Author: me.sumitji@gmail.com

  • कब और कैसे हुई श्रीकृष्ण की मृत्यु?ˈ जानिए वो रहस्य जिसे बहुत कम लोग जानते हैं….ˌ

    कब और कैसे हुई श्रीकृष्ण की मृत्यु?ˈ जानिए वो रहस्य जिसे बहुत कम लोग जानते हैं….ˌ

    कब और कैसे हुई श्रीकृष्ण की मृत्यु?ˈ जानिए वो रहस्य जिसे बहुत कम लोग जानते हैं….ˌ

    श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। हम सभी जानते हैं की सृष्टि के पालनकर्ता भगवन विष्णु ही है। लेकिन आपने कभी ये सोचा है कि कृष्णावतार में सृष्टि के पालनकर्ता की मृत्यु कैसे हु।

    आइये हम आपको बताते हैं की भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु कब और कैसे हुई?
    कृष्णावतार की कथा

    ये तो हम सभी जानते हैं की द्वापर युग में भगवन विष्णु श्री कृष्ण के रूप में अवतरित हुए थे। लेकिन ये कम ही लोग जानते हैं की भगवान श्री कृष्ण की मृत्यु उनके रामावतार के एक मात्र छल कपट का परिणाम था।पौराणिक कथाओं के अनुसार श्री कृष्ण की मृत्यु का कारण महाभारत युद्ध में कौरवों की पराजय थी। अठारह दिन चले महाभारत युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु के पश्चात् जब युधिष्ठर का राजतिलक हो रहा था,तब अपने सौ पुत्रों की मौत से दुखी माता गांधारी ने महाभारत युद्ध के लिए श्रीकृष्ण को दोषी ठहराते हुए श्राप दिया।जिस तरह कौरवों के वंश का नाश हुआ है ठीक उसी प्रकार तुम्हारे वंश का भी नाश होगा।

    यदुवंशियों का नाश

    महाभारत के मौसल पर्व में भगवान् कृष्ण के मानव रूप को छोड़ने का वर्णन है। इस पर्व में वर्णित कथा के अनुसार कृष्ण की मृत्यु महाभारत युद्ध के 35 साल बाद हुई थी।पैंतीस साल बाद द्वारका नगरी पर माता गांधारी के श्राप ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया था।गांधारी के श्राप से प्रभाव को भांप कर श्रीकृष्ण द्वारिका से यदुवंशियों को लेकर प्रयास क्षेत्र में आ गये। प्रभास क्षेत्र आकर कृष्ण ने ब्राह्मणों को अन्नदान देकर यदुवंशियों को कहा की तुम लोग अब मृत्यु का इंतजार करो। प्रभास क्षेत्र के प्रवास के कुछ दिनों बाद महाभारत-युद्ध की चर्चा करते हुए सात्यकि और कृतवर्मा में विवाद हो गया।

    सात्यकि ने गुस्से में आकर कृतवर्मा का सिर काट दिया। इससे उनमें आपसी युद्ध भड़क उठा और वे समूहों में विभाजित होकर एक-दूसरे का संहार करने लगे। इस लड़ाई में श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न और मित्र सात्यकि समेत सभी यदुवंशी मारे गये थे, केवल बब्रु और दारूक ही बचे रह गये थे।

    बलराम का देहत्याग

    यदुवंश के नाश के बाद कृष्ण के ज्येष्ठ भाई बलराम समुद्र तट पर बैठ गए और एकाग्रचित्त होकर परमात्मा में लीन हो गए। इस प्रकार शेषनाग के अवतार बलरामजी ने देह त्यागी और स्वधाम लौट गए। बलराम जी के देह त्यागने के बाद एक दिन श्रीकृष्ण पीपल पेड़ के नीचे ध्यान की मुद्रा में लेटे हुए थे, तब उस क्षेत्र में एक जरा नाम का बहेलिया आया। जरा एक शिकारी था और वह हिरण का शिकार करना चाहता था।

    जरा को दूर से हिरण के मुख के समान श्रीकृष्ण का तलवा दिखाई दिया। बहेलिए ने बिना कोई विचार किए वहीं से एक तीर छोड़ दिया जो कि श्रीकृष्ण के तलवे में जाकर लगा।जब वह पास आया तो देखा कि श्रीकृष्ण के पैरों में उसने तीर मार दिया है।इसके बाद उसे बहुत पश्चाताप हुआ और वह क्षमायाचना करने लगा। तब श्रीकृष्ण ने बहेलिए से कहा कि जरा तू डर मत, तूने कोई गलत काम नहीं किया है। ये तो मेरे पूर्व जन्म में किये कर्मो का फल है।

    पूर्वजन्म की कथा

    कृष्ण ने जरा को बताया की तुम मेरे रामावतार के समय राजा बलि हुआ करते थे जिसे मैंने पेड़ की आड़ में छुपकर मादा था। इसलिए मैंने इस जन्म में अपनी मृत्यु के कारन का चुनाव भी ठीक उसी प्रकार किया है। इसलिए हे जरा तुमने मेरे मन का काम किया।अतः तुम मेरी आज्ञा से स्वर्गलोक प्राप्त करेगा। जरा के जाने के बाद वहां श्रीकृष्ण का सारथी दारुक पहुंचा। दारुक को देखकर श्रीकृष्ण ने कहा कि वह द्वारिका जाकर सभी को यह बताए कि पूरा यदुवंश नष्ट हो चुका है और बलराम के साथ कृष्ण भी स्वधाम लौट चुके हैं। अत: सभी लोग द्वारिका छोड़ दें , क्योंकि यह नगरी अब जल मग्न होने वाली है। इसके बाद उस स्थान पर सभी देवता और स्वर्ग की अप्सराएं, यक्ष, किन्नर, गंधर्व आदि पहुंचे और उन्होंने श्रीकृष्ण की आराधना की। आराधना के बाद श्रीकृष्ण ने अपने नेत्र बंद कर लिए और वे सशरीर ही अपने वैकुण्ठ धाम को लौट गए।

  • केला है दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टरˈ केले के पास हर बीमारी का इलाज जानिए विस्तार सेˌ

    केला है दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टरˈ केले के पास हर बीमारी का इलाज जानिए विस्तार सेˌ

    केला है दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टरˈ केले के पास हर बीमारी का इलाज जानिए विस्तार सेˌ

    हमने कभी सोचा भी नही होगा कि आखिर केला खाने वाले बन्दर लम्बी लम्बी छलाँगें कैसे लगा लेते हैं। हमने कभी सोचा भी नही होगा कि आखिर ताकत बन्दर में होती है या केले के अंदर। हमने कभी सोचा भी नही होगा कि केला आखिर बंदरों का सबसे पसंदीदा भोजन क्यों है।

    कभी कभी आप यह भी देखते होंगे कि कुछ लोग बंदरों को ढूंढ ढूंढ कर केले खिलते हैं लेकिन खुद केले के गुणों से अंजान रहते है।

    हम अक्सर यह भी देखते हैं की कुछ लोग गैस, अपच, कब्ज होने पर डॉक्टर के पास जाकर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं लेकिन सबसे सस्ती दवा केले के पास जाने की सोच ही नहीं पाते। आइये पढ़ते हैं केला खाने से क्या क्या फायदे होते हैं और किन किस बीमारियों से बचा जा सकता है।इलाज से रोकथाम अधिक अच्छा :सबसे पहले हमें यह जानना चाहिए कि बीमारियों के इलाज से बीमारियों का रोकथाम अधिक अच्छा है। हमें चाहिए की बीमारियां हमारे शरीर में लगने ही ना पाएं। अगर हम केले को अपनी भोजन में नियमित रूप से शामिल कर लें तो सभी बीमारियों से बचा जा सकता है।

    बीमारियां केवल दो ही कारणों से होती हैं :शरीर में खून की कमी
    पेट में गैस, अपच, कब्ज

    केला क्यों है दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टरअगर हमारे शरीर में खून की कमी है तो पेट में गैस और कब्ज की समस्या जरूर होती है और अगर पेट में गैस और कब्ज की समस्या है तो शरीर में खून की कमी होने लगती है। केला खून में हीमोग्लोबिन बढ़ाने का सबसे बढ़िया श्रोत है।नियमित रूप से केले का सेवन करते रहने पर पेट में गैस और कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है।

    शरीर की सभी बीमारियां पेट से ही शुरू होती हैं। चाहे फेफड़े और सांस की बीमारी हों, चाहे दिल और दिमाग की बीमारी हों, चाहे किडनी और आहारनाल की बीमारी हों और चाहे हड्डियों और गठिया की बीमारी हों। पेट में कब्ज और गैस से शरीर में खून बनना कम हो जाता है और हमारे खून में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि हमारी साँसों, फेफड़ों, ह्रदय, किडनी आदि में कमी आनी शुरू हो जाती है। इन अंगों के ढीले पड़ने से और सही ढंग से काम ना करने से हमें धीरे धीरे डायबिटीज या कैंसर की बीमारी होनी शुरू हो जाती है। इसके बाद ही टेंशन, तनाव, रक्तचाप आदि की समस्या शुरू होती है और हम डॉक्टरों के पास भागते रहते हैं।

    पक्के केले के सेवन से अधिक फायदे होते हैं। केला जितना अधिक पका होगा आपके खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा उतनी अधिक बढ़ाएगा। कच्चे या अधपके खेले के सेवन से भी फायदा होता है लेकिन इन्हें खाने से पेट में गैस और कब्ज में आराम मिलता है। कच्चे केले की सब्जी भी खायी जा सकती है। याद रखिये अगली बार आपको गैस और कब्ज की शिकायत हो तो गैस की दवा खाने के बजाय चार पांच केले जरूर खाएं। इससे भूख तो शांत होगी ही, आपके शरीर में ब्लड बनेगा और पेट की गैस और कब्ज से छुटकारा मिलेगा। यह भी याद रखें, यह मत सोचिये कि केवल एक दो केले खाने से आप हमेशा के लिए स्वस्थ हो जाएंगे, नियमित रूप से या हफ्ते में तीन बार केले का सेवन जरूर करें।

    अगर आपका पेट सही है, खाना सही ढंग से पच रहा है, गैस और कब्ज की समस्या नहीं है तो आपके शरीर में खून की मात्रा सामान्य बनी रहेगी। अगर आपके शरीर में खून की मात्रा सामान्य रहेगी तो खून में उपस्थित हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को आपके शरीर की हर सेल में बराबर मात्रा में पहुंचाते रहेंगे और आपके फेफड़े स्वस्थ बने रहेंगे रहेंगे। फेफड़ों के स्वस्थ रहने से आप सांस की बीमारियों से दूर रहेंगे।

    शरीर में खून की मात्रा सामान्य रहेगी तो आपके ह्रदय और किडनी जैसे अंग भी सही ढंग से काम करते रहेंगे और खून में पाए जाने वाले अवशिष्ट पदार्थों को फ़िल्टर करते रहेंगे शरीर में खून की मात्रा सामान्य रहेगी तो आपकी सेल और हड्डियों को कैल्शियम, सोडियम, पोटैशियम और आयरन बराबर मात्रा में मिलता रहेगा। यह सब केवल केले को नियमित रूप से आहार में शामिल करने से हो सकता है। याद रखिये केला सिर्फ बंदरों का भोजन नहीं है बल्कि हमारे लिए भी कुदरत का वरदान है। केला ना सिर्फ सस्ता होता है बल्कि यह गुणों की खान होता है। केला अमीर भी खा सकते हैं और गरीब भी इसलिए केला खाइए और सभी बीमारियों को दूर भगाइए।

    कुछ लोग हमारी बातों से असहमत होकर कह सकते हैं कि केला खाने से डायबिटीज हो सकता है, या डायबिटीज वालों को केला खाने से नुकसान हो सकता है। बता दें कि डायबिटीज बीमारी पेट में लम्बे समय तक गैस और कब्ज की समस्या रहने के बाद होती है और इस बीमारी में लीवर के बगल में पाया जाने वाला अंग पैंक्रियाज काम करना बंद कर देता है। अगर नियमित रूप से केले का सेवन किया जाए तो ना तो पेट में गैस और कब्ज होगी और ना ही डायबिटीज जैसे जानलेवा बीमारी होगी।

  • जब टॉप हीरोइन बिना शादी के मांˈ बनी अपने राखी भाई से ही रचा ली शादीˌ

    जब टॉप हीरोइन बिना शादी के मांˈ बनी अपने राखी भाई से ही रचा ली शादीˌ

    जब टॉप हीरोइन बिना शादी के मांˈ बनी अपने राखी भाई से ही रचा ली शादीˌ

    Heroine: दुनिया के सबसे पवित्र रिश्तों में भाई-बहन का रिश्ता माना जाता है. हमारे समाज में तो अगर कोई एक बार भी किसी को बहन मान ले, तो उस रिश्ते को वो ताउम्र निभाने की कोशिश करता है. ऐसे कई उदाहरण हमारे इतिहास में भी देखने को मिल जाएंगे, जिसमें से एक रानी कर्णावती और हुमायूं का रिश्ता भी शामिल था. तो इसी बीच आइए जानें कौन है वो हीरोइन (Heroine) जिसने गर्भवती होने के बाद अपने ही भाई से कर ली शादी?

    जानिए कौन है वह Heroine?

    हर कोई जानता है कि बोनी कपूर श्रीदेवी की खूबसूरती और प्यार के इतने दीवाने थे कि उन्होंने अपनी अच्छी-खासी गृहस्थी दांव पर लगा दी. बाद में उन्होंने उसी हीरोइन (Heroine) श्रीदेवी से शादी कर ली, जिन्होंने कभी उन्हें राखी बाँधी थी. बोनी कपूर के इस विश्वासघात का खुलासा खुद उनकी पहली पत्नी मोना कपूर ने अपने एक इंटरव्यू में किया था.

    मोना के मुताबिक, वह और श्रीदेवी बहुत अच्छी दोस्त थीं. श्रीदेवी अक्सर मोना कपूर के घर आती-जाती रहती थीं। श्रीदेवी काफी समय तक मोना और बोनी कपूर के घर में भी रहीं। उन दिनों श्रीदेवी का नाम मिथुन चक्रवर्ती के साथ जोड़ा जा रहा था।

    पहले बांधी राखी फिर की शादी

    उन दिनों मिथुन को हीरोइन (Heroine) श्रीदेवी और बोनी कपूर की नज़दीकियों पर भी शक होने लगा था। मिथुन को लगने लगा था कि श्रीदेवी और बोनी कपूर के बीच की नज़दीकियाँ प्यार में बदल रही हैं। तब मिथुन को मनाने के लिए श्रीदेवी ने बोनी कपूर को राखी बाँधी और उन्हें अपना भाई बना लिया। जिसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां तेजी से बढ़ीं। लंबे समय तक डेटिंग करने के बाद श्रीदेवी और बोनी कपूर ने साल 1996 में शादी कर ली।

    बिन ब्याही मां बनीं एक्ट्रेस

    श्रीदेवी के पति और फिल्म निर्माता बोनी कपूर ने रोहन दुआ के साथ अपनी ज़िंदगी के कई अहम किस्से साझा किए। कुछ किस्से ऐसे भी थे जिनके बारे में शायद ही लोग जानते हों। अपनी शादी के बारे में बात करते हुए बोनी ने बताया कि हीरोइन (Heroine) श्रीदेवी से उनकी दूसरी शादी शिरडी में हुई थी. 2 जून को उनकी शादी हुई। वह आगे कहते हैं, “हमने शादी के बाद भी वहाँ एक रात बिताई। जनवरी में श्रीदेवी की प्रेग्नेंसी की वजह से उनका पेट सबको दिख रहा था, इसलिए हमें दोबारा शादी करनी पड़ी। हमारे पास कोई चारा नहीं बचा था।”

    दरअसल, हमारी शादी 2 जून 1996 को हुई थी, लेकिन दुनिया के लिए हमारी शादी जनवरी 1997 में हुई थी। इस वजह से कुछ लोग कहते हैं कि जाह्नवी शादी से पहले से बच्ची है और श्रीदेवी शादी से पहले गर्भवती थीं. शादी के कुछ ही महीनों बाद श्रीदेवी ने अपनी बड़ी बेटी जान्हवी कपूर को जन्म दिया। इसके कुछ समय बाद ही उनकी एक बेटी खुशी कपूर का जन्म हुआ।

  • बुरी नजर से परेशान है घर? जानिएˈ इसके 5 संकेत और इसके तुरन्त असरदार समाधानˌ

    बुरी नजर से परेशान है घर? जानिएˈ इसके 5 संकेत और इसके तुरन्त असरदार समाधानˌ

    बुरी नजर से परेशान है घर? जानिएˈ इसके 5 संकेत और इसके तुरन्त असरदार समाधानˌ

    Nazar Dosh Upay: बुरी नजर अच्‍छे-भले जीवन को तबाह कर सकती है. घर पर लगी बुरी नजर मुसीबतों का अंबार लगा देती है. जानिए, बुरी नजर के लक्षणों को कैसे पहचानें और कैसे उससे निजात पाएं.Nazar Dosh ke Lakshan and Upay: बुरी नजर लगना घर में, जीवन में नकारात्‍मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ना है. ये आपके जीवन में मुसीबतों का अंबार लगा सकती है. बुरी नजर कई अनचाही घटनाओं का कारण बनती है. व्‍यक्ति की ऊर्जा कम हो जाती है, हमेशा थकान, उदासी महसूस होती है. बनते काम बिगड़ जाते हैं. चौतरफा हानि होती है. समय रहते बुरी नजर से निजात पाने के उपाय कर लेने चाहिए. आइए जानते हैं कि बुरी नजर या नजर दोष के लक्षण और उससे निजात पाने के उपाय.

    बुरी नजर या नजर दोष के लक्षण

    – यदि हर समय बिना किसी कारण के सिर में दर्द बना रहता है. भारीपन रहता है. बिना किसी बीमारी के यदि ऐसा हो तो यह बुरी नजर का लक्षण हो सकता है.

    – अचानक जीवन में निराशा महसूस होने लगे, हर समय उदासी लगे, तनाव रहे. नींद ना आए, बिना वजह घबराहट हो तो यह बुरी नजर लगने का संकेत है.

    – सकारात्‍मक व्‍यक्ति भी नजर दोष के कारण नकारात्‍मक हो जाता है. उसे कुछ अच्‍छा नहीं लगता है और हर समय थका व निराश महसूस करता है.

    – घर पर बुरी नजर का साया हो तो हर समय घर में झगड़े-कलह होते हैं. बिना वजह सदस्‍यों में वाद-विवाद होते रहते हैं.

    – घर के लोग कितनी भी मेहनत करें, उन्‍हें सफलता नहीं मिलती. काम बनते-बनते रह जाते हैं. तरक्‍की नहीं होती.

    – बीमारी, चोरी और कई बार बिना कारण ही धन हानि होती है.

    – बच्‍चे को नजर लग जाए तो वह बीमार पड़ जाता है. बच्‍चा कुछ खाता-पीता नहीं है और बिना बात के रोता रहता है.

    नजर दोष से निजात पाने के उपाय

    – नजर दोष से बचाव के लिए बुधवार को सप्त धान्य यानी सात प्रकार के अनाज का दान करना चाहिए. नजर दोष से बचाव के लिए घर में राहु यंत्र की स्‍थापना करके उसकी पूजा करें. इससे नकारात्‍मक शक्तियां दूर रहती हैं.

    – यदि बार-बार नजर लगती है तो नौ मुखी रुद्राक्ष धारण कर लें.

    – बुरी नजर उतारने के लिए या बचाव के लिए भैरव मंदिर में मिलने वाला काला धागा गले या हाथ में धारण करें.

    – जिस घर में रोजाना पूरे भक्ति-भाव से हनुमान चालीसा का पाठ होता है, वहां पर कभी नजर दोष नहीं ठहरता.

    – बुरी नजर उतारने के लिए हनुमान जी के मंदिर में जाकर उनके कंधों का सिंदूर माथे पर लगाएं.

    – तुरंत बुरी नजर उतारना हो तो एक रोटी बनाएं और उसे केवल एक तरफ से ही सेंकें. फिर उस रोटी के सिके हुए हिस्‍से पर तेल लगाकर उस पर लाल मिर्च और नमक डालें. फिर इस रोटी को नजर दोष से पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से 7 बार घुमाकर चुपचाप से किसी चौराहे पर रख आएं.

    – नजर उतारने का सबसे प्रचलित तरीका है कि 2 लाल सूखी मिर्च, थोड़ा सेंधा नमक, थोड़े सरसो के बीज लें. फिर इसे नजर लगे व्‍यक्ति के सिर के ऊपर से 7 बार वारकर आग में जला दें. कुछ ही देर में राहत मिल जाएगी.

    – यदि आग से नहीं जला पा रहे हों तो थोड़ा सा नमक और राई के दाने लें. जिस व्‍यक्ति को नजर लगी हो, उसके सिर के ऊपर से 7 बार वार कर फ्लश कर दें. इसके बाद हाथ-पैर धोकर अपने ऊपर साफ पानी छिड़क लें.

  • पति और जेठ को लुढ़का कर आईˈ हूं लाश उठवा लो. हाथ में पिस्टल लेकर थाने पहुंची महिला पुलिस भी रह गई सन्नˌ

    पति और जेठ को लुढ़का कर आईˈ हूं लाश उठवा लो. हाथ में पिस्टल लेकर थाने पहुंची महिला पुलिस भी रह गई सन्नˌ

    पति और जेठ को लुढ़का कर आईˈ हूं लाश उठवा लो. हाथ में पिस्टल लेकर थाने पहुंची महिला पुलिस भी रह गई सन्नˌ

    मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी विवाद को लेकर एक महिला ने अपने पति और जेठ की गोली मारकर हत्या कर दी और फिर अपराध में इस्तेमाल पिस्टल के साथ थाने जाकर सरेंडर कर दिया. आरोपी महिला ने यह कहते हुए सरेंडर किया कि पति और जेठ को लुढ़का कर आई हूं, दोनों की लाश उठवा लो. हाथ में पिस्टल पकड़े हुए महिला के मुंह से यह शब्द सुनते ही पुलिसकर्मी अपनी-अपनी कुर्सी से खड़े हो गए. 

    महिला ने पहले अपने पति और फिर अपने जेठ को गोली मारी. सविता (35) एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है. शुरुआती जांच में यह मामला संपत्ति विवाद का नतीजा बताया जा रहा है.

    5 करोड़ की जमीन का विवाद 

    इस मामले में आरोपी महिला ने पुलिस को बताया कि फोरलेन हाइवे पर उसकी 5 करोड़ रुपए कीमती जमीन को जेठ दिनेश हथियाना चाहता था. इसी के चलते पति राधेश्याम को नशा कराता था. जेठ के बहकावे में आकर पति भी आए दिन मारपीट करता था. सोमवार सुबह सुबह पति गाली दे रहा था, इसके चलते गुस्से में आकर बिस्तर के नीचे से पिस्टल निकाली. पहले जेठ को गोली मारी और फिर पति को मौत के घाट उतार दिया. महिला ने रोज रोज की मारपीट और हिंसा से तंग आकर यह कदम उठाने का दावा किया. उसका कहना था कि 2 बेटियों और एक बेटे के भविष्य की खातिर उसने इस वारदात को अंजाम दिया. 

    कहां से आई पिस्टल?
    परिजनों ने इस दोहरे हत्याकांड पर सवाल उठाए हैं. मृतकों के पिता और आरोपी महिला के ससुर का कहना है कि दोनों भाइयों दिनेश और राधेश्याम के बीच जमीन का बंटवारा पहले से था तो विवाद की स्थिति क्यों बनी? आखिर घर में पिस्टल कहां से आई? इन सभी मामलों की बारीकी से छानबीन की जाए और आरोपी बहू को सख्त से सख्त सजा मिले. 

    इनका कहना 

    एडिशनल एसपी नीतीश भार्गव ने बताया कि घरेलू विवाद और जमीन के विवाद को लेकर महिला ने क्रोध में आकर यह कृत्य किया है. आरोपी महिला ने हथियार के साथ थाने में सरेंडर कर दिया. एफएसएल की टीम जांच में जुटी है और एविडेंस इकट्ठा किया जा रहे हैं. आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

  • ऑपरेशन से पहले १ बार करें येˈ उपाय, चर्वी की गांठें, स्तन की गांठें चुटकी में पिघल जाएगी। सिर्फ़ 11 दिनों में दिखेगा रिजल्टˌ

    ऑपरेशन से पहले १ बार करें येˈ उपाय, चर्वी की गांठें, स्तन की गांठें चुटकी में पिघल जाएगी। सिर्फ़ 11 दिनों में दिखेगा रिजल्टˌ

    ऑपरेशन से पहले १ बार करें येˈ उपाय, चर्वी की गांठें, स्तन की गांठें चुटकी में पिघल जाएगी। सिर्फ़ 11 दिनों में दिखेगा रिजल्टˌ

    😟 क्या आपके शरीर पर छोटी-छोटी गांठें बन गई हैं?
    😔 क्या माता-बहनों को स्तनों में गांठें महसूस हो रही हैं और मन में डर बैठ गया है कि कहीं यह कैंसर तो नहीं?
    रुकिए! किसी भी ऑपरेशन से पहले — ये आयुर्वेदिक उपाय सिर्फ़ 11 दिन आज़माकर देखिए।
    आयुर्वेद में वर्णित एक अद्भुत वनस्पति — पाथरी (गोलामिका) — आपके शरीर की चरबी वाली गांठों (लाइपोमा) को पूरी तरह घोल सकती है!

    💭 चरबी की गांठें क्या होती हैं?

    शरीर पर चरबी जमने से बनी मुलायम गांठों को लाइपोमा (Lipoma) कहा जाता है। ये आमतौर पर गर्दन, कंधे, पेट, जांघ या पीठ पर दिखाई देती हैं। हाथ से दबाने पर ये हल्की-हल्की हिलती हैं और रंग त्वचा जैसा ही होता है। शुरुआत में ये नुकसान नहीं करतीं, लेकिन समय पर ध्यान न दिया तो कैंसर जैसी जटिलता का कारण बन सकती हैं।

    ⚠️ ये गांठें क्यों बनती हैं?

    • हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Changes)
    • आनुवंशिक कारण (Genetic Factors)
    • मिलावटी या रासायनिक भोजन का सेवन
    • कुछ दुर्लभ सिंड्रोम्स — जैसे Down syndrome, Gardner syndrome

    🩺 लाइपोमा की पहचान कैसे करें?

    • स्पर्श करने पर गांठ मुलायम और हिलने वाली होती है।
    • त्वचा का रंग सामान्य रहता है।
    • वृद्धि धीरे-धीरे होती है।
    • दर्द नहीं होता।
      👉 लेकिन कैंसर वाली गांठ लालसर और दर्दयुक्त होती है।

    🌿 आयुर्वेदिक उपाय – पाथरी (गोलामिका) का जादुई प्रयोग

    आयुर्वेद में गोलामिका नाम से वर्णित यह वनस्पति अनावश्यक चरबी और गांठों को पिघलाने में सक्षम है। यह आसानी से सड़कों के किनारे या बगीचों,या खेत में मिल जाती है।

    🧴 1. पाथरी का तेल बनाने की विधि

    सामग्री:

    • पाथरी की 20–25 पत्तियाँ
    • अरंडी का तेल (Castor oil) – 200 मि.ली.

    विधि:

    1. पत्तियाँ अच्छी तरह धोकर पेस्ट बना लें।
    2. इस पेस्ट को तेल में डालकर धीमी आंच पर उबालें।
    3. जब पत्तियाँ गल जाएँ और तेल साफ़ हो जाए, तो छान लें।
    4. यह तेल रोज़ गांठों पर लगाएँ और हल्के हाथ से मालिश करें।

    🕖 सबसे अच्छा समय: रात को सोने से पहले।

    🍃 2. पाथरी के रस या पत्तों का सेवन

    • सुबह खाली पेट 2–3 पत्तियाँ चबाकर खाएँ, या
    • उनका रस निकालकर 1 चम्मच पीएँ, या
    • सब्ज़ी में मिलाकर उपयोग करें।

    👉 सिर्फ़ 11 दिन नियमित उपयोग से शरीर या स्तन की गांठें धीरे-धीरे पिघल जाती हैं — किसी सर्जरी की ज़रूरत नहीं।

    🪷 आयुर्वेद की राय

    आयुर्वेद के अनुसार गोलामिका (पाथरी) “मेध-विकार” यानी चरबी संबंधी रोगों पर कार्य करती है।
    यह शरीर में जमा अवरोधों को दूर करके रक्तशुद्धि और चरबी पिघलाने का काम करती है।

    🌼 एक महत्वपूर्ण सलाह

    आज की भागदौड़ वाली ज़िंदगी में हार्मोनल असंतुलन और अस्वस्थ खानपान के कारण ऐसी गांठें आम हो गई हैं।
    प्रकृति की यह साधारण सी वनस्पति आपके स्वास्थ्य के लिए वरदान है — बस नियमितता ज़रूरी है।

  • विधवा भाभी से बोला देवर- भैया कीˈ जगह मैं… फिर बीच में आ गई गर्लफ्रेंड और शुरू हुआ ऐसा खेल जिसने भी सुना हुए रोंगटे खड़ेˌ

    विधवा भाभी से बोला देवर- भैया कीˈ जगह मैं… फिर बीच में आ गई गर्लफ्रेंड और शुरू हुआ ऐसा खेल जिसने भी सुना हुए रोंगटे खड़ेˌ

    विधवा भाभी से बोला देवर- भैया कीˈ जगह मैं… फिर बीच में आ गई गर्लफ्रेंड और शुरू हुआ ऐसा खेल जिसने भी सुना हुए रोंगटे खड़ेˌ

    कहते हैं कि आज के युग में किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए. कई बार किसी पर भरोसा करना हमें भारी भी पड़ सकता है. सबसे ज्यादा दुख तो तब होता है जब अपने ही हमें धोखा दे दें. ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के हरदोई से सामने आया है. यहां एक देवर पर अपनी ही विधवा भाभी से शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप लगा है. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है.

    मामला टड़ियावां थाना क्षेत्र के एक गांव का है. यहां 6 महीने पहले एक महिला के पति की मौत हो गई. विधवा हुई तो देवर ने उससे नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दीं. कहने लगा- भाभी आप फिक्र मत करो. मैं आपसे शादी करूंगा. आपको भैया की तरह ही प्यार करूंगा. टूटे हुए को अगर किसी का सहारा मिल जाए तो उससे ज्यादा उसे क्या ही चाहिए. भाभी भी अपने देवर की बातों में आ गई. उसने देवर पर भरोसा किया.

    कई बार बनाए संबंध

    देवर ने फिर भाभी से शारीरिक संबंध बनाना शुरू कर दिया. दोनों के बीच कई बार संबंध बने. मगर कुछ दिन बाद देवर का मन भाभी से ऊब गया. भाभी को शक हुआ तो उसने देवर पर शादी का दबाव बनाया. तब देवर पहले तो टालमटोल करता रहा. मगर बाद में बोला- मैं किसी और से प्यार करता हूं. आप मेरा पीछा छोड़ दो. यह सुनकर भाभी के पैरों तले जमीन खिसक गई. पहले पति का साथ छूटा और अब देवर से दगा मिली.

    पुलिस को दी शिकायत

    महिला ने देवर को समझाने की कोशिश की. मगर वो अपनी जिद पर अड़ा रहा. तंग आकर महिला फिर टड़ियावां थाने पहुंची. ॉयहां महिला ने शिकायत करते हुए बताया कि देवर ने झांसा देकर उससे कई बार शारीरिक संबंध बनाए. अब किसी अन्य लड़की से शादी करने की बात कह रहा है. पुलिस ने देवर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है. मामले की जांच की जा रही है. जांच के बाद आगे की कार्रवाई करने की बात पुलिस कह रही है.

  • प्रेमी को मनाने GF ने लिखा Loveˈ लेटर जानू तुम किसी भी लड़की से बोला मत करो ना ही मुस्कुरायाˌ

    प्रेमी को मनाने GF ने लिखा Loveˈ लेटर जानू तुम किसी भी लड़की से बोला मत करो ना ही मुस्कुरायाˌ

    प्रेमी को मनाने GF ने लिखा Loveˈ लेटर जानू तुम किसी भी लड़की से बोला मत करो ना ही मुस्कुरायाˌ

    प्यार के रिश्ते में रूठना मानना अक्सर चलता रहता है। आमतौर पर यही देखा जाता है कि प्रेमिका रूठ जाती है और प्रेमी बेचारा उसे मनाता रहता है। लेकिन कभी-कभी बॉयफ्रेंड भी रूठ जाते हैं। ऐसे में गर्लफ्रेंड को उसे मानना पड़ता है। लड़कियों का प्रेमी को मनाने का तरीका लड़कों से थोड़ा अलग होता है। वह अपनी मीठी और चिकनी चुपड़ी बातों से प्रेमी को मनाती है।

    GF ने प्रेमी को लिखा लव लेटर

    इस डिजिटल युग में तो फोन पर या व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर माफी मांग ली जाती है। लेकिन पहले के जमाने में प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे को लव लेटर लिखा करते थे। इसी में प्यार और माफी शब्दों के माध्यम से पिरोई जाती थी। आज हम आपको ऐसा ही एक मजेदार प्रेम पत्र दिखाने जा रहे हैं। इसे एक प्रेमिका ने अपने रूठे हुए प्रेमी को मनाने के लिए लिखा है।

    ऑस प्रेम पत्र में गर्लफ्रेंड ने अपने प्रेमी को टमाटर, रसगुल्ला से लेकर मुन्ना, कबूतर तक कह दिया। वह ऐसे-ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर प्रेमी को मनाती दिखी कि पढ़ने वाला लोटपोट हो गया। अब प्रेमिका का यह फनी लव लेटर सोशल मीडिया पर बड़ा वायरल हो रहा है। इसे पढ़कर आपकी भी हंसी रुकने का नाम नहीं लेगी।

    पढ़कर लोटपोट हुए लोग

    प्रेमिका ने लिखा – जानू मैं तुम्हारे ऊपर शक नहीं करती, लेकिन किसी लड़की को तुझसे बोलते हुए देखती हूं ना तो दिल में दर्द होता है बहुत। जानू तुम किसी भी लड़की से बोला मत करो, ना ही मुस्कुराया करो। मैं तुम्हें गलत नहीं समझ रही हूं आपको जानु। मुझे तुमसे प्यार है, इसलिए कह रही हूं। कबूतर मानो तो मान ले । ना मानो तो तुम्हारी मर्जी। और जानु तुम उस लड़की के घर मत जाया करो। मुन्ना कबूतर मुझे माफ करना अगर कुछ गलत लिखा हो तो।

    प्रेमिका यहीं नहीं रुकी। अंत में उसने अपना प्यार जताते हुए प्रेमी को कई अजीबोगरीब नामों से पुकारा। उसने लिखा – आय लव यू। आय लव यू। आय लव यू। सॉरी, सॉरी मुन्ना अगर कुछ गलत लिखा हो तो। मेरे कबूतर, मुन्ना, राजा, फौजी, टमाटर, रसगुल्ला। आई मिस यू। आई मिस यू। आय लव यू। आय लव यू।

    यह मजेदार लव लेटर इंस्टाग्राम पर theadulthumour नाम की आईडी ने शेयर किया है। कैप्शन में लिखा है ‘एक ऐसी गर्लफ्रेंड तो मैं भी डिजर्व करता हूं’। वहीं इसे पढ़कर लोग भी मजे लेने लगे। एक यूजर बोला “बस कर जा बहन। वरना इस कबूतर का दम घुट जाएगा।” दूसरा बोला “यह देखने से पहले मेरी आंखों फुट क्यों नहीं गई।” तीसरा बोला “मुझे तो ये पढ़कर ही उल्टी आ रही है।” एक ने कहा “अब पता चला प्रेमी ने इसे क्यों छोड़ा। बहुत पकाऊ और बड़बोली है।”

  • बिना टहनी काटे 125 साल पुराने पीपलˈ के पेड़ पर ही बना दिया 4 मंजिला घर, अंदर की बनावट मन मोह लेगीˌ

    बिना टहनी काटे 125 साल पुराने पीपलˈ के पेड़ पर ही बना दिया 4 मंजिला घर, अंदर की बनावट मन मोह लेगीˌ

    बिना टहनी काटे 125 साल पुराने पीपलˈ के पेड़ पर ही बना दिया 4 मंजिला घर, अंदर की बनावट मन मोह लेगीˌ

    जिस पीपल की छांव में एक व्यक्ति बचपन में खेला और बड़े होने पर उसकी छांव में बैठा, और जब घर बनाने के बारे में उसने सोचा तो उसे वही पीपल का पेड़ फिर नजर आया। उसके बाद उस परिवार ने पीपल के वृक्ष के बीच अपना घर बनाने की ठान ली और शानदार घर बनाकर दिखा दिया।

    जबलपुर में बना ट्री-हाउस

    इस ट्री-हाउस के निर्माण को पूरा कर दिखाया है एमपी में जबलपुर के केशरवानी परिवार ने। इस परिवार ने 125 साल पुराने पीपल के पेड़ को बिना काटे ही अपना घर बनाया है। इस अनोखे तीन मंजिला इमारत में सबसे नीचे पेड़ की जड़ तो ऊपर इसकी शाखाएं दिखाई देती हैं। परिवार का कहना है कि पेड़ को बचाने के लिए उन्होंने ऐसे घर बनाया है।

    125 साल पुराने पेड़ को बिना काटे बना घर

    जबलपुर से लगे पनागर इलाके में एक ऐसा अनोखा घर बसा हुआ है। इस घर को ट्री हाउस कहना गलत नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि एक 125 साल पुराने पीपल के विशाल पेड़ को काटे बगैर मकान के मालिक ने उसमें घर बनाया है।

    तीन मंजिला इस इमारत में सबसे नीचे फ्लोर पर पीपील की जड़ है तो ऊपर पेड़ की शाखाएं हैं। एक विशाल पेड़ को बचाने के साथ बनाया गया यह घर सभी को पर्यावरण संरक्षण की सीख दे रहा है।

    घर के सदस्य की तरह रहता है पेड़

    केशरवानी परिवार घर में 125 साल पुराना पीपील का पेड़ भी उनके साथ एक जीवित सदस्य की तरह रहता है। घर के सभी सदस्य इस प्राचीन वृक्ष की देखभाल करते हैं तो वहीं ये वृक्ष परिवार के लोगों को 24 घंटे ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है। इस पेड़ की शाखाएं घर की खिड़कियों से बाहर निकलती हैं।

    27 साल पहले रखी गई घर की नींव

    इस घर की नींव 27 साल पहले रखी गई थी। इस घर को स्व. डॉ. मोतीलाल केशरवानी ने बनवाया था। उनके बेटे के मुताबिक, मोतीलाल केशरवानी इस पेड़ की छांव में पले-बढ़े और जब मकान बनाने की बारी आई तो इस पेड़ को अपने साथ रखने की इच्छा ज़ाहिर की।

    जमीन के बीच में लगे पीपल के पेड़ के कारण मकान बनाने में काफी दिक्कत आ रही थी, लेकिन इसके बावजूद भी केशरवानी ने पीपल के पेड़ को काटने से मना कर दिया। हालांकि उनके परिवार वालों ने बाद में पेड़ को काटे बिना उसके चारों तरफ से घर बनाने का फैसला लिया, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने इंजीनियर को बुलाया और इसके बाद घर बन कर तैयार हो गया।

    खास बात यह है कि पीपल के पेड़ के चारों तरफ से बना हुआ यह मकान पूरी तरह से ईको फ्रेंडली है। केशरवानी परिवार का यह घर पूरे शहर में चर्चित है। इस घर के नीचे मंदिर भी है, जहां लोग दूर-दूर से पूजा करने आते हैं।

    घर को बनाने के लिए पेड़ के किसी भी हिस्से का नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। यही वजह है कि डाइनिंग रूम से लेकर अन्य कमरों तक पेड़ का कोई ना कोई हिस्सा आपको नजर आ जाएगा।

    पर्यावरण संरक्षण के साथ आध्यात्मिक महत्व

    पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पीपल के वृक्ष का आध्यात्मिक महत्व भी है। मान्यताओं के मुताबिक पीपल के वृक्ष में 33 करोड़ देवी-देवताओं का भी वास होता है। यही वजह है कि घर के सदस्य इस वृक्ष की रोज़ाना पूजा पाठ भी करते हैं। वैज्ञानिक तौर पर भी पीपल एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो दिन और रात दोनों वक्त ऑक्सीजन देता है।

    घर वालों का कहना है कि अपने इस घर के साथ हम लोगों को यहीं संदेश देना चाहते हैं कि किसी भी चीज को नष्ट करना असान है , लेकिन बनाना मुश्किल।

  • पहली बार सेक्स को लेकर लड़कियों केˈ मन में होते हैं ऐसे-ऐसे वहम, जानिए आखिर क्या है सच?ˌ

    पहली बार सेक्स को लेकर लड़कियों केˈ मन में होते हैं ऐसे-ऐसे वहम, जानिए आखिर क्या है सच?ˌ

    पहली बार सेक्स को लेकर लड़कियों केˈ मन में होते हैं ऐसे-ऐसे वहम, जानिए आखिर क्या है सच?ˌ

    First Time Sex: दुनिया भर में किशोरावस्था से गुजर रही लड़कियों की यही हकीकत है. चाहे वे भारत के ग्रामीण इलाके में रहती हों या किसी आधुनिक मोहल्ले में, सबमें एक समानता है कि पहली बार सेक्स के दैरान दर्द होगा.

    सेक्स के दौरान खून का आना संभव है. यौन संचारित संक्रमण होने का भी लगातार डर बना रहता है. इसके अलावा, गर्भवती होने पर महिलाओं को प्रसव पीड़ा भी सहनी पड़ती है. हालांकि  प्रसव के दौरान महिलाओं के ऐसे वीडियो देखनें को मिलतें हैं जिनमें वे बिल्कुल भी नहीं चीखतीं, फिर भी इससे जुड़ा डर कम नहीं होता. दूसरी ओर, लड़कों के साथ ऐसी बातचीत नहीं होती. वे उत्तेजना और चरमसुख के बारे में बात करते हैं. इस बीच, महिलाओं में सेक्स को लेकर कई गलतफहमियां और डर पनपने लगते हैं. इससे एक साथी के लिए सेक्स के प्रति आशंकाएं पैदा हो जाती हैं. महिलाएं मान लेती हैं कि दर्द होना लाजमी है. ऐसा नहीं है कि उन्हें इस दर्द का डर सिर्फ़पहली बार यौन संबंध बनाने के दौरान ही होता है.

    क्या मासिक धर्म के दौरान सेक्स सही है या गलत?

    24 वर्षीय जेस कहती हैं कि उन्हें नहीं पता कि सेक्स के दौरान दर्द और उदासी से कैसे बचा जाए. उन्होंने कहा, “सेक्स के बारे में मैंने जो कुछ भी सुना था, उससे मैं बहुत तनाव में थी. मैं बहुत सतर्क थी. मुझे ऑर्गेज्म के बारे में कई मिथकों ने जकड़ रखा था. सेक्स के दौरान मुझे जो बताया जाता था, मैं उससे मुक्त भी नहीं हो पाती थी. मुझे बताया जाता था कि सेक्स दर्दनाक हो सकता है, और मुझे न चाहते हुए भी इसे स्वीकार करना पड़ता था.” उन्होंने आगे कहा, “मैंने एक सतर्क और विनम्र साथी चुना. मैंने खुद भी शारीरिक संबंधों के बारे में कई बातों पर शोध किया. अगर आपका साथी ठीक है, तो दर्द की बात पूरी तरह से गलत है.हन्नाह विटन अपने यूट्यूब चैनल पर सेक्स से जुड़ी हर बात पर चर्चा करती हैं. दर्दनाक सेक्स के बारे में, वह कहती हैं, “कई महिलाओं को सेक्स के दौरान दर्द इसलिए नहीं होता क्योंकि यह स्वाभाविक रूप से दर्दनाक होता है. बल्कि इसलिए होता है क्योंकि हम नहीं जानते कि अच्छा सेक्स कैसे किया जाता है.”

    सेक्स के दैरान दर्द

    कई बार सेक्स स्थितियां दर्दनाक हो सकती हैं. अगर आपको सेक्स के दौरान दर्द होता है, तो यह एक गंभीर समस्या है. “योनि में दर्द ,यौन संचारित रोगों (STI) के कारण हो सकता है. कभी-कभी, लेटेक्स कंडोम और साबुन भी जलन पैदा कर सकते हैं.” अगर दर्द बना रहे, तो आपको किसी यौन स्वास्थ्य क्लिनिक से संपर्क करना चाहिए.हालांकि, दर्दनाक संभोग पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों से जुड़ा है. 2017 में एक अध्ययन हुआ और पाया कि ब्रिटेन में 16 से 24 वर्ष की आयु की 10 प्रतिशत लड़कियों को दर्दनाक संभोग का अनुभव होता है .संयुक्त राज्य अमेरिका में एक अध्ययन किया गया, और शोधकर्ता सारा मैकलेलैंड ने महिलाओं और पुरुषों से पूछा कि उनके लिए कम यौन संतुष्टि का क्या मतलब है. पुरुषों ने इस सवाल का जवाब अपने साथी की उदासीनता बताया, जबकि महिलाओं ने दर्द बताया.