उत्तर प्रदेश के कानपुर में बीएससी के एक छात्र ने अपने पिता की पैसा कमाने को लेकर दिए गए ताना को इतनी गंभीरता से ले लिया ह पकि उसने बैंक लूटने का प्लान बना दिया। युवक ने यूट्यूब पर बैंक लूट के वीडियो देखकर प्लान तैयार किया। इसके अलावा उसने रील्स से भी काफी कुछ सीखने की कोशिश की। इसके बाद अकेले दम पर बैंक लूटने पहुंच गया। युवक ने यूट्यूब पर बैंक लूट की उन वारदातों को गंभीरता से देखा, जिसमें अकेले वारदात को अंजाम दिया गया। हालांकि, बैंककर्मियों की सतर्कता और साहस के चलते युवक को समय रहते को पकड़ लिया गया।
क्या है पूरा मामला? घटना शनिवार सुबह करीब 10 बजे की है, जब घाटमपुर के पतारा स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में एक युवक साइकिल से पहुंचा। उसने तमंचा, चाकू, सर्जिकल ब्लेड और सूजा लेकर बैंक में प्रवेश किया। गार्ड ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने चाकू से गार्ड पर हमला कर दिया। युवक की हरकत को देखकर बैंक मैनेजर, कैशियर और अन्य कर्मचारियों ने बहादुरी दिखाते हुए उसे पकड़ लिया और रस्सी से बांध दिया।
हाथापाई के दौरान बैंक मैनेजर समेत तीन लोग घायल हो गए। आरोपी युवक को भी हल्की चोटें आईं, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस की पूछताछ और मोबाइल फोन की जांच में लूट कांड को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है।
बीएससी-आईटीआई का है छात्र पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी लविश मिश्रा बीएससी के साथ-साथ आईटीआई का छात्र है। उसने यूट्यूब पर बैंक लूटने के 50 से ज्यादा वीडियो देखकर इस योजना को अंजाम देने की कोशिश की। लविश ने उन वीडियो पर खास ध्यान दिया, जिनमें बदमाशों ने अकेले के दम पर बैंक लूटा था।
किसान का बेटा है लविश लविश मिश्रा के पिता अवधेश मिश्रा किसान हैं। आर्थिक रूप से उनका परिवार गरीब है। लविश जब पैसे की मांग करता था तो पिता खुद पैसा कमाने की सलाह देते थे। लविश एकदम से पैसा कमाना चाहता था। इसलिए, उसने बैंक लूट की योजना बनाई।
दरअसल, लविश ने पिता की सलाह को गलत दिशा में ले लिया और पैसा कमाने का शॉर्टकट अपनाने का सोचा। आरोपी ने अपने हाथों में सर्जिकल ब्लेड और पैरों में बोरा सिलने वाला सूजा बांधा। उसने एक बैग भी साथ रखा, जिसमें वह पैसे भरने का प्लान बना चुका था।
लविश ने सबसे पहले गार्ड को डराने की योजना बनाई ताकि बैंककर्मी दहशत में आ जाएं। पुलिस पूछताछ में लविश ने पहले कहा कि कुछ लोगों ने उसे धमकी देकर बैंक लूटने भेजा था। हालांकि, पुलिस ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उसके मोबाइल फोन से मिले वीडियो और उसकी तैयारी से साफ हो गया कि यह पूरी योजना उसने खुद बनाई थी।
लविश को नहीं है पछतावा लविश मिश्रा ने पकड़े जाने के बाद कोई खास अफसोस नहीं जताया। पुलिस थाने में भी उसकी अकड़ कम नहीं हुई। वह आराम से थाने में टहलता रहा और जेल जाते समय भी ठसक दिखाता नजर आया। पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि युवाओं को सही दिशा देने और गलत रास्ते से बचाने की जिम्मेदारी किसकी है।
ऑस्ट्रेलिया में डेनियल नाम का एक आदमी भारत की देसी खटिया 990 ऑस्ट्रेलियन डॉलर जो हमारे लगभग 64 हजार रुपए है में बेच रहा है और हम है कि इसे आउट ओफ फॅशन मान कर इसकी खटिया खडी कर रहे हैं । इसके फायदे फॅशन के आगे बौने बन गए हैं ।
सोने के लिए खटिया हमारे पूर्वजों की सर्वोत्तम खोज है । हमारे पूर्वजों को क्या लकडी को चीरना नही आता होगा? वो भी लकडी चीरके उसकी पट्टीयां बना कर डबल बॅड बना सकते थे । डबल बॅड बनाना कोइ रोकेट सायंस नही है । लकडी की पट्टीयों को किलें ही ठोकनी होती है । खटिया भी भले कोइ सायन्स नही हो लेकिन एक समजदारी है कि कैसे शरीर को अधिक आराम मिल सके । खटिया बनाना एक कला है उसे रस्सी से बूनना पडता है और उस में दिमाग लगता है ।
जब हम सोते हैं तब माथा और पांव के मुकाबले पेट को अधिक खून की जरूरत होती है क्योंकि रात हो या दोपरहर हो लोग अक्सर खाने के बाद ही सोते थे । पेट को पाचनक्रिया के लिए अधिक खून की जरूरत होती है । इसलिए सोते समय खटिया की जोली ही इस स्वास्थ का लाभ पहुंचा सकती है ।
दुनिया में जीतनी भी आराम कुुर्सियां देख लो उसमें भी खटिया की तरह जोली बनाई जाती है । बच्चों का पूराना पालना सिर्फ कपडे की जोली का था, लकडी का सपाट बनाकर उसे भी बिगाड दिया है । खटिया पर सोने से कमर का दर्द और सांधे का दर्द नही होता है ।
डबलबेड के नीचे अंधेरा होता है, उसमें रोगके किटाणु पनपते है, वजन में भारी होता है तो रोज रोज सफाई नही हो सकती । खटिया को रोज सुबह खडा कर दिया जाता है और सफाई भी हो जाती है, सुरज की धुप बहुत बढिया किटनाशक है, खटिए को धुप में रखने से खटमल इत्यादी भी नही पडते हैं ।
भारत के गाँव में अब भी इसी पर सोया जाता है : किसानो के लिए खटिया बनाना बहुत सस्ता पडता है, मिस्त्री को थोडी मजरूरी ही देनी पडती है । कपास खूद का होता है तो खूद रस्सी बना लेते हैं और खटिया खूद बून लेते हैं । लकडी भी अपनी ही दे देते हैं । अन्य को लेना हो तो दो हजार से अधिक खर्च नही हो सकता । हां, कपास की रस्सी के बदले नारियल की रस्सी से काम चलाना पडेगा है । आज की तारीख में कापूस की रस्सी मेहंगी पडेगी । सस्ते प्लास्टिक की रस्सी और पट्टी आ गयी है लेकिन वो सही नही है, असली मजा नही आएगा । दो हजार की खटिया के बदले हजारों रूपए की दवा और डॉक्टर का खर्च बचाया जा सकता है ।
खटिया पुराण : सन 1970 में ओबरा में सुपरवाइजर के पद पर ज्वाइन करने बाद मित्र गुलाटी जी के घर पर 3 माह रहा परन्तु 5 सुपरवाइजर को एक साथ क्वार्टर न० A.E.T – 34 ( जो उस समय Diploma holder’s hell कहा जाता था) मिल जाने कारण अपने सोने की व्यवस्थ स्वयं करनी पड़ी।उस ज़माने में 7 रु में एक बांस खटिया के हिसाब से मैंने दो खटिया खरीद ली जिस कारण पाँच आदमियों में छः खटिया हो गयी । छठी किसी अथिति के लिये , जो कई वर्षो तक काम आई।
बंगाल में बांस की खटिया पर सोना अशुभ माना जाता था शायद च्युकि बांस का एक उपयोग मृतदेह के काठी के लिए भी होता था और मृत व्यक्ति को इसपर ही सुलाया जाता था। परन्तु ओबरा में सोने के लिए एक मात्र उपलब्ध साधन बांस खटिया ही मेरी विवशता थी।
राजा हो या रंक सभी नए नियुक्त कर्मचारी से अधिकारी तक को इसी बांस खटिया से गुजारा करना मजबूरी थी क्योकि ओबरा बाज़ार में कम पूंजी वालो के लिए इस के अतरिक्त कुछ भी उपलब्ध न था।इस खाट के अनेक फायदे थे इसका बिना किसी परिश्रम के स्थान परिवर्तन किया जा सकता था, भीषण गर्मी में सीलिंग फेन जो क्वार्टर में उपलव्ध था चला कर ऊपर गीली चादर डाल कर खाट के नीचे फर्श पर सोने से गर्मी से कुछ राहत मिलती थी एवं किसी भी साथ रहने वाले से असंतोष होने पर उसकी खाट खड़ी कर बिताड़ित किया जा सकता था।
इसके अतिरिक्त इस खटिया का उपयोग निकटवर्ती ग्राम वासिओं द्वारा खटिया की पालकी बनाकर मरीज को ओबरा अस्पताल में लाने के लिए होता देखा गया था।ओबरा में उस समय कोई बृक्ष नहीं थे सिर्फ पथरीली जमीन थी जिस कारण दिन में अत्यधिक गर्मी रहती थी। एक वर्ष बाद मुझे जुगाड़ पद्धति से एक रेमिंग्टन रैंग टाइपराइटर का ढक्कन मिल गया जिससे एक साइकिल की वाल्व बॉडी एवं रबर की पतली ट्यूब(तब प्लास्टिक का घरेलु उपयोग नहीं था) से पानी प्रवाहित कर खिड़की पर खस की टट्टी गीला कर अन्दर उसके सामने टेबल फैन लगाकर कूलर बनाया। जो सात वर्षो तक चला। टेबल फैन उस समय मेरे एक माह की सैलरी 325 रु में मिला था।तब जाकर खाट के ऊपर गीली चादर डालने से राहत मिली।
70 के दशक में प्लास्टिक नहीं था फिर भी जन जीवन सुचारू रूप से चलता था कोई असुविधा नहीं होती थी किसी वस्तु का संग्रह डालडा के विभिन्न आकर के टीन के डब्बों में ही होता था।आज प्लास्टिक आने से कुछ सुविधा अवश्य हुई है परन्तु पर्यावरण को अत्यंत हानि पहुँच रही है विशेष कर प्लास्टिक के कैर्री बैग तो मनुष्य एवं पशुओं के लिए काल बन गए है। आधुनिकरण के युग में पुन: नारा है Avoid plastic bags अब सभी इस ओर प्रयासरत है।
अब तो विभिन्न प्रकार की लकड़ी की पाटी वाली मंजिया बाज़ार में उपलब्ध है अपने समर्थ अनुसार खरीद सकते है। मेरे जीवन के परिपेक्ष में खटिया ने कोई अशुभ संकेत नहीं दिया परन्तु अब तो खटिया की यादें ही शेष है प्रत्येक जानने वालों के घर प्लाई का डबल बेड और दीवान है।
जानिए ज़मीन पर सोने के फ़ायदे : दिनभर की थकान के बाद रात को हमें सोने के लिए मोटे गद्दे की जरूरत महसूस होती है जिस पर लेट कर हमारी थकान दूर हो सकें लेकिन क्या अापको पता है यह गद्दा कुछ पल के लिए तो हमें अाराम देता है लेकिन अागे के लिए कई बीमारियों को बुलावा दे रहा होता है। इसलिए एेसे में अाप जमीन पर सोने की अादत डालकर बहुत सी बीमारियों से छुटकारा पा सकते है।
1. अगर अापको नींद नहीं अाती है तो एक बार फर्श पर सोकर देखें। इस पर सोने से नींद बहुत अच्छी आती है।
2. फर्श पर सोने से ना केवल अापका रक्तसंचार ठीक होता है बल्कि इससे हमारे शरीर अौर दिमाग में तालमेल भी बनता है और दिमाग फ्रेश महसूस करता है।
3. जमीन पर सोकर अापको बहुत अच्छी नींद अाएगी अौर अपने अापको फिट महसूस करेंगे।
4. जमीन पर सोने का एक अौर फायदा है इससे अापको हिप्स दर्द की समस्या नहीं होगी। इसी के साथ कमर अौर कुल्हों में तालमेल बैठता, जिसकी वजह से कुल्हों का दर्द झट से दूर हो जाता है।
5. अापकी दिन भर की थकान भी झट से दूर हो जाती है।
6. फर्श पर सोने से बैक पेन भी ठीक रहती है अौर रीड़ की हड्डी भी मजबूत बनी रहती है।
7. अगर अपको बैचेनी रहती है तो जमीन पर सोने से राहत मिलती है।
घरों में अक्सर यह पूछा जाता है कि क्या एक पत्नी अपनी प्रॉपर्टी अपने पति से पूछे बिना बेच सकती है। यह बात हमारे समाज में बहुत समय से चल रही है, लेकिन इसको लेकर कई गलत बातें भी फैली हुई हैं। इस लेख में हम कानून के हिसाब से और आसान भाषा में इस सवाल का जवाब देंगे।
पत्नी की व्यक्तिगत संपत्ति पर उसका पूरा हक होता है
अगर कोई संपत्ति केवल पत्नी के नाम पर है और वह उसकी खुद की खरीदी हुई या उसे उपहार/विरासत में मिली है, तो उसे बेचने के लिए उसे किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है – न पति की और न परिवार के किसी अन्य सदस्य की। यह कानूनी अधिकार है जिसे भारतीय कानून और हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट के एक फैसले ने भी पूरी तरह से मान्यता दी है।
ऐसी किसी संपत्ति को महिला जब चाहे बेच सकती है, ट्रांसफर कर सकती है या किसी को गिफ्ट में दे सकती है। पति का इस पर कोई हस्तक्षेप नहीं होता, क्योंकि यहां संपत्ति का मालिकाना हक पूरी तरह पत्नी का होता है।
संयुक्त संपत्ति में दोनों की सहमति अनिवार्य
यदि संपत्ति पति-पत्नी दोनों के नाम पर है यानी वह संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति है, तो उसमें किसी एक पक्ष द्वारा स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं लिया जा सकता। ऐसी स्थिति में बेचने या ट्रांसफर करने के लिए दोनों की सहमति जरूरी होती है। चाहे संपत्ति के कागजों में कोई एक नाम प्रमुख हो, लेकिन वास्तविक स्वामित्व में दोनों का बराबर अधिकार होता है।
पति की संपत्ति पर पत्नी का अधिकार सीमित होता है
पति की स्वयं अर्जित संपत्ति पर पत्नी का तब तक कोई कानूनी अधिकार नहीं होता जब तक कि पति उसे अपनी वसीयत के माध्यम से नहीं दे देता या वह संपत्ति उपहार में नहीं दे। पत्नी को यह अधिकार केवल विशेष परिस्थितियों में मिलता है जैसे पति की मृत्यु या तलाक के बाद। हालांकि, पत्नी को पति की आय में जीवनयापन के लिए हिस्सा मिल सकता है और इसके लिए वह अदालत में गुजारा भत्ता (Maintenance) का दावा कर सकती है।
अलगाव की स्थिति में संपत्ति अधिकार कैसे बदलते हैं?
अगर पति-पत्नी के बीच तलाक हो गया है या वे केवल अलग रह रहे हैं, तो भी संपत्ति अधिकार पूरी तरह खत्म नहीं होते। पत्नी, अगर बेरोजगार है या उसके पास आय का साधन नहीं है, तो वह पति से गुजारा भत्ता मांग सकती है। वहीं अगर पत्नी नौकरीपेशा है और पति बेरोजगार है, तो ऐसे दुर्लभ मामलों में पति भी गुजारा भत्ता मांग सकता है। कोर्ट दोनों पक्षों की आय और संपत्ति का गहन मूल्यांकन कर निर्णय देता है।
कौन-सी संपत्ति किसकी मानी जाती है?
यदि कोई व्यक्ति शादी से पहले कोई संपत्ति खरीदता है, तो वह उसकी व्यक्तिगत संपत्ति मानी जाती है। शादी के बाद अगर कोई संपत्ति दोनों की आय से खरीदी जाती है, भले ही वह सिर्फ पति या पत्नी के नाम पर हो, तब भी उसमें दूसरे पक्ष का हक साबित किया जा सकता है। वहीं, उपहार या विरासत में मिली संपत्ति पूरी तरह से प्राप्तकर्ता की मानी जाती है, और उसमें दूसरे जीवनसाथी का कोई दावा नहीं होता।
गलत धारणाएं और उनका समाधान
यह धारणा कि महिलाएं संपत्ति बेचने के लिए पति की इजाजत की मोहताज होती हैं, अब पुरानी सोच बन चुकी है। आज के कानून महिलाओं को हर तरह से संपत्ति पर समान अधिकार देते हैं। यह जरूरी है कि हम कानून की सही जानकारी रखें ताकि सामाजिक दबाव या अज्ञानता की वजह से कोई गलत निर्णय न लें।
विवादों से बचाव के लिए कानूनी सतर्कता जरूरी
अगर आप कोई संपत्ति बेच रहे हैं या खरीदने जा रहे हैं, तो जरूरी है कि सभी दस्तावेजों की जांच कर लें और संयुक्त संपत्तियों में सभी पक्षों की लिखित सहमति लें। किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए किसी अनुभवी वकील की सलाह अवश्य लें। यह न सिर्फ आपके हित की रक्षा करेगा बल्कि भविष्य में कानूनी उलझनों से भी बचाएगा।
पुरुषों और महलाओं के शरीर की कुछ चीजें एक दूसरे से काफी भिन्न होती है। ऐसे में इन्हें होने वाली बीमारियां या शारीरिक परेशानियों में भी थोड़ा अंतर आ जाता है। इसलिए यदि इनके घरेलू उपाय भी बताए जाएं तो वह भी मर्द और महिला दोनों के लिए थोड़े अलग हो सकते हैं। इस बात का ख्याल रखते हुए आज हम पुरुषों के लिए एक काम की ड्रिंक बताने जा रहे हैं।
रोज दूध और शहद का सेवन करें पुरुष
दूध शरीर के लिए अच्छा होता है। इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन ‘ए’, ‘बी’ और ‘डी’ एवं लैक्टिक एसिड जैसे पौषक तत्व पाए जाते हैं। वहीं शहद में आयरन, कैल्शियम, फॉस्फेट, फ्रूट ग्लूकोज, सोडियम, क्लोरीन, पोटेशियम होता है। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं। इन दोनों को अलग अलग खाने पर शरीर को फायदा तो होता है ही, लेकिन यदि इन्हें साथ में मिलाकर खाया जाए तो और भी लाभकारी चीजें होती है।
दूध-शहद पीने का तरीका और समय
दूध शहद रात को सोने के एक घंटे पहले पीना चाहिए। इसकी ड्रिंक बनाने के लिए पहले दूध को गर्म कर लें। अब जब वह गुनगुना हो जाए तो उसमें एक चम्मच शहद मिला लें। कोशिश करें कि आपका शहद शुद्ध हो ताकि आप इसका अधिकतम लाभ उठा सकें।
शहद के साथ दूध पीने के फायदें
1. गर्म दूध में शहद मिलाकर पीने से पुरुषों की पौरुष शक्ति बढ़ती है। ये शरीर की कमजोरी दूर करता है। इसके नियमित सेवन से टेस्टोस्टेरोन नामक हॉर्मोन की वृद्धि होती है।
2. ये तनाव कम कर तंत्रिका तंत्र और तंत्रिका कोशिकाओं को आराम प्रदान करता है।
3. इसका नियमित सेवन करने से पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर होने के चांस कम हो जाते हैं।
4. दूध और शहद एक साथ लिया जाए तो ये आपकी इम्यूनिटी पावर (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाता है।
5. यदि आपको रात को नींद अच्छी नहीं आती तो सोने के एक घंटे पहले दूध शहद पी लें। नींद बढ़िया आएगी।
6. जिन लोगों को खाना पचाने में दिक्कत होती है उन्हें भी दूध शहद का सेवन शुरू कर देना चाहिए। इससे आपको कब्ज की समस्या भी नहीं होगी।
7. हड्डियां मजबूत करने के लिए दूध शहद एक शानदार ड्रिंक होती है।
8. अपने शरीर की शारीरिक और मानसिक क्षमता बढ़ाने के लिए रोजाना दूध और शहद का साथ में सेवन करना चाहिए।
9. सुबह सुबह यदि आप दूध और शहद पी लें तो दिनभर ऊर्जा से भरपूर रहेंगे। शरीर में स्फूर्ति आएगी और आपका दिमाग भी तेज चलेगा। आलस दूर ही रहेगा।
10. आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए भी दूध और शहद एक अच्छी ड्रिंक मानी जाती है।
Parenting Tips: बच्चे की उम्र बढ़ने के साथ ही उसका वजन बढ़ना भी जरूरी होता है. अगर बच्चे का वजन नहीं बढ़ रहा है तो यह स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को बढ़ा सकता है और इसीलिए माता-पिता के लिए बच्चे का वजन (Baby’s Weight) ना बढ़ना परेशानी का सबब बन जाता है.
इसपर पीडियाट्रिशियन यानी बच्चों के डॉक्टर संदीप गुप्ता का कहना है कि बच्चे का वजन ना बढ़ने की वजह मां के द्वारा की जाने वाली एक गलती हो सकती है. डॉ. संदीप ने बताया कि उनके पास अक्सर ही कई माता-पिता इस परेशानी को लेकर आते हैं कि उनका बच्चा 3 साल का हो गया है लेकिन वजन अब भी बस 8 किलो ही है. ऐसे में डॉक्टर ने पहचाना कि मां की किस गलती (Mistake) की वजह से बच्चे का वजन नहीं बढ़ता है. जान लीजिए कहीं आप भी तो यही गलती नहीं करते हैं.
क्यों नहीं बढ़ रहा बच्चे का वजन | Why Is Baby’s Weight Not Increasing
डॉ. संदीप गुप्ता ने बताया कि बच्चे का वजन ना बढ़ने की एक बड़ी वजह मां का उसे रोजाना चाय देना है. मां सुबह के समय बच्चे को चाय (Chai) रोटी खिलाती हैं या चाय बिस्कुट देती हैं. डॉक्टर बताते हैं कि चाय में मौजूद कैफीन से बच्चे की भूख कम होने लगती है.
चाय में टैनिन केमिकल मोजूद होता है जो आयरन के एब्जॉर्प्शन को कम कर देता है. आयरन की कमी से बच्चे को अनीमिया हो जाएगा और खून की कमी होने लगेगी.
डॉक्टर का कहना है कि 10 साल से छोटे बच्चे को चाय नहीं देनी चाहिए. चाय (Tea) एसिडिक होती है जिससे बच्चे के दांत खराब हो सकते हैं. इससे बच्चे की नींद भी प्रभावित होती है और बच्चे की नींद खराब होती है.
बच्चे का वजन बढ़ाने के लिए खिलाएं ये चीजें
अगर आप चाहते हैं कि बच्चे का वजन बढ़ने लगे तो इसके लिए बच्चे को अंडे खिलाए जा सकते हैं. विटामिन और प्रोटीन से भरपूर अंडे वजन बढ़ाने में मदद करते हैं.
केले के सेवन से भी वजन बढ़ सकता है. बच्चे को बनाना शेक या स्मूदी बनाकर भी खिला सकते हैं.
प्रोटीन का स्त्रोत बढ़ाने के लिए बच्चों की डाइट में चिकन शामिल करें. बच्चे को चिकन और मछली खिलाई जा सकती है.
सूखे मेवे और बीज भी बच्चों को खिलाने चाहिए. इनसे बच्चों को विटामिन, खनिज, फाइबर और हेल्दी फैट्स मिलते हैं.
बच्चे को शकरकंदी खिलाएं. इससे बच्चों को भरपूर फाइबर मिलता है और पेट भरता है सो अलग.
हम में से ज्यादातर लोगों ने ट्रेन से यात्रा की है, कभी पास के शहरों या गांवों के लिये, तो कभी लंबी दूरी के लिये। ट्रेनों में अक्सर, जनरल, स्लीपर और एसी कोच होते हैं। अगर आपने गौर किया होगा, तो आपको पता होगा कि जनरल बोगियां अक्सर ट्रेनों के आगे या पीछे होती हैं।
इस वजह से आपके मन में कभी न कभी यह सवाल अवश्य आया होगा कि एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों में अनारक्षित/सामान्य कोच केवल आगे और पीछे ही क्यों लगाए जाते हैं? ट्रेन के बीच में जनरल बोगियां क्यों नहीं लगाई जाती हैं? अगर हां, तो आज के इस लेख में हम आपके इस सवाल का जवाब लेकर आये हैं।
बोगियों की इस स्थिति के पीछे कई कारण हैं। हाल ही में एक युवक ने टि्वटर पर बोगियों की स्थिति को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और यही सवाल किया। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ’24 बोगी वाली ट्रेन में जनरल बोगी दो ही क्यों होती हैं? और सबसे अहम बात ये है कि ये बोगियां ट्रेन के आगे और पीछे ही क्यों होती हैं? क्या इसलिए कि जब ट्रेन का एक्सीडेंट होगा तो जनरल बोगियों में सफर करने वाले गरीब सबसे पहले मरेंगे?” उन्होंने अपने ट्वीट पर रेल विभाग को भी टैग किया।
उनके सवाल का जवाब देते हुए रेलवे अधिकारी संजय कुमार ने लिखा, ‘पूछताछ करना अच्छा, है लेकिन सनक खराब है। यह यात्रियों की सुविधा के लिए है। जनरल कोच में भीड़ ज्यादा होती है। कल्पना कीजिए कि अगर यह बीच में है तो बीच में पूरा प्लेटफॉर्म यात्रियों द्वारा चढ़ने और उतरने की कोशिश करने से अवरुद्ध हो जाएगा, बाकी दोनों दिशाओं में जाने में सक्षम नहीं होंगे।
जनरल बोगियों के आगे और पीछे होने का मुख्य कारण प्लेटफॉर्म पर लोगों की भीड़ से बचना है। इस प्रकार, भीड़ दो समूहों में विभाजित हो जाएगी; कुछ पीछे की ओर जाएंगे और कुछ ट्रेन के आगे। यह रेलवे अधिकारियों को आपात स्थिति और दुर्घटनाओं के दौरान लोगों की मदद करने और प्लेटफॉर्म में खराब स्थितियों को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।”
लोन फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और कई बार लोगों को तब पता चलता है जब उनके नाम पर किसी ने फर्जी लोन ले लिया होता है। ऐसी स्थिति में आपका क्रेडिट स्कोर भी खराब हो सकता है। इसलिए समय-समय पर अपने CIBIL या क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करना बेहद जरूरी है। कुछ आसान स्टेप्स से आप मिनटों में अपना स्कोर चेक कर सकते हैं और फ्रॉड से बच सकते हैं।
आज के समय में बढ़ते साइबर फ्रॉड्स के खतरे ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है, आधार कार्ड हो या पैनकार्ड यदि आप अपने जरुरी दस्तावेजों को सुरक्षित नहीं करते हैं तो इनके गलत इस्तेमाल से आप बड़ी समस्या में पड़ सकते हैं। खासतौर पर आज के डिजिटल दौर में पैनकार्ड के गलत इस्तेमाल से फर्जी लोन लेना सबसे तेजी से बढ़ते साइबर फ्रॉड्स में से एक बन गया है। ऐसे में परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि अब आप घर बैठे मिनटों में अपना क्रेडिट स्कोर चेक कर यह पता लगा सकते हैं की आपके नाम पर कोई लोन लिया गया है या नहीं।
आपके नाम पर कोई लोन चल रहा है या नहीं ऐसे करें चेक
पैनकार्ड को लेकर बढ़ रहे फ्रॉड्स का एक कारण यह भी माना जा रहा है की डिजिटल बैंकोंग और ऑनलाइन वेरिफिकेशन के इस दौर में पैनकार्ड छोटे-बड़े वित्तीय लेनदेन का आधार बन गया है। जिसके चलते फर्जी वेबसाइट या साइबर अपराधी अक्सर लोगों के पैनकार्ड की डिटेल चुराकर फ्री लोन, जॉब एप्लीकेशन के नाम पर पैनकार्ड नंबर दर्ज कर देते हैं जिसकी आमलोगों को जानकारी भी नहीं होती।
ऐसे में कगी आपके नाम पर भी कोई लोन लिया गया है या नहीं यह जानने के लिए आप भारत में चार प्रमुख क्रेडिट ब्यूरो CIBIL, Experian, Equifax और CRIF Highmark जैसी वेबसाइट पर साल में एक बार फ्री में अपनी क्रेडिट रिपोर्ट डाउनलोड कर सकते हैं। इस रिपोर्ट में आपके सभी एक्टिव और क्लोजेद लोन की डिटेल्स दर्ज होती है, इसके अलावा आपका लोन कब से चल रहा है और आपने अब तक कितनी ईएमआई दी है, इसके साथ यदि कोई फर्जी लोन आपके पैन से जुड़ा है वह भी रिपोर्ट में दिख जाएगा।
फर्जी लोन मिलने पर करें ये काम
यदि आपकी रिपोर्ट में ऐसा कोई लोन दिखा रहा है जो आपने कभी लिया ही नहीं, तो सबसे पहले आप उस बैंक या संस्थान से सम्पर्क करें। अब कस्टमर केयर में जाकर उन्हें बताएं की ये फर्जी लोन है जिसके लिए आपने आवेदन नहीं किया, साथ ही उसी ब्यूरो की वेबसाइट पर जाकर “Dispute Section” में अपनी शिकायत दर्ज कर लें। अगर आपको बैंक से सहयोग न मिले तो cybercrime.gov.in पर जाकर फ्रॉड की ऑनलाइन शिकायत करें। आप चाहने तो अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में भी FIR दर्ज करवा सकते हैं।
पैन दुरूपयोग रोकने के लिए करें ये सेटिंग एक्टिवेट
अगर आप अपने पैन को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो इसके लिए आपको CIBIL, Experian, Equifax और CRIF Highmark जैसी एजेंसियों द्वारा दी जाने वाले Credit Monitoring Alert सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। इससे यदि कोई गलत तरीके से आपके पैन नंबर का इस्तेमाल करता यही तो आपको तुरंत एसएमएस या अलर्ट मिल जाएगा। इस फीचर की वार्षिक फीस केवल 100 से 200 रूपये के बीच है, जो आपके बड़े साइबर फ्रॉड से बचने में मदद करती है।
एक पल के लिए सोचिए आपकी मां को कैंसर जैसी बड़ी बीमारी हो जाए। वह बस कुछ ही दिनों की मेहमान बचे। और इस बीच आपके पिता उनका ख्याल रखने की बजाय किसी और महिला से संबंध बना ले। यह जानकार आपको कैसा महसूस होगा? यकीनन आपका दिल गुस्से से भर जाएगा। शायद आप अपने पिता को नुकसान पहुंचाने का भी सोचेंगे। बस ऐसा ही कुछ राजू (बदला हुआ नाम) के साथ हुआ। उसने अपनी दुखभरी व्यथा एक काउंसलर को बताई।
काउंसलर के पास अक्सर कई अलग-अलग प्रकार के केस आते रहते हैं। एक ऐसा ही अनोखा मामला उन्होंने साझा किया। उन्होंने बताया कि राजू नाम का लड़का अपने पिता से बहुत नाराज था। उसकी नाराजगी जाहीर भी थी। आखिर उसके पिता अपनी पत्नी के अंतिम दिनों में परआई महिला संग अफेयर चला रहे थे। इस बार में राजू ने जब बात की तो उसके अंदर बहुत गुस्सा भरा हुआ था। वह अपने पिता को मारने के बारे में भी सोच रहा था। चलिए राजू की कहानी उसी की जुबानी सुनिए।
मां को मरता छोड़ पिता ने किया लव अफेयर मैं अपने मां बाप का इकलौता बेटा हूं। मेरे पिता 53 साल के हैं। मां 50 साल की थी। उन्हें कैंसर था। मां के बीमार होने के बाद पिता का बर्ताव बदल गया। वह मां के साथ अधिक समय नहीं बिताते हैं। फिर कुछ समय बात मुझे शक हुआ कि उनका किसी और से अफेयर चल रहा है। मैं जब भी उनके कमरे में जाता था वह लैपटॉप बंद कर देते थे।
एक दिन मैंने पापा का मोबाइल देखा। उसमें उनकी मां की सहेली के साथ रोमांटिक तस्वीरें थी। दोनों एक दूसरे की बाहों में थे। दोनों के बीच रोमांटिक चैट भी होती थी। उस समय मेरी मां जिंदा थी। लेकिन मैंने पापा की हरकतों के बारे में उन्हें नहीं बताया। सोचा कुछ कहूंगा तो उनका दिल टूट जाएगा।
मन करता है पिता की जान ले लूं कुछ दिनों पहले मां की हालत ज्यादा खराब हो गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। लेकिन उनके अंतिम समय में पापा नहीं आए। फिर मां का निधन हो गया। उनके अंतिम संस्कार के दो हफ्ते बाद पापा ने कहा कि वह अपने एक पुराने दोस्त से मिलने जा रहे हैं। मैंने उनसे पूछ ही लिया ‘वह एक औरत है ना? मां की फ्रेंड? इस पर वे बोले कि वह मेरी मां के जाने दुख से उबरने में मदद कर रही है।
मेरे ख्याल से मेरे पिता एक घटिया इंसान है। अब तो कभी-कभी मेरा मन करता है कि उन्हें जान से ही मार दूं। मैं मां को बहुत मिस करता हूं। उनकी याद रोज आती है। मुझे अपनी मां के लिए शोक करना चाहिए। लेकिन इस स्थिति में कैसे करूं जब उनकी यादों का इस तरह अनादर हो रहा हो।
एक्सपर्ट ने दी सलाह इस पर एक्सपर्ट ने राजू को सलाह दी कि आपको गुस्सा आना स्वाभाविक है। आपके पिता आपकी मां के साथ अंतिम दिनों में नहीं रहे। वह आपके साथ भी नहीं खड़े रहे। हालांकि हर कोई इतना मजबूत नहीं होता है। शायद अपने कमजोर क्षण में आपके पिता को उस महिला का साथ अच्छा लगा।
हो सकता है आपकी मां भी इस बारे में जानती हो। उनका सफर ज्यादा लंबा नहीं था। इसलिए शायद उनकी खुशी के लिए उन्होंने कुछ नहीं कहा। यदि आपके पिता किसी और के साथ रहना चाहते हैं तो उन्हें जाने दे। आप अपने दर्द से बाहर आने के लिए काउंसलर की हेल्प लें। पिता से नफरत करने या उन्हें मारने से मां वापस नहीं आएगी। इससे आपका दुख और बढ़ेगा। शायद आपकी मां को भी ये अच्छा न लगे।
लिवर शरीर का एक बहुत जरूरी अंग है। 1.5 से 2 किलो का सबसे ज्यादा वजन वाला यह अंग शरीर के कई काम करता है। यह खाना पचाने, एनर्जी बनाना और स्टोर करना, प्रोटीन बनाना, विटामिन्स और मिनरल्स को स्टोर करना, खून को फिल्टर करना आदि काम करता है।
जब आपको पीलिया, थकान और कमजोरी, पेट में सूजन और दर्द, भूख कम लगना और उल्टी आना, गहरे रंग का पेशाब, त्वचा पर खुजली या रैश, ब्लड क्लॉटिंग में दिक्कत जैसे संकेत बताते हैं कि आपके लिवर में खराबी आ गई है। जाहिर लिवर खराब होने के कारण कुछ हों, आपको स्वस्थ रहने के लिए लिवर को साफ, स्वस्थ और मजबूत बनाए रखना जरूरी है। आयुर्वेद डॉक्टर दीक्षा भावसार आपको बता रही हैं कि क्या खाने-पीने से आपका लिवर साफ हो सकता है। लिवर शरीर का एक बहुत जरूरी अंग है। 1.5 से 2 किलो का सबसे ज्यादा वजन वाला यह अंग शरीर के कई काम करता है। यह खाना पचाने, एनर्जी बनाना और स्टोर करना, प्रोटीन बनाना, विटामिन्स और मिनरल्स को स्टोर करना, खून को फिल्टर करना आदि काम करता है। जब आपको पीलिया, थकान और कमजोरी, पेट में सूजन और दर्द, भूख कम लगना और उल्टी आना, गहरे रंग का पेशाब, त्वचा पर खुजली या रैश, ब्लड क्लॉटिंग में दिक्कत जैसे संकेत बताते हैं कि आपके लिवर में खराबी आ गई है। जाहिर लिवर खराब होने के कारण कुछ हों, आपको स्वस्थ रहने के लिए लिवर को साफ, स्वस्थ और मजबूत बनाए रखना जरूरी है। आयुर्वेद डॉक्टर दीक्षा भावसार आपको बता रही हैं कि क्या खाने-पीने से आपका लिवर साफ हो सकता है।लिवर को साफ करने के तरीके
लिवर शरीर का एक बहुत जरूरी अंग है। 1.5 से 2 किलो का सबसे ज्यादा वजन वाला यह अंग शरीर के कई काम करता है। यह खाना पचाने, एनर्जी बनाना और स्टोर करना, प्रोटीन बनाना, विटामिन्स और मिनरल्स को स्टोर करना, खून को फिल्टर करना आदि काम करता है। जब आपको पीलिया, थकान और कमजोरी, पेट में सूजन और दर्द, भूख कम लगना और उल्टी आना, गहरे रंग का पेशाब, त्वचा पर खुजली या रैश, ब्लड क्लॉटिंग में दिक्कत जैसे संकेत बताते हैं कि आपके लिवर में खराबी आ गई है। जाहिर लिवर खराब होने के कारण कुछ हों, आपको स्वस्थ रहने के लिए लिवर को साफ, स्वस्थ और मजबूत बनाए रखना जरूरी है। आयुर्वेद डॉक्टर दीक्षा भावसार आपको बता रही हैं कि क्या खाने-पीने से आपका लिवर साफ हो सकता है।
नींबू
आयुर्वेद में नींबू को शरीर को साफ करने और पित्त बढ़ाने वाला माना गया है। इसमें विटामिन C भरपूर होता है, जो लीवर को नुकसान से बचाता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। सुबह गुनगुने पानी में नींबू डालकर पिएं।
हल्दी और काली मिर्च
हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व होता है जो सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है। यह लीवर को टॉक्सिन्स से बचाता है और पित्त के बहाव को बेहतर करता है। काली मिर्च लीवर को साफ करने में मदद करती है और हल्दी के असर को और बढ़ा देती है। ½ चम्मच हल्दी + चुटकी भर काली मिर्च को गुनगुने पानी, दूध, शहद या सूप में मिलाकर लें।
धनिया
धनिया शरीर से जहरीले तत्व निकालने, पाचन सुधारने और लीवर की कोशिकाओं को बचाने में मदद करता है। धनिया की चाय बनाकर पिएं। सब्जियों और करी में धनिया पत्ती डालें।
अदरक और आंवला
अदरक पाचन को तेज करता है, खून का संचार बढ़ाता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालता है। यह फैटी लीवर डिजीज से भी बचाता है। अदरक की चाय पिएं। खाने में डालें या खाने के बाद थोड़ा सा अदरक शहद के साथ खाएं। विटामिन C का बहुत अच्छा स्रोत है। लीवर की सफाई करता है, इम्युनिटी बढ़ाता है और शरीर को जवान बनाए रखता है। आंवला को फल के रूप में खाएं, मुरब्बा या पाउडर के रूप में लें।
चुकंदर और गाजर
इसमें बेटालेन्स और नाइट्रेट्स होते हैं जो सूजन को कम करते हैं और लीवर की सफाई में मदद करते हैं। चुकंदर को कच्चे सलाद में या जूस में लें। गाजर में बीटा-कैरोटीन और फ्लावोनॉइड्स होते हैं जो लीवर के काम को बेहतर करते हैं।
ग्रीन टी
ग्रीन टी लीवर की सेहत में सुधार करती है और फैटी लिवर डिजीज को रोकने में मददगार है। सुबह खाली पेट या खाने के 1 घंटे बाद ग्रीन टी पी सकते हैं।
कुछ लोग होते हैं जो हमेशा अपनी नाकामयाबियों के लिए किस्मत को दोष देते हैं। कुछ भी हो इन्हें सिर्फ अपनी किस्मत पर ही रोना आता है। जब भी इन पर कोई संकट आता है, तो भी ये अपनी किस्मत को ही दोष देते हैं। अगर आप भी यही समझते हैं कि आपकी किस्मत आपका साथ नहीं दे रही है तो आज हम आपको रोटी का एक ऐसा छोटा और अचूक उपाय बता रहे हैं, जिसे रोज करने से न सिर्फ आपकी किस्मत आपका साथ देने लगेगी बल्कि आने वाले संकट भी टल जाएंगे। ये उपाय इस प्रकार है-
अचूक उपाय
सुबह जब घर में भोजन बने तो सबसे पहले वाली रोटी अलग निकाल लें। इस बात का ध्यान रखें कि ये रोटी अन्य रोटियों से थोड़ी बड़ी हो ताकि आसानी से इसके चार टुकड़े किए जा सकें। अब इस रोटी के बराबरी से चार टुकड़े कर लें और इन चारों पर कुछ मीठा जैसे- खीर, गुड़ या शक्कर रख दें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बाहर का कोई व्यक्ति आपको यह टोटका करते हुए न देख पाए।
रोटी के चार टुकड़ों में से सबसे पहला वाला गाय को खिला दें और भगवान से प्रार्थना करें कि आपकी समस्याओं का निदान जल्दी से जल्दी हो जाए और आपकी मनोकामना पूरी हो। धर्म ग्रंथों के अनुसार गाय में ही सभी देवताओं का निवास होता है इसलिए सबसे पहले रोटी गाय को ही दी जाती है।
अब दूसरा टुकड़ा कुत्ते को खिला दें। शिवमहापुराण के अनुसार कुत्ते को रोटी खिलाते समय बोलना चाहिए कि- यमराज के मार्ग का अनुसरण करने वाले जो श्याम और शबल नाम के दो कुत्ते हैं, मैं उनके लिए यह अन्न का भाग देता हूं। वे इस बलि (भोजन) को ग्रहण करें। इसे कुक्कर बलि कहते हैं।
अब रोटी के तीसरे भाग को कौओं को खिला दें और बोलें- पश्चिम, वायव्य, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में रहने वाले जो पुण्यकर्मा कौए हैं, वे मेरी इस दी हुई बलि को ग्रहण करें। धर्म ग्रंथों में इसे काक बलि कहते हैं।
अब रोटी का अंतिम टुकड़ा जो बचा है उसे घर पर आए किसी भिक्षु को दे दें। इस प्रकार ये छोटा सा उपाय रोज करने से आपकी किस्मत कुछ ही दिनों में बदल जाएगी और किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आएगी।