – दोस्तों यह एक ऐसी समस्या है जिससे आदमी टूट सा जाता है। इंसान के पास सब कुछ होते हुए जब कोई संतान नहीं होती है ,तो वह व्यक्ति बहुत दुखी हो जाता है। निसंतानता का प्रमुख कारण बीज में शुक्राणुओं की कमीं होती है। दोस्तों अगर कोई भी व्यक्ति इस समस्या से परेशान है तो सत्यानासी के पौधे की जड़ की छाल को छाया में सुखाकर इसका पाउडर बना लें।

    इसको सुबह खाली पेट एक से दो ग्राम दूध के साथ लें इसके नियमित सेवन से निसंतानता और धातु रोग की समस्या 14 दिन में जड़ से खत्म हो जाती है। यदि समस्या अधिक उम्र के व्यक्ति को है तो इसका सेवन अधिक दिन भी करना पड़ सकता ह।ै अगर हम इसकी जड़ों को धोकर इनका पाउडर बना लें और इसका प्रयोग सुबह मिश्री के साथ ले तो भी निसंतानता खत्म हो जाती है और संतान की प्राप्ति होती है। इसके लिए ये रामबाण औषधि है। नपुंसकता- इसके लिए सत्यानासी की जड़ों को पीस कर ,एक ग्राम सत्यानासी की जड़ का पाउडर और इतनी ही मात्रा में बरगद का दूध आपस में मिलाकर चने के आकार की गोलियां बना लें। इन गोलियों को लगातार 14 दिन तक सुबह -शाम पानी के साथ देने से नपुंसकता रोग खत्म हो जाता है।

    यह भी एक रामबाण उपाय है। अस्थमा -इसके लिए सत्यानासी की जड़ों का चूर्ण एक से आधा राम दूध या गरम पानी से लेने से अस्थमा रोग ठीक हो जाता है। Disclaimer: यह जानकारी केवल सामान्य ज्ञान के लिए है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

  • ये चमत्कारी पौधा बड़े से बड़े रोगोंˈ को जड़ से उखाड़ फेंकेगा वो भी मात्र 10 दिनों में, इसके बारे में जाने अभी

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    सदाबहार छोटा झाड़ीनुमा पौधा है। इसके गोल पत्ते थोड़ी लम्बाई लिए अंडाकार व अत्यंत चमकदार व चिकने होते हैं। एक बार पौधा जमने पर उसके आसपास अन्य पौधे अपने आप उगते जाते हैं। पांच पंखुड़ियों वाला पुष्प श्वेत, गुलाबी, फालसाई, जामुनी आदि रंगों में खिलता है।

    पत्ते व फल की सतह थोड़ी मोटी होती है। इसके चिकने मोटे पत्तों के कारण ही पानी का वाष्पीकरण कम होता है और पानी की आवश्यकता बहुत कम होने से यह बड़े मजे में कहीं पर भी चलता खिलता व फैलता है। इसके इन्हीं गुण के कारण पुष्प प्रेमियों ने इसका नाम नयन तारा या सदाबहार रखा। फूल तोड़कर रख देने पर भी पूरा दिन ताजा रहता है। मंदिरों में पूजा पर चढ़ाए जाने में इसका उपयोग खूब होता है।

    रोगों में इसके प्रयोग के विषय में लिखा है। भारत में प्राकृतिक चिकित्सक मधुमेह रोगियों को इसके श्वेत फूल का प्रयोग सुबह खाली पेट करने की सलाह देते हैं। यह पौधा अपोनसाईनसियाई परिवार का है और कनेर, प्लूमेरिया फ्रैंगीपानी, सप्तपर्णीय करौंदा, ट्रेक्लोस्पमर्म, ब्यूमेन्शया ग्रैन्डीफ्लोरा, एलामंडाकथार्टिका जैसे अत्यंत भव्य लोकप्रिय झाड़ियां, वृक्ष व लताएं इसी परिवार से संबंधित हैं।

    इस परिवार के पौधों की विशेषता इसे तोड़ने पर उसमें से बहने वाला श्वेत चिपचिपा गाढ़ा लेसदार तरल पदार्थ है।

    सदाबहार के घरेलू उपचार

    1. त्वचा पर घाव या हो जाने पर आदिवासी इसकी पत्तियों का रस दूध में मिला कर लगाते हैं। इनका मानना है कि ऐसा करने से घाव पक जाता है और जल्द ही मवाद बाहर निकल आता है।

    2. सदाबहार (sadabahar) ( सदाफूली ) की तीन चार कोमल पत्तियाँ चबाकर रस चूसने से


    मधुमेह रोग से राहत मिलती है। आधे कप गरम पानी में सदाबहार ( सदाफूली ) के तीन ताज़े गुलाबी फूल 05 मिनिट तक भिगोकर रखें। उसके बाद फूल निकाल दें और यह पानी सुबह ख़ाली पेट पियें। यह प्रयोग 08 से 10 दिन तक करें।

    अपनी शुगर की जाँच कराएँ यदि कम आती है तो एक सप्ताह बाद यह प्रयोग पुनः दोहराएँ।

    1. पत्तियों को तोड़ने पर निकलने वाले दूध को खाज-खुजली में लगाने पर जल्द आराम मिलने लगता है। दूध को पौधे से एकत्र कर प्रभावित अंग पर दिन में कम से कम दो बार लेप किया जाना चाहिए।

    2. सदाबहार ( सदाफूली ) के पौधे के चार पत्तों को साफ़ धोकर सुबह खाली पेट चबाएं और ऊपर से दो घूंट पानी पी लें। इससे मधुमेह मिटता है। यह प्रयोग कम से कम तीन महीने तक करना चाहिए।

    3. इसकी पत्तियों को तोड़े जाने पर जो दूध निकलता है, उसे घाव पर लगाने से किसी तरह का संक्रमण नहीं होता और घाव जल्दी सूख भी जाता है।

    4. पत्तियों और फूलों को कुचलकर बवासीर होने पर इसे लगाने से तेजी से आराम मिलता है। आदिवासी जानकारों के अनुसार, ऐसा प्रतिदिन रात को सोने से पहले किया जाना ठीक होता है।

    5. सदाबहार के फूलों और पत्तियों के रस को मुहांसों पर लगाने से कुछ ही दिनों में
     इनसे निजात मिल जाती है। पत्तियों और फूलों को पानी की थोड़ी सी मात्रा में कुचल कर लेप को मुहांसों पर दिन में कम से कम दो बार लगाने से जल्दी आराम मिलता है।

    6.इसकी पत्तियों के रस को ततैया या मधुमक्खी के डंक मारने पर लगाने से बहुत जल्दी आराम मिलता है। इसी रस को घाव पर लगाने से घाव भी जल्दी सूखने लगते हैं। त्वचा पर खुजली, लाल निशान या किसी तरह की एलर्जी होने पर पत्तियों के रस को लगाने पर आराम मिलता है।