नमस्कार दोस्तों कभी-कभी छाती में इतना कफ जम जाता है कि साँस लेना भी मुश्किल हो जाता है। छोटे बच्चे, बुज़ुर्ग या जिनकी रोग-प्रतिरोधक शक्ति कमज़ोर होती है, उनके लिए यह समस्या गंभीर साबित हो सकती है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो निमोनिया जैसी बीमारियाँ भी हो सकती हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं? सिर्फ़ 2–3 रुपये की एक साधारण सी औषधि से छाती का कफ मात्र 2 मिनट में साफ़ हो सकता है!
🌿 छाती में कफ जमने के लक्षण:
ज़रा सा काम करने पर थकावट महसूस होना
मुँह में मीठापन लगना
साँस लेते समय सीटी जैसी आवाज़ आना
चिपचिपा पसीना आना
आलस्य महसूस होना, बार-बार नींद आना
भूख कम लगना या थोड़ा खाने पर ही पेट भर जाना
अगर ये लक्षण दिखें, तो समझिए शरीर में कफ जमा है।
🌿 उपाय क्या है?
यह उपाय है जेष्ठमध (मुलेठी) नामक औषधीय पौधे का। इसे हिंदी में मुलेठी कहा जाता है। यह पौधे की मीठे स्वाद वाली जड़ होती है, और इसमें श्वसन तंत्र से जुड़ी लगभग हर समस्या को दूर करने की शक्ति होती है।
💧 उपयोग करने की विधि:
👉 विधि 1: सीधे चबाकर खाएँ
मुलेठी की एक छोटी सी काड़ी लें,
उसे चबाएँ और रस निगलते रहें।
इसके बाद एक कप गुनगुना पानी पिएँ।
दिन में 3 बार ऐसा करने से छाती का कफ आसानी से बाहर निकल जाता है।
👉 विधि 2: काढ़ा बनाकर पिएँ
मुलेठी की 2–3 इंच की कड़ी को तोड़कर कुचल लें।
इसे 2 कप पानी में डालकर उबालें।
जब पानी आधा (1 कप) रह जाए तो छान लें।
इसमें 2–3 बूँद अदरक का रस डालें।
गुनगुना रहते ही पिएँ। बच्चों को आधा कप देना चाहिए। सुबह और शाम – सिर्फ़ 2 दिन में ही असर दिखेगा।
🎯 परिणाम:
छाती का कफ उल्टी के रूप में बाहर निकलता है या शरीर के अंदर ही जलकर नष्ट होता है।
ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है (99–100% तक)।
खाँसी, बुखार, गला बैठना जैसी समस्याएँ कम होती हैं।
आवाज़ साफ़ होती है, साँस लेना आसान होता है।
⚠️ महत्वपूर्ण सावधानियाँ:
पाउडर रूप में मुलेठी न लें, क्योंकि उसमें मिलावट हो सकती है।
सिर्फ़ असली लकड़ी जैसी जड़ ही इस्तेमाल करें।
मात्रा सीमित रखें।
बच्चों और बुज़ुर्गों को आधी मात्रा ना दें।
📝 निष्कर्ष:
मुलेठी की जड़ सचमुच हर घर में रखनी चाहिए। यह खाँसी, कफ, गले की खराश और साँस से जुड़ी बीमारियों के लिए अमृत समान है।
आज हम बात करने वाले हैं सात ऐसे फलों के बारे में जो ना सिर्फ आपके कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं, बल्कि हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से बंद हुई दिल की नसों को खोलने में भी मदद करते हैं और दिल को मज़बूत बनाते हैं।
जी हाँ दोस्तों, आपने बिल्कुल सही सुना ये फ्रूट्स सिर्फ ट्रेडिशनल प्रैक्टिसेस में ही नहीं बल्कि साइंस भी इनके बेनिफिट्स को सपोर्ट करती है। तो अगर आप भी अपने हार्ट को हेल्दी और स्ट्रॉन्ग बनाए रखना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को ध्यान से अंत तक ज़रूर पढ़िए
🍌 1️⃣ Banana (केला)
पोटेशियम से भरपूर — ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है।
एक नेचुरल वेसोडाइलेटर — आपकी आर्टरी को रिलैक्स करता है और ब्लड फ्लो बेहतर बनाता है।
इसमें सॉल्युबल फाइबर होता है जो LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) को कम करता है।
📍 सावधानी: अगर आप डायबिटिक हैं या वज़न घटा रहे हैं तो केले को मॉडरेशन में खाएं। ज्यादा पके केले से बचें क्योंकि उनमें शुगर ज़्यादा होती है।
⏰ खाने का सही समय: सुबह नाश्ते में या प्री-वर्कआउट स्नैक के रूप में। रोज़ 1–2 केले से ज़्यादा न खाएं।
🍍 2️⃣ Pineapple (अनानास)
इसमें होता है Bromelain enzyme, जो एंटी-इन्फ्लेमेटरी है और ब्लड क्लॉट्स बनने से रोकता है।
विटामिन C और फाइबर से भरपूर — कोलेस्ट्रॉल घटाने और हार्ट को प्रोटेक्ट करने में मददगार।
⚠️ ध्यान दें: पाइनएप्पल में एसिडिटी ज़्यादा होती है, इसलिए एसिड रिफ्लक्स या सेंसिटिव टीथ वालों को सावधान रहना चाहिए। अगर आप ब्लड थिनर ले रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही खाएं।
⏰ बेस्ट टाइम: सुबह 10 से 12 बजे के बीच। रोज़ 1–2 कटोरी पर्याप्त है।
🍋 3️⃣ Lemon (नींबू)
विटामिन C और फ्लेवोनोइड्स से भरपूर — ये हार्ट को स्ट्रॉन्ग बनाते हैं और इंफ्लेमेशन कम करते हैं।
सलाद, पानी या सब्जी में डालकर खा सकते हैं।
⚠️ सावधानी: नींबू में एसिडिटी अधिक होती है — इसलिए सेवन के बाद हमेशा पानी से कुल्ला करें। अगर आप कोई दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर से कंसल्ट ज़रूर करें।
🍊 4️⃣ Orange (संतरा)
स्वादिष्ट होने के साथ-साथ हार्ट हेल्थ के लिए सुपरफ्रूट है।
विटामिन C, पोटेशियम और फाइबर से भरपूर।
एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखता है।
फ्लेवोनोइड्स ब्लड वेसल्स को मजबूत बनाते हैं।
💡 कैसे खाएं: छीलकर सीधे खाएं या फ्रेश जूस निकालें। ⚠️ पैक्ड जूस से बचें — उनमें अतिरिक्त शुगर और प्रिज़र्वेटिव होते हैं।
🥭 5️⃣ Mango (आम)
“फलों का राजा” — बीटा कैरोटीन और विटामिन C से भरपूर।
ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है और दिल को हेल्दी रखता है।
फाइबर से भरा — डाइजेशन और कोलेस्ट्रॉल दोनों में मददगार।
⚠️ सावधानी: आम में शुगर अधिक होती है — इसे मॉडरेशन में खाएं। डायबिटिक पेशेंट्स इसे पनीर, बादाम या मूंगफली जैसे प्रोटीन फूड के साथ खाएं।
🧡 6️⃣ Papaya (पपीता)
विटामिन C, E और बीटा-कैरोटीन से भरपूर — हार्ट डिजीज के रिस्क को घटाता है।
फॉलेट की मौजूदगी से होमोसिस्टीन लेवल कम होता है, जिससे नसों की रुकावट कम होती है।
फाइबर पेट को हेल्दी रखता है और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है।
⏰ खाने का सही समय: दिन में या शाम के वक्त — लेकिन रात में नहीं। डायबिटीज पेशेंट्स भी इसे मॉडरेशन में खा सकते हैं।
🌶️ 7️⃣ Yellow Bell Pepper (पीली शिमला मिर्च)
विटामिन C, E और कैरोटीनॉइड्स का पावरहाउस।
सूजन कम करती है, हार्ट को सपोर्ट करती है।
फाइबर और पोटेशियम ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल दोनों को कंट्रोल करते हैं।
💡 कैसे खाएं: सलाद में, सॉटे करके या सब्जी बनाकर हफ्ते में 1–2 बार खाएं।
सोचिए अगर आप सिर्फ 14 दिन के लिए शुगर यानी चीनी खाना छोड़ दें तो क्या होगा? ना आपकी चाय में चीनी, ना मिठाई और ना ही कोल्ड ड्रिंक। सिर्फ 14 दिन के लिए complete sugar detox!
रिसर्च कहती है कि आज एक इंसान जितनी शुगर सिर्फ एक साल में खा लेता है, उतना अब से 50 साल पहले के लोग 20 साल में भी नहीं खाते थे! सोचिए — आपके शरीर पर इसका कितना बुरा असर पड़ रहा होगा।
🍬 शुगर छोड़ना नामुमकिन नहीं है
अक्सर लोगों को लगता है कि शुगर छोड़ना उनके लिए नामुमकिन है। लेकिन दोस्तों, आज के टाइम में आपके पास scientifically proven alternatives हैं, जो taste भी बनाए रखते हैं और blood sugar levels भी नहीं बढ़ाते।
इसके बारे में हम आगे बात करेंगे, पर अभी के लिए इतना समझ लीजिए शुगर छोड़ना अब नामुमकिन नहीं रहा।
👨⚕️आज मैं आपको step by step बताऊंगा अगर आप सिर्फ 14 दिन शुगर छोड़ दें, तो आपकी बॉडी में दिन-ब-दिन क्या बदलाव आते हैं। साथ ही long-term benefits और जरूरी precautions भी।
🍭 शुगर सिर्फ मीठी नहीं, ये ज़हर है
शुगर अंदर से आपकी बॉडी को धीरे-धीरे खत्म करती रहती है। लोग सोचते हैं कि शुगर छोड़ने का मतलब सिर्फ वेट लॉस है। लेकिन ये तो आधी जानकारी है।
⚠️ सच जानिए —
बार-बार शुगर खाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है, जिससे डायबिटीज होती है।
शुगर से chronic inflammation होता है, जिससे heart blockage का खतरा बढ़ता है।
एक कैन कोला (9 चम्मच शुगर) रोज पीने से हार्ट डिजीज का रिस्क 20–30% बढ़ जाता है।
और हां — शुगर छोड़ना सिगरेट या अल्कोहल छोड़ने से भी कठिन है!
क्योंकि ये दिमाग के addiction centers को उसी तरह एक्टिवेट करता है जैसे तंबाकू या शराब।
🔄 शुगर छोड़ने के बाद दिन-ब-दिन बदलाव
🍫 पहले 3 दिन
शुगर की cravings सबसे ज्यादा होती हैं।
सिरदर्द, मूड स्विंग्स और गुस्सा आ सकता है।
लेकिन ये phase temporary होता है।
अगर 3 दिन निकाल लिए — आप जीत गए 💪
🍎 चौथे दिन से
Energy stable हो जाती है।
Mood बेहतर होता है।
Taste buds reset होने लगते हैं।
Fruits और natural sweets और भी मीठी लगने लगती हैं।
✨ दूसरे हफ्ते में
पेट की सूजन और bloating कम होने लगती है।
Skin glow करती है।
नींद गहरी होती है।
काम में focus बढ़ता है।
कई लोगों का वज़न 2–3 किलो तक कम हो जाता है।
🌿 लॉन्ग टर्म बेनिफिट्स
डायबिटीज से बचाव: इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है, ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है।
हार्ट हेल्थ बेहतर: ट्राइग्लिसराइड्स कम होते हैं, आर्टरीज फ्लेक्सिबल रहती हैं ❤️
बेली फैट घटता है: पेट की चर्बी सबसे पहले melt होती है।
स्किन और कोलेजन: झुर्रियाँ कम होती हैं, स्किन यंग दिखती है।
लिवर और इम्यूनिटी मजबूत: Detox तेज़ होता है, immunity बढ़ती है।
मेंटल हेल्थ: Anxiety कम होती है, concentration और positivity बढ़ती है।
☕ मिठास छोड़नी नहीं, बस समझदारी से बदलनी है
अगर आप सोचते हैं कि “बिना मिठास के जिंदगी कैसी,” तो इसका भी हल है 👇
🌸 ISugar Free Gold Plus
इसमें है Sucralose और Chromium, जो ब्लड शुगर नहीं बढ़ाते। आप डायबिटिक हों, प्री-डायबिटिक हों या फिटनेस लवर, अपनी चाय, कॉफी, हलवा, खीर — सबका मजा guilt-free लें। Scientifically tested & 100% safe. देता है वही स्वाद — बिना extra calories के!
अब smart choice यही है — शुगर को पूरी तरह replace करें Sugar Free Gold Plus से।
आपको ये अपने नजदीकी स्टोर या ऑनलाइन दोनों जगह मिल जाएगा। ⚠️ कुछ जरूरी सावधानियां
Packaged foods और processed items से बचें — इनमें hidden sugar होती है।
Refined carbs (मैदा, बेकरी आइटम्स) से दूर रहें।
Packaged fruit juices को “healthy” समझकर न पिएं — इनमें भी added sugar होती है।
Fruits खाएं moderation में।
और अगर आपको डायबिटीज या कोई मेडिकल कंडीशन है, तो डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।
💪 अब फैसला आपका है
क्या आप सिर्फ 14 दिन के लिए शुगर क्विट करके अपने शरीर में यह बदलाव देखना चाहेंगे? या फिर जैसे चल रहा है, वैसे ही चलने देंगे?
इस पोस्ट को अपने दोस्तों और फैमिली के साथ शेयर कीजिए — क्योंकि शायद उनका एक छोटा सा decision उनकी पूरी जिंदगी बदल दे।
इलायची (Cardamom) एक ऐसी चीज है जो आपको लगभग हर भारतीय किचन में मिल जाती है। आमतौर पर हम सभी इलायची का इस्तेमाल खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए ही करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसमें कई औषधीय गुण भी होते हैं।इलायची को यदि नियमित रूप से खाया जाए तो इससे शरीर को कई चौंकाने वाले लाभ (Cardamom Benefits) हो सकते हैं।
वैसे इलायची भी कई प्रकार की होती है। जैसे हरी इलायची (Green Cardamom) और काली इलायची (Black Elaichi)। इसके अलावा बड़ी इलायची, भूरी इलायची, नेपाली इलायची और बंगाल इलायची या लाल इलायची भी आती है। हरी इलायची का इस्तेमाल पूजा-पाठ और मीठे व्यंजनों में होता है। मोटी काली इलायची की बात करें तो इसका उपयोग मसलों में किया जाता है। आप कोई भी इलायची खाएं सबके अपने अलग फायदें होते हैं। तो चलिए फिर बिना किसी देरी के इलायची के फायदे जान लेते हैं। इलायची खाने के फायदे (Cardamom Benefits)
1. आपको जान हैरानी होगी कि इलायची को यदि रोज खाया जाए तो ये कैसर जैसी गंभीर बीमारी को भी हरा सकती है। दरअसल इलायची में एंटी इंफेलेमेंटरी गुण होता है जो मुंह का कैंसर, त्वचा के कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने में असरदार होता है। इसलिए कैंसर के मरीजों को रोज इलायची का सेवन करना चाहिए। आम व्यक्ति भी इसे रोज खाए तो उसे कैंसर होने का खतरा कम हो जाएगा।
2. आज की खराब लाइफस्टाइल और बेकार खान-पान के चलते पुरुषों में यौन रोग या गुप्त रोग होने लगा है। एक बड़ा पुरुष वार्ड इस बीमारी से परेशान है। ऐसे में इलायची आपकी यौन समस्या को हल करने का काम कर सकती है। इसलिए लिए आप छोटी हरी इलायची लें और उसे रात को सोने से पहले दूध शहद के साथ उबालकर खा लें। इससे आपकी हर तरह की यौन समस्या खत्म हो जाएगी।
3. गैस, एसिडिटी और पेट से जुड़ी सभी समस्याओं के लिए इलायची फायदेमंद होती है। इसका सेवन आप रोज कर सकते हैं।
4. ब्लड प्रेशर के मरीजों को भी रोज इलायची खाना चाहिए। इसमें मौजूद मैग्नीशियम और पौटेशियम न सिर्फ ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखता है बल्कि शरीर के रक्त संचार को भी सामान्य बनाता है।
5. अस्थमा, सांस की समस्या या फेफड़ों की सिकुड़न इत्यादि प्रॉब्लम में भी इलायची खान लाभकारी होता है। इन रोगों से पीड़ित लोगों को दिन में दो बार इलायची चबाकर खाना चाहिए।
उम्मीद करते हैं कि आपको इलायची के ये फायदें पसंद आए होंगे। कृपया इसे अधिक से अधिक लोगों तक शेयर कर पहुंचा दें।
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
मानसून के सिर्फ तीन-चार महीनों में ही मिलने वाली कंटोली की सब्जी में पोषक तत्वों का भंडार है। अगर आप सोचते हैं कि ताकत सिर्फ नॉनवेज से मिलती है, तो यह सोच बदलने का समय आ गया है।
कंटोला या ककोड़ा एक ऐसी सब्जी है जो भले ही कम समय के लिए मिलती है, लेकिन इसके गुण सब्जी को बेहद खास बनाते हैं।
कंटोला की सब्जी में मौजूद विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर इसे सुपरफूड की लिस्ट में शामिल कर देते हैं। यही वजह है कि इसे नॉनवेज से भी ज्यादा ताकतवर माना जाता है। आइए जानते हैं इसके फायदे और इसे डाइट में शामिल करने के कारण।
कंटोला में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसे खाने से मौसमी बीमारियां जैसे सर्दी-जुकाम और वायरल इन्फेक्शन से बचाव होता है।
डायबिटीज़ मरीजों के लिए कंटोला किसी वरदान से कम नहीं। इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं।
कंटोला में भरपूर फाइबर पाया जाता है, जो कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। यह डाइजेशन को मजबूत बनाता है और आंतों की सफाई में भी मदद करता है।
इस सब्जी का सेवन कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद करता है। कंटोला हृदय रोगों से बचाव करता है और ब्लड प्रेशर को बैलेंस में रखता है।
लो कैलोरी और हाई-फाइबर होने की वजह से यह सब्जी वेट लॉस करने वालों के लिए बेस्ट है। यह पेट को लंबे समय तक भरा रखती है और अनहेल्दी स्नैकिंग की आदत कम करती है।
कंटोला खाने से शरीर में टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, जिससे त्वचा साफ और ग्लोइंग रहती है। इसमें मौजूद मिनरल्स बालों की मजबूती और ग्रोथ के लिए भी मददगार होते हैं।
वैसे तो इसके दाम हर शहर राज्य में अलग-अलग होते हैं। मंडी (wholesale) की बात करें, तो इसकी औसत कीमत लगभग ₹70- ₹90 प्रति किलो के बीच होती है। ऑनलाइन रिटेल में दाम थोड़ा ज्यादा होता ह। यहां ₹100 से लेकर ₹350 तक दाम पहुंच जाते हैं।
कंटोला का स्वाद करेले और तोरई के बीच का होता है। इसमें करेले जैसी कड़वाहट नहीं होती, बल्कि हल्का-सा कसैलापन और कुरकुरापन होता है। पकने के बाद यह थोड़ा करारा और हल्का मीठापन लिए हुए लगता है, इसलिए खाने में सभी को पसंद आता है।
सामग्री (2-3 लोगों के लिए):
250 ग्राम (धोकर गोल स्लाइस या लंबाई में काट लें)
2 (लच्छेदार कटी हुई )
2 (कटी हुई)
½ चम्मच
½ चम्मच
1 चम्मच
स्वादानुसार
2 चम्मच
कढ़ाई में तेल गर्म करें, प्याज और हरी मिर्च डालकर हल्का भूनें।
उसमें कटे हुए कंटोले डालें और अच्छी तरह चलाएं।
नमक और हल्दी डालकर धीमी आंच पर ढककर 8-10 मिनट पकाएं।
जब नरम हो जाए तो लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालकर 2 मिनट भून लें।
चाहे तो ऊपर से नींबू का रस डालें और गरमा-गरम रोटी या पराठे के साथ परोसें।
कलौंजी का तेल हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, डाइबिटीज, अस्थमा, खांसी, नजला, जोड़ों के दर्द, बदन दर्द, कैंसर, किडनी, गुर्दे की पत्थरी, मूत्राशय के रोग, मर्दाना कमजोरी, बालों के रोगों, मोटापे, याददाश्त बढाने, मुंहासे, सुंदर चेहरा, अजीर्ण, उल्टी, तेज़ाब, बवासीर, लयुकोरिया आदि गंभीर बीमारियों से एक साथ निजात दिलाने में सक्षम है।
यह अनमोल चमत्कारिक दवा ब्लैैक सीड ऑइल, जिसे कलौंजी का तेल भी कहा जाता है यह आसानी से उपलब्ध होने वाली बेहद प्रभावी और उपयोगी साबित हो सकती है। कलौंजी के तेल में मौजूद दो बेहद प्रभावकारी तत्व थाइमोक्विनोन और थाइमोहाइड्रोक्विनोन में विशेष हीलींग प्रभाव होते हैं। ये दोनों तत्व मिलकर इन सभी बीमारियों से लड़ने और शरीर को हील करने में मदद करते हैं। किडनी के लिये किडनी में स्टोन ना बनने के लिये ½ चम्मच कलौंजी तेल, 1 कप गरम पानी, 2 चम्मच शहद को मिला कर, इस मिश्रण को दिन में दो बार लें। किडनी के दर्द से छुटकारा पाने के लिये कलौंजी और शहद का सेवन करना चाहिये। इसके लिये 250 ग्राम कलौंजी और ½ कप शहद मिक्स कर के पेस्ट बनाएं और फिर 2 चम्मच मिश्रण को आधे कप पानी के साथ लें।
मुंहासों से निजात 2 चम्मच नींबू के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिक्स कर के सुबह और रात को चेहरे पर लगाएं। इसेस त्वचा में निखार आएगा, गाले धब्बे मिटेंगे तथा मुंहासों से सुरक्षा मिलेगी। आप चाहें तो नींबू की जगह पर एप्पल साइडर वेनिगर भी प्रयोग कर सकती हैं।
मधुमेह से बचाव 1 कप काली चाय बना कर उसमें आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिक्स कर के सुबह और रात में सोने से पहले पियें। आपको एक महीने में असर दिखेगा।
दिमाग बढ़ाए 10 ग्राम पुदीने की पत्ती को पानी में ½ tsp कलौंजी तेल के साथ उबालें। इस मिश्रण को 20-25 दिनों तक दिन में दो बार नियमित रूप से लें और रिजल्ट देखें।
सिरदर्द से निजात तेजी का सिरदर्द हो रहा हो तो, माथे और कान के पास आधा चम्मच कलौंजी का तेल लगाएं। अगर माइग्रेन का दर्द है तो कलौंजी के तेल का नियमित सेवन करें। अस्थमा का इलाज अस्थमा या किसी तरीके की सांस की समस्या होने पर 1 कप गरम पानी, 1 चम्मच शहद, ½ चम्मच कलौंजी का तेल मिक्स कर के सुबह शाम सेवन करें। ऐसा करने से कफ और एलर्जी से भी छुटकारा मिलेगा।
हृदय के लिये जब कलौंजी का तेल और बकरी का दूध एक साथ पिया जाता है तो हृदय मजबूत बनता है और हार्ट अटैक की बीमारी नहीं होती। इसके लिये आपको 1 कप बकरी का दूध और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिक्स कर के हफ्ते भर पीना होगा।
जोड़ों के दर्द से आराम दिलाए घुटनों में दर्द हो तो आधा चम्मच कलौंजी का तेल, सिरका 1 कप और 2 चम्मच शहद मिक्स कर के दिन में दो बार लगा कर हल्के हाथों से मालिश करें। कैंसर से बचाव कलौंजी के तेल और अंगूर के जूस को मिला कर पीने से ब्लड कैंसर, आंत और गले का कैंसर नहीं होता। ½ चम्मच कलौंजी तेल और 1 कप अंगूर का जूस मिला कर दिन में तीन बार पियें।
आंखों की रौशनी के लिये आंखों में लालिम, कैटरेक्ट और आंखों से पानी आने की समस्या को दूर करने के लिये ½ चम्मच कलौंजी का तेल और गाजर का रस दिन में दो बार पियें। ब्लड प्रेशर को कम करने के लिये ½ चम्मच कलौंजी के तेल को गरम चाय में डाल कर दिन में दो बार पियें।
सर्दी-जुखाम के लिये ½ चम्मच कलौंजी तेल, 1 कप गरम पानी और उसमें 2 चम्मच शहद मिला कर दिन में दो बार पियें। यह मिश्रण साइनस के मरीजों को भी लाभ पहुंचाता है। चमकदार त्वचा के लिये 50 ग्राम जैतून के तेल में 50 ग्राम कलौंजी का तेल मिक्स करें। फिर नाश्ते करने से पहले आधे चम्मच का सेवन करें। ऐसा एक हफ्ते तक नियमित करने पर आपकी त्वचा चमक उठेगी।
फटी एडियों को ठीक करे 2 चम्मच नींबू के रस में ½ चम्मच कलौंजी का तेल मिक्स कर के दिन में दो बार फटी एडियों पर लगाएं। वजन घटाने के लिये ½ चम्मच कलौंजी के तेल में 2 चम्मच शहद मिला कर इसे हल्के गरम पानी के साथ पियें। इस मिश्रण को दिन में तीन बार लें। बुखार का चढ़ना व उतरना यदि बार-बार बुखार चढ़ता-उतरता है तो इस समस्या से निजात पाने के लिए कलौंजी को पीसकर चूर्ण बना लें और उसमें गुड मिलाकर लड्डू की तरह बनाकर सेवन करें। आपको इस समस्या से फायदा होगा।
गंजेपन से मुक्ति कलौंजी के पाउडर को सरसों के तेल के साथ मिलाकर सिर पर नियमित लगाने से गंजापन दूर होता है।
सूजन में राहत कलौंजी के तेल को नियमित लगाने से पैरों और हाथों की सूजन दूर होती है। साथ ही यह चर्म रोग को भी दूर करता है।
शरीर में ऊर्जा भरे थकान और कमजोरी दूर करने के लिये संतरे के 1 गिलास जूस में आधा चम्मच कलौंजी तेल मिक्स कर के रोज पियें। आपके शरीर में ताकत भर उठेगी। पथरी से राहत कलौंजी पथरी से निजात दिलावाने की अचूक औषधि है। पथरी को गलाने के लिए पानी में कलौंजी को पीस लें और इसे शहद के साथ मिलाकर सेवन करें। बाल झड़ने से रोके यदि बाल झड़ रहे हों तो कलौंजी को अच्छे से पीसकर उसका बारीक लेप बना लें और इस लेप को पूरे सिर पर अच्छे से लगायें। कुछ दिनों तक नियमित इस प्रयोग को करने से बाल गिरने कम हो जाएगें।
बवासीर में कलौंजी बवासीर की परेशानी होने पर कलौंजी को अच्छे से जलाकर राख बना लें। और उस राख को बवासीर के मस्सों पर लगा लें।
पेट दर्द के लिये ½ कलौंजी का तेल, थोडा सा काला नमक और आधा गिलास गरम पानी ले कर दिन में दो या तीन बार पियें।
अगर आपकी दिनचर्या अनियमित है और आप रोजाना व्यायाम नहीं करते हैं तब आपके लिए चैन की नींद लेना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। तो आइये आज हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसा तरीका जिसे आजमाने से आपके दिमाग़ की सभी नसे खुल जाएगी जिससे न केवल चैन की नींद आयेगी बल्कि आप पूरे दिन एनर्जेटिक भी बने रहेंगे।आइए जाने पहले इस औषधि को बनाने में उपयोग आने वाली आवश्यक सामग्री शहद और काला नमक अर्थात सेंधा नमक के गुणो के बारे में…
शहद में पोटैशियम होता है, जो रोग के कीटाणुओं का नाश करता है। कीटाणुओं से होने वाले रोग- जैसे आंतरिक बुखार (टायफायड) ब्रान्कोनिमानियां आदि अनेक रोगों के कीटाणु शहद से खत्म हो जाते हैं। यदि किसी मनुष्य की त्वचा पीली है, तो इसका कारण होता है खून में आयरन की कमी होना। शहद में लौह तत्त्व अधिक होता है। सुबह-शाम भोजनोपरान्त (भोजन के बाद) नींबू के रस में शहद मिलाकर अथवा दूध में शहद मिलाकर सेवन करना लाभकारी होता है।
आयुर्वेद के अनुसार काला नमक अपने आहार में शामिल करने से शरीर के कई रोग दूर होते हैं। रोज सुबह काला नमक और पानी मिला कर पीना शुरु करें यह कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, हाई बीपी, डिप्रेशन और पेट की तमाम बीमारियों से मुक्ती दिलाता है क्योंकि इसमें 80 प्रकार के खनिज शामिल हैं। जिससे आपकी ब्लड शुगर – ब्लड प्रेशर – ऊर्जा में सुधार – मोटापा और अन्य तरह की बीमारियां झट से ठीक हो जाएंगी !
5 चम्मच जैविक कच्चा शहद (बाजार का मिलावटी शहद प्रयोग न करें), 1 चम्मच सेंधा नमक,
इन दोनों तत्वों को अच्छे से मिलाकर एक कांच के जार में रख दीजिए। आप चाहें तो अधिक मात्रा में भी इन सामग्रियों को ले सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे इनका अनुपात 5:1 का ही होना चाहिए।
आपने जो मिश्रण बनाया है उसका एक चम्मच रात में सोने से पहले सेवन करें। इसे अपनी जीभ के नीचे रखें और इसे धीरे-धीरे अपने आप मुंह में घुलने दें। सेंधा नमक में 80 से अधिक मिनरल (मैग्नीशियम सहित) होते हैं, जिससे शरीर को आराम मिलता है और यह तनाव भी दूर करता है।
इन दोनों के मिश्रण का प्रयोग एक साथ करने से शरीर के लिए जरूरी लगभग सभी पौष्टिक तत्व मिल जाते हैं। इनके कारण ही लीवर के साथ शरीर के दूसरे अंग सही तरीके से कार्य करते हैं। इनके अलावा अच्छी और सुकून भरी नींद के लिए जरूरी है कि आप तनाव से दूर रहें, स्वस्थ दिनचर्या का पालन करें और नियमित रूप से व्यायाम करें।
बिस्तर में पेशाब करना : कुछ बच्चे रात में सोते समय बिस्तर में ही मूत्र (पेशाब) कर देते हैं। यह एक बीमारी होती है। सोने से पहले रात में शहद का सेवन कराते रहने से बच्चों का निद्रावस्था में मूत्र (पेशाब) निकल जाने का रोग दूर हो जाता है। एक चम्मच शुद्ध शहद शीतल पानी में मिलाकर पीने से पेट के दर्द को आराम मिलता है। एक गिलास पानी में एक चम्मच नींबू का रस तथा आधा चम्मच शहद मिलाकर लेना चाहिए। इससे अजीर्ण का रोग नष्ट हो जाता है। शहद में सौंफ, धनिया तथा जीरा का चूर्ण बनाकर मिला लें और दिन में कई बार चाटें। इससे दस्त में लाभ मिलता है। अनार दाना चूर्ण शहद के साथ चाटने से दस्त बंद हो जाते हैं। अजवायन का चूर्ण एक चुटकी को एक चम्मच शहद के साथ लेना चाहिए। दिन में तीन बार यह चूर्ण लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। एक दो कालीमिर्च तथा दो लौंग को पीसकर शहद के साथ चाटना चाहिए। धनिया तथा जीरा लेकर चूर्ण बना लें और शहद मिलाकर धीरे-धीरे चाटना चाहिए। इससे अम्लपित्त नष्ट होता है। सौंफ, धनियां तथा अजवायन इन तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। फिर इस चूर्ण में से आधा चम्मच चूर्ण को शहद के साथ सुबह, दोपहर और शाम को इसका सेवन करना चाहिए। इससे कब्ज दूर होती है। रात्रि को सोते समय एक चम्मच त्रिफला-चूर्ण या एरण्ड का तेल एक गिलास दूध के साथ लेना चाहिए। इससे कब्ज दूर हो जाती है। त्रिफला का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। इससे पीलिया का रोग नष्ट हो जाता है। गिलोय का रस 12 ग्राम शहद के साथ दिन में दो बार लें। नीम के पत्तों का रस आधा चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। सिर पर शुद्ध शहद का लेप करना चाहिए। कुछ ही समय में सिर का दर्द खत्म हो जायेगा। आधा चम्मच शहद और एक चम्मच देशी घी मिलाकर सिर पर लगाना चाहिए। घी तथा शहद के सूखने के बाद दोबारा लेप करना चाहिए। शहद के साथ निबौंली (नीम का फल) का गूदा मिलाकर आंखों में काजल की तरह लगना चाहिए।
छोटी इलायची को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। फिर शहद में मिलाकर छालों पर लगायें। मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ चाटना चाहिए। मसूढ़ों तथा दांतों पर शुद्ध शहद की मालिश करके गुनगुने पानी से कुल्ला करना चाहिए। एक कप दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह के समय पीने से ताकत बढ़ती है। शहद और अदरक का रस एक-एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम दिन में दो बार पीने से जुकाम खत्म हो जाता है और भूख बढ़ जाती है। गुड़ को शहद में मिलाकर सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है। दो चम्मच शहद और नींबू का रस एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम दिन में दो से तीन बार सेवन करने से हाई बल्डप्रेशर में लाभ होता है। बच्चों के दांत निकलते समय मसूढ़ों पर शहद मलने से दांत निकलते समय दर्द में आराम रहता है। 9 भाग छोटी मक्खी का शहद, 1 भाग अदरक का रस, 1 भाग नींबू का रस और 1 भाग सफेद प्याज का रस इन सबको मिलाकर और छानकर एक बूंद सुबह और शाम आंखों में डालते रहें इससे मोतियाबिंद दूर हो जाता है। इसमे 12 भाग गुलाब जल डालकर रोजाना इसी प्रकार डालने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और चश्मा हट जाता है। स्वस्थ आंखों में असली शहद की एक सलाई हफ्ते मे 1 से 2 बार डालने से आंखों की रोशनी कभी कम नही होगी, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ तेज होती चली जायेगी। साथ ही खाने के लिए चार बादाम रात को पानी में भिगो कर रख लें और सुबह उठते ही चार काली मिर्च के साथ पीसकर मिश्री के साथ चाटे या वैसे ही चबा जाऐं और ऊपर से दूध पी लें। निमोनिया रोग में रोगी के शरीर की पाचन-क्रिया प्रभावित होती है इसलिए सीने तथा पसलियों पर शुद्ध शहद की मालिश करें और थोड़ा सा शहद गुनगुने पानी में डालकर रोगी को पिलाने से इस रोग में लाभ होता है। लगभग 20 से 25 दिन तक रोजाना लगभग 150 ग्राम शहद शुद्ध पानी में मिलाकर रोगी को देने से शरीर का लकवा ठीक हो जाता है। लगभग 28 मिलीलीटर पानी को उबालें और इस पानी के ठंडा होने पर उसमें दो चम्मच शहद डालकर पीड़ित व्यक्ति को पिलाने से कैल्शियम की मात्रा शरीर में उचित रूप में आ जाती है जोकि लकवे से पीड़ित भाग को ठीक करने में मददगार होती है। शहद और सेंधानमक को मिलाकर बत्ती बनायें। बत्ती को नासूर में रखने से भगन्दर रोग में आराम मिलता है। 120 ग्राम से लेकर 240 ग्राम शहद को 100 से 200 मिलीलीटर गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में 3 बार खुराक के रूप में सेवन करें। शहद का रोज दूध में मिलाकर सेवन करने से मोटापा बढ़ता हैं। शहद के साथ लगभग 1-2 ग्राम पोस्ता पीसकर इसको शहद में घोलकर रोजाना सोने से पहले रोगी को देने से अच्छी नींद आती है। इससे रोगी को आराम से नींद आ जाती है। एक-एक चम्मच नींबू का रस और शहद को मिलाकर रात को सोने से पहले दो चम्मच पीने से नींद आ जाती है। जब नींद खुले तब दो चम्मच पुन: लेने पर नींद आ जाती है और यदि केवल पानी के गिलास में शहद की दो चम्मच डालकर पीने से नींद आ जाती है। दो चम्मच शहद को 250 मिलीलीटर पानी में डालकर दिन में दो बार सुबह और शाम पीने से लाभ होता है। थोड़ी मात्रा में सेवन करने से भी पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं। इस रोग में सूर्य उगने के साथ दर्द का बढ़ना और ढलने के साथ सिर दर्द का कम होना होता है, तो जिस ओर सिर में दर्द हो रहा हो उसके दूसरी ओर के नाक के नथुने में एक बूंद शहद डालने से सिर के दर्द में आराम मिलता है। रोजाना भोजन के समय दो चम्मच शहद लेते रहने से आधे सिर में दर्द व उससे होने वाली उल्टी आदि बंद हो जाती हैं। शहद के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग 1 ग्राम सुहागे की खील (लावा) को चटाने से आक्षेप और मिर्गी में बहुत आराम आता है। शहद के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग जटामांसी का चूर्ण सुबह और शाम रोगी को देने से आक्षेप के दौरे ठीक हो जाते हैं। शहद का प्रयोग करने से खाना खाने के बाद होने वाले पेट दर्द समाप्त होते है। शहद और पानी मिलाकर पीने से पेट के दर्द में राहत मिलती है। शहद हृदय को शक्ति देने के लिए विश्व की समस्त औषधियों से सर्वोत्तम हैं इससे हृदय इतना शक्तिशाली हो जाता है जैसे घोड़ा हरे जौ खाकर शक्ति प्राप्त करता है। शहद के प्रयोग से हृदय के पुट्टों की सूजन दूर हो जाती है। जहां यह रोग-ग्रस्त हृदय को शक्ति देता है वहां स्वस्थ हृदय को पुष्ट और शक्तिशाली बनाता है, हृदय फेल होने से बचाता है। जब रक्त में ग्लाइकोजन के अभाव से रोगी को बेहोश होने का डर हो तो शहद खिलाकर रोगी को बेहोश होने से बचाया जा सकता हैं शहद मिनटों में रोगी में शक्ति व उत्तेजना पैदा करता हैं। सर्दी या कमजोरी के कारण जब हृदय की धड़कन अधिक हो जाये, दम घुटने लगे तो दो चम्मच शहद सेवन करने से नवीन शक्ति मिलती है। हृदय की दुर्बलता, दिल बैठना आदि कोई कष्ट हो तो शहद की एक चम्मच पानी में डालकर पिलायें। एक चम्मच शहद प्रतिदिन लेने से हृदय सबल व मजबूत बनता है। शुरू में दो दिन तक एक चम्मच मधु की खुराक दो बार दें फिर चार दिन आधे चम्मच के साथ मधु और आंवले का चूर्ण मिलाकर तीन बार दें। अगले चार दिन आधा चम्मच मधु और लौह चूर्ण मिलाकर तीन बार दें। शरीर को शक्तिशाली बनाना : शहद 10 ग्राम, 5 ग्राम घी और 3 ग्राम आंवलासार गन्धक को लेकर इसमें थोड़ी सी शक्कर मिलाकर सेवन करने से शरीर को मजबूती मिलती है।
पाचन दुरस्त करे और कब्ज मिटाए : नमक वाला पानी मुंह में लार वाली ग्रंथी को सक्रिय करने में मदद करता है। पेट के अंदर प्राकृतिक नमक, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और प्रोटीन को पचाने वाले इंजाइम को उत्तेजित करने में मदद करता है। इससे खाया गया भोजन टूट कर आराम से पच जाता है। जिससे कब्ज की समस्या से निजात मिलती है और सुबह-सुबह पेट खुल कर साफ होता हैं। यह पाचन को दुरस्त कर के शरीर की कोशिकाओं तक पोषण पहुंचाता है, जिससे मोटापा कंट्रोल करने में मदद मिलती है। समुंद्री नमक छोड़ कर आपको इस नमक को अपने आहार में शामिल करना चाहिये। जोड़ों के दर्द में आराम दिलाए : मासपेशियों के दर्द और जोड़ों के दर्द से यह नमक आराम दिलाता है। आपको एक कपड़े में 1 कप काला नमक डाल कर उसे बांध कर पोटली बनानी है। इसके बाद उसे किसी पैन में गरम करें और उससे जोड़ों की सिकाई करें। इसे दुबारा गरम कर के फिर से दिन में दो बार सिकाई करें। अगर गैस से छुटकारा पाना है तो एक कॉपर का बरतन गैस पर चढाएं, फिर उसमें काला नमक डाल कर हल्का चलाएं और जब उसका रंग बदल जाए तब गैस बंद कर दें। फिर इसका आधा चम्मच ले कर एक गिलास पानी में मिक्स कर के पियें। क्षारीय प्रकृति होने के नाते यह पेट में जा कर वहां बनने वाले एसिड को काटता है और सीने की जलन तथा एसिडिटी को ठीक करता है। काला नमक खाने से रक्त पतला होता है जिससे वह पूरे शरीर में आराम से पहुंचता है। ऐसे में आपका हाई कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर ठीक होता है। हाइ बीपी है तो साधारण नमक की जगह पर खाएं काला नमक।काला नमक में पोटैशिमय होता है जो कि हमारी मासपेशियों को ठीक से काम करने में मदद करता है। इसलिये काले नमक को रोजाना खाने में शामिल करें जिससे मसल स्पैजम और क्रैंप ना हो। रिसर्च मे पाया गया है कि काला नमक ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करता है। काला नमक छोटे बच्चों के लिए सबसे अच्छा है। यह अपच और कफ की जमावट को सीने से हटाता है। अपने शिशु के भोजन में थोड़ा सा काला नमक रोजाना मिलाएं क्योंकि इससे उनका पेट भी ठीक रहेगा और कफ आदि से भी छुटकारा मिलेगा। अपरिष्कृत नमक में मौजूदा खनिज हमारी तंत्रिका तंत्र को शांत करता है। नमक, कोर्टिसोल और एड्रनलाईन, जैसे दो खतरनाक सट्रेस हार्मोन को कम करता है। इसलिये इससे रात को अच्छी नींद लाने में मदद मिलती है। अगर आपको रूसी और बाल झड़ने की समस्या है तो काला नमक और टमाटर का जूस हफ्ते में एक दिन सिर में लगाएं। यह रूसी को दूर करेगा और बालों की ग्रोथ को भी बढ़ाएगा। नमक में काफी खनिज होने की वजह से यह एंटीबैक्टीरियल का काम भी करता है। इसकी वजह से शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया का नाश होता है। नमक में मौजूद क्रोमियम एक्ने से लड़ता है और सल्फर से त्वचा साफ और कोमल बनती है। इसके अलावा नमक वाला पानी पीने से एग्जिमा और रैश की समस्या दूर होती है। सौंदर्य के लिये बड़ा ही फायदेमंद है सेंधा नमक।
😟 क्या आपके शरीर पर छोटी-छोटी गांठें बन गई हैं? 😔 क्या माता-बहनों को स्तनों में गांठें महसूस हो रही हैं और मन में डर बैठ गया है कि कहीं यह कैंसर तो नहीं? रुकिए! किसी भी ऑपरेशन से पहले — ये आयुर्वेदिक उपाय सिर्फ़ 11 दिन आज़माकर देखिए। आयुर्वेद में वर्णित एक अद्भुत वनस्पति — पाथरी (गोलामिका) — आपके शरीर की चरबी वाली गांठों (लाइपोमा) को पूरी तरह घोल सकती है!
💭 चरबी की गांठें क्या होती हैं?
शरीर पर चरबी जमने से बनी मुलायम गांठों को लाइपोमा (Lipoma) कहा जाता है। ये आमतौर पर गर्दन, कंधे, पेट, जांघ या पीठ पर दिखाई देती हैं। हाथ से दबाने पर ये हल्की-हल्की हिलती हैं और रंग त्वचा जैसा ही होता है। शुरुआत में ये नुकसान नहीं करतीं, लेकिन समय पर ध्यान न दिया तो कैंसर जैसी जटिलता का कारण बन सकती हैं।
⚠️ ये गांठें क्यों बनती हैं?
हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Changes)
आनुवंशिक कारण (Genetic Factors)
मिलावटी या रासायनिक भोजन का सेवन
कुछ दुर्लभ सिंड्रोम्स — जैसे Down syndrome, Gardner syndrome
🩺 लाइपोमा की पहचान कैसे करें?
स्पर्श करने पर गांठ मुलायम और हिलने वाली होती है।
त्वचा का रंग सामान्य रहता है।
वृद्धि धीरे-धीरे होती है।
दर्द नहीं होता। 👉 लेकिन कैंसर वाली गांठ लालसर और दर्दयुक्त होती है।
🌿 आयुर्वेदिक उपाय – पाथरी (गोलामिका) का जादुई प्रयोग
आयुर्वेद में गोलामिका नाम से वर्णित यह वनस्पति अनावश्यक चरबी और गांठों को पिघलाने में सक्षम है। यह आसानी से सड़कों के किनारे या बगीचों,या खेत में मिल जाती है।
🧴 1. पाथरी का तेल बनाने की विधि
सामग्री:
पाथरी की 20–25 पत्तियाँ
अरंडी का तेल (Castor oil) – 200 मि.ली.
विधि:
पत्तियाँ अच्छी तरह धोकर पेस्ट बना लें।
इस पेस्ट को तेल में डालकर धीमी आंच पर उबालें।
जब पत्तियाँ गल जाएँ और तेल साफ़ हो जाए, तो छान लें।
यह तेल रोज़ गांठों पर लगाएँ और हल्के हाथ से मालिश करें।
🕖 सबसे अच्छा समय: रात को सोने से पहले।
🍃 2. पाथरी के रस या पत्तों का सेवन
सुबह खाली पेट 2–3 पत्तियाँ चबाकर खाएँ, या
उनका रस निकालकर 1 चम्मच पीएँ, या
सब्ज़ी में मिलाकर उपयोग करें।
👉 सिर्फ़ 11 दिन नियमित उपयोग से शरीर या स्तन की गांठें धीरे-धीरे पिघल जाती हैं — किसी सर्जरी की ज़रूरत नहीं।
🪷 आयुर्वेद की राय
आयुर्वेद के अनुसार गोलामिका (पाथरी) “मेध-विकार” यानी चरबी संबंधी रोगों पर कार्य करती है। यह शरीर में जमा अवरोधों को दूर करके रक्तशुद्धि और चरबी पिघलाने का काम करती है।
🌼 एक महत्वपूर्ण सलाह
आज की भागदौड़ वाली ज़िंदगी में हार्मोनल असंतुलन और अस्वस्थ खानपान के कारण ऐसी गांठें आम हो गई हैं। प्रकृति की यह साधारण सी वनस्पति आपके स्वास्थ्य के लिए वरदान है — बस नियमितता ज़रूरी है।
आयुर्वेद में ऐसी कई जड़ी-बूटियां हैं जिनका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के रोगों के इलाज में किया जाता है। हम आपको एक ऐसी ही जड़ी बूटी के बारे में बता रहे हैं, जिसके बारे में आज तक आपको शायद किसी ने नहीं बताया होगा।यह कोई मामूली पौधा नहीं, बल्कि एक ऐसा पौधा है जिसके बारे में यदि आपको पूरा ज्ञान हो गया, तो आप कई प्रकार की बीमारियों को भी पूरी तरह से समाप्त कर सकते है। इस पौधे का नाम है अतिबाला (Abutilon indicum)। यह सुनहरे-पीले फूलों वाला एक औषधीय पौधा है।
इसका उपयोग आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा पद्धति में कई दवाओं की तैयारी के लिए किया जाता है। इस पौधे में एंटी डायबिटिक, एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं और यह लैक्साटिव ब्लड टॉनिक के रूप में भी काम करता है। परंपरागत रूप से इस पौधे के सभी हिस्सों का उपयोग औषधीय रूप से कुष्ठ, मूत्र रोग, पीलिया, बवासीर, प्यास से राहत देने, घावों को साफ करने, अल्सर, योनि में संक्रमण, दस्त, गठिया, कण्ठमाला, टीबी, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी, पेचिश, दुर्बलता, तंत्रिका विकार, सिरदर्द, मांसपेशियों की कमजोरी, हृदय रोगों, रक्तस्राव विकारों, लकवाग्रस्त विकारों और कान की समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है।
1) मसूढ़ों की सूजन हेल्थबेनेफिट्सटाइम्स डॉट कॉम के अनुसार, अतिबला के पत्तों का काढ़ा बनाकर यदि आप प्रतिदिन दिन में 3 से 4 बार कुल्ला करें तो रोजाना के इस प्रयोग करने से मसूढ़ों की सूजन व मसूढ़ों का ढीलापन दूर हो सकता है।
2) पेशाब का बार-बार आना हेल्थबेनेफिट्सटाइम्स डॉट कॉम के अनुसार, अतिबला की जड़ की छाल का पाउडर यदि चीनी के साथ लें तो बार-बार पेशाब आने की बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।
3) गीली खांसी अतिबला के साथ कंटकारी, बृहती, वासा के पत्ते और अंगूर को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लेते हैं। इसे 14 से 28 मिलीमीटर की मात्रा में 5 ग्राम शर्करा के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेने से गीली खांसी बिल्कुल पूरी तरह से ठीक हो सकती है।
4) बवासीर अतिबला के पत्तों को पानी में उबालकर उस्का अच्छी तरह से काढ़ा बना लें। इस काढ़े में उचित मात्रा में ताड़ का गुड़ मिलाकर पीयें। इससे बवासीर में बेहतरीन लाभ हो सकता है।
5) दस्त और पेशाब के साथ खून आना अतिबला के पत्तों को देशी घी में मिलाकर दिन में 2 बार पीने से दस्त में काफी लाभ हो सकता है। इसकी जड़ का 40 मिलीलीटर की मात्रा में काढ़ा सुबह-शाम पीने से पेशाब में खून का आना पूरी तरह से बंद हो सकता है।
6) पेट में दर्द होने पर अतिबला के साथ पृश्नपर्णी, कटेरी, लाख और सोंठ को मिलाकर दूध के साथ पीने से पित्तोदर यानी पित्त के कारण होने वाले पेट के दर्द में बहुत ही लाभ मिल सकता है।
7) मूत्ररोग अतिबला के पत्तों या जड़ का काढ़ा लेने से मूत्रकृच्छ (सुजाक) रोग पूरी तरह से दूर होता है। ये काढ़ा सुबह-शाम 40 मिलीलीटर लें। यदि इसके बीज 4 से 8 ग्राम रोज लें तो काफी लाभ हो सकता है।
8) शरीर को शक्तिशाली बनाना अगर अप हमेशा थकान और कमजोरी महसूस करते हैं, तो आपको इस पौधे का इस्तेमाल करना चाहिए। शरीर में कमजोरी होने पर अतिबला के बीजों को पकाकर खाने से शरीर की ताकत काफी बढ़ जाती है।
इनके अलावा इसका इस्तेमाल बुखार, छाती का संक्रमण, सूजाक, रक्तमेह, मूत्रकृच्छ, कुष्ठ रोग, सूखी खाँसी, ब्रोंकाइटिस, गाउट, बहुमूत्रता, गर्भाशय, मूत्र त्यागना, मूत्रमार्गशोथ, रेचक, गठिया, सिफलिस, मूत्राशय की सूजन, कैटरियल बाइलियस डायरिया आदि के लिए भी किया जाता है। लेकिन ध्यान रहे कि इसका इस्तेमाल करने से पहले एक्सपर्ट या डॉक्टर से सलाह लें।
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में घरेलू नुस्खों और सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
बढती उम्र अपने साथ कई तरह की शारीरिक बिमारियां और दर्द साथ लेकर आती है इनमें जो सबसे भयानक और आम दर्द होता है वो है कमर दर्द. वैसे कमर दर्द से कोई भी प्रभावित हो सकता है. हमारे दिनचर्या में आधुनिकरण इतना हावी हो गया कि युवा वर्ग भी इससे अछूता नहीं है.
लेकिन प्राय: बढ़ती उम्र और औरतों के साथ यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. यह ऐसी समस्या है जो लम्बे समय तक बनी रहती है और इससे पूरी तरह से छुटकारा पाना मुश्किल होता है. लेकिन अब आपको चिन्ता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आज हम आपको इसका सटीक हल बताने जा रहे हैं जिसका इस्तेमाल करके आप कमर दर्द पर नियंत्रण ही नहीं बल्कि हमेशा हमेशा के लिए छुटकारा पा सकती हैं।
कमर दर्द होने का 5 प्रमुख कारण
शरीर में वजन का बढ़ना : अगर आपके शरीर का वजन बढ़ गया है तो आपको कमर दर्द की समस्या हो जाती है क्योंकि जब आपके शरीर का वजन बढ़ता है तो इसका आधे से ज्यादा भार आपकी कमर पर होता है।
भारी वजन उठाना : भारी वजन उठाने पर भी ये समस्या पैदा हो सकती है. इसलिए आपके पास जितना वजन उठाने की क्षमता है उतना ही उठाएं।
गलत तरीके से सोना : जब कभी आप सोते वक्त ऐसी पोजीशन में आ जाती हैं जो आपके शरीर के उल्टी दिशा में होता है. सोने का यह गलत तरिका आपको कमर दर्द की समस्या से पीड़ित कर सकती है।
गलत तरीके से उठना, झुकना और बैठना : आप रोजमर्जा के जीवन में आप कैसे काम करती हैं, आप कैसे उठती हैं, बैठती हैं या झुकती हैं. आपको बता दें कि इन तीनों क्रियाओं को करने पर लापरवाही आपके लिए कमर दर्द का कारण बनती है।
मांसपेशियों में खिचाव : कभी कभी आप कोई ऐसा काम करती हैं जिसे सामान्य तौर पर आप हमेशा नहीं करती हैं. कईबार तो ऐसा होता है कि पस किसी काम को बहुत ही जल्दबाजी में करते हैं और ऐसा करते समय कभी कभी हमारी मासपेशियां खिंच जाती है. मासपेशियों में होने वाला यही खिंचाव हमारे कमर दर्द का कारण बनता है।
कमर दर्द के 5 घरेलू उपाय
सरसों का तेल और लहसुन : अगर आपको कमर के दर्द की हमेशा शिकायत रहती है तो सरसों का तेल एवं लहसुन आपको इससे छुटकारा दिलाने का बेजोड़ इलाज है। इसके लिए तीन से पांच चम्मच सरसों का तेल और पांच लहसुन की कलियां को एक साथ गर्म करें। इसको तब तक गर्म करते रहें जब तक कलियां काली न हो जाए। अब आप इसे ठंडा होने दें। ठंडा होने पर इसे दर्द वाली जगह पर मालिश करें। इस रोजाना सोते वक्त इस्तेमाल करें। ऐसा करने से कुछ ही हफ्तों में आपका कमर दर्द जड़ से खत्म हो जाएगा।
गर्म पानी से सिकाई : अगर आपके कमर में तेज दर्द होता है तो आपको इसकी सिकाई गर्म पानी से करनी चाहिए. ऐसा करने से आपको इस समस्या से आराम मिल जाएगा।
अजवायन : अजवायन आपके लिए बहुत असरदार दवा है। अगर आपकी कमर का दर्द खत्म नहीं हो रहा है तो आपको अजवायन का सेवन करना चाहिए। आप आधी चम्मच अजवाइन को पहले तवे पर हल्का गर्म करले बाद में ठंडा होने पर इसका सेवन करें। इसको धीरे-धीरे चबा चबा कर खा जाए और ऊपर से हल्का गुनगुना 1 गिलास पानी पी जाएँ। यह प्रयोग लगातार सात दिन तक करने से सौ-प्रतिशत कमर दर्द में फ़ायदा पहुँचाता है।
गर्म नमक का सेंक : गर्म नमक का सेंक भी कमर दर्द के लिए बेहद ही फायदेमंद होता है. इसके लिए नमक को गर्म करें और इसे किसी कपड़े या तौलिए में लपेटकर अपने कमर पर सिकाई करें. ऐसा करने से आपको दर्द में राहत मिल जाएगी.
गर्म और ठंडा : अगर आपके कमर दर्द की समस्या खत्म नहीं हो रही है तो आपको इसके लिए गर्म और ठंडे का मिश्रण इस्तेमाल करना चाहिए। इसके लिए आप पहले दर्द वाली जगह पर गर्म पानी से सिकाई करें और बाद में इस जगह पर बर्फ लगाएं।