Author: me.sumitji@gmail.com

  • 8 पुरुषों से संबंध बनाकर पैदा किएˈ 11 बच्चे टोटल 30 का टारगेट है वजह सुनकर रह जाओगे दंगˌ

    8 पुरुषों से संबंध बनाकर पैदा किएˈ 11 बच्चे टोटल 30 का टारगेट है वजह सुनकर रह जाओगे दंगˌ

    8 पुरुषों से संबंध बनाकर पैदा किएˈ 11 बच्चे टोटल 30 का टारगेट है वजह सुनकर रह जाओगे दंगˌ

    भारत में एक कहावत मशहूर है। हम दो हमारे दो। वहीं चीन में देखा जाए तो कुछ समय पहले हम दो हमारे एक का चलन चला था। वैसे भी आज के महंगाई के जमाने में कोई भी दो या तीन से ज्यादा बच्चे नहीं करता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी महिला से मिलाने जा रहे हैं जिसके घर बच्चों की पूरी क्रिकेट टीम है। यानि उनके 11 बच्चे हैं।

    8 मर्दों से हैं 11 बच्चे

    यदि आप 11 बच्चों वाली बात सुनकर हैरान हैं तो जरा ठहरिए, कहानी का असली ट्विस्ट अभी बाकी है। महिला के ये 11 बच्चे 8 अलग-अलग मर्दों से हैं। अब महिला जल्द 19 और बच्चों की प्लानिंग कर रही है ताकि उनके कुल 30 बच्चे हो जाए। अलग-अलग मर्दों से इतने बच्चे पैदा करने के पीछे महिला ने एक वजह भी बताई। यह वजह सुन आप लोटपोट हो जाएंगे।

    दरअसल सोशल मीडिया पर इन दिनों एक टिकटॉक सेलिब्रिटी बड़ी वायरल हो रही है। इस महिला का नाम फाई है जो कि अमेरिका के टेनेसी राज्य के मेम्फिस में रहती हैं। फ़ाई सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। यहां उनके 90 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। 11 बच्चे होने की वजह से उन्हें कई बार आलोचना का सामना भी करना पड़ता है।

    ऐसे करती है सबको मैनेज

    कुछ लोगों ने महिला पर आरोप लगाया कि उन्होंने इतने बच्चे इसलिए पैदा किए ताकि सरकारी भत्ते से मिलने वाली सहायता से उनका घर चल सके। हालांकि महिला ने लोगों का मुंह बंद करते हुए एक सरकारी कागज दिखाया। इसमें लिखा था कि उन्हें बच्चों की मदद के लिए चाइल्ड सपोर्ट के रूप में सिर्फ 10 डॉलर प्रति महिना ही सरकार से मिलता है।

    कुछ यूजर्स ने उनसे ये भी पूछा था कि वह इतने सारे बच्चों के साथ कैसे मैनेज कर लेती हैं। क्या वे उन्हें परेशान नहीं करते। इस पर महिला ने एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में उनके सभी बच्चे खुशी से नाच रहे थे। इस वीडियो से महिला ये कहना चाहती थी कि उनके बच्चे साथ में खुशी खुशी रहते हैं।

    इसलिए अलग-अलग मर्दों से पैदा किए बच्चे

    अब आखिरी सवाल अभी भी बरकरार है कि महिला ने इतने सारे बच्चे 8 अलग-अलग मर्दों से क्यों किए हैं? इसका जवाब महिला ने बड़े ही मजेदार अंदाज में दिया। उन्होंने कहा कि वह चाहती थी कि उनके बच्चों पर पिता का साया हमेशा बना रहे। इसलिए यदि उनके 8 पिताओं में से दो-चार इधर उधर चले भी गए। (किसी और महिला के पास या मर गए) तो भी बच्चों के ऊपर बाकी पिता का हाथ रहेगा।

    महिला ने अपने तर्क को एक उदाहरण देकर भी समझाया। उन्होंने कहा यदि आपके पास 5 जरूरी सामान है। और उसमें से 2 कहीं गुम हो जाए तो भी आपके पास 3 सामान तो रहते हैं। इससे आपका काम नहीं रुकता है। तो कुल मिलाकर महिला ने एक बैकअप प्लान के तौर पर इतने मर्दों से इतने बच्चे पैदा किए। वैसे महिला ने ये भी कहा कि वह 19 बच्चे और पैदा करेंगी। लेकिन बाद में वह बोली कि मैं मजाक कर रही हूं।

  • किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फˈ 2 से 3 महीनों में पपीते के पत्तो की चाय कर देगी जड़ से खत्म, तरीका जान लो अभीˌ

    किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फˈ 2 से 3 महीनों में पपीते के पत्तो की चाय कर देगी जड़ से खत्म, तरीका जान लो अभीˌ

    किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फˈ 2 से 3 महीनों में पपीते के पत्तो की चाय कर देगी जड़ से खत्म, तरीका जान लो अभीˌ

    पपीते के पत्तो की चाय से कोई भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90 दिनों में ठीक कर सकते हैं| अभी तक हम लोगों ने सिर्फ पपीते के पत्तों को बहुत ही सीमित तरीके से उपयोग किया होगा, प्लेटलेट्स के कम हो जाने पर या त्वचा सम्बन्धी या कोई और प्रयोग किया हैं। मगर आज जो हम आपको बताने जा रहें हैं, ये वाकई आपको चौंका देगा, आप सिर्फ 5 -6 हफ्तों में कैंसर जैसी भयंकर रोग को जड़ से ख़त्म कर सकते हैं।

    पपीते के पत्तो की मदद से कई प्रकार के वैज्ञानिक तरीको से पता लगा है कि पपीते के सभी भागो जैसे फल, तना, बीज, पतियाँ और जड़ सभी के अंदर कैंसर की कोशिका को कम करने और उसकी वृद्धि को रोकने की क्षमता पाई जाती है| विशेषकर पपीते की पतियों के अंदर कैंसर की कोशिका को कम करने और उसकी वृद्धि को रोकने का गुण अत्यधिक पाया जाता है|

    पपीते की पत्तियां सीधा कैंसर को खत्म कर सकती है| पपीते की पत्तियां बहुत प्रकार के कैंसर को खत्म कर सकती है, जिनमे मुख्यतः ब्रेस्ट कैंसर, लंग कैंसर, लीवर कैंसर| इसमें जितनी ज्यादा मात्रा में पपीते की पत्तियां बड़ाई गयी है, उतना ही अच्छा परिणाम मिला है| ये पतियाँ कैंसर की गति को जरुर रोकती है|

    पपीते की चाय बनाने की विधि :- पांच पत्तो को अच्छी तरह सुखा लें| उसको छोटे टुकडो में तोड़ लें,अब 500 मी.ली. पानी में कुछ सूखे पत्ते डाल कर उबालें, इतना उबालें जो ये पानी आधा रह जाये| अब इसको आधा-आधा कर के दिन में दो बार पिए| जितना इसका प्रयोग आप करेंगे उनता ही असर देखने को मिलेगा| ये चाय पीने के बाद एक घंटे तक कुछ भी खाना-पीना नही है|

    कैंसर में ऐसे करें पपीते का सेवन-
    कैंसर में पपीते की चाय का सेवन बहुत अचछा माना जाता है। दिन में तीन से चार बार पपीते की चाय बनाकर पीएं ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होगी। यूं तो पपीते की चाय बनाने की अलग-अलग विधि हैं, लेकिन हम आपको सरल विधि बता रहे हैं, जिसे आप ट्राय कर सकते हैं।
    – सबसे पहले 5 से 7 पपीते के पत्तों को धूप में अच्छी तरह सुखा लें और फिर इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें।
    – इसके बाद आधा लीटर पानी में पपीते के सूखे पत्ते डालकर उबाल लें। इतना उबालें की ये आधा रह जाए।
    – इसे आप 125 मिली करके दिन में दो बार पी सकते हैं। बाकी बचे हुए लिक्विड को फ्रिज में स्टोर कर रखें। ध्यान रखें कि इसे दोबारा गर्म न करें। ये चाय पीने के आधे से एक घंटे तक आपको कुछ भी खाना या पीना नहीं है।

  • जिन मर्दों की छाती पर होते हैंˈ ज्यादा बाल, उनमे होती हैं ये खूबियांˌ

    जिन मर्दों की छाती पर होते हैंˈ ज्यादा बाल, उनमे होती हैं ये खूबियांˌ

    जिन मर्दों की छाती पर होते हैंˈ ज्यादा बाल, उनमे होती हैं ये खूबियांˌ

    सामु‍द्रिक शास्‍त्र के आधार पर पुरुषों और महिलाओं के विभिन्‍न अंगों की संरचना को देखकर ही उसके व्‍यक्‍तित्‍व और व्‍यवहार के बारे में बताया जा सकता है। सामुद्रिक शास्‍त्र के अनुसार जिन पुरुषों के सीने पर ज्‍यादा बाल होते हैं वो अधिक वफादार माने जाते हैं। आज हम आपको ऐसे पुरुषों की और भी कई खूबियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

    – जिन पुरुषों के सीने पर अधिक बाल होते हैं वो शारीरिक रूप से मजबूत और बलिष्‍ठ होते हैं लेकिन अगर ऐसे पुरुष अधिक मात्रा में नशीले पदार्थों का सेवन कर लें तो इनका सुंदर शरीर बर्बाद हो जाता है। पैसे भी नष्‍ट हो जाते हैं। ये अपनी किस्‍मत से लंबा मुनाफा कमाने के चक्‍कर में रहते हैं।

    – इसके अलावा अगर किस मर्द की छाती पर ज्‍यादा बाल ना हों तो उसे धनवान, बुद्धिमान, विद्याप्रेमी और संगीतकार माना जाता है। इनका कार्यक्षेत्र न्‍याय से संबंधित होता है। इनकी पत्‍नी अकसर क्रोधी स्‍वभाव की होती हैं।

    – जिन पुरुषों की छाती थोड़ी अंदर की ओर झुकी हुई होती है वो शक्‍की स्‍वभाव के होते हैं और अपनी बात किसी से नहीं कहते हैं। ये सामाजिक रूप से विद्वान होते हैं।

    – कहते हैं कि जिस पुरुष की छाती पर बाल नहीं होते उनका भरोसा नहीं करना चाहिए। सामु्द्रिक शास्‍त्र के अनुसार ये बात बिलकुल सही है। ये दूसरों की बाते जान लेते हैं लेकिन अपने मन की बातों को गुप्‍त ही बनाए रखते हैं।

    सामुद्रिक शास्‍त्र के आधार पर आप किसी भी महिला या पुरुष के व्‍यवहार के बारे में जान सकते हैं। इसमें व्‍यक्‍ति के शारीरिक और बाहरी स्‍वरूप के आधार पर गणना की जाती है। इसमें आप सीने के बाल, नाक के आकार, भौहें की बनावट, होंठों की बनावट आदि के आधार पर उसके व्‍यक्‍तित्‍व के बारे में बता सकते हैं। इससे किसी के बारे में जानने में बहुत मदद मिलती है।

  • खुद अपने MMS वायरल कर फेमस हुईˈ ये इन्फ्लुएंसर्स अंगूठा छाप होने के बावजूद आज कमा रहीं हैं करोड़ोंˌ

    खुद अपने MMS वायरल कर फेमस हुईˈ ये इन्फ्लुएंसर्स अंगूठा छाप होने के बावजूद आज कमा रहीं हैं करोड़ोंˌ

    खुद अपने MMS वायरल कर फेमस हुईˈ ये इन्फ्लुएंसर्स अंगूठा छाप होने के बावजूद आज कमा रहीं हैं करोड़ोंˌ

    Social Media Influencers : सोशल मीडिया पर इन दिनों रातों-रात हर कोई फेमस हो जाता है। डांस करके या अनोखा कुछ काम करके लोग लाखों व्यूज और फॉलोवर्स बना लेते है। लेकिन इसके पीछे का काला सच किसे भी नहीं पता होता है।

    कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंन्सर्स (Social Media Influencers) अपने ही निजी वीडियो को वायरल करके फेमस हो जाते है और फिर फेमल होने के बाद लाखों की कमाई करते हैं। चलिए तो जानते हैं ऐसे ही तीन इन्फ्लुएंन्सर्स के बारे में जिन्होंने पैसों के लिए इस हथकंडे का इस्तेमाल किया।

    सोना डे

    सोना डे मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएन्सर्स (Social Media Influencers) हैं और सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं। वह डांस वीडियो और रील बनाने के लिए जानी जाती है। वहीं एक बार उनका एमएमएस वीडियो वायरल हुआ था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस एमएमएस वीडियो को लेकर दावा किया जाने लगा कि इसमें सोना डे नजर आ रही हैं।

    हालांकि, सोना ने इसे पूरी तरह से फर्जी बताया है। जिसकी वजह से रातों-रात सोना डे और ज्यादा मशहूर हो गई। फिलहाल, सोना डे एक लोकप्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर हैं। जिनके इंस्टाग्राम पर 9.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं और यूट्यूब चैनल पर 2.5 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।

    अंजली अरोड़ा

    फेमस सोशल मीडिया इन्फ्लुएन्सर्स (Social Media Influencers) अंजलि अरोड़ा ‘कच्चा बादाम’ पर डांस करके रातों-रात मशहूर हो गई थी। इंस्टाग्राम पर उन्हें 10 मिलियन से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। हालांकि उनकी निजी जिंदगी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

    लेकिन एक बार उनका MMS वीडियो वायरल हुआ था। हालांकि बाद में उन्होंने अपने वीडियो को फर्जी बता दिया। लेकिन इस घटना के बाद अंजलि सोशल मीडिया की दुनिया में जाना-माना नाम बन गई और इंस्टाग्राम से लाखों कमाने लगी।

    गुनगुन गुप्ता

    गुनगुन गुप्ता एक मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स (Social Media Influencers) हैं। उनका एक अश्लील वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ था। वीडियो लीक होने के बाद कई तरह की अफवाहें उड़ने लगी जिनमें से एक यह भी थी कि गुनगुन गुप्ता ने आत्महत्या कर ली है। हालांकि, 19 साल की गुनगुन को लेकर उड़ाई जा रही ये सारी अफवाहें महज अफवाह ही साबित हुई। आपको बता दें कि गुनगुन के इंस्टाग्राम पर 6 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।

  • नर्क से भी बदतर बन गई नवविवाहिताˈ की ज़िंदगी, पति और सास ने कहा- ये शर्त पूरी करो तब घर में घुसना

    नर्क से भी बदतर बन गई नवविवाहिताˈ की ज़िंदगी, पति और सास ने कहा- ये शर्त पूरी करो तब घर में घुसना

    नर्क से भी बदतर बन गई नवविवाहिताˈ की ज़िंदगी, पति और सास ने कहा- ये शर्त पूरी करो तब घर में घुसना

    भारत में शादी करना बहुत जरूरी माना जाता है फिर आप चाहें नहीं चाहे, अगर शादी की उम्र हो गई है तो कुछ अपने आप शादी करना चाहते हैं तो कुछ की रिश्तेदार पकड़कर करवा देते हैं. यहां पर शादी एक जुआं माना जाता है क्योंकि हिंदू धर्म के हिसाब से एक बार शादी हो गई तो उसे निभाना ही पड़ता है लेकिन अगर शादी आप उस शादी मे खुश नहीं है तो भी समाज के डर से उसे सहना ही पड़ता है. कुछ ऐसा ही हाल हुआ मध्यप्रदेश के इंदौर में जब नर्क से भी बदतर बन गई नवविवाहिता की ज़िंदगी, उसके पति और सास ने उसके साथ ऐसा-ऐसा बर्ताव किया कि कोई कमजोर लड़की होती तो शायद सुसाइड कर लेती लेकिन उसने हिम्मत दिखाई और अपनी उस परेशानी का खुलकर सामना किया.

    नर्क से भी बदतर बन गई नवविवाहिता की ज़िंदगी

    ये घटना है इंदौर की जहां पर द्वारकापुरी में रहने वाली 25 साल की युवती खुशबू मिश्रा ने अपने पति सौरभ और सास रेणुका की दहेज प्रताड़ना को लेकर केस दर्ज कराया. शादी के 6 महीने के बाद से पति उसके साथ मारपीट करता था, सास ने दहेज की मांग को लेकर बहू को गर्म तवे से जलाया. टीआई आरएन भदौरिया ने बताया कि महिला की शादी को 6 महीने हुआ है कुछ दिनों तक सब ठीक चला लेकिन बाद में उसका पति उससे मारपीट करने लगा. पति का किसी और से अफेयर था जिसके चलते वो उससे कहता था कि तुम ना उसके जैसी सुंदर हो और ना ही पढ़ी-लिखी हो. महिला को ये सब करीब 5 महीनों से सहना पड़ रहा था. खुशबू ने बताया, ” शादी के सिर्फ 6 महीने ही हुए और इन महीनों में मैंने सारे नर्क देख लिये हैं. पति से ज्यादा हैवानियत सास ने दिखाई.”

    खुशबू ने आगे बताया कि उसकी सास ने उसे गर्म तवे से जलाया और घर से ये कहते हुए निकाला कि ऊपर का मकान बनाने के लिए अपने पिता से डेढ़ लाख रुपये लेकर आन, तभी घर में घुसना नहीं तो वापस आने की जरूरत नहीं है. इस पर वह मायके चली गई और फिर वहां हिम्मत दिखाई और सीधे द्वारिकापुरी पुलिस स्टेशन पहुंच गई. अन्नपूर्णा पुलिस ने खुशबू के पिता राम तलरेजा निवासी सच्चिदानंद नगर की शिकायत पर उसके ससुराल पक्ष के राम, पूनम, कैलाश और रुपाली के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कर लिया है. ये सभी खुशबू को दहेज के लिए बारी-बारी प्रताडित करते थे.

    बहुत हिम्मत दिखाई खुशबू ने

    भारत में खासकर हिंदू धर्म में शादी को एक ऐसा महान दर्जा दे दिया गया है जिसमें एक बार शादी कर लो तो पति को परमेश्वर ही मान लो. फिर वो आपको गाली दे मारे या फिर कुछ भी करे वो पति है कर सकता है ऐसी अवधारणा दी जाती है. आज भी बहुत से घरों में लड़कियां अपने ससुराल वालों की प्रताड़ना सह रही हैं. मगर आज का जमाना बदल गया है और अगर आपकी शादीशुदा जिंदी में ऐसी कोई परेशानी आ रही है तो आपको अवेयर होना चाहिए और खुशबू जैसा कदम उठाना चाहिए जिससे दहेज के लोभी लोगों को सबक मिल सके.

  • 4000 रुपए प्रति लीटर का काला पानीˈ पीते हैं विराट कोहली, जाने क्या है इसकी खासियत

    4000 रुपए प्रति लीटर का काला पानीˈ पीते हैं विराट कोहली, जाने क्या है इसकी खासियत

    पानी हमारे शरीर के लिए बहुत ही जरूरी होता है। इसके बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। एक जमाना था जब पानी की कोई कीमत नहीं हुआ करती थी। वह फ्री में मिल जाया करता था। लेकिन अब बोतल बंद पानी बेचा जाता है। ये अपको बाजार में 20 से 30 रुपए लीटर तक मिल जाता है। पानी में भी कई तरह की वेराइटी आती है। इसमें एक ब्लैक वाॅटर इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

    4000 रुपए प्रति लीटर का काला पानीˈ पीते हैं विराट कोहली, जाने क्या है इसकी खासियत

    ब्लैक वाॅटर नाम आप ने भी सुना होगा। इसे भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली से लेकर कई बड़े बड़े बॉलीवुड सितारें पीते हैं। इस ब्लैक वाॅटर की कीमत आपकी उम्मीद से कही ज्यादा होती है। इसे एक आम आदमी अफोर्ड नहीं कर सकता है। तो आखिर इस ब्लैक वाॅटर में ऐसा भी क्या खास होता है जो ये इतना महंगा होता है और कई सेलिब्रिटीज इसे ही पीना पसंद करते हैं। आइए जानते हैं।

    ब्लैक वाॅटर शरीर के लिए बहुत लाभकारी होता है। खासकर जो लोग जिम में घंटों पसीना बहाते हैं उनके लिए ये किसी अमृत से कम नहीं है। ब्लैक वाॅटर न सिर्फ आपको दिनभर हाईड्रेड रखता है बल्कि इसका पीएच लेवल भी बहुत अधिक होता है। इसके चलते आपको कभी एसिडिटी की परेशानी नहीं होती है। इस ब्लैक वाॅटर का pH लेवल 7.5 से ज्‍यादा होता है। इसे पीने से शरीर दर्वाइयों पर कम निर्भर रहता है। यही वजह है कि बड़े बड़े खिलाड़ियों और सेलिब्रिटीज की ये पहली पसंद होता है।

    डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स भी इसे अच्छा मानते हैं। उनके अनुसात ब्लैक वाॅटर एक खास टाइप का पानी होता है जिसमें फ्यूलविक एसिड पाया जाता है। इसे फ्युलविक ड्रिंक या स्पोर्ट्स ड्रिंक के रूप में पिया जा सकता है। हम जो सामान्य पान पीते हैं उसका पीएच लेवल 6.5 से 7.5 होता है। यह चीज मौसम पर भी निर्भर करती है।

    इसके अलावा पानी किस जगह से आ रहा है और उसके बैक्टीरिया हटाने के लिए कैसी फ़िल्टर टेक्नीक इस्तेमाल की जा रही है इन सभी पहोन पर भी पानी का पीएच लेवल निर्भर करता है। इसके विपरीत ब्लैक वाॅटर आईयोनाइज्ड वाॅटर होता है। यह अपने सबसे शुध्द रूप में पाया जाता है।

    इतने में मिलता है ब्लैक वाॅटर

    ब्लैक वाॅटर के इतने सारे गुण जानकार आपके मन में भी इसकी कीमत को लेकर सवाल जरूर आया होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विराट कोहली जो ब्लैक वाॅटर पीते हैं उसकी एक लीटर की कीमत 4,000 रूपये है। हालांकि कुछ ई-काॅमर्स साइट पर ब्लैक वाॅटर की आधा लीटर की बाॅटल 90 रूपये में भी बेची जा रही है। इसमें भी अलग अलग ब्रांड होते हैं। उसके हिसाब से कीमत कम या ज्यादा हो सकती है।

    फिर भी सामान्य 20 से 30 रूपये प्रति लीटर वाले पानी की तुलना में ये कीमत बहुत अधिक है। इसे एक आम आदमी के लिए खरीदकर रोज रोज पीना मुमकिन नहीं है। इसका इस्तेमाल रोजाना सिर्फ अमीर लोग ही कर सकते हैं।

    वैसे यदि आप अमीर होते तो भी क्या 4,000 रूपये प्रति लीटर का पानी खरीदकर पीते? अपने जवाब कमेंट में जरूर दें।

  • इस पौधे की एक पत्ती दूर करˈ देती है बांझपन, बिना महंगे इलाज के घर में गूंज उठती है किलकारी

    इस पौधे की एक पत्ती दूर करˈ देती है बांझपन, बिना महंगे इलाज के घर में गूंज उठती है किलकारी

    इस पौधे की एक पत्ती दूर करˈ देती है बांझपन, बिना महंगे इलाज के घर में गूंज उठती है किलकारी

    यह इतना गुणी पौधा हैं कि कितना भी पुराना घाव हो या दाद ,खाज, खुजली हो उसे चुटकियों ठीक कर देता है। सबसे बड़ी बात ये पौधा बांझपन को बिल्कुल दूर कर देता है।

     कहाँ मिलता है ये पौधा : ये पौधा भारत में सभी स्थानों पर पाया जाता है है और मुख्य रूप से शुष्क क्षेत्रों में इसका बाहुल्य होता है। यह आपको खेत ,खलिहान ,नदी ,नाला हर जगह मिल जायेगा। यह दो प्रकार के फूलों वाला होता है एक पीले फूल और दूसरा सफ़ेद फूल वाला। यह दोनों प्रकार के पौधे औषधीय रूप से सामान होते हैं।

    इसके पत्ते कटीले और इसे तोड़ने पर सुनहरे रंग का दूध निकालता है। सत्यानासी के औषधीय गुण और उनका उपयोग : दोस्तों वैसे तो यह पौधा औषधीय गुणों से भरा पड़ा है किन्तु मैं आपको को इसके प्रमुख घरेलू उपचारों के बारे में बताएंगे। निसंतानता अथवा बांझपन – दोस्तों यह एक ऐसी समस्या है जिससे आदमी टूट सा जाता है। इंसान के पास सब कुछ होते हुए जब कोई संतान नहीं होती है ,तो वह व्यक्ति बहुत दुखी हो जाता है। निसंतानता का प्रमुख कारण बीज में शुक्राणुओं की कमीं होती है। दोस्तों अगर कोई भी व्यक्ति इस समस्या से परेशान है तो सत्यानासी के पौधे की जड़ की छाल को छाया में सुखाकर इसका पाउडर बना लें।

    इसको सुबह खाली पेट एक से दो ग्राम दूध के साथ लें इसके नियमित सेवन से निसंतानता और धातु रोग की समस्या 14 दिन में जड़ से खत्म हो जाती है। यदि समस्या अधिक उम्र के व्यक्ति को है तो इसका सेवन अधिक दिन भी करना पड़ सकता ह।ै अगर हम इसकी जड़ों को धोकर इनका पाउडर बना लें और इसका प्रयोग सुबह मिश्री के साथ ले तो भी निसंतानता खत्म हो जाती है और संतान की प्राप्ति होती है। इसके लिए ये रामबाण औषधि है। नपुंसकता- इसके लिए सत्यानासी की जड़ों को पीस कर ,एक ग्राम सत्यानासी की जड़ का पाउडर और इतनी ही मात्रा में बरगद का दूध आपस में मिलाकर चने के आकार की गोलियां बना लें। इन गोलियों को लगातार 14 दिन तक सुबह -शाम पानी के साथ देने से नपुंसकता रोग खत्म हो जाता है।

    यह भी एक रामबाण उपाय है। अस्थमा -इसके लिए सत्यानासी की जड़ों का चूर्ण एक से आधा राम दूध या गरम पानी से लेने से अस्थमा रोग ठीक हो जाता है। Disclaimer: यह जानकारी केवल सामान्य ज्ञान के लिए है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

  • टाटा का 1KW सोलर सिस्टम, हर महीनेˈ 300 यूनिट बिजली फ्री, 25 साल की वारंटी के साथ शानदार बचत का मौका

    टाटा का 1KW सोलर सिस्टम, हर महीनेˈ 300 यूनिट बिजली फ्री, 25 साल की वारंटी के साथ शानदार बचत का मौका

    टाटा का 1KW सोलर सिस्टम, हर महीनेˈ 300 यूनिट बिजली फ्री, 25 साल की वारंटी के साथ शानदार बचत का मौका

    TATA 1kw Solar System: आज के जमाने में हर किसी को बिजली की जरूरत है लेकिन बढ़ते हुए बिजली के बल से हर कोई राहत भी चाहता है. हालांकि अब आप हर महीने 300 यूनिट बिजली का फ्री में इस्तेमाल भी कर सकते हैं इसके लिए आपको कोई भी पैसा खर्च करने की जरूरत भी नहीं होगी यकीनन कीजिए कि यह एक सुनहरा अवसर आपके लिए काफी लाभदायक साबित होगा.

    दरअसल टाटा कंपनी की तरफ से 1 किलोवाट सोलर सिस्टम सबसे अच्छी कीमत पर लगाने का अवसर आया है यदि आप लोगों के पास इसको लगवाने का पैसा भी नहीं है तो कंपनी जीरो डाउन पेमेंट पर भी आपके घर में टाटा 1 किलोवाट सोलर सिस्टम को इंस्टॉल कर देगी यह सोलर सिस्टम हमारे पर्यावरण के अनुकूल भी बेहद अच्छा होता है इसी के साथ बढ़ते हुए बिजली के बल से छुटकारा देने में काफी मददगार साबित होता है.

    TATA 1kw Solar System

    र्जा संकट और बढ़ते बिजली बिलों के बीच टाटा कंपनी ने घरेलू और छोटे व्यवसायों के लिए एक बेहतरीन समाधान पेश किया है। कंपनी का नया 1 किलोवाट सोलर सिस्टम अब बाजार में उपलब्ध है, जो घर, दुकान या छोटे ऑफिस की बिजली जरूरतों को पूरी तरह से पूरा करने में सक्षम है। इस सोलर सिस्टम में हाई-एफिशिएंसी मोनोक्रिस्टलाइन सोलर पैनल का उपयोग किया गया है, जो कम धूप में भी अधिक बिजली उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं। इसके साथ MPPT टेक्नोलॉजी वाला इन्वर्टर और लॉन्ग-लाइफ बैटरी बैकअप भी शामिल है, जिससे बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होती है।

    हर महीने 300 यूनिट बिजली बिल्कुल मुफ्त

    टाटा कंपनी का दावा है कि यह सोलर सिस्टम हर महीने 300 यूनिट तक बिजली उत्पन्न कर सकता है। मौजूदा बिजली दरों के अनुसार, यह साल भर में ₹20,000 तक की बचत का अवसर प्रदान करता है। एक बार इंस्टॉलेशन के बाद यह सिस्टम लगातार 25 वर्षों तक बिजली उत्पादन करता है, जिससे यह एक दीर्घकालिक निवेश साबित होता है।

    25 साल की परफॉर्मेंस वारंटी

    टाटा कंपनी ने अपने इस सोलर सिस्टम के साथ 25 साल की परफॉर्मेंस वारंटी भी दी है। इसका मतलब है कि उपभोक्ताओं को लंबे समय तक सोलर पैनल की कार्यक्षमता को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। कंपनी का यह कदम उपभोक्ता विश्वास को और मजबूत करता है।

    इंस्टॉलेशन प्रक्रिया

    अगर कोई उपभोक्ता यह सोलर सिस्टम लगवाना चाहता है, तो उसे अपने नजदीकी टाटा डीलरशिप से संपर्क करना होगा। पसंदीदा प्रोडक्ट का चयन करने के बाद इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया शुरू होती है। बची हुई राशि को लोन विकल्प के माध्यम से चुकाया जा सकता है। ग्राहक को हर महीने लगभग ₹6000 की किस्त भरनी होती है, जिससे वह यह सिस्टम आसानी से अपना बना सकता है।

    कीमत और सब्सिडी

    इस सोलर सिस्टम की अनुमानित कीमत ₹65,000 से ₹75,000 के बीच है। हालांकि, सरकार की ओर से इस पर सब्सिडी का प्रावधान भी है, जो राज्य और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने नजदीकी डीलरशिप से सब्सिडी और इंस्टॉलेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

  • कोलकाता से भुवनेश्वर पहुंचेंगे एक बार चार्जˈ में! JIO की नई चमत्कारी पेशकश कीमत सुनकर झूम उठेंगे आप

    कोलकाता से भुवनेश्वर पहुंचेंगे एक बार चार्जˈ में! JIO की नई चमत्कारी पेशकश कीमत सुनकर झूम उठेंगे आप

    कोलकाता से भुवनेश्वर पहुंचेंगे एक बार चार्जˈ में! JIO की नई चमत्कारी पेशकश कीमत सुनकर झूम उठेंगे आप

    Jio चमत्कारी पेशकश करने में माहिर है। चाहे वो फ्री इंटरनेट हो या सस्ते रिचार्ज प्लान। अब रिलायंस जियो इलेक्ट्रिक बाइक की दुनिया में कदम रखने जा रहा है। बाजार में आ रही है एक ई-बाइक, जिसमें शानदार फीचर्स होंगे।

    और इसकी कीमत 30 हजार रुपये से भी कम होगी!

    रिलायंस जियो ने बताया है कि वे एक इलेक्ट्रिक बाइक लॉन्च करने जा रहे हैं, जो ई-बाइक की दुनिया में रिकॉर्ड बनाएगी।

    एक बार चार्ज करने पर यह बाइक 400 किलोमीटर तक चल सकेगी। लिथियम आयन बैटरी होने के कारण इस ई-बाइक की कार्यक्षमता तो शानदार होगी ही, साथ ही इसकी उम्र भी लंबी होगी।

    जियो ने बताया है कि इस बाइक में फास्ट चार्जिंग फीचर होगा, जिससे 3 से 5 घंटे में बैटरी पूरी तरह से चार्ज हो जाएगी। एक और सुविधा है, यह रिमूवेबल बैटरी के साथ आएगी, जिससे इसे ई-बाइक से निकालकर कहीं और भी चार्ज किया जा सकेगा। इसमें स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम भी होगा, जो कार्यक्षमता को बढ़ाएगा।

    कहा जा रहा है कि जियो की इस ई-बाइक में पावरफुल 250 से 500 वाट की इलेक्ट्रिक मोटर होगी। इससे पहाड़ी रास्तों पर भी यह बाइक चलाना संभव होगा। इसमें कई राइडिंग मोड्स होंगे, जैसे इको, नॉर्मल और स्पोर्ट्स। अगर रास्ते में अचानक चार्ज खत्म हो जाए, तो भी कोई समस्या नहीं होगी, क्योंकि इसमें पैडल भी होंगे।

    इसके अलावा, इसमें एलईडी लाइट, जीपीएस, ब्लूटूथ और मोबाइल ऐप इंटीग्रेशन का फीचर भी होगा।

    ई-बाइक की कीमत-

    आमतौर पर ई-बाइक की कीमत काफी महंगी होती है, लेकिन जियो इस बाइक की कीमत को सभी की पहुंच में रखेगा। कहा जा रहा है कि इस ई-बाइक की कीमत हो सकती है 29,999 रुपये।

  • इसी इंसान के कारण योगी आदित्यनाथ नेˈ त्याग दिया था सब कुछ देखिए गुरु-शिष्य की अनदेखी तस्वीरें

    इसी इंसान के कारण योगी आदित्यनाथ नेˈ त्याग दिया था सब कुछ देखिए गुरु-शिष्य की अनदेखी तस्वीरें

    इसी इंसान के कारण योगी आदित्यनाथ नेˈ त्याग दिया था सब कुछ देखिए गुरु-शिष्य की अनदेखी तस्वीरें

    5 जून 1972 को उत्तराखंड के एक छोटे से गांव में जन्मे योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय मोहन बिष्ट है। स्कूल के दिनों से ही योगी आदित्यनाथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में कार्यरत थे और शुरूआत से ही उनका लगाव हिंदुत्व के प्रति था।

    विद्यार्थी परिषद के हर कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ शामिल होते थे। स्कूल के बाद उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी किया, वे अपने कॉलेज के दिनों में लगातार सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लिया करते थे। स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने महज 22 साल की उम्र में अपने घर परिवार का त्याग कर दिया और गोरखपुर के तपस्थली के होकर रह गए।

    अवैद्यनाथ ऐसे हुए थे आदित्यनाथ से प्रभावित

    सीएम योगी आदित्यनाथ जब स्कूल में थे, तो लगातार वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेते थे, उन प्रतियोगिताओं में तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में बुलाए जाते थे। ऐसे ही एक कार्यक्रम में महंत अवैद्यनाथ पहुंचे थे, जहां उन्होंने योगी आदित्यनाथ का भाषण सुना, उस भाषण से अवैद्यनाथ काफी प्रभावित हुए। इस कार्यक्रम के बाद अवैद्यनाथ ने उन्हें बुलाकर पूछा कि कहां के रहने वाले हो? कहां से आए हो? इसके बाद दोनों के बीच बातचीत हुई और आखिर में अवैद्यनाथ ने आदित्यनाथ को गोरखपुर आने का न्योता दिया।

    ऐसे बने अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी

    आपको जानकर हैरानी होगी कि अवैद्यनाथ भी उत्तराखंड के ही रहने वाले थे और उनका गांव भी आदित्यनाथ के गांव से महज 10 किलोमीटर दूर था। खैर, महंत अवैद्यनाथ के न्योते पर योगी आदित्यनाथ गोरखपुर पहुंचे और वहां कुछ दिन रूकने के बाद वापस अपने गांव लौट गए। इसके बाद उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई के लिए ऋषिकेश के ललित मोहन शर्मा महाविद्यालय में दाखिला लिया, लेकिन उनका मन अब पढ़ाई में नहीं था बल्कि उनका मन अब गोरखपुर की तप स्थली की ओर था। इसी बीच महंत अवैद्यनाथ बीमार पड़ गए और इसकी खबर मिलते ही योगी तुरंत गोरखपुर पहुंच गए।

    जब योगी आदित्यनाथ गोरखपुर पहुंचे, तो वहां देखा कि महंत काफी बीमार हैं। इसके बाद महंत ने योगी को अपने पास बुलाया और कहा कि हम अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, मेरी हालत अब काफी बिगड़ रही है और मुझे कुछ हो गया तो मेरे इस मंदिर को देखने के लिए कोई नहीं है।

    महंत अवैद्यनाथ की बात सुनकर योगी काफी भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि आप चिंता ना करें, आपको कुछ नहीं होगा, मैं जल्द ही गोरखपुर आउंगा। इसके कुछ ही दिनों बाद योगी आदित्यनाथ अपने घर से नौकरी का बहाना कर गोरखपुर की तपस्थली की ओर निकल पड़े और वहां महंत अवैद्यनाथ की शरणों में रहे। इसके बाद उन्हें महंत ने अपना उत्तराधिकारी बनाया और फिर योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के ही होकर रह गए।

    ऐसे हुई राजनीति में एंट्री

    योगी आदित्यनाथ के गुरू अवैद्यनाथ ने साल 1998 में राजनीतिक जीवन से संन्यास ले लिया और योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। यहीं से योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक करियर शुरू हुआ। बता दें कि वे गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर के महंत हैं, इसी मंदिर के पूर्व महंत अवैद्यनाथ थे, जिन्होंने अपना उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ को चुना था। खैर, साल 1998 में योगी ने गोरखपुर से 12वीं लोकसभा का चुनाव लड़ा और यहां से जीतकर सीधे संसद पहुंच गए। दिलचस्प बात ये थी कि उस समय वे महज 26 साल के थे और सबसे कम उम्र के सांसद बने थे।

    साल 1998 से योगी आदित्यनाथ लगातार गोरखपुर लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, वे इस सीट से 5 बार सांसद चुने जा चुके हैं। हालांकि साल 2016 में जब उन्हें उत्तर प्रदेश का सीएम बनाया गया, तो सांसद पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बता दें कि योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश बीजेपी का एक बड़ा चेहरा हैं और उत्तर भारत की राजनीति के कद्दावर नेताओं में से एक हैं।