Author: me.sumitji@gmail.com

  • सिर्फ 5 मिनट में नींद आयेगी वोˈ भी बिना दवाँ के बस अपनी कलाई के इस बिंदु को दबाएँ और फिर देखे कमाल जरूर पढ़े और शेयर करेˌ

    सिर्फ 5 मिनट में नींद आयेगी वोˈ भी बिना दवाँ के बस अपनी कलाई के इस बिंदु को दबाएँ और फिर देखे कमाल जरूर पढ़े और शेयर करेˌ

    सिर्फ 5 मिनट में नींद आयेगी वोˈ भी बिना दवाँ के बस अपनी कलाई के इस बिंदु को दबाएँ और फिर देखे कमाल जरूर पढ़े और शेयर करेˌ

    अनिद्रा या नींद न आना :

    रात में नींद न आना अथवा रात को देर तक जगे रहने को अनिद्रा कहते हैं।

    कारण–

    अनिद्रा रोग का खास कारण चिंता को माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति अति उत्तेजित है,अवसाद जैसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त है, कैफीन जैसे उत्तेजक पदार्थ लेता है, गंदे वातावतण में रहता है, ज्यादा मेहनत करता है, बासी और गरिष्ठ भोजन का सेवन करता है, धूम्रपान करता है, नींद की गोलियां लेता है, नशा ज्यादा करता है, तो उसे अनिद्रा का रोग हो सकता है। अनिद्रा रोग का एक कारण स्नायु-संस्थान की गड़बड़ी होना भी हो सकता है।

    लक्षण–

    आंखों का लाल होना, आंखों में नींद भरी होना, किसी भी काम में मन न लगना आदि अनिद्रा रोग के लक्षण होते हैं।

    उपचार–

    अनिद्रा रोग को दूर करने के लिए सबसे पहले रोगी को अपनी नींद को पूरा करना चाहिए। रोगी को रात को जल्दी एक्यूप्रेशर चिकित्सा से उपचार करने के लिए हाथ की कलाई के पास तथा कंधे से छाती के पास के प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर प्रेशर देसो जाना चाहिए, सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करना चाहिए, हरी घास पर नंगे पांव चलना चाहिए, हल्के गुनगुने पानी से नहाना चाहिए, मन-मस्तिष्क को शांत रखना चाहिए। रोगी के स्नायु-संस्थान और पाचनतंत्र से सम्बन्धित केन्द्र बिन्दुओं पर प्रेशर देना चाहिए। अगर अनिद्रा रोग का कारण मनोवैज्ञानिक हो तो किसी अच्छे मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।

    एक्यूप्रेशर चिकित्सा से उपचार करने के लिए हाथ की कलाई के पास तथा कंधे से छाती के पास के प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर प्रेशर देने से तथा पैरों पर टखने से ऊपर और टखने के पास के प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर प्रेशर देने से रोगी का अनिद्रा रोग धीरे-धीरे कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। प्रेशर रोगी की सहनशक्ति के अनुसार प्रतिदिन कुछ सेकेण्ड के लिए देना चाहिए।

    रोगी की दोनों भौंहों के बीच के प्रतिबिम्ब बिन्दु तथा रोगी के हाथ की कलाई के पास और अंगूठे से नीचे की ओर के प्रतिबिम्ब बिन्दु पर 2-3 मिनट के लिए प्रतिदिन प्रेशर देने से रोगी का अनिद्रा रोग कुछ ही दिनो में ठीक हो जाता है।

    अनिद्रा रोग का खास कारण चिंता को माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति अति उत्तेजित है, अवसाद जैसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त है, अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा मस्तिष्क, पाचनतंत्र तथा स्नायुसंस्थान से सम्बन्धित प्रतिबिम्ब बिन्दुओं पर कुछ दिनों तक प्रतिदिन कुछ मिनट के लिए 3 बार प्रेशर देने से अनिद्रा रोग ठीक हो जाता है। इसके अलावा चित्र में दिए गए प्रतिबिम्ब बिन्दुओं (जो कि पीठ की रीढ़ के हड्डी के दोनों तरफ हैं), पर नियमित रूप से रोजाना प्रेशर देने पर कुछ ही दिनों में अनिद्रा रोग ठीक हो जाता है। इस प्रकार प्रेशर देने से स्नायु-संस्थान के कार्य में सुधार हो जाता है जिसके फलस्वरूप अनिद्रा रोग दूर हो जाता है।

    अनिद्रा रोग का खास कारण चिंता को माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति अति उत्तेजित है, अवसाद जैसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त है, रात को सोने से पहले हाथ-पैरों के अंगूठे तथा अंगुलियों पर प्रेशर देने से नींद अच्छी आती है। इसके अलावा दाएं हाथ की अंगुलियों और बाएं हाथ की अंगुलियों को आपस में जोड़कर (जैसा कि चित्र में दिया गया है ठीक उसी प्रकार करके) प्रेशर देने से अनिद्रा रोग दूर हो जाता है। इस प्रकार चिकित्सा करने से तनाव दूर होता है जिसके फलस्वरूप नींद अच्छी आती है।

    दोनों हाथों की कलाई के पास अनिद्रा को दूर करने के लिए जो प्रतिबिम्ब बिन्दु होता है (जैसा कि चित्र में दे रखा है) उस पर प्रेशर देने से अनिद्रा रोग दूर हो जाता है।

    अनिद्रा रोग का खास कारण चिंता को माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति अति उत्तेजित है, अवसाद जैसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त है, अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए एक्यूप्रेशर चिकित्सा से उपचार करने के साथ-साथ कोशिश करनी चाहिए कि रात के समय में जल्दी सो जाएं तथा सुबह के समय में जल्दी उठ जाएं। नींद लाने वाली गोली का सेवन न करें क्योंकि यदि नींद की गोली लेने की आदत पड़ गई तो इसका काफी गंभीर नतीजा हो सकता है। भोजन में मिर्च-मसाला कम कर देना चाहिए तथा शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • ट्रैक्टर नहीं तो क्या हुआ? किसान नेˈ बुलेट को ही बना लिया खेती का साथी जुगाड़ देख आप भी कहेंगे वाह रे देसी दिमागˌ

    ट्रैक्टर नहीं तो क्या हुआ? किसान नेˈ बुलेट को ही बना लिया खेती का साथी जुगाड़ देख आप भी कहेंगे वाह रे देसी दिमागˌ

    ट्रैक्टर नहीं तो क्या हुआ? किसान नेˈ बुलेट को ही बना लिया खेती का साथी जुगाड़ देख आप भी कहेंगे वाह रे देसी दिमागˌ

    जब भी बात जुगाड़ की होती है तो हम भारतीय हमेशा से आगे होते हैं। जुगाड़ हमारे खून में होती है। जरूरत के हिसाब से हम एक से बढ़कर एक जुगाड़ बनाते रहते हैं। अब महाराष्ट्र के लातूर के रहने वाले किसान मकबूल शेख को ही ले लीजिए। इनके पास खेती करने के लिए ट्रैक्टर खरीदने के पैसे नहीं थे। ऐसे में इन्होंने बुलेट बाइक को ही ट्रैक्टर में बदल दिया। अब उनकी जुगाड़ इतनी फेमस हो गई कि दूर दूर से किसान उनके पास बुलेट ट्रैक्टर बनवाने आ रहे हैं।

    दरअसल लातूर निवासी मकबूल शेख एक किसान होने के साथ साथ एक ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट भी हैं। गाँव में जब भी किसी की गाड़ी खराब हो जाती है तो वे फटाक से उसे ठीक कर देते हैं। यही वजह है कि वे एक ऐसा सस्ता ट्रैक्टर बनाने में कामयाब रहे जिससे की गरीब किसानों को फायदा हो सकता है।

    मकबूल बताते हैं कि मार्केट में एक ट्रैक्टर की कीमत 9 से 10 लाख के आसपास होती है। एक गरीब या मिडिल क्लास किसान इसे खरीद खेती नहीं कर सकता है। वे खुद भी इस परेशानी से गुजर चुके हैं। इसलिए उन्हें बुलेट ट्रैक्टर का आइडिया आया। बुलेट ट्रैक्टर आम ट्रैक्टर की तुलना में काफी सस्ते होते हैं। इसके लिए किसानों को डेढ़ लाख के आसपास ही खर्च करने पड़ते हैं।

    इस सस्ते बुलेट ट्रैक्टर से खेती बहुत आसान हो जाती है। इसकी मदद से किसान खेतों की जुताई, फसल की बुनाई और केमिकल्स का छिड़काव जैसी चीजें कर सकता है। मकबूल अभी तक लगभग 140 बुलेट ट्रैक्टर बनाकर डिलीवर कर चुके हैं।

    मकबूल को बुलेट ट्रैक्टर का आइडिया 2016 में आया था। उन्होंने इस पर करीब दो साल काम किया। पहले इसे बनाने में की दिक्कतें आई। बुलेट ट्रैक्टर कई बार बीच में बंद पड़ जाता था। हालांकि मकबूल ने हार नहीं मानी और इसकी सभी कमियों को दूर कर दिया।

    इस बुलेट ट्रैक्टर में 10 होर्स पॉवर का इंजन लगा होता है। मकबूल को दूर दूर से किसान आकर इस तरह के बुलेट ट्रैक्टर बनाने का ऑर्डर दे जाते हैं। उनके इस आइडिया के चलते आज कई गरीब किसान काम पैसे खर्च कर खेती कर पा रहे हैं।

    मकबूल जैसे जुगाड़ू लोगों कि बदौलत ही आज भारत दिन दुगुनी और रात चौगुनी तरक्की कर रहा है। वैसे आप लोगों को इस इस बुलेट ट्रैक्टर का आइडिया कैसा लगा? अपनी राय हमे कमेन्ट सेक्शन में जरूर दें। क्या आप भी सामान्य ट्रैक्टर की बजाय इस बुलेट ट्रैक्टर को चुनना पसंद करेंगे?

  • शारीरिक सम्बन्ध के दौरान इन वजह सेˈ नाराज हो जाती है लड़कियां. जानिए वो गलतियां जो अक्सर महिलाओं को कर देती हैं नाराज़ˌ

    शारीरिक सम्बन्ध के दौरान इन वजह सेˈ नाराज हो जाती है लड़कियां. जानिए वो गलतियां जो अक्सर महिलाओं को कर देती हैं नाराज़ˌ

    शारीरिक सम्बन्ध के दौरान इन वजह सेˈ नाराज हो जाती है लड़कियां. जानिए वो गलतियां जो अक्सर महिलाओं को कर देती हैं नाराज़ˌ

    सेक्स के दौरान अक्सर लड़के करते हैं ये गलतियां और कर देत हैं गर्लफ्रेंड को नाराज। जी हां वैसे तो हर रिश्ता प्यार से शुरू होता है लेकिन उस रिश्ते को उसी रूप में बनाए रखने के लिए जरूरी है कि दोनों ओर से कोशिशें होती रहें। रिश्ता चाहे जो भी हो यदि उसे सहेजकर ना रखा जाए तो फिर रिश्ते को बिखरने में देर नहीं लगती। चाहे फिर वह रिश्ता कितना ही पुराना क्यों ना हो।

    गर्लफ्रेंड के नाराज होने के कारण:

    # जब दो लोग आपस में मिलते हैं तो दोनों के बीच कई बातों पर असहमति भी होती है और कई बार तो उन्हें एक-दूसरे के व्यवहार पर गुस्सा भी आता है लेकिन साथ रहते-रहते ये आदतें खुद ही बदल जाती हैं।

    # ज्यादातर लड़कियों को शिकायत होती है कि लड़के अपनी बात बताते वक्त उनसे पूरे ध्यान की उम्मीद करते हैं लेकिन जब वो कुछ कहती हैं तो वे ध्यान ही नहीं देते हैं।

    # अगर आप भी उन पुरुषों में से हैं जो घर से जुड़े सारे फैसले अकेले लेते हैं, लड़कियां ऐसे लड़कों को पसंद नहीं करती हैं। लड़कियों को लगता है कि उनका पार्टनर उन्हें कमतर आंकता है और खुद को ही सर्वश्रेष्ठ मानता है।

    # ये समस्या लगभग हर लड़की को होती है। उसे लगता है कि उसका ब्वॉयफ्रेंड उसकी तारीफ नहीं करता है और न ही उसे महत्व देता है। हर लड़की उम्मीद करती है कि उसका पार्टनर सबके सामने उसकी तारीफ करे।

    # ज्यादातर पुरुष अंतरंग संबंधों के तुरंत बाद सो जाते हैं। लड़कियों को लड़कों की ये आदत बहुत बुरी लगती है। उन्हें उम्मीद होती है कि उनका पार्टनर उनके साथ कुछ देर तक प्यार भरी बातें भी करें।

  • पीटीएम में क्या पूछना चाहिए? पैरेंटिंग एक्सपर्टˈ ने कहा PTM में टीचर से जरूर पूछें ये 7 सवालˌ

    पीटीएम में क्या पूछना चाहिए? पैरेंटिंग एक्सपर्टˈ ने कहा PTM में टीचर से जरूर पूछें ये 7 सवालˌ

    पीटीएम में क्या पूछना चाहिए? पैरेंटिंग एक्सपर्टˈ ने कहा PTM में टीचर से जरूर पूछें ये 7 सवालˌ

    Parenting Tips: साल में 2 से 3 बार पैरेंट टीचर मीटिंग जरूर होती है, कई स्कूलों में हर महीने यह मीटिंग रखी जाती है. पैरेंट टीचर मीटिंग (Parent Teacher Meeting) यानी PTM का मकसद होता है बच्चे के माता-पिता और टीचर के बीच के संवाद को बेहतर करना.

    इस मीटिंग में पैरेंट्स बच्चे की परफॉर्मेंस और ग्रोथ को बेहतर तरह से समझ पाते हैं, इसका जायजा ले पाते हैं और जान पाते हैं कि बच्चे का व्यवहार उसके टीचर्स और स्कूल के दोस्तों के बीच कैसा है. वहीं, टीचर्स बच्चे की परफॉर्मेंस में क्या अच्छा है या क्या कमी है इस बारे में पैरेंट्स (Parents) को बता पाते हैं और बच्चे की परफॉर्मेंस सुधारने के लिए कह पाते हैं. लेकिन, पैरेंट्स को बच्चे के टीचर से मिलते हुए एकदम क्लूलेस होकर नहीं जाना चाहिए बल्कि सही प्रश्न पूछने चाहिए जिससे उन्हें बच्चे की ऑवरओल ग्रोथ के बारे में सही तरह से पता चल सके.

    बच्चे के PTM में कौनसे सवाल करने चाहिए | Questions Parents Should Ask In PTM

    पैरेंटिंग एक्सपर्ट विभा शर्मा अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अक्सर ही ऐसे टिप्स शेयर करती रहती हैं जो पैरेंट्स के लिए बेहद काम के साबित होते हैं. अपने ऐसे ही एक वीडियो में पैरेंटिंग एक्सपर्ट ने ऐसे 7 सवाल बताए हैं जो बच्चे के माता-पिता को उसके टीचर्स से जरूर पूछने चाहिए.

    पहला सवाल – क्या मेरा बच्चा क्लास में ध्यान से सुनता है और एक्टिवली पार्टिसिपेट करता है?

    दूसरा सवाल – मेरे बच्चे के कौन-कौनसे सब्जेक्ट स्ट्रॉन्ग (Strong Subject) हैं और किस सब्जेक्ट में इम्प्रूवमेंट चाहिए?

    तीसरा सवाल – मेरे बच्चे का क्लास में बिहेवियर कैसा है? क्या वह दूसरे बच्चों की हेल्प करता है या नहीं?

    चौथा सवाल – मेरा बच्चा कौनसी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में इंट्रेस्ट लेता है?

    पांचवा सवाल – क्या बच्चा क्लास में अपने सामान का ध्यान रख पाता है या नहीं?

    छठा सवाल – हम पैरेंट्स उसकी अकेडमिक ग्रोथ में कैसे हेल्प करें?

    सातवां सवाल – मेरे बच्चे के बारे में कोई ऐसी बात है जिसे मुझे जानना बहुत जरूरी है?

    PTM में सवाल करना क्यों जरूरी है?

    1. बच्चे की स्ट्रेंथ और वीकनेस का पता चलता है जिससे उसकी कमियों को सुधारा जा सके और स्ट्रेंथ को निखारा जा सके.,
    2. बच्चे के व्यवहार के बारे में पैरेंट्स को बेहतर तरह से समझ आता है. टीचर को भी जानने का मौका मिलता है कि घर पर बच्चा कैसा व्यवहार करता है.
    3. बच्चे की प्रोग्रेस के बारे में पता चलता है. उसकी पोटेंशल समझने में मदद मिलती है.
    4. लर्निंग मेथड्स (Learning Methods) के बारे में बात की जा सकती है जिससे पैरेंट्स को बच्चे को घर पर पढ़ाने में मदद मिलती है.
    5. बच्चा किस एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में अच्छा है पैरैंट्स को इसकी जानकारी हो जाती है या फिर पैरेंट्स इस बारे में टीचर को बता पाते हैं.
  • ये हैं देश के सबसे बड़े वकील!ˈ एक-एक सुनवाई की फीस भरने में बिक जाते हैं घर-द्वार। जानिए हैरान करने वाले कुछ नामˌ

    ये हैं देश के सबसे बड़े वकील!ˈ एक-एक सुनवाई की फीस भरने में बिक जाते हैं घर-द्वार। जानिए हैरान करने वाले कुछ नामˌ

    ये हैं देश के सबसे बड़े वकील!ˈ एक-एक सुनवाई की फीस भरने में बिक जाते हैं घर-द्वार। जानिए हैरान करने वाले कुछ नामˌ

    Best and Top Paid Lawyers in India: कहते हैं कि न्याय की राह के रक्षक हैं वकील, सच और कानून का रखते हैं दिल से साथ इतना ही नहीं बल्कि हर मुद्दे को तर्क से सुलझाते हैं और इंसाफ की उम्मीद उन्हीं से जगाते हैं।

    खबर है कानून और न्याय के बीच की कड़ी वकीलों पर। न्यूजट्रैक की इस रिपोर्ट में पढ़िए कि देश के वकीलों यानी लॉयर्स की टॉप लिस्ट में कौन-कौन से नाम शामिल हैं? इनकी फीस इतनी है कि एक-दो सुनवाई की कमाई मात्र से एक सामान्य इंसान के घर और गाड़ी का सपना पूरा हो जाए। पढ़ें पूरी रिपोर्ट-

    हरीश साल्वे: कानूनी विरासत और चमकदार करियर की कहानी

    भारत के प्रतिष्ठित वकीलों में शुमार हरीश साल्वे न सिर्फ देश में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी कानूनी प्रतिभा के लिए पहचाने जाते हैं। उनका जन्म 22 जून 1955 को एक मराठी परिवार में हुआ था, जहां कानून की समझ और सेवा भावना उन्हें विरासत में मिली। उनके पिता एन.के.पी. साल्वे पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट थे, जो बाद में कांग्रेस पार्टी में एक प्रमुख नेता बने। उनकी मां अम्ब्रिति साल्वे डॉक्टर थीं। दिलचस्प बात यह है कि उनके दादा पी.के. साल्वे एक प्रसिद्ध आपराधिक वकील रहे हैं, जबकि उनके परदादा एक न्यायिक अधिकारी (मुंसिफ) थे। यह कहना गलत नहीं होगा कि कानून साल्वे के खून में था और उन्होंने इस पारिवारिक परंपरा को बखूबी आगे बढ़ाया।

    हरीश साल्वे ने अपने करियर की शुरुआत वरिष्ठ वकीलों की सहायता करते हुए की, जिनमें नानी पाल्खीवाला और पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी जैसे कानूनी जगत के दिग्गज शामिल हैं। उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, जिनमें कुलभूषण जाधव केस प्रमुख है। इसके अलावा उन्होंने कई भारतीय बैंकों, कॉर्पोरेट्स और डिफॉल्टर्स के पक्ष में भी पैरवी की है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी अदालती लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।

    Harish Salve (Photo: Social Media)

    1999 से 2002 तक साल्वे ने भारत के सॉलिसिटर जनरल के रूप में भी सेवाएं दीं, और अपनी रणनीतिक सोच व कानूनी समझ से देश की न्याय व्यवस्था में अहम योगदान दिया। उनकी कमाई और संपत्ति हमेशा से चर्चा में रही है। इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल में एक मामले के दौरान उन्होंने 2010-11 में अपनी सालाना आय 35 करोड़ रुपये बताई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आज उनकी फीस हाई-प्रोफाइल केस में 35 लाख रुपये तक जाती है, जबकि एक दिन की कमाई 15-20 लाख रुपये तक मानी जाती है। अनुमान है कि उनकी कुल संपत्ति 200 से 250 करोड़ रुपये के बीच है। टाटा ग्रुप, रिलायंस इंडस्ट्रीज, और ITC जैसी देश की दिग्गज कंपनियां उन्हें अपना कानूनी सलाहकार मानती हैं।

    मुकुल रोहतगी: अदालतों के गलियारों में चार दशकों से गूंजता एक सशक्त नाम

    देश के कानूनी परिदृश्य में एक प्रभावशाली नाम मुकुल रोहतगी का है, जिनका जन्म 1955 में मुंबई में हुआ था। हालांकि उनकी स्कूली पढ़ाई मुंबई और दिल्ली-दोनों जगह हुई, लेकिन कानून की पढ़ाई उन्होंने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से पूरी की। दिलचस्प बात यह रही कि लॉ की डिग्री मुंबई से लेने के बावजूद उन्होंने वकालत की शुरुआत दिल्ली बार काउंसिल से पंजीकरण कराकर की। एक केस की फीस एक से दो करोड़ रुपए है।

    महज 38 साल की उम्र में 1993 में मुकुल रोहतगी दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट के रूप में नियुक्त किए गए, जो उनके तेज़ी से उभरते करियर की पहली बड़ी उपलब्धि थी। इसके बाद 1999 में वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में उन्हें एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बनाया गया। कानूनी क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और निष्पक्ष छवि के कारण उन्हें 2014 से 2017 तक भारत का अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया। खास बात यह रही कि 2017 के बाद उन्हें दोबारा इस पद के लिए प्रस्ताव दिया गया, जिसे उन्होंने विनम्रता से ठुकरा दिया।

    अपने करीब चार दशक लंबे करियर में रोहतगी ने कई हाई-प्रोफाइल मामलों में देश का प्रतिनिधित्व किया है। इनमें 2002 के गुजरात दंगे, और 2022 में अभिनेता शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान का ड्रग्स केस प्रमुख हैं। इसके अलावा उन्होंने कई कॉर्पोरेट मामलों में भी बड़ी कंपनियों की ओर से पैरवी की है। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज, फ्यूचर ग्रुप जैसे दिग्गज कॉर्पोरेट्स का प्रतिनिधित्व किया है। फ्यूचर ग्रुप केस में उनके सामने प्रतिद्वंद्वी के रूप में अमेज़ॉन जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनी थी। इसके अलावा, उन्होंने फेसबुक और व्हाट्सऐप का भी दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में बचाव किया है।

    Mukul Rohtagi (Photo: Social Media)

    पी. चिदंबरम: कोर्टरूम से संसद तक, वकील से देश के गृहमंत्री बनने का सफर

    भारत के वरिष्ठ अधिवक्ताओं में गिने जाने वाले पी. चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर देश के कई हाईकोर्टों में अपनी वकालत के दम पर एक मजबूत पहचान बनाई। लेकिन उनका करियर सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं रहा – उन्होंने कानूनी पेशे के साथ-साथ राजनीति की दुनिया में भी कदम रखा, और ट्रेड यूनियनों के कई अहम मुकदमों में पैरवी करते हुए एक राजनीतिक चेहरे के रूप में उभरना शुरू किया।

    राजनीति में उनकी सक्रिय भागीदारी की शुरुआत 1984 से मानी जाती है, जब उन्होंने तमिलनाडु की शिवगंगा लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर पहली बार संसद में प्रवेश किया। यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। बता दें कि इनकी फीस 10-12 लाख रुपए प्रति सुनवाई है।

    इसके बाद चिदंबरम का कद लगातार बढ़ता गया। कांग्रेस पार्टी के प्रमुख चेहरों में शुमार होते हुए, उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार में वित्तमंत्री और बाद में गृहमंत्री जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। आज भी पी. चिदंबरम को एक ऐसे नेता और वकील के रूप में देखा जाता है जिन्होंने कानून, प्रशासन और राजनीति – तीनों क्षेत्रों में अपनी गहरी समझ और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है।

    P Chidambram (Photo: Social Media)

    अभिषेक मनु सिंघवी: राज्यसभा सांसद और मशहूर वकील, फीस और नेटवर्थ के मामले में भी टॉप पर

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के नामचीन वकील अभिषेक मनु सिंघवी इन दिनों तेलंगाना से 2024-26 के लिए राज्यसभा सांसद हैं। राजनीति के साथ-साथ कानून के क्षेत्र में भी उनका योगदान शानदार रहा है। जोधपुर (राजस्थान) में 24 फरवरी 1959 को जन्मे सिंघवी ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की और 1997-98 में भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल रहे। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सबसे पहले वरिष्ठ वकील का दर्जा दिया था। वे सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।

    40 वर्षों से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से लेकर अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं का अदालत में प्रतिनिधित्व किया है। हाल ही में उन्होंने केजरीवाल को शराब घोटाले में जमानत दिलाई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंघवी 6 से 11 लाख रुपये प्रति पेशी चार्ज करते हैं और उनकी नेटवर्थ अरबों रुपये में है। खुद सिंघवी का दावा है कि वे हर साल करोड़ों रुपये इनकम टैक्स के रूप में अदा करते हैं।

    Abhishek Manu Singhvi (Photo: Social Media)

    कपिल सिब्बल: कानून और राजनीति दोनों में दमदार उपस्थिति

    देश के जाने-माने वकील और वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल का जन्म 8 अगस्त 1948 को जालंधर, पंजाब में हुआ था। एक शिक्षित और कानूनी पृष्ठभूमि वाले परिवार से आने वाले सिब्बल के पिता हीरा लाल सिब्बल भी एक प्रतिष्ठित वकील थे।

    1972 में वकालत की शुरुआत करने वाले सिब्बल ने 1973 में आईएएस परीक्षा पास की, लेकिन नौकरी छोड़कर कानून को ही अपना करियर बनाया। 1983 में वरिष्ठ अधिवक्ता बने और 1989 में भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए गए। इनकी एक सुनवाई की फीस 10-12 लाख रुपए है।

    वे 1994 में संसद में पेश होने वाले पहले वकील बने जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज के खिलाफ महाभियोग के दौरान सफलतापूर्वक बचाव किया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के वे तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं। कपिल सिब्बल ने कई हाई-प्रोफाइल केस लड़े हैं, जिनमें राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद, 2जी स्पेक्ट्रम, ट्रिपल तलाक, राफेल डील, और नेशनल हेराल्ड मामला प्रमुख हैं। आज भी देश के सबसे अनुभवी और चर्चित वकीलों में गिने जाते हैं।

    Kapil Sibble (Photo: Social Media)

  • घर में कितना रख सकते हैं सोना?ˈ लिमिट से बाहर रिजर्व करने पर होगी कार्रवाईˌ

    घर में कितना रख सकते हैं सोना?ˈ लिमिट से बाहर रिजर्व करने पर होगी कार्रवाईˌ

    क्या आप जानते हैं कि घर में कितना सोना रखना कानूनी है? ज़रा सी चूक आपको बड़ी मुश्किल में डाल सकती है! अगर आप तय लिमिट से ज़्यादा सोना रखते हैं और उसका वैध सबूत नहीं है, तो इनकम टैक्स विभाग बड़ी कार्रवाई कर सकता है। जानिए, सरकारी नियम क्या कहते हैं और कौन सी जादूई लिमिट आपको हर तरह की कार्रवाई से बचा सकती है!

    घर में कितना रख सकते हैं सोना?ˈ लिमिट से बाहर रिजर्व करने पर होगी कार्रवाईˌ

    भारत में सोना खरीदना बेहद शुभ माना जाता है, यह न केवल महिला की सुंदरता को बढ़ाता है, बल्कि निवेश के लिए भी काफी फायदेमंद है। लगातार सोने की मांग बढ़ रही है, इसलिए लोग अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए सोने को अधिक खरीद रहे है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आप घर पर कितना सोना रख सकते हैं? अगर आप तय सीमा से अधिक सोना अपने पास रखते है, तो आयकर विभाग आपको नोटिस भेज सकता है . इसलिए हर व्यक्ति को यह जानना जरुरी है कि इनकम टैक्स की जाँच से बचने के लिए घर में कितना सोना रख सकते है।

    भारत में सोना रखने के नियम

    भारत में सोना रखने की सीमा पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग तय की गई है। क़ानूनी तौर पर , विवाहित महिलाएँ अपने पास 500 ग्राम तक सोना रख सकती हैं। वहीं अविवाहित महिलाएँ 250 ग्राम और पुरुष 100 ग्राम तक सोना अपने पास रख सकते हैं। यह नियम सोने की खरीद और स्टोरेज दोनों पर लागू होता है।

    सोना रखने के लिए जरुरी डाक्यूमेंट्स

    नियमों के अनुसार, अगर आप बिना किसी डाक्यूमेंट्स के तय सीमा से अधिक सोना रखते है, तो आयकर विभाग आप पर करवाई कर सकती है। आयकर विभाग के द्वारा सोना रखने की लिमिट तय होती है, लेकिन अगर आप इस लिमिट से ज़्यादा सोना रखते हैं, तो आपको उसके लिए सोने का बिल या इनकम टैक्स रिटर्न में उसका डिक्लेरेशन दिखाना होगा। इसका मतलब है कि आप जितना चाहे उतना सोना रख सकते है, बशर्ते आपके पास उसका वैध प्रमाण (Valid Proof) होना ज़रूरी है।

    सोने के गहनों पर टैक्स और नियम

    अगर आपके पास सोना आपकी घोषित आय से खरीदा हुआ है, या वह कर-मुक्त आय से आया है, या आपको विरासत में कानूनी तौर पर मिला है, तो उस सोने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। साथ ही, अगर आप तय सीमा (Fixed Limit) के भीतर सोना रखते हैं, या सीमा से ज़्यादा होने पर भी आपके पास उसका वैध प्रमाण (Valid Proof) है, तो छापेमारी के समय आपके गहने जब्त नहीं किए जा सकते। ध्यान रहे, घर में सोना रखने पर टैक्स नहीं लगता, लेकिन जब आप इसे बेचते हैं, तो आपको टैक्स चुकाना पड़ता है।

  • यहां पर बेटी के जवान होते हीˈ पिता बन जाता है पति बचपन में बेटी की तरह करता लाड़-दुलारˌ

    यहां पर बेटी के जवान होते हीˈ पिता बन जाता है पति बचपन में बेटी की तरह करता लाड़-दुलारˌ

    यहां पर बेटी के जवान होते हीˈ पिता बन जाता है पति बचपन में बेटी की तरह करता लाड़-दुलारˌ

    भारत सहित दुनिया भर में ऐसी कई जनजातिया है जिनकी अलग प्रथाएं होती है। कुछ जनजातियों ने बदलते समय के अनुसार प्रथा और कुप्रथाओं को बंद कर दिया है तो कुछ जनजाति आज भी इन प्रथाओं को मानती है। इनमें से एक बांग्लादेश की ‘मंडी’ जनजाति है जो बांग्लादेश के दक्षिण पूर्व में जंगल में रहती है। मंडी जनजाति में एक ऐसी परंपरा है जहां पर एक पिता अपनी बेटी को बहुत ही लाड़ प्यार से पाल पोस कर बड़ा करता है लेकिन जैसे ही बेटी जवान होती है तो फिर वह पिता से पति बन जाता है।

    जी हां.. यह सुनकर आपको जरूर थोड़ा अजीब लगेगा और इस तरह की प्रथा से आपको नफरत भी होगी। लेकिन यह परंपरा मंडी जनजाति में आज भी चल रही है। आइए जानते हैं इस परंपरा के बारे में..

    बचपन में रहता पिता और बेटी के जवान होते ही बन जाता है पति
    दरअसल, बांग्लादेश की मंडी जनजाति में पुरुष कम उम्र की विधवा महिला से शादी करता है और यदि उस महिला के पास एक बेटी है तो यह पहले से ही तय हो जाता है कि उस महिला की बेटी आगे चलकर उसी शख्स के साथ शादी कर लेती है जो बचपन में उसका पिता रहता है।

    जी हां.. जो बच्ची एक समय पर उस शख्स को अपना पिता मानती है और पिता बुलाती है, लेकिन आगे चलकर इस बच्ची को अपने ही पिता को पति मानना पड़ता है। हालांकि, इस परंपरा को निभाने के लिए बच्ची का सोतेला बाप होना जरूरी है। इस परंपरा को निभाने के पीछे का तर्क यह बताया जाता है कि, पति अपनी पत्नी और बेटी दोनों को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकता है।

    मंडी जनजाति की ओरोला ने सुनाई अपनी कहानी
    मीडिया रिपोर्ट्स के माने तो मंडी जनजाति की ओरोला ने इस परंपरा से जुड़ी बातें साझा की थी। उन्होंने बताया था कि जब वह छोटी थी तभी उनके पिता की मौत हो गई थी। ऐसे में उसकी मां ने नॉटेन नाम के एक शख्स से दूसरी शादी रचा ली। लेकिन जब वह बड़ी हुई तो पता चला कि उसका पिता ही उसका पति है।

    ओरोला ने बताया था कि, वह बचपन में अपने पिता को बहुत पसंद करती थी क्योंकि वह उसकी काफी अच्छे से देखभाल करते थे और किसी चीज की कमी नहीं होने देते थे। लेकिन जब वह बड़ी हुई तो उसे पता चला कि, वह 3 साल की थी तभी उसकी शादी उसके पिता से करवा दी गई। हालांकि ओरोला कोई पहली बच्ची नहीं है जिसके साथ इस तरह की कुप्रथा निभाई गई है। मंडी जनजाति में ऐसी कई बच्चियां है जिनकी जिंदगी इस तरह की कुप्रथा निभाने के लिए बर्बाद कर दी गई।

    हो सकता है कि इस जनजाति के लिए यह प्रथा काफी महत्व वाली होगी। लेकिन बदलते इस दौर में इसका कोई भी महत्व नहीं रह जाता। वहीं मीडिया रिपोर्ट की मानें तो धीरे-धीरे लोग इस परंपरा को तोड़ रहे हैं। वहीं कई ऐसी महिलाएं ऐसी भी है जो अपनी बेटी की जिंदगी बचाने के लिए दूसरी शादी नहीं रचा रही है। हालांकि इस जनजाति में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस परंपरा को खुशी-खुशी निभा रहे हैं।

  • बस 5 काजू रोज रात को… 6ˈ दिन में जो होगा वो जानकर आप भी शुरू कर देंगे ये आदतˌ

    बस 5 काजू रोज रात को… 6ˈ दिन में जो होगा वो जानकर आप भी शुरू कर देंगे ये आदतˌ

    बस 5 काजू रोज रात को… 6ˈ दिन में जो होगा वो जानकर आप भी शुरू कर देंगे ये आदतˌ

    काजू के छिलके के अन्दर ही काजू होता है। काजू कोमल, सफेद और स्वादिष्ट होता है। काजू खाकर पानी पीने से भूख मिट जाती है लेकिन अधिक मात्रा में खाने से पेट में दर्द हो जाता है।काजू के पके फल खाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं और सूखे बीजों को चीनी के पाक में मिलाकर मिठाई बनाई जाती है।वैज्ञानिकों के अनुसार काजू के बीज और उसके तेल में प्रोटीन और विटामिन ´बी` अधिक मात्रा में पाया जाता है और इसका प्रोटीन शरीर में बहुत जल्दी पच जाता है।

    काजू का इस्तेमाल मिठाई और सब्जी की ग्रेवी को स्वादिष्ट बनाने के लिए खूब किया जाता है. काजू से बनी बर्फी को ज्यादातर लोग बहुत पसंद करते हैं। स्वाद के साथ ही यह सूखा मेवा सेहत को स्वस्थ रखने में भी खूब उपयोगी है।

    काजू में बहुत सारे विटामिन और पोषक तत्व होते हैं, लेकिन उनमें बहुत अधिक वसा होता है। अच्छी खबर यह है कि इसमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड वसा होता हैं।

    जब काजू को कम मात्रा में खाया जाता है तो हृदय रोग में सुधार हो सकता है और साथ ही स्ट्रोक के जोखिम को भी कम करता है। काजू में विटामिन ई होता है और विटामिन ई एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

    इसमें विटामिन ई, के,बी-6, तांबा, फास्फोरस, जिंक, आयरन, और सेलेनियम जैसे खनिज भी है, जो शरीर को स्वस्थ रखते हैं। काजू को आप सीधे खा सकते है लेकिन आपको इसके सभी गुणो का फ़ायदा उठाना है तो सुबह पानी में 5-10 काजू भिगो दे और रात को सोते वक़्त उसका सेवन करे या फिर रात को भिगो कर रख दे और सुबह इनका सेवन करे।

    चाहे कैसा भी ड्राई फ़्रूट हो उनको भिगो कर ही खाना चाहिए क्यूँकि हमारी पाचन शक्ति इतनी ज़्यादा नही होती की ड्राई फ़्रूट्स को सूखा पचा सके, इसलिए ड्राई फ़्रूट्स को भिगो कर खाने की सलाह दी जाती है। अगर आप को इसके फ़ायदों को महसुस करना है तो आप इसे लगातार 6 दिनो तक सेवन करे। आइए जानते है All Ayurvedic के माध्यम से इसके फ़ायदों के बारे में….


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    काजू खाने के फायदे | CASHEW BENEFITS


    दिल दिमाग : अनुसंधान से पता चलता है कि काजू खाने से हृदय रोग का जोखिम कम हो सकता हैं। यह रक्तचाप और खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। काजू स्वाभाविक रूप से कोलेस्ट्रॉल मुक्त होता हैं और पोटेशियम जैसे अन्य विटामिन हृदय रोग से लड़ने में भी मदद करते हैं। रिसर्च में पाया गया है की काजू हृदय को स्वस्थ बनाये रखने में बड़ा ही अहम योगदान देता है।

    रक्त स्वास्थ्य : काजू में कॉपर और आयरन लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने का काम करता हैं, साथ ही रक्त वाहिकाओं, तंत्रिकाओं, प्रतिरक्षा प्रणाली, और हड्डियों को स्वस्थ रखने का कार्य करता हैं।

    नेत्र स्वास्थ्य : हम सब जानते है कि गाजर आपकी आंखों के लिए अच्छा होता है, लेकिन यह जानकार आपको आश्चर्य होगा कि काजू में ल्यूसिन और ज़ेकैक्टीन होते हैं, जो नियमित रूप से एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करता हैं। ये यौगिक आंखों को क्षति से बचाता है।

    वजन घटना : शोध के अनुसार, एक दिन में दो काजू खाने से हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर से बचा जा सकता है। काजू में पाए जाने वाला पॉलीअनसैचुरेटेड वसा आपके वजन को संतुलित रखता है। काजू खाने से आपका वज़न नियंत्रण में रहता है, परन्तु इस बात का भी ध्यान रहे की इसे जरूरत से ज़्यादा खाने से वेट गेन हो सकता है।

    पौरुष शक्ति : काजू खाने से धा-तु पुष्ट होती है। जो व्यक्ति इसका नियमित सेवन करता है उसकी पौरुष शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

    हड्डियों को मजबूत रखता है : काजू में प्रोटीन बहुत अधिक मात्र में पाई जाती है, जो आपकी हड्डियों को मजबूत बनाये रखता है।

    मधुमेह : हाल ही में रिसर्च के मुताबिक काजू के लगातार इउपयोग करने से मधुमेह का खतरा कम होता है और अगर आपको पहले से मधुमेह है तो उसको बढ़ने से रोकता है।

    दाँत : काजू दाँतों और मसूड़ो को स्वस्थ रखता है। इसके लगातार इस्तेमाल से दातों को मजबूती मिलती है। इसमें उपलब्ध रसायन दातों को कमज़ोर होने से बचाता है।

    कैंसर : काजू में पाये जाने वाले पोषक पदार्थ और रसायन कैंसर से लड़ने में कारगर साबित होते है।

    दिमाग की कमजोरी : सर्दियों के मौसम में सुबह के समय रोज खाली पेट 20 ग्राम काजू खाकर ऊपर से शहद चाटने से दिमाग की कमजोरी दूर होती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है।

    त्वचा बनती है चमकदार : काजू खाने से त्वचा का ग्लो करने लगती है और रंगत भी निखर जाती है. सौंदर्य बढ़ाने के लिए अक्सर ही घरेलू नुस्खों में इसका उपयोग किया जाता रहा है।

    याद्दाशत होती है तेज : काजू विटामिन-बी का खजाना है. भूखे पेट काजू खाकर शहद खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है. काजू खाने से यूरिक एसिड बनना बंद हो जाता है और इसके सेवन से ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है।

    पाचन शक्ति को बनता है मजबूत : काजू में एंटी ऑक्सीडेंट पाचन क्रिया को मजबूत बनाने के साथ ही वजन भी संतुलित रखता है।

    शरीर में एनर्जी बनाएं रखता है : काजू को ऊर्जा का एक अच्छा स्रोत माना जाता है. इसे खाने से सेहत को कोई नुकसान नहीं पहुंचता लेकिन इसे ज्यादा मात्रा में नहीं खाना चाहिए. अगर आपका मूड बेमतलब ही खराब हो जाता है तो 2-3 काजू खाने से आपको इस समस्या में आराम मिल सकता है।

    प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत है यह : काजू में प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है इसलिए इसे खाने से बाल और त्वचा स्वस्थ और सुंदर हो जाते हैं।

    कोलेस्ट्रॉल करता है कंट्रोल : काजू कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखता है. इसमें प्रोटीन अधिक होता है और यह जल्दी पच जाता है. काजू आयरन का अच्छा स्त्रोत माना जाता है इसलिए खून की कमी को दूर करने के लिए आप इसे खा सकते हैं।

    पौरुष शक्ति : काजू खाने से धातु पुष्ट होती है। जो व्यक्ति इसका नियमित सेवन करता है उसकी पौरुष शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

    हाथ-पैर फटना : काजू का तेल हाथ-पैरों की त्वचा पर लगाने से त्वचा नहीं फटती है। इसके तेल का प्रयोग एड़ियां फटने पर भी किया जाता है। मस्सों पर इसका तेल लगाने से मस्से सूखकर नष्ट होते हैं।

    हड्डियों को मजबूत रखता है – काजू में प्रोटीन बहुत अधिक मात्र में पाई जाती है, जो आपकी हड्डियों को मजबूत बनाये रखता है और दिल की बीमारियों के खतरे को कम करता है।

    सफेद दाग : रोजाना काजू खाने से श्वेत कुष्ठ (सफेद दाग) समाप्त हो जाता है।
    आवश्यक सावधानी

    काजू गर्म होता है। अत: इसका प्रयोग द्राक्ष, चीनी या शहद के साथ करना चाहिए। काजू का सेवन अधिक मात्रा में करने से नाक से खून आ सकता है

  • इन राशि वालों के लिए सोने कीˈ अँगूठी पहनना होता है बहुत फायदेमंद चमक जाती है सोने की तरह किस्मतˌ

    इन राशि वालों के लिए सोने कीˈ अँगूठी पहनना होता है बहुत फायदेमंद चमक जाती है सोने की तरह किस्मतˌ

    इसमें कोई शक नहीं कि महिलाएं बड़ी आसानी से सोने की आभूषणों की तरफ आकर्षित हो जाती है। जैसे कि सोने के गहने या सोने की किसी भी वस्तु की तरफ महिलाओं की नजर सबसे पहले जाती है। वैसे सोने के प्रति ऐसा आकर्षण केवल कलयुग में ही नहीं देखने को नहीं मिलता, बल्कि ये आकर्षण तो प्राचीन समय से चला आ रहा है। जी हां तभी तो हमारे देवी देवता भी स्वर्ण आभूषणों से सजे हुए नजर आते है। हालांकि सोने के आभूषण पहनने के पीछे की वजह केवल खूबसूरत दिखना ही नहीं है, बल्कि इसे पहनने से स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ भी होते है। यहाँ तक कि कुछ लोगों को सोने की अंगूठी धारण करने से ज्योतिषीय तरीके से भी कई तरह के लाभ प्राप्त होते है।

    इन राशि वालों के लिए सोने कीˈ अँगूठी पहनना होता है बहुत फायदेमंद चमक जाती है सोने की तरह किस्मतˌ

    स्वर्ण धातु पहनने के लाभ :

    सबसे पहले तो हम आपको ये बता दे कि अध्यात्म जगत में स्वर्ण धातु संबंधी कई लाभ बताएं गए है। जी हां ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ऐसा माना जाता है कि तर्जनी अंगुली में सोने की अंगूठी पहनने से एकाग्रता बढ़ती है और मन को शांति मिलती है। इसके इलावा ऐसी मान्यता है कि अनामिका ऊँगली में सोने की अंगूठी पहनने से दाम्पत्य जीवन में खुशहाली आती है और जो लोग संतान सुख की प्राप्ति से वंचित है उन्हें संतान सुख की प्राप्ति भी होती है। वही दूसरी तरफ ज्योतिषशास्त्र में शादी होने के बाद एक संतान होने तक हीरा पहनना काफी अशुभ माना जाता है, लेकिन सोना पहनना काफी शुभ माना जाता है। अब तो आप समझ गए होंगे कि स्वर्ण का कितना ज्यादा महत्व है। तो चलिए अब हम आपको उन चार राशियों के बारे में बताते है।

    इन राशि वालों के लिए स्वर्ण धातु पहनना है शुभ :

    सिंह राशि: बता दे कि इस राशि के लोगों को सोने की अंगूठी तो जरूर पहननी चाहिए, क्यूकि यह अग्नि तत्व की राशि होती है। तो ऐसे में इसके स्वामी सूर्य के साथ स्वर्ण के कारक ग्रह गुरु का अच्छा संबंध होता है। जिसके चलते सोना इस राशि के लोगों के लिए शुभ माना जाता है और सोने की अंगूठी पहनने से इस राशि के लोगों भरपूर ऊर्जा और उत्साह से लाभ की प्राप्ति होती है।

    कन्या राशि: इसके बाद हम कन्या राशि वालों की बात करते है। वैसे तो इस राशि के लोगों को चेन या कड़ा जरूर पहनना चाहिए, लेकिन अगर आपको ये चीजें पहनना पसंद न हो तो आप अंगूठी भी पहन सकते है। बता दे कि आपकी राशि के अनुसार गुरु पांचवे और सातवें घर के स्वामी होते है। तो ऐसे में गुरु के इस धातु को धारण करना आपके लिए काफी शुभ माना जाता है।

    तुला राशि : बता दे कि इस राशि के लोग अगर सोने की अंगूठी पहनेंगे तो इनकी सोई हुई किस्मत जाग सकती है। दरअसल इनकी राशि के स्वामी शुक्र ग्रह है और स्वर्ण धातु गुरु ग्रह से संबंधित होती है। अब यूँ तो इन दोनों ग्रहों की आपस में नहीं बनती, लेकिन फिर भी आपकी कुंडली में गुरु तीसरे और छठवें स्थान के स्वामी होने से आपको शुभ फल की प्राप्ति होती है। जी हां यह रोग और दुश्मनों दोनों से आपकी रक्षा करते है।

    धनु राशि : अब आखिर में हम धनु राशि वाले लोगों की बात करते है। बता दे कि ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सोने की अंगूठी पहनने से इनके अधूरे काम पूरे होते है। हालांकि यहाँ इस बात का ध्यान रखे कि सोने का कोई भी आभूषण पैरों में न पहने। वो इसलिए क्यूकि आपकी राशि के स्वामी गुरु ग्रह है और स्वर्ण गुरु से ही संबंधित धातु है।

    अब अगर हम उन लोगों की बात करे जिन्हे स्वर्ण धातु नहीं पहननी चाहिए, तो जिन लोगों को कुदरती रूप से ज्यादा गुस्सा आता है या जो लोग ज्यादा बोलते है, उन्हें स्वर्ण धातु धारण नहीं करनी चाहिए। दोस्तों अगर आपकी राशि भी इनमे से एक है तो आपको स्वर्ण धातु जरूर पहननी चाहिए।

  • एकता कपूर कलयुग की मीरा हैं 49ˈ की होने के बावजूद इस एक्टर की वजह से आज तक नहीं की शादीˌ

    एकता कपूर कलयुग की मीरा हैं 49ˈ की होने के बावजूद इस एक्टर की वजह से आज तक नहीं की शादीˌ

    एकता कपूर कलयुग की मीरा हैं 49ˈ की होने के बावजूद इस एक्टर की वजह से आज तक नहीं की शादीˌ

    Ekta Kapoor: छोटे पर्दे की क्वीन कही जाने वाली फेमस प्रोड्यूसर-डायरेक्टर एकता कपूर आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। एकता ने अपनी मेहनत के दम पर ये मुकाम हासिल किया है। हालांकि वह अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में रहती हैं। एकता कपूर (Ekta Kapoor) का नाम आज तक किसी एक्टर के साथ नहीं जुड़ा और ना ही उन्होंने अपनी लव लाइफ पर कभी खुलकर बात की।

    लेकिन हाल ही में उन्होंने बताया कि एक समय पर उनका दिल एक बॉलीवुड एक्टर पर आ गया था और वह उनसे शादी करना चाहती थी। चलिए आपको बताते हैं उस एक्टर के बारे में।

    इस एक्टर से शादी करना चाहती थी Ekta Kapoor

    एकता कपूर (Ekta Kapoor) का दिल जिस बॉलीवुड एक्टर पर आया था वो और कोई नहीं बल्कि इंडस्ट्री के चहेते स्टार चंकी पांडे हैं। जी हां..एकता चंकी पांडे को पसंद करती थी और उनसे शादी भी करना चाहती थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। दरअसल जब चंकी ने अपना 60वां बर्थडे सेलिब्रेट किया तो इस मौके पर एकता ने उन्हें बर्थडे विश किया और सोशल मीडिया पर एक थ्रोबैक तस्वीर भी शेयर की।

    एक्टर पर दिल हार बैठी थी Ekta Kapoor

    एकता कपूर (Ekta Kapoor) ने इस पुरानी तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा कि, “जब सालों पहले मैं चंकी पांडे (Chunky Panday) पर दिल हार बैठी थी, अगर वो मान जाते तो मैं भी आज बॉलीवुड वाइफ होती।” इस तस्वीर के साथ एकता कपूर ने कई फनी इमोजी भी शेयर किए है। इस वायरल तस्वीर में देखा जा सकता है कि एकता कपूर और चंकी पांडे काफी यंग नजर आ रहे हैं और दोनों एक-दूसरे के साथ काफी अच्छे भी लग रहे हैं। फैंस को भी दोनों की ये तस्वीर काफी पसंद आ रही है।

    47 की उम्र में भी कुंवारी है Ekta Kapoor

    बता दें कि 47 की उम्र में भी एकता कपूर (Ekta Kapoor) कुंवारी हैं और उन्होंने एक बेटे को गोद लिया हुआ है जिसका नाम रवि है। एकता ने अपने बेटे का नाम रवि अपने पिता जितेंद्र से प्रेरित होकर रखा है। दरअसल, ज्यादातर फिल्मों में एक्टर जितेंद्र का नाम रवि है, ऐसे में उन्होंने अपने बेटे को भी ये नाम दिया। वहीं बात करें चंकी पांडे की पर्सनल लाइफ की तो उन्होंने भावना पांडे के साथ शादी रचाई है। उनकी दो बेटियां हैं जिनका नाम अनन्या पांडे और रायसा पांडे है।

    अनन्या फिल्मों में अपना डेब्यू कर चुकी हैं, तो वहीं रायसा के डेब्यू को लेकर कोई जानकारी नहीं है। बता दें कि चंकी पांडे ने अपने बर्थडे पर एक ग्रैंड पार्टी का आयोजन किया था, जिसमें इंडस्ट्री के तमाम सितारों ने शिरकत की थी, जिसकी तस्वीरें काफी वायरल हुई थी।