Author: me.sumitji@gmail.com

  • सफर से कितने समय पहले कर सकतेˈ हैं ट्रेन की टिकट बुक? नियम जान लें वरना होगी बड़ी परेशानीˌ

    सफर से कितने समय पहले कर सकतेˈ हैं ट्रेन की टिकट बुक? नियम जान लें वरना होगी बड़ी परेशानीˌ

    सफर से कितने समय पहले कर सकतेˈ हैं ट्रेन की टिकट बुक? नियम जान लें वरना होगी बड़ी परेशानीˌ

    Train Ticket Rules: रेलवे को लेकर कई नियम बदलते रहते हैं। बहुत से लोग महीनों पहले टिकट बुक करवा लेते हैं जिससे उन्हें घूमने में परेशानी ना हो। ट्रेनों में यात्री अब अपने घर बैठे ही आसानी से ट्रेन टिकट खरीद सकते हैं।

    ग्राहकों के पास आरक्षित और दोनों तरह से बुकिंग करने का विकल्प है। त्योहार के दिनों में सत्यापित टिकट प्राप्त करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। ट्रेन के प्रस्थान से कई महीने पहले भी टिकट खरीदे जा सकते हैं। इंटरनेट टिकट खरीद की शुरुआत के बाद से टिकट प्राप्त करना आसान हो गया है।

    रेलवे स्टेशनों पर जाने या एजेंटों के माध्यम से टिकट खरीदने की व्यवस्था करने के दिन अब चले गए हैं। अब आप घर बैठे ऑनलाइन टिकट खरीद सकते हैं। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि आपको अपनी यात्रा से पहले कितने दिनों के लिए अग्रिम रेल टिकट खरीदना होगा? चलिए आपको विस्तार में बताते हैं।

    ट्रेन का टिकट कितने दिन पहले करना चाहिए? (Train Ticket Rules)

    सबसे पहले ध्यान रखें कि ट्रेन की हर कैटेगरी में अलग-अलग सुविधाएं, किराया और टिकट संबंधी आवश्यकताएं होती हैं। ये गाइडलाइंस हर रेल यात्री को समझनी चाहिए। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह जानना है कि ट्रेन के प्रस्थान से कितने दिन पहले आप अपना टिकट खरीद सकते हैं (एडवांस ट्रेन टिकट बुकिंग)। आपको यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि ट्रेन के प्रस्थान से 120 दिन पहले तक टिकट खरीदे जा सकते हैं।

    भारतीय रेलवे 120 दिन पहले या चार महीने पहले टिकट आरक्षित करने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे ग्राहक विश्वास के साथ टिकट बुक कर सकते हैं। जिसे आसानी से एक कन्फर्म सीट में सुरक्षित कर सकते हैं। प्रस्थान तिथि से एक दिन पहले तत्काल ट्रेन के टिकट खरीदे जा सकते हैं। दूसरे शब्दों में, रेलवे ने आपात्कालीन स्थिति में शीघ्रता से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर भी विचार किया है।

    हर दिन सुबह 10 बजे, थर्ड एसी और उससे ऊपर की कक्षाओं के लिए आरक्षण खुला रहता है। स्लीपर तत्काल के लिए टिकट की बिक्री सुबह 11 बजे शुरू होगी। यूटीएस ऐप के माध्यम से, यात्री यात्रा के दिन केवल अनारक्षित ट्रेन टिकट खरीद सकते हैं।

    जनरल टिकटों के लिए अलग-अलग नियम हैं. सामान्य प्रवेश टिकट खरीदने के लिए दो दिशानिर्देश हैं। अगर आप ट्रेन के जनरल डिब्बे में 199 किलोमीटर की यात्रा करना चाहते हैं तो आपको उसी दिन अपना टिकट खरीदना होगा।

    ऐसा इसलिए है क्योंकि 199 तक की यात्रा के लिए खरीदा गया मानक टिकट केवल तीन घंटों के लिए ही अच्छा है। नियमित टिकट खरीदने के तीन घंटे के भीतर ट्रेन में चढ़ना होगा। हालांकि, 200 किलोमीटर से अधिक लंबी यात्राओं के लिए सार्वजनिक टिकट तीन दिन पहले तक खरीदे जा सकते हैं।

  • सेंधा नमक के साथ पशुओं को खिलाएंˈ 250 ग्राम ये चीज, नहीं पड़ेंगे बीमार.. दोगुना हो जाएगा दूधˌ

    सेंधा नमक के साथ पशुओं को खिलाएंˈ 250 ग्राम ये चीज, नहीं पड़ेंगे बीमार.. दोगुना हो जाएगा दूधˌ

    सेंधा नमक के साथ पशुओं को खिलाएंˈ 250 ग्राम ये चीज, नहीं पड़ेंगे बीमार.. दोगुना हो जाएगा दूधˌ

    Animal Feed: दिसंबर की दस्तक के साथ ही कड़ाके की सर्दी शुरू हो गई है. इससे इंसान के साथ-साथ फसलों के ऊपर भी असर पड़ा है. लेकिन सबसे ज्यादा काड़के की ठंड से मवेशी प्रभावित हुए हैं.

    इससे दुधारू मवेशियों का दूध उत्पादन कम हो गया है. उनकी तबीयत भी खराब होने लगी है. जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई है. लेकिन किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. हम अच्छी तरह से देखरेख और आहार में बदलाव कर मवेशियों का दूध उत्पादन पढ़ा सकते हैं. बस इसके लिए किसानों को नीचे बताए गए देसी तरीकों को अपनाना होगा.

    पशु चिकित्सकों के मुताबिक, अधिक ठंड पड़ने पर दुधारू मवेशियों के हेल्थ पर सबसे अधिक असर पड़ता है. कई बार गाय-भैंस दूध कम देने लगती हैं, क्योंकि सर्दियों में पशुओं की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, जिससे दूध उत्पादन घटता है. इसे सुधारने के लिए रोजाना चारे में 50 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर खिलाना चाहिए. सेंधा नमक पाचन सही करता है और शरीर में जरूरी मिनरल्स की कमी पूरी करता है. चिकित्सकों का कहना है कि सर्दी के मौसम में जो पशु सामान्यरूप से 3 से 4 लीटर दूध देते हैं, वे इस नुस्खे से 6 से 7 लीटर तक दूध देने लगते हैं. यानी दूध देने की क्षमता सीधे डबल हो जाएगी.

    चारे में 250 ग्राम गुड़ देना भी है जरूरी

    एक्सपर्ट के मुताबिक, सेंधा नमक के साथ रोजाना चारे में 250 ग्राम गुड़ देना भी जरूरी है. गुड़ शरीर में गर्माहट बनाए रखता है और ऊर्जा बढ़ाता है, जिससे पशु सर्दियों में भी स्वस्थ रहते हैं. इसके अलावा रात में पशुओं के पास अलाव जलाना या उन्हें टाट के बोरे से ढकना चाहिए. इससे ठंड नहीं लगती, पाचन सही रहता है और दूध उत्पादन पर अच्छा असर पड़ता है. साथ ही पशुओं को ठंड भी नहीं लगती है. वे स्वस्थ्य रहते हैं.

    गौशाला में इस तरह की करें व्यवस्था

    पशु चिकित्सकों की माने तो जहां पशु रहते हैं, वहां गंदगी, नमी या जमा पानी बिल्कुल न रहने दें, क्योंकि इससे सर्दियों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. इंफेक्शन होने पर पशु बीमार पड़ते हैं और दूध कम हो जाता है. चारा देते समय भी ध्यान रखें कि उसमें कोई कीड़ा या खराब चीज न हो, क्योंकि ठंड में खराब चारा जल्दी बीमारी फैलाता है. अगर पशुपालक इन आसान बातों और घरेलू नुस्खों को रोजमर्रा की देखभाल मेंशामिल कर लें, तो ठंड में भी पशु ज्यादा दूध देंगे और स्वस्थ रहेंगे.

  • फरिश्ता बनी गौमाता। 13 हफ्ते की बच्चीˈ की बचाई जान फिर से धड़कने लगा दिलˌ

    फरिश्ता बनी गौमाता। 13 हफ्ते की बच्चीˈ की बचाई जान फिर से धड़कने लगा दिलˌ

    फरिश्ता बनी गौमाता। 13 हफ्ते की बच्चीˈ की बचाई जान फिर से धड़कने लगा दिलˌ

    गाय को भारत में माता का दर्जा प्राप्त है। लोग इसकी पूजा और सेवा करते हैं। इसी गौमाता ने 13 हफ्ते की बच्ची की फरिश्ता बनकर जान बचा ली। दरअसल मामला साउथ ईस्ट लंदन के सिडकप शहर का है। यहां पैदा हुई एक बच्ची के दिल में प्रॉबलम आ गई। उसकी दिल से शरीर के दूसरे अंगों में खून ले जाने वाली नली में लीकेज होने लगा।

    बच्ची के दिल में थी दिक्कत

    इस बीमार के चलते बच्ची को सांस लेने में भी तकलीफ होने लगी थी। यहां तक कि उसने दूध पीना भी बंद कर दिया था। ऐसे में मां बाप ने बच्ची को डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टरों ने जांच में पता लगाया कि बच्ची को मिक्स्ड मिट्रल वाल्व डिजीज है। यदि उसका जल्द इलाज न हुआ तो जान भी जा सकती है।

    बताते चलें कि मिक्स्ड मिट्रल वाल्व एक ऐसी बीमारी है जिसमें मिट्रल वाल्व खराब हो जाता है। मिट्रल वाल्व एक फ्लैप होता है। इससे ही ऑक्सीजन वाला खून फेफड़ों से होते हुए पूरे शरीर में जाता है। इसमें दिक्कत आए तो शरीर के बाकी अंग भी खराब होने लगते हैं। इस चीज को फिक्स करने के लिए अधिकतर ओपन हार्ट सर्जरी की जाती है। लेकिन 13 हफ्ते की बच्ची पर ये करना डॉक्टर्स के लिए बड़ा मुश्किल था।

    डॉक्टर ने लगा दिया गाय के टिशू से बना वॉल

    ऐसे में गौमाता फरिश्ता बनकर सामने आई। सर्जरी करने वाले पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर आरोन बेल ने ओपन हार्ट सर्जरी करने के लिए गाय के टिशू का उपयोग किया। बताते चलें कि गाय के दिल के वॉल्व से मैलोडी वॉल बनाने की तकनीक बीते दो वर्षों से मेडिकल फील्ड में इस्तेमाल की जा रही है। हालांकि अभी तक इतनी छोटी बच्ची पर कोई प्रयोग नहीं किया गया था।

    बच्ची की नाजुक हालत देख डॉक्टर्स ने ये ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। ओपन हार्ट सर्जरी कर नया वॉल्व बच्ची के दिल में लगा दिया। गाय के टिशू का भी चमत्कार हो गया। न सिर्फ ऑपरेशन सफल रहा बल्कि बच्ची भी ठीक होकर अस्पताल से 8 दिन में ही घर चली गई।

    6 घंटे चला ऑपरेशन

    बच्ची का यह ऑपरेशन करीब 6 घंटे तक चला था। ऑपरेशन में डॉक्टर ने पहले बच्ची के दिल से खराब वॉल्व निकाल दिया। फिर गाय के टिशू से बना नया मैलोडी वॉल्व लगा दिया। इसके लिए उन्होंने एक पतली गुब्बारे जैसी चीज का उपयोग किया। नया वाल अपनी जगह सेट हुआ तो गुब्बारे को हटा दिया गया। इसके बाद बच्ची के शरीर के सभी अंगों में खून का संचार होने लगा। वहीं ऑक्सीजन की सप्लाई भी स्टार्ट हो गई।

    बताते चलें कि भारत में भी हर साल करीब दो लाख बच्चे दिल की बीमारी के साथ पैदा होते हैं। इनमें 25 से 30 हजार बच्चों की हार्ट सर्जरी करनी पड़ती है।

  • जल्द बाजार में बिकने लगेगा ये जहर,ˈ मौत खरीदेंगे लोग, खाते ही होगा ऐसा हाल, खाते ही होगा ऐसा हालˌ

    जल्द बाजार में बिकने लगेगा ये जहर,ˈ मौत खरीदेंगे लोग, खाते ही होगा ऐसा हाल, खाते ही होगा ऐसा हालˌ

    जल्द बाजार में बिकने लगेगा ये जहर,ˈ मौत खरीदेंगे लोग, खाते ही होगा ऐसा हाल, खाते ही होगा ऐसा हालˌ

    पहले बाजार में अंगूर खरीदना रिस्की काम होता था. अंगूर खट्टे निकल जाते थे. लेकिन अब तो जिस अंगूर को खाए, वो मीठा ही होगा. आखिर ऐसा कैसे हो गया कि अब अंगूर खट्टे नहीं होते. इसकी एक खास वजह है.

    आज अंगूर दिखने में जितना मीठा होता है, उतना ही अंदर से खतरनाक होता है. इसकी मिठास केमिकल से आती है. बाजार में चमचमाते काले-हरे अंगूर देखकर मुंह में पानी आ जाता है. लेकिन ये मिठास प्राकृतिक नहीं, केमिकल की देन है. किसान फसल को जल्दी बड़ा करने, चमकदार बनाने और कीटों से बचाने के लिए पेस्टिसाइड, फंगीसाइड और ग्रोथ हार्मोन का छिड़काव करते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) की रिपोर्ट कहती है कि क्लोरपाइरीफॉस, कार्बेंडाजिम, प्रोफेनोफॉस जैसे खतरनाक केमिकल अंगूर में 50 गुना तक ज्यादा पाए जाते हैं. इसके अलावा लेड और आर्सेनिक की मात्रा WHO लिमिट से 200% ऊपर तक पाई जाती है.

    इन केमिकलों को अंगूर की पतली छिलके सोख लेती है. ऊपर से वैक्स की चमकदार कोटिंग की जाती है जो दिखने में तो अच्छी लगती है, लेकिन अंदर जहर छिपाए रखती है. अगर इसे अच्छे से ना धोया जाए तो खाना बेहद नुकसानदायक होगा. अगर इन अंगूरों को लाकर सादे पानी से धोया तो इससे कोई फायदा नहीं हैं. ये केमिकल गहराई तक घुस चुके होते हैं. FSSAI की लैब टेस्टिंग में पता चला कि 80% बाजारू अंगूर पेस्टिसाइड लिमिट से ज्यादा दूषित होते हैं. बिना धोए 10-15 अंगूर खाने से शरीर में 0.5 mg क्लोरपाइरीफॉस जाता है जो एक बच्चे के लिए घातक हो सकता है. इससे पांच तरह के प्रभाव हो सकते हैं. 5 मिनट में के अंदर ही मुंह में जलन होने लगेगी और जीभ में सूजन आ जाएगा. इसके अलावा उल्टी, चक्कर, पेट दर्द तक होने लगता है. साथ ही सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. लंबे समय तक इसे खाने से लीवर-किडनी फेल होने की संभावना भी हो जाती है.

    बच्चों के लिए सबसे खतरनाक
    बच्चे और बुजुर्ग इनका सबसे आसान शिकार होते हैं. बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. 5-6 अंगूर भी उनके लिए जहर के समान है. बुजुर्गों की किडनी पहले से कमजोर होती है. एक बार ये वाला जहर गया तो वापसी मुश्किल है. FSSAI ने इसे लेकर चेतावनी भी दी है लेकिन बाजार में फिर भी धड़ल्ले से इसकी बिक्री होती है. FSSAI ने अलर्ट जारी किया है कि सर्दी के अंगूर खरीदने के बाद उसे सात बार धोएं.

  • पैरों के अंगूठे में काला धागा बांधनेˈ से जड़ से खत्म हो जाती है यह बीमारीˌ

    पैरों के अंगूठे में काला धागा बांधनेˈ से जड़ से खत्म हो जाती है यह बीमारीˌ

    पैरों के अंगूठे में काला धागा बांधनेˈ से जड़ से खत्म हो जाती है यह बीमारीˌ

    आयुर्वेद में कई प्रकार के ऐसे नुस्खों का विवरण किया गया है जिन को अपनाए तो हम अपने जीवन में कई बीमारियों को ठीक कर सकते हैं और यह उपाय रामबाण का इलाज करती है आज हम आपको एक ऐसे उपाय के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें आपको केवल अपने अंगूठे पर एक काला धागा बांधना है और उससे आपके कई प्रकार के रोग दूर हो जाएंगे आइए जानते हैं आखिर क्या फायदे हैं पैर में काला धागा बांधने के।

    इंसान के शरीर के पेट के बीच में चुनावी होती है वह मनुष्य के शरीर का केंद्र माना जाता है आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस नाम ही इससे बेहतर हजारे न से जुड़ी हुई होती हैं जो आप कभी कबार के शक्कर ऊपर की ओर या दाएं बाएं चला जाता है जिस कारण से आपकी आंखों की रोशनी कम हो जाती है एवम जी मचलने लगता है पेट में दर्द होता है भूख कम लगने लगती है और शरीर में थकावट जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं इन सभी से छुटकारा पाने के लिए आप अपने अंगूठे में सिर्फ एक काला धागा बांध लीजिए जब बांध लेंगे उसके बाद दोबारा आपको नाभि के खिसकने की समस्या नहीं आएगी।

    आप हैरान हो रहे होंगे कि सिर्फ एक काला धागा अंगूठे वाले के बाद हम एक समस्या से कैसे छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं तो हम आपकी जानकारी के लिए बताते हैं कि जो हमारे नाभि की मुख्य नस होती है वह हमारे अंगूठे में आकर मिलती है यदि हम उसको दबा कर रखते हैं तो हमारी नाभि का केंद्र कभी नहीं जी सकता है और काले धागे को अंगूठे में बांधना आयुर्वेद की किताबों में सबसे बड़ा रामबाण बताया गया है इसीलिए यदि आपकी बिना भी बार-बार की सकती है तो आप काले धागे को अपने अंगूठे में अवश्य बांधे।

    हिंदी आपकी जानकारी में कोई भी ऐसा व्यक्ति है जो अपनी नाभि की समस्या से परेशान रहता है उसको यह उपाय बताएं और आप हमसे जुड़े रहें ताकि आप तक हम और भी दिलचस्प खबरें लाते हैं रहे। 

  • शुद्ध शाकाहारी हैं ये एक्ट्रेस अंडे तकˈ को भी नहीं लगाती हैं हाथ लिस्ट में है नाम कईˌ

    शुद्ध शाकाहारी हैं ये एक्ट्रेस अंडे तकˈ को भी नहीं लगाती हैं हाथ लिस्ट में है नाम कईˌ

    शुद्ध शाकाहारी हैं ये एक्ट्रेस अंडे तकˈ को भी नहीं लगाती हैं हाथ लिस्ट में है नाम कईˌ

    Actress: बॉलीवुड की चमक-दमक भरी दुनिया में कई सितारे ऐसे हैं जो केवल अपने एक्टिंग के लिए नहीं बल्कि अपने लाइफस्टाइल के लिए भी सुर्खियों में रहते हैं. आज हम आपको उन स्टार्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो शुद्ध शाकाहारी हैं और मीट को हाथ तक नहीं लगाते। इस बीच आइए जानें कि वह कौन सी अभिनेत्री (Actress) है जो मांस तो दूर, अंडे को भी हाथ नहीं लगाती?

    आलिया भट्ट

    फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री (Actress) आलिया भट्ट आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। अपनी एक्टिंग और खूबसूरती से उन्होंने अपने फैंस के दिलों में अच्छी जगह बना ली है. आपको बता दें कि आलिया भट्ट शुद्ध शाकाहारी हैं और नॉनवेज नहीं खाती हैं.

    भूमि पेडनेकर

    अभिनेत्री (Actress) भूमि पेडनेकर एक समय में बहुत मोटी हुआ करती थीं। उनकी पुरानी तस्वीरें देखकर अपनी आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो जाएगा कि क्या ये वही शख्स हैं. लेकिन दम लगा के हइशा के बाद तेजी से अपना वजन कम करने वाली भूमि साल 2020 में लॉकडाउन के समय शाकाहारी बन गई थीं.

    सोनम कपूर आहूजा

    सोनम कपूर उन लोगों में से एक हैं जो खुलकर अपने विचार व्यक्त करती हैं. अभिनेत्री (Actress) सोनम भी शाकाहारी एक्टर्स की लिस्ट में आती हैं. उन्हें दो बार PETA पर्सन ऑफ द ईयर चुना जा चुका है.

    मलाइका अरोड़ा

    49 साल की उम्र में बॉलीवुड अभिनेत्री (Actress) मलाइका अपनी फिटनेस से कई यंग एक्टर्स को मात दे सकती हैं. मलाइका दो-तीन साल पहले वीगन बन गई थीं। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि इससे उन्हें फिट रहने में काफी मदद मिली।

    रुबिना दिलैक

    टीवी अभिनेत्री (Actress) रुबीना दिलैक नॉनवेज खाने से दूर रहती हैं। इतना ही नहीं एक्ट्रेस अपने बच्चों को घर में उगाई सब्जियां ही खिलाती हैं ताकि वो हेल्दी रहें।

    श्रद्धा कपूर

    2020 में PETA ने श्रद्धा कपूर को ‘हॉटेस्ट’ शाकाहारी बताया था। कुछ दिन पहले उन्होंने इंस्टाग्राम पर मीट न खाने की बात भी कही थी। हालांकि कमेंट में उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी, लेकिन श्रद्धा शाकाहारी हैं. अपनी यात्रा में, वह PETA की कुकबुक से प्रेरित हुईं और उन्होंने बताया कि वह एक स्मार्ट खाने वाली हैं, लेकिन खाना पूरी तरह से नहीं छोड़ सकतीं।

    जेनेलिया

    रितेश देशमुख और उनकी पत्नी अभिनेत्री (Actress) जेनेलिया कुछ साल पहले शाकाहारी बन गए थे। इस जोड़े का एक उद्यम भी है जिसका नाम है इमेजिन मीट, जो पौधे आधारित मांस बनाता है और मांसाहारी भोजन का एक अच्छा विकल्प है. रितेश ने एक पोस्ट में बताया कि मैं एक कट्टर मांसाहारी व्यक्ति रहा हूँ जो 4 साल पहले शाकाहारी बन गया।

    सच कहूँ तो कई बार ऐसा हुआ है जब मुझे मांस के स्वाद और आनंद की लालसा हुई है। लेकिन यह लालसा पौधे आधारित मांस से पूरी हुई। मैं अब पूरी तरह से शाकाहारी हूँ।

  • शौच के लिए गई थी महिला लेकिनˈ पीछे-पीछे आ गया देवर। जो देखा उसे देखकर हो गया वहीं बेहोशˌ

    शौच के लिए गई थी महिला लेकिनˈ पीछे-पीछे आ गया देवर। जो देखा उसे देखकर हो गया वहीं बेहोशˌ

    शौच के लिए गई थी महिला लेकिनˈ पीछे-पीछे आ गया देवर। जो देखा उसे देखकर हो गया वहीं बेहोशˌ

    फतेहपुर में एक चौंकाने वाली घटना घटी है। एक महिला शौच के लिए कहकर अकेली घर से निकली। काफी देर बाद उसका देवर भी उसके पीछे गया। देवर ने भाभी को ऐसी हालत में देखा कि वह पूरी तरह से दहल गया।भाभी को देखते ही देवर बेहोश हो गया।

    इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है।

    लाहसी गांव की रहने वाली यह 35 वर्षीय महिला, जिनका नाम मीना कुमारी है। शनिवार दोपहर 2 बजे के करीब उन्होंने बच्चों से कहा कि वह शौच के लिए जा रही हैं और घर से बाहर निकल गईं। काफी देर बीत जाने के बाद भी जब वह वापस नहीं आईं, तो उनका देवर और बच्चे उन्हें खोजने निकले। लेकिन उन्हें देखकर सभी डर गए।

    शनिवार शाम करीब 4 बजे मीना खेत में मिलीं। लेकिन वह जीवित नहीं थीं। खेत में उनका खून से सना हुआ शव पड़ा था। पास में ही प्लास्टिक का डिब्बा पड़ा था। भाभी को ऐसी हालत में देखकर देवर रोने लगा। भाभी-भाभी चिल्लाने लगा। उसकी आवाज सुनकर अन्य ग्रामीण वहां इकट्ठा हो गए।

    उनके शरीर पर कई घावों के निशान थे। इसलिए धारदार हथियार से हत्या की आशंका जताई जा रही है। मृतक के देवर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची, उन्होंने जांच की और मौके का मुआयना किया। पुलिस का दावा है कि उन्हें कई अहम सुराग मिले

    हैं। इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है। सीओ जगत कनौजिया ने कहा कि परिवार की तरफ से किसी पर भी आरोप नहीं लगाए गए हैं। शनिवार शाम महिला की नृशंस हत्या के कारण इलाके में हड़कंप मच गया है। दिनदहाड़े हुई इस घटना से ग्रामीणों में डर का माहौल है।

    महिला के पति ने तीन साल पहले फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। महिला के तीन बच्चे हैं। 17 वर्षीय बड़ा बेटा पंजाब में रहता है और वहीं काम करता है। 12 साल की बेटी शिवानी अपनी मां के साथ घर और खेती के काम में मदद करती है। 10 साल का बेटा नाइक पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। परिवार अलग होने के बाद इस परिवार को साढ़े तीन बीघा जमीन मिली थी। इस जमीन पर खेती करके यह महिला अपने परिवार का पालन-पोषण करती थीं।

  • शराब का नशा चुटकियों में उतार सकताˈ है यह आसान घरेलू उपाय, जानिए कैसे करता है यह जूस काम

    शराब का नशा चुटकियों में उतार सकताˈ है यह आसान घरेलू उपाय, जानिए कैसे करता है यह जूस काम

    शराब का नशा चुटकियों में उतार सकताˈ है यह आसान घरेलू उपाय, जानिए कैसे करता है यह जूस काम

    कई बार लोग दोस्तों या किसी पार्टी में जरूरत से ज्यादा शराब पी लेते हैं और अगली सुबह उन्हें हैंगओवर की समस्या का सामना करना पड़ता है। सिरदर्द, उल्टी जैसा महसूस होना, पेट दर्द, कमजोरी और चक्कर आना जैसी परेशानियां हैंगओवर के सामान्य लक्षण होते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग सोचते हैं कि अब से शराब नहीं पीएंगे, लेकिन कुछ समय बाद वही स्थिति दोबारा हो जाती है।

    दरअसल, ज्यादा शराब पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन और एसिडिटी बढ़ सकती है, जिससे हैंगओवर की समस्या पैदा होती है। इसके अलावा एल्कोहल के कारण ब्लड शुगर का स्तर भी प्रभावित हो सकता है, जिससे शरीर में थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएं महसूस होती हैं। हैंगओवर के कारण पूरा दिन खराब हो सकता है और व्यक्ति पूरे दिन सुस्ती और कमजोरी महसूस करता है।

    अगर आप भी हैंगओवर से जल्दी राहत पाना चाहते हैं, तो एक आसान घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकता है। यह एक प्राकृतिक जूस है, जो शरीर को तरोताजा करने और पेट की गड़बड़ी को शांत करने में मदद कर सकता है।

    आवश्यक सामग्री

    • टमाटर का रस – आधा गिलास
    • शहद – 2 टेबल स्पून
    • नींबू का रस – 2 टेबल स्पून

    बनाने की विधि

    सबसे पहले टमाटर के रस को एक ब्लेंडर में डालें। अब इसमें शहद और नींबू का रस मिलाएं। इन सभी चीजों को अच्छी तरह से कुछ मिनट तक ब्लेंड करें। इसके बाद आपका यह प्राकृतिक ड्रिंक तैयार हो जाएगा। इसे पीने से शरीर को ताजगी महसूस हो सकती है।

    कैसे करता है यह जूस काम

    टमाटर के रस में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने और थकान कम करने में मदद करते हैं। यह पेट की एसिडिटी को कम करने और पाचन तंत्र को शांत करने में भी सहायक माना जाता है।

    शहद शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करता है और शराब के कारण शरीर में होने वाली कमजोरी को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं नींबू का रस पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को संतुलित करने में सहायक होता है, जिससे जी मिचलाना और उल्टी जैसा महसूस होना कम हो सकता है।

    हालांकि, शराब का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

  • इसे पढ़ने के बाद तम्बाकू चबाना छोड़ˈ दोगे सिर्फ दिनों में. तंबाकू छोड़ना नामुमकिन नहीं, बस चाहिए सही जानकारी और मजबूत इच्छाशक्तिˌ

    इसे पढ़ने के बाद तम्बाकू चबाना छोड़ˈ दोगे सिर्फ दिनों में. तंबाकू छोड़ना नामुमकिन नहीं, बस चाहिए सही जानकारी और मजबूत इच्छाशक्तिˌ

    इसे पढ़ने के बाद तम्बाकू चबाना छोड़ˈ दोगे सिर्फ दिनों में. तंबाकू छोड़ना नामुमकिन नहीं, बस चाहिए सही जानकारी और मजबूत इच्छाशक्तिˌ

    🔥 हर साल 80 लाख जिंदगियाँ तबाह

    • क्या आप जानते हैं?
      हर साल 80 लाख से ज़्यादा लोग तंबाकू की वजह से अकाल मृत्यु के मुंह में चले जाते हैं।
    • लेकिन सवाल है —
      क्या आप वाकई इस लत से बाहर निकलना चाहते हैं?
      बार-बार कोशिश करने के बावजूद भी क्या आप इससे बाहर नहीं निकल पा रहे?

    👉 याद रखिए —
    डॉन को पकड़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन गुटका, पान मसाला और स्मोकिंग छोड़ना नामुमकिन नहीं है।
    बस ज़रूरत है सही जानकारी और सच्ची चाह की।

    ☠️ तंबाकू – एक स्लो पॉइज़न

    • यह सिर्फ एक बुरी आदत नहीं, बल्कि एक धीमा ज़हर (Slow Poison) है।
    • यह आपकी बॉडी और माइंड को धीरे-धीरे अंदर से नष्ट करता है।
    • इसके कारण: मुंह का कैंसर डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स दिल और फेफड़ों की बीमारियाँ

    💭 सोचिए, अगर कोई मशीन अंदर से जंग खाने लगे — तो कितने दिन चलेगी?
    उसी तरह गुटका और खैनी हमारे शरीर को अंदर से सड़ा देते हैं।

    😷 समाज और पर्सनालिटी पर असर

    • गुटका और तंबाकू चबाना न सिर्फ़ आपकी हेल्थ बल्कि आपकी सोशल इमेज को भी बिगाड़ देता है।
    • सार्वजनिक जगहों पर थूकना एक शर्मनाक आदत है।
    • इसके कारण: दांत पीले और खराब हो जाते हैं गाल और जबड़े का शेप बिगड़ता है पर्सनालिटी कमजोर दिखने लगती है।

    🧠 लत छोड़ना इतना मुश्किल क्यों है?

    • जब आप तंबाकू छोड़ते हैं तो शुरू में Withdrawal Symptoms आते हैं — बेचैनी और चिड़चिड़ापन सिर दर्द नींद न आना बार-बार तलब लगना

    👉 लेकिन याद रखिए, यह सिर्फ कुछ दिनों के लिए होता है।
    अगर आपने यह फेज़ झेल लिया — तो आगे की ज़िंदगी बहुत खूबसूरत हो सकती है।

    💪 पहला कदम – इच्छाशक्ति (Will Power)

    • खुद को रोज़ याद दिलाइए कि आप यह क्यों छोड़ना चाहते हैं।
    • तंबाकू छोड़ना एक मैराथन रेस है, स्प्रिंट नहीं।
    • बीच में गिवअप करने का मन ज़रूर करेगा,
      लेकिन हर बार अपने परिवार, अपने बच्चों और अपनी सेहत के बारे में सोचिए।

    ⚔️ यह रेस आप अपनी मौत से लगा रहे हैं —
    अगर रुक गए तो मौत जीत जाएगी,
    अगर चलते रहे तो आप जीत जाएंगे।

    🌿 तंबाकू छोड़ने के आसान उपाय

    1. सौंफ और मुलेठी का मिक्सचर

    • बराबर मात्रा में सौंफ और मुलेठी पाउडर मिलाकर एक जार में रख लें।
    • जब क्रेविंग हो, थोड़ा सा चबाएं।
    • यह क्रेविंग को कंट्रोल करता है और पाचन भी सुधरता है।
    • चाहें तो इसमें भुनी हुई अजवाइन भी मिला सकते हैं ताकि स्वाद और असर बढ़े।

    2. निकोटिन गम्स

    • जैसे कि Ryz Nicotine Gums — तंबाकू जैसी फ्लेवर के साथ सेम टेस्ट देते हैं। बिना हार्मफुल केमिकल्स के निकोटिन की छोटी मात्रा देते हैं। गुटका और स्मोकिंग दोनों की लत में मददगार। WHO और ETA approved हैं।
    • जब भी तलब उठे, बस एक गम चबाना शुरू करें।

    3. जीरे का पानी

    • एक गिलास पानी में रात भर 1 टीस्पून जीरा भिगोएं
    • सुबह इसे उबालकर गुनगुना पी लें।
    • यह बॉडी को डिटॉक्स करता है और क्रेविंग को कम करता है।

    4. सौंफ, अजवाइन और गुड़ का पानी

    • एक टीस्पून सौंफ + आधा टीस्पून अजवाइन + थोड़ा सा गुड़।
    • इन्हें पानी में उबालें और छानकर गरम-गरम पी लें।
    • यह ड्रिंक स्वादिष्ट है और तंबाकू की तलब को घटाती है।

    5. आयुर्वेदिक सहारा

    • रात में दूध के साथ अश्वगंधा पाउडर लें।
    • त्रिफला पाउडर गुनगुने पानी से लें।
    • तुलसी चाय पिएं — मन को शांत रखेगी और डिटॉक्स में मदद करेगी।

    🧘‍♂️ क्रेविंग के समय क्या करें?

    • खाना खाने के बाद तंबाकू की जगह मिश्री और सौंफ चबाएं।
    • स्ट्रेस में हों तो एक कप चाय या तुलसी ड्रिंक लें।
    • धीरे-धीरे ये हेल्दी हैबिट्स आपकी पुरानी आदत की जगह ले लेंगी।

    💭 अंत में याद रखिए

    • हर दिन की छोटी कोशिशें एक बड़ी जीत में बदलती हैं।
    • अगर एक दिन गलती हो जाए तो गिल्ट मत लीजिए — दोबारा कोशिश करें।
    • फेल होना मतलब है कि आप ट्राय कर रहे हैं।
      और जो कोशिश करता है, वो एक दिन ज़रूर जीतता है।

    🙏 निष्कर्ष

    तंबाकू छोड़ना मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं।
    यह सिर्फ आपकी हेल्थ नहीं, बल्कि आपके परिवार, आत्मसम्मान और भविष्य की लड़ाई है।
    आज से एक छोटा कदम उठाइए — और खुद को उस इंसान में बदल दीजिए जिस पर आपको गर्व

  • 5 तोतों ने चिड़ियाघर की इज्जत पानीˈ में मिला दी, दर्शक आते तो उन्हें देते गंदी-गंदी गालीˌ

    5 तोतों ने चिड़ियाघर की इज्जत पानीˈ में मिला दी, दर्शक आते तो उन्हें देते गंदी-गंदी गालीˌ

    5 तोतों ने चिड़ियाघर की इज्जत पानीˈ में मिला दी, दर्शक आते तो उन्हें देते गंदी-गंदी गालीˌ

    आप सभी ने बोलने वाले तोते जरूर देखे होंगे, लेकिन क्या आप ने कभी गालियां देने वाले तोते देखे हैं? ब्रिटेन के एक चिड़ियाघर में पाँच ऐसे तोते हैं जो गालियां देने में माहिर हैं। ये वहाँ आने वाले दर्शकों को ताबड़तोड़ गालियां देते थे, ऐसे में चिड़ियाघर अधिकारियों ने उन्हें हटा दिया। यह सभी ग्रे कलर के पांच अफ्रीकी तोते हैं। इनके नाम एरिक, जेड, एल्सी, टायसन और बिली है।

    इन्हें कुछ समय पहले ही ब्रिटेन के लिंकनशायर वन्यजीव पार्क में दर्शकों के देखने के लिए लाया गया था। हालांकि जब ये चिड़ियाघर आने वाले दर्शकों को गाली देने लगे तो उन्हें हटाना पड़ा।

    चिड़ियाघर आने वालों को गालियां देने लगे तोते

    वन्यजीव पार्क के अधिकारी ने इन पांच तोतों को एक ही पिंजरे में रखा था। हालांकि एक हफ्ते के अंदर ये सभी आपस में गालियां देना सीख गए। इन तोतों की भाषा सुन वन्यजीव पार्क के अधिकारी भी हैरान रह गए। पार्क के कर्मचारियों ने बताया कि पहले तो ये तोते आपस में ही एक दूसरे को गाली दे रहे थे, लेकिन फिर उन्होंने पार्क में आने वाले दर्शकों को गाली देना शुरू कर दिया। ऐसा प्रतीत होता है कि इन तोतों ने साथ में रहने के दौरान आपस में ऐसी गंदी भाषा सीख ली।

    25 सालों में कभी नहीं देखा ऐसा

    वन्यजीव पार्क के चीफ एग्जीक्यूटिव स्टीव निकोल्स कहते हैं कि “जब हमे इन तोतों के गाली देने की बात पता चली तो हैरान रह गए। बीते 25 सालों में हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा। हमे ये पता था कि तोते कभी-कभी कुछ भद्दी बातें बोल देते हैं। लेकिन दर्शकों को गाली देने वाले तोते मैंने पहली बार देखे हैं। हम अब पार्क में आने वाले बच्चों को लेकर चिंतित हैं। इसलिए हमने इन्हें पार्क से हटाने का फैसला किया है।”

    दर्शकों की हंसी से मिलता था बढ़ावा

    स्टीव निकोल्स ने आगे बताया कि “सबसे बड़ा संयोग ये रहा कि हमने पाँच अलग-अलग तोतों को एक ही पिंजरे में, एक ही हफ्ते के लिए रखा। इसका मतलब ये हुआ कि पार्क में ऐसा पिंजरा बन गया जहाँ सिर्फ गाली देने वाले तोते ही थे। हमने इन तोतों को लोगों के देखने के लिए इसलिए रख दिया कि ये अपनी बुरी आदत छोड़ देंगे। लेकिन ये तो दर्शकों ही गालियां देने लगे। जब ये दर्शकों को गाली देते थे तो वे जोर-जोर से हँसते थे। इससे इन तोतों को और बढ़ावा मिला और ये और भी अधिक गालियां देने लगे।”

    छोटे बच्चों की खातिर हटा दिया

    स्टीव निकोल्स बताते हैं कि “तोतों का गाली देना बड़े लोगों के लिए भले मजेदार हो, लेकिन जो बच्चे पार्क में आते हैं उनके लिए ये सही चीज नहीं है। अभी इन तोतों को हटा दिया गया है। इन्हें अलग-अलग रखा गया है। उम्मीद है कि कुछ दिनों बाद ये अपनी बुरी आदत छोड़ कुछ नए शब्द बोलना सीख लेंगे। हालांकि यदि उन्होंने अपनी बुरी भाषा बोलना नहीं छोड़ा तो मैं नहीं जानता कि फिर इनके साथ क्या करना है।”

    वैसे यदि आपके घर भी कोई तोता है तो उसके सामने कुछ भी बुरा बोलने से पहले दस बार सोचे, वरना आपके घर का माहौल दूसरों के सामने एक्सपोज हो जाएगा।