Author: me.sumitji@gmail.com

  • 35 की उम्र के बाद शरीर होˈ गया है बेजान, दूध में उबालकर खाएं यह काला ड्राईफ्रूट… घोड़े जैसी हो जाएगी ताकतˌ

    35 की उम्र के बाद शरीर होˈ गया है बेजान, दूध में उबालकर खाएं यह काला ड्राईफ्रूट… घोड़े जैसी हो जाएगी ताकतˌ

    35 की उम्र के बाद शरीर होˈ गया है बेजान, दूध में उबालकर खाएं यह काला ड्राईफ्रूट… घोड़े जैसी हो जाएगी ताकतˌ

    बढ़ती उम्र, स्ट्रेस और भागदौड़ की वजह से आजकल 30 और 35 के बाद ही मर्दों का शरीर कमजोर होने लगता है. इस कमजोरी को दूर करने में काला ड्राईफ्रूट यानी खजूर मदद कर सकता है. 

    35 की उम्र के बाद ज्यादातर मर्दों को ऐसा महसूस होने लगता है कि उनका शरीर पहले जैसा नहीं रहा है. थकान जल्दी होने लगती है, काम में मन नहीं लगता और सबसे ज्यादा फर्क शारीरिक ताकत और स्टेमिना पर आता है. ऐसे में वह बिस्तर पर न पहले जैसी एनर्जी दिखा पाते हैं और न ही परफॉर्मेंस वैसी रहती है.

    खजूर से बढ़ सकती है सेक्स पावर

    शरीर की कमजोरी और कम स्टेमिना के पीछे का कारण टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का धीरे-धीरे कम होना हो सकता है. ऐसे में नेचुरल चीजों से शरीर को ताकतवर बनाना ही सबसे सही और सेफ तरीका होता है. खासतौर पर खजूर आपकी मदद कर सकता है.

    एनर्जी बूस्टर

    दरअसल, खजूर में नेचुरल शुगर होती है, जो शरीर तो तुरंत एनर्जी देती है. वहीं, दूध के साथ इसे खाने से यह किसी एनर्जी ड्रिंक की तरह ही काम करता है.

    टेस्टोस्टेरोन हार्मोन

    सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने वाले हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का शरीर में बैलेंस बनाने में भी खजूर मदद कर सकता है. खजूर में मौजूद जिंक, आयरन और मैग्नीशियम मिलकर हार्मोन्स को बैलेंस करने में मदद करते हैं.

    स्पर्म क्वालिटी

    आयुर्वेद में भी खजूर के फायदे माने गए हैं. कहा जाता है कि खजूर को अपनी डाइट में शामिल करने से पुरुषों की सेक्सुअल हेल्थ में काफी सुधार आता है. साथ ही स्पर्म क्वालिटी और क्वांटिटी भी बेहतर होती है.

    मांसपेशियों में ताकत

    दूध में प्रोटीन होता है, जो मसल्स यानी मांसपेशियों की ग्रोथ और रिकवरी में मदद करता है. वहीं, दूध और खजूर को साथ लिया जाए तो यह मांसपेशियों में ताकत भर सकता है, जिससे सेक्सुअल पावर और स्टेमिना बढ़ सकता है.

    कितने खजूर खाने चाहिए?

    डाइट में बिना सोचे-समझे खजूर शामिल न करें. क्योंकि, इसकी तासीर गर्म होती है. ज्यादा खजूर खाने से पेट की समस्याओं के साथ-साथ स्किन पर भी एलर्जी हो सकती है. ऐसे में दिन में 4-5 ही खजूर खाएं.

    कैसे खाएं खजूर?

    खजूर खाने से पहले उन्हें पानी से अच्छी तरह धो लें और एक गिलास दूध में डाल दें. अब दूध को 5 से 10 मिनट के लिए अच्छी तरह उबाल लें. यह दूध रात के समय सोने से पहले पिएं और खजूर को चबाकर खा लें.

  • प्रकृति का अद्भुत करिश्मा? एक ऐसा अनोखाˈ पेड़ जिस पर उगता है लड़की के आकार जैसा फलˌ

    प्रकृति का अद्भुत करिश्मा? एक ऐसा अनोखाˈ पेड़ जिस पर उगता है लड़की के आकार जैसा फलˌ

    प्रकृति का अद्भुत करिश्मा? एक ऐसा अनोखाˈ पेड़ जिस पर उगता है लड़की के आकार जैसा फलˌ

    प्रकृति के द्वारा दिया गया सबसे अनमोल तोहफा हमारे जीवन में पेड़ पौधे हैं अगर यह पेड़ पौधे ना हो तो इस पृथ्वी पर हमारा जीवन संभव नहीं हो सकता, इन पेड़ पौधों से हमें ऑक्सीजन मिलती है जो हमारे जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है आप सभी लोगों ने ऐसे बहुत से पेड़ पौधे देखे होंगे या उनके बारे में सुना होगा जिनके बारे में जानने के बाद आपको काफी आश्चर्य हुआ होगा परंतु क्या आप लोगों ने कभी एक ऐसे पेड़ के बारे में सुना है जिसके ऊपर फल की जगह लड़की के आकार का फल उगता है? जी हां, आप लोग इस जानकारी को सुनने के बाद अवश्य सोच में पड़ गए होंगे और आप लोगों में से कई लोगों के मन में यह भी विचार आ रहा होगा कि भला ऐसा थोड़े ही होता है? परंतु आज हम आपको यहां सिर्फ बताने ही वाले नहीं है बल्कि आपको यह दिखाने वाले भी हैं।

    आप सभी लोगों ने लोगों के मुंह से यह कहते हुए सुना तो होगा कि “पैसे कभी पेड़ पर नहीं उगते” चलो माना पैसे पेड़ पर नहीं उग सकते हैं परंतु लड़कियां पेड़ पर उग सकती है? अभी तक आप लोगों ने पेड़ों पर फल सब्जियां ही लटके हुए देखी होंगी परंतु कभी आपने पेड़ पर लड़कियां लटकी हुई देखी है? ज्यादातर आप लोगों में से सभी का जवाब “ना” में ही होगा ! दरअसल, थाईलैंड में एक ऐसा पेड़ मौजूद है जिस पर लड़की के आकार का फल उगता है इन दिनों यह पेड़ सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है इस पेड़ पर उगने वाला फल बिल्कुल लड़की के आकार का है।

    सोशल मीडिया पर इस पेड़ की तस्वीरें काफी तेजी से वायरल हो रही है दरअसल, इस पेड़ को लेकर काफी रहस्य बना हुआ है वहीं इस पेड़ के पीछे की वजह के बारे में अभी भी खोज हो रही है वैसे तो इस पेड़ को लेकर अभी तक सभी अलग-अलग कहानियां बताने में लगे हुए हैं परंतु इनमें से एक कहानी ज्यादातर लोगों के जुबान पर रहती है और इसे बौद्ध मान्यताओं से जोड़ा गया है हम आपको बताने वाले हैं कि बौद्ध मान्यताओं के मुताबिक इस पेड़ कि आखिर पूरी कहानी क्या है?

    थाईलैंड में यह अनोखा पेड़ स्थित है और इस पेड़ को “नैरीफन” के नाम से जाना जाता है बौद्ध मान्यताओं के मुताबिक इस पेड़ को भगवान ने स्वयं थाईलैंड के हिमाचल के जंगलों में लगाया था और इसी वजह से इस पेड़ पर इस तरह की लड़की के आकार के फल उगते हैं बहुत से लोगों का ऐसा कहना है कि जिस पेड़ पर यह फल उगता है वह काफी पवित्र है इसके बारे में ऐसा माना गया है कि सदियों पहले भगवान इंद्र अपनी पत्नी और बच्चों के साथ इसी जंगल में रहा करते थे एक बार भगवान इंद्र की पत्नी जंगल में फल तोड़ने गई हुई थी तो उनके ऊपर कुछ राक्षसों ने हमला कर दिया था उनकी रक्षा के लिए भगवान ने इस जंगल में नैरीफन के 12 पेड़ तुरंत उगा दिए थे और राक्षसों को धोखा देने के लिए इस पेड़ पर ऐसे फल लगाएं जिन पर उगने वाला फल लड़की के शरीर की आकृति की तरह था।

    उसी समय से लोगों का ऐसा कहना है कि इस पेड़ पर लड़कियों के शरीर की आकृति वाले फल उगते हैं इस पेड़ को लेकर अभी तक रहस्य बना हुआ है और इसकी खोज अभी तक जारी है अभी इस रहस्य की पुष्टि नहीं हो पाई है कि वास्तव में इस पेड़ पर फल है या फिर कुछ और ही उगता है।

  • ना डॉक्टर ना खर्चा… बस ये देसीˈ पेस्ट बना लें और देखें कैसे पीले दांतों की जगह दिखेगी सफेद चमकˌ

    ना डॉक्टर ना खर्चा… बस ये देसीˈ पेस्ट बना लें और देखें कैसे पीले दांतों की जगह दिखेगी सफेद चमकˌ

    ना डॉक्टर ना खर्चा… बस ये देसीˈ पेस्ट बना लें और देखें कैसे पीले दांतों की जगह दिखेगी सफेद चमकˌ

    Tips for Teeth Cleaning: दांतों की सफाई और उनकी सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। अक्सर लोग खाना खाने के बाद दांतों में जमी गंदगी को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर पायरिया और मसूड़ों की समस्याओं का कारण बन सकती है।

    जब दांत सड़ने लगते हैं या मसूड़ों में दर्द होता है, तो लोग डॉक्टर के पास जाते हैं। लेकिन अगर समय रहते दांतों का ख्याल रखा जाए, तो इन समस्याओं से बचा जा सकता है। दांतों की देखभाल के लिए सबसे बेहतरीन और प्राचीन तरीका है ऑयल पुलिंग। यह न केवल दांतों को साफ और चमकदार बनाता है, बल्कि ओरल हेल्थ को भी बेहतर बनाए रखता है।

    ऑयल पुलिंग क्या है?ऑयल पुलिंग एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जिसमें सरसों के तेल, नमक और नींबू के मिश्रण का उपयोग करके मुंह की सफाई की जाती है।

    डेंटिस्ट की सलाहरांची की डेंटिस्ट रिचा मित्रा का कहना है कि यदि आप रोज़ाना सरसों के तेल में नमक और नींबू डालकर ऑयल पुलिंग करते हैं, तो इससे दांत साफ हो जाते हैं। यह प्रक्रिया एक महीने तक नियमित रूप से करने से दांत चमकने लगते हैं और जमी हुई गंदगी आसानी से निकल जाती है। यही गंदगी दांतों की समस्याओं की मुख्य वजह बनती है।

    तेल, नमक और नींबू का लाभ

    1. सरसों का तेल:
      • सरसों का तेल दांतों को चिकनाई प्रदान करता है, जिससे गंदगी जमने की संभावना कम हो जाती है।
    2. नमक:
      • नमक में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करते हैं।
    3. नींबू:
      • नींबू का सिट्रिक एसिड प्लैक को हटाने और दांतों को चमकाने का काम करता है।

    ऑयल पुलिंग कैसे करें?

    1. एक चम्मच सरसों का तेल लें।
    2. उसमें चुटकी भर नमक और कुछ बूंदें नींबू का रस मिलाएं।
    3. इस मिश्रण को मुंह में डालें, लेकिन ध्यान रखें इसे निगलना नहीं है।
    4. इसे 5 से 10 मिनट तक मुंह के भीतर चारों तरफ घुमाएं।
    5. इस प्रक्रिया के दौरान उंगलियों का भी सहारा लें ताकि मिश्रण हर दांत तक पहुंचे।
    6. प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल्ला कर लें।
    7. इसे रात के समय करना अधिक फायदेमंद होता है।

    ऑयल पुलिंग के फायदे

    1. ओरल हेल्थ में सुधार: दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।
    2. पायरिया से बचाव: जमी गंदगी को हटाने से पायरिया का खतरा कम होता है।
    3. मुंह की दुर्गंध से छुटकारा: नियमित रूप से ऑयल पुलिंग करने से मुंह की दुर्गंध दूर होती है।
    4. दांतों का टूटना रोके: दांत मजबूत और स्वस्थ बने रहते हैं।
    5. दांत चमकदार बनें: सिट्रिक एसिड और नमक के गुण दांतों को प्राकृतिक चमक प्रदान करते हैं।

    ऑयल पुलिंग दांतों की सफाई और ओरल हेल्थ के लिए एक सरल और प्रभावी उपाय है। इसे अपनाने से न केवल दांत मजबूत और चमकदार बनते हैं, बल्कि मसूड़ों और दांतों से जुड़ी कई समस्याओं से भी बचा जा सकता है। रोजाना इस प्रक्रिया को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और अपने दांतों को स्वस्थ बनाए रखें।

  • रावण का वो अनसुना रहस्य! सीता सेˈ पहले क्यों अपहरण किया था राम की माता कौशल्या का? जानकर उड़ जाएंगे होशˌ

    रावण का वो अनसुना रहस्य! सीता सेˈ पहले क्यों अपहरण किया था राम की माता कौशल्या का? जानकर उड़ जाएंगे होशˌ

    रावण का वो अनसुना रहस्य! सीता सेˈ पहले क्यों अपहरण किया था राम की माता कौशल्या का? जानकर उड़ जाएंगे होशˌ

    रामायण की कथा के अनुसार आप इस बात को जानते हैं कि लंकापति रावण ने अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए माता सीता का अपहरण किया था.

    लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता सीता पहली स्त्री नहीं थीं जिनका रावण ने बलपूर्वक अपहरण किया था. बल्कि माता सीता के अपहरण से पहले रावण ने भगवान श्रीराम की माता कौशल्या का भी अपहरण किया था.

    आखिर दशानन रावण ने श्रीराम की माता कौशल्या का अपहरण क्यों किया था. चलिए उस प्रकरण के बारे में हम आपको बताते हैं.

    मौत की भविष्यवाणी सुनकर किया अपहरण

    आनंद रामायण के अनुसार सीता से पहले रावण ने श्रीराम की माता कौशल्या का अपहरण किया था. रामायण की एक कथा के मुताबिक रावण अपनी मौत की भविष्यवाणी को सुनकर डर गया था और अपनी मौत को टालने के लिए उसने माता कौशल्या का अपहरण कर लिया था.

    भगवान ब्रह्मा ने रावण को पहले ही बता दिया था कि दशरथ और कौशल्या का पुत्र ही उसकी मौत का कारण बनेगा. अपनी मौत की भविष्यवाणी को टालने के लिए दशरथ और कैकेयी के विवाह के दिन ही रावण ने कौशल्या का अपहरण कर लिया था.

    दशरथ ने बचाई थी कौशल्या की जान

    अपहरण करने के बाद रावण कौशल्या को डब्बे में बंद करके उन्हें एक सुनसान द्वीप पर छोड़ आया था. रावण के द्वारा किए गए इस कृत्य के बारे में नारद ने राजा दशरथ को बताया. इसके साथ ही उन्होंने उस स्थान के बारे में भी बताया जहां कौशल्या को रखा गया था.

    जैसे ही नारद ने इस अपहरण की जानकारी दी वैसे ही राजा दशरथ रावण से युद्ध करने के लिए अपनी सेना लेकर उस द्वीप पर पहुंच गए.

    हालांकि रावण की शक्तिशाली सेना के सामने दशरथ की सेना ढ़ेर हो गई थी. लेकिन दशरथ ने हार नहीं मानी और एक लकड़ी के तख्ते की मदद से समुद्र में तैरते हुए उस बक्से तक पहुंचे जिसमें कौशल्या को बंद करके रखा गया था.

    वहां जाकर दशरथ ने कौशल्या को उस बक्से से बंधनमुक्त किया और सकुशल अपने महल ले गए. माता कौशल्या का अपहरण करके रावण ने श्रीराम के जन्म से पहले ही अपनी मौत को टालने की कोशिश की थी. लेकिन इसमें रावण असफल रहा.

    गौरतलब है कि लाख कोशिशों के बावजूद भी रावण अपनी मौत की भविष्यवाणी को टाल नहीं सका. आखिरकार कौशल्या और राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम ने रावण का अंत कर इस भविष्यवाणी को सही साबित कर दिखाया.

  • नींद में गलती से दबा बटन बैंकˈ क्लर्क ने ट्रांसफर कर दिए 2000 करोड़ फिर जो हुआ जानकर चौंक जाएंगेˌ

    नींद में गलती से दबा बटन बैंकˈ क्लर्क ने ट्रांसफर कर दिए 2000 करोड़ फिर जो हुआ जानकर चौंक जाएंगेˌ

    नींद में गलती से दबा बटन बैंकˈ क्लर्क ने ट्रांसफर कर दिए 2000 करोड़ फिर जो हुआ जानकर चौंक जाएंगेˌ

    Bank Transfer: जर्मनी के एक बैंक में अजीबोगरीब मामला सामने आया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है. एक थके हुए बैंक क्लर्क ने गलती से 64.20 यूरो की जगह 222,222,222.22 यूरो (लगभग 2,000 करोड़ रुपये) का ट्रांसफर कर दिया. बैंक क्लर्क से यह ब्लंडर तब हुआ तब जब क्लर्क काम करते-करते की-बोर्ड पर सो गया और उसकी उंगली लंबे समय तक की-बोर्ड के बटन पर दबी रह गई.

    TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक क्लर्क की यह गलती तब पकड़ी गई जब एक अन्य कर्मचारी की इस पर नजर गई. हालांकि, इस घटनाक्रम ने बैंक में सुरक्षा और निरीक्षण की प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए. यदि गलती पकड़ी नहीं जाती, तो यह ट्रांसफर बैंक के लिए एक बड़ी समस्याएं पैदा कर सकता था.

    इस गलती के बाद सिर्फ वह क्लर्क ही नहीं, बल्कि सुपरवाइज़र भी सवालों के घेरे में आ गए, जिन्होंने इस भारी भरकम लेन-देन को बिना देखे मंजूरी दे दी थी. जिसके बाद बैंक ने सुपरवाइज़र को नौकरी से निकाल दिया, जिससे यह विवाद और भी बढ़ गया और मामला कोर्ट पहुंच गया.

    कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

    जर्मनी के हेस्से राज्य स्थित लेबर कोर्ट ने सुपरवाइज़र की बर्खास्तगी को अनुचित ठहराया. कोर्ट ने माना कि सुपरवाइज़र के ऊपर प्रति दिन सैकड़ों दस्तावेजों की समीक्षा का दबाव था. घटना वाले दिन सुपरवाइजर ने 812 दस्तावेजों की जांच की थी, जिसमें प्रत्येक पर कुछ ही सेकंड का समय दिया जा सकता था.

    अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सुपरवाइजर ने यह गलती जानबूझकर नहीं की थी और इसे गंभीर लापरवाही नहीं माना जा सकता. क्योंकि उसके दुर्भावनापूर्ण इरादे या घोर लापरवाही का कोई सबूत नहीं है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि बैंक उन्हें फिर से काम पर रखे और भविष्य में बेहतर ऑटोमेटेड सिस्टम लाए. कोर्ट ने यह भी माना कि बैंक की व्यवस्थागत खामियां इस गलती के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार थी.

    सिस्टम को लेकर उठे सवाल

    इस घटना ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. कई यूज़र्स ने बैंक की प्रक्रियाओं और सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाए. उन्होंने तर्क दिया कि बेहतर ऑटोमेटेड फ्लैगिंग सिस्टम इस तरह की बड़ी गलती को रोक सकता था. कुछ ने सुपरवाइज़र पर दोष मढ़ा, जबकि अन्य ने उनकी स्थिति को समझते हुए उनके काम के दबाव को जिम्मेदार ठहराया.

    वहीं, कई लोगों ने सुझाव दिया कि बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा बड़ी रकम के लेन-देन के लिए कई स्तरों पर मंजूरी की आवश्यकता होनी चाहिए, जैसा कि कई देशों में प्रचलित है.

  • बेटी ने इस्लाम छोड़ अपना लिया दूसराˈ धर्म बौखलाया पिता ले आया पेट्रोल फिर धूं-धूं कर जल उठी लड़कीˌ

    बेटी ने इस्लाम छोड़ अपना लिया दूसराˈ धर्म बौखलाया पिता ले आया पेट्रोल फिर धूं-धूं कर जल उठी लड़कीˌ

    बेटी ने इस्लाम छोड़ अपना लिया दूसराˈ धर्म बौखलाया पिता ले आया पेट्रोल फिर धूं-धूं कर जल उठी लड़कीˌ

    धर्म लोगों को जोड़ने का काम करता है। लोगों को मानसिक सुख देने के लिए धर्म बनाया गया था। धार्मिक ग्रंथों में अच्छी बातें लिखी होती हैं, जो लोगों को सही मार्ग पर चलने का मार्गदर्शन करती है। लेकिन लोगों ने धर्म का कुछ और ही मतलब समझ लिया। धर्म के नाम पर अब लोग सामने वाले को टॉर्चर करने तक से बाज नहीं आते। ऐसा ही एक मामला युगांडा से सामने आया, जहां एक पिता ने अपनी बेटी को जिंदा जला दिया। वजह बनी बेटी का अपना धर्म बदलने का फैसला। उसने इस्लाम छोड़ दूसरे धर्म को पनाया, तब पिता ने उसपर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। लड़की की हालत देख आपका कलेजा कांप जाएगा…

    धर्म के नाम पर ये खौफनाक घटना युगांडा से सामने आई। यहां रहने वाली 24 साल की रहेमा क्योमुहेंदो को गंभीर हालत में एम्बेल रीजनल रेफेरल हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया।

    लड़की का पेट, पैर, गले और पीठ बुरी तरह जल गया था। आनन-फानन में उसे अस्पताल में एडमिट करवाया गया। जहां अगले एक महीने तक उसका इलाज किया जाएगा।

    जब लड़की अस्पताल आई थी, तब बेहद थी। जब उसे होश आया तब उसने अपने पिता की हैवानियत लोगों को बताई। लड़की ने बताया कि उसके पिता ने ही उसपर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी थी।

    जानकारी के मुताबिक, इस्लाम धर्म से ताल्लुक रखने वाली इस लड़की ने पिता खिलाफ जाकर ईसाई धर्म अपनाया था। युगांडा में 84 प्रतिशत लोग ईसाई धर्म के हैं।

    जब रहेमा के पिता को पता चला कि उसकी बेटी ने भी इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है, तो उसने घर में रखे पेट्रोल को उसपर छिड़क दिया और आग लगा दी।

    लड़की के पिता इस्लाम धर्मगुरु है। रहेमा बीते कुछ दिनों से अपनी आंटी के घर रह रही थी, जहां वो रेडियो पर ईसाई धर्म के बारे में सुन रही थी। इस बीच उसके मन में इस धर्म के प्रति झुकाव बढ़ गया।

    उसने अपने पिता के एक पादरी दोस्त को कॉल किया और धर्म परिवर्तन करवा लिया। जब उसके पिता को इस बात की जानकारी हुई तो उसने पहले उसे काफी मारा और फिर रमजान के ग्यारहवे दिन आग लगाकर उसे मारने की कोशिश की। बता दें कि युगांडा ईसाई प्रमुख देश है, जहां 84 प्रतिशत लोग ईसाई हैं। जबकि 14 प्रतिशत लोग इस्लाम मानते हैं

  • रीठा का चमत्कारी नुस्खा वायरल! सिर्फ 7ˈ दिन में बवासीर की खुजली और खून से राहत. 100 में 90 मरीज हुए ठीक, जानिए पूरा तरीका

    रीठा का चमत्कारी नुस्खा वायरल! सिर्फ 7ˈ दिन में बवासीर की खुजली और खून से राहत. 100 में 90 मरीज हुए ठीक, जानिए पूरा तरीका

    रीठा का चमत्कारी नुस्खा वायरल! सिर्फ 7ˈ दिन में बवासीर की खुजली और खून से राहत. 100 में 90 मरीज हुए ठीक, जानिए पूरा तरीका

    बवासीर आज के समय की एक आम लेकिन बेहद परेशान करने वाली समस्या बन चुकी है। दर्द, जलन, खुजली और कभी-कभी खून आना – ये सभी लक्षण इंसान को शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी परेशान कर देते हैं। ऐसे में लोग अक्सर ऐसे इलाज की तलाश में रहते हैं जो जल्दी राहत दे और बार-बार समस्या दोबारा न हो। इन दिनों एक देसी नुस्खा काफी चर्चा में है, जिसमें रीठा का इस्तेमाल बताया जा रहा है और दावा किया जा रहा है कि इससे कई लोगों को फायदा मिला है।

    यह नुस्खा पूरी तरह आयुर्वेदिक तरीके पर आधारित बताया जाता है। इसमें रीठा के फल का उपयोग किया जाता है, जिसे पहले साफ करके उसके बीज निकाल दिए जाते हैं। इसके बाद बचा हुआ हिस्सा धीमी आंच पर तब तक गर्म किया जाता है जब तक वह पूरी तरह जलकर काले कोयले जैसा न बन जाए। फिर इसमें बराबर मात्रा में पपड़िया कत्था मिलाया जाता है और उसे अच्छी तरह पीसकर महीन चूर्ण बना लिया जाता है। यही मिश्रण इस नुस्खे की मुख्य दवा माना जाता है।

    इस दवा का सेवन बहुत कम मात्रा में किया जाता है। आमतौर पर एक रत्ती यानी करीब 125 मिलीग्राम चूर्ण को मक्खन या मलाई के साथ सुबह और शाम लिया जाता है। कहा जाता है कि इसे लगातार सात दिन तक लेने से कब्ज, खुजली और खून आने जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। हालांकि यह भी जरूरी है कि इस दौरान खान-पान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान दिया जाए।

    इस नुस्खे की सबसे खास बात इसका सख्त परहेज़ है। सात दिनों तक नमक पूरी तरह बंद रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार नमक इस इलाज के असर को कम कर सकता है। इसके अलावा तला-भुना और भारी खाना भी नहीं खाना चाहिए। हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे मूंग दाल, पुराने चावल, हरी सब्जियां, कच्चा पपीता, घी और दूध को फायदेमंद माना जाता है। साथ ही ज्यादा धूप में रहना, साइकिल चलाना या कठोर जगह पर लंबे समय तक बैठना भी नुकसानदायक बताया गया है।

    आयुर्वेद में रीठा को एक शक्तिशाली औषधि माना गया है, जिसमें शरीर को शुद्ध करने और दोषों को संतुलित करने की क्षमता बताई जाती है। इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व शरीर के अंदर जमा गंदगी को बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं और पाचन को सुधार सकते हैं। यही कारण है कि इसे सिर्फ बवासीर ही नहीं बल्कि अन्य समस्याओं में भी उपयोगी माना जाता रहा है।

    हालांकि, यह समझना बहुत जरूरी है कि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और हर किसी पर एक ही नुस्खा समान रूप से काम करे, यह जरूरी नहीं है। आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञ भी यही सलाह देते हैं कि किसी भी घरेलू या आयुर्वेदिक उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए, खासकर तब जब समस्या गंभीर हो या लंबे समय से बनी हुई हो।

    अंत में यही कहा जा सकता है कि रीठा से जुड़ा यह नुस्खा कुछ लोगों के लिए लाभदायक हो सकता है, लेकिन इसे चमत्कारी इलाज समझकर बिना सोचे-समझे अपनाना सही नहीं है। सही जानकारी, संतुलित आहार और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही किसी भी उपचार को अपनाना सबसे सुरक्षित तरीका होता है।

  • नाव में बैठे विद्वान पंडितजी तूफान आयाˈ तो डूबने लगी नाव धरा रह गया सारा ज्ञान लेकिन फिर..ˌ

    नाव में बैठे विद्वान पंडितजी तूफान आयाˈ तो डूबने लगी नाव धरा रह गया सारा ज्ञान लेकिन फिर..ˌ

    नाव में बैठे विद्वान पंडितजी तूफान आयाˈ तो डूबने लगी नाव धरा रह गया सारा ज्ञान लेकिन फिर..ˌ

    एक समय की बात है। एक गांव में एक विद्वान पंडितजी रहते थे। उन्होंने हर विषय में बहुत शिक्षा हासिल कर रखी थी। उन्हें अपने इस ज्ञान और शिक्षा का बहुत घमंड था। वह हर जगह अपने ज्ञान का बखान करते थे। खुद की तारीफ़ों के पूल बांधते थे। जो लोग उनसे कम ज्ञानी थे उन्हें नीचा दिखाते थे। उन्हें ताने मारते थे। खुद को उनसे बेहतर साबित करते थे।

    जब बीच नदी में खराब हुई पंडितजी की नाव

    एक दिन पंडितजी को कुछ निजी काम से दूसरे गांव जाना था। लेकिन रास्ते में एक नदी थी। ऐसे में उन्होंने एक नाव कर ली। वह आराम से ठप्पा मारकर नाव में बैठ गए। नाव चलाने वाला नाविक एक बेहद साधारण शख्स था। नाव में बैठे-बैठे पंडितजी का अभिमान उनपर हावी हो गया। वह नाविक से पूछने लगे “तूने कहां तक शिक्षा प्राप्त की है?” इस पर नाविक बोला “बस थोड़ा बहुत पढ़ा हूं पंडितजी। इससे ज्यादा जरूरत ही महसूस नहीं हुई। काम धंधे में लग गए और क्या।”

    इस पर पंडितजी सड़ा मुंह बनाने लगे। फिर घमंड में आकर पूछा “तुझे व्याकरण का ज्ञान है क्या?” नाविक ने सिर हिला ना बोल दिया। पंडितजी फिर बोले “अरे गवार। तूने व्याकरण भी नहीं पढ़ी? अपनी आधी उम्र यूं ही गंवा दी।” फिर पंडितजी ने तेज आवाज में पूछा “भूगोल, इतिहास तो पड़ा होगा?” नाविक ने फिर ना बोल दिया। इस पर पंडितजी उसे नीचा दिखाते हुए बोले “अरे रे, फिर तो तेरा पूरा जीवन ही व्यर्थ हो गया।” वह खुद पर गर्व कर बोले “मुझे देख, मैंने जीवन का सही उपयोग किया। इतना ज्ञान हासिल किया।”

    पंडितजी की बात सुनकर नाविक कुछ नहीं बोला। बस सिर झुका बैठा रहा। कुछ देर बाद तेज हवा चलने लगी। नदी की लहरें उफान मारने लगी। नाव डगमगाने लगी। यह देख पंडितजी थर-थर कांपने लगे। नाविक बोला “पंडितजी आपको तैरना तो आता है ना?” पंडितजी ने डरते हुए कहा “नहीं आता।” इस पर नाविक हँसते हुए बोला “अरे, अब आपको व्यकारण, इतिहास, भूगोल को मदद के लिए बुलाना होगा। क्योंकि ये नाव तो अब डूबने वाली है।”

    नाविक की ये बातें सुन पंडितजी का डर सांतवे आसमान तक जा पहुंचा। हालांकि नाविक समझदार था। इतने तूफान में भी वह नाव को जैसे तैसे किनारे ले आया। अब नाव से उतरते ही पंडितजी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्हें समझ आया कि ज्ञान छोटा हो या बड़ा, वह काम का होता है। फिर वह इतिहास भूगोल का ज्ञान हो या तैरने और नाव चलाने का ज्ञान।

    कहानी की सीख

    हमे कभी भी किसी को उसकी हैसियत या ज्ञान के आधार पर नीचा नहीं दिखाना चाहिए। साथ ही अपने ज्ञान का घमंड भी नहीं करना चाहिए। हर व्यक्ति में कोई न कोई टेलेंट या किसी विशेष चीज का ज्ञान होता है। वहीं हर किसी में कोई न कोई कमी भी होती है। इसलिए सबको समान दृष्टि से देखना चाहिए।

  • डायबिटीज को जड़ से खत्म कर सकतीˈ है ये 1 चीज! सुबह खाली पेट खाने से कंट्रोल में रहेगा ब्लड शुगरˌ

    डायबिटीज को जड़ से खत्म कर सकतीˈ है ये 1 चीज! सुबह खाली पेट खाने से कंट्रोल में रहेगा ब्लड शुगरˌ

    डायबिटीज को पूरी तरह खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन सही आदतें ब्लड शुगर को शानदार तरीके से कंट्रोल कर सकती हैं। सुबह खाली पेट ली जाने वाली एक सरल चीज मेथी दाना इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाकर शुगर स्पाइक रोकने में बहुत प्रभावी है। रोज़ाना इसका सेवन प्री-डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज के प्रबंधन में बेहतरीन परिणाम दे सकता है।

    डायबिटीज को जड़ से खत्म कर सकतीˈ है ये 1 चीज! सुबह खाली पेट खाने से कंट्रोल में रहेगा ब्लड शुगरˌ

    अक्सर उम्र बढ़ने के साथ लोगों को कई स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती है, भारत में तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक बिमारी है “Diabetes “। Diabetes जिसे मधुमेह के नाम से जाना जाता है एक क्रोनिक बिमारी है, यह आमतौर पर तब देखी जाती है जब पैंक्रियाज प्रयाप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या शरीर इंसुलिन का सही ढंग से उपयोग नहीं कर पाता। डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसे पूरी तरह जड़ से खत्म करना संभव नहीं है। लेकिन इसे नियंत्रित करना बिकुल संभव है।

    कई लोगों अपने लाइफस्टाइल, डाइट और नियमित रूटीन को सुधारकर अपने ब्लड शुगर को इतनी अच्छी तरह मैनेज कर लेते हैं की उनका शरीर फिर से नार्मल रेंज में काम करने लगता है, जिसे ही रिवर्सल भी कहा जाता है। ऐसे में हेल्थी लाइफस्टाइल और डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए आप रोजाना यदि सुबह खाली पेट मेथी दाने का सा सेवन करते हैं तो यह इससे आपको अच्छा रिजल्ट देखने को मिलता है। तो चलिए जानते हैं Diabetes Reversal में कैसे काम करता है मेथी दाना और इसके फायदे।

    क्यों है डायबिटीज में मेथी दाना फायदेमंद

    मेथी दाना अपने औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में सेहत के लिए बेहद ही फायदेमंद माना जाता है, इसके बीजों में मौजूद सॉल्युबल फाइबर कर्बोहैड्रेट्स के अवशोषण (Absorption) को धीमा कर देता है। जिसके कारण भोजन के बाद शुगर अचानक नहीं बढ़ती। इतना ही नहीं यह इन्सुलिन सेंसेटिविटी को बेहतर बनाकर शरीर को ग्लूकोज का सही उपयोग करने में भी मदद करता है। ऐसे में आयुर्वेद से लेकर मॉडर्न रिसर्च दोनों में ही मेथी दाना को ब्लड शुगर नियंत्रण करने में बेहद फायदेमंद माना गया है।

    ऐसे करें मेथी दाना का सेवन

    मेथी दाना का सेवन बेहद ही आसान है इसके लिए आप रात में एक चम्मच मेथी दाना एक गिलास पानी में भिगों दें। इसके बाद सुबह खाली पेट इसे चबाकर खाएं और पानी भी पी लें, रोजाना यह छोटा सा रूटीन ब्लड शुगर को स्टेबल रखने में काफी असरदार माना जाता है।

    डायबिटीज कंट्रोल के लिए अन्य फायदेमंद चीजें

    मेथी दाना के अलावा डायबिटीज कंट्रोल के लिए यहाँ बताई गई अन्य चीजों का सेवन बेहद फायदेमंद हो सकता है, जैसे:

    • भीगे हुए बादाम: रोजाना सुबह भीगे हुए बादाम खाना आपकी सेहत को बेहतर बनाने में मदद करता है, बादाम हेल्थी फैट्स और फाइबर से भरपूर होते हैं, इनका सेवन शुगर स्पाइक को रोकने में बेहद ही सहायक होता है।
    • आंवला: एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी से भरपूर आंवला इंसुलिन कम करने में मदद करता है, ऐसे में इसका रस या कच्चा सेवन करना सेहत के ले बेहद ही लाभकारी होता है।
    • दालचीनी का पानी: दालचीनी ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से उपयोग करने में मदद करती है, ऐसे में गुनगुने पानी में आधा चम्मच दालचीनी मिलाकर पीने से स्वास्थ्य बेहतर होता है।
  • गांधारी का अनसुना सच! पिता ने पहलाˈ विवाह बकरे से क्यों कराया? आंखों पर पट्टी बांधने की वजह जानकर रह जाएंगे दंगˌ

    गांधारी का अनसुना सच! पिता ने पहलाˈ विवाह बकरे से क्यों कराया? आंखों पर पट्टी बांधने की वजह जानकर रह जाएंगे दंगˌ

    गांधारी का अनसुना सच! पिता ने पहलाˈ विवाह बकरे से क्यों कराया? आंखों पर पट्टी बांधने की वजह जानकर रह जाएंगे दंगˌ

    अभी तक हम सभी यही जानते थे कि गांधारी का विवाह हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र से हुआ था.

    लेकिन लेकिन यह बहुत कम लोगों को मालूम है कि गांधारी की दो शादी हुई थी. बहुत से लोंगों ने गांधारी के पहले विवाह की यह कहानी नहीं सुनी होगी कि गांधारी का विवाह पहले हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र के साथ नहीं बल्कि एक बकरे के साथ हुआ था.

    ये तो हम सभी जानते ही हैं कि गांधारी गांधार के सुबल नामक राजा की बेटी थीं. गांधार की राजकुमारी होने के कारण उनका नाम गांधारी पड़ा. यह हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र की पत्नी और दुर्योधन आदि कौरवों की माता थीं.

    बताया जाता है कि जब गंगापुत्र भीष्म नेत्रहीन धृतराष्ट्र के साथ गांधारी के विवाह का प्रस्ताव लेकर गंधार पहुँचे, तो वहां के राजा सुबल ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.

    बहराल, शादी के बाद जब धृतराष्ट्र को गांधारी की पहले विवाह और उसके विधवा होने की बात का पता चली तो वह आगबबूला हो गया और पूरे गांधार राज्य को समाप्त करने के लिए उस पर आक्रमण कर दिया.

    बताया जाता है कि गांधारी की जन्म के समय जब उसकी कुंडली बनाई गई तो उसकी कुंड़ली में एक दोष सामने आया. पंड़ितों ने गांधारी के पिता सुबल को बताया कि शादी के बाद उनकी पुत्री विधवा हो जाएगी. क्योंकि जिस व्यक्ति से गांधारी की शादी होगी उसकी मौत निश्चित है. गांधारी का सुहाग बचा रहे इस समस्या का हल निकालने के लिए उसके पिता ने  पंडितों की सलाह पर उसका विवाह एक बकरे से करवाकर उसकी बलि दे दी.

    ऐसा करने के बाद गांधारी की कुंड़ली से विधवा होने का दोष हट गया. बाद में गांधारी का विवाह हस्तिानपुर के धृतराष्ट्र से करवाया गया. विवाह से पूर्व गांधारी को नहीं पता था कि धृतराष्ट्र दृष्टिहीन है लेकिन अपने माता-पिता की लाज रखने के लिए उसने शादी कर ली.

    जैसे ही भगवान शिव में विशेष आस्था रखने वाली गांधारी को यह पता चला कि जिस व्यक्ति से गांधारी का विवाह हो रहा है.  वह नेत्रहीन है तो तभी से गांधारी ने भी अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली. क्योंकि गंधारी का मानना था कि यदि उसके पति नेत्रहीन हैं, तब उसे संसार को देखने का अधिकार नहीं है.

    लेकिन से सब गंधारी के भाई शकुनि को अच्छा नहीं लगा. शकुनि नहीं चाहता था कि उसकी बहन की शादी एक दृष्टिहीन से हो. उसने इसका विरोध भी किया.

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी इंटरनेट पर मौजूद स्रोतों से ली गई है। हमारा मकसद सिर्फ जानकारी देना है, इसमें दी गई बातों से हमारी अपनी कोई राय नहीं है। किसी भी जानकारी को अपनाने से पहले खुद सोच-समझकर फैसला लें