Sex Life Tips: अपने पार्टनर के साथ मजबूत रिश्ते के लिए एक स्वस्थ यौन जीवन बेहद जरूरी है. अगर आपका यौन जीवन खराब है, तो इसका आपके रिश्ते पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. अगर आप अपने पार्टनर के साथ सेक्स में रुचि खो रहे हैं, तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ-साथ कई बुरी आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं. ऐसे में आइए उन पांच बुरी आदतों पर एक नजर डालते हैं जो आपके यौन जीवन को बर्बाद कर रही हैं. यौन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गलत खान-पान की आदतें हमारे यौन जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं. जंक फ़ूड, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, चीनी और ट्रांस फैट से बचना सबसे अच्छा है. ये चीजें हमारे ब्लड सर्कुलेशन को स्लो कर देते हैं, जिसका सीधा असर हमारे यौन जीवन पर पड़ता है.
नमक
डॉक्टरों का कहना है कि खाने में ज्यादा नमक खाने से उच्च रक्तचाप हो सकता है, जिससे आपकी कामेच्छा कमजोर हो जाती है. अगर आप अपनी कामेच्छा बढ़ाना चाहते हैं, तो नमक का सेवन सीमित करें.
गैजेट की लत
हाल के वर्षों में, स्मार्ट गैजेट्स पर लोगों का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है. स्मार्ट गैजेट्स की इस लत ने हमारे यौन स्वास्थ्य को भी प्रभावित किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि गैजेट की लत न सिर्फ पार्टनर से दूरी बनाती है, बल्कि कामेच्छा पर भी नकारात्मक असर डालती है.
शराब
कभी-कभार शराब पीने से आपकी सेहत को कोई नुकसान नहीं होगा. हालांकि, अगर यह लत बन जाए, तो इसके निश्चित रूप से बुरे असर हो सकते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि ज़्यादा शराब पीने से हमारी कामेच्छा कमज़ोर हो जाती है. इसकी लत पुरुषों और महिलाओं, दोनों के यौन जीवन को बर्बाद कर सकती है.
एक्सरसाइज से दुरी
कुछ लोग घर से काम तक की सामान्य दिनचर्या में ही रहना पसंद करते हैं. ये लोग व्यायाम से बचते हैं. शायद आपको पता न हो कि नियमित व्यायाम न सिर्फ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखता है, बल्कि सेक्स इच्छा को भी बढ़ाता है. इसलिए, आज ही व्यायाम न करने की अपनी बुरी आदत को बदलने का फैसला करें.
How to Choose Perfect Coconut: आप भी जब बाजार में नारियल खरीदने जाते हैं तो उसमें कितना पानी है ये जरूर चेक करते हैं. वहीं कुछ लोग नारियल में कितनी मलाई है ये देखकर उसे खाना पसंद करते हैं. कई बार नारियल में पानी कम निकल आता है तो कभी मलाई. ऐसे में हम निराश हो जाते हैं. नारियल में पानी और मलाई कितनी होगी ये पता लगाना किसी कला से कम नहीं है! अगर आप भी बिल्कुल परफेक्ट नारियल खरीदना चाहते हैं तो आपके ये टिप्स बेहद काम आ सकते हैं. इनकी मदद से आप मिनटों में पहचान सकते हैं नारियल में पानी ज्यादा है या मलाई.
नारियल में पानी ज्यादा है या मलाई कैसे पहचानें ( How to identify whether coconut has maximum water or cream?)
नारियल को हिलाकर देखें
जब आप नारियल को खरीदनें जाएं तो उसको हिलाकर देखें. आप नारियल को अपने काम के पास ले जाएं और हिलाकर देखें अगर अंदर से तेज पानी बहने की आवाज सुनाई देती है, तो नारियल में पानी ज्यादा है और मलाई कम. वहीं अगर पानी की आवाज धीमी आ रही है तो इसमें मलाई की मात्रा ज्यादा हो सकती है.
नारियल का वजन
नारियल को हाथ में उठाकर देंखे और उसका वजन महसूस करें. अगर नारियल हल्का है तो इसमें पानी ज्यादा होने के चांसेस ज्यादा है. वहीं जब इसमें मलाई ज्यादा होती है तो वो भारी होते हैं.
नारियल की ‘आंखों’ को परखें
नारियल के ऊपर के हिस्से में तीन गोल निशान होते हैं, जिसे नारियल की आंखें कहा जाता है. अगर ये गड्ढे देखने में काले, सख्त और सूखे दिखाई देते हैं तो समझ जाइए नारियल पुराना है और इसमें मलाई ज्यादा होगी. दूसरी ओर अगर ये हल्की और मुलायम है तो इसमें पानी होने की संभावना ज्यादा है.
नारियल के बाहरी खोल को छूकर देखें
अगर नारियल का बाहरी खोल चिकना और चमकदार है तो इसमें पानी होने की संभावना ज्यादा होती है. वहीं अगर इसकी बाहर की सतह हल्की खुरदरी और सूखी है तो इसमें मलाई ज्यादा होने की संभावना.
हिंदू धर्म में, अंतिम संस्कार को सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक माना जाता है, जो आत्मा की अंतिम यात्रा को चिह्नित करता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, शवदाह मृतक के अंतिम संस्कार की निर्धारित विधि है। यह सोलह संस्कारों में से एक है जो हिंदू के जीवन को आकार देते हैं। हालाँकि, इसके अपवाद भी हैं – शिशुओं और संन्यासियों का दाह संस्कार नहीं किया जाता है। यहाँ बताया गया है कि क्यों।
अनुष्ठान और उनका गहरा अर्थ
गरुड़ पुराण के अनुसार, प्रत्येक अनुष्ठान को कुछ दिशा-निर्देशों और आध्यात्मिक नियमों का पालन करना चाहिए। इन संस्कारों को सही तरीके से करने से दिवंगत आत्मा को शांति मिलती है और उसे अगले जीवन में आसानी से प्रवेश करने में मदद मिलती है। हिंदू रीति-रिवाजों में, जबकि आम व्यक्तियों का दाह संस्कार किया जाता है, शिशुओं और संतों को आमतौर पर दफनाया जाता है।
शिशुओं को क्यों दफनाया जाता है, दाह संस्कार नहीं किया जाता पवित्र ग्रंथों के अनुसार, यदि कोई बच्चा गर्भ में या दो साल की उम्र से पहले मर जाता है, तो दाह संस्कार नहीं किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इतनी कम उम्र में आत्मा का भौतिक शरीर से लगाव नहीं होता है, न ही उसे सांसारिक सुख या दुख का अनुभव होता है। इसलिए, आत्मा शरीर को जल्दी और शांति से छोड़ देती है। इस वजह से, शिशुओं को अक्सर दफनाया जाता है या, कुछ मामलों में, उनके शरीर को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है।
संतों का दाह संस्कार क्यों नहीं किया जाता है गरुड़ पुराण बताता है कि संतों और आध्यात्मिक त्यागियों का भी दाह संस्कार नहीं किया जाता है क्योंकि वे जीवित रहते हुए ही सांसारिक मोह त्याग चुके होते हैं। वे कठोर तपस्या और भक्ति के माध्यम से अपनी इच्छाओं पर विजय प्राप्त करके तपस्या, वैराग्य और आध्यात्मिक अनुशासन का जीवन जीते हैं। इस प्रकार उनके शरीर को भौतिक मोह से बंधा हुआ नहीं माना जाता है, और इसके बजाय उन्हें दफनाया जाता है – जो उनकी आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतीक है।
अक्सर लोग एक से ज्यादा अकाउंट रखते हैं, जिनमें से एक उनके खर्चों को मैनेज करने के लिए हो सकता है तो दूसरा एक सेविंग्स अकाउंट होता है, जिसमें वे अपने पैसे सुरक्षित रखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सेविंग्स अकाउंट में डिपॉजिट (deposit) की एक सीमा होती है, जिसके बाद आयकर विभाग की नजर आप पर पड़ सकती है? हालांकि, कई लोग इस नियम से बिल्कुल अनजान हैं। आज हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं।
लिमिट से ज्यादा ट्रांजैक्शन की देनी होगी जानकारी-
इनकम टैक्स नियमों के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में किसी भी सेविंग्स अकाउंट में कुल जमा राशि 10 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि ऐसा होता है, तो आयकर विभाग आपको नोटिस (notice) भेज सकता है। आयकर अधिनियम की धारा 269ST के अनुसार, किसी भी अकाउंट धारक (account holder) को एक दिन में अधिकतम 2 लाख रुपये तक का ट्रांजैक्शन (transaction) करने की अनुमति है। यदि वह इस सीमा से अधिक ट्रांजैक्शन करता है, तो उसे बैंक को इस राशि का स्रोत स्पष्ट करना होगा। यह नियम टैक्स धोखाधड़ी को रोकने के लिए हैं।
बैंक भी देते हैं जानकारी-
नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति एक दिन में 50,000 रुपये या उससे अधिक की राशि बैंक में जमा करता है, तो उसे बैंक को इसकी सूचना देनी होती है। अकाउंट होल्डर्स (account holders) को अपना पैन विवरण भी देना ज़रूरी है। यदि व्यक्ति के पास पैन नहीं है, तो उसे फॉर्म 60 या 61 भरकर जमा करना आवश्यक होता है। इसके अलावा, यदि किसी अकाउंट से 10 लाख रुपये से अधिक का ट्रांजैक्शन होता है, तो इसे हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन (High value transactions) माना जाता है, और बैंक इसकी जानकारी आयकर विभाग को भेजती है।
टैक्स नोटिस मिलने पर क्या करें?
कई बार बड़े ट्रांजैक्शन करने पर यदि आप आयकर विभाग (Income tax department) को इसकी जानकारी नहीं देते हैं, तो आपको विभागीय नोटिस मिल सकता है। इस स्थिति में, आपको उस नोटिस का सही तरीके से जवाब देना आवश्यक होता है। जवाब देते समय, आपको जरूरी दस्तावेजों की जानकारी भी प्रस्तुत करनी होती है, जिनमें आपके बैंक अकाउंट का स्टेटमेंट (Bank Account Statement), निवेश के रिकॉर्ड और प्रॉपर्टी (property) से संबंधित दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। सही समय पर और सही जानकारी के साथ नोटिस का जवाब देना बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि आप किसी कानूनी परेशानी में न पड़ें।
ऐसा अक्सर होता है कि किस्मत आपके घर का दरवाजा खटखटा रही होती है लेकिन आप दरवाजा खोलते ही नहीं हैं। कई बार प्रयास के बाद किस्मत मौका देती है लेकिन हर इंसान इसे समझ ही नहीं पाता है। कई बार तो बात बिगड़ जाती है लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि बात बिगड़ते बिगड़ते भी बन जाती है।
कुछ ऐसी ही एक घटना हुई महिला के साथ जो ऑस्ट्रेलिया में रहती है। उसका एक लॉटरी का टिकट खुल गया था। वो भी छोटा मोटा नहीं 75 लाख रुपये का टिकट था। महिला ने उसको कूड़ा समझ लिया और घर से बाहर फेंक दिया। फिर भी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। आइए जानें आखिर फिर आगे क्या हुआ?
ऑस्ट्रेलिया से सामने आई रोचक घटना
कभी आपने सोचा है कि किसी की लाखों रुपये की लॉटरी लग जाए और वो टिकट को ही कूड़ा समझकर बाहर फेंक दे। यकीनन आप इस बात को पागलपन ही मानेंगे लेकिन एक महिला ने ये काम अपने होशोहवास में कर दिया। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली महिला ने एक लॉटरी टिकट खरीदा था। इसका दाम 5 डॉलर था।
लॉटरी टिकट की इनाम राशि 1 लाख डॉलर यानि 75 लाख रुपये थी। वो हर सप्ताह एक टिकट खरीदा करती थी। ये सिलसिला कई सालों से चला आ रहा था। टिकट का रिजल्ट आया और उसने नंबर स्क्रैच कर चेक किया तो वो मायूस हो गई। उसका नंबर नहीं लगा था। इसके बाद उसने गोल्डेन एडिशन टिकट को कूड़े के साथ बाहर फेंक दिया।
पति की पड़ी नजर और खुल गई किस्मत
महिला टिकट को कूड़े के ढेर में फेंककर अपने काम में लग गई। इसी बीच उसका पति घर पहुंचा और उसकी नजर गोल्डेन टिकट पर पड़ गई। उसने महिला से पूछा तो उसने कहा कि उसने टिकट नंबर चेक कर लिया है। पति का मन नहीं माना और उसने कचरे से टिकट उठा लिया और एक बार फिर से मिलाने को कहा।
पति के कहने पर जब महिला ने दोबारा टिकट मिलाया तो वो हैरान रह गई। उसकी लॉटरी खुल गई थी लेकिन उनको खबर ही नहीं थी। उसको घर बैठे-बैठे 75 लाख रुपये मिल गए थे। पहली बार टिकट खुलने के बाद वो हैरान रह गई। दोनों पति पत्नी इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद से फूले नहीं समा रहे।
नहीं हो रहा है किस्मत पर यकीन
महिला का कहना है कि उसको अपनी किस्मत पर यकीन ही नहीं हो रहा है। वो कई वर्षों से स्क्रैच करने वाले लॉटरी टिकट खरीदती आ रही थी। कभी भी उसका टिकट नहीं खुला। इसी वजह से इस बार भी उसने बस ऐसे ही कार्ड स्क्रैच कर लिया था। ध्यान से नंबर देखा ही नहीं था। उसको लगा ही नहीं था कि उसकी किस्मत साथ देगी।
महिला अब 75 लाख रुपये पाकर काफी खुश नजर आ रही है। उसने पहले से ही प्लान कर लिया था कि इन पैसों से वो अपने लिए नई कार खरीदेगी। वहीं कुछ पैसों से वो अपने बच्चों की सहायता भी करने की योजना बना रही है। वो अपने पति को भी धन्यवाद दे रही है जिनकी मदद से उसको ये रकम मिली।
इस आधुनिक युग में थायराइड की समस्या आजकल एक गंभीर समस्या बनी हुई है। थाइराइड गर्दन के सामने और स्वर तंत्र के दोनों तरफ होती है। ये तितली के आकार की होती है।
गले में पायी जाने वाली इस थायराइड ग्रंथि से थायरोक्सिन हॉर्मोन निकलता है।
जब इस ग्रंथि से निकलने वाले थायरोक्सिन हॉर्मोन का बैलेंस बिगड़ जाता है, जब शरीर में अनेक प्रकार की बीमारियां होने लगती है।
जब ग्रंथि से निकलने वाले थायरोक्सिन हॉर्मोन की मात्रा कम हो जाती है, तब शरीर में मेटाबोलिज़्म तेज होने लगते है, जिससे हमारी बॉडी की एनर्जी जल्दी ख़त्म हो जाती है।
इसके विपरीत इसकी मात्रा बढ़ने के कारण, मेटाबोलिज़्म कम हो जाते है, जिसके कारण शरीर सुस्त और थका हुआ हो जाता है। थायराइड ग्रंथि के कारण शरीर के अनेक हिस्से प्रभावित होते है।
थायराइड किसी भी उम्र के लोगो में हो सकता है। बच्चो में थायराइड की समस्या होने पर उनकी लंबाई कम हो जाती है, और शरीर फैलने लगता है।
महिलाओं पर इसका प्रभाव कभी कभी सामने से नजर आता है कुल मिलाकर यही कहना होगा कि आमतौर ओर थाइरोइड की बीमारी जान तो नहीं लेता पर हां ये परेशान बहुत ज्यादा कर देता है साथ हमारी लुक को भी भद्दा कर देता। तो अब थाइरोइड की समस्या से भागने या इसे झेलने की जरूरत नहीं बस आप हमारे बताए गए इस इलाज को अपनाएं और जल्द से जल्द थाइराइड नाम की बला से राहत पाएं।
महिलाओं के साथ-साथ पुरूषों में भी आजकल थायराइड की दिक्कत बढ़ती जा रही है। थायराइड में वजन अचानक से बढ़ जाता है या कभी अचानक से कम हो जाता है। इस रोग में काफी दिक्कत होती है।
आयुर्वेद में थायराइड को बढ़ने से रोकने के बेहद सफल प्रयोग बताएं गए हैं। जिनमे से ज्यादातर उपचार की वस्तुएं हमारे गाँव में ही मिल जाती हैं तो आइए जानते हैं All Ayurvedic के माध्यम से थाइराइड से छुटकारा पाने के लिए सबसे कारगर घरेलू उपचार। आइए जानते है सबसे पहले थाइराइड के प्रकार, लक्षण, कारण और परहेज।
कितने तरह के होते हैं थाइराइड | Thyroid
थायराइड से जुड़ी आम समस्याओं की बात करे तो इसमें थायराइड के पांच प्रकार के विकार होते हैं। इसमें हाइपोथायराइडिज्म, हाइपरथायराइडिज्म, आयोडीन की कमी के कारण होने वाले विकार जैसे गॉयटर/गलगंड, हाशिमोटो थायराइडिटिस और थायराइड कैंसर शामिल हैं।
थायराइड ग्रंथि से दो हॉर्मोन बनते हैं- टी 3 (ट्राई आयडो थायरॉक्सिन) और टी 4 (थायरॉक्सिन)। यह हार्मोन शरीर के तापमान, मेटाबोलिज्म और हार्ट रेट को नियंत्रित करते हैं. थायराइड ग्रंथि पर पीयूष/ पिट्यूटरी ग्लैंड का नियंत्रण होता है जो दिमाग में मौजूद होती है। इससे थायराइड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) निकलता है. जब शरीर में इन हार्मोन का संतुलन गड़बड़ होता है तो व्यक्ति थायराइड का शिकार हो जाता है।
हाइपोथायराइडिज्म स्थिति में थायराइड हार्मोन का स्रवा कम होता है, जिससे शरीर का मेटाबोलिज्म बिगड़ (धीमा हो) जाता है। इसके विपरीत हाइपरथायराइडिज्म तब होता है जब थायराइड हार्मोन की मात्रा शरीर में ज्यादा बनती है, जिससे मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है।
थाइराइड के लक्षण | Thyroid’s Symptoms
प्रतिरोधक क्षमता कमजोर : शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर बिना दवाइयों के छोटे-छोटे रोगों से निजात पाना मुश्किल हो जाता है। थाइराइड में प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होनी शुरू हो जाती है।
थकावट महसूस होना : आराम करने के बाद भी थकावट महसूस होना थाइराइड का लक्षण हो सकता है। इसमें शरीर की एनर्जी कम होने लगती है और काम करने में आलस आता है।
बालों का झड़ना : थाइराइड होने पर बाल झड़ने लगते हैं कई बार को भौहों के बाल भी बहुत हल्के हो जाते हैं।
कब्ज की परेशानी : इसमें खाना आसानी से पचाने में भी परेशानी होती है। जिससे पेट से संबंधित परेशानियां भी आनी शुरू हो जाती हैं, कब्ज इस रोग में होने वाली आम दिक्कतों में से एक है। लगातार कब्ज हो रही है तो थाइराइड का चेकअप जरूर करवाएं।
त्वचा का रूखापन : थाइराइड होने पर त्वचा में रूखापन आना शुरू हो जाता है। इस परेशानी में स्किन के ऊपरी हिस्से के सैल्स डैमेज होने लगते हैं।
हाथ-पैर ठंडे रहना : इस समस्या में हाथ पैर ठंड़े रहने लगते हैं। शरीर का तापमान सामान्य होने पर भी हाथ-पैरों में ठंड़क महसूस होती है।
वजन बढ़ना या घटना : किसी भी बीमारी से पहले शरीर संकेत देने शुरू कर देता है। इसमें वजन एकदम से घटना या बढ़ाना शुरू हो जाता है।
थायराइड होने के कारण | Thyroid’s Causes
स्ट्रेस में रहना : थायराइड बढ़ने का सबसे पहला कारण आपका बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेना ही है। इसके अलावा इससे याद्दाश्त कमजोर होने का खतरा भी बन रहता है। इसलिए अगर आपको थायराइड की समस्या है तो ज्यादा स्ट्रेस न लें।
स्मोकिंग करना : सिर्फ थायराइड ही नहीं, स्मोकिंग तो वैसे भी सेहत के लिए हानिकारक होती है। इसलिए आज ही अपनी इस गलत आदत को बदल लें। कहीं ऐसा न हो आपकी यह आदत थायराइड बढ़ने और बीमारियों का कारण बन जाए।
सोया का सेवन : थायराइड की समस्या में सोया बीन्स या अन्य सोया चीजों का सेवन आपको लिए हानिकारक होता है। थायराइड ग्लेंड को बढ़ाने वाली इन चीजों से आपकी कंडीशन और भी खराब हो सकती है।
डॉक्टरी सलाह पर ध्यान ना देना : इस समस्या में अपनी डाइट से लेकर नियमित दिनचर्या का खास ख्याल रखना पड़ता है। बहुत से लोग इस प्रॉब्लम को छोटा समझकर डॉक्टर की सलाह पर भी ध्यान नहीं देते। मगर आपकी यह गलती आप पर भारी पड़ सकती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर पूरी तरह अमल करें।
कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन न करना : बहुत से लोग वजन बढ़ने के डर से कार्बोहाइड्रेट्स युक्त चीजों का सेवन बंद कर देते हैं लेकिन यह थायराइड ग्लेंड के लिए सही नहीं है। थायराइड को कंट्रोल (Thyroid Control) में रखने के लिए हैल्दी लाइट लेना बहुत जरूरी है। इसलिए आपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट्स युक्त चीजों को शामिल करें।
ग्लूटेन वाले आहारों का सेवन : अगर आप ग्लूटेन वाले आहारों का सेवन ज्यादा करते हैं तो आपको हाशीमोटोज रोग हो सकता है, जोकि थायराइड से ही जुड़ा रोग है। इसलिए ग्लूटेन वाले आहार जैसे गेंहूं का आटा, पास्ता, ब्रेड्स, बिस्किट्स, सीजनिंग्स और कई तरह के मसाले, बाजरा, चिकन, नूडल्स, बर्गर, पिज्जा, सोया सॉस आदि से दूर रहें।
शुगर कंट्रोल न करना : शरीर में शुगर की मात्रा को कंट्रोल में न रखने से इंसुलिन बिगड़ जाता है, जोकि थायराइड की समस्या को बढ़ा देता है। इसलिए अपनी शुगर को कंट्रोल में रखें।
ज्यादा डाइट और सप्लीमेंट लेना : कैल्शियम आयरन प्रोटीन और सोया सप्लीमेंट ज्यादा मात्रा में लेने से भी बॉडी में थायराइड हार्मोन का बैलेंस बिगड़ सकता है। इसलिए अपनी डाइट को थायराइड के हिसाब से मेंटेन करें।
ज्यादा नमक और सी फूड खाना : ज्यादा नमक और सी फूड लेने से बॉडी में आयोडीन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे इससे हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है। इसलिए नमक और सी फूड का कम से कम सेवन करें।
फालतू दवाएं लेना : कुछ दवाएं ऐसी होती है जो थायराइड ग्लेंड को नुकसान पहुंचाती है। इसलिए बेहतर होगा कि कोई भी फालतू दवाई लेने से पहले आप अपने डॉक्टर से सलाह लें।
थायराइड की सबसे कारगर औषधि निर्गुण्डी | Thyroid’s Home Remedy
निर्गुण्डी के पत्तों का रस 14 से 28 मिलीलीटर दिन में 3 बार सेवन करें या निर्गुण्डी के 21 पत्ते लेकर उसका रस निकाल कर उस रस को 3 बराबर भागो में बांट कर दिन में 3 बार ले यह प्रयोग 21 दिन करने से थाइराइड से निजात मिलती है। निर्गुण्डी की जड़ों को पीसकर इसका रस नाक में डालना चाहिए इससे भी फायदा मिलता है। यह थाइराइड से बने गले मे घेंघा या गोइटर बनने पर भी काम करता है।
लाल प्याज होता है थाइराइड में गुणकारी | Onion in Thyroid
रात को सोने से पहले मध्यम आकार के लाल प्याज को लेकर दो हिस्सों में काट लें। इन कटे हुए हिस्सों को गर्दन में थाइराइड ग्लैंड के आसपास रगड़ें। इसे रात भर ऐसे ही रहने दें। रोजाना लगातार इसका इस्तेमाल करने से आराम मिलेगा। प्याज खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत लाभकारी है। इसमें एंटी बैक्टिरियल,एंटी फंगल के अलावा और भी बहुत से जरूरी तत्व होते हैं।
थाइराइड में क्या खाएं और क्या नही खाना फायदेमंद है
1. हाइपोथाइराइड | Hypothyroid : इसमें थायराइड ग्लैंड सक्रिय नहीं होता, जिससे शरीर में जरूरत के मुताबिक T3, T4 हार्मोन नहीं पहुंच पाता। इसकी वजह से शरीर का वजन अचानक बढ़ जाता है। सुस्ती महसूस होने लगती है। शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। अनियमित पीरियड, कब्ज की शिकायत, चेहरे और आंखों पर सूजन आ जाता है। यह बीमारी 30 से 60 साल की महिलाओं में अधिक होती है।
क्या खाएं? : आयोडिन नमक, आयोडिन से भरपूर चीजें, सी फूड, फिश, चिकेन, अंडा, टोंड दूध और उससे बनी चीजें जैसे दही, पनीर, टमाटर, मशरुम, केला, संतरे आदि, फिजिशियन की सलाह पर विटामिन, मिनिरल्स, आयरन सप्लीमेंट्स।
क्या नहीं खाएं? : सोयाबीन और सोया प्रोडक्ट रेड मीट, पैकेज्ड फूड, ज्यादा क्रीम वाले प्रोडक्ट जैसे केक, पेस्ट्री, स्वीट पोटैटो, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, मूंगफली, बाजरा आदि, फूलगोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, शलगम आदि।
2. हाइपरथाइराइड | Hyperthyroid : इसमें थायराइड ग्लैंड बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाता है। T3, T4 हार्मोन जरुरत से अधिक मात्रा में निकलकर ब्लड में घुलने लगता है। इस हालत में शरीर का वजह एकाएक कम हो जाता है। मांशपेशियां कमजोर हो जाती है। भूख ज्यादा लगती है, ठीक से नींद नहीं आती, स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। पीडियड्स में अनियमितता, अधिक ब्लीडिंग की समस्या, गर्भपात का भी खतरा बना रहता है।
बवासीर बेहद तकलीफदेह होती है। यह रोग प्राय गलत खान पान से और पेट में कब्ज रहने की समस्या से शुरू होता है, जितना पुराना यह रोग होता जाता है वैसे वैसे यह रोग फिशर, भगंदर आदि में बदलता जाता है. बवासीर मलाशय के आसपास की नसों की सूजन के कारण विकसित होता है।देर तक कुर्सी पर बैठना और बिना किसी शेड्यूल के कुछ भी खा लेना इसका प्रमुख कारण है।बवासीर दो प्रकार की होती है, खूनी बवासीर और बादी वाली बवासीर, खूनी बवासीर में मस्से खूनी सुर्ख होते है और उनसे खून गिरता है, जबकि बादी वाली बवासीर में मस्से काले रंग के होते है और मस्सों में खाज पीडा और सूजन होती है।
हम आपको यहाँ पर कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में बताते हैं जिससे बवासीर और इससे होने वाले दर्द में राहत मिल सकती है।ऐसे में गेंदे के फूल और काली मिर्च का यह प्रयोग बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
बवासीर में गेंदे के फूल और काली मिर्च का सफल प्रयोग :
बवासीर में गेंदे के हरे पत्तों को काली मिर्च के साथ पीसकर चार दिन तक नित्य एक बार सेवन करें (गेंदे के फूल के नीचे डाली पर हरे पत्ते मिलेंगे) 10 ग्राम पत्ते और 7 काली मिर्च को मिला कर पीसीए।
गेंदे के फूल 10 ग्राम (पीले वाले), काली मिर्च के 7 दाने, दोनों को ठंडाई की तरह पीसकर आधा गिलास पानी में मिलाकर छानकर पीने से रक्तस्त्रावी बवासीर में लाभ होता है।
रक्तस्त्रावी बवासीर में फूलों को पीस लीजिये, इस फूलों की लुगदी को देसी घी में भून लीजिये, इसमें मिश्री व् सौंफ भी मिला लीजिये, इसको दिन में एक बार भोजने के दो घंटे पहले या बाद में सेवन करें। सेवन के एक घंटे तक कुछ भी खाएं ना पिए।
बवासीर में विशेष :
बवासीर को दूर करने के लिए सर्व प्रथर्म आप कब्ज को दूर करें, कब्ज को दूर करने के लिए आप रात को सोते समय एक गिलास गर्म दूध के साथ एक चम्मच छोटी हरड का चूर्ण या एक चम्मच इसबगोल का छिलका खा कर सोयें। और सुबह शौच जाने के बाद कम से कम 15 मिनट कपाल भाति ज़रूर करें. अगर समस्या भयंकर हो तो कपाल भाति आधा घंटा तक करें. आपको आराम ज़रूर आएगा। और भोजन में फाइबर का भरपूर प्रयोग करें. अनाज भी मोटा पिसवाएं और चोकर का भरपूर प्रयोग करें।
एक पके केले को बीच से चीरकर उसके दो टुकडे कर लें फिर उन टुकड़ों के बीच गेहूं के दाने के बराबर कपूर डालकर इसके बाद उस केले को खुले आसमान के नीचे शाम को रख दें,सुबह को उस केले को शौच करने के बाद खालें। एक हफ़्ते तक लगातार इसको करने के बाद भयंकर से भयंकर बवासीर भी समाप्त हो जाती है।
नीम का तेल मस्सों पर लगाने से और 4- 5 बूँद रोज़ पीने से बवासीर में बहुत लाभ होता है।
एक चाय का चम्मच धुले हुए काले तिल ताजा मक्खन के साथ लेने से भी बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।
नारियल की जटा को माचिस से जला दीजिए फिर उस भस्म से बिना जले हुए रेशो को अलग निकालकर साफ भस्म को किसी शीशी में रख लें। फिर इसमें से 3 ग्राम भस्म एक गिलास छाछ या एक कटोरी दही के साथ सुबह खाली पेट सेवन करें और उसके लगभग 2 घंटे तक कुछ भी ना खाएं । फिर इसे दोपहर में खाना खाने के दो घंटे बाद और रात को बहुत हल्का खाने के 2 घंटे बाद अर्थात केवल एक ही दिन, दिन में तीन बार लेना है और लेने के बाद फिर 2 घंटे तक कुछ भी ना लें । इस बात का ख्याल रखे की दही या छाछ ताजी हो, दही कई दिन पुरानी और खट्टी न हो। इस प्रयोग से कैसी और पुरानी से पुरानी बवासीर की बीमारी भी अति शीघ्र ठीक हो जाती है।
शाकाहारी मगरमच्छ – जीवन के कई ऐसे सत्य हैं जिनके बारे में जानकर आपको हैरानी होगी।
भारत में कई ऐसी जगहें हैं जहां की मान्यताओं के बारे में स्थानीय लोगों के अलावा और किसी को जानकारी नहीं है।
आज हम आपको एक ऐसी ही मान्यता के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आपको उस पर विश्वास ही नहीं होगा। अमूमन जानवर मांसाहारी ही होते हैं और मगरमच्छ जैसा विशाल और खतरनाक जानवर भी मांस को ही अपना आहार बनाता है लेकिन धरती पर एक मगरमच्छ ऐसा भी है जो शाकाहारी है। दुनिया का ये अनोखा मगरमच्छ सिर्फ प्रसाद खाता है।
भारत के इस शाकाहारी मगरमच्छ के बारे में हर कोई जानना चाहता है। आपको बता दें कि केरल के प्रसिद्ध मंदिर पद्मनाभास्वामी मंदिर के बीच एक तालाब स्थित है और ये शाकाहारी मगरमच्छ इसी तालाब में रहता है। पद्मनाभास्वामी मंदिर भगवान विष्णु का है और ये मंदिर की झील के बीच बना है। इस मगरमच्छ का नाम बबिआ है और ये मंदिर की रखवाली करता है।
बबिआ नाम के मगरमच्छ से प्रसिद्ध इस मंदिर के बारे में यह भी मान्यता है कि जब इस झील में एक मगरमच्छ की मृत्यु होती है तो बड़े ही रहस्यमयी ढंग से दूसरा मगरमच्छ यहां प्रकट हो जाता है।
मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के बाद उसे बबिआ को खिलाया जाता है किंतु प्रसाद खिलाने की अनुमति सिर्फ मंदिर के पुजारियों को ही है। बबिआ मगरमच्छ शाकाहारी है और वह झील के अन्य जीवों को नुकसान भी नहीं पहुंचाता है।
क्या है इस मगरमच्छ का रहस्य
ये मगरमच्छ अनंतपुर मंदिर की झील में करीब 60 सालों से रह रहा है। स्थानीय लोगों की मानें तो इस मगरमच्छ की सन् 1945 में अंग्रेजों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी लेकिन दूसरे ही दिन फिर से ये मगरमच्छ फिर से वहां प्रकट हो गया। अब ये वही मगरमच्छ या फिर कोई और, ये तो पता नहीं लेकिन ये बात तो सच है कि ये शाकाहरी मगरमच्छ है जोकि अपने आप में काफी अनोखा है।
भारत के सबसे धनी मंदिरों में शुमार पद्मनाभस्वामी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित केरल का सुप्रसिद्ध मंदिर हैं। कहा जाता है की यहां भगवान विष्णु स्वयंभू रूप में विराजमान हैं। हजारों भक्त दूर-दूर से शयन मुद्रा में विराजमान भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति के दर्शनों के लिये यहां आते हैं। किवदंती हैं कि इस मंदिर में इंद्र व चंद्र ने भी भगवान पद्मनाभास्वामी की पूजा अर्चना की थी। इस मंदिर में 12008 शालिग्राम स्थापित किये गये हैं। घंटी, शंखनाद व मंत्रों की पवित्र ध्वनि से गुंजायमान यह स्थल भक्तों को मोह लेता हैं। यह मंदिर वैष्णवों के 108वें तीर्थ स्थल के रूप में भी जाना जाता हैं।
कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह मंदिर 5000 साल पुराना है।
ताड पत्तों पर लिखे गये एक प्राचीन ग्रंथ अनंत्सयाना महात्मय में वर्णित है कि इस मंदिर की स्थापना कलियुग के 950वें दिन तुलु ब्राह्मण दिवाकर मुनी ने की थी। मंदिर का पुनर्निमाण कई बार हुआ है। अंतिम बार 1733 ई. में इस मंदिर का पुनर्निर्माण त्रावनकोर के महाराजा मार्तड वर्मा ने करवाया था। मंदिर में बना स्वर्णस्तंभ और गलियारे में बने स्तंभ जिन पर सुंदर नक्काशी की गई है, मंदिर की भव्यता में चार चांद लगाते हैं।
वैसे तो अमीर बनने के लिए कड़ी मेहनत और टेलेंट की जरूरत होती है। लेकिन कई बार किस्मत भी आपको एक झटके में अमीर बना देती है। अब यमन के गरीब मछुआरों के साथ घटी इस घटना को ही ले लीजिए। इन्हें समुद्र में एक ऐसा ‘तैरता सोना’ मिला जिसने रातोंरात उनकी किस्मत चमका दी। युद्धग्रस्त देश यमन के अधिकतर लोग पेट पालने के लिए समुद्र से मछली पकड़ते हैं। यमनी मछुआरे फारेस अब्दुलहकीम और उसके दोस्त भी एक दिन मछली पकड़ने समुद्र गए थे, हालांकि उन्हें इस बात का कोई अदाज़ा नहीं था कि यहां उनके हाथ काला सोना लग जाएगा।
मछवारा अब्दुलहकीम बताता है कि अदन के दक्षिणी शहर के तट से लगभग 26 किलोमीटर दूर उनकी निगाह एक मरी हुई व्हेल मछली पर गई। वह मृत हालत में पानी पर तैर रही थी। मछवारों ने उनसे किनारे किया और उसका पेट चीरने लगे। अंदर उन्हें तैरता हुआ सोना यानि एम्बरग्रीस (व्हेल की उल्टी) मिला। बता दें कि एम्बरग्रीस व्हेल के पाचन तंत्र में बनने वाला एक दुर्लभ पदार्थ होता है। इसका उपयोग इत्र बनाने में होता है।
जब मछुआरों ने व्हेल को तट पर लाकर उसका पेट काटा तो उन्हें 127 किलो की दुर्लभ ‘वॉमिट गोल्ड’ (एम्बरग्रीस) मिली। इसकी कीमत 11 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक में रहने वाले बहुत से लोगों के लिए ये रकम हद से ज्यादा है। ये रकम हासिल करने के बाद इसका कुछ हिस्सा समुदाय में जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए दान कर दिया गया, जबकि बाकी मछुआरों के समूह में बांट दिया गया।
अब्दुलहकीम बताते हैं कि मेरा काम मछली पकड़ना ही है। मैं इस काम के लिए रोज समुद्र जाता था। वह दिन भी हमारे लिए सामान्य था, लेकिन फिर हमे किस्मत से मरी व्हेल मिली। वह पूरी तरह से एम्बरग्रीस भरी हुई थी। इस एक पल ने हमारी किस्मत ही पलट दी। इसे बेच जो पैसा मिला उससे कुछ मछुआरों ने नई नावें खरीदीं तो कुछ ने अपने नए घर बना लिए। मैंने भी अपना नया घर बनाया है। इस घटना के बाद समूह में शामिल मछुआरों ने भगवान को इस तरह उनका भाग्य बदलने के लिए शुक्रिया भी कहा।
व्हेल की उल्टी का इस्तेमाल परफ्यूम इंडस्ट्री में बहुत होता है। इसके अंदर बिना गंध का ऐल्कोहॉल पाया जाता है जिसका इस्तेमाल परफ्यूम की गंध को लंबे वक्त तक बरकरार रखने में होता है। इस कीमती व्हेल की उल्टी यानि एम्बरग्रीस को वैज्ञानिक तैरता हुआ सुना भी कहते हैं। इस घटना के पहले नारिस नाम के एक मछुआरे 100 किलो का एम्बरग्रीस का एक टुकड़ा मिला था। इसकी कीमत 24 लाख पाउंड (लगभग 25 करोड़ रुपये) थी। ये अब तक पाए गए एम्बरग्रीस में सबसे बड़ा टुकड़ा था।
वैज्ञानिकों के अनुसार व्हेल मछली की उल्टी से निर्मित ये विशेष पत्थर एक प्रकार का अपशिष्ट होता है। व्हेल कई बार इसे पचा नहीं पाती है और उल्टी कर इसे अपने मुंह से बाहर कर देती है। वैज्ञानिक भाषा में इसे एम्बरग्रीस कहा जाता है। ये दिखने में काले रंग का या फिर भूरे रंग का होता है। यह मोम जैसा ज्वलनशील पदार्थ होता है। सामान्यतः इसका वजन 15 ग्राम से 50 किलोग्राम तक होता है।
बरेली पुलिस ने एक बेहद ही अनोखे लुटेरे गैंग का पर्दाफाश किया है. लुटेरे लूट की वारदातों में अपनी-अपनी पत्नी का इस्तेमाल करते थे. लुटेरे बैंक से निकलने वाले बेहद ही सीधे-साधे पेंशनर और सरकारी लोगों को अपना निशाना बनाते थे. बैंक के बाहर अलग-अलग ऑटो रिक्शा में अपनी-अपनी पत्नी को मेकअप और अच्छा से पहनाकर सवारी बनाकर बैठा लेते थे. बैंक से निकलने वाले सवारी का इंतजार कर रहे सीधे-साधे लोग इनके बहकावे में आ जाते थे. इसके बाद दूर ले जाकर उनके पास जमा नकदी लूट लेते थे. फिलहाल पुलिस ने एसओजी की मदद ऐसे ही पति-पत्नियों के दो जोड़ों सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने लुटेरों के पास से करीब एक लाख रुपये की लूटी हुई नकदी भी बरामद की है. लुटेरों ने अब तक लूट की आठ घटनाओं को स्वीकार किया है. इन लुटेरों से पूछताछ के बाद घटनाओं का भी खुलासा किया जाएगा
आदिल और शबा पति-पत्नी हैं. असगर और नूरी भी पति-पत्नी है. पांचवां लुटेरा उस्मान अली इस गिरोह का सलाहकार है. उसी के इशारे पर दोनों पति-पत्नी नए-नए अंदाज में लूट की वारदातों को अंजाम देते थे. गिरोह की सरगना नूरी है जो अपनी दोस्त शबा के साथ मिलकर इस पूरे लुटेरे गैंग को चलाती थी.
दरअसल, बरेली जिले में पिछले करीब एक साल से बैंक से निकलने वाले लोगों के साथ लूट की घटनाओं में काफी इजाफा हुआ था. खुलासे के लिए पुलिस अधिकारियों ने पुलिस के साथ-साथ एसओजी की टीम को भी लगाया. उस्मान अली महीने के पहले और दूसरे सप्ताह में बैंकों में जाकर पेंशन और तनख्वाह निकालने वाले ऐसे लोगों की रेकी कर लेता था. ऑटो से आते थे. आदिल और असगर अपनी अपनी पत्नियों के साथ दो अलग-अलग ऑटो से पहुंचते थे. अपने-अपने ऑटो में अपनी–अपनी पत्नियों को अच्छा सा मेकअप और कपड़े पहना कर सवारी के रूप में बैठा लेते थे.
बैंक के अंदर से जब कोई व्यक्ति अपनी पेंशन या फिर तनख्वाह निकालकर सवारी के इंतजार में बाहर आता तो उस्मान अली के इशारे पर ये लोग अपने-अपने ऑटो में बैठा लेते थे. पहले से ही सवारी बनकर खूबसूरत अंदाज में बैठी हुई उनकी पत्नी ऐसे लोगों को ऑटो रिक्शा में बैठने में मदद करती थीं. भोले-भाले लोग लुटेरी महिलाओं को सवारी समझकर आसानी से फंसकर बैठ जाते थे. इसके बाद यह लोग बैंक से दूर जाकर ऑटो खराब होने का बहाना बनाकर सवारी बनकर बैठे भोले-भाले लोगों को लूट लेते थे. पुलिस की मानें तो इन लोगों ने अब तक ऐसे ही आठ लोगों के साथ की गई लूट की वारदातों को कबूल किया है.
थाना कोतवाली पुलिस ने एक बहुत ही अच्छा खुलासा करते हुए एक ऐसे गैग को पकड़ा है जिसमें पांच सदस्य थे. पांच लोगों के गैंग ने पिछले साल से लूटपाट की कई घटनाओं को अंजाम दिया. गैंग के मेंबर पहले बैंक जाते थे. उन लोगों को देखते थे जो कैश निकालने जाते थे. जैसे ही कैश लेकर कोई निकलाता था, तो गैंग के अन्य सदस्य बैंक के बाहर ऑटो लेकर खड़े रहते थे. लोगों को लेकर जाते थे और रास्ते में लूट लेते थे. गैंग में शामिल महिलाएं रेकी करती थी. ई-रिक्शॉ में बैठकर लोगों का ध्यान भटकाने का काम करती थीं. इनके अपने कोड वर्ड थे. 93 हजार से ज्यादा रुपये गैंग के पास से बरामद हुए हैं. आरोपियों ने 8 लूटपाट की घटनाएं कबूल की हैं. पूछताछ जारी है.