Author: me.sumitji@gmail.com

  • रात को सोते समय हल्दी वाला दूधˈ पीने से जड़ से खत्म हो जाते हैं यह 3 रोग.ˌ

    रात को सोते समय हल्दी वाला दूधˈ पीने से जड़ से खत्म हो जाते हैं यह 3 रोग.ˌ

    रात को सोते समय हल्दी वाला दूधˈ पीने से जड़ से खत्म हो जाते हैं यह 3 रोग.ˌ

    दूध और हल्दी, भारतीय रसोई के दो ऐसे नायाब रत्न हैं, जो न केवल स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी वरदान माने जाते हैं। आयुर्वेद में हल्दी को औषधीय गुणों का खजाना कहा गया है, और जब इसे दूध के साथ मिलाकर रात को पिया जाता है, तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं।

    हल्दी वाला दूध, जिसे अंग्रेजी में “गोल्डन मिल्क” भी कहते हैं, न केवल शरीर को तंदुरुस्त रखता है, बल्कि कई गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करने में भी मदद करता है। आइए, जानते हैं कि रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध पीने से किन रोगों से छुटकारा मिल सकता है और यह आपकी सेहत को कैसे निखार सकता है।

    क्या आपके चेहरे पर बार-बार मुंहासे उभर आते हैं? या फिर दाग-धब्बों ने आपकी त्वचा की रौनक छीन ली है? अगर हां, तो हल्दी वाला दूध आपका सबसे अच्छा दोस्त बन सकता है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन, जो एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व है, त्वचा की सूजन को कम करता है और मुंहासों को जड़ से खत्म करने में मदद करता है। रोजाना रात को एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से आपकी त्वचा धीरे-धीरे साफ और चमकदार होने लगती है। यह नुस्खा न केवल प्राकृतिक है, बल्कि बिना किसी साइड इफेक्ट के आपकी त्वचा को नई जिंदगी देता है।

    उम्र बढ़ने के साथ-साथ हड्डियों और जोड़ों का दर्द एक आम समस्या बन जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हल्दी वाला दूध इस दर्द को कम करने में कारगर साबित हो सकता है? हलद्ी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों की सूजन को कम करते हैं, जिससे गठिया और हड्डियों के दर्द में राहत मिलती है। इसके अलावा, दूध में मौजूद कैल्शियम और विटामिन डी हड्डियों को मजबूती प्रदान करते हैं। रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध पीने से न केवल दर्द में कमी आती है, बल्कि आपकी नींद भी गहरी और सुकून भरी होती है, जो शरीर को रिकवर करने में मदद करती है।

    आज के समय में इम्यूनिटी का मजबूत होना बेहद जरूरी है। हल्दी वाला दूध आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हल्दी का करक्यूमिन बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में मदद करता है, जबकि दूध में मौजूद प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व शरीर को ताकत देते हैं। रोजाना रात को इस सुनहरे पेय को पीने से सर्दी-जुकाम, वायरल इंफेक्शन और अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। खासकर सर्दियों में यह नुस्खा आपके शरीर को गर्म रखता है और बीमारियों से दूर रखने में मदद करता है।

    क्या आपको रात में नींद न आने की समस्या है? हल्दी वाला दूध आपकी इस परेशानी का भी हल हो सकता है। हल्दी में मौजूद तत्व तनाव को कम करने में मदद करते हैं, जबकि गर्म दूध का सेवन मस्तिष्क को शांत करता है। यह संयोजन न केवल आपको गहरी नींद देता है, बल्कि सुबह उठने पर ताजगी का एहसास भी कराता है। रात को सोने से पहले एक गिलास हल्दी वाला दूध पीना आपके रूटीन में शामिल करने लायक एक छोटा सा बदलाव है, जो आपकी जिंदगी को और बेहतर बना सकता है।

    हल्दी वाला दूध बनाना बेहद आसान है। एक गिलास दूध को हल्का गर्म करें, उसमें आधा चम्मच हल्दी पाउडर डालें। अगर आप चाहें तो इसमें एक चुटकी काली मिर्च भी मिला सकते हैं, क्योंकि यह हल्दी के गुणों को और बढ़ा देती है। स्वाद के लिए थोड़ा शहद या गुड़ भी डाला जा सकता है। इसे अच्छे से मिलाएं और धीरे-धीरे चुस्की लेते हुए पिएं। इस सुनहरे पेय का नियमित सेवन आपके शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाएगा।

    हल्दी वाला दूध सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि सेहत का खजाना है। यह न केवल आपकी त्वचा को निखारता है और हड्डियों को मजबूत करता है, बल्कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर आपको स्वस्थ और ऊर्जावान रखता है। रात को सोने से पहले इस प्राकृतिक नुस्खे को अपने रूटीन में शामिल करें और इसके चमत्कारी फायदों को खुद अनुभव करें। लेकिन अगर आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो इसका सेवन शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • क्या एक सुपारी पलट सकती है किस्मत?ˈ जानें कैसे एक साधारण बीज बन सकता है धन और सौभाग्य का राजˌ

    क्या एक सुपारी पलट सकती है किस्मत?ˈ जानें कैसे एक साधारण बीज बन सकता है धन और सौभाग्य का राजˌ

    क्या एक सुपारी पलट सकती है किस्मत?ˈ जानें कैसे एक साधारण बीज बन सकता है धन और सौभाग्य का राजˌ

    सुपारी को अक्सर पूजा-पाठ में सामान्य वस्तु की तरह इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में इसे बेहद शुभ और प्रभावशाली माना गया है। कई पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार सुपारी में ऐसी ऊर्जा होती है, जो घर के वातावरण को सकारात्मक बनाकर धन और सौभाग्य को आकर्षित करती है। कहा जाता है कि प्रभु गणेश का आभास स्वरूप होने के कारण सुपारी हर तरह की बाधाओं को दूर करती है और रुके हुए कामों में तेजी लाती है।

    वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घर के पूर्व, उत्तर या ईशान कोण में चांदी या पीतल के पात्र में एक साबुत सुपारी स्थापित की जाए, तो इससे घर में नकारात्मकता कम होती है और धन का प्रवाह शुरू होता है। कई लोग वर्षों से सुपारी के इन उपायों को अपनाते आ रहे हैं और दावा करते हैं कि इससे नौकरी में तरक्की, व्यापार में लाभ और अचानक आर्थिक अवसर मिलते हैं।

    सुपारी को सिद्ध करने की पारंपरिक विधि

    शास्त्रों के अनुसार सुपारी को तभी प्रभावी माना जाता है, जब इसे सही विधि से “सिद्ध” किया जाए। सुपारी सिद्धि के लिए शुभ नक्षत्र जैसे पुष्य नक्षत्र, विजयादशमी, दीपावली या अक्षय तृतीया—सबसे श्रेष्ठ माने जाते हैं। इन विशेष दिनों में लाल या पीले कपड़े पर सुपारी रखकर गणपति का आवाहन किया जाता है। हल्दी, कुमकुम, अक्षत, चंदन और फूलों से सुपारी का विधिवत पूजन करने के बाद लक्ष्मी मंत्र या गणपति मंत्र का जाप किया जाता है। इस मंत्रजाप को सुपारी में सकारात्मक ऊर्जा भरने वाला माना गया है। माना जाता है कि इसी क्षण सुपारी सिद्ध हो जाती है और उसके बाद यह सौभाग्य, आर्थिक स्थिरता और सफलता का माध्यम बन जाती है। कई परंपराओं में यह भी कहा गया है कि सिद्ध सुपारी को तिजोरी, दुकान, पूजा स्थान या घर के शुभ दिशा में रखने से धन की कमी दूर होती है और बाधाएं खत्म होती हैं। सिद्ध सुपारी को बार-बार पूजने से ऊर्जा और प्रभाव बढ़ता है।

    मनोकामना पूर्ति के लिए सुपारी का विशेष उपाय

    यदि कोई इच्छा लंबे समय से पूरी नहीं हो रही हो या जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हों, तो सुपारी का मनोकामना पूर्ति उपाय बेहद लोकप्रिय माना जाता है। शुभ मुहूर्त या बुधवार के दिन किसी मंदिर में एक साबुत सुपारी, गंगाजल से भरा तांबे का लोटा और थोड़ी सी दक्षिणा अर्पित की जाती है।

    यह उपाय ईश्वर तक आपकी मनोकामना को सीधे पहुंचाने वाला माना गया है। कई ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि सुपारी मानसिक और ऊर्जा संतुलन पैदा करती है, जिससे संकल्प की शक्ति बढ़ती है और मनोकामना पूर्ण होने का मार्ग खुलने लगता है। चाहे नौकरी में प्रमोशन हो, व्यापार में लाभ, विवाह का संयोग, धन आगमन या जीवन की किसी भी तरह की अड़चन—सुपारी का यह उपाय आस्था रखने वालों के लिए तेजी से फल देने वाला माना जाता है।

    पूर्णिमा पर किया जाने वाला सुपारी टोटका

    पूर्णिमा को चंद्रमा की ऊर्जा अपने चरम पर होती है, इसी कारण इस दिन किया गया सुपारी उपाय बेहद प्रभावशाली माना जाता है। पूर्णिमा की रात साबुत सुपारी पर हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक बनाकर उसे चावल की ढेरी पर रखा जाता है। इसके ऊपर लाल धागे से बंधी दूसरी सुपारी स्थापित की जाती है और पूरा पूजन धूप–दीप और मंत्रजाप के साथ किया जाता है। यह उपाय लक्ष्मी को आकर्षित करने वाला माना गया है, जिससे घर में स्थायी समृद्धि आती है।

    कहा जाता है कि इस उपाय से अचानक धन लाभ, रुके हुए पैसे की प्राप्ति और कर्ज जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। पूर्णिमा का यह टोटका उन परिवारों के लिए विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है जो बार-बार आर्थिक कठिनाइयों से जूझते हैं।

  • नीता अंबानी के ड्राइवर भी जीते हैंˈ लग्जरी लाइफ, महीने में मिलती है इतनी सैलेरीˌ

    नीता अंबानी के ड्राइवर भी जीते हैंˈ लग्जरी लाइफ, महीने में मिलती है इतनी सैलेरीˌ

    नीता अंबानी के ड्राइवर भी जीते हैंˈ लग्जरी लाइफ, महीने में मिलती है इतनी सैलेरीˌ

    रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी देश-दुनिया में एक जाना माना नाम हैं। भारत में इनका नाम बच्चा बच्चा जानता है। इनका नाम जितना बड़ा है, उतने ही बड़े शानो-शौकत भी है। जी हां, अंबानी का पूरा परिवार बड़े ही शान-शौकत से अपनी लाइफ जीता है। बता दें कि अम्बानी की फैमिली दुनिया के सबसे महंगे रेसिडेंशियल प्रॉपर्टीज में से एक ‘एंटीलिया’ में रहती है, जिसमें 27 फ्लोर हैं।

    मुकेश अंबानी जितने ज्यादा पॉपुलर हैं, उतनी ही ज्यादा उनकी वाइफ भी मशहूर हैं। मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। नीता अंबानी न सिर्फ अपनी खूबसूरती से सुर्खियां बटोरती हैं, बल्कि एक पॉवरफुल बिजनेसवुमेन हैं। बता दें कि नीता अंबानी आईपीएल की टीम मुंबई इंडियंस की मालकिन भी हैं, जिसे अच्छे संभालती हैं।

    नीता अंबानी अक्सर गरीबों की मदद भी करती हुई नजर आती हैं। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी मदद की है। इसके अलावा, अंबानी परिवार द्वारा खोले गए कंपनियों में लाखों लोग काम भी करते हैं। साथ ही उनके घर एंटीलिया में भी करीब 600 लोग काम करते हैं। कहा जाता है कि अंबानी परिवार अपने घर काम करने वाले लोगों का भी भरपूर ध्यान रखता है।

    अंबानी परिवार में काम करने के लिए देने पड़ते हैं टेस्ट

    मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो अंबानी के घर में काम मिलना बहुत मुश्किल है। इनके यहां काम करने वाले लोगों को कई परीक्षणों होकर गुजरना पड़ता है, जिसके लिए बकायदा एक प्रणाली तैयारी की गई है। इतना ही नहीं, नीता अंबानी का ड्राइवर बनने के लिए भी लोगों को कई टेस्ट पास करने पड़ते है, जिसके लिए बकायदा कंपनियों को ठेका दिया जाता है।

    अंबानी परिवार के ड्राइवर बनने के इच्छुक लोगों से कंपनियां कई टेस्ट लेती है। ऐसे में, जो लोग इनकी कसौटी पर खरे उतरते हैं, उन्हें आगे के लिए ट्रेनिंग दी जाती हैं। कंपनियां यह भी तय करती हैं कि ड्राइविंग के अलावा ड्राइवर हर चीज़ में सक्षम हो, ताकि रास्ते में आने वाली परेशानियों को हैंडल कर सके।

    मतलब साफ है कि अंबानी परिवार का ड्राइवर बनने के लिए भी लोगों को पापड़ बेलने पड़ते हैं। ठीक इसी तरह से अन्य कामों के लिए भी ट्रेनिंंग और टेस्ट से गुजरना पड़ता है, तब जाकर अंबानी परिवार में एंट्री मिलती है। हालांकि, अंबानी परिवार अपने स्टॉफ का भरपूर ध्यान रखता है।

    नीता अंबानी के ड्राइवर की सैलेरी कितनी है?

    नीता अंबानी के ड्राइवर की सैलरी 2 लाख रुपये प्रति महीना है। यानी सालाना नीता अंबानी के ड्राइवर का पैकेज 24 लाख रुपये हैं। सिर्फ सैलरी ही नहीं नीता अंबानी अपने स्टाफ को एजुकेशन अलाउंस और इंस्युरेन्स जैसी सुविधाएं भी देती हैं, ताकि वे लोग अच्छी जिंदगी जी सके। इतना ही नहीं, उनके रहने खाने का इंतजाम भी अंबानी परिवार कराता है।

    खबरों की माने तो अंबानी परिवार के स्टॉफ के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं। इसका खर्चा भी अंबानी परिवार ही उठाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नीता अंबानी की फोटोज भी सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होती रहती है, जिसे उनके फैंस बहुत पसंद करते हैं। इतना ही नहीं, उम्र के साथ साथ नीता अंबानी की खूबसूरती बढ़ती जा रही है।

  • पिता की मौत का ऐसा बदला! आरोपीˈ 14 साल जेल रहा छूटा तो दिल्ली गया; जब आया तो बेटे ने फरसे से काटाˌ

    पिता की मौत का ऐसा बदला! आरोपीˈ 14 साल जेल रहा छूटा तो दिल्ली गया; जब आया तो बेटे ने फरसे से काटाˌ

    उत्तर प्रदेश के हरदोई में पिता की मौत को बदला लेने के लिए युवक ने अधेड़ उम्र के व्यक्ति की फरसे से काटकर हत्या कर दी. घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है.

    पिता की मौत का ऐसा बदला! आरोपीˈ 14 साल जेल रहा छूटा तो दिल्ली गया; जब आया तो बेटे ने फरसे से काटाˌ

    उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में एक दिल दहला देने वाली हत्या की वारदात सामने आई है. यहां पर पिता की मौत का बदला लेने के लिए बेटे ने एक अधेड़ शख्स की दिनदहाड़े फरसे से काटकर सरेआम हत्या कर दी है. घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस अधेड़ शख्स को लेकर अस्पताल पहुंची, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है.

    हरदोई जिले के बेनीगंज थाना क्षेत्र के भैनगांव में दिनदहाड़े हुई हत्या की वारदात के बाद से दहशत का माहौल है. यहां पर सरपंच नाम के शख्स की फरसे से काटकर हत्या कर दी गई है. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि साल 2009 में इसी गांव में सत्यपाल नाम के व्यक्ति की हत्या सरपंच ने विवाद की चलते कर दी थी. जिसमें वह 14 साल की सजा काटकर कुछ समय पहले ही जेल से बाहर निकाला था. जेल से निकलने के बाद सरपंच दिल्ली में रहकर मेहनत मजदूरी कर रहा था.

    बीच सड़क फरसे से काटकर अधेड़ शख्स की हत्या

    अभी कुछ दिन पहले ही वह गांव में आकर रहने लगा था. वहीं, दूसरी तरफ सत्यपाल की बेटा सूरज पिता की हत्या के प्रतिशोध में जल रहा था. पिता के कातिल को गांव में देखकर अंदर ही अंदर कुढ़ रहा था. अब उसे गांव के लोग भी ताने मार रहे थे. सोमवार की सुबह सरपंच गली से गुजर रहा था. तभी सूरज ने अपने साथियों के साथ मिलकर सरपंच पर जानलेवा हमला कर दिया. लाठी डंडों और फरसे के हमले से सरपंच गली में ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा.

    गली में खून से लथपथ मिला शव

    घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने खून से लथपथ सरपंच को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. दिनदहाड़े हुई इस हत्या की वारदात के बाद गांव में पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन और आला अधिकारियों पहुंचे. मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम घटना के साक्ष्य जुटाए हैं. वहीं, पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

    कई लोगों से की जा रही पूछताछ

    हरदोई के पुलिस अधीक्षक नीरज जादौन ने बताया कि कुछ महिला और पुरुषों ने एक शख्स को पीट-पीटकर लहूलुहान कर दिया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. बताया जा रहा है कि दोनों के बीच कोई पुराना विवाद था. हत्या के आरोप में चार पुरुष और तीन महिलाओं को पुलिस ने मौके से हिरासत में लिया है.

  • क्या आपके बच्चे खाना खाने में आनाकानीˈ करते है, तो ये 1 कप मिश्रण उनके पेट को बना देगा टैंकर, जरूर पढ़े और शेयर करे

    क्या आपके बच्चे खाना खाने में आनाकानीˈ करते है, तो ये 1 कप मिश्रण उनके पेट को बना देगा टैंकर, जरूर पढ़े और शेयर करे

    क्या आपके बच्चे खाना खाने में आनाकानीˈ करते है, तो ये 1 कप मिश्रण उनके पेट को बना देगा टैंकर, जरूर पढ़े और शेयर करे

    बच्चें अकसर खाना खाने से आनाकानी करते हैं। बच्चे ज्यादात्तर जंक फूड़, फास्ट फूड, ठंड़ा पेय इत्यादि पीना पसंद करते हैं। जोकि स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद कम और नुकसानदायक ज्यादा है। शोध में पाया गया है कि जंकफूड, सोड़ा पये बच्चों के पेट में जम जाता है। और धीरे-धीरे प्लास्टिक की तरह ठोस रूप ले लेता है।

    जिससे लीवर कमजोर, बच्चों में मोटापा, शरीरिक कमजोरी, भूख नहीं लगना, चिड़चिड़ापन आना, खून की कमी होना, नजर कमजोर होना, थकान महसूस होना इत्यादि कई शारीरिक एवं मानसिक विकार पाये गयें हैं।

    बच्चों के लिए सुरक्षित नेचुरल टॉनिक घर पर बनायें :

    1. 200 ग्राम अमरूद
    2. 1 अनार सामान्यतः 50 ग्राम
    3. 1 मौसमी
    4. 4-7 पुदीना पत्ती
    5. 5 ग्राम अजवाइन
    6. 1 नींबू रस
    7. 5 ग्राम अदरक
    8. 2 चम्मच शक्कर (स्वाद के अनुसार)
    9. 2 ग्राम यानि कि (चुटकी भर काला नमक)

    मिश्रण बनाने की और प्रयोग विधि :

    अमरूद, अनार दानें, पुदीना पत्तियां, अजवाइन, नींबू रस, अदरक, शक्कर, हींग, काला नमक सभी चीजों को मिक्सी में 5 मिनट तक मिक्सी करें। फिर साफ कपडे छन्नी से निचैंड छान कर रस निकाल लें। इस तरह से स्वादिष्ट पौष्टिक स्वास्थ्यवर्धक से पाचन तंत्र को दुरूस्त रखने के लिए रोज बच्चों को 1-1 कप स्वादिष्ट टॉनिक 10-15 दिनों तक खाना खाने से 1 घण्टे पहले पिलायें।

    बच्चों में भूख नहीं लगने की समस्या 10-15 दिनों में ठीक हो जाती है। और बच्चे अन्दर से हेल्दी तन्दुरूत बनाने में यह पौष्टिक पाचन पेय सक्षम है। बच्चों को जंकफूड, फास्टफूड, सोड़ा पेय से दूर रखें। बच्चों का ताजे फल, फलों का रस, हरी सब्जियां, अनाज, दूध पौष्टिक संतुलित आहार दें। बच्चें कल का भविष्य हैं।

  • अपने गुलाम को दिल दे बैठी थीˈ भारत की पहली महिला शासक Razia Sultan, हुआ दर्दनाक अंत

    अपने गुलाम को दिल दे बैठी थीˈ भारत की पहली महिला शासक Razia Sultan, हुआ दर्दनाक अंत

    अपने गुलाम को दिल दे बैठी थीˈ भारत की पहली महिला शासक Razia Sultan, हुआ दर्दनाक अंत

    रजिया सुल्तान (Razia Sultan, 1205-1240) भारत की प्रथम महिला शासक थी। दिल्ली में जब सल्तनत का दौर चलता था तब राजा अपनी बेगमों को महलो के अंदर कैद कर रखते थे। लेकिन उसी दौर में रजिया सुल्तान ने न सिर्फ राजगद्दी संभाली बल्कि महल से बाहर निकलकर युद्ध भी किया। उनके राज में सल्तन का बहुत विकास भी हुआ। उन्होंने सिर्फ चार साल शासन किया, लेकिन इसमें कई ऐसे कारनामे कर दिए कि दुनिया आज भी उन्हें याद रखती है।

    एक काबिल शासक थी रजिया सुल्तान

    रजिया दिल्ली सल्तनत के मशहूर शासक और सुल्तान शमसुद्दीन इल्तुतमिश की बेटी थी। वह अपने तीन भाइयों में इकलौती बहन थी, लेकिन वह सभी में सबसे काबिल थी। उनके बचपन का नाम हफ्सा मोइन था। लोग उन्हें रज़िया अल-दीन और जलालत उद-दिन रज़िया के नाम से भी जानते हैं। पिता ने बेटी के हुनर को भापते हुए बचपन से उन्हें बेटों की तरह सैन्य प्रशिक्षण दिया और कुशल प्रशासक बनने के गुण भी सिखाए।

    सुल्तान शमसुद्दीन इल्तुतमिश ने बड़े बेटे को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। लेकिन वह अल्पायु में मर गया था। फिर उन्होंने बेटी रजिया को अपना उत्तराधिकारी बना दिया था। लेकिन मुस्लिम समुदाय को एक महिला का शासन स्वीकार नहीं था। वह सुल्तान इल्तुतमिश की वजह से चुप थे। लेकिन 1236 ई. में उनके निधन के बाद उन्होंने रजिया से सिंहासन छीनकर उनके भाई रुखुद्दीन फिरोज को दिल्ली की राजगद्दी पर बैठा दिया।

    रजिया का भाई रुखुद्दीन फिरोज बेवकूफ और अय्याश था। ऐसे में रजिया ने आम जनमानस की मदद से फिर से अपनी राजगद्दी हथिया ली। बाद में रजिया की मां और भाई दोनों की हत्या करवा दी गई। 10 नवंबर, 1236 ई. को रजिया सुल्तान पहली मुस्लिम शासक के रूप में दिल्ली की शासक बनी। उन्होंने राज्य में कुएं और नलकूप खुदवाए, सड़कें बनवाईं, कला, संस्कृति व संगीत को प्रोत्साहन दिया। वहीं हिन्दू और मुस्लिम एकता पर भी काम किया।

    अपने ही गुलाम से हो गया था इश्क

    रजिया सुल्तान अपनी प्रेम कहानी को लेकर भी जानी जाती हैं। उन्हें अपने गुलाम जमालुद्धीन याकूत से इश्क हो गया था। वह रजिया को घोड़े की सवारी करवाता था। वैसे कहा जाता है कि वह रजिया का सबसे विश्वासपात्र भी था। रजिया ने उसे युद्ध में घोड़ों की जिम्मेदारी देते हुए घुड़साला का अधिकारी बना दिया था। यह बात राज्यपालों, उच्च अधिकारियों और मुस्लिम राजवंश के सूबेदारों को चुभने लगी। उन्हें अपनी रानी का गुलाम संग इश्क भी रास नहीं आया। वे इसका विरोध करने लगे।

    इस बीच भटिंडा के गवर्नर इख्तिअर अल्तुनिया का दिल रजिया सुल्तान की खूबसूरती पर आ गया। वह रजिया और दिल्ली दोनों को पाना चाहते थे। उन्होंने रजिया की सल्तनत के विद्रोहियों की मदद से दिल्ली सल्तन पर हमला कर दिया। इसमें रजिया का आशिक याकूत मारा गया। रजिया को बंदी बनाया गया। मौत के डर से रजिया अल्तुनिया से शादी करने को राजी हो गई। बाद में रज़िया के भाई मैज़ुद्दीन बेहराम शाह ने सिंहासन छिन लिया।

    राजगद्दी वापस लेने के लिए रज़िया और उसके पति अल्तुनिया ने बेहराम शाह से युद्ध भी किया लेकिन उनकी हार हुई। हार के बाद रज़िया और उसके पति अल्तुनिया दिल्ली छोड़कर भाग गए। वह अगले दिन कैथल आए। यहां सेना ने भी उन्हें छोड़ दिया। फिर 14 अक्टूबर 1240 को दोनों की मौत डाकुओं द्वारा हो गई। कहा जाता है कि शादी के बाद भी रजिया अपने गुलाम प्रेमी जमालुद्धीन याकूत से मोहब्बत करती थी।

  • उम्र बढ़ते ही पुरुष के इस खासˈ अंग में चुपचाप होने लगते हैं ये बड़े बदलाव, ज्यादातर लोग देर से समझ पाते हैं असली वजह

    उम्र बढ़ते ही पुरुष के इस खासˈ अंग में चुपचाप होने लगते हैं ये बड़े बदलाव, ज्यादातर लोग देर से समझ पाते हैं असली वजह

    उम्र बढ़ते ही पुरुष के इस खासˈ अंग में चुपचाप होने लगते हैं ये बड़े बदलाव, ज्यादातर लोग देर से समझ पाते हैं असली वजह

    उम्र बढ़ना जीवन की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इसके साथ शरीर के कई हिस्सों में सूक्ष्म बदलाव भी शुरू हो जाते हैं, जिन पर अक्सर खुलकर बात नहीं होती। पुरुषों के अंतरंग स्वास्थ्य में भी समय के साथ परिवर्तन आना सामान्य माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 30 वर्ष के बाद कुछ पुरुषों को इच्छा में कमी, इरेक्शन की गुणवत्ता में अंतर या संवेदनशीलता में हल्का बदलाव महसूस हो सकता है। यह हर व्यक्ति में समान नहीं होता, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण कई लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं।

    मेडिकल अध्ययनों के मुताबिक उम्र बढ़ने पर टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। यही हार्मोन पुरुषों की यौन ऊर्जा, मांसपेशियों की मजबूती और आत्मविश्वास से जुड़ा होता है। जब इसका स्तर घटता है, तो कुछ लोगों में यौन इच्छा कम होना, प्रतिक्रिया समय बढ़ना या प्रदर्शन में बदलाव जैसे संकेत दिख सकते हैं। इसके साथ-साथ रक्त प्रवाह भी अहम भूमिका निभाता है। यदि धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाए या हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और धूम्रपान जैसी आदतें मौजूद हों, तो अंतरंग अंग तक पर्याप्त रक्त पहुंचने में बाधा आ सकती है।

    उम्र के साथ टिश्यू की लोच में कमी आना भी एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। इसी वजह से कुछ पुरुषों को संवेदनशीलता पहले जैसी न लगने की शिकायत हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि यह बदलाव आमतौर पर धीरे-धीरे होते हैं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने वाले लोगों में इनका असर कम देखा जाता है। मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, अत्यधिक शराब सेवन और लगातार मानसिक तनाव इन परिवर्तनों को समय से पहले बढ़ा सकते हैं।

    कुछ चेतावनी संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसे बार-बार इरेक्शन में कमजोरी महसूस होना, यौन इच्छा में स्पष्ट गिरावट, अंतरंग संबंध के दौरान कठिनाई या संतुष्टि में कमी। यदि ये समस्याएं लगातार बनी रहें, तो यूरोलॉजिस्ट या एंडोक्रिनोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर माना जाता है, क्योंकि कई बार इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन या हृदय संबंधी कारण भी हो सकते हैं।

    अच्छी बात यह है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि सही दिनचर्या अपनाकर उम्र से जुड़े इन प्रभावों को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है। नियमित एरोबिक व्यायाम, योग और सक्रिय जीवनशैली रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं। संतुलित आहार—जिसमें हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, मेवे और कम वसा वाला प्रोटीन शामिल हो—टिश्यू हेल्थ को सपोर्ट करता है। साथ ही पर्याप्त नींद, वजन नियंत्रण और तनाव प्रबंधन भी उतने ही जरूरी हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर की निगरानी में हार्मोन थेरेपी या अन्य उपचार विकल्प दिए जा सकते हैं, लेकिन स्वयं दवा लेना जोखिम भरा हो सकता है।

    अंत में विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि उम्र के साथ होने वाले बदलावों को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, बल्कि जागरूक रहने की जरूरत है। समय-समय पर हेल्थ चेकअप, स्वस्थ जीवनशैली और सकारात्मक सोच अपनाकर पुरुष लंबे समय तक अपनी अंतरंग सेहत और आत्मविश्वास को बनाए रख सकते हैं।

  • गलत तरीके से पका रहे दाल हैंˈ 90 फीसदी लोग, थाली में आने से पहले कम हो जाती है ताकत, जान लें सही तरीकाˌ

    गलत तरीके से पका रहे दाल हैंˈ 90 फीसदी लोग, थाली में आने से पहले कम हो जाती है ताकत, जान लें सही तरीकाˌ

    गलत तरीके से पका रहे दाल हैंˈ 90 फीसदी लोग, थाली में आने से पहले कम हो जाती है ताकत, जान लें सही तरीकाˌ

    आज की भागदौड़ भरी और व्यस्त जीवनशैली में, हम अक्सर जल्दी खाना पकाने के तरीके अपनाते हैं. प्रेशर कुकर जैसे उपकरण किचन में हमारा समय बचाते हैं, लेकिन क्या हम जानते हैं कि इन तरीकों से हमारे खाने में ज़रूरी पोषक तत्व खत्म हो सकते हैं? खासकर दालों की बात करें तो, लोग अक्सर उन्हें गलत तरीके से पकाते हैं, जिससे उनका पौष्टिक मूल्य कम हो जाता है. अगर आप भी दालें जल्दी पकाने के लिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको अपना तरीका बदलना चाहिए. आइए दाल पकाने का सही तरीका और इसके फायदे को जानते हैं.

    दाल पकाने का सही तरीका

    गलत तरीका – प्रेशर कुकर में दालें पकाना

    आजकल लगभग हर घर में दालें प्रेशर कुकर में पकाई जाती हैं क्योंकि वे जल्दी पक जाती हैं और समय बचता है. लेकिन, विशेषज्ञों के अनुसार, प्रेशर कुकर में दालें पकाना सही तरीका नहीं है. ऐसा करने से दालों में मौजूद विटामिन और मिनरल जैसे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जो उनके पौष्टिक मूल्य और स्वास्थ्य लाभ के लिए ज़रूरी हैं. प्रेशर कुकर के अंदर ज़्यादा गर्मी और दबाव से दालों में मौजूद ज़रूरी पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। इसके बजाय, आपको दालें पकाने के पारंपरिक तरीके अपनाने चाहिए.

    सही तरीका – मिट्टी के बर्तन में दालें पकाना

    अगर आप दालों में सभी पोषक तत्वों को बनाए रखना चाहते हैं, तो उन्हें मिट्टी के बर्तन में पकाएं. इस तरीके से न केवल दालों का स्वाद बढ़ता है, बल्कि बर्तन में मौजूद मिनरल भी दालों में समा जाते हैं, जो आपके शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है. मिट्टी के बर्तन में पकाने से गर्मी धीरे-धीरे और समान रूप से फैलती है, जिससे दालों में सभी पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं. यह तरीका दालों को बेहतर तरीके से पचाने में भी मदद करता है.

    हमारे पूर्वज भी यही तरीका अपनाते थे

    हमारे पूर्वज भी मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाते थे, और यह तरीका आज भी सबसे कारगर माना जाता है. मिट्टी के बर्तन दालों में पोषक तत्वों को नष्ट होने से रोकते हैं, जबकि प्रेशर कुकर से पोषक तत्वों का काफी नुकसान होता है. इसलिए, अगली बार जब आप दालें पकाएं, तो प्रेशर कुकर के बजाय मिट्टी के बर्तन का इस्तेमाल ज़रूर करें.

    दालों में मसाले मिलाने के फायदे

    आप दालों को पचाने में मदद के लिए कुछ मसालों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अरहर दाल, उड़द दाल और कुछ अन्य दालें पेट में भारी हो सकती हैं, इसलिए उनके साथ मसालों का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है. हींग, जीरा, हल्दी और काली मिर्च जैसे मसाले दालों को पचाने में मदद करते हैं. ये मसाले दाल का स्वाद भी बढ़ाते हैं और उन्हें पचाने में भी आसान बनाते हैं.

    दाल के फायदे – सेहत के लिए सुपरफूड

    दाल को सही तरीके से पकाने पर इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं. दाल प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है, खासकर शाकाहारी लोगों के लिए. ये शरीर को ऊर्जा देती हैं और इनमें ज़रूरी मिनरल, विटामिन और फाइबर भरपूर मात्रा में होते हैं. दाल खाने से शरीर को आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम और मैंगनीज जैसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हड्डियों, दिल, दिमाग और किडनी के लिए फायदेमंद होते हैं. इसके अलावा, दाल वजन कम करने में मदद करती हैं और मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाती हैं. नियमित रूप से दाल खाने से दिल की सेहत भी अच्छी रहती है और शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल भी कंट्रोल में रहता है.

    दाल खाने के स्वास्थ्य लाभ

    1. वजन कम करने में मदद करती है – दाल में प्रोटीन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो भूख को कंट्रोल करता है और वजन कम करने में मदद करता है.

    2. पाचन में सुधार करती है – दाल में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत देता है.

    3. हड्डियों को मज़बूत बनाती है – दाल में कैल्शियम और आयरन होता है, जो हड्डियों को मज़बूत बनाता है.

    4. दिल की सेहत के लिए अच्छी होती है – दाल में एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल होते हैं जो दिल की सेहत को बनाए रखते हैं और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करते हैं.

    5. ऊर्जा का स्तर बनाए रखती है – दाल में मौजूद प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देते हैं और पूरे दिन आपको एक्टिव रखते हैं.

  • फांसी देने से पहले जल्लाद कैदी केˈ कान में कहता है एक बात क्या आप जानते हैं इसका राज़ˌ

    फांसी देने से पहले जल्लाद कैदी केˈ कान में कहता है एक बात क्या आप जानते हैं इसका राज़ˌ

    फांसी देने से पहले जल्लाद कैदी केˈ कान में कहता है एक बात क्या आप जानते हैं इसका राज़ˌ

    सदियों से लोग भारत को एक महान देश के नाम से जानते हैं. क्यूंकि इस देश में हर प्रकार के नियम और कानून बनाए गए हैं जो कि हर स्वतंत्र देश की अहम पहचान है. इसके इलावा हर नागरिक का देश के कानून और नियमों की पालना करना ही एकमात्र धर्म है. यदि कोई व्यक्ति इन नियमों को तोड़ता है या फिर इनका विरोध करता है तो कानून की धारायों के तहत उस व्यक्ति पर सख्त से सख्त कारवाई की जाती है. वैसे तो हम सब लोगों की जिंदगी नियमों से भरपूर है मगर क्या आप जानते हैं कि जब कोई व्यक्ति घिनोना अपराध करता है तो उसकी सज़ा के लिए भी कानून को नियमों की पालना करनी पडती है. यदि कोई व्यक्ति किसी का खून करता है तो उसको सज़ा-ऐ-मौत यानी फांसी सुना दी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फांसी को लेकर भी भारत सरकार ने कुछ ख़ास नियम और कानून बनाए हैं जिनकी पालना करना जरूरी होता है?

    जी हाँ, यह बिलकुल सच बात है. फांसी के समय के लिए भी कुछ नियम बनाए गए हैं जिनमे से फांसी का फंदा, फांसी देने का समय, फांसी की प्रकिया आदि शामिल हैं.  भारत में जब किसी अपराधी को फांसी होती है तो जल्लाद कैदी को फांसी देने से पहले उसके कान में कुछ कहता है और इसके बाद ही अपराधी को फांसी दी जाती है. आपको पढ़ र भले ही थोडा अजीब लग  रहा होगा. मगर यह बिलकुल सच है. मगर अब आपके दिमाग में यह सवाल चल रहा होगा कि मरते हुए व्यक्ति से जल्लाद कान में क्या बात कहता होगा और आखिर क्यों? तो चलिए आपके सभी सवालों का जवाब आज हम आपको देने जा रहे हैं-

    कान में ये बात बोलता है जल्लाद

    दरअसल, फांसी देने के कुछ छन पहले जल्लाद अपराधी के कान में माफ़ी मांगता है और कहता है कि “मुझे माफ़ कर दो भाई, मैं मजबूर हूँ”. यदि मरने वाला व्यक्ति हिन्दू हो तो जल्लाद उसको “राम राम” बोलता है वहीँ अगर मरने वाला व्यक्ति मुस्लिम हो तो जल्लाद उसको अंतिम “सलाम” बोलता है. साथ ही जल्लाद उनसे कहता है कि “मैं सरकार के हुकुम का गुलाम हूँ इसलिए चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता”. बस इतना कह कर ही वह फांसी का फंदा खींच देता है.

    भारत ने हैं केवल दो जल्लाद

    आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हमारे भारत देश में फांसी की सज़ा के लिए अभी तक केवल दो ही जल्लाद है. इन्हें सरकार द्वारा मारने की सैलरी भी दी जाती है. हालांकि, किसी को अपने हाथों से मौत के घाट उतारना सच में अपने आप में बहुत बड़ा काम है और इसको करने के लिए खासी हिम्मत की भी जरूरत है. गौरतलब है कि आम इंसान को फांसी देने के लिए सरकार इन जल्लादों को 3000 रुपया देती है जबकि किसी आतंकवादी को फांसी देने के लिए यह रकम बढ़ा दी जाती है. हम आपको बताते चले कि इंदिरा गांधी के हत्यारों को फांसी देने वाले जल्लाद को सरकार द्वारा  25000 रुपये दिए गए थे.

    कहाँ बनता है ये फंदा?

    हमारे भारत देश में जितने भी अपराधियों को फांसी की सज़ा दी जाती है, उन सब के लिए बिहार की बक्सर जेल में ही फंदा तैयार करवाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि वहां के लोग फंदे को बनाने में माहिर हैं. फांसी के फंदे की मोटाई को लेकर भी मापदंड तय है, फंदे की रस्सी डेढ़ इंच से ज्यादा मोटी रखने के निर्देश हैं. यहाँ तक कि इस फंदे की कीमत भी काफी कम रखी जाती है. दस साल पहले फांसी का फंदा 182 रुपए में जेल प्रशासन को उपलब्ध कराया गया था.

  • Post Office RD Yojana: ₹2000, ₹3000 याˈ ₹5000 के निवेश पर मिलेगा इतना रिटर्न, जाने कैलकुलेशनˌ

    Post Office RD Yojana: ₹2000, ₹3000 याˈ ₹5000 के निवेश पर मिलेगा इतना रिटर्न, जाने कैलकुलेशनˌ

    Post Office RD Yojana: ₹2000, ₹3000 याˈ ₹5000 के निवेश पर मिलेगा इतना रिटर्न, जाने कैलकुलेशनˌ

    पोस्ट ऑफिस RD (Recurring Deposit) योजना एक सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश विकल्प है, जो भारतीय डाक विभाग द्वारा संचालित होती है। इस योजना में निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि जमा करता है और 5 वर्ष की अवधि पूरी होने पर जमा राशि के साथ ब्याज प्राप्त करता है। यह योजना उन लोगों के लिए बेहद उपयुक्त है जो नियमित मासिक बचत कर सुरक्षित और सुनिश्चित रिटर्न पाना चाहते हैं।

    पोस्ट ऑफिस RD ब्याज दर और अवधि

    • वर्तमान ब्याज दर लगभग 6.7% प्रति वर्ष है।
    • ब्याज तिमाही आधार पर कंपाउंड होता है, जिससे रिटर्न बेहतर होता है।
    • न्यूनतम निवेश ₹100 प्रति माह से शुरू होता है, कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
    • निवेश अवधि 5 वर्ष की होती है, जिसे 5 वर्ष और बढ़ाया जा सकता है।

    ₹2000, ₹3000 और ₹5000 मासिक निवेश पर रिटर्न कैलकुलेशन

    मासिक निवेश राशिकुल जमा (5 वर्ष)अनुमानित ब्याजमैच्योरिटी राशि (लगभग)
    ₹2000₹1,20,000₹22,700₹1,42,700
    ₹3000₹1,80,000₹34,000₹2,14,000
    ₹5000₹3,00,000₹56,800₹3,56,800

    यह कैलकुलेशन तिमाही कम्पाउंडिंग ब्याज और 6.7% वार्षिक दर के आधार पर किया गया है। ब्याज की कुल राशि तिमाहियों के हिसाब से थोड़ा बदल सकती है, लेकिन ऊपर दी गई राशियां आपको एक स्पष्ट विचार देती हैं कि आपकी बचत कितनी बढ़ सकती है।

    योजना के खास फायदे

    • सुरक्षित: यह सरकारी योजना है, जिसमें निवेश की सुरक्षा की गारंटी होती है।
    • लचीला निवेश: आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी महीने ₹100 या उससे ज्यादा जमा कर सकते हैं।
    • लोन की सुविधा: 1 वर्ष बाद आपके जमा पर आप लोन भी ले सकते हैं।
    • नॉमिनेशन विकल्प: अकाउंट खुलवाते समय नॉमिनी भी नामित किया जा सकता है।
    • आसान निकासी: आवश्यक होने पर 3 वर्ष बाद निकासी संभव है।

    कैसे करें शुरुआत?

    1. सबसे पहले निकटतम पोस्ट ऑफिस जाएं या ऑनलाइन पोर्टल से आवेदन करें।
    2. अपना और नॉमिनी का विवरण दें, पहचान पत्र और पता प्रमाण जमा करें।
    3. मासिक जमा राशि और तारीख तय करें।
    4. हर महीने तय तारीख पर राशि जमा करते रहें।