जब आप कोई नई कार या बाइक खरीदते हैं, तो शोरूम वाले आमतौर पर एक्स-शोरूम कीमत में बीमा (इंश्योरेंस), आरटीओ शुल्क और एक्सेसरीज़ की कीमत जोड़कर आपको ऑन-रोड कीमत बताते हैं। अक्सर शोरूम ग्राहक को बीमा बाहर से खरीदने का विकल्प नहीं देते हैं, जिससे ग्राहकों को मजबूरन उन्हीं से इंश्योरेंस खरीदना पड़ता है। ऐसे में यह जानना ज़रूरी है कि क्या वाहन बीमा शोरूम से लेना अनिवार्य है, या ग्राहक इसे बाहर से (ऑनलाइन या किसी अन्य एजेंट से) भी खरीद सकता है?
शोरूम इंश्योरेंस से बचें
वाहन खरीदते समय, आमतौर पर शोरूम में मिलने वाला बीमा बाहर या ऑनलाइन मिलने वाले बीमा से काफी महंगा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शोरूम इंश्योरेंस की कीमत में अपना कमीशन जोड़ देते हैं, जिसका सीधा भार ग्राहक पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, जहाँ एक 150cc बाइक का बीमा शोरूम में ₹17,000 से ₹18,000 तक बताया जाता है, वहीं ऑनलाइन खरीदने पर आप ₹4,000 से ₹5,000 तक की सीधी बचत कर सकते हैं।
कहीं से भी खरीद सकते है इंश्योरेंस
यह जानना ज़रूरी है कि ऐसा कोई नियम नहीं है जो ग्राहकों को शोरूम से ही वाहन का इंश्योरेंस खरीदने के लिए मजबूर करे। यदि आपको शोरूम पर मिलने वाला इंश्योरेंस महंगा लगता है, तो आप अपनी नई कार या बाइक के लिए बाहर से या ऑनलाइन बीमा कंपनियों से भी पॉलिसी खरीद सकते हैं। अक्सर ये कंपनियाँ काफी किफायती दरों पर इंश्योरेंस प्रदान करती हैं।
नई बाइक का इंश्योरेंस खरीदने का आसान तरीका
जब आप नई बाइक खरीद रहे हों, तो सबसे पहले उसका चेसिस नंबर नोट कर लें। इस नंबर की मदद से आप शोरूम में बैठे-बैठे ही ऑनलाइन इंश्योरेंस खरीद सकते हैं। एक बार जब आपको इंश्योरेंस नंबर मिल जाए, तो आप उसे शोरूम में दिखाकर बाइक खरीदने की आगे की प्रक्रिया आसानी से पूरी कर सकते हैं।
बीमा खरीदते समय ध्यान रखने योग्य बातें
जब भी आप ऑनलाइन या किसी एजेंट से बीमा खरीदें, तो सुनिश्चित करें कि कंपनी वास्तविक हो और बाज़ार में उसकी रेटिंग अच्छी हो। किसी एक कंपनी पर निर्भर न रहें; खरीदने से पहले अन्य कंपनियों के भी रेट और प्लान ज़रूर चेक करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने से पहले नियम और शर्तें ध्यान से पढ़ें और यदि कोई बात समझ न आए तो तुरंत कस्टमर केयर से मदद लें।
New Traffic Rules 2025: बच्चों को लेकर कार चला रहे हैं? ये गलती की तो लगेगा डबल जुर्माना!
नई दिल्ली सड़क परिवहन मंत्रालय ने बच्चों के साथ गाडी चलाने वालों के लिए एक सख्त प्रस्ताव जारी किया है। जिसमें ट्रैफिक नियमों का पालन ना करने पर सीधा जुर्माना लगाया जाएगा। इस नए प्रस्ताव के माध्यम से सरकार ‘मेरिट और डिमेरिट पॉइंट सिस्टम को लागू करने की योजना बनाना चाहती है। इस स्कीम को शुरू का मुख्य उद्देश्य यह कन्फर्म करना है, कि सड़क पर चलने वाले सभी वाहन ट्रैफिक नियमों का पालन कर भी रहे है, या नहीं इसके अलावा इस तरह के सिस्टम से पूरी सड़क सुरक्षा और भी बढ़ जाएगी।
बच्चों के साथ यात्रा करने वाले ड्राइवरों पर कड़ी नजर
यह कदम उन ड्राइवरों के लिए है, जो बच्चों को लेकर सड़क पर गाड़ी चला रहे होते हैं। अक्सर देखा जाता है, कि ऐसे ड्राइवर ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। मंत्रालय का यह कदम सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है। इस नियम के तहत, यदि ड्राइवर ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं, तो उन्हें अन्य वाहन चालकों की तुलना में दोगुना जुर्माना भरना पड़ेगा।
मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव
सड़क परिवहन मंत्रालय का यह कदम मोटर वाहन अधिनियम में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। मंत्रालय का लक्ष्य है, कि सड़कों को सुरक्षित बनाया जाए, और खासकर बच्चों के साथ यात्रा करने वाले ड्राइवरों पर नजर रखी जाए। यह नया नियम स्कूल बसों और अन्य वाहनों पर भी लागू होगा, जो अक्सर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हैं। इसके अलावा, सरकार ‘मेरिट और डिमेरिट पॉइंट सिस्टम’ को लागू करेगी, जिससे ट्रैफिक नियमों का पालन करने वाले ड्राइवरों को पुरस्कार मिलेगा और नियम तोड़ने वालों को सजा दी जाएगी।
कुछ विशेषज्ञों की चिंता
इस नए प्रस्ताव को लेकर सड़क सुरक्षा के विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में ट्रैफिक पुलिस सिर्फ कुछ खास अपराधों पर ही चालान काटती है, जैसे कि तेज गति से गाड़ी चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, लाल बत्ती पर गाड़ी चलाना, फोन का उपयोग करना या सीट बेल्ट और हेलमेट न पहनना। वहीं, मोटर व्हीकल एक्ट में 100 से ज्यादा अपराध हैं जिन पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन ज्यादातर मामलों में कार्रवाई नहीं की जाती।
नियमों के प्रभाव पर सवाल
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ‘नए प्रस्ताव के तहत कैमरे कैसे यह पहचानेंगे कि कार की पिछली सीट पर कोई नाबालिग बैठा है या नहीं?’ और क्या पुलिस को गाड़ियों को रोककर अंदर बैठे लोगों की उम्र चेक करनी होगी? इस मुद्दे पर सवाल उठाए गए हैं कि क्या नए नियम को लागू करने में चुनौतियाँ आएंगी। कुछ का मानना है कि इस तरह के नियम केवल बड़े शहरों में लागू करना आसान होगा, लेकिन छोटे शहरों और गाँवों में यह लागू करना एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
‘मेरिट और डिमेरिट’ पॉइंट सिस्टम का असर
इस नए प्रस्ताव के तहत सरकार ‘मेरिट और डिमेरिट पॉइंट सिस्टम’ को लागू करेगी, जिसके तहत ड्राइवरों को पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों तरह के पॉइंट्स मिलेंगे। अगर किसी ड्राइवर के पास नेगेटिव पॉइंट्स की संख्या निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है, तो उनका ड्राइविंग लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है। इसका मतलब है कि अगर आप बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं, तो आपके पास ड्राइविंग लाइसेंस रखने का अधिकार नहीं रहेगा। यह एक सख्त सजा हो सकती है।
इंश्योरेंस प्रीमियम से जुड़ा ड्राइवरों का व्यवहार
इसके अलावा, मंत्रालय ने ड्राइवरों के व्यवहार को इंश्योरेंस प्रीमियम से जोड़ने का प्रस्ताव भी रखा है। इसका मतलब यह है कि जो ड्राइवर सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाएंगे, उन्हें इंश्योरेंस प्रीमियम में छूट मिल सकती है। यह उन ड्राइवरों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन हो सकता है जो नियमों का पालन करते हैं और सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार हैं।
लाइसेंस रिन्यूअल और ड्राइविंग टेस्ट
इसके अलावा, सरकार ने यह भी प्रस्ताव किया है कि यदि किसी ड्राइवर ने ट्रैफिक नियम तोड़े हैं, तो उसे लाइसेंस रिन्यू कराने से पहले एक ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। यह नियम उन ड्राइवरों पर लागू होगा जिनके लाइसेंस की अवधि समाप्त हो रही है। इसका मतलब है कि यदि आपने पहले नियमों का उल्लंघन किया है, तो आपको दोबारा यह साबित करना होगा कि आप एक सुरक्षित और जिम्मेदार ड्राइवर हैं।
सड़क सुरक्षा पर सरकार का फोकस
इन सभी प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और सड़क पर दुर्घटनाओं को कम करना है। सरकार चाहती है कि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखें। सड़क सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं ताकि सड़कें और सुरक्षित बन सकें।
नियमों को लागू करने में चुनौतियाँ
अंत में, इन नए नियमों से सड़क पर सुरक्षा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, इन्हें लागू करने में कई चुनौतियाँ हो सकती हैं, और इन नियमों के सफल कार्यान्वयन के लिए सरकार को हर स्तर पर कार्रवाई करनी होगी। सड़क सुरक्षा के प्रति यह कदम एक सकारात्मक दिशा में बढ़ता हुआ प्रयास है, जो आने वाले समय में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद करेगा।
जब कार चोरी होती है और उसमें चाबी लगी हो, तो ऐसी स्थिति काफी मुश्किल हो जाती है। कई वाहन मालिकों के मन में यही सवाल आता है कि क्या ऐसी स्थिति में उन्हें इंश्योरेंस क्लेम (Insurance Claim) मिलेगा या नहीं। कार बीमा के नियम और शर्तें काफी सख्त हो सकती हैं, और इस तरह के मामलों में इंश्योरेंस कंपनियों का निर्णय कई कारकों पर निर्भर करता है।
चाबी लगी कार चोरी हो जाए तो इंश्योरेंस क्लेम की क्या स्थिति होती है?
यदि आपकी कार चोरी हो जाती है और उसमें चाबी लगी रह गई थी, तो बीमा क्लेम मिलना पूरी तरह से आपकी बीमा पॉलिसी (Insurance Policy) की शर्तों, आपकी सावधानी और बीमा कंपनी के विवेक पर निर्भर करता है। बीमा कंपनियां आम तौर पर यह मानती हैं कि वाहन की सुरक्षा की जिम्मेदारी वाहन मालिक की होती है। अगर चाबी लगी छोड़ना आपकी लापरवाही (Negligence) मानी जाती है, तो क्लेम अस्वीकार किया जा सकता है।
कंप्रिहेंसिव बीमा पॉलिसी की अनिवार्यता
कार चोरी के मामलों में केवल Comprehensive Insurance ही मददगार होता है। यदि आपके पास सिर्फ थर्ड पार्टी बीमा (Third Party Insurance) है, तो आपको कार चोरी पर कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। कंप्रिहेंसिव पॉलिसी में चोरी, दुर्घटना, आग, प्राकृतिक आपदाएं और अन्य नुकसान शामिल होते हैं। यह पॉलिसी इस तरह की अप्रत्याशित घटनाओं में सहारा देती है, लेकिन इसका लाभ उठाने के लिए आपको सभी शर्तें पूरी करनी होती हैं।
बीमा कंपनियों के लिए चाबी लगी छोड़ना क्यों बड़ी बात है?
बीमा कंपनियां “चाबी गाड़ी में छोड़ने” को गंभीर लापरवाही मानती हैं। कोर्ट के कई निर्णयों में यह बात स्पष्ट की गई है कि यदि वाहन मालिक ने गाड़ी को लॉक नहीं किया या चाबी बाहर नहीं निकाली, तो यह सुरक्षा में कमी दर्शाता है। उदाहरण के तौर पर, उत्तराखंड के एक मामले में कोर्ट ने बीमा क्लेम यह कहकर खारिज कर दिया कि गाड़ी की चाबी इग्निशन में लगी हुई थी, जो स्पष्ट लापरवाही है।
दोनों चाबियों की आवश्यकता क्यों होती है?
बीमा कंपनियां आमतौर पर चोरी की स्थिति में आपसे वाहन की दोनों चाबियाँ मांगती हैं। यह इस बात का प्रमाण होता है कि चोरी आपसे असंबंधित तरीके से हुई है और आपने जानबूझकर इसमें कोई भूमिका नहीं निभाई। यदि कोई एक चाबी गायब हो और दूसरा भी संदेहास्पद स्थिति में हो, तो बीमा कंपनी संदेह के आधार पर क्लेम अस्वीकार कर सकती है।
अगर चाबी छीनकर चोरी हुई हो तो क्या होगा?
ऐसे मामलों में, यदि कोई जबरन आपकी चाबी छीनकर या धमकी देकर कार चुरा ले, और आपने तुरंत पुलिस में शिकायत (FIR) दर्ज कराई है, तो बीमा कंपनी इस क्लेम को स्वीकार कर सकती है। हालांकि, इसके लिए पुलिस द्वारा नॉन-ट्रेसेबल रिपोर्ट (Non-Traceable Report) अनिवार्य होती है। बीमा कंपनी अपनी जांच के बाद यह तय करती है कि क्लेम वैध है या नहीं।
बीमा क्लेम के लिए आवश्यक दस्तावेज़
कार चोरी की स्थिति में नीचे दिए गए दस्तावेज़ आवश्यक होते हैं:
FIR की कॉपी
बीमा पॉलिसी की कॉपी
वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी
दोनों ओरिजिनल चाबियाँ
नॉन-ट्रेसेबल रिपोर्ट
बीमा कंपनी से प्राप्त क्लेम फॉर्म
इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्शन से कैसे बचें?
आपको कुछ सावधानियाँ अपनानी चाहिए ताकि भविष्य में इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट न हो:
हमेशा वाहन को लॉक करें और चाबी साथ रखें
गाड़ी को ऐसी जगह पार्क करें जहां CCTV या सुरक्षा गार्ड की मौजूदगी हो
चोरी होते ही तुरंत पुलिस और बीमा कंपनी को सूचित करें
सभी दस्तावेज़ एकत्रित रखें और सही जानकारी दें
पॉलिसी की शर्तों को ध्यान से पढ़ें और संशय की स्थिति में एजेंट से सलाह लें.
Car tips in Hindi : दिन प्रतिदिन बढ़ती महंगाई को देख हर कोई गाड़ी खरीदने से पहले इसकी माइलेज के बारे में जानना चाहता है। अगर आप भी वाहन चालक है और आपकी गाड़ी बढ़िया माइलेज नहीं दे रही है तो आज की यह खबर आपके लिए बड़े ही काम की है क्योंकि आज की इस खबर के माध्यम से हम आपके साथ शेयर करने जा रहे हैं उन टिप्स को जिन्हें अपनाने के बाद आपकी गाड़ी देने लगे बढ़िया माइलेज।
आजकल कार में अच्छी माइलेज का होना उतना ही जरूरी हो गया है, जितना कि शरीर के लिए अच्छा और पौष्टिक खाना। दोनों मन की तंदुरुस्ती के लिए जरूरी है और लोग इससे चिंतामुक्त भी रहते हैं। इसी बात का ध्यान रखते हुए कार कंपनियां अब एसयूवी को भी बेहतर माइलेज के साथ पेश कर रही हैं। लेकिन किसी भी गाड़ी की बेहतर माइलेज के लिए बहुत सी बातें जरूरी होती हैं और इनमें चलाने के तरीके, इंजन का ध्यान रखना, समय-समय पर सर्विसिंग समेत काफी सारी और भी बातें हैं। आज हम आपको ऐसी अहम जानकारियां देने वाले हैं, जिनको फॉलो करने पर आपको निश्चित रूप से कार माइलेज बेहतर करने में फायदा मिलेगा।
ड्राइविंग स्टाइल – कार चलाते समय ब्रेक, क्लच या स्टीरियरिंग को बार-बार बेवजह दबाना या घुमाना आपकी कार की सेहत के साथ ही माइलेज के लिहाज से भी ठीक नहीं होता है। ऐसें में सही ड्राइविंग बिहेवियर जरूरी है। आप अगर रश ड्राइविंग या फास्ट ड्राइविंग की बजाय 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे या 100 ही मान लें, की स्पीड से कार चलाते हैं तो आपकी कार की माइलेज में इजाफा हो जाता है।
इंजन पर ज्यादा लोड – इंजन पर ज्यादा लोड पड़ता है तो फिर माइलेज बेहतर नहीं मिलेगी। कोशिश करें कि कार के बूट स्पेस में गैर जरूरी सामान न रखें। कार में लोगों को ठूस-ठूसकर न भरें। कार में अगर लोग ज्यादा बैठे होंगे तो फिर इंजन पर ज्यादा लोड पड़ेगा और ऐसे में आपकी कार ज्यादा तेल पिएगी।
अच्छी क्वॉलिटी का फ्यूल – बहुत से लोगों की आदत होती है कि वह जहां-तहां कार में फ्यूल डलवा लेते हैं और बाद में अफसोस जताते रहते हैं। आप ऐसा बिल्कुल न करें। कार को हमेशा अच्छे पेट्रोल पंप पर ही रीफ्यूल कराएं, क्योंकि अच्छी क्वॉलिटी के डीजल या पेट्रोल का आपकी कार की माइलेज पर सीधा असर पड़ता है।
सर्विसिंग और टायर प्रेशर – आपकी कार के टायर में एयर प्रेशर का संतुलित होना बेहद जरूरी है, ऐसे में समय-समय पर टायर प्रेशर को मॉनिटर करते रहें। आजकल बहुत सी गाड़ियां टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस होकर आने लगी हैं। इसके साथ ही इंजन की समय-समय पर सर्विसिंग कराते रहें, जिससे कि इंजन में किसी प्रकार की खराबी न आए और आपको अच्छी माइलेज मिलती रहे।
Bajaj Chetak Hydrogen Scooter: बजाज कंपनी देश की फेमस कंपनी है. पुराने जमाने से लेकर आज तक लोग बजाज कंपनी की बाइक और स्कूटर को चलाना काफी पसंद करते हैं. ऐसे में हाल ही में बजाज चेतक इलेक्ट्रिक स्कूटर भी सामने आया था जो काफी अच्छा परफॉर्मेंस देता हुआ नजर भी आ रहा है. वही बजाज चेतक इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री भी काफी जोर-शोर से हो रही है. लेकिन बजाज कंपनी ने इसी इलेक्ट्रिक स्कूटर को Bajaj Chetak Hydrogen Scooter में बदल दिया है.
ऐसा इसलिए है क्योंकि लगातार बजाज चेतक स्कूटर की मांग बढ़ती जा रही थी जिसके चलते कंपनी ने भी इसमें हाइड्रोजन का इस्तेमाल कर दिया है यानी कि अब यह स्कूटर पानी से भी चल सकेगा। हालांकि बजाज चेतक अब इसे लॉन्च करने जा रहे हैं जिसका पेटेंट भी काफी समय पहले करवा दिया गया था लिए इस लेख में इसके बारे में विस्तार से जान लेते हैं.
Bajaj Chetak Hydrogen Scooter
बजाज कंपनी के द्वारा अब हाल ही में हाइड्रोजन से चलने वाला स्कूटर भी पेश किया गया था जिसकी ऑफिशियल जानकारी भी रिलीज कर दी गई थी जिसके चलते बताया भी गया था कि हाइड्रोजन फ्यूल सिस्टम इस स्कूटर में देखने को मिलने वाला है इसका मतलब तो यही होता है कि अभी है स्कूटर पानी की मदद से ही चलेगा।
किसी स्कूटर में हाइड्रोजन फ्यूल सेल की मदद से इंजन को बनाया गया है जिसके चलते 1 लीटर पानी में यह है 280 किलोमीटर तक का सफर तय करने में सक्षम रहेगा। हालांकि इसका डिजाइन बजाज चेतक इलेक्ट्रिक स्कूटर के जैसा ही दिखाई देगा सभी एडवांस्ड फीचर्स क्लासिक डिजाइन देखने को मिलेंगे लेकिन बता दे कि अभी तक ऑफिशल लॉन्च डेट और कीमत को लेकर कोई भी खुलासा नहीं हुआ है.
हालांकि कुछ रिपोर्ट के अनुसार आप लोग Bajaj Chetak Hydrogen Scooter को ₹20000 तक की डाउन पेमेंट देकर भी खरीद सकते हैं. यह जब कीमत अधिक तारीख तौर पर सामने आ जाएगी तब यह ऑफर भी अस्तित्व में आ जाएगा।
traffic rules : ट्रैफिक पुलिस दिन प्रतिदिन अपने नियमों को सख्त करती जा रही है। अगर आप भी एक वाहन चालक है तो आपको हर नए ट्रैफिक नियमों का पता होना चाहिए। कई लोगों का मानना है की खड़ी गाड़ी में गाने चलाने पर ट्रैफिक पुलिस चालान काट सकती है। चलिए खबर में जानते हैं इससे जुड़े ट्रैफिक नियम के बारे में विस्तार से।
(new traffic rules 2025) बदलते जमाने के साथ-साथ ट्रैफिक नियमों में भी हर रोज बदलाव होते रहते है। नई तकनीकी के इस दौर में अक्सर खुद की कार खरीदना हर किसी का सपना बन गया है। आप लोग जानते ही हैं कि गाड़ी चलाने को लेकर ट्रैफिक पुलिस द्वारा कई सारे रूल्स बनाए गए हैं। ड्राइविंग करने से पहले हमें हर नए ट्रैफिक नियम के बारे में जान लेना चाहिए। आइए आज आपको बताते हैं कि क्या खड़ी गाड़ी में म्यूजिक चलने पर भी कर सकता है चालान…
ड्राइविंग करते समय तेज आवाज में गाने सुनना भी है ट्रैफिक नियमों के खिलाफ….
ट्रैफिक पुलिस हर रोज अपने नियम सख्त करती जा रही है। मैं आपको बता दे की गाड़ी चलाते वक्त तेज आवाज में गाने बजाने पर भी एक गंभीर मामला हो सकता है और ट्रैफिक पुलिस ऐसे में आपका चालान भी काट सकती है।
आपको जानकर शायद हैरानी हो लेकिन गाड़ी चलाते समय तेज आवाज में गाने सुनना ट्रैफिक नियमों (traffic rules) के खिलाफ माना जा सकता है। हालांकि, सीधे तौर पर तेज आवाज में म्यूजिक बजाने को लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस इसे यातायात नियमों के उल्लंघन (violation of traffic rules) के तहत आने वाला अपराध मान सकती हैं। इसलिए गाड़ी चलाते समय धीमी आवाज में गाना सुनें।
इन कारणों से कट सकता है चालान
तेज आवाज में गाना बजाने से आपका ध्यान सड़क से हट सकता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। तेज आवाज में गाना बजाना आसपास के लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत नियम
बता दें कि हर रोज सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। इसलिए सरकार ने लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर गाड़ियों को चलाने को लेकर कई सारे नियम (new traffic rules 2025) बनाए हैं। जो मोटर व्हीकल एक्ट (motor vehicle act) के अंतर्गत आते हैं।
इतना ही नहीं गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना या हैंड्स फ्री डिवाइस का इस्तेमाल करना भी नियमों के खिलाफ है। लेकिन आप ड्राइव करते समय नेविगेशन के लिए अपना मोबाइल फोन यूज कर सकते हैं।
कट जाएं चालान तो इतने दिनों के अंदर भरना होता है चालान
अगर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन (traffic rules violation) करने पर आपका चालान कट गया है तो तय समय सीमा के अंदर आपको चालान की रकम भरनी होती है। आपको बता दें कि चालान की रकम 90 दिनों के अंदर जमा करानी होती है। वरना आपकी समस्या बढ़ सकती है। अगर आप अपने चालान की रकम 90 दिनों के अंदर नहीं भरते तो आपकी परेशानी बढ़ सकती है। आपकी गाड़ी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
इतना ही नहीं चालान न भरने पर यह मामला कोर्ट में जा सकता है। और आपको यह बताने की जरूरत नहीं है कि कोर्ट में मामला जाने पर (traffic rules 2025) आपकी मुश्किलें और कितनी बढ़ सकती है। इसलिए सिर्फ जुर्माने से बचने के लिए ही नहीं अपनी और दूसरों की सेफ्टी के लिए गाड़ी चलाते वक्त सभी नियमों का पालन (follow traffic rules) करें।
नई बाइक खरीदने के बाद लोग शुरूआत में तो इसका काफी ध्यान रखते है उसे टनाटन बना कर रखते है लेकिन धीरे-धीरे वो इसका ध्यान रखना बंद कर देते है और बस अंधाधुंध चलाते रहते है। कई बार तो इंजन में से कई तरह की आवाजें आने लग जाती (bike engine damage reasons) है लेकिन लोग उसे सुन कर भी अनसुना कर देते है।
अगर आपकी बाइक के इंजन से भी आवाजें आ रही है तो आपको बता दें कि इसके ये 5 मुख्य कारण हो सकते है। यह संकेत हो सकता है कि इंजन में कुछ समस्या हो रही है जिसे तुरंत जांचना और ठीक करना जरूरी है। आज यहाँ 5 प्रमुख कारण दिए गए हैं जो इस समस्या के पीछे हो सकते (bike care tips) हैं। आइए आप भी जान लें…
-ढीले या क्षतिग्रस्त पार्ट्स कारण: कई बार क्या होता है कि इंजन के अंदर या बाहर के कुछ पार्ट्स (जैसे कि बोल्ट, नट्स, या पिस्टन) ढीले या क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे चलते समय आवाज आ सकती है। समाधान: इसके लिए जरूरी है कि सभी पार्ट्स की जांच करवाएं और ढीले या क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक करें या बदलवाएं। -स्पार्क प्लग की समस्या कारण: अब ये तो स्वाभाविक सी बात है कि अगर स्पार्क प्लग (spark plug) खराब हो या सही से काम नहीं कर रहा हो, तो इंजन सही से काम नहीं करेगा और इससे इंजन में आवाज पैदा हो सकती है। समाधान: जरूरी है कि आप स्पार्क प्लग की जांच करें। अगर यह गंदा हो या खराब हो गया हो, तो इसे साफ करें या बदलें। -इंजन के अंदर कार्बन का जमाव कारण: मान लो इंजन के अंदर कार्बन का जमाव हो जाए तो इंजन के अंदर कार्बन का जमाव (carbon accumulation in bike engine) बढ़ जाने से आवाज आने लगती है, खासकर अगर आपकी बाइक पुरानी हो या आपने उसमें नियमित सर्विसिंग नहीं करवाई हो। समाधान: आपको बाइक की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इंजन को साफ करवाएं और अगर जरूरत हो, तो डीकर्बोनाइजिंग प्रक्रिया करवाएं। -कम या गंदा इंजन ऑयल कारण: जानकारी के लिए बता दें कि इंजन ऑयल की कमी या उसमें गंदगी होने से इंजन के हिस्सों के बीच घर्षण बढ़ जाता है, जिससे आवाज आ सकती है। समाधान: इसके लिए आप इंजन ऑयल (engine oil level) के स्तर और उसकी गुणवत्ता की जांच करें। अगर ऑयल गंदा हो या कम हो तो इसे बदलें। -चेन की समस्या कारण: एक अन्य कारण के बारे में बता दें कि बाइक की चेन (bike chain set loose) का ढीला होना या उसका सही से ग्रीसिंग न होना इंजन से आने वाली आवाज का कारण हो सकता है। समाधान: चेन की टेंशन और ग्रीसिंग की जांच करें। जरूरत हो तो इसे ठीक करें या नई चेन लगवाएं। ऊपर बताए गए किसी भी कारण की वजह से आपकी बाइक के इंजन से आवाज (sound from bike engine) आ सकती है और अगर आप इसके बावजूद भी इसे नजरअंदाज करते है तो ये बाइक को खराब भी कर सकती है। इसलिए, अगर आपकी बाइक के इंजन से आवाज आ रही है, तो इसे जल्द से जल्द मैकेनिक से जांच करवाएं और इसे जल्द ही ठीक कराए।
कार या बाइक चलाने वाले लोगों को अक्सर पेट्रोल पंप जाना होता है, जहां वो अपनी जरूरत के हिसाब से तेल डलवाते हैं. लेकिन कई पेट्रोल पंप वाले इसकी आड़ में धोखाधड़ी भी करते हैं. ऐसे कई मामले हैं जिनमें पेट्रोल पंप पर ग्राहकों के साथ फ्रॉड हुआ है.
ऐसे में आज हम आपको अपनी इस खबर में कुछ ऐसे कारणों के बारे में बताते हैं, जिनके चलते कई बार आपकी जेब को चपत लग जाती है. कुछ धोखेबाज पेट्राेल पंप मालिक कई तरह से लोगों को धोखा देते हैं. कई मामलों में वे कम तेल भरते हैं, तो कभी-कभी वे तेल के ज्यादा पैसे वसूलते हैं. आप थोड़ी सी सावधानी रखकर इस तरह के नुकसान से बच सकते हैं.
पेट्रोल पंप पर ठगी से बचने के तरीके-
यहां हम पेट्रोल पंपों पर होने वाली धोखाधड़ी के तरीके और उनसे बचने के टिप्स बता रहे हैं-
तेल भरवाने से पहले ‘0’ चेक करें-
हो सकता है आपको बातों में लगाकर पेट्रोल पंपकर्मी जीरो तो दिखाए, लेकिन मीटर में आपके द्वारा मांगा गया पेट्रोल का मूल्य नहीं सेट करे. आजकल सभी पेट्रोल पंप पर डिजिटल मीटर होते हैं. इनमें आपकी ओर से मांगा गया पेट्रोल फीगर और मूल्य पहले ही भरा जाता है. इससे पेट्रोलपम्प कर्मी की मनमानी और चीटिंग करने की गुंजाइश बेहद कम हो जाती है.
तेल की रकम सेट करें-
पेट्रोल पंप पर जब भी तेल भरवाने जाएं तो 100, 200 या 500 रुपये का पेट्रोल-डीजल भरवाने से बचना चाहिए. इस तरह के आंकड़े बेहद आम होते हैं. कई बार पेट्रोल पंप मशीन में इस तरह के अमाउंट के लिए तेल की क्वांटिटी पहले से सेट रहती है.
मान लीजिए आपने 1,000 रुपये का तेल भरवाया तो पहले से सेट क्वांटिटी में तेल आएगा. इसलिए 109, 575, 1,253 रुपये जैसी रकम के साथ तेल भरवाना चाहिए.
तेल का टाइप चेक करें-
पेट्रोल पंप वाले गाड़ियों में ज्यादातर हाई ऑक्टेन फ्यूल भरते हैं. यह काम आपसे बिना पूछे किया जाता है. साधारण गाड़ियों में इस तरह का तेल भरवाने का कोई मतलब नहीं है. इसलिए पेट्रोल पंप वाले से नॉर्मल यानी रेगुलर तेल ही भरवाएं क्योंकि हाई ऑक्टेन फ्यूल महंगा होता है.
भरोसेमंद पेट्रोल पंप पर जाएं-
पेट्रोल-डीजल भरवाना तो लगातार चलता रहता है. इसलिए हमेशा ऐसे पेट्रोल पंप (Petrol Pump) से तेल भरवाएं जिसपर आपको भरोसा हो. इधर-उधर पेट्रोल पंप पर जाना ठीक नहीं है, क्योंकि दूसरे पेट्रोल पंप पर धोखाधड़ी होने का खतरा रहता है.
क्वांटिटी चेक करें-
अगर आपको लगता है कि तेल की क्वांटिटी में गड़बड़ी है तो आप इसे चेक कर सकते हैं. आप पेट्रोल पंप वाले से क्वांटिटी चेक करने के लिए कहें. पंप वाला एक कंटेनर में उसी अमाउंट का फ्यूल भरकर दिखाएगा, फिर आप आसानी से उसका तौल चेक कर सकते हैं.
इस तरह आप पेट्रोल पंप पर धोखाधड़ी (fraud at petrol pump) का शिकार होने से बच सकते हैं. ध्यान रहे कि पेट्रोल पंप पर फ्रॉड से बचने के लिए चौकन्ना रहना जरूरी है.
Fuel Pump Tips: कई बार आपको पेट्रोल भरवाने के बाद ऐसा महसूस हो सकता है कि आपने जितने रुपये का पेट्रोल भरवाया, उस हिसाब से आपकी गाड़ी ने माइलेज नहीं दी। ऐसे में आपके साथ पेट्रोल पंप पर कोई ठगी न हो इसके लिए आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स (petrol pump charges) के बारे में बताने जा रहे है, जिन्हें अपनाकर आप सुरक्षित रह सकते हैं.
रेट में गड़बड़ी-
कुछ-कुछ पेट्रोल पंप के कर्मचारी या मालिक पेट्रोल या फ्यूल की कीमतों में हेरा-फेरी करके ठगी कर सकते हैं। इसलिए जब भी गाड़ी में फ्यूल भराएं, तो मीटर जरूर चेक करें। ताकि आप इस तरह की ठगी से बच सकें।
फीलिंग मशीन में चिप से खिलवाड़-
कई बार कम तेल भरने के लिए फ्यूल पंप मालिक और कर्मी मशीन में एक इलेक्ट्रॉनिक चिप (electronic chip) लगा देते हैं. जिससे मीटर पर पूरी मात्रा में तेल दिखाएगा, लेकिन ग्राहक को कम फ्यूल मिलता है.
बिना अनुमति के सिंथेटिक तेल भरना-
कुछ पेट्रोल पंपों (petrol pump) पर ग्राहकों के वाहन में बिना पूछे रेगुलर फ्यूल की जगह सिंथेटिक तेल (synthetic oil) भर दिया जाता है. सिंथेटिक तेल, सामान्य तेल से करीब 5 से 10 प्रतिशत महंगा होता है, इसलिए ग्राहकों को अधिक राशि चुकानी पड़ती है. इसलिए तेल भराने से पहले पंप अटेंडेंट को इस बारे में साफ निर्देश देना न भूलें.
खराब फ्यूल क्वालिटी-
यदि आपको अपने वाहन में भरे जा रहे फ्यूल की क्वालिटी पर शक है, तो आप इंजन फिल्टर पेपर टेस्ट की डिमांड कर सकते हैं. कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के अनुसार हर पेट्रोल पंप पर फिल्टर पेपर (filter paper) होना चाहिए और जरूरत पड़ने पर ग्राहक को दिया जाना चाहिए.
पेट्रोल मिलावटी है या नहीं यह जानने के लिए फिल्टर पेपर पर पेट्रोल की कुछ बूंदे डालें, अगर फिल्टर पेपर पर दाग छूटता है तो पेट्रोल मिलावटी है और अगर ऐसा नहीं है तो पेट्रोल शुद्ध है. खराब क्वालिटी का फ्यूल आपके वाहन को भी नुकसान पहुंचा सकता है.
पेट्रोल का दाम-
जब भी आप पेट्रोल पंप पर जाएं तो पेट्रोल के कीमत (petrol price) की जांच जरूर कर लें. कोई भी पेट्रोल पंप डीलर, फ्यूल के लिए अधिक कीमत नही ले सकता है. इसलिए मशीन पर दिखने वाले फ्यूल के कीमत की जांच जरूर कर लें.
Fastag Recharge: एक समय था जब लोगों को टोल टैक्स चुकाने के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता था। इससे न केवल समय बर्बाद होता था, बल्कि उन्हें कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ता था। लेकिन अब पूरे भारत में फास्टैग का उपयोग किया जाने लगा है, जो कि टोल भुगतान (toll payment) को आसान बनाता है। फास्टैग की सहायता से लोग बिना किसी लाइन में लगे, तुरंत टोल चुकता कर सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि यात्रा भी सुगम हो जाती है। इसके साथ ही, कैश रखने की जरूरत खत्म हो जाती है, जिससे यात्रियों को और भी सुविधा मिलती है।
फास्टैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (electronic toll coleection) सिस्टम है, जिसे प्रीपेड अकाउंट या बचत खाते से जोड़ा जाता है। इसे गाड़ी की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है, और टोल प्लाजा पर स्कैन किया जाता है। जैसे ही फास्टैग स्कैन होता है, टोल राशि आपके अकाउंट से स्वतः काट ली जाती है।
फास्टैग को नियमित रूप से रिचार्ज (recharge) करना पड़ता है, जिसे आप गाड़ी के नंबर से कर सकते हैं। इसके लिए Google Pay, Amazon Pay, या Phone Pay जैसे ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स का उपयोग किया जा सकता है। इन ऐप्स में प्रवेश करने के बाद, फास्टैग रिचार्ज का विकल्प चुनें और आवश्यक राशि जमा करें।
इसके बाद फास्टैग खरीदने के लिए प्रोवाइडर (provider) चुनें, वाहन नंबर दर्ज करें, राशि चुनें और प्रक्रिया पूरी करें। ध्यान रखें, वाहन नंबर फास्टैग खाते से लिंक होना चाहिए।
आप फास्टैग को रिचार्ज करने के लिए फास्टैग नंबर (fastag number) का इस्तेमाल कर सकते हैं। सबसे पहले, ऑनलाइन पेमेंट ऐप खोलें और ‘FASTag रिचार्ज’ सेक्शन पर जाएं। यहां, अपना लिंक किया हुआ फास्टैग अकाउंट (fastag account) चुनें और आवश्यक अमाउंट डालकर रिचार्ज करें। इसके अलावा, आप अपने बैंक ऐप्स और नेट बैंकिंग के माध्यम से भी रिचार्ज कर सकते हैं।
यदि आपको किसी अन्य विकल्प की आवश्यकता हो, तो फास्टैग की आधिकारिक वेबसाइट (website) पर जाकर भी रिचार्ज किया जा सकता है। सरल प्रक्रिया और विभिन्न विकल्पों के कारण फास्टैग रिचार्ज करना बहुत सुविधाजनक है।