आयुर्वेद में कई प्रकार के ऐसे नुस्खों का विवरण किया गया है जिन को अपनाए तो हम अपने जीवन में कई बीमारियों को ठीक कर सकते हैं और यह उपाय रामबाण का इलाज करती है आज हम आपको एक ऐसे उपाय के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें आपको केवल अपने अंगूठे पर एक काला धागा बांधना है और उससे आपके कई प्रकार के रोग दूर हो जाएंगे आइए जानते हैं आखिर क्या फायदे हैं पैर में काला धागा बांधने के।
इंसान के शरीर के पेट के बीच में चुनावी होती है वह मनुष्य के शरीर का केंद्र माना जाता है आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस नाम ही इससे बेहतर हजारे न से जुड़ी हुई होती हैं जो आप कभी कबार के शक्कर ऊपर की ओर या दाएं बाएं चला जाता है जिस कारण से आपकी आंखों की रोशनी कम हो जाती है एवम जी मचलने लगता है पेट में दर्द होता है भूख कम लगने लगती है और शरीर में थकावट जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं इन सभी से छुटकारा पाने के लिए आप अपने अंगूठे में सिर्फ एक काला धागा बांध लीजिए जब बांध लेंगे उसके बाद दोबारा आपको नाभि के खिसकने की समस्या नहीं आएगी।
आप हैरान हो रहे होंगे कि सिर्फ एक काला धागा अंगूठे वाले के बाद हम एक समस्या से कैसे छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं तो हम आपकी जानकारी के लिए बताते हैं कि जो हमारे नाभि की मुख्य नस होती है वह हमारे अंगूठे में आकर मिलती है यदि हम उसको दबा कर रखते हैं तो हमारी नाभि का केंद्र कभी नहीं जी सकता है और काले धागे को अंगूठे में बांधना आयुर्वेद की किताबों में सबसे बड़ा रामबाण बताया गया है इसीलिए यदि आपकी बिना भी बार-बार की सकती है तो आप काले धागे को अपने अंगूठे में अवश्य बांधे।
हिंदी आपकी जानकारी में कोई भी ऐसा व्यक्ति है जो अपनी नाभि की समस्या से परेशान रहता है उसको यह उपाय बताएं और आप हमसे जुड़े रहें ताकि आप तक हम और भी दिलचस्प खबरें लाते हैं रहे।
Actress: बॉलीवुड की चमक-दमक भरी दुनिया में कई सितारे ऐसे हैं जो केवल अपने एक्टिंग के लिए नहीं बल्कि अपने लाइफस्टाइल के लिए भी सुर्खियों में रहते हैं. आज हम आपको उन स्टार्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो शुद्ध शाकाहारी हैं और मीट को हाथ तक नहीं लगाते। इस बीच आइए जानें कि वह कौन सी अभिनेत्री (Actress) है जो मांस तो दूर, अंडे को भी हाथ नहीं लगाती?
आलिया भट्ट
फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री (Actress) आलिया भट्ट आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। अपनी एक्टिंग और खूबसूरती से उन्होंने अपने फैंस के दिलों में अच्छी जगह बना ली है. आपको बता दें कि आलिया भट्ट शुद्ध शाकाहारी हैं और नॉनवेज नहीं खाती हैं.
भूमि पेडनेकर
अभिनेत्री (Actress) भूमि पेडनेकर एक समय में बहुत मोटी हुआ करती थीं। उनकी पुरानी तस्वीरें देखकर अपनी आंखों पर यकीन करना मुश्किल हो जाएगा कि क्या ये वही शख्स हैं. लेकिन दम लगा के हइशा के बाद तेजी से अपना वजन कम करने वाली भूमि साल 2020 में लॉकडाउन के समय शाकाहारी बन गई थीं.
सोनम कपूर आहूजा
सोनम कपूर उन लोगों में से एक हैं जो खुलकर अपने विचार व्यक्त करती हैं. अभिनेत्री (Actress) सोनम भी शाकाहारी एक्टर्स की लिस्ट में आती हैं. उन्हें दो बार PETA पर्सन ऑफ द ईयर चुना जा चुका है.
मलाइका अरोड़ा
49 साल की उम्र में बॉलीवुड अभिनेत्री (Actress) मलाइका अपनी फिटनेस से कई यंग एक्टर्स को मात दे सकती हैं. मलाइका दो-तीन साल पहले वीगन बन गई थीं। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि इससे उन्हें फिट रहने में काफी मदद मिली।
रुबिना दिलैक
टीवी अभिनेत्री (Actress) रुबीना दिलैक नॉनवेज खाने से दूर रहती हैं। इतना ही नहीं एक्ट्रेस अपने बच्चों को घर में उगाई सब्जियां ही खिलाती हैं ताकि वो हेल्दी रहें।
श्रद्धा कपूर
2020 में PETA ने श्रद्धा कपूर को ‘हॉटेस्ट’ शाकाहारी बताया था। कुछ दिन पहले उन्होंने इंस्टाग्राम पर मीट न खाने की बात भी कही थी। हालांकि कमेंट में उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी, लेकिन श्रद्धा शाकाहारी हैं. अपनी यात्रा में, वह PETA की कुकबुक से प्रेरित हुईं और उन्होंने बताया कि वह एक स्मार्ट खाने वाली हैं, लेकिन खाना पूरी तरह से नहीं छोड़ सकतीं।
जेनेलिया
रितेश देशमुख और उनकी पत्नी अभिनेत्री (Actress) जेनेलिया कुछ साल पहले शाकाहारी बन गए थे। इस जोड़े का एक उद्यम भी है जिसका नाम है इमेजिन मीट, जो पौधे आधारित मांस बनाता है और मांसाहारी भोजन का एक अच्छा विकल्प है. रितेश ने एक पोस्ट में बताया कि मैं एक कट्टर मांसाहारी व्यक्ति रहा हूँ जो 4 साल पहले शाकाहारी बन गया।
सच कहूँ तो कई बार ऐसा हुआ है जब मुझे मांस के स्वाद और आनंद की लालसा हुई है। लेकिन यह लालसा पौधे आधारित मांस से पूरी हुई। मैं अब पूरी तरह से शाकाहारी हूँ।
फतेहपुर में एक चौंकाने वाली घटना घटी है। एक महिला शौच के लिए कहकर अकेली घर से निकली। काफी देर बाद उसका देवर भी उसके पीछे गया। देवर ने भाभी को ऐसी हालत में देखा कि वह पूरी तरह से दहल गया।भाभी को देखते ही देवर बेहोश हो गया।
इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है।
लाहसी गांव की रहने वाली यह 35 वर्षीय महिला, जिनका नाम मीना कुमारी है। शनिवार दोपहर 2 बजे के करीब उन्होंने बच्चों से कहा कि वह शौच के लिए जा रही हैं और घर से बाहर निकल गईं। काफी देर बीत जाने के बाद भी जब वह वापस नहीं आईं, तो उनका देवर और बच्चे उन्हें खोजने निकले। लेकिन उन्हें देखकर सभी डर गए।
शनिवार शाम करीब 4 बजे मीना खेत में मिलीं। लेकिन वह जीवित नहीं थीं। खेत में उनका खून से सना हुआ शव पड़ा था। पास में ही प्लास्टिक का डिब्बा पड़ा था। भाभी को ऐसी हालत में देखकर देवर रोने लगा। भाभी-भाभी चिल्लाने लगा। उसकी आवाज सुनकर अन्य ग्रामीण वहां इकट्ठा हो गए।
उनके शरीर पर कई घावों के निशान थे। इसलिए धारदार हथियार से हत्या की आशंका जताई जा रही है। मृतक के देवर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची, उन्होंने जांच की और मौके का मुआयना किया। पुलिस का दावा है कि उन्हें कई अहम सुराग मिले
हैं। इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है। सीओ जगत कनौजिया ने कहा कि परिवार की तरफ से किसी पर भी आरोप नहीं लगाए गए हैं। शनिवार शाम महिला की नृशंस हत्या के कारण इलाके में हड़कंप मच गया है। दिनदहाड़े हुई इस घटना से ग्रामीणों में डर का माहौल है।
महिला के पति ने तीन साल पहले फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। महिला के तीन बच्चे हैं। 17 वर्षीय बड़ा बेटा पंजाब में रहता है और वहीं काम करता है। 12 साल की बेटी शिवानी अपनी मां के साथ घर और खेती के काम में मदद करती है। 10 साल का बेटा नाइक पांचवीं कक्षा में पढ़ता है। परिवार अलग होने के बाद इस परिवार को साढ़े तीन बीघा जमीन मिली थी। इस जमीन पर खेती करके यह महिला अपने परिवार का पालन-पोषण करती थीं।
कई बार लोग दोस्तों या किसी पार्टी में जरूरत से ज्यादा शराब पी लेते हैं और अगली सुबह उन्हें हैंगओवर की समस्या का सामना करना पड़ता है। सिरदर्द, उल्टी जैसा महसूस होना, पेट दर्द, कमजोरी और चक्कर आना जैसी परेशानियां हैंगओवर के सामान्य लक्षण होते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग सोचते हैं कि अब से शराब नहीं पीएंगे, लेकिन कुछ समय बाद वही स्थिति दोबारा हो जाती है।
दरअसल, ज्यादा शराब पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन और एसिडिटी बढ़ सकती है, जिससे हैंगओवर की समस्या पैदा होती है। इसके अलावा एल्कोहल के कारण ब्लड शुगर का स्तर भी प्रभावित हो सकता है, जिससे शरीर में थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएं महसूस होती हैं। हैंगओवर के कारण पूरा दिन खराब हो सकता है और व्यक्ति पूरे दिन सुस्ती और कमजोरी महसूस करता है।
अगर आप भी हैंगओवर से जल्दी राहत पाना चाहते हैं, तो एक आसान घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकता है। यह एक प्राकृतिक जूस है, जो शरीर को तरोताजा करने और पेट की गड़बड़ी को शांत करने में मदद कर सकता है।
आवश्यक सामग्री
टमाटर का रस – आधा गिलास
शहद – 2 टेबल स्पून
नींबू का रस – 2 टेबल स्पून
बनाने की विधि
सबसे पहले टमाटर के रस को एक ब्लेंडर में डालें। अब इसमें शहद और नींबू का रस मिलाएं। इन सभी चीजों को अच्छी तरह से कुछ मिनट तक ब्लेंड करें। इसके बाद आपका यह प्राकृतिक ड्रिंक तैयार हो जाएगा। इसे पीने से शरीर को ताजगी महसूस हो सकती है।
कैसे करता है यह जूस काम
टमाटर के रस में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने और थकान कम करने में मदद करते हैं। यह पेट की एसिडिटी को कम करने और पाचन तंत्र को शांत करने में भी सहायक माना जाता है।
शहद शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करता है और शराब के कारण शरीर में होने वाली कमजोरी को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं नींबू का रस पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को संतुलित करने में सहायक होता है, जिससे जी मिचलाना और उल्टी जैसा महसूस होना कम हो सकता है।
हालांकि, शराब का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
क्या आप जानते हैं? हर साल 80 लाख से ज़्यादा लोग तंबाकू की वजह से अकाल मृत्यु के मुंह में चले जाते हैं।
लेकिन सवाल है — क्या आप वाकई इस लत से बाहर निकलना चाहते हैं? बार-बार कोशिश करने के बावजूद भी क्या आप इससे बाहर नहीं निकल पा रहे?
👉 याद रखिए — डॉन को पकड़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन गुटका, पान मसाला और स्मोकिंग छोड़ना नामुमकिन नहीं है। बस ज़रूरत है सही जानकारी और सच्ची चाह की।
☠️ तंबाकू – एक स्लो पॉइज़न
यह सिर्फ एक बुरी आदत नहीं, बल्कि एक धीमा ज़हर (Slow Poison) है।
यह आपकी बॉडी और माइंड को धीरे-धीरे अंदर से नष्ट करता है।
इसके कारण: मुंह का कैंसर डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स दिल और फेफड़ों की बीमारियाँ
💭 सोचिए, अगर कोई मशीन अंदर से जंग खाने लगे — तो कितने दिन चलेगी? उसी तरह गुटका और खैनी हमारे शरीर को अंदर से सड़ा देते हैं।
😷 समाज और पर्सनालिटी पर असर
गुटका और तंबाकू चबाना न सिर्फ़ आपकी हेल्थ बल्कि आपकी सोशल इमेज को भी बिगाड़ देता है।
सार्वजनिक जगहों पर थूकना एक शर्मनाक आदत है।
इसके कारण: दांत पीले और खराब हो जाते हैं गाल और जबड़े का शेप बिगड़ता है पर्सनालिटी कमजोर दिखने लगती है।
🧠 लत छोड़ना इतना मुश्किल क्यों है?
जब आप तंबाकू छोड़ते हैं तो शुरू में Withdrawal Symptoms आते हैं — बेचैनी और चिड़चिड़ापन सिर दर्द नींद न आना बार-बार तलब लगना
👉 लेकिन याद रखिए, यह सिर्फ कुछ दिनों के लिए होता है। अगर आपने यह फेज़ झेल लिया — तो आगे की ज़िंदगी बहुत खूबसूरत हो सकती है।
💪 पहला कदम – इच्छाशक्ति (Will Power)
खुद को रोज़ याद दिलाइए कि आप यह क्यों छोड़ना चाहते हैं।
तंबाकू छोड़ना एक मैराथन रेस है, स्प्रिंट नहीं।
बीच में गिवअप करने का मन ज़रूर करेगा, लेकिन हर बार अपने परिवार, अपने बच्चों और अपनी सेहत के बारे में सोचिए।
⚔️ यह रेस आप अपनी मौत से लगा रहे हैं — अगर रुक गए तो मौत जीत जाएगी, अगर चलते रहे तो आप जीत जाएंगे।
🌿 तंबाकू छोड़ने के आसान उपाय
1. सौंफ और मुलेठी का मिक्सचर
बराबर मात्रा में सौंफ और मुलेठी पाउडर मिलाकर एक जार में रख लें।
जब क्रेविंग हो, थोड़ा सा चबाएं।
यह क्रेविंग को कंट्रोल करता है और पाचन भी सुधरता है।
चाहें तो इसमें भुनी हुई अजवाइन भी मिला सकते हैं ताकि स्वाद और असर बढ़े।
2. निकोटिन गम्स
जैसे कि Ryz Nicotine Gums — तंबाकू जैसी फ्लेवर के साथ सेम टेस्ट देते हैं। बिना हार्मफुल केमिकल्स के निकोटिन की छोटी मात्रा देते हैं। गुटका और स्मोकिंग दोनों की लत में मददगार। WHO और ETA approved हैं।
जब भी तलब उठे, बस एक गम चबाना शुरू करें।
3. जीरे का पानी
एक गिलास पानी में रात भर 1 टीस्पून जीरा भिगोएं।
सुबह इसे उबालकर गुनगुना पी लें।
यह बॉडी को डिटॉक्स करता है और क्रेविंग को कम करता है।
4. सौंफ, अजवाइन और गुड़ का पानी
एक टीस्पून सौंफ + आधा टीस्पून अजवाइन + थोड़ा सा गुड़।
इन्हें पानी में उबालें और छानकर गरम-गरम पी लें।
यह ड्रिंक स्वादिष्ट है और तंबाकू की तलब को घटाती है।
5. आयुर्वेदिक सहारा
रात में दूध के साथ अश्वगंधा पाउडर लें।
त्रिफला पाउडर गुनगुने पानी से लें।
तुलसी चाय पिएं — मन को शांत रखेगी और डिटॉक्स में मदद करेगी।
🧘♂️ क्रेविंग के समय क्या करें?
खाना खाने के बाद तंबाकू की जगह मिश्री और सौंफ चबाएं।
स्ट्रेस में हों तो एक कप चाय या तुलसी ड्रिंक लें।
धीरे-धीरे ये हेल्दी हैबिट्स आपकी पुरानी आदत की जगह ले लेंगी।
💭 अंत में याद रखिए
हर दिन की छोटी कोशिशें एक बड़ी जीत में बदलती हैं।
अगर एक दिन गलती हो जाए तो गिल्ट मत लीजिए — दोबारा कोशिश करें।
फेल होना मतलब है कि आप ट्राय कर रहे हैं। और जो कोशिश करता है, वो एक दिन ज़रूर जीतता है।
🙏 निष्कर्ष
तंबाकू छोड़ना मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं। यह सिर्फ आपकी हेल्थ नहीं, बल्कि आपके परिवार, आत्मसम्मान और भविष्य की लड़ाई है। आज से एक छोटा कदम उठाइए — और खुद को उस इंसान में बदल दीजिए जिस पर आपको गर्व
आप सभी ने बोलने वाले तोते जरूर देखे होंगे, लेकिन क्या आप ने कभी गालियां देने वाले तोते देखे हैं? ब्रिटेन के एक चिड़ियाघर में पाँच ऐसे तोते हैं जो गालियां देने में माहिर हैं। ये वहाँ आने वाले दर्शकों को ताबड़तोड़ गालियां देते थे, ऐसे में चिड़ियाघर अधिकारियों ने उन्हें हटा दिया। यह सभी ग्रे कलर के पांच अफ्रीकी तोते हैं। इनके नाम एरिक, जेड, एल्सी, टायसन और बिली है।
इन्हें कुछ समय पहले ही ब्रिटेन के लिंकनशायर वन्यजीव पार्क में दर्शकों के देखने के लिए लाया गया था। हालांकि जब ये चिड़ियाघर आने वाले दर्शकों को गाली देने लगे तो उन्हें हटाना पड़ा।
चिड़ियाघर आने वालों को गालियां देने लगे तोते
वन्यजीव पार्क के अधिकारी ने इन पांच तोतों को एक ही पिंजरे में रखा था। हालांकि एक हफ्ते के अंदर ये सभी आपस में गालियां देना सीख गए। इन तोतों की भाषा सुन वन्यजीव पार्क के अधिकारी भी हैरान रह गए। पार्क के कर्मचारियों ने बताया कि पहले तो ये तोते आपस में ही एक दूसरे को गाली दे रहे थे, लेकिन फिर उन्होंने पार्क में आने वाले दर्शकों को गाली देना शुरू कर दिया। ऐसा प्रतीत होता है कि इन तोतों ने साथ में रहने के दौरान आपस में ऐसी गंदी भाषा सीख ली।
25 सालों में कभी नहीं देखा ऐसा
वन्यजीव पार्क के चीफ एग्जीक्यूटिव स्टीव निकोल्स कहते हैं कि “जब हमे इन तोतों के गाली देने की बात पता चली तो हैरान रह गए। बीते 25 सालों में हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा। हमे ये पता था कि तोते कभी-कभी कुछ भद्दी बातें बोल देते हैं। लेकिन दर्शकों को गाली देने वाले तोते मैंने पहली बार देखे हैं। हम अब पार्क में आने वाले बच्चों को लेकर चिंतित हैं। इसलिए हमने इन्हें पार्क से हटाने का फैसला किया है।”
दर्शकों की हंसी से मिलता था बढ़ावा
स्टीव निकोल्स ने आगे बताया कि “सबसे बड़ा संयोग ये रहा कि हमने पाँच अलग-अलग तोतों को एक ही पिंजरे में, एक ही हफ्ते के लिए रखा। इसका मतलब ये हुआ कि पार्क में ऐसा पिंजरा बन गया जहाँ सिर्फ गाली देने वाले तोते ही थे। हमने इन तोतों को लोगों के देखने के लिए इसलिए रख दिया कि ये अपनी बुरी आदत छोड़ देंगे। लेकिन ये तो दर्शकों ही गालियां देने लगे। जब ये दर्शकों को गाली देते थे तो वे जोर-जोर से हँसते थे। इससे इन तोतों को और बढ़ावा मिला और ये और भी अधिक गालियां देने लगे।”
छोटे बच्चों की खातिर हटा दिया
स्टीव निकोल्स बताते हैं कि “तोतों का गाली देना बड़े लोगों के लिए भले मजेदार हो, लेकिन जो बच्चे पार्क में आते हैं उनके लिए ये सही चीज नहीं है। अभी इन तोतों को हटा दिया गया है। इन्हें अलग-अलग रखा गया है। उम्मीद है कि कुछ दिनों बाद ये अपनी बुरी आदत छोड़ कुछ नए शब्द बोलना सीख लेंगे। हालांकि यदि उन्होंने अपनी बुरी भाषा बोलना नहीं छोड़ा तो मैं नहीं जानता कि फिर इनके साथ क्या करना है।”
वैसे यदि आपके घर भी कोई तोता है तो उसके सामने कुछ भी बुरा बोलने से पहले दस बार सोचे, वरना आपके घर का माहौल दूसरों के सामने एक्सपोज हो जाएगा।
आज हम आपको बबूल की फली अर्थात उसके फल के बारे में बताएंगे। वैसे तो बबूल का हर भाग पत्तीयाँ, फूल, छाल और फली सभी औषधि है। यह कांटेदार पेड़ होता है। सम्पूर्ण भारत वर्ष में बबूल के लगाये हुए तथा जंगली पेड़ मिलते हैं।
बबूल के पेड़ बड़े व घने होते हैं। ये कांटेदार होते हैं।
गर्मी के मौसम में इस पर पीले रंग के फूल गोलाकार गुच्छों में लगते है तथा सर्दी के मौसम में फलियां लगती हैं। इसकी लकड़ी बहुत मजबूत होती है। बबूल के पेड़ पानी के निकट तथा काली मिट्टी में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। इनमें सफेद कांटे होते हैं जिनकी लम्बाई 1 सेमी से 3 सेमी तक होती है। इसके कांटे जोड़े के रूप में होते हैं। इसके पत्ते आंवले के पत्ते की अपेक्षा अधिक छोटे और घने होते हैं।
बबूल के तने मोटे होते हैं और छाल खुरदरी होती है। इसके फूल गोल, पीले और कम सुगंध वाले होते हैं तथा फलियां सफेद रंग की 7-8 इंच लम्बी होती हैं। इसके बीज गोल धूसर वर्ण (धूल के रंग का) तथा इनकी आकृति चपटी होती है।
विभिन्न भाषाओं में बबूल का नाम : संस्कृत में बबूल, बर्बर, दीर्घकंटका, हिन्दी में बबूर, बबूल, कीकर, बंगाली में बबूल गाछ, मराठी में माबुल बबूल, गुजराती में बाबूल, तेलगू में बबूर्रम, नक दुम्मा, नेला, तुम्मा, पंजाबी में बाबला, तमिल में कारुबेल। बबूल कफ (बलगम), कुष्ठ रोग (सफेद दाग), पेट के कीड़ों-मकोड़ों और शरीर में प्रविष्ट विष का नाश करता है।
बबूल का गोंद यह गर्मी के मौसम में एकत्रित किया जाता है। इसके तने में कहीं पर भी काट देने पर जो सफेद रंग का पदार्थ निकलता है। उसे गोंद कहा जाता है।लेकिन आज हम आपको बबूल की फली, फूल, छाल आदि के फायदे बताएंगे। आइये जानते है इसके बारे में…
बबूल की फली के फायदे | Babool
घुटनों का दर्द और अस्थि भंग : बबूल के बीजों को पीसकर तीन दिन तक शहद के साथ लेने से घुटनों के दर्द और अस्थि भंग दूर हो जाता है और हडि्डयां वज्र के समान मजबूत हो जाती हैं। घुटनों में चिकनाई आजाती है जिन्हें डॉक्टर ने घुटनों के रिप्लेसमेंट की बोल दिया उनको भी यह ठीक करने का सामर्थ्य रखते है।
टूटी हड्डी जल्द जोड़ने के लिए : बबूल की फलियों का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से टूटी हड्डी जल्द ही जुड़ जाती है। यह उपाय बहुत की प्रभावी और कारगर है।
दांत का दर्द : बबूल की फली के छिलके और बादाम के छिलके की राख में नमक मिलाकर मंजन करने से दांत का दर्द दूर हो जाता है।
पेशाब का अधिक मात्रा में आना : बबूल की कच्ची फली को छाया में सुखाकर उसे घी में तलकर पाउडर बना लें। इस पाउडर की 3-3 ग्राम मात्रा रोजाना सेवन करने से पेशाब का ज्यादा आना बंद होता है।
शारीरिक शक्ति और कमज़ोरी मिटाएँ : बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें और इसमें बराबर की मात्रा मे मिश्री मिलाकर पीस लेते हैं। इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से पानी के साथ सेवन से करने से शारीरिक शक्ति में इज़ाफ़ा होता है और सभी कमज़ोरी वाले रोग दूर हो जाते हैं।
रक्त बहने पर : बबूल की फलियां, आम के बौर, मोचरस के पेड़ की छाल और लसोढ़े के बीज को एकसाथ पीस लें और इस मिश्रण को दूध के साथ मिलाकर पीने से खून का बहना बंद हो जाता है।
मर्दाना ताक़त : बबूल की कच्ची फलियों के रस में एक मीटर लंबे और एक मीटर चौडे़ कपड़े को भिगोकर सुखा लेते हैं। एक बार सूख जाने पर उसे दुबारा भिगोकर सुखा लेते है। इसी प्रकार इस प्रक्रिया को 14 बार करते हैं। इसके बाद उस कपड़े को 14 भागों में बांट लेते हैं, और रोजाना एक टुकड़े को 250 ग्राम दूध में उबालकर पीने से मर्दाना ताक़त बढ़ती है।
अतिसार (दस्त) : बबूल की दो फलियां खाकर ऊपर से छाछ (मट्ठा) पीने से अतिसार में लाभ मिलता है।
बबूल की छाल, पत्ती और फूल के फायदे :
मुंह के रोग : बबूल की छाल को बारीक पीसकर पानी में उबालकर कुल्ला करने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
पीलिया : बबूल के फूलों को मिश्री के साथ मिलाकर बारीक पीसकर चूर्ण तैयार कर लें। फिर इस चूर्ण की 10 ग्राम की फंकी रोजाना दिन में देने से ही पीलिया रोग मिट जाता है। या बबूल के फूलों के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 10 ग्राम रोजाना खाने से पीलिया रोग मिट जाता है।
माता-बहनो के मासिक-धर्म संबन्धी विकार : 20 ग्राम बबूल की छाल को 400 मिलीलीटर पानी में उबालकर बचे हुए 100 मिलीलीटर काढ़े को दिन में तीन बार पिलाने से भी मासिक-धर्म में अधिक खून का आना बंद हो जाता है। या लगभग 250 ग्राम बबूल की छाल को पीसकर 8 गुने पानी में पकाकर काढ़ा बना लेते हैं। जब यह काढ़ा आधा किलो की मात्रा में रह जाए तो इस काढ़े की योनि में पिचकारी देने से मासिक-धर्म जारी हो जाता है और उसका दर्द भी शान्त हो जाता है।
आंखों से पानी बहना : बबूल के पत्ते को बारीक पीस लेते हैं। इसके बाद उसमें थोड़ा सा शहद मिला लें, फिर इसे काजल के समान आंखों पर लगाने से आंखों से पानी निकलना खत्म हो जाता है।
कंठपेशियों का पक्षाघात : बबूल की छाल के काढ़े से रोजाना दो बार गरारा करने से गले की शिथिलता समाप्त हो जाती है।
गले के रोग : बबूल के पत्ते और छाल एवं बड़ की छाल सभी को बराबर मात्रा में मिलाकर 1 गिलास पानी में भिगो देते हैं। इस प्रकार तैयार हिम से कुल्ले करने से गले के रोग मिट जाते हैं।
अम्लपित्त या एसीडिटी : बबूल के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसमें 1 ग्राम आम का गोंद मिला देते हैं। इस काढ़े को शाम को बनाते हैं और सुबह पीते हैं। इस प्रकार से इस काढ़े को सात दिन तक लगातार पीने से अम्लपित्त का रोग मिट जाता है।
आज आपको परिवार की आजीविका चलाने के लिए पैसों की आवश्यकता होती है. क्योंकि किसी भी चीज़ को खरीदने के लिए आज पैसा अनिवार्य है. इस देश में बहुत से लोगों के पास इतना पैसा है कि उनके बच्चों को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती है. लेकिन कुछ ऐसे भी लोग है जो दिन रात मेहनत करने के बाद भी दो वक्त का खाना जुटाने में नाकामयाब रहते है. जिनके पास पैसों की भरमार है उनको कोई भी वस्तु खरीदने से पहले कुछ सोचना नहीं पड़ता है.
लेकिन आज ऐसा समय आ गया है कि जिन लोगों के घर में दो बच्चें होते है उनको पैसा बड़ा संभाल कर खर्च करना पड़ता है. क्योंकि हर व्यक्ति चाहता है कि बड़े होकर उसके बच्चें अच्छी जगह सेटल हो जाएँ. जिसके लिए वह अपनी इच्छाओं को मारकर एक एक रूपया जमा करते है.
लेकिन जिनके पास आमंदनी कम और लागत ज्यादा होती है वह कभी कभी पैसा कमाने के लिए गलत काम भी करने लग जाते है. लेकिन अब बस बहुत हुआ. आज हम आपके लिए लेकर आये है एक ऐसा जबरजस्त नुस्खा, जिसके बाद आपके घर में इतना पैसा बरसेगा कि आप संभालते-संभालते थक जाओगे.
इस नुस्खे के बाद आप के घर में सुख-शांति बनी रहेगी. घर में इस जगह लटका दे फिटकरी का एक टुकड़ा जिसके बाद इतना बरसेगा पैसा संभाल नहीं पाओगे. कुछ लोग इन नुस्खो को मानकर इनके लाभ उठा लेते है और कुछ लोग इनको बस एक घोषणा ही समझते है. क्योंकि विश्वाश एक ऐसा मंत्र है जिसके कारण ही पूरी दुनिया चलती है.
इन नुस्खों की लोगों के जीवन पर असर संबंधी बात अगर की जाये तो एक ही बात सामने आती है. कि आपकी उसके ऊपर आस्था कितनी है. फिटकरी का प्रयोग हम बहुत पहले से करते आ रहे है. जिसको जले कटे हुए घावों पर प्रयोग में लाया जाता है. जानकारी के लिए आपको बता दें, कि फिटकरी के प्रयोग से हमारी सभी समस्याओं का हल निकल सकता है.
बहुत मेहनत करने के बाद भी तरक्की नहीं मिलती है तो उसका ऊपाय के लिए लिए हमें फिटकरी को एक काले कपड़े में बांधकर किसी कोने में रखने से बरकत मिलती है और तरक्की के नए नए रस्ते भी खुलते है. इस नुस्खे को करने के बाद दूसरो को बुरी नज़र से बचाती है. आपके दिन दूगने और रात चोगनी हो जाती है. जिसके बाद आपको अपने जीवन में परेशानियों का सामना करना नहीं पढ़ता है.
1. एक महिला के पति ने उसका खाता खुलवाया. थोड़ी देर में भाभी ने अपने देवर को इसकी जानकारी दी. भाभी- देवर जी, मेरा बैंक में खाता खुल गया है. देवर- अच्छा, कौन से बैंक में भाभी? भाभी- एक किस बैंक में. देवर- अरे भाभी, वो एक किस बैंक नहीं, एक्सिस बैंक है.
2. देवर ने बड़े प्यार से भाभी से पूछा- अरे भाभी, कॉलेज के दिनों में आपका अफेयर था कि नहीं? भाभी- नहीं, किसी के साथ नहीं. देवर- अरे झूठ मत बोली भाभी, मैं भैया से नहीं कहूंगा. आप शेयर कर सकती हैं. भाभी- हां, एक लड़का था. देवर- अच्छा. अभी मुझे दो हजार की जरुरत है. दे दो, वरना भैया को बता दूंगा.
3. एक दिन बीवी अपने पति का मोबाइल चेक कर रही थी. उसने देखा कि कई नंबर अजीब से नामों से सेव थे. कोई सिर का इलाज, कोई होंठों का इलाज, किसी का नंबर दिल का इलाज से सेव था. बीवी ने अपना नंबर डायल किया तो वो ला-इलाज के नाम से आया. इसके बाद बीवी ने पड़ोसन का नंबर डायल किया. उसका नंबर दिल का इलाज से सेव था. तब से पति अस्पताल में है.
4. बाथरूम में नहाती भाभी से अंधा देवर- भाभी, लो लड्डू खा लो. भाभी को लगा ये तो अंधा है. वो बिना कपड़ों के ही बाहर आ गई और लड्डू खाते हुए पूछा- किस ख़ुशी में लड्डू खिला रहे हैं देवर जी. देवर- आंखों की रौशनी वापस आने की ख़ुशी में.
5. ऑफिस में एक शख्स ने अपने साथी की सूजी हुई आँखें देखी तो उसका हालचाल लेने गया. शख्स- क्या हुआ, ये आँखें कैसे सूज गई? दोस्त- अरे तेरी भाभी का जन्मदिन था तो केक लेकर गया था. इसी कारण से. शख्स- केक का आंखों से क्या लेना-देना? दोस्त- तेरी भाभी का नाम तपस्या है. केक वाले ने केक पर हैप्पी बर्थडे समस्या लिख दिया था.
एटा में मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में रविवार देर रात पथरी के दर्द का इलाज कराने आई महिला को प्रसव हो गया। इसके बाद पति भड़क गया। उसका कहना था कि वह एक साल से घर से बाहर रह रहा है।प्रसव के बाद अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में रविवार रात करीब 2 बजे कुछ लोग एक महिला को पथरी के दर्द की शिकायत पर लेकर आए। यहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने परीक्षण किया। उसके बड़े आकार के पेट को देखकर दवा देने से पहले गर्भवती होने के बारे में पूछा तो महिला ने इन्कार कर दिया। इसके बाद स्टाफ ने महिला को दर्द संबंधी इंजेक्शन लगा दिया। कुछ देर बाद महिला लघुशंका की कहकर शौचालय में पहुंची।
जब काफी देर तक बाहर नहीं आई तो साथ आई दूसरी महिला ने अंदर जाकर देखा। पता चला कि महिला का प्रसव हो गया है। इसके बाद इमरजेंसी में मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने वहां पहुंचकर बच्चे को उठाया और हालत गंभीर देखते हुए मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में पहुंचाया। महिला को गायनिक वार्ड में भर्ती कराया गया।
महिला के पति ने बताया कि वह 1 वर्ष से घर से बाहर रहकर नौकरी कर रहा है। फिर पत्नी गर्भवती कैसे हो गई? और इस बारे में अब तक उसने घर के लोगों को जानकारी क्यों नहीं दी? इसके बाद इमरजेंसी से गायनिक वार्ड तक पति हंगामा करता रहा।
महिला एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. साधना सिंह ने बताया कि महिला को रात के लगभग 2:30 बजे भर्ती कराया गया था। प्रसूता को 48 घंटे तक चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाता है मगर इस महिला के पति ने हंगामा करते हुए घर ले जाने की जिद की। इसके बाद औपचारिक कार्रवाई करते हुए सोमवार सुबह महिला को पति के साथ भेज दिया गया।
नवजात को किया रेफर, रास्ते में तोड़ा दम डॉ. साधना सिंह ने बताया कि समय से पूर्व हुए प्रसव में नवजात की हालत नाजुक थी। उसे एसएनसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। बेहतर इलाज की जरूरत देखते हुए आगरा रेफर किया गया मगर रास्ते में ही शिशु ने दम तोड़ दिया।
छह बच्चों की मां है महिला परिवारीजन के मुताबिक महिला पहले से ही छह बच्चों की मां है। पति बीते एक साल से घर से बाहर रहकर काम कर रहा है। देर रात प्रसव की जानकारी पर परिजन में विवाद खड़ा हो गया और पति ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया।