बेंगलुरु के बांदीपल्या में रहने वाली हरिणी (बदला हुआ नाम) को एक व्हाट्सएप ग्रुप में एक मैसेज मिला. इस ग्रुप में देश भर के प्रशिक्षक शामिल थे जिसमें अक्सर नौकरी के अवसरों की जानकारी शेयर की जाती थी. एक दिन ग्रुप में मैसेज आया कि बेंगलुरु का आर्मी पब्लिक स्कूल (एपीएस) में अनुशासन और संचार कौशल के लिए एक प्रशिक्षक की तलाश में है. साथ ही एक एक फोन नंबर भी दिया गया था.
हरिणी ने उत्साह में उस नंबर पर कॉल किया. दूसरी ओर से एक व्यक्ति ने खुद को एपीएस का प्रशासनिक कर्मचारी बताया. उसने नौकरी की आवश्यकताओं को समझाया और हरिणी की फीस पर चर्चा की दो घंटे के काम के लिए प्रति घंटे 5,000 रुपये. उसने वादा किया कि स्कूल का प्रभारी जल्द ही उनसे संपर्क करेगा. हरिणी को यह अवसर सुनहरा लगा.
जल्द ही एक और नंबर से व्हाट्सएप वॉयस कॉल आया. कॉल करने वाले ने दावा किया कि वह एमजी रोड पर स्थित एपीएस कैंपस से बोल रहा है. उसने हरिणी की प्रोफाइल की तारीफ की और कहा कि स्कूल उनकी सेवाएं लेना चाहता है. लेकिन उसने एक ‘प्रोटोकॉल’ की बात की. चूंकि यह एक सैन्य संस्थान था हरिणी को वेंडर के रूप में पंजीकरण करना होगा. विश्वास में आकर हरिणी ने अपनी आधार नंबर शेयर कर दी. इसके बाद ठग ने अगला कदम बताया डिजिटल भुगतान पंजीकरण. उसने कहा कि हरिणी को अपना यूपीआई आईडी लिंक करना होगा और एक ओटीपी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. हरिणी ने निर्देशों का पालन किया और ओटीपी के साथ अपना पिन डाला. कुछ ही सेकंड में उनके खाते से 26,000 रुपये निकाल लिए गए.
हरिणी ने जब विरोध किया तो ठग ने उन्हें कॉल पर बनाए रखा. अपनी बात को विश्वसनीय बनाने के लिए उसने एक नकली सैन्य आईडी भेजी और बार-बार देशभक्ति का सहारा लिया. ‘जय हिंद’, ‘जय इंडियन आर्मी’ इस बात से हरिणी को उस आदमी पर पूरा भरोसा हो गया. इसके बाद ठग ने एक वैकल्पिक फोन नंबर मांगा. हरिणी ने अपने पति दिनेश का नंबर दे दिया. लेकिन ठगों ने वही चाल दिनेश के साथ दोहराई. देशभक्ति की भावनाओं का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने दिनेश को भी उसी प्रक्रिया में फंसाया. इस बार चार लेनदेन में उनके खाते से लगभग 1.9 लाख रुपये निकाल लिए गए.
एक घंटे के भीतर दंपति ने 2.1 लाख रुपये से अधिक गंवा दिए. सदमे में डूबे दिनेश ने शुक्रवार को बांदीपल्या पुलिस में शिकायत दर्ज की. दंपति ने अपने बैंक और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन (1930) से भी संपर्क किया. पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत मामला दर्ज किया और ठगों के खातों को फ्रीज करने की कोशिश शुरू की.
मेहनत, लगन और जज्बा, यह तीन ऐसी चीजें है जो आपका हर सपना साकार कर सकती है। फिर इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप अमीर हैं या गरीब। अब युवा क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal) की स्टोरी ही ले लीजिए। यशस्वी एक जमाने में गोलगप्पे बेचा करते थे। उन्होंने कई रातें टेंट में भूखे पेट सोकर गुजारी। लेकिन वह इन चुनौतियों से निराश नहीं हुए। बल्कि मेहनत कर हर मुसीबत का डटकर सामना किया। इनकी सफलता की कहानी आपको भी प्रेरणा से भर देगी।
10 साल की उम्र में छोड़ा घर
यशस्वी जायसवाल उत्तर प्रदेश के भदोही के रहने वाले हैं। उनके पिता की एक छोटी सी दुकान है। मां हाउसवाइफ हैं। यशस्वी घर में सबसे छोटे हैं। उनका सपना एक क्रिकेटर बनने का था। इस सपने को पंख देने के लिए वह महज 10 साल की उम्र में घर छोड़कर मुंबई आ गए थे। उनके पिता ने भी उन्हें रोका नहीं। क्योंकि उनके पास बेटे के सुनहरे भविष्य के लिए कोई पैसे भी नहीं थे।
मुंबई में यशस्वी के एक रिश्तेदार संतोष पहले से रहते हैं। हालांकि उनका घर इतना बड़ा नहीं कि वह यशस्वी को भी रख लेते। ऐसे में यशस्वी ने एक डेयरी पर काम करना शुरू किया और वहीं रात को रहने लगे। लेकिन एक दिन डेयरी वाले ने उन्हें निकाल दिया। फिर उनके रिश्तेदार और मुस्लिम यूनाइटेड क्लब के मैनेजर संतोष ने वहां के मालिक से गुजारिश कर यशस्वी की रुकने की व्यवस्था ग्राउंड्समैन के साथ टेंट में करवा दी।
ठेले पर बेचता था गोलगप्पे
यहां दिन में यशस्वी आजाद मैदान में राम लीला के दौरान पानी-पूरी (गोलगप्पे) और फल के ठेले पर काम करने लगे। वह इस दौरान कभी-कभी लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने भी जाते थे। इस दौरान वह भगवान से यही प्रार्थना करते थे कि उनकी टीम का कोई सदस्य गोलगप्पे के ठेले पर न आ जाए। वरना उन्हें बड़ी शर्म आएगी। क्रिकेट में अच्छे रन बनाकर वह हफ्ता निकालने के लिए 200-300 रुपए कमा लेते थे।
यशस्वी के दिन तो अच्छे गुजरते थे लेकिन रातें मुश्किल बड़ी होती थी। कई बार वह घरवालों को याद कर घंटों रोया करते थे। टेंट में रहने वाले लड़के आपस में लड़ा करते थे। उनकी खाना बनाने को लड़ाई होती थी। यहां रोटी बनाने की जिम्मेदारी यशस्वी की होती थी। क्रिकेट मैदान में बाकी लड़के घर का बना लंच बॉक्स लाते थे। लेकिन यशस्वी को खुद बनाकर ले जाना पड़ता था। कई बार वह ऐसा नहीं कर पाते तो दूसरे लड़कों से नाश्ता करवाने की गुजारिश करते थे।
ऐसे बदली जिंदगी
आजाद मैदान में अक्सर जब कोई मैच होता था तो बॉल खो जाती थी। यशस्वी पैसों के लिए इस बॉल को ढूँढने का काम भी करते थे। एक बार जब वह मैदान में खेल रहे थे तो कोच ज्वाला सिंह का ध्यान उन पर गया। उत्तर प्रदेश के रहने वाले ज्वाला सिंह ने यशस्वी का हुनर देख उसे क्रिकेट की कोचिंग दी। जल्द उसका टैलेंट निखर गया और वह एक शानदार क्रिकेटर बन गया। इस चीज के लिए यशस्वी अपने कोच के हमेशा शुक्रगुजार रहते हैं।
एक बार यशस्वी बेंगलुरु में स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी गए। यहां उनकी दोस्ती क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन से हो गई। साल 2018 में अर्जुन यशस्वी को घर ले गए। यहां उन्होंने उसे अपने पिता से मिलवाया। सचिन यशस्वी के संघर्ष की कहानी सुनकर इतना प्रभावित हुए कि अपना बल्ला गिफ्ट कर दिया। कहा कि इससे अपना डेब्यू मैच खेलना।
नाम दर्ज किए कई रिकॉर्ड्स
यशस्वी मीडिया की नजरों में तब आए जब उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी 2019 में मुंबई की तरफ से खेलते हुए दोहरा शतक और तीन शतकों से पांच मैचों में कुल 504 रन बनाए। वह ऐसा करने वाले कम उम्र के दुनिया के पहले बल्लेबाज भी हैं। उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी की एक पारी में 12 छक्के लगाए। ऐसा आजतक कोई नहीं कर पाया था। वहीं उन्होंने अंडर-19 एशिया कप में भी शानदार प्रदर्शन किया था।
इसके बाद यशस्वी ने अंडर-19 वर्ल्ड कप 2020 में एक शतक और 4 अर्धशतक के साथ 400 रन बनाकर सबका दिल जीत लिया। वह इसमें ‘मैन ऑफ द टूर्नामेंट’ भी चुने गए। इसका नतीजा ये हुआ कि साल 2020 की IPL नीलामी के दौरान राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 2.4 करोड़ में खरीदा। इन दिनों यशस्वी ईरानी ट्रॉफी में इतिहास रचने को लेकर चर्चा में है। इसमें उन्होंने रेस्ट ऑफ इंडिया की तरफ से खेलते हुए मप्र के खिलाफ पहली पारी में दोहरा शतक, जबकि दूसरी पारी में एक शतक जड़ा। वह ऐसा उन्होंने अपना नाम रिकॉर्ड बुक में दर्ज करा लिया।
यूरिक एसिड का बढ़ने की समस्या बडी तेजी से बढ़ रही है। आयु बढ़ने के साथ-साथ यूरिन एसिड गाउट आर्थराइटिस समस्या का होना तेजी से आंका गया है। जोकि लाईफ स्टाईल, खान-पान, दिनचर्या के बदलाव से भोजन पाचन प्रक्रिया के दौरान बनने वाले ग्लूकोज प्रोटीन से सीधे यूरिन एसिड में बदलने की प्रक्रिया को यूरिन एसिड कहते हैं। भोजन पाचन प्रक्रिया दौरान प्रोटीन से ऐमिनो एसिड और प्यूरीन न्यूक्लिओटाइडो से यूरिक एसिड बनता है।
यूरिक एसिड का मतलब है, जो भोजन खाया जाता है, उसमें प्यूरीन पोष्टिकता संतुलन की कमी से रक्त में असंतुलन प्रक्रिया है। जिससे प्यूरीन टूटने से यूरिक एसिड बनता है। यूरिक ऐसिड एक तरह से हड्डियों जोड़ों अंगों के बीच जमने वाली एसिड़ क्रिस्टल है। जोकि चलने फिरने में चुभन जकड़न से दर्द होता है। जिसे यूरिक एसिड कहते हैं। शोध में यूरिक एसिड को शरीर में जमने वाले कार्बन हाइड्रोजन आक्सीजन नाइट्रोजन सी-5, एच-4, एन-4, ओ-3 का समायोजक माना जाता है।
यूरिक एसिड समय पर नियत्रंण करना अति जरूरी है। यूरिक एसिड बढ़ने पर समय पर उपचार ना करने से जोड़ों गाठों का दर्द, गठिया रोग, किड़नी स्टोन, डायबिटीज, रक्त विकार होने की संभावनाएं ज्यादा बढ़ जाती है। रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा को नियत्रंण करना अति जरूरी है।
➡ यूरिक एसिड (Uric Acid) के लक्षण :
पैरो-जोड़ों में दर्द होना।
पैर एडियों में दर्द रहना।
गांठों में सूजन
जोड़ों में सुबह शाम तेज दर्द कम-ज्यादा होना।
एक स्थान पर देर तक बैठने पर उठने में पैरों एड़ियों में सहनीय दर्द। फिर दर्द सामन्य हो जाना।
पैरों, जोड़ो, उगलियों, गांठों में सूजन होना।
शर्करा लेबल बढ़ना। इस तरह की कोई भी समस्या होने पर तुरन्त यूरिक एसिड जांच करवायें।
➡ यूरिक एसिड (Uric Acid) नियत्रंण करने के आर्युवेदिक तरीके :
चोबचीनी का चूर्ण (यह आपको आयुर्वेदिक स्टोर या पंसारी की दुकान पर मिल जायेगा) आधा चम्मच सुबह खाली पेट और रात को सोने के समय पानी से लेने पर कुछ ही दिनों में यूरिक एसिड (Uric Acid) ख़त्म हो जाता है। यह उपाय बहुत चमत्कारी है क्योंकि की यह आजमाया हुआ है।
यूरिक एसिड बढ़ने पर हाईड्रालिक फाइबर युक्त आहार खायें। जिसमें पालक, ब्रोकली, ओट्स, दलिया, इसबगोल भूसी फायदेमंद हैं।
आंवला रस और एलोवेरा रस मिश्रण कर सुबह शाम खाने से 10 मिनट पहले पीने से यूरिक एसिड कम करने में सक्षम है।
टमाटर और अंगूर का जूस पीने से यूरिक एसिड तेजी से कम करने में सक्षम है।
तीनो वक्त खाना खाने के 5 मिनट बाद 1 चम्मच अलसी के बीज का बारीक चबाकर खाने से भोजन पाचन क्रिया में यूरिक ऐसिड नहीं बनता।
1 चम्मच शहद और 1 चम्मच अश्वगन्धा पाउडर को 1 कप गर्म दूध के साथ घोल कर पीने से यूरिक एसिड नियत्रंण में आता है।
यूरिक एसिड बढ़ने के दौरान जैतून तेल का इस्तेमाल खाने तड़के-खाना बनाने में करें। जैतून तेल में विटामिन-ई एवं मिनरलस मौजूद हैं। जोकि यूरिक एसिड नियत्रंण करने में सहायक हैं।
यूरिक एसिड बढ़ने पर खाने से 15 पहले अखरोट खाने से पाचन क्रिया शर्करा को ऐमिनो एसिड नियत्रंण करती है। जोकि प्रोटीन को यूरिक एसिड़ में बदलने से रोकने में सहायक है।
विटामिन सी युक्त चीजें खाने में सेवन करें। विटामिन सी यूरिक एसिड को मूत्र के रास्ते विसर्ज करने में सहायक है।
रोज 2-3 चैरी खाने से यूरिक एसिड नियत्रंण में रखने में सक्षम है। चेरी गांठों में एसिड क्रिस्टल नहीं जमने देती।
सलाद में आधा नींबू निचोड़ कर खायें। दिन में 1 बार 1 गिलास पानी में 1 नींबू निचैंड कर पीने से यूरिक एसिड मूत्र के माध्यम से निकलने में सक्षम है। चीनी, मीठा न मिलायें।
तेजी से यूरिक एसिड घटाने के लिए रोज सुबह शाम 45-45 मिनट तेज पैदल चलकर पसीना बहायें। तेज पैदल चलने से एसिड क्रिस्टल जोड़ों गांठों पर जमने से रोकता है। साथ में रक्त संचार को तीब्र कर रक्त संचार सुचारू करने में सक्षम है। पैदल चलना से शरीर में होने वाले सैकड़ों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। तेज पैदल चलना एसिड एसिड को शीध्र नियत्रंण करने में सक्षम पाया गया है।
बाहर का खाना पूर्ण रूप से बन्द कर दें। घर पर बना सात्विक ताजा भोजन खायें। खाने में ताजे फल, हरी सब्जियां, सलाद, फाइबर युक्त संतुलित पौष्टिक आहर लें।
रोज योगा आसान व्यायाम करें। योग आसान व्यायाय यूरिक एसिड को घटाने में मद्दगार है। साथ में योगा-आसान-व्यायाम करने से मोटापा वजन नियत्रंण रहेगा।
ज्यादा सूजन दर्द में आराम के लिए गर्म पानी में सूती कपड़ा भिगो कर सेकन करें।
यूरिक एसिड समस्या शुरू होने पर तुरन्त जांच उपचार करवायें। यूरिक एसिड ज्यादा दिनों तक रहने से अन्य रोग आसानी से घर बना लेते हैं।
➡ यूरिक ऐसिड (Uric Acid) बढ़ने पर खान-पान :
यूरिक एसिड बढ़ने पर मीट मछली सेवन तुरन्त बंद कर दें। नॉनवेज खाने से यूरिक एसिड तेजी से बढ़ता है। औषधि दवाईयां असर कम करती है।
यूरिक एसिड बढ़ने पर अण्डा का सेवन पूर्ण रूप से बंद कर दें। अण्डा रिच प्रोटीन वसा से भरपूर है। जोकि यूरिक एसिड को बढ़ता है।
बेकरी से बनी सही खाद्य सामग्री बंद कर दें। बेकरी फूड प्रीजरवेटिव गिला होता है। जैसेकि पेस्ट्री, केक, पैनकेक, बंन्न, क्रीम बिस्कुट इत्यादि।
यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त जंकफूड, फास्ट फूड, ठंडा सोडा पेय, तली-भुनी चीजें बन्द कर दें। जंकफूड, फास्टफूड, सोडा ठंडा पेय पाचन क्रिया को और भी बिगाड़ती है। जिससे एसिड एसिड तेजी से बढता है।
चावल, आलू, तीखे मिर्चीले, चटपटा, तले पकवानों का पूरी तरह से खाना बन्द कर दें। यह चीजें यूरिक एसिड बढ़ाने में सहायक हैं।
बन्द डिब्बा में मौजूद हर तरह की सामग्री खाना पूरी तरह से बंद कर दें। बन्द डब्बे की खाने पीने की चीजों में भण्डारण के वक्त कैम्किल रसायन मिलाया जाता है। जैसे कि तरह तरह के प्लास्टिक पैक चिप्स, फूड इत्यादि। हजारों तरह के बन्द डिब्बों और पैकेट की खाद्य सामग्री यूरिक एसिड तेजी बढ़ाने में सहायक है।
एल्कोहन का सेवन पूर्ण रूप से बन्द कर दें। बीयर, शराब यूरिक एसिड तेजी से बढ़ती है। शोध में पाया गया है कि जो लोग लगातार बीयर शराब नशीली चीजों का सेवन करते हैं, 70 प्रतिशत उनको सबसे ज्यादा यूरिक एसिड की समस्या होती है। यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त बीयर, शराब पीना बन्द कर दें। बीयर शराब स्वस्थ्य व्यक्ति को भी रोगी बना देती है। बीयर, शराब नशीली चीजें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
आज के समय में YouTube हर किसी का पसंदीदा प्लेटफार्म है, फिर चाहे पढ़ाई की वीडियो देखनी हो, गाने सुनने हों या खबरें जाननी हों। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हमारे पास इंटरनेट नहीं होता, जैसे सफर में या जब नेटवर्क ठीक नहीं चलता। तब YouTube चलाना मुश्किल लगता है। पर अब ऐसा नहीं है। बिना इंटरनेट के भी YouTube चलाना बहुत आसान है। बस थोड़ी सी समझदारी और सही तरीके से कुछ चीजें करके आप बिना इंटरनेट के भी वीडियो देख सकते हैं।
ऑफलाइन यूट्यूब देखने का तरीका
अगर आप चाहते हैं कि आपका पसंदीदा वीडियो बिना किसी रुकावट के आप कभी भी देख सकें, तो सबसे पहले आपको यूट्यूब ऐप में जाकर अपने पसंदीदा वीडियो को इंटरनेट कनेक्टिविटी के समय प्लेय करना होगा। वीडियो प्ले करने के बाद नीचे डाउनलोड (Download) का विकल्प दिखाई देगा।
इस ऑप्शन पर क्लिक करें और वीडियो की क्वालिटी चुनें – लो, मीडियम या हाई। अगर आप मोबाइल डेटा से वीडियो डाउनलोड कर रहे हैं, तो लो क्वालिटी सही रहती है। लेकिन अगर आप Wi-Fi कनेक्शन का उपयोग कर रहे हैं, तो हाई क्वालिटी वीडियो का आनंद लें। एक बार क्वालिटी सेलेक्ट करने के बाद वीडियो डाउनलोड होना शुरू हो जाएगा और फिर इसे बिना इंटरनेट के कभी भी देखा जा सकता है।
बिना इंटरनेट डाउनलोड किया वीडियो कैसे देखें?
जब आपके फोन में इंटरनेट नहीं हो, तब भी आप यूट्यूब पर पहले से डाउनलोड किए गए वीडियो देख सकते हैं। इसके लिए आपको यूट्यूब ऐप ओपन करना है और ऊपर दाईं ओर प्रोफाइल आइकन पर क्लिक करना है। इसके बाद डाउनलोड्स (Downloads) सेक्शन में जाएं। यहां वो सभी वीडियो होंगे जो आपने सेव किए हैं। आप जिसे देखना चाहें उस पर टैप करें और वीडियो प्ले हो जाएगा – बिना किसी इंटरनेट के।
Fuel Pump Tips: कई बार आपको पेट्रोल भरवाने के बाद ऐसा महसूस हो सकता है कि आपने जितने रुपये का पेट्रोल भरवाया, उस हिसाब से आपकी गाड़ी ने माइलेज नहीं दी। ऐसे में आपके साथ पेट्रोल पंप पर कोई ठगी न हो इसके लिए आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स (petrol pump charges) के बारे में बताने जा रहे है, जिन्हें अपनाकर आप सुरक्षित रह सकते हैं.
रेट में गड़बड़ी-
कुछ-कुछ पेट्रोल पंप के कर्मचारी या मालिक पेट्रोल या फ्यूल की कीमतों में हेरा-फेरी करके ठगी कर सकते हैं। इसलिए जब भी गाड़ी में फ्यूल भराएं, तो मीटर जरूर चेक करें। ताकि आप इस तरह की ठगी से बच सकें।
फीलिंग मशीन में चिप से खिलवाड़-
कई बार कम तेल भरने के लिए फ्यूल पंप मालिक और कर्मी मशीन में एक इलेक्ट्रॉनिक चिप (electronic chip) लगा देते हैं. जिससे मीटर पर पूरी मात्रा में तेल दिखाएगा, लेकिन ग्राहक को कम फ्यूल मिलता है.
बिना अनुमति के सिंथेटिक तेल भरना-
कुछ पेट्रोल पंपों (petrol pump) पर ग्राहकों के वाहन में बिना पूछे रेगुलर फ्यूल की जगह सिंथेटिक तेल (synthetic oil) भर दिया जाता है. सिंथेटिक तेल, सामान्य तेल से करीब 5 से 10 प्रतिशत महंगा होता है, इसलिए ग्राहकों को अधिक राशि चुकानी पड़ती है. इसलिए तेल भराने से पहले पंप अटेंडेंट को इस बारे में साफ निर्देश देना न भूलें.
खराब फ्यूल क्वालिटी-
यदि आपको अपने वाहन में भरे जा रहे फ्यूल की क्वालिटी पर शक है, तो आप इंजन फिल्टर पेपर टेस्ट की डिमांड कर सकते हैं. कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के अनुसार हर पेट्रोल पंप पर फिल्टर पेपर (filter paper) होना चाहिए और जरूरत पड़ने पर ग्राहक को दिया जाना चाहिए.
पेट्रोल मिलावटी है या नहीं यह जानने के लिए फिल्टर पेपर पर पेट्रोल की कुछ बूंदे डालें, अगर फिल्टर पेपर पर दाग छूटता है तो पेट्रोल मिलावटी है और अगर ऐसा नहीं है तो पेट्रोल शुद्ध है. खराब क्वालिटी का फ्यूल आपके वाहन को भी नुकसान पहुंचा सकता है.
पेट्रोल का दाम-
जब भी आप पेट्रोल पंप पर जाएं तो पेट्रोल के कीमत (petrol price) की जांच जरूर कर लें. कोई भी पेट्रोल पंप डीलर, फ्यूल के लिए अधिक कीमत नही ले सकता है. इसलिए मशीन पर दिखने वाले फ्यूल के कीमत की जांच जरूर कर लें.
अमेरिका, चीन हो या जर्मनी और जापान, कोई भारत की तरक्की की रफ्तार के आसपास भी नहीं है। मुश्किल समय में भी भारत ने अपनी आर्थिक तेजी को कायम रखा है। इस ग्रोथ ने दुनिया को हैरान कर दिया है।
विश्व बैंक का कहना है कि आने वाले सालों में भी भारत की तरक्की की रफ्तार अच्छी रहेगी। भले ही दुनिया की बाकी अर्थव्यवस्थाएं थोड़ी धीमी पड़ जाएं। लेकिन, भारत की चाल बनी रहेगी।
विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की तरक्की थोड़ी कम होकर 6.3% रह सकती है। पहले जनवरी में अनुमान लगाया गया था कि यह 6.7% रहेगी। फिर भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। भारत 2015 में चीन को पीछे छोड़ सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गया था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस समय तेल की कीमतें कम थीं। देश में आर्थिक स्थिति स्थिर थी। सरकार ने कई बड़े सुधार किए थे।
मुश्किलों के बीच भी बनाए रखी रफ्तार 2015 से 2018 के बीच भारत की जीडीपी 7.5% से 8% के बीच बढ़ी। वहीं, चीन की तरक्की 6.5% से 6.7% तक धीमी हो गई थी क्योंकि वह निवेश की जगह लोगों के खर्च पर ज्यादा ध्यान दे रहा था। इस दौरान सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ जैसे कई कार्यक्रम शुरू किए, एफडीआई के नियमों को आसान बनाया और पैसे के मामले में सुधार किए। 2017 में जीएसटी लागू किया गया। इससे पूरे देश में एक जैसा टैक्स सिस्टम बना।
हालांकि, 2019 और 2020 में भारत को कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 2018 के अंत और 2019 में बैंकों और NBFC में परेशानी आने लगी। लोगों ने कम चीजें खरीदीं और निजी कंपनियों ने भी कम निवेश किया। वित्त वर्ष 2019-20 में GDP की वृद्धि दर गिरकर 5% हो गई, जबकि पिछले साल यह 6.1% थी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दुनिया की आर्थिक स्थिति खराब थी। कंस्ट्रक्शन का काम धीमा हो गया था। लोगों ने कम चीजें खरीदीं और बैंकों को भी दिक्कतें हो रही थीं।
2020 में कोरोना महामारी आई। इससे अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान हुआ। वित्त वर्ष 2020-21 में GDP 7.3% तक गिर गई, जो आजादी के बाद सबसे खराब प्रदर्शन था। लेकिन, भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में जोरदार वापसी की और 8.7% की ग्रोथ हासिल की। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लोगों ने खूब खरीदारी की, सरकार ने भी खूब खर्च किया और सेवाओं और निर्यात में भी सुधार हुआ। 2022 से भारत लगातार 6-7% की दर से बढ़ रहा है, जबकि दुनिया के कई बड़े देशों के साथ चीन की अर्थव्यवस्था धीमी हो गई है। विश्व बैंक, IMF और UN ने भी कहा है कि 2021 से भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। वित्त वर्ष 2025-26 तक यह इसी तरह आगे बढ़ता रहेगा।
आने वाले सालों में भी सबसे तेजी से बढ़ेगा भारत यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत आने वाले सालों में भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। यह चीन, अमेरिका, यूरोप और जर्मनी जैसे देशों से भी आगे रहेगा। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि भारत की आर्थिक स्थिति कितनी मजबूत है।
दुनिया की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ रही है, लेकिन भारत स्थिर है। अनुमान है कि 2025 में दुनिया की अर्थव्यवस्था सिर्फ 2.3% की दर से बढ़ेगी, जो पहले के अनुमान से कम है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कई देशों के बीच व्यापार को लेकर तनाव है। अमेरिका और चीन के बीच भी रिश्ते ठीक नहीं हैं, जिससे व्यापार में दिक्कतें आ रही हैं। विश्व बैंक का कहना है कि 2025 में दुनिया का व्यापार 2% से भी कम बढ़ेगा, जबकि पहले यह 4-5% की दर से बढ़ता था।
दुनिया के कई बड़े बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ा दी हैं। इससे लोगों का खर्च और कंपनियों का निवेश कम हो गया है। यूक्रेन में युद्ध जारी है। अमेरिका और चीन के बीच तनाव है। साथ ही ऊर्जा की आपूर्ति में भी दिक्कतें आ रही हैं। इससे निवेशकों का भरोसा कम हुआ है। जर्मनी और जापान जैसे देशों में बूढ़े लोगों की संख्या बढ़ रही है। उत्पादन कम हो रहा है। नई चीजें भी कम बन रही हैं। इससे उनकी अर्थव्यवस्था धीमी हो गई है।
अमेरिका, चीन, यूरोप… सब पड़ गए हैं ठंडे विश्व बैंक के अनुसार, अमेरिका की अर्थव्यवस्था 2025 में 1.4% की दर से बढ़ेगी, जो जनवरी में अनुमानित 2.3% से कम है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ब्याज दरें बढ़ने का असर अब दिख रहा है। महंगाई की वजह से लोग कम चीजें खरीद रहे हैं। चुनाव की वजह से सरकार भी कम निवेश कर रही है।
चीन की अर्थव्यवस्था 2025 में 4.5% की दर से बढ़ेगी, जो पहले जितनी तेज नहीं है। हालांकि, सरकार के पास अभी भी कई तरीके हैं जिनसे वह अर्थव्यवस्था को सुधार सकती है। लेकिन, चीन को रियल एस्टेट में दिक्कतें आ रही हैं। काम करने वाले लोगों की संख्या कम हो रही है। दूसरे देशों के साथ उसके रिश्ते भी खराब हो रहे हैं, जिससे लोग चीन में निवेश करने से डर रहे हैं।
यूरोप की अर्थव्यवस्था सिर्फ 1% की दर से बढ़ने के आसार हैं। रूस पर प्रतिबंध लगने के बाद ऊर्जा की कमी हुई है। चीजों के दाम बढ़ गए हैं। इससे उत्पादन कम हो रहा है। जर्मनी ज्यादातर चीन को चीजें बेचता है, लेकिन चीन की अर्थव्यवस्था धीमी होने की वजह से जर्मनी को भी नुकसान हो रहा है। जर्मनी ने अभी तक पर्यावरण को बचाने के लिए ज्यादा निवेश नहीं किया है। इससे आने वाले समय में उसे और भी नुकसान हो सकता है।
भारत क्यों अलग है?अनुमान है कि भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में 6.3% की दर से बढ़ेगी। यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था दूसरे देशों से अलग है। भारत दूसरे देशों को चीजें बेचने पर ज्यादा निर्भर नहीं है, बल्कि यहां लोग खुद ही खूब खरीदारी करते हैं। भारत में मध्यम वर्ग के लोगों की संख्या बढ़ रही है, शहर बढ़ रहे हैं और लोगों की आमदनी भी बढ़ रही है। इससे लोग खूब खरीदारी करते हैं और अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं होता है।
भारत में युवाओं की संख्या ज्यादा है। यहां के लोगों की औसत उम्र 29 साल है। इससे काम करने वाले लोगों की संख्या के साथ उत्पादन भी बढ़ रहा है। वहीं, यूरोप, चीन और जापान में बूढ़े लोगों की संख्या ज्यादा है। इससे उनकी अर्थव्यवस्था धीमी हो रही है। सरकार सड़कें, रेलवे, ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी चीजों पर खूब पैसा खर्च कर रही है। इससे अर्थव्यवस्था को बहुत फायदा हो रहा है। इस निवेश की वजह से निजी कंपनियां भी आगे आ रही हैं। चीजें बनाने और उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में निवेश कर रही हैं।
यूं तो आजकल किस पर भरोसा किया जाए या किस पर नहीं…ये तो भगवान भी नहीं जानते हैं। झूठ फऱेब की इस दुनिया में लोग अपने फायदे के लिए किसी भी हद से गुजरने के लिए तैयार होते हैं। आपका भरोसा कोई भी बड़ी ही आसानी से तोड़ देता है, जिसकी वजह से आपको बहुत बुरा भी लगता है। अब ऐसे में सबसे बड़ी समस्या ये होती है कि आप किस पर भऱोसा करें या किस पर नहीं। कई बार तो ऐसा भरोसा टूटता है, जिसके बाद तो आपको भरोसे शब्द से भी नफऱत होने लगती है। तो चलिए आज हम आपको एक ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं, जिससे आप यह पता लगा सकते हैं कि आप जिस इंसान पर भरोसा कर रहे हैं, वो भरोसे के लायक है भी या नहीं?
यूं तो हाथ की लकीरें भाग्य के लिए होती है। लोगों के हाथों की लकीरों से उनका भाग्य बताया जाता है, लेकिन अगर हम कहें कि हाथ से ही आप यह पता लगा सकते हैं कि सामने वाला फरेबी या सच्चा, तो आपको कैसा लगेगा? अरे भई इसके लिए आपको कुछ नहीं करना है, बल्कि आपको सिर्फ और सिर्फ फिंगरप्रिंट चेक करना होगा। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आखिर किस तरह से आप फिंगरप्रिंट से यह जान सकते हैं कि आप जिस पर भरोसा कर रहे हैं, वो कहीं आपको धोखा तो नहीं दे रहा है।
1.अंगूठे में छल्ले का निशान
जिस इंसान के अंगूठे पर छल्ले का निशान होता है, वो इंसान अक्सर दूसरों पर अपनी मर्जी चलाता है। ऐसे में अगर आपके पास भी ऐसा कोई है, तो आपको थोड़ा सा सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि वो सिर्फ आप अपना ऑर्डर थोपना जानता है। ऐसे लोगों को किसी की भी रोक टोक पसंद नहीं होती है, जिसकी वजह से लोग इनसे काफी परेशान रहते हैं।
2.अंगूठे में दोहरे गांठ का निशान
जिस इंसान के अंगूठे में दोहरा गांठ का निशान होता है, वो धोखेबाज होता है। अपने मतलब के लिए ये लोगों के साथ आते हैं। जब इनका मतलब पूरा हो जाता है, तो ये उस इंसान को धोखा दे देते हैं। इतना ही नहीं, ये ऐसे होते हैं कि लालच के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार रहते हैं। ऐसे इंसान से आपको बचकर रहना चाहिए, क्योंकि ये बिल्कुल भी भरोसे के पात्र नहीं होते हैं। ये आसानी से कोई भी झूठ बोलने के लिए तैयार रहते हैं।
3.अंगूठे में चक्राकार छल्ला
जिन लोगों के अंगूठे में इस तरह का छल्ला होता है, वो लोग बहुत ही ज्यादा विश्वसनीय होते हैं। ऐसे लोग किसी को भी चाहकर धोखा नहीं देते हैं। इनका मान सम्मान समाज में खूब होता है। ये लोग स्वभाव से ही मेहनती होते हैं, जिसकी वजह से इन्हें हर काम में सफलता मिलता है। नाम और फेम बनाने में माहिर होते हैं। अगर आपके पास भी कोई ऐसा इंसान हो तो आपको ऐसे इंसान को अपने पास ही रखना चाहिए।
4.अंगूठे में तंबू का निशान
जिन लोगों के पास ऐसा निशान होता है, वो मार्डन होने का सिर्फ दिखावा ही करते हैं। सच में तो ये पूरी तरह से पुराने ख्यालातों से ही घिरे होते हैं। ये अपने उसूलों के पक्के होते हैं। इनकी सोच को कोई भी नहीं बदल सकता है क्योंकि इन्हें पुरानी परंपरा ही सबसे अच्छी लगती है और उसी में जीना चाहते हैं।
Heart Problem: सेक्स एक शारीरिक क्रिया है, इसलिए जब दिल के मरीज से पीड़ित लोग संभोग करते हैं, तो दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.
Heart Problem: हाल ही में आई एक खबर ने लोगों को चौंका दिया है. मुंबई में एक व्यक्ति की नाबालिग के साथ यौन संबंध बनाते समय दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. इससे यह चिंता पैदा हो गई है कि क्या संभोग के दौरान दिल का दौरा पड़ना वाकई संभव है. इस मामले में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय लेना ज़रूरी है. आइए जानें कि क्या संभोग के दौरान दिल का दौरा पड़ने का खतरा ज़्यादा होता है.
क्या संभोग के दौरान दिल का दौरा पड़ सकता है?
हां, संभोग के दौरान दिल का दौरा पड़ सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब शरीर ज्यादा सक्रिय होता है, तो दिल का दौरा पड़ने का खतरा काफी बढ़ जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि संभोग वास्तव में एक प्रकार का व्यायाम है. जब आप संभोग करते हैं, तो आप एरोबिक्स, दौड़ना, सीढ़ियां चढ़ना या तैराकी जैसा व्यायाम कर रहे होते हैं. ऐसे में, जब शरीर ज़्यादा सक्रिय होता है, तो दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.
इन लोगों को होता है दिल का दौरा पड़ने का ज्यादा खतरा
जिन लोगों को पहले से ही दिल की बीमारी है, उन्हें सेक्स के दौरान दिल का दौरा पड़ने का ज्यादा खतरा होता है. डॉक्टरों का कहना है कि हृदय रोगियों या जिनकी सर्जरी हुई है, उन्हें सेक्स के दौरान दिल का दौरा पड़ने का खतरा ज्यादा होता है. इसका मतलब है कि अगर आपको दिल की बीमारी है, तो आपको सेक्स के बारे में ज्यादा सावधान रहना चाहिए कि क्योंकि दिल से जुड़ी बीमारियां हार्ट की कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं. इसलिए, जब आप सेक्स करते हैं, तो आपकी हृदय गति बढ़ जाती है. सेक्स एक प्रकार की शारीरिक गतिविधि है, और इसके दौरान रक्त संचार बढ़ने से हृदय गति बढ़ सकती है, पसीना बढ़ सकता है, सांस लेने में तकलीफ हो सकती है और थकान हो सकती है.
Disclaimer : प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है.
Tricks To Prevent Burning Green Chilli: मिर्च किसी भी खाने को चटपटा बनाने का काम करती है. हरी मिर्च में ‘कैप्साइसिन’ नाम का एक कंपाउंड होता है, जो मिर्च को उसका तीखापन देता है. किचन में मौजूद मिर्च को न सिर्फ खाने के स्वाद को बढ़ाने बल्कि, सेहत के लिए भी कमाल मानी जाती है. क्योंकि इसमें विटामिन ए, विटामिन सी विटामिन के, साथ ही फाइबर, पोटैशियम, आयरन और कॉपर जैसे गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को कई समस्याओं से बचाने में मदद कर सकते हैं. लेकिन हरी मिर्च को काटते समय अक्सर हाथ में जलन शुरू हो जाती है. अगर आप भी इस परेशानी को दूर करना चाहते हैं, तो इन घरेलू उपाय को अपना सकते हैं. तो चलिए बिना किसी देरी के जानते हैं.
मिर्च काटने के बाद हाथ की जलन कैसे कम करें- (Mirch Kadtne Ke Bad Hath Ki Jalan Kaise Kam Kare)
घी- (Ghee)
अगर आप भी मिर्च काटने के बाद होने वाली जलन से बचना चाहते हैं, तो मिर्च को काटने से पहले हाथ में घी लगा लें. क्योंकि घी एक परत बना देता है, जिससे कैप्साइसिन सीधे स्किन के संपर्क में नहीं आ पाता है और जलन से बचा जा सकता है.
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ठंडा पानी- (Cold Water)
मिर्च से होने वाली जलन को कम करने के लिए आप हाथों को ठंडे पानी में डुबोएं. चाहें तो ठंडे पानी में थोड़ा सा नमक या सिरका भी मिला सकते हैं. इससे हाथ में होने वाली जलन को कम करने में मदद मिल सकती है.
कैंची- (Canchi)
अगर आपको मिर्च काटने से होती है जलन तो आप हरी मिर्च को कैंची की मदद से काट सकते हैं. इससे मिर्च सीधे हाथ के संपर्क में नहीं आएगी और जलन से बच सकते हैं.
अपने पूरे जीवन को खंगलों तो लगता है कि स्कूल के दिन सबसे बेस्ट होते थे। ये वह दिन थे जब हमे दुनियादारी की कोई टेंशन नहीं होती थी। हम अपनी लाइफ अच्छे से इन्जॉय करते थे। आज स्कूल की हर यादें हमे याद आती है। फिर वह दोस्तों के साथ मस्ती मजाक हो, टीचर का पढ़ाना हो या फिर कोई गलती करने पर टीचर का सजा देना हो। वैसे टीचर अधिकतर बच्चों को कान पकड़कर उठक-बैठक लगाने की सजा ही देते थे। आप में से कई लोगों को भी ये सजा जरूर मिली होगी। लेकिन क्या आप ने कभी सोचा है कि आखिर बच्चों को यही पनिशमेंट क्यों दी जाती थी?
सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि इस कोरोना काल में आप ने कई पुलिसवालों को नियम तोड़ने पर नागरिकों को उठक बैठक लगवाते देखा होगा। इस तरह की सजा आज भी कई जगहों पर दी जाती है। ऐसे में क्या आप इस सजा को देने के पीछे की वजह जानते हैं? आप में से कई लोगों को इसका अंदाजा भी नहीं होगा। आपको जान हैरानी होगी कि इस सजा के पीछे एक वैज्ञानिक करण भी छिपा हुआ है।
कान पकड़कर उठक बैठक का इस्तेमाल कई लोग प्रार्थना के समय भी करते हैं। दक्षिण भारत के मंदिरों में यह प्रथा काफी प्रचलित है। वहीं कुछ लोग कसरत और व्यायाम के दौरान उठक-बैठक करना पसंद करते हैं। दरअसल ऐसा कहा जाता है कि उठक-बैठक करने से ध्यान केंद्रित करने में हेल्प मिलती है। ऐसा कर हमारी याद्दाश्त अच्छी रहती है। इसके अलावा नियमित रूप से उठक-बैठक करने से पेट के आसपास की चर्बी भी कम होती है। मतलब ये उठक-बैठक न सिर्फ आपका दिमाग शार्प करती है बल्कि आपकी तोंद को कम करने में भी मदद करती है।
आपको जान अचंभा होगा कि उठक बैठक के ऊपर ही कई वैज्ञानिक बहुत से अध्ययन कर चुके हैं। इनमें से एक रिसर्च की माने तो 1 मिनट तक कान पकड़कर उठक-बैठक लगाने से अल्फा वेव्स की एक्टिविटी बढ़ने लगती है। जब हम कान पकड़ते हैं तो लोब्स दबते हैं। इससे एक्यूप्रेशर का लाभ हमे मिलता है। इस एक्यूप्रेशर थ्योरी के अनुसार ब्रेन का दायां और बायां हिस्सा कान पकड़ने से एक्टिवेट हो जाता है। एक अन्य रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि पकड़कर उठक-बैठक लगाने से ब्रेन की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी में बढ़ोतरी होती है।
बस इतने सारे फ़ायदों को देखते हुए ही कई स्कूलों ने बच्चों को उठक बैठक लगाने की सजा देना शुरू कर दिया। देखते देखते सभी स्कूलों ने इतने अपना लिया। वैसे इस पनिशमेंट को देने का असल कारण शायद कई टीचरों को भी नहीं पता होगा। लेकिन अब आपको इसकी वजह पता है। तो अगली बार आप ये ज्ञान दूसरों को देकर इंप्रेस कर सकते हैं। और यदि टीचर या कोई और आपको उठक बैठक लगाने की सजा दे तो बुरा फिल करने की बजाय इसे फटाफट कर लें। इससे आपके शरीर को फायदा ही होगा।
अमेरिका के स्कूलों में तो वर्कशॉप में बच्चों को उठक-बैठक लगवाई जाती है। ऐसा कर वे इसमें बच्चों की रुचि बढ़ाते हैं। वहां इसे ‘सुपर ब्रेन योग’ के नाम से जाना जाता है।