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  • गेहूं के आटे में एक चम्मच मिलाकरˈ खा लें ये पाउडर, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कब्ज का तोड़, टॉयलेट में बैठते ही साफ होने लगेगा पेटˌ

    गेहूं के आटे में एक चम्मच मिलाकरˈ खा लें ये पाउडर, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कब्ज का तोड़, टॉयलेट में बैठते ही साफ होने लगेगा पेटˌ

    गेहूं के आटे में एक चम्मच मिलाकरˈ खा लें ये पाउडर, न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कब्ज का तोड़, टॉयलेट में बैठते ही साफ होने लगेगा पेटˌ

    Constipation Remedy: कब्ज यानी पेट साफ न होना आज के समय में बहुत आम समस्या है. गलत खानपान, कम पानी पीना और भागदौड़ वाली लाइफस्टाइल की वजह से ये परेशानी तेजी से बढ़ रही है. कब्ज होने पर मल त्याग नहीं हो पाता है, जिससे हर समय पेट भारी लगने लगता है, गैस और एसिडिटी की समस्या हो जाती है, साथ ही सिरदर्द और चिड़चिड़ापन भी बढ़ जाता है.

    इन सब से अलग लंबे समय तक कब्ज बने रहने पर बवासीर जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं. ऐसे में अच्छी सेहत के लिए कब्ज से निजात पाना बेहद जरूरी है. अब, अगर आप भी कब्ज से परेशान हैं, तो यहां हम आपको इसके लिए एक बेहद आसान और असरदार उपाय बता रहे हैं.

    कब्ज होने पर क्या करें?

    हाल ही में फेमस न्यूट्रिशनिस्ट और डायबिटीज एजुकेटर खुशी छाबड़ा ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने कब्ज से निजात पाने का ये असरदार तरीका बताया है. न्यूट्रिशनिस्ट कहती हैं, अगर घंटों टॉयलेट में बैठे रहने के बाद भी आपका पेट साफ नहीं हो पाता है, तो इसके लिए आप एक खास रोटी का सेवन कर सकते हैं.

    कैसे बनाएं ये रोटी?

    न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है, रोटी बनाने के लिए गेहूं के आटे में सिर्फ एक चम्मच अलसी (Flaxseed) का पाउडर मिला लें. आप आटा गूंथते समय उसमें अलसी पाउडर डाल सकते हैं या रोटी में इसे अलग से भी भर सकते हैं. केवल इस तरह तैयार रोटी का सेवन करने से आपके पेट की सफाई आसानी से होने लगेगी.

    अलसी कैसे करती है कब्ज दूर?

    अलसी में भरपूर मात्रा में सॉल्युबल फाइबर होता है. यही फाइबर आंतों में जाकर पानी सोखता है और मल को नरम बनाता है. नतीजा यह होता है कि टॉयलेट में बैठते ही पेट साफ हो जाता है और कब्ज से तुरंत राहत मिलती है.

    और भी हैं कई फायदे

    कब्ज दूर करने से अलग खुशी छाबड़ा ने अलसी के और भी कई हेल्थ बेनिफिट्स बताए हैं. जैसे-

    ब्लड शुगर कंट्रोल

    न्यूट्रिशनिस्ट कहती हैं, अलसी ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस करती है और डायबिटीज वालों के लिए बहुत फायदेमंद है.

    दिल और ब्लड प्रेशर के लिए अच्छी

    दिखने में छोटे ये बीज आपके दिल की सेहत के लिए बेहद अच्छे हैं. ये कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करते हैं.

    ओमेगा-3 का प्लांट सोर्स

    अलसी के बीजों में प्लांट-बेस्ड ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं, जो बॉडी में इंफ्लेमेशन को कम करते हैं.

    वेट लॉस

    इन सब से अलग अलसी पेट को ज्यादा देर तक भरा हुआ रखती है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है. इस तरह ये वेट लॉस में भी फायदेमंद हो सकती है.

    हालांकि, तमाम फायदे होने के बावजूद एक सीमित मात्रा में ही अलसी का सेवन करें. इसे ज्यादा लेने से पाचन पर खराब असर हो सकता है, जिससे पेट फूलने या पेट में भारीपन जैसी दिक्कते बढ़ सकती हैं. एक दिन में एक चम्मच अलसी का सेवन पर्याप्त है.

    अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.

  • भंडारा… भंडारा.. भंडारा.. विशाल भंडारा.. जाने आखिरˈ क्यों भंडारे में नहीं करना चाहिए भोजन?ˌ

    भंडारा… भंडारा.. भंडारा.. विशाल भंडारा.. जाने आखिरˈ क्यों भंडारे में नहीं करना चाहिए भोजन?ˌ

    भंडारा… भंडारा.. भंडारा.. विशाल भंडारा.. जाने आखिरˈ क्यों भंडारे में नहीं करना चाहिए भोजन?ˌ

    ‘भंडारा.. भंडारा.. भंडारा.. विशाल भंडारा..’ ये शब्द सुनते ही लोगों के मन में लड्डू फूटने लगते हैं। उनके मुंह से लार टपकने लगती है। वह फौरन भंडारे में जाने की पूरी प्लानिंग बना लेते हैं। कुछ तो सुबह से भूखे रहते हैं ताकि भंडारे में ज्यादा खा सके। फिर कुछ महान लोग ऐसे भी होते हैं जो भंडारे का खाना टिफिन में पैक कर घर ले जाते हैं।

    वैसे एक बात तो है भंडारे के खाने का स्वाद ही निराला होता है। यहां गरमा गरम पूरी, रामभाजी, सेव, मीठी बूंदी और किस्मत अच्छी हुई तो मिठाई का एक टुकड़ा भी मिल जाता है। आय-हाय ये बातें करने मात्र से हमारे मुंह में भी पानी आने लगा। पेट में चूहे कबड्डी खेलने लगे। अब इसके पहले आप अपने आसपास कोई भंडारा निपटाने जाने लगो, एक मिनट रुककर हमारी बातें सुन लो।

    आपको जान हैरानी होगी कि हम में से कई लोगों को भंडारे का खाना नहीं खाना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं की माने तो कुछ खास लोगों को भंडारे का खाना खाने से परहेज करना चाहिए। अब ऐसा क्यों है? आखिर वह क्या वजह है जिसके चलते अधिकतर लोगों को भंडारे में नहीं खाना चाहिए? और यदि आपने खा लिया तो आपके साथ क्या होगा? तो चलिए इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं।

    कैसे शुरू हुई भंडारे की परंपरा?

    सबसे पहले ये जानते हैं कि आखिर ये भंडारे होते क्यों हैं? इसकी शुरुआत कहां से हुई? हमारे शास्त्रों और पुराणों को खंगाला जाए तो उसमें अन्नदान की बात कई बार पढ़ने को मिलती है। इन शास्त्रों की माने तो गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन कराना और कपड़े बांटना शुभ और नेक काम माना जाता है। ऐसा करने से भगवान खुश होते हैं और हमे अच्छा फल देते हैं। बस इसी अन्नदान की परंपरा ने धीरे-धीरे भंडारे का रूप ले लिया।

    इस कारण भंडारे में नहीं करना चाहिए भोजन

    तो चलिए फिर से मुद्दे की बात पर आते हैं। आखिर हमे भंडारे का भोजन क्यों नहीं करना चाहिए? आखिर इसमें दिक्कत क्या है? तो देखो भाई, भंडारा कराने का मुख्य उद्देश्य गरीबों की सहायता करना होता है। इस दौरान ऐसे लोगों को अच्छा और भरपेट खाना खिलाया जाता है जो इसे अफोर्ड नहीं कर सकते हैं। इसलिए जब उन्हें ये स्वादिष्ट भोजन मिलता है तो उनका मन प्रसन्न हो जाता है। अब यदि हम और आप जैसे सक्षम लोग फ्री फोकट में भंडारे में खाकर आ जाएं तो ये उन गरीबों और जरूरतमंदों का हक मारना होगा।

    भंडारा खाने के पहले करें ये काम

    अब ये बात सुनकर आप में से कई लोग उदास हो गए होंगे। क्योंकि बहुत से लोगों को भंडारे का खाना लाजवाब लगता है। वह इसका हिस्सा बनना चाहते हैं। तो जनाब आप टेंशन मत लीजिए। शास्त्रों में इसका तोड़ भी बताया गया है। आप भंडारे में अपनी क्षमता के अनुसार पैसों की मदद कर सकते हैं। इसके अलावा भंडारे में आए लोगों को भोजन परोसने का काम भी कर सकते हैं। इस तरह आप फ्री फोकट में नहीं खाएंगे। बल्कि अपने खुद के पैसों का खाएंगे और दूसरों को भी अपने पैसों से खिलाएंगे। मतलब आपको अन्न दान का लाभ मिलेगा।

    तो देर किस बात की आज ही अपने आसपास एक विशाल भंडारे का आयोजन कराइए। और इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा तक उन्हें भी भंडारे के खाने की सच्चाई बताइए।

  • 2 लड़कियों को आपस में हो गयाˈ प्यार, करने लगी शादी करने की जिद, जानें फिर क्या हुआˌ

    2 लड़कियों को आपस में हो गयाˈ प्यार, करने लगी शादी करने की जिद, जानें फिर क्या हुआˌ

    उत्तर प्रदेश से एक अनोखा मामला सामने आया है। जहां पर दो युवती एक दूसरे से शादी करने की जिद पर अड़ गई। ये मामला इतना बढ़ा गया  कि लड़कियों के परिवार वालों ने पंचायत बुला दी। जिसके बाद पंचायत को समस्या का समाधान निकालने को कहा गया। खबर के अनुसार डिडौली कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली एक लड़की को गजरौला थाना क्षेत्र में रहने वाली एक लड़की से प्यार हो गया। जिसके बाद इन दोनों ने शादी करने का फैसला किया। लेकिन जब परिवार के लोगों को इस बारे में पता चला तो उन्होंने इस रिश्ते पर एतराज किया और इनकी शादी करवाने से मना कर दिया। बुधावर को दोनों लड़कियों के परिवार वालों ने रिश्तेदारों की पंचायत भी बैठाई और लड़कियों को समझाने की कोशिश की।

    बताया जा रहा है कि डिडौली कोतवाली क्षेत्र में रहने वाली 20 साल की युवती कुछ साल पहले अपने रिश्तेदारों के यहां गजरौला थाना क्षेत्र के गांव में गई थी। यहां पर इस युवती की मुलाकात एक लड़की से हुई। इस दौरान दोनों के बीच दोस्ती हो गई। दोनों युवतियां अक्सर एक-दूसरे के घर कई दिनों तक आकर ठहरती भी थीं। ये एक दूसरे को दो साल से जानती थी। परिवार वालों को कभी भी इनपर शक नहीं हुआ। लेकिन हाल ही में दोनों युवतियों ने आपस में शादी करने का एलान कर दिया। जिससे परिजन हैरान रहे गए।

    2 लड़कियों को आपस में हो गयाˈ प्यार, करने लगी शादी करने की जिद, जानें फिर क्या हुआˌ

    बुधवार सुबह गजरौला निवासी युवती डिडौली के गांव में रहने वाली दूसरी युवती के घर पहुंची। इन दोनों ने कई देर तक आपस में बातचीत की। बातचीत करने के बाद इन दोनों ने अपने परिवारों वालों को बताया कि ये एक दूसरे से प्यार करती हैं और शादी करना चाहती हैं। ये बात सुनकर परिजन परेशान हो हए और हर किसी ने इन्हें समझाने की कोशिश की। लेकिन ये दोनों नहीं मानीं और शादी करने की जिद करने लगी। कुछ देर बाद युवतियों ने हंगामा भी शुरू कर दिया।

    दोनों परिवारों ने रिश्तेदारों की पंचायत बैठाई। पंचायत में आए लोगों को पूरी बात बताई गई। काफी मशक्कत के बाद पंचायत ने युवितयों को शांत कराया। इसके बाद गजरौला का परिवार अपनी बेटी को साथ घर ले गया। परिवार की ओर से न ही लड़कियों की ओर से भी तक पुलिस में शिकायत दर्ज की गई है।  इंस्पेक्टर अजय कुमार ने मामला संज्ञान में होने से इंकार किया है।

  • 40-50 की उम्र पार कर चुके बॉलीवुडˈ के ये दस कुंवारे स्टार्स हैं हैप्पिली सिंगल कुछ ने प्यार करने के बाद भी नहीं बसाया घरˌ

    40-50 की उम्र पार कर चुके बॉलीवुडˈ के ये दस कुंवारे स्टार्स हैं हैप्पिली सिंगल कुछ ने प्यार करने के बाद भी नहीं बसाया घरˌ

    40-50 की उम्र पार कर चुके बॉलीवुडˈ के ये दस कुंवारे स्टार्स हैं हैप्पिली सिंगल कुछ ने प्यार करने के बाद भी नहीं बसाया घरˌ

    सिंगल होकर भी जिंदगी का लुत्फ उठाया जा सकता है. यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह जरूरी तो नहीं ना कि खुश रहने या जिंदगी जीने के लिए हर वक्त किसी साथी के साथ की जरूरत पड़े.

    बॉलीवुड में कई ऐसे स्टार्स हैं, जो 40 या 50 साल की उम्र की दहलीज़ को लांघ चुके हैं अब तक कुंवारे हैं. अकेले रहकर ये जिंदगी के मजे ले रहे हैं अपने सिंगलहुड को इजॉए को कर रहे हैं.

    सलमान खान

    बॉलीवुड के मोस्ट एलिजिबल बैचलर की बात करें, तो अब इस लिस्ट में टॉप पर सलमान खान का नाम आता है. 59 साल के हो चुके सलमान का स्वैग ऐसा है कि उनके चार्म के यंग एक्टर्स का जलवा फीका है. सलमान ऐश्वर्या, कैटरीना जैसी कई अभिनेत्रियों को डेट कर चुके हैं. लेकिन उन्होंने अब तक किसी के साथ अपना घर नहीं बसाया.

    तब्बू

    तब्बू 53 की हो चुकी हैं अब तक उन्होने शादी नहीं की हैं. तब्बू ने प्यार में कई बार दिल तुड़वाया. रिपोर्ट्स की मानें तो तब्बू ने दस साल तक शादीशुदा साउथ सुपरस्टार नागार्जुन को डेट किया था, हालाँकि इस उम्र में भी वह अबतक कुँवारी हैं.

    अमिषा पटेल

    50 साल की हो चुकीं एक्ट्रेस अमिषा पटेल ने कभी निर्देशक विक्रम भट्ट के प्यार में पढ़कर अपने परिवार से बगावत कर ली थी. बाद में विक्रम से अमिषा का ब्रेकअप हो गया. विक्रम के बाद अमिषा के जिंदगी में बिजनेसमैन कनव पूरी आए. लेकिन 2010 में अमिषा कनव से भी अलग हो गईं . तब से अमिषा सिंगल हैं, बेहद खुश हैं.

    सुष्मिता सेन

    मिस यूनिवर्स का खिताब जीतने वाली सुष्मिता सेन अब 49 साल की हो चुकी हैं. लंबे वक्त से वह मॉडल रोहमन शॉल को डेट कर रही हैं. लेकिन सुष्मिता का भी फिलहाल शादी करने का कोई इरादा नहीं है.

    दिव्या दत्ता

    अभिनेत्री दिव्या दत्ता 47 साल की हो गईं. लेकिन फिर भी कुंवारी हैं. शादी के बारे में पूछे जाने पर दिव्या कहती हैं, कि ऐसा नहीं है कि वह शादी नहीं करना चाहती. वह बस किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जो उनके लिए सही हो.

    तनीषा मुखर्जी

    काजोल की बहन तनिषा मुखर्जी 47 की हैं अभी तक कुंवारी हैं. तनिषा का नाम उदय चोपड़ा अरमान कोहली के साथ जुड़ा लेकिन वह किसी के साथ घर नहीं बसा पाईं .

    दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना के बेटे अक्षय खन्ना भी हैप्पिली कुंवारों की लिस्ट में शामिल हैं. अक्षय खन्ना अपने पिता की तरह सफल अभिनेता नहीं बन पाए. लेकिन आज भी वो सिंगल होने के बाद भी अपनी लाइफ को अच्छे से इंजॉए कर रहे हैं.

    उदय चोपड़ा

    यश चोपड़ा के छोटे बेटे उदय चोपड़ा ने भी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाई लेकिन उनका सिक्का नहीं चल पाया. मोहब्बतें से अपने करियर की शुरुआत करने वाले उदय चोपड़ा ने भी अब तक शादी नहीं की है.

    तुषार कपूर

    अभिनेता तुषार कपूर ने भी शादी नहीं की है. हांलाकि एक वक्त था जब तुषार का नाम उनकी सह-अभिनेत्रियों के साथ जुड़ता था. लेकिन तुषार कि जिंदगी में किसी भी लड़की ने जीवनसाथी के तौर पर दस्तक नहीं दी. तुषार 48 साल के है वह सेरोगेसी के ज़रिए बेटे के पिता बन गए हैं.

    एकता कपूर

    छोटे भाई तुषार कपूर की तरह एकता कपूर को भी अपनी जिंदगी में भी जीवनसाथी की कमी कभी नहीं खली. 50 साल की एकता हैप्पिली सिंगल अब तो वह सेरोगेसी के ज़रिए एक बेटे की मां भी बन गई हैं.

    राहुल बोस

    टैलेंटिड एक्टर राहुल बोस भी अब तक कुंवारे हैं. 57 साल के राहुल शादी के रिश्ते से दूर ही रहना चाहते हैं. जीवनसाथी के बिना वह अपनी जिंदगी खुलकर जी रहे हैं.

  • भाग्यशाली माने जाते हैं दांतों के बीचˈ गैप वाले लोग ये 8 खूबियां उन्हें बनाती हैं सब से ख़ासˌ

    भाग्यशाली माने जाते हैं दांतों के बीचˈ गैप वाले लोग ये 8 खूबियां उन्हें बनाती हैं सब से ख़ासˌ

    भाग्यशाली माने जाते हैं दांतों के बीचˈ गैप वाले लोग ये 8 खूबियां उन्हें बनाती हैं सब से ख़ासˌ

    आपके आस-पास कुछ लोग तो ऐसे ज़रूर होंगे जिनकी दांतों में गैप होगा. दांतों में गैप यूं ही नहीं होता. दांतों में गैप एक इंसान के स्वभाव के बारे में बहुत कुछ बताता है. यह उस व्यक्ति के जीवन से जुड़े कई राज़ खोल सकता है. समुद्रशास्त्र के अनुसार, दांतों में गैप वाले व्यक्ति बहुत भाग्यशाली होते हैं. उनमें कुछ ऐसी खूबियां होती हैं जो उन्हें दूसरों से अलग करती हैं. समुद्रशास्त्र में व्यक्ति के शरीर के अंगों और व्यवहार से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं जिन्हें जानकर आप भविष्य का भी अनुमान लगा सकते हैं. इन बातों से आप व्यक्ति के स्वभाव का भी पता लगा सकते हैं. समुद्रशास्त्र का अध्ययन करके आप उनके बारे में विस्तार से जान सकते हैं. आज हम आपको उन लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी दांतों में गैप होता है. समुद्रशास्त्र के अनुसार जानिये ऐसे लोगों से जुड़ी कुछ ख़ास बातें.

    दांत में गैप वाले लोगों में होती हैं ये विशेषताएं

    करियर ओरिएंटेड

    जिन लोगों के सामने के दांतों के बीच गैप होता है वह करियर ओरिएंटेड होते हैं. ये लोग अपने करियर में बहुत सफल होते हैं. वह चाहे जो भी करियर चुन लें उनमें उन्हें सफलता मिलती है. ये लोग एक सफल मुकाम पर पहुंच कर ही रहते हैं. सफल होने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता.

    क्रिएटिव माइंड

    ऐसे लोग बहुर क्रिएटिव माइंड वाले होते हैं. ये बहुत बुद्धिमान होते हैं. इनकी बुद्धिमानी से लोग जल्दी इम्प्रेस हो जाते हैं. इनकी क्रिएटिविटी और इंटेलिजेंस इन्हें करियर में बहुत आगे लेकर जाती है.

    दिखने में आकर्षण

    दांतों में गैप वाले लोग दिखने में सुंदर और आकर्षक होते हैं. ये लोग बहुत हाइली क्वालिफाइड भी होते हैं. इनकी योग्यता ही इनकी निशानी मानी जाती है. गुडलक हमेशा इन लोगों के साथ रहता है.

    बातूनी स्वभाव

    ऐसे लोग स्वभाव से बहुत बातूनी होते हैं. इन्हें बात करना बहुत ज्यादा पसंद होता है. यह लोग किसी भी टॉपिक पर घंटों बात कर सकते हैं. अपनी बातों से ये दूसरों को जल्दी इम्प्रेस कर लेते हैं और यही इनकी खासियत भी होती है.

    खाने के शौक़ीन

    दांतों के बीच गैप वाले लोगों को ‘फूडी’ कहा जाता है. खाना इन लोगों की पहली पसंद होती है. इन्हें अलग-अलग प्रकार के व्ययंजन ट्राई करना काफी पसंद होता है. इन्हें कुकिंग का बहुत शौक होता है और अपने घर पर भी ये लोग नए-नए डिशेज ट्राई करते रहते हैं.

    अच्छे फाइनेंस मैनेजर

    ये लोग पैसों के मामले में बहुत लकी होते हैं. इन लोगों को आर्थिक तंगी से कभी नहीं गुज़रना पड़ता. हिसाब-किताब के मामले में भी ये लोग बहुत पक्के होते हैं. ऐसे लोग अच्छे फाइनेंस मैनेजर होते हैं.

    हाई एनर्जी लेवल

    इन लोगों में गजब की एनर्जी होती है. किसी भी काम को यह पूरी उर्जा के साथ करते हैं और जीवन में एक बड़ा मुकाम हासिल करते हैं.

    खुले विचार

    दांतों में गैप वाले लोगों का विचार काफी खुला होता है. ये दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में यकीन रखते हैं. ये लोग अपनी बात बिना किसी हिचकिचाहट या शर्म कह देते हैं.

  • बॉडी को बनाता था कोरमा और सिरˈ को सूप, कहानी उस सीरियल किलर की, जिसको पकड़ने के लिए पुलिस पहुंच गई ‘पाताल लोक’

    बॉडी को बनाता था कोरमा और सिरˈ को सूप, कहानी उस सीरियल किलर की, जिसको पकड़ने के लिए पुलिस पहुंच गई ‘पाताल लोक’

    बॉडी को बनाता था कोरमा और सिरˈ को सूप, कहानी उस सीरियल किलर की, जिसको पकड़ने के लिए पुलिस पहुंच गई ‘पाताल लोक’

    अपराध की दुनिया में हमने कई सीरियल किलर्स के बारे में सुना है, लेकिन उत्तर प्रदेश का राजा कोलंदर एक ऐसा नाम है, जिसे सुनकर आज भी लोगों की रूह कांप जाती है. यह महज एक हत्यारा नहीं था, बल्कि एक ऐसा नरभक्षी दरिंदा था जिसने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं. राजा कोलंदर के नाम से कुख्यात राम निरंजन की कहानी किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं है. वह इंसानों को मारकर उनकी खोपड़ियों को सजाता था और उनके दिमाग का सूप बनाकर पीता था.

    कैसे हुआ इस दरिंदे का खुलासा?

    राजा कोलंदर की दरिंदगी का सच साल 2000 में दुनिया के सामने आया. लखनऊ के एक दैनिक समाचार पत्र के कर्मचारी मनोज कुमार सिंह अचानक लापता हो गए थे. पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो मनोज के मोबाइल फोन की लोकेशन को ट्रैक किया गया. यह लोकेशन इलाहाबाद के पास एक व्यक्ति के पास मिली, जिसका नाम राम निरंजन उर्फ राजा कोलंदर था. जब पुलिस उसके फार्महाउस पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अनुभवी पुलिसकर्मियों के भी पसीने छूट गए. पुलिस को वहां से कई नरकंकाल और नरमुंड यानी इंसानी खोपड़ियां मिले.

    खोपड़ी का सूप और खौफनाक शौक

    राजा कोलंदर की गिरफ्तारी के बाद जो खुलासे हुए, वे दहला देने वाले थे. पूछताछ में उसने कुबूल किया कि वह लोगों की हत्या करने के बाद उनके सिर को धड़ से अलग कर देता था. वह खोपड़ी के ऊपरी हिस्से को काटता और दिमाग को निकाल कर उसे पानी में उबालता था. राजा कोलंदर का मानना था कि किसी विद्वान या बुद्धिमान व्यक्ति के दिमाग का ‘सूप’ पीने से उसकी खुद की बुद्धि बढ़ेगी और वह अजेय बन जाएगा. उसने साल 2000 में लखनऊ के चारबाग इलाके से मनोज कुमार सिंह और रवि श्रीवास्तव का अपहरण किया और फिर उनकी हत्या कर उनके दिमाग का सूप पी लिया था.

    डायरी में छिपा था मौतों का हिसाब

    पुलिस को राजा कोलंदर के पास से एक डायरी मिली थी, जिसे उसने ‘मौत का रजिस्टर’ बना रखा था. उस डायरी में उसने उन सभी लोगों के नाम लिखे थे जिनकी उसने हत्या की थी. उसने स्वीकार किया कि उसने करीब 14 लोगों का कत्ल किया था. वह खोपड़ियों को इकट्ठा करता था और उनके साथ बातें भी करता था. उसने अपने घर में बाकायदा एक ऐसी जगह बनाई थी जहां वह खोपड़ियों को लटका कर रखता था और उन्हें अपना ‘राज्य’ मानता था. वह खुद को एक राजा समझता था और उन खोपड़ियों को अपनी प्रजा.

    मनोज सिंह और रवि श्रीवास्तव की निर्मम हत्या

    राजा कोलंदर ने मनोज सिंह की हत्या सिर्फ इसलिए की थी क्योंकि मनोज को उसके कुछ काले कारनामों की भनक लग गई थी. वहीं रवि श्रीवास्तव की हत्या भी बेहद क्रूरता से की गई थी. इन दोनों की हत्याओं के बाद उसने उनके शवों को ठिकाने लगाने के लिए उनके टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे, ताकि किसी को शक न हो. लेकिन मोबाइल फोन की तकनीक ने इस नरभक्षी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.

    क्या राजा कोलंदर अभी जिंदा है?

    राजा कोलंदर के मामले की सुनवाई सालों तक चली. साल 2012 में इलाहाबाद की एक विशेष अदालत ने उसे मनोज सिंह की हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. राजा कोलंदर की क्रूरता को देखते हुए कई लोगों ने उसे फांसी देने की मांग की थी, लेकिन उसे उम्रकैद मिली. वर्तमान जानकारी के अनुसार, राजा कोलंदर अभी जीवित है और उत्तर प्रदेश की जेल में अपनी सजा काट रहा है. उसकी पत्नी और साले को भी इस मामले में संलिप्त पाया गया था, क्योंकि वे भी इन अपराधों में उसका साथ देते थे.

    मानसिक विकृति का चरम रूप

    मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि राजा कोलंदर एक साइकोपैथ था, जिसे लोगों को तड़पते देखने और फिर उनकी खोपड़ियों के साथ तंत्र-मंत्र करने में मजा आता था. उसे सत्ता और ज्ञान की ऐसी भूख थी जिसने उसे एक दरिंदा बना दिया. उत्तर प्रदेश पुलिस के रिकॉर्ड में यह मामला आज भी सबसे वीभत्स और डरावने केसों में से एक माना जाता है. राजा कोलंदर की कहानी हमें याद दिलाती है कि समाज के बीच कभी-कभी ऐसे चेहरे भी छिपे होते हैं जिनकी कल्पना कर पाना भी असंभव है.

  • शरीर में गाँठ किसी भी तरह कीˈ हो या फोड़े-फुंसी हो; इन सब के रामबाण घरेलु उपायˌ

    शरीर में गाँठ किसी भी तरह कीˈ हो या फोड़े-फुंसी हो; इन सब के रामबाण घरेलु उपायˌ

    शरीर में गाँठ किसी भी तरह कीˈ हो या फोड़े-फुंसी हो; इन सब के रामबाण घरेलु उपायˌ
    • शरीर के किसी भी हिस्से में उठने वाली कोई भी गठान या रसौली एक असामान्य लक्षण है जिसे गंभीरता से लेना आवश्यक है। ये गठानें पस या टीबी से लेकर कैंसर तक किसी भी बीमारी की सूचक हो सकती हैं।
    • गठान अथवा ठीक नहीं होने वाला छाला व असामान्य आंतरिक या बाह्य रक्तस्राव कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।
    • ज़रूरी नहीं कि शरीर में उठने वाली हर गठान कैंसर ही हो। अधिकांशतः कैंसर रहित गठानें किसी उपचार योग्य साधारण बीमारी की वजह से ही होती हैं लेकिन फिर भी इस बारे में सावधानी बरतनी चाहिए। इस प्रकार की किसी भी गठान की जाँच अत्यंत आवश्यक है ताकि समय रहते निदान और इलाज शुरू हो सके।
    • चूँकि लगभग सारी गठानें शुरू से वेदना हीन होती हैं इसलिए अधिकांश व्यक्ति नासमझी या ऑपरेशन के डर से डॉक्टर के पास नहीं जाते। साधारण गठानें भले ही कैंसर की न हों लेकिन इनका भी इलाज आवश्यक होता है। उपचार के अभाव में ये असाध्य रूप ले लेती हैं, परिणाम स्वरूप उनका उपचार लंबा और जटिल हो जाता है। कैंसर की गठानों का तो शुरुआती अवस्था में इलाज होना और भी ज़रूरी होता है। कैंसर का शुरुआती दौर में ही इलाज हो जाए तो मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।
    • आपके शरीर मे कहीं पर भी किसी भी किस्म की गांठ हो। उसके लिए है ये चिकित्सा चाहे किसी भी कारण से हो सफल जरूर होती है। कैंसर मे भी लाभदायक है।

    ➡ आप ये दो चीज पंसारी या आयुर्वेद दवा की दुकान से ले ले :

    • कचनार की छाल और गोरखमुंडी : वैसे यह दोनों जड़ी बूटी बेचने वाले से मिल जाती हैं पर यदि कचनार की छाल ताजी ले तो अधिक लाभदायक है। कचनार (Bauhinia purpurea) का पेड़ हर जगह आसानी से मिल जाता है।
    • कचनार इसकी सबसे बड़ी पहचान है – सिरे पर से काटा हुआ पत्ता । इसकी शाखा की छाल ले। तने की न ले। उस शाखा (टहनी) की छाल ले जो 1 इंच से 2 इंच तक मोटी हो । बहुत पतली या मोटी टहनी की छाल न ले।
    • गोरखमुंडी का पौधा आसानी से नहीं मिलता इसलिए इसे जड़ी बूटी बेचने वाले से खरीदे ।

    ➡ कैसे प्रयोग करे :

    • कचनार की ताजी छाल 25-30 ग्राम (सुखी छाल 15 ग्राम ) को मोटा मोटा कूट ले। 1 गिलास पानी मे उबाले। जब 2 मिनट उबल जाए तब इसमे 1 चम्मच गोरखमुंडी (मोटी कुटी या पीसी हुई ) डाले। इसे 1 मिनट तक उबलने दे। छान ले। हल्का गरम रह जाए तब पी ले। ध्यान दे यह कड़वा है परंतु चमत्कारी है। गांठ कैसी ही हो, प्रोस्टेट बढ़ी हुई हो, जांघ के पास की गांठ हो, काँख की गांठ हो गले के बाहर की गांठ हो , गर्भाशय की गांठ हो, स्त्री पुरुष के स्तनो मे गांठ हो या टॉन्सिल हो, गले मे थायराइड ग्लैण्ड बढ़ गई हो (Goiter) या LIPOMA (फैट की गांठ ) हो लाभ जरूर करती है। कभी भी असफल नहीं होती। अधिक लाभ के लिए दिन मे 2 बार ले। लंबे समय तक लेने से ही लाभ होगा। 20-25 दिन तक कोई लाभ नहीं होगा निराश होकर बीच मे न छोड़े।
    • गाँठ को घोलने में कचनार पेड़ की छाल बहुत अच्छा काम करती है. आयुर्वेद में कांचनार गुग्गुल इसी मक़सद के लिये दी जाती है जबकि ऐलोपैथी में ओप्रेशन के सिवाय कोई और चारा नहीं है।
    • आकड़े के दूध में मिट्टी भिगोकर लेप करने से तथा निर्गुण्डी के 20 से 50 मि.ली. काढ़े में 1 से 5 मि.ली अरण्डी का तेल डालकर पीने से लाभ होता है।
    • गेहूँ के आटे में पापड़खार तथा पानी डालकर पुल्टिस बनाकर लगाने से न पकने वाली गाँठ पककर फूट जाती है तथा दर्द कम हो जाता है।

    ➡ फोड़े फुन्सी होने पर :

    • अरण्डी के बीजों की गिरी को पीसकर उसकी पुल्टिस बाँधने से अथवा आम की गुठली या नीम या अनार के पत्तों को पानी में पीसकर लगाने से फोड़े-फुन्सी में लाभ होता है।
    • एक चुटकी कालेजीरे को मक्खन के साथ निगलने से या 1 से 3 ग्राम त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से तथा त्रिफला के पानी से घाव धोने से लाभ होता है।
    • सुहागे को पीसकर लगाने से रक्त बहना तुरंत बंद होता है तथा घाव शीघ्र भरता है।

    ➡ फोड़े से मवाद बहने पर :

    • अरण्डी के तेल में आम के पत्तों की राख मिलाकर लगाने से लाभ होता है।
    • थूहर के पत्तों पर अरण्डी का तेल लगाकर गर्म करके फोड़े पर उल्टा लगायें। इससे सब मवाद निकल जायेगा। घाव को भरने के लिए दो-तीन दिन सीधा लगायें।
    • पीठ का फोड़ा होने पर गेहूँ के आटे में नमक तथा पानी डालकर गर्म करके पुल्टिस बनाकर लगाने से फोड़ा पककर फूट जाता है।

    ➡ गण्डमाला की गाँठें (Goitre) :

    गले में दूषित हुआ वात, कफ और मेद गले के पीछे की नसों में रहकर क्रम से धीरे-धीरे अपने-अपने लक्षणों से युक्त ऐसी गाँठें उत्पन्न करते हैं जिन्हें गण्डमाला कहा जाता है। मेद और कफ से बगल, कन्धे, गर्दन, गले एवं जाँघों के मूल में छोटे-छोटे बेर जैसी अथवा बड़े बेर जैसी बहुत-सी गाँठें जो बहुत दिनों में धीरे-धीरे पकती हैं उन गाँठों की हारमाला को गंडमाला कहते हैं और ऐसी गाँठें कंठ पर होने से कंठमाला कही जाती है।

    • क्रौंच के बीज को घिस कर दो तीन बार लेप करने तथा गोरखमुण्डी के पत्तों का आठ-आठ तोला रस रोज पीने से गण्डमाला (कंठमाला) में लाभ होता है। तथा कफवर्धक पदार्थ न खायें।

    ➡ काँखफोड़ा (बगल मे होने वाला फोड़ा) :

    • कुचले को पानी में बारीक पीसकर थोड़ा गर्म करके उसका लेप करने से या अरण्डी का तेल लगाने से या गुड़, गुग्गल और राई का चूर्ण समान मात्रा में लेकर, पीसकर, थोड़ा पानी मिलाकर, गर्म करके लगाने से काँखफोड़े में लाभ होता है।
  • एक महिला ने “अल-बगदादी” नामक एक कपड़ाˈ व्यापारी से शादी की, जो कंजूस था। एक दिन उसने एक मुर्गी खरीदी और अपनी पत्नी से उसे पकाने को कहा। जब वे खाना खा रहे थे तो उन्होंने दरवाजे पर दस्तक सुनी। पति ने दरवाजा खोला और देखा कि एक गरीब आदमी कुछ खाना मांग रहा है। उसने उसे कुछˌ

    एक महिला ने “अल-बगदादी” नामक एक कपड़ाˈ व्यापारी से शादी की, जो कंजूस था। एक दिन उसने एक मुर्गी खरीदी और अपनी पत्नी से उसे पकाने को कहा। जब वे खाना खा रहे थे तो उन्होंने दरवाजे पर दस्तक सुनी। पति ने दरवाजा खोला और देखा कि एक गरीब आदमी कुछ खाना मांग रहा है। उसने उसे कुछˌ

    एक महिला ने “अल-बगदादी” नामक एक कपड़ाˈ व्यापारी से शादी की, जो कंजूस था। एक दिन उसने एक मुर्गी खरीदी और अपनी पत्नी से उसे पकाने को कहा। जब वे खाना खा रहे थे तो उन्होंने दरवाजे पर दस्तक सुनी। पति ने दरवाजा खोला और देखा कि एक गरीब आदमी कुछ खाना मांग रहा है। उसने उसे कुछˌ

    एक महिला ने “अल-बगदादी” नामक एक कपड़ा व्यापारी से शादी की, जो कंजूस था। एक दिन उसने एक मुर्गी खरीदी और अपनी पत्नी से उसे पकाने को कहा। जब वे खाना खा रहे थे तो उन्होंने दरवाजे पर दस्तक सुनी। पति ने दरवाजा खोला और देखा कि एक गरीब आदमी कुछ खाना मांग रहा है। उसने उसे कुछ भी देने से इनकार कर दिया, उससे कठोरता से बात की और उसे भगा दिया, तथा उसके सामने दरवाजा बंद कर दिया

    उनकी पत्नी, जिसका नाम “खौला” था, ने उनसे पूछा, “आपने इस भिखारी के सामने दरवाजा इस तरह क्यों बंद कर दिया?”

    पति ने गुस्से से जवाब दिया, “तुम मुझसे क्या करवाना चाहती थी?”

    उसने जवाब दिया, “आप उसे चिकन का एक टुकड़ा दे सकते थे या उससे कुछ अच्छी बातें कह सकते थे!”

    अल-बगदादी ने अपना चिकन खाया और अपनी दुकान पर चला गया, जहां उसे पता चला कि आग ने उसका व्यवसाय नष्ट कर दिया है। वह निराश होकर घर लौटा और अपनी पत्नी से कहा, “दुकान जलकर राख हो गई। मेरे पास कुछ भी नहीं बचा।”

    उसने उससे कहा: “परमेश्वर की दया से निराश मत हो।”

    उसने उससे कहा कि वह अपने पिता के पास लौट जाए, क्योंकि अब वह उसका भरण-पोषण नहीं कर सकता। अंततः उसने तलाक के लिए अर्जी दायर कर दी और वे अलग हो गये। दो साल बाद, खावला ने “मैथम अल-कुफी” नामक एक व्यक्ति से दोबारा शादी कर ली, जो अपनी उदारता और दयालुता के लिए जाना जाता था।

    एक दिन, जब वे दोनों साथ में खाना खा रहे थे, दरवाजे पर दस्तक हुई। खावला यह देखने गई कि वह कौन है और अपने पति से यह कहते हुए वापस आई, “वहां एक भिखारी है जो भूख से शिकायत कर रहा है।” उसके पति ने जवाब दिया, “उसे इन दो मुर्गियों में से एक दे दो; हमारे लिए एक ही काफी है। जो भी हमारे पास आएगा हम उसे निराश नहीं करेंगे।”

    खौला ने मुर्गी को भिखारी को देने के लिए ले लिया, फिर अपने पति के पास लौट आई, उसकी आंखें आंसुओं से भरी हुई थीं। उसने उससे पूछा, “तुम क्यों रो रही हो?”

    उसने जवाब दिया: “मैं इसलिए रो रही हूँ क्योंकि वह भिखारी अल-बगदादी है, मेरा पहला पति!”

    उसने उससे कहा: “यदि वह भिखारी जिसने हमारे दरवाजे पर दस्तक दी, तुम्हारा पहला पति है, तो जान लो कि मैं पहला भिखारी था जिसने तुम्हारे दरवाजे पर दस्तक दी थी जब तुम उसकी पत्नी थी।”

    जीवन चलता रहता है… जितना हो सके अच्छा करो

  • महिलाओं को भी नहीं पता पुरुषों केˈ सीमन में छुपे हैं कितने रहस्यमय फायदे. वेज्ञानिको ने किया शॉकिंग खुलासा

    महिलाओं को भी नहीं पता पुरुषों केˈ सीमन में छुपे हैं कितने रहस्यमय फायदे. वेज्ञानिको ने किया शॉकिंग खुलासा

    महिलाओं को भी नहीं पता पुरुषों केˈ सीमन में छुपे हैं कितने रहस्यमय फायदे. वेज्ञानिको ने किया शॉकिंग खुलासा

    आज के समय में हेल्थ और शरीर से जुड़ी कई ऐसी बातें सामने आ रही हैं, जिन पर पहले खुलकर चर्चा नहीं होती थी। उन्हीं में से एक विषय है पुरुषों का सीमन, जिसे आमतौर पर सिर्फ प्रजनन से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन हाल के कुछ शोध और चर्चाएं यह संकेत देती हैं कि इसकी भूमिका केवल प्रजनन तक सीमित नहीं हो सकती। यही कारण है कि यह विषय अब वैज्ञानिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का केंद्र बनता जा रहा है।

    सीमन एक जटिल जैविक द्रव होता है, जिसमें केवल शुक्राणु ही नहीं बल्कि कई प्रकार के प्रोटीन, एंजाइम, विटामिन और मिनरल्स भी मौजूद होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही तत्व इसे खास बनाते हैं और शरीर में अलग-अलग प्रक्रियाओं से जुड़ सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इससे जुड़े हर दावे को सच मान लिया जाए, बल्कि इसे समझने के लिए संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है।

    हमारे समाज में इस विषय को लेकर आज भी झिझक और भ्रम देखने को मिलता है। ज्यादातर लोग इस पर बात करने से बचते हैं, जिसके कारण सही जानकारी लोगों तक पहुंच ही नहीं पाती। नतीजा यह होता है कि आधी-अधूरी बातें तेजी से फैलती हैं और लोग बिना पूरी जानकारी के निष्कर्ष निकाल लेते हैं। जागरूकता की कमी इस विषय को और ज्यादा संवेदनशील बना देती है।

    अगर इसके तत्वों की बात करें तो इसमें जिंक, सेलेनियम, विटामिन्स और कुछ अन्य बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं, जो सामान्य रूप से शरीर के लिए उपयोगी माने जाते हैं। यही वजह है कि कुछ शोधों में यह देखने की कोशिश की गई है कि क्या इन तत्वों का कोई व्यापक प्रभाव भी हो सकता है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि इन तत्वों की मौजूदगी का मतलब यह नहीं कि हर दावा पूरी तरह प्रमाणित है।

    हाल के वर्षों में कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे दावे भी सामने आए हैं, जिनमें इसे त्वचा से जोड़कर देखा गया है। कहा गया कि इसमें मौजूद कुछ तत्व त्वचा की नमी बनाए रखने में भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, इस तरह के दावों को लेकर विशेषज्ञ काफी सतर्क रहने की सलाह देते हैं और बिना चिकित्सकीय सलाह किसी भी प्रयोग से बचने को कहते हैं।

    मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी कुछ शोधों में यह बात सामने आई है कि शरीर के कुछ हार्मोन और केमिकल्स मूड पर असर डाल सकते हैं। इसी आधार पर कुछ चर्चाएं इस दिशा में भी हुई हैं, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय अभी तक इस विषय पर पूरी तरह एकमत नहीं है। इसलिए इसे अंतिम सत्य मानना सही नहीं होगा।

    डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स का साफ कहना है कि इस तरह के विषयों को लेकर लोगों को जागरूक होना चाहिए, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक प्रमाण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य को ध्यान में रखना जरूरी है। हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए एक ही चीज का प्रभाव सभी पर समान हो, यह जरूरी नहीं है।

    अंत में यही कहा जा सकता है कि यह विषय जितना दिलचस्प है, उतना ही संवेदनशील भी है। इससे जुड़े कई पहलुओं पर अभी भी शोध जारी है और आने वाले समय में और स्पष्ट जानकारी सामने आ सकती है। तब तक सबसे जरूरी है कि लोग सही जानकारी लें, अफवाहों से बचें और किसी भी तरह के प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

  • चलती ट्रेन से मोबाईल गिर जाए तोˈ ऐसे आसानी से मिल जाएगा, बस फॉलो करनी होगी ये स्टेप्सˌ

    चलती ट्रेन से मोबाईल गिर जाए तोˈ ऐसे आसानी से मिल जाएगा, बस फॉलो करनी होगी ये स्टेप्सˌ

    भारतीय रेलवे को देश के यातायात सिस्टम की धड़कन भी कहा जाता है। अधिकतर लोग रेल से ही सफर करना पसंद करते हैं। इससे सफर करना न सिर्फ किफायती होता है बल्कि सुविधाजनक भी होता है। नींद आने पर आप स्लीपर पर सो सकते हैं, बाथरूम आने पर ट्रेन में ही बने शौचालय का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा ट्रेन की खिड़की के नजदीक बैठ सफर करने का आनंद ही कुछ और होता है। इस दौरान कई अच्छे-अच्छे नजारे दिखते हैं। कई लोग खिड़की से ठंडी हवा के झोंके खाते हुए गाना सुनना भी पसंद करते हैं। वे कान में एयरफोन लगा गाने सुनते हैं।

    अब जरा सोचिए क्या होगा यदि चलती ट्रेन में आपका मोबाईल फोन खिड़की से बाहर गिर जाए? ऐसा होने पर आपको यही लगेगा कि ‘लग गया हजारों का चुना। अब फोन मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।’ लेकिन ऐसा नहीं है। आपको अभी भी आपका मोबाईल मिल सकता है। बस आपको एक खास प्रक्रिया को फॉलो करना होगा।

    चलती ट्रेन से मोबाईल गिर जाए तो ध्यान रखें ये बातें

    चलती ट्रेन से मोबाईल गिर जाए तोˈ ऐसे आसानी से मिल जाएगा, बस फॉलो करनी होगी ये स्टेप्सˌ

    1. यदि आपका मोबाईल चलती ट्रेन से गिर जाए तो सबसे पहले घबराइए नहीं। आपको सबसे पहले रेलवे ट्रैक के किनारे लगे हुए पोल पर लिखे नंबर या फिर साइड ट्रैक के नंबर को खोजना होगा। ये रेलवे ट्रेक पर कुछ-कुछ दूरियों पर लगे होते हैं। आपको बस इन पर लिखे नंबर को याद रखना है। यदि आप याद न रख सकें तो इसे कहीं नोट भी कर सकते हैं।

    2. अब आप ट्रेन में बैठे किसी अन्य यात्री का मोबाईल उधार लें और उससे RPF के हेल्पलाइन नंबर 182 पर कॉल करें। आपको उन्हें अपने मोबाईल के ट्रेन से गिरने की सूचना देनी है। इस दौरान आप उन्हें याद से पोल या ट्रैक नंबर बता दें। इससे उन्हें सही लोकैशन पर मोबाईल खोजने में मदद मिलेगी।

    3. आपकी शिकायत मिलते ही RPF हेल्पलाइन नंबर की टीम जहां मोबाईल गिरा है उस क्षेत्र की रेलवे पुलिस से संपर्क करेगी। फिर वह पुलिस आपके खोए हुए मोबाईल की तलाश शुरू कर देगी। यदि उन्हें फोन मिलता है तो भारतीय रेलवे आपसे संपर्क करेगा।

    4. इसके अलावा आप इस मामले की जानकारी GRP के हेल्पलाइन नंबर 1512 पर कॉल कर भी दे सकते हैं। वहीं रेलवे के हेल्पलाइन नंबर 138 पर कॉल कर के भी सहायता मांगी जा सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हेल्पलाइन नंबर 138 का इस्तेमाल आप यात्रा में आने वाली किसी भी परेशानी में कर सकते हैं। इस नंबर से आपको मदद मिल जाएगी। ट्रेन में कोई इमरजेंसी होने या कोई दुर्घटना होने पर भी इस नंबर पर कॉल कर मदद मँगवाई जा सकती है।

    उम्मीद करते हैं कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। यदि हाँ तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि बाकी लोग भी रेल सफर में मुसीबत में पड़ने के दौरान मदद प्राप्त कर सके।