शलजम की सब्जी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। विटामिन ए, सी और के से भरपूर इस हरे पत्तेदार को सलाद के रूप में भी खाया जाता है। इसमें कम कैलोरी होती है, जिस वजह से ये वजन कम करने वालों के लिए एक बेहतर विकल्प है। फाइबर से भरपूर ये सब्जी पाचन को बेहतर करने और आपको कब्ज जैसी गंभीर समस्या से बचाने में भी सहायक है। आइये जाने इससे होने वाले फायदों के बारे में!!
पाचन बढ़ाने में सहायक- शलजम में भरपूर मात्रा में फाइबर होते हैं, जिस वजह से ये मल त्याग में सुधार करने में सहायक है। अगर आप कब्ज की समस्या से पीड़ित हैं, तो ये सब्जी जरूर खाएं।
इम्युनिटी मजबूत करने में सहायक- अगर आप बार-बार सर्दी-खांसी और बुखार से पीड़ित होते हैं, तो शलजम को अपनी डायट में जरूर शामिल करें। ये इम्युनिटी मजबूत करने में सहायक है। पोषक तत्वों और फ्लेवोनोइड्स से भरपूर ये सब्जी आपको स्वस्थ रखती है।
हड्डियों के लिए बेहतर- विटामिन और पोटेशियम के अलावा शलजम कैल्शियम का भी एक समृद्ध स्रोत है, जो हड्डियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है।
खराब कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार– शलजम में पित्त या बाइल (bile) को अधिक अवशोषित करने की क्षमता होती है, जिससे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम होने में मदद मिलती है। इस तरह ये सब्जी हृदय रोगों के खतरे को भी कम करने में मदद करती है।
ब्लड प्रेशर कम करती है- एक अध्ययन के अनुसार, शलजम में पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है, जिस वजह से ये आपकी धमनियों को फैलाने और शरीर से सोडियम जारी करने में सहायक है। स्त्रोत : डॉ.नुश्खे
बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ कई तरह के CCTV कैमरा मार्केट में आ रहे हैं. लेकिन अब एक ऐसा कैमरा आ गया है जो एकदम LED बल्ब की तरह दिखता है लेकिन इसके बीच में CCTV कैमरा लगा हुआ है. इसे किसी भी जगह पर सीक्रेट तरीके से लगाया जा सकता है.
इसके जरिए 120 डिग्री एंगल की रिकॉर्डिंग की जा सकती है.इस कैमरे की सारी फुटेज को वाइफाई के जरिए मोबाइल, लैपटॉप या कम्प्यूटर पर आसानी से देखा जा सकता है. इसमें मेमोरी कार्ड भी इन्सर्ट किया जा सकता है, जिसमें रिकॉर्डिंग्स को सेव कर सकते हैं. सीसीटीवी क्या है?
घर और काम के स्थान पर सुरक्षा प्रदान करने का सबसे लोकप्रिय और प्रभावी तरीका है सीसीटीवी कैमरा. सीसीटीवी कैमरें चोरों के लिए एक बहुत ही सफल प्रतिबंध के रूप में कार्य कर सकते हैं, या निश्चित रूप से वे चोरो को कम से कम दो बार तो सोचने पर मजबूर करते है. इन दिनों सिक्युरिटी इक्विपमेंट के पीछे की टेक्नोलॉजी अविश्वसनीय रूप से उन्नत हो गयी है और फुटेज को साधारण टीवी या कंप्यूटर भी देखा जा सकता है.
क्लोज सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) इसे वीडिओ सर्वेलन्स के रूप में जाना है. यह एक क्लोज सर्किट सिस्टम है और इसमें सभी एलिमेंट्स सीधे जुड़े हुए हैं. सीसीटीवी सिक्युरिटी कैमेरों के द्वारा रिकॉर्ड किए गए पिक्चर या वीडिओ को प्रसारित नहीं किया जाता. इसके बजाय, वीडियो को DVR (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) या NVR (नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर) पर रिकॉर्ड किए जाते हैं.
इसकी एक और खासियत यह है कि इस कैमरे को 360 डिग्री तक आसानी से घुमाया जा सकता है. आइए कुछ बिंदुओं के माध्यम से समझें इसे…
LED बल्ब की तरह दिखता है ये CCTV कैमरा इसे सीक्रेट तरीके से लगाया जा सकता है.
इससे 120 डिग्री एंगल की रिकॉर्डिंग की जा सकती है. इसे वाईफाई के जरिए कनेक्ट किया जा सकता है.
इसमें मेमोरी कार्ड भी इन्सर्ट किया जा सकता है. इसे 360 डिग्री तक घुमाया जा सकता है.
नई बाइक खरीदने के बाद लोग शुरूआत में तो इसका काफी ध्यान रखते है उसे टनाटन बना कर रखते है लेकिन धीरे-धीरे वो इसका ध्यान रखना बंद कर देते है और बस अंधाधुंध चलाते रहते है। कई बार तो इंजन में से कई तरह की आवाजें आने लग जाती (bike engine damage reasons) है लेकिन लोग उसे सुन कर भी अनसुना कर देते है।
अगर आपकी बाइक के इंजन से भी आवाजें आ रही है तो आपको बता दें कि इसके ये 5 मुख्य कारण हो सकते है। यह संकेत हो सकता है कि इंजन में कुछ समस्या हो रही है जिसे तुरंत जांचना और ठीक करना जरूरी है। आज यहाँ 5 प्रमुख कारण दिए गए हैं जो इस समस्या के पीछे हो सकते (bike care tips) हैं। आइए आप भी जान लें…
-ढीले या क्षतिग्रस्त पार्ट्स कारण: कई बार क्या होता है कि इंजन के अंदर या बाहर के कुछ पार्ट्स (जैसे कि बोल्ट, नट्स, या पिस्टन) ढीले या क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे चलते समय आवाज आ सकती है। समाधान: इसके लिए जरूरी है कि सभी पार्ट्स की जांच करवाएं और ढीले या क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक करें या बदलवाएं। -स्पार्क प्लग की समस्या कारण: अब ये तो स्वाभाविक सी बात है कि अगर स्पार्क प्लग (spark plug) खराब हो या सही से काम नहीं कर रहा हो, तो इंजन सही से काम नहीं करेगा और इससे इंजन में आवाज पैदा हो सकती है। समाधान: जरूरी है कि आप स्पार्क प्लग की जांच करें। अगर यह गंदा हो या खराब हो गया हो, तो इसे साफ करें या बदलें। -इंजन के अंदर कार्बन का जमाव कारण: मान लो इंजन के अंदर कार्बन का जमाव हो जाए तो इंजन के अंदर कार्बन का जमाव (carbon accumulation in bike engine) बढ़ जाने से आवाज आने लगती है, खासकर अगर आपकी बाइक पुरानी हो या आपने उसमें नियमित सर्विसिंग नहीं करवाई हो। समाधान: आपको बाइक की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इंजन को साफ करवाएं और अगर जरूरत हो, तो डीकर्बोनाइजिंग प्रक्रिया करवाएं। -कम या गंदा इंजन ऑयल कारण: जानकारी के लिए बता दें कि इंजन ऑयल की कमी या उसमें गंदगी होने से इंजन के हिस्सों के बीच घर्षण बढ़ जाता है, जिससे आवाज आ सकती है। समाधान: इसके लिए आप इंजन ऑयल (engine oil level) के स्तर और उसकी गुणवत्ता की जांच करें। अगर ऑयल गंदा हो या कम हो तो इसे बदलें। -चेन की समस्या कारण: एक अन्य कारण के बारे में बता दें कि बाइक की चेन (bike chain set loose) का ढीला होना या उसका सही से ग्रीसिंग न होना इंजन से आने वाली आवाज का कारण हो सकता है। समाधान: चेन की टेंशन और ग्रीसिंग की जांच करें। जरूरत हो तो इसे ठीक करें या नई चेन लगवाएं। ऊपर बताए गए किसी भी कारण की वजह से आपकी बाइक के इंजन से आवाज (sound from bike engine) आ सकती है और अगर आप इसके बावजूद भी इसे नजरअंदाज करते है तो ये बाइक को खराब भी कर सकती है। इसलिए, अगर आपकी बाइक के इंजन से आवाज आ रही है, तो इसे जल्द से जल्द मैकेनिक से जांच करवाएं और इसे जल्द ही ठीक कराए।
शादी ब्याह एक बहुत बड़ा ईवेंट होता है। इसके सफलपूर्वक होने में लड़का लड़की की मर्जी और दोनों पक्षों के बीच की पारदर्शिता बेहद जरूरी होती है। यदि ऐसा न हो तो शादी टूटने और पूरे समाज में बदनामी होने का खतरा बना रहता है। अब बिहार के रहने वाले दूल्हे को ही ले लीजिए।
यह दूल्हा बड़ी खुशी खुशी बीते सोमवार अपनी बारात ले गया था। हालांकि यहां दूल्हे के हाथ में दिक्कत होने की वजह से दुल्हन से उससे शादी करने से इनकार कर दिया। दोनों पक्षों ने दुल्हन को समझाने की लाख कोशिशें की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। दुल्हन दूल्हे के साथ ससुराल जाने के लिए नहीं मानी। फिर शादी की रस्मों के कुछ ही मिनट बाद तलाक की रस्में की गई।
बताया जा रहा है कि दूल्हे के हाथ में जन्म से ही थोड़ी परेशानी है। ऐसे में जब वह सोमवार को अपनी बारात लेकर शादी करने पहुंचा तो यही हाथ उसकी शादी टूटने की वजह बना। बारात आने तक तो सबकुछ बढ़िया चल रहा था। दुल्हन पक्ष ने सबका अच्छे से स्वागत भी किया। शादी की रस्में भी हुई, लेकिन कबूलनामे की रस्म पर दुल्हन अड़ गई। उसने दूल्हे को पति के रूप में स्वीकार करने से मना कर दिया।
दुल्हन की यह बात सुन अफरा तफरी मच गई। हर कोई दुल्हन को समझाने में लग गया। लेकिन जब वह नहीं मानी तो दोनों का हाथों हाथ तलाक करवाया गया। इसके बाद दूल्हा उदास होकर बिना दुल्हन बारात लेकर घर लौट गया।
दूल्हे के एक रिश्तेदार ने बताया कि दोनों पक्षों को जानने वाले एक शख्स ने यह शादी तय की थी। हमने उस शख्स को दूल्हे के हाथ के बारे में बता दिया था, लेकिन उसने यह बात दुल्हन पक्ष को नहीं बताई थी। ऐसे में शादी वाले दिन जब दुल्हन को दूल्हे के निश्शक्त होने का पता चला तो वह कुबूलनामे की रस्म में शादी न करने की जिद पर अड़ गई।
यह पूरा मामला बेहद दुखद है। इसलिए शादी के पहले दोनों पक्षों के बीच पारदर्शिता होना बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा लड़का लड़की की मर्जी भी पूछ लेना चाहिए। आज भी कई जगहों पर लड़का लड़की को एक दूसरे से मिलाए बगैर ही शादी कर दी जाती है। ऐसे में बाद में यह शादी टूट सकती है।
वैसे इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है। यहाँ आप किसे दोषी ठहराएंगे? दूल्हे को, दुल्हन को या रिश्ता तय करने वाले व्यक्ति को? अपने जवाब कमेंट में जरूर दें।
950 Crore Chara Ghotala: देश में घोटालों की कहानियां तो आपने खूब सुनी होंगी, लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं देश के सबसे चर्चित और अजब-गजब घोटाले के बारे में. इस घोटाले का नाम था- ‘चारा घोटाला’. ‘चारा घोटाला’ के नाम से मशहूर यह मामला 950 करोड़ रुपये के गबन का था, जिसने एक मुख्यमंत्री की कुर्सी छीन ली और बिहार की राजनीति का रुख ही बदल दिया. तो चलिए आपको बताते हैं बिहार और देश के सबसे चर्चित घोटाले की कहानी.
1970 के दशक बात है, बिहार के पशुपालन विभाग में सरकारी खर्च के नाम पर झूठे बिल बनना शुरू हुए. शुरुआत में तो छोटे स्तर की हेराफेरी थी, लेकिन धीरे-धीरे इसमें अफसरों, सप्लायर्स और नेताओं की मिलीभगत बढ़ती चली गई. सरकार अपने खजाने से पशुओं के चारे, दवाओं और उपकरणों के नाम पर पैसा देती. लेकिन असल में इन पैसों का इस्तेमाल कभी इन कामों में किया ही नहीं गया.
चारा घोटाला क्या है… बिहार के स्थानीय पत्रकार रवि एस. झा ने पहली बार इस घोटाले को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया. उनकी रिपोर्ट में यह साफ था कि सिर्फ अधिकारी ही नहीं, बल्कि नेताओं तक की इसमें संलिप्तता है. इस खुलासे ने सारे घोटाले की पोल खोलकर रख दी. उन्होंने दिखाया कि कैसे सरकारें और ठेकेदार मिलकर बिहार के संसाधनों की लूट कर रहे थे.
जनता के दबाव और अदालत की निगरानी में मार्च 1996 में पटना हाईकोर्ट ने केस की इस केस की जांच CBI को सौंपी. जांच शुरू होते ही कई बड़े नाम सामने आए. मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और कई IAS अधिकारी. धीरे-धीरे घोटाले का दायरा 50 से ज्यादा केसों तक फैल गया. जांच चलती रही मामले दर्ज होते रहे.
950 करोड़ का घोटाला सीबीआई ने 10 मई 1997 को राज्यपाल से लालू प्रसाद यादव पर मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी. बिहार के तत्कालीन राज्यपाल ए.आर. किदवई ने सबूतों को देखकर इस बात की इजाजत दे दी. इसी बीच लालू के करीबी अधिकारी और मंत्री भी जांच के घेरे में आ गए. मामला और बिगड़ता गया. लालू ने कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई, जो खारिज कर दी गई.
अब जैसे ही गिरफ्तारी की नौबत आई, लालू प्रसाद यादव ने 5 जुलाई 1997 को अपनी नई पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) बनाई और जनता दल से अलग हो गए. 25 जुलाई को उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दिया और अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का नया मुख्यमंत्री बना दिया.
यहां से लालू का बुरा वक्त शुरू हो चुका था. साल 1997 में उन्हें गिरफ्तार किया गया और उन्हें रांची जेल में रखा गया. इसके बाद 1998 और 2000 में उन्हें फिर अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया और 20 ट्रकों में लाकर अदालत के सामने दस्तावेज पेश किए गए थे.
देश के सबसे बड़े घोटाले की कहानी साल 2000 के बाद से चारा घोटाले से जुड़े 53 मामलों में सुनवाई शुरू हुई. मई 2013 तक 44 केसों का निपटारा हो चुका था. करीब 500 से ज्यादा आरोपी दोषी पाए गए. लालू प्रसाद यादव को कुल 14 साल की सजा हुई. फिर 6 जनवरी 2018 को साढ़े तीन साल की कैद के साथ-साथ उन पर 5 लाख का जुर्माना भी लगाया गया.
लालू की कुर्सी क्यों गई थी चारा घोटाला मामले में सीबीआई ने कुल 66 मामले दर्ज किए. इनमें से 53 झारखंड और बाकी बिहार में ट्रांसफर हुए. चारा घोटाले के कुल 5 मामले हैं. पांच मामलों में लालू यादव को दोषी ठहराया गया है और उन्हें सजा मिली है. छठे मामले में अब भी सुनवाई हो रही है. यह ऐसा मामला है, जिसके चलते लालू की कुर्सी चली गई थी. उनके सीएम रहते ही यह घोटाला हुआ था.
चाईबासा कोषागार केस: 37.70 करोड़ रुपये का गबन और लालू यादव को 5 साल की सजा. देवघर कोषागार केस: 89.27 लाख रुपये का गबन और लालू यादव को 3.5 साल की सजा. फाइन- 10 लाख. चाईबासा दूसरा केस: 33.13 करोड़ रुपए का गबन और लालू यादव को 5 साल की सजा. दुमका कोषागार केस: 3.13 करोड़ रुपये का गबन और लालू यादव को 14 साल की सजा (7+7 साल). फाइन- 60 लाख. डोरंडा कोषागार केस: 139.35 करोड़ रुपये का गबन और लालू यादव को 5 साल सजा. फाइन- 60 लाख. रांची कोषागार (छठा मामला): 1.84 करोड़ रुपये का गबन. अभी सुनवाई जारी है.
लालू प्रसाद यादव पर क्या केस चल रहा है अगर इन सभी मामलों के गबन को जोड़ दिया जाए तो लालू यादव की देनदारी करीब 304 करोड़ रुपए होगी. इसका मतलब है कि अगर बिहार सरकार कोर्ट में अपना दावा मजबूती से रखती है और कोर्ट पैसा जमा करने का आदेश देता है तो लालू यादव को इतने पैसे सरकारी खजाने में देने होंगे.
Harmful Vegetables In Pressure Cooker: प्रेशर कुकर हर घर की रसोई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। यह खाना पकाने में समय और ऊर्जा की बचत करता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि कुछ चीजों को प्रेशर कुकर में पकाने से उनकी पोषण गुणवत्ता और सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है?
आइए जानते हैं उन पांच चीजों के बारे में, जिन्हें प्रेशर कुकर में पकाने से बचना चाहिए।
खाना नहीं जहर पका रहे है आप:-
1. आलू: प्रेशर कुकर में आलू पकाने से इसके पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं। लंबे समय तक प्रेशर में पकाने से आलू में मौजूद विटामिन और मिनरल्स कम हो जाते हैं। यह सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो संतुलित आहार पर ध्यान देते हैं।
2. चावल: चावल को प्रेशर कुकर में पकाने से उसमें मौजूद स्टार्च एक्रिलामाइड नामक केमिकल रिलीज कर सकता है। यह केमिकल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है और इसे पाचन समस्याओं और अन्य बीमारियों से जोड़ा जाता है।
3. पालक: पालक जैसी पत्तेदार सब्जियों को प्रेशर कुकर में पकाने से उनमें ऑक्सलेट की मात्रा बढ़ सकती है। यह ऑक्सलेट किडनी स्टोन बनने का एक प्रमुख कारण है। इसलिए, पालक को हल्की आंच पर या स्टीम करके पकाना अधिक स्वास्थ्यप्रद विकल्प है।
4. फ्राई फूड्स: तले हुए खाद्य पदार्थों को प्रेशर कुकर में पकाने की कोशिश न करें। यह न केवल उनके स्वाद को खराब करता है बल्कि उनकी बनावट को भी बिगाड़ सकता है। फ्राई फूड्स के लिए परंपरागत तरीकों का इस्तेमाल करना बेहतर होता है।
5. बींस: बींस में लेक्टिन नामक टॉक्सिन पाया जाता है। यदि इसे प्रेशर कुकर में पकाया जाए, तो यह ठीक से नष्ट नहीं हो पाता और पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। बींस को पकाने से पहले इन्हें भिगोकर और धीमी आंच पर पकाना अधिक सुरक्षित होता है। प्रेशर कुकर का सही तरीके से उपयोग न केवल आपके भोजन को स्वादिष्ट बनाता है, बल्कि यह आपके स्वास्थ्य को भी सुरक्षित रखता है। उपरोक्त चीजों को प्रेशर कुकर में पकाने से बचकर आप अपने खानपान को अधिक पौष्टिक और सुरक्षित बना सकते हैं।
अगर किसी घुमक्कड़ व्यक्ति से यह पूछा जाए कि क्या वे ऋषिकेश घूमने गए हैं, तो वह शायद ही ‘ना’ कहें। उत्तराखंड का ऋषिकेश एक ऐसी जगह है, जहां हर महीने लाखों सैलानी घूमने के लिए आते हैं। इसलिए, अगर आप भी ऋषिकेश घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो गीता भवन में मुफ्त में ठहर सकते हैं। ऋषिकेश वास्तव में एक बेहद सुंदर जगह है। यहां कई आश्रम हैं, और नदी के किनारे स्थित गीता भवन में ठहरने की बहुत अच्छी व्यवस्था है। इस आश्रम में 1000 से ज्यादा कमरे हैं, और यहां रुकने के लिए आपको कोई पैसा नहीं देना पड़ता। आश्रम में लक्ष्मी नारायण मंदिर, एक आयुर्वेदिक विभाग, और एक पुस्तकालय भी है। यहां आने वाले अतिथि शुद्ध शाकाहारी भोजन का आनंद ले सकते हैं।
नंबर 2 आनंदाश्रम, केरल –
आनंदाश्रम केरल की हरी-भरी हरियाली के बीच एक बहुत ही सुुंदर आश्रम है। यहां आकर आप वास्तव में एक अलग ही शांति का अनुभव करेंगे। यहां आप पक्षियों की चहचहाहट सुन सकते हैं। सबसे अच्छी बात है कि यहां आपको एकदम घर जैसा कम मसाले वाला भोजन खाने को मिलेगा। वो भी बिना कोई कीमत चुकाए । यह आश्रम पूरी तरह से देहाती शैली में बना हुआ है। चारों तरफ प्रकृति से घिरा होने के कारण पर्यटक यहां आकर सुकून पाते हैं।
नंबर 3 भारत
ऋषिकेश में बसे इस आश्रम की अपनी अलग कहानी है। यह आश्रम और संस्थान स्वस्थ जीवनशैली के लिए शरीर और मन के उपचार के लिए कोर्स उपलब्ध कराता है। स्वयंसेवी कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर कोई भी यहां मुफ्ते में ठहरने की सुविधा का लाभ ले सकता है। यहां आपको विदेश से आए लोगों के बीच रहने और उनसे बातचीत करने का मौका भी मिलेगा। अच्छी बात यह है कि आश्रम स्वयंसेवी गतिविधियों में भाग लेने वालों को सम्मान प्रमाण पत्र भी प्रदान करता है।
नंबर 4 ईशा फाउंडेशन, कोयंबटूर
अक्सर आपने तस्वीरों में काले रंग के पत्थर की शिवजी की विशाल मूर्ति देखी होगी। दरअसल, मूर्ति स्थापित है कोयंबट्टर के ईशा फाउंडेशन में। वेल्लियांगिरी पहाड़ों से घिरा यह सद्गुरू का आध्यात्मिक केंद्र है। इसके बैकग्राउंड को कभी आप ध्यान से देखें, तो आपको प्राचीन पहाड़ों के साथ आदियोगी शिव की विशाल मूर्ति देखने को मिलेगी। इस आश्रम में आने वाले आगुंतकों के लिए सभी सेवा निशुल्क है। ईशा फाउंडेशन में खाने-पीने और ठहरने की उचित व्यवस्था की गई है। खासकर, महाशिवरात्रि के अवसर पर जश्न और उत्स्व जैसा माहौल रहता है। ।
नंबर 5 श्री रामनाश्रामम , तमिलनाडु
तिरूवन्नामलाई की पहाड़ियों में स्थित इस आश्रम में श्री भगवान का विशाल मंदिर है। आश्रम में एक बहुत बड़ा बगीचा और एक लाइब्रेरी है। श्री भगवान के भक्तों को यहां ठहरने के लिए कोई किराया नहीं देना पड़ता। फायदे की बात यह है कि यहां आप शुद्ध शाकाहारी भोजन का आनंद ले सकते हैं। उन्हें अपनी यात्रा से कम से कम छह सप्ताह पहले यहां ठहरने के लिए बुकिंग करानी होती है।
नंबर 6 गुरुद्वारा मणिकरण साहिब
भारत के हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्य में हर दिन हजारों लोग घूमने के लिए जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश की मणिकर्ण जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यहां मौजूद गुरुद्वारा मणिकरण साहिब में फ्री में ठहर सकते हैं। यहां ठहरने या खाना खाने के लिए आपको पैसा नहीं देना होता है। कहा जाता है कि यहां सुबह-शाम लंगर का व्यवस्था किया जाता है जहां कोई भी खाने के लिए जा सकता है।
नंबर 7 आर्ट ऑफ लिविंग
आर्ट ऑफ लिविंग के आश्रम बेंगलुरु, ऋषिकेश, केरल, पुणे, असम और नागपुर जैसे शहरों के अलावा भारत में हर जगह हैं। उनके स्वयंसेवी कार्यक्रम को सेवा और योग फ़ेलोशिप कहा जाता है। यहां रहने वाले स्वयंसेवक को विभिन्न अवसरों में प्रतिदिन कम से कम 5 घंटे सेवा प्रदान करनी होती है। इन कार्यों के अंतर्गत हाउसकीपिंग, सामग्री डेवलपर, आउटरीच गतिविधियां, अतिथि सेवाएं, जैविक फार्म और बागवानी, भोजन सेवाएं और लंबी पैदल यात्रा शामिल है। ये केंद्र स्वयंसेवकों के लिए आवास और भोजन प्रदान करता है। निजी बाथरूम और पौधों पर आधारित शाकाहारी भोजन के साथ कमरे दिये जाते हैं।
तो यह थी उन आश्रमों की लिस्ट जहां आप मुफ्त में ठहर सकते हैं , आप को मौक़ा मिला तो आप किन आश्रम में जाना चाहेंगे , कमेंट में ज़रूर बताएं.
ना उम्र की सीमा हो और ना जन्म का हो बंधन, जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन… जी हां, जब कोई इंसान प्यार में होता है तो वो पार्टनर की उम्र नहीं देखता। बस प्यार करता है। बॉलीवुड की बड़ी बड़ी एक्ट्रेस को आपने देखा होगा की वो अपने से कहीं ज्यादा उम्र के पुरुषों से रिलेशन (Relationship) में होती हैं।
पिछले साल सुष्मिता सेन और ललित मोदी के रिलेशन (Relation) को लेकर काफी सुर्खियां बनी थी। एक तरफ सुष्मिता सेन 46 साल की है तो वहीं, ललित मोदी की उम्र 62 साल से भी ज्यादा है। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर औरतें या लड़कियों को अपनी उम्र से ज्यादा बड़े आदमियों की ओर क्यों आकर्षित होती हैं? आईये नीचे जानते हैं इसका जवाब…..
पहला कारण तो, मैच्योरिटी
सबसे पहले तो ये बात है कि लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में मैच्योरिटी (Maturity) थोड़ी देर से आती है। हालांकि लड़कियों को मैच्योर मर्द ज्यादा पसंद होते हैं। ऐसे में वो अपनी उम्र से बड़े मर्दों को को डेट (Relationship Tips ) करना पसंद करती हैं और वो ऐसे पार्टनर्स के साथ सेफ फील करती हैं। लड़कियों को लगता है कि समझदार पार्टनर उन्हें आसानी से संभाल सकते हैं।
एक्सपीरियंस
बड़ी उम्र के पुरूषों में एक्सपीरियंस काफी ज्यादा होता है और लड़कियों को अनुभवी मर्द (Seasoned Men) बहुत पसंद होते हैं। उनका सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा होता है इसलिए वो अपने से बड़े उम्र के मर्दों की ओर आकर्षित (Relation) हो जाती हैं।
फाइनेंशियल स्टेबिलिटी
लड़कियां अपने से बड़े उम्र के आदमियों की तरफ इसलिए आकर्षित होती है, क्योंकि वो फाइनेंशली इंडिपेंडेंट (financially independent) होते हैं और लड़कियों के खर्चों को आसानी से उठा सकते हैं। ऐसे में महिलाएं समझदारी दिखाते हुए Financially Independent आदमियों के करीब आ जाती है , ताकि वो लाइफ अच्छी तरह से अपनी लाइफ जी पाएं।
कॉन्फिडेंस (Self-confidence)
ज्यादा उम्र के पुरुषों का कॉन्फिडेंस (Confidence Man) का लेवल काफी ज्यादा होता है और अक्सर लड़कियों को ये काफी प्रभावित करता है। ऐसे में कम उम्र की लड़कियां अक्सर अनुभव और आत्मविश्वास (Self-confidence) से भरे आदमियों को अपना दिल देना पसंद करती है।
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से दिल दहला देने वाली एक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है. जहां शहर के मैनाठेर थाना क्षेत्र में एक लड़की अपनी चाची के साथ खेत में घास काटने गई. इस बीच चाची मगरिब की नमाज पढ़ने चली गई और नाबालिग लड़की खेत की ओर जा रही थी और अचानक गायब हो गई. अगली सुबह जब नाबालिग मिली तो जो उसकी हालत थी वो डरा देने वाली थी. चलिए आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है.
घटना रविवार की शाम की बताई जा रही है. नाबालिग की चाची रोज की तरह जंगल में घास काटने जा रही थी. घरवालों ने मासूम बेटी को भी घास लाने के लिए उसके पीछे भेज दिया. दोनों के बीच महज कुछ मिनटों का फासला था, लेकिन किसे पता था कि ये चंद मिनटें ही एक खौफनाक कहानी का कारण बन जाएंगी. चाची मगरिब की नमाज के वक्त घर लौट आई, लेकिन नाबालिग लड़की वापस नहीं पहुंची. जब काफी देर तक बच्ची का कुछ अता-पता नहीं चला, तो परिवार को चिंता सताने लगी.
रातभर नहीं आई नाबालिग जब बच्ची रात तक नहीं लौटी, तो उसकी मां खुद जंगल की ओर निकल पड़ी. उसने चारों ओर बेटी को आवाजें दीं, मक्के के खेतों में जाकर तलाश की, लेकिन जवाब नहीं मिला. काफी देर की तलाश के बाद मक्का के खेत में बच्ची की एक चप्पल मिली, जो उनके डर को और पुख्ता कर गई.
प्राइवेट पार्ट पार्ट पर चाकू से वार अगली सुबह जब खेतों में दोबारा खोज शुरू की गई तो मां ने बच्ची को एसी भयानक हालत में देखा की उसका सीना छल्ली-छल्ली हो गया. बच्ची का शव खेत में निर्वस्त्र पड़ा था. चेहरा और प्राइवेट पार्ट पर गहरे जख्म थे. शव पर 40 से अधिक घाव थे. शव को देखकर साफ था कि नाबालिग के साथ पहले दरिंदगी की गई और फिर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई.
जांच में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलते ही मैनाठेर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. खुद मुरादाबाद के SSP सतपाल आंतिल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने बताया कि मामला बेहद गंभीर है और हर एंगल से जांच की जा रही है. SSP ने बताया कि पीड़िता के परिजन घटना के पीछे कुछ परिचितों के नामों का जिक्र कर रहे हैं, इसलिए पारिवारिक रंजिश या अंदरूनी झगड़े की भी जांच की जा रही है. वहीं पुलिस ने बताया कि बच्ची के लापता होने की सूचना समय रहते थाने को नहीं दी गई थी. अगर तुरंत सूचना मिलती, तो शायद कार्रवाई और जल्द शुरू हो सकती थी. फिर भी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए फॉरेंसिक टीम को बुलाया और सबूत जुटाने का काम शुरू कर दिया गया है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार फिलहाल पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह साफ हो सकेगा कि बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ था या नहीं. हालांकि शव की स्थिति देखकर यह आशंका जताई जा रही है कि नाबालिग के साथ पहले बलात्कार किया गया और फिर किसी धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी गई. SSP सतपाल आंतिल ने कहा है कि पुलिस के हाथ कुछ अहम सुराग लगे हैं और जल्द ही हत्या का पर्दाफाश कर दिया जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि आरोपी चाहे जो भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा.
क्या आपको अक्सर घुटनों, कमर, कंधों या दूसरे जोड़ों में दर्द महसूस होता है? कई लोग सालों तक दर्द की गोलियां लेते रहते हैं, लेकिन फिर भी स्थायी आराम नहीं मिल पाता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ज्यादातर painkillers सिर्फ दर्द और सूजन को कम करती हैं, लेकिन अंदर से हड्डियों और जोड़ों को मजबूत नहीं बनातीं।
इसे ऐसे समझिए जैसे जंग लगे लोहे पर ऊपर से टेप लगा दिया जाए। ऊपर से सब ठीक लगता है, लेकिन अंदर जंग बढ़ती रहती है। जॉइंट पेन की असली जड़ तक पहुंचना जरूरी होता है।
अगर जॉइंट पेन की जड़ में जाएं, तो वहां अक्सर शरीर में कुछ कमियां देखने को मिलती हैं। जैसे कैल्शियम और जरूरी मिनरल्स की कमी, जॉइंट लुब्रिकेशन की कमी, शरीर में सूजन और खराब ब्लड सर्कुलेशन। यही कारण धीरे-धीरे दर्द को बढ़ाते रहते हैं।
इसीलिए सिर्फ दर्द दबाने के बजाय शरीर को पोषण देना ज्यादा जरूरी होता है। इसी उद्देश्य से नीचे एक किचन बेस्ड पोषण मिश्रण बताया गया है, जो शरीर को अंदर से सपोर्ट कर सकता है।
Joint Strength Powder के लिए जरूरी चीजें
यह नुस्खा रोजमर्रा की चीजों से तैयार किया जा सकता है। सफेद तिल कैल्शियम का अच्छा स्रोत होता है। मखाना कैल्शियम, फास्फोरस और प्रोटीन देता है। बादाम विटामिन E और हेल्दी फैट्स देता है।
अलसी ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत है। सोंठ ब्लड सर्कुलेशन को सपोर्ट करती है। हल्दी नेचुरल एंटी-इंफ्लेमेटरी होती है। काली मिर्च पोषक तत्वों के absorption में मदद करती है। स्वाद के लिए मिश्री या गुड़ डाला जा सकता है, लेकिन डायबिटीज में इसे नहीं डालना चाहिए।
बनाने का तरीका: तिल, मखाना, बादाम और अलसी को हल्की आंच पर अलग-अलग ड्राई रोस्ट करें। इसके बाद इन्हें ठंडा होने दें। ठंडा होने के बाद इसमें सोंठ, हल्दी, काली मिर्च और गुड़ मिलाएं। अब इन सभी चीजों को ग्राइंडर में बारीक पीस लें और एयर टाइट कंटेनर में स्टोर कर लें।
सेवन कैसे करें: रोज रात को एक चम्मच पाउडर हल्के गर्म दूध के साथ लिया जा सकता है। चाहें तो इसमें एक चम्मच देसी घी भी मिला सकते हैं। अगर कोलेस्ट्रॉल या वजन की समस्या है, तो दूध की जगह गुनगुना पानी लिया जा सकता है। कमजोर डाइजेशन वाले लोग इसे सुबह नाश्ते के बाद दही के साथ ले सकते हैं।
बेहतर रिजल्ट के लिए जरूरी आदतें: रोज 10 से 15 मिनट धूप में बैठना जरूरी है ताकि शरीर को विटामिन D मिल सके। हल्की एक्सरसाइज या रोजाना वॉक करना भी जरूरी है। डाइट में सहजन पत्ते, रागी और आंवला शामिल करना फायदेमंद होता है। इस मिश्रण को कम से कम 8 से 12 हफ्ते तक नियमित लेना चाहिए।
किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए: जिन लोगों को किडनी स्टोन की समस्या है, उन्हें सावधानी रखनी चाहिए। नट्स से एलर्जी वाले लोग इसे लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। ब्लड थिनर दवाइयां लेने वाले, थायरॉइड मरीज और 10 साल से छोटे बच्चों को भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेना चाहिए। डायबिटीज में मिश्री या गुड़ नहीं डालना चाहिए।
Health Disclaimer: यह जानकारी सामान्य शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। किसी भी घरेलू उपाय को लंबे समय तक अपनाने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।