Author: me.sumitji@gmail.com

  • फार्म हाउस में चल रहा था कुछˈ और ही खेल! अंदर 18 लड़के-10 लड़कियां बाहर खड़ी थीं महंगी गाड़ियां. तभी अचानकˌ

    फार्म हाउस में चल रहा था कुछˈ और ही खेल! अंदर 18 लड़के-10 लड़कियां बाहर खड़ी थीं महंगी गाड़ियां. तभी अचानकˌ

    फार्म हाउस में चल रहा था कुछˈ और ही खेल! अंदर 18 लड़के-10 लड़कियां बाहर खड़ी थीं महंगी गाड़ियां. तभी अचानकˌ

    उदयपुर पुलिस ने रविवार रात को बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 लड़कों और 10 लड़कियों को गिरफ्तार किया है. ये सभी गोगुंदा थाना इलाके में दो फार्म हाउस मे बंद थे. इन फार्म हाउस में रेव पार्टी और वेश्यावृत्ति का काम चल रहा था. पुलिस ने उनके पास से कई आपत्तिजनक चीजें बरामद की है.

    उदयपुर पुलिस ने 18 लड़कों और 10 लड़कियों को गिरफ्तार किया है. ये सभी गोगुंदा इलाके में स्थित दो फार्म हाउस में बंद थे. इन दोनों फार्म हाउस के बाहर लग्जरी कारों का जमावड़ा लगा हुआ था. इन फार्म हाउस में से एक में रेव पार्टी चल रही थी और दूसरे में वेश्यावृत्ति का धंधा चल रहा था. मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने रविवार देर रात जैसे ही वहां छापामारी की तो हड़कंप मच गया. पकड़ी गई लड़कियां राजस्थान की नही हैं। उन्हें बाहर से बुलाया गया था.

    पुलिस के अनुसार वेश्यावृत्ति के काले धंधे को लेकर काफी शिकायतें आ रही थी. इस पर पुलिस ने अपने मुखबिरों को सक्रिय किया. रविवार को पुलिस को इलाके के दो फार्म हाउस पर रेव पार्टी और दूसरे गलत काम होने की सूचना मिली. इस पर पुलिस पूरी तैयारी के साथ रात को वहां पहुंची. पुलिस ने ताबड़तोड़ दोनों फार्म हाउस पर एक साथ दबिश दी. पुलिस जब अंदर पहुंची तो वहां के हालात देखकर उसके होश उड़ गए.

    पुलिस ने दोनों जगहों से 18 लड़कों और 10 लड़कियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस की जांच में सामने आया कि वेश्यावृत्ति के लिए इन लड़कियों को बाहर से बुलाया गया था. पुलिस ने यह कार्रवाइयां माताजी खेड़ा में स्थित पियाकल प्रियंका पीपी फार्म हाउस और खुमानपुरा में स्थित द स्काई साइन हॉलीडे फार्म हाउस पर की. इस कार्रवाई में एक एनआरआई को भी गिरफ्तार किया गया है. पुलिस को उसके पास से 3,20,000 रुपए मूल्य के डॉलर जब्त किए हैं.

  • ये पोस्ट पढ़ने के बाद काहोंगे कीˈ ब्लड शुगर का इलाज इतना सस्ता और आसान होगा कभी सोचा नही था, जरूर अपनाएँ और शेयर करे

    ये पोस्ट पढ़ने के बाद काहोंगे कीˈ ब्लड शुगर का इलाज इतना सस्ता और आसान होगा कभी सोचा नही था, जरूर अपनाएँ और शेयर करे

    ये पोस्ट पढ़ने के बाद काहोंगे कीˈ ब्लड शुगर का इलाज इतना सस्ता और आसान होगा कभी सोचा नही था, जरूर अपनाएँ और शेयर करे

    हम जो कुछ भी खाते हैं, हमारा शरीर उसी का परिणाम होता है। आज के प्रदूषित वातावरण में संतुलित आहार हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है। अक्सर जब लोग मेडिकल चेकअप करवाते हैं, तभी उन्हें पता चलता है कि उनका ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है, जबकि पहले कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। ऐसी कई बीमारियां होती हैं जो धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं और साइलेंट किलर की तरह काम करती हैं। यह भी सच है कि गलत खान-पान और खराब जीवनशैली इन समस्याओं का बड़ा कारण बनते हैं।

    डायबिटीज एक आम लेकिन गंभीर बीमारी है। इसमें खून में ग्लूकोज (शुगर) का स्तर बढ़ जाता है। ऐसा मुख्य रूप से दो कारणों से होता है—या तो शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बनाता, या फिर शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन पर सही प्रतिक्रिया नहीं देतीं। इंसुलिन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट और फैट के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है। मेटाबॉलिज्म वह प्रक्रिया है जिसके जरिए शरीर भोजन को पचाकर ऊर्जा में बदलता है और विकास करता है।

    अंडे से शुगर नियंत्रण का एक घरेलू उपाय पारंपरिक रूप से बताया जाता है। इसके अनुसार पहले अंडे को पानी में उबाल लें। उबलने के बाद उसका छिलका उतारकर फोर्क से उसमें जगह-जगह छोटे छेद कर लें। अब इसे एक बर्तन में रखकर ऊपर से सिरका डाल दें और पूरी रात ऐसे ही रहने दें। अगले दिन सुबह इस अंडे का सेवन गुनगुने पानी के साथ करने की सलाह दी जाती है।

    हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि डायबिटीज एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है और इसका सही उपचार डॉक्टर की सलाह, नियमित जांच, संतुलित आहार, व्यायाम और जरूरत पड़ने पर दवाओं से ही संभव है। किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना सुरक्षित रहता है।

  • बाप रे बाप…गिनें या बचकर भागे, धड़ाधड़ˈ एक के बाद एक घर से निकले 25 कोबरा…देख फटी रह गईं आंखें…ˌ

    बाप रे बाप…गिनें या बचकर भागे, धड़ाधड़ˈ एक के बाद एक घर से निकले 25 कोबरा…देख फटी रह गईं आंखें…ˌ

    बाप रे बाप…गिनें या बचकर भागे, धड़ाधड़ˈ एक के बाद एक घर से निकले 25 कोबरा…देख फटी रह गईं आंखें…ˌ

    कुशीनगर: कुशीनगर के विकास खण्ड कसया के गांव बटेसरा गांव में गुरुवार को उस समय हडकंप मच गया जब घर में ईंट और मिट्टी हटाते समय अचानक सांपों का झुंड दिखाई दिया. घर में मरम्मत के काम के दौरान एक कोबरा सांप दिखाई दिया. फिर तो सांपों की संख्या बढ़ती ही जा रही थी. एक ही घर में कोबरा नश्ल के 25 सापों के मिलने से ग्रामीणों में अफरातफरी फैल गई. इन सांपों को देखने के लिए गांव वालों की भीड़ जमा हो गई. इतने सारे सांपों के दिखने की सूचना वन विभाग को दी गई.

    कहां की है ये घटना
    यह घटना शुकुरुल्लाह पुत्र आलमीन के घर की है, जहां घर निर्माण कार्य के दौरान सहीम नामक व्यक्ति को एक विशाल कोबरा सांप दिखाई दिया. उसने और लोगों को आवाज लगाकर बुलाया कि और भी सांप हैं. एक बड़ा सांप था और बाकी के बच्चे थे. घबराए ग्रामीणों ने प्रधान मोहन लाल गुप्ता के जरिए सर्प मित्र शत्रुध्न यादव को सूचना दी. मौके पर पहुंचे स्नैक स्नैचर ने ईंट और मिट्टी हटवाकर एक बड़े कोबरा के साथ 24 नवजात कोबरा सांपों को सुरक्षित बाहर निकाला. सूचना के बाद मौके पर सर्पमित्र पहुंचे और सभी सांपों को पकड़कर जंगल में छोड़ दिया गया.

    सुरक्षित जंगल में छोड़े गए सर्प
    रेस्क्यू के दौरान यह भी पता चला कि एक बड़ा कोबरा ईंट के नीचे दबकर पहले ही मर चुका था, जबकि बाकी सभी को रेस्क्य कर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया. सर्प मित्र ने ग्रामीणों से अपील की कि अगर कहीं सांप दिखे तो उन्हें मारें नहीं.

    कोबरा दुनिया का सबसे जहरीला सांप
    कोबरा दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से एक है. इसके काटने से 45 मिनट से 1 घंटे में मौत हो सकती है.

  • न उम्र का लिहाज़ और न हीˈ समाज का डर, क्यों आज की महिलाएं अपने से बड़े पुरुषों को बना रही हैं लाइफ पार्टनर, जानिए असली वजह

    न उम्र का लिहाज़ और न हीˈ समाज का डर, क्यों आज की महिलाएं अपने से बड़े पुरुषों को बना रही हैं लाइफ पार्टनर, जानिए असली वजह

    न उम्र का लिहाज़ और न हीˈ समाज का डर, क्यों आज की महिलाएं अपने से बड़े पुरुषों को बना रही हैं लाइफ पार्टनर, जानिए असली वजह

    आज के समय में रिश्तों को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है। जहां पहले समाज कई तरह की सीमाएं तय करता था, वहीं अब लोग अपनी पसंद और समझ के आधार पर रिश्ते चुनने लगे हैं। खासकर महिलाओं के नजरिए में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब कई महिलाएं अपने से उम्र में बड़े पुरुषों को पार्टनर के रूप में चुन रही हैं, और यह सिर्फ एक ट्रेंड नहीं बल्कि सोच में आए बदलाव का संकेत है।

    पहले ऐसे रिश्तों को लेकर समाज में तरह-तरह की बातें होती थीं। अक्सर यह मान लिया जाता था कि उम्र में बड़ा पुरुष चुनने के पीछे कोई स्वार्थ छिपा होता है। लेकिन आज की आत्मनिर्भर और जागरूक महिलाएं इन धारणाओं को पीछे छोड़ चुकी हैं। अब उनके लिए रिश्ते का मतलब सिर्फ आकर्षण नहीं बल्कि समझ, सम्मान और मानसिक संतुलन भी है।

    उम्र में बड़े पुरुषों की ओर आकर्षण का एक बड़ा कारण उनका जीवन अनुभव होता है। ऐसे लोग जिंदगी के उतार-चढ़ाव देख चुके होते हैं, इसलिए वे मुश्किल परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभाल पाते हैं। रिश्तों में जब समस्याएं आती हैं, तो उनका शांत और समझदारी भरा रवैया महिलाओं को सुरक्षा और भरोसे का एहसास देता है।

    आज की महिलाएं केवल बाहरी दिखावे या स्टाइल से प्रभावित नहीं होतीं। वे ऐसे पार्टनर की तलाश करती हैं जो भावनात्मक और मानसिक रूप से स्थिर हो। उम्र में बड़े पुरुष अक्सर अपने करियर और जीवन में एक स्तर हासिल कर चुके होते हैं, जिससे उनमें जिम्मेदारी और निर्णय लेने की क्षमता अधिक विकसित होती है। यही स्थिरता रिश्ते को मजबूत बनाती है।

    रिश्तों में भरोसा और वफादारी भी एक बड़ा कारण है। कई महिलाएं मानती हैं कि उम्र में बड़े पुरुष रिश्तों को लेकर अधिक गंभीर होते हैं और उनमें असुरक्षा की भावना कम होती है। इससे रिश्ते में बार-बार शक या तनाव की स्थिति नहीं बनती और एक सहज माहौल बना रहता है।

    भावनात्मक परिपक्वता भी इस आकर्षण का अहम हिस्सा है। महिलाओं के लिए यह जरूरी होता है कि उनका पार्टनर उनकी बात को समझे, सुने और सम्मान दे। उम्र में बड़े पुरुष अक्सर संवाद को महत्व देते हैं और अहंकार से दूर रहकर रिश्ते को प्राथमिकता देते हैं। यही बात उन्हें ज्यादा आकर्षक बनाती है।

    इसके अलावा, सुरक्षा और भविष्य को लेकर स्पष्टता भी महिलाओं के फैसले को प्रभावित करती है। महिलाएं ऐसे पार्टनर को पसंद करती हैं जो अपने जीवन को लेकर गंभीर हों और भविष्य के लिए स्पष्ट योजना रखते हों। उम्र में बड़े पुरुष अक्सर इस मामले में ज्यादा स्पष्ट और स्थिर नजर आते हैं।

    हालांकि ऐसे रिश्तों को लेकर आज भी समाज में कुछ हद तक आलोचना होती है, लेकिन अब महिलाएं इन बातों से ज्यादा प्रभावित नहीं होतीं। वे अपने फैसले खुद लेने में विश्वास रखती हैं और अपने जीवन की खुशी को प्राथमिकता देती हैं।

    अंत में यह समझना जरूरी है कि रिश्तों में उम्र सिर्फ एक संख्या है। असली मायने समझ, सम्मान, भरोसे और भावनात्मक जुड़ाव के होते हैं। आज की महिलाएं इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर अपने रिश्ते तय कर रही हैं, और यही बदलाव समाज के विकसित होने का संकेत भी है।

  • होटल के कमरे में Hidden Camera तोˈ नहीं? अंदर घुसते ही बंद कर दें लाइट, सामने आ जाएगी सच्चाईˌ

    होटल के कमरे में Hidden Camera तोˈ नहीं? अंदर घुसते ही बंद कर दें लाइट, सामने आ जाएगी सच्चाईˌ

    होटल के कमरे में Hidden Camera तोˈ नहीं? अंदर घुसते ही बंद कर दें लाइट, सामने आ जाएगी सच्चाईˌ

    Hidden Cameras in Hotel: आजकल होटल, चेंजिंग रूम या Airbnb में जाते समय कई लोगों के मन में यह डर रहता है कि कहीं वहां हिडन कैमरा तो नहीं लगा है. प्राइवेसी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच यह खतरा और भी बढ़ गया है.

    कई बार कैमरे साधारण चीजों जैसे अलार्म क्लॉक, स्मोक डिटेक्टर, चार्जिंग एडेप्टर या यहां तक कि टेडी बियर में भी छिपाए जा सकते हैं. लेकिन अच्छी खबर यह है कि इन्हें पहचानने के लिए आपको किसी महंगे गैजेट की जरूरत नहीं है. कुछ आसान ट्रिक्स और थोड़ी सी सजगता से आप हिडन कैमरा का पता लगा सकते हैं और अपनी प्राइवेसी सुरक्षित रख सकते हैं. सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि स्मार्टफोन और साधारण तरीकों से ही आप सच का पता लगा सकते हैं.

    कमरे को ध्यान से देखें
    सबसे पहले कमरे का विजुअल इंस्पेक्शन करें. देखें कि कहीं कोई स्मोक डिटेक्टर, क्लॉक, इलेक्ट्रिक आउटलेट, वॉल डेकोर, स्टफ्ड टॉय या मिरर अजीब जगह पर तो नहीं लगा है. अगर कोई चीज बाकी सेटअप से ज्यादा नई या अलग दिख रही है, तो उसे ध्यान से जांचें.

    लाइट बंद करके टॉर्च का इस्तेमाल करें
    एक कारगर तरीका यह है कि कमरे की लाइट बंद कर दें और फिर टॉर्च जलाकर इधर-उधर चमकाएं. हिडन कैमरे के लेंस अक्सर रिफ्लेक्टिव होते हैं और रोशनी पड़ने पर हल्की चमक दिखाई देती है. धीरे-धीरे मिरर, वेंट्स और कॉर्नर स्कैन करें. स्मोक डिटेक्टर, क्लॉक और पिक्चर फ्रेम जैसी रोजमर्रा की चीजों को भी ध्यान से देखें क्योंकि इन्हीं में कैमरे छिपाए जाते हैं.

    मोबाइल कैमरे से करें चेक
    अगर आप और भी पक्का करना चाहते हैं तो अपने स्मार्टफोन का कैमरा इस्तेमाल करें. ज्यादातर हिडन कैमरे नाइट विजन के लिए इन्फ्रारेड (IR) लाइट का इस्तेमाल करते हैं. कमरे की लाइट बंद करें और मोबाइल कैमरा ऑन करके शक़ वाली जगहों की ओर घुमाएं. अगर स्क्रीन पर छोटे-छोटे चमकते डॉट्स नजर आते हैं, तो वहां IR सोर्स एक्टिव हो सकता है.

  • 100 रोटी 6 देसी मुर्गे 10 लीटरˈ दूध अकेले चट कर जाता था ये पहलवान आज तक नहीं हारी एक भी लड़ाईˌ

    100 रोटी 6 देसी मुर्गे 10 लीटरˈ दूध अकेले चट कर जाता था ये पहलवान आज तक नहीं हारी एक भी लड़ाईˌ

    भारत में वैसे तो कई पहलवान हैं, लेकिन एक पहलवान ऐसा भी था जिसे अपना गुरु मानते हैं। यह पहलवान ने अपने जीवन में एक भी लड़ाई नहीं हारा। इनकी शोहरत का डंका विदेशों तक बजा। यहां तक कि चीन के फेमस ब्रूसली भी इनसे प्रभावित थे। दरअसल हम यहां जिस पहलवान की बात कर रहे हैं दुनिया उन्हें द ग्रेट गामा (The Great Gama) और रुस्तम-ए-हिन्द के रूप में जानती है।

    22 मई को गामा पहलवान (Gama Pehalwan) का 144वां जन्मदिन था। इस मौके पर गूगल ने भी उनका डूडल बनाकर उन्हें सम्मान दिया। गामा पहलवान अमृतसर के रहने वाले थे। यहीं 22 मई 1878 को उनका जन्म हुआ था। जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो वह अपनी फैमिली के साथ लाहौर शिफ्ट हो गए थे।

    10 साल की उम्र में शुरू की पहलवानी

    गामा जब 10 साल के थे तभी से पहलवानी करना शुरू कर दी थी। दरअसल ये उनके खून में था। उनके पिता मुहम्मद अजीज बख्श भी एक पहलवान थे। उन्होंने गामा को बचपन से ट्रेनिंग देना शुरू कर दी थी। वहीं पहलवानी की बारीकियाँ उन्होंने मशहूर पहलवान माधो सिंह से सीखी थी। इसके बाद दतिया के महाराजा भवानी सिंह की छत्रछाया में रहकर उन्होंने अपनी कुश्ती को और निखारा।

    गामा पहलवान का करियर लगभग 52 साल का रहा। इस दौरान उन्होंने कई पहलवानों को धूल चटाई। किसी से भी नहीं हारे। पहलवानों से भिड़ने के लिए वह तगड़ी ट्रेनिंग भी करते थे। जैसे वह रोजाना 5000 बैठक और 1000 पुशअप लगाते थे। इतनी मेहनत के बाद उनकी डाइट भी जोरदार होती थी। वह एक दिन में 6 देसी मुर्गे, 10 लीटर दूध, आधा किलो घी, बादाम का शरबत और 100 रोटी चट कर जाते थे।

    विदेशों में भी बजता था शोहरत का डंका

    100 रोटी 6 देसी मुर्गे 10 लीटरˈ दूध अकेले चट कर जाता था ये पहलवान आज तक नहीं हारी एक भी लड़ाईˌ

    कहा जाता है कि गामा पत्थर के डंबल उठाकर व्यायाम किया करते थे। चीन के फेंस मार्शल आर्टिस्ट ब्रूस ली भी गामा के फैन थे। उनसे ही प्रेरणा लेकर ब्रूस ली ने अपनी मजबूत बॉडी बनाई थी। वे गामा पहलवान की कसरत से जुड़े आर्टिकल्स पढ़ते थे और फिर उनका अभ्यास करते थे। दंड-बैठक लगाना । ब्रूस ली ने गामा पहलवान से ही सीखा था।

    गामा पहलवान ने देश और विदेशों के कई पहलवानों से कुश्ती लड़ी। उन्होंने सभी को चारों खाने चित्त कर दिया। वे 1910 में अपने रेसलर भाई इमाम बख्श के साथ जब लंदन गए थे। यहां इंटरनेशनल चैंपियनशिप चल रही थी। लेकिन उन्होंने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया था। हालांकि इस दौरान उन्होंने लंदन के सभी नामी पहलवानों को खुली चुनौती दी थी। उनकी चुनौती अमेरिकी चैंपियन बेंजामिन रोलर ने स्वीकार की थी। गामा ने तो उन्हें सिर्फ 1 मिनट, 40 सेकंड में ही हर दिया था।

    वहीं 1895 का गामा का मुकाबला भी बड़ा याद किया जाता है। तब वे सबसे बड़े पहलवान रुस्तम-ए-हिंद रहीम बक्श सुल्तानीवाला से लड़े थे। रहीम 6 फुट 9 इंच के हट्टे कट्टे लंबे पहलवान थे। दूसरी तरफ गामा सिर्फ 5 फुट 7 इंच के थे। लेकिन फिर भी गामा ने रहीम को जोरदार टक्कर दी। तब ये मुकाबला ड्रॉ रहा था। इसी लड़ाई के बाद वे दुनियाभर में फेमस हुए थे। गामा पहलवान का 1963 में निधन हो गया था। वह लंबी बीमारी से सूझ रहे थे।

  • Post Office FD Plan: 5 साल मेंˈ बनाएं ₹11,54,000 की रकम, मिल रहा है शानदार ब्याज और गारंटी रिटर्नˌ

    Post Office FD Plan: 5 साल मेंˈ बनाएं ₹11,54,000 की रकम, मिल रहा है शानदार ब्याज और गारंटी रिटर्नˌ

    आज के समय में निवेश के बहुत सारे विकल्प है लेकिन हर कोई व्यक्ति सुरक्षित और बेहतर रिटर्न वाले विकल्प में ही निवेश करना पसंद करता है। इसलिए लोग पोस्ट ऑफिस की स्कीम में निवेश करते हैं क्योंकि यहाँ सरकारी गारंटीड रिटर्न ही प्राप्त होता है। आजकल पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) प्लान काफी लोकप्रिय निवेश प्लान बन चुका है। यह पांच साल की योजना है जिसमें 7.5% वार्षिक ब्याज मिल रहा है।

    Post Office FD Plan: 5 साल मेंˈ बनाएं ₹11,54,000 की रकम, मिल रहा है शानदार ब्याज और गारंटी रिटर्नˌ

    पोस्ट ऑफिस FD स्कीम की जानकारी

    पोस्ट ऑफिस की एफडी स्कीम पांच वर्षों के लिए है जिसमें 7.5% प्रति वर्ष ब्याज मिल रहा है। लेकिन आप 1 से ५ साल तक की अवधि का चयन कर सकते हैं। इस योजना में भारत सरकार का समर्थन है इसलिए आपको सुरक्षा की गारंटी मिलती है। आप 1000 रूपए के निवेश से इस योजना में जुड़ सकते हैं। 6 महीने बाद आप जरुरी काम के लिए FD से पैसे निकाल सकते हैं।

    5 साल में मिलेगा तगड़ा रिटर्न

    इस योजना में ब्याज हर साल जुड़ता है जिससे आपका पैसा और तेजी से बढ़ेगा, यानी की कम्पाउंडिंग की सुविधा है। अगर आप 5 साल में टोटल 7 लाख रूपए का निवेश करते हैं तो आपको मैच्योरिटी पर ₹11,54,000 की बड़ी रकम प्राप्त होगी। इस एफडी स्कीम में आपको टैक्स बचत का विकल्प भी मिलेगा जो इसे और भी खास बनाता है।

    यह है बेहतर निवेश स्किम

    यह एक सरकारी गारंटीड स्कीम है जिसमें जोखिम बिलकुल भी नहीं है। इसके साथ अन्य बैंकों की एफडी की तुलना में इसमें बढ़िया ब्याज मिल रहा है। इसमें आपका पैसा सुरक्षित रहता है। आप किसी भी पोस्ट ऑफिस में जाकर अपना अकाउंट खोल सकते हैं।

  • पत्नी पर ग़ुस्सा करना इस व्यक्ति कोˈ पड़ गया बहुत महँगा महिला ने चबा लिए 4 लाख रुपए करवाना पड़ा अस्पताल में भर्तीˌ

    पत्नी पर ग़ुस्सा करना इस व्यक्ति कोˈ पड़ गया बहुत महँगा महिला ने चबा लिए 4 लाख रुपए करवाना पड़ा अस्पताल में भर्तीˌ

    पत्नी पर ग़ुस्सा करना इस व्यक्ति कोˈ पड़ गया बहुत महँगा महिला ने चबा लिए 4 लाख रुपए करवाना पड़ा अस्पताल में भर्तीˌ

    अक्सर यह कहा जाता है कि अपनी बीबी को ग़ुस्सा दिलाना अच्छा नहीं होता है। बीबी को अगर एक बार ग़ुस्सा आ आ जाए तो वह जल्दी ठंडा नहीं होता है और इसका ख़ामियाज़ा व्यक्ति को भुगतना पड़ता है। कई बार पत्नी को ग़ुस्सा दिलाना इतना महँगा पड़ जाता है कि आप सपने में भी इसके बारे में नहीं सोच सकते हैं। कई बार ग़ुस्सा दिलाने पर बीबी पति को छोड़ देती है तो कई बार वह कुछ ग़लत क़दम भी उठा लेती है।

    पति-पत्नी का रिश्ता बहुत ही प्यारा होता है। पति-पत्नी के बीच काफ़ी प्यार होता है, लेकिन कई बार दोनो के बीच नोक-झोकि भी होती है। नोक-झोक के बीच भी पति-पत्नी का प्यार कम नहीं होता है। इससे दोनो का प्यार बढ़ता ही है। कहा जाता है कि पति-पत्नी के बीच हल्की-फुल्की नोक-झोक होती रहनी चाहिए, इससे दोनो के रिश्ते में तजग़ी बनी रहती है। लेकिन कई बार जब ये नोक-झोक ज़्यादा बढ़ जाती है तो दोनो को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार यह नोक-झोक दोनो के अलगाव की भी वजह बन जाता है।

    झगड़े की वजह से होता है दोनो का नुक़सान:

    नोक-झोक तभी तक अच्छा होता है, जब तक इससे किसी का नुक़सान नहीं होता है। लेकिन जब यह नोक-झोक एक-दूसरे के नुक़सान की वजह बन जाए तो यह अच्छा नहीं होता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि पति-पति का झगड़ा बढ़ जाने के बाद बहुत ज़्यादा नुक़सान झेलना पड़ता है। हाल ही में ऐसी ही एक घटना देखने को मिली है, जिसमें पति-पत्नी के झगड़े की वजह से पति को काफ़ी नुक़सान झेलना पड़ा। पति ने पत्नी को डाँट दिया, और इसके बाद पत्नी ने जो क़दम उठाया उसे देखकर पति की हालत ही ख़राब हो गयी।

    महिला ने चबा लिए 4 लाख रुपए:

    जानकारी के अनुसार कोलंबिया के एक दम्पति के बीच छोटी सी बहस हो जाती है, जो धीरे-धीरे एक झगड़े में बदल जाती है। इससे पत्नी को बहुत ज़्यादा ग़ुस्सा आ जाता है। उसके बाद पत्नी ने घर में रखे 7000 डॉलर लगभग 4 लाख रुपए को चबा लिया। कहा जाता है कि ग़ुस्सा ख़ुद का ही दुश्मन होता है, जिसे इस महिला ने साबित कर दिया। नोट चबाने की वजह से महिला की तबियत काफ़ी बिगड़ गयी। इसके बाद तुरंत ही महिला को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहाँ डॉक्टरों ने सर्जरी करके महिला के पेट से पैसे निकाले। इसके बाद डॉक्टर ने दम्पति को झगड़ा ना करने के लिए कहा।

    करवाना पड़ा अस्पताल में भर्ती:

    जानकारी के अनुसार पत्नी अपने पति के साथ कहीं घूमने जाना चाहती थी। टूर के लिए वह कई महीने से पैसे एकत्र कर रही थी। बाद में किसी वजह से टूर की प्लानिंग को लेकर दम्पति में बस हो गयी। इसके बाद महिला को इतना ग़ुस्सा आया कि टूर के लिए एकत्र किए पैसे को वह खा गयी। बाद में सेहत बिगड़ने पर उसे अस्पताल एम भर्ती करवाया गया। अस्पताल में महिला की तुरंत सर्जरी की गयी और पेट से सारे पैसे निकाले गए। इसके बाद महिला की जान बच पायी।

  • जमीन पर बैठकर खाना खाने की पुरानीˈ आदत को मत समझो मामूली! छिपे हैं इसमें ऐसे 5 जबरदस्त फायदे जो आपकी सेहत पूरी तरह बदल सकते हैं

    जमीन पर बैठकर खाना खाने की पुरानीˈ आदत को मत समझो मामूली! छिपे हैं इसमें ऐसे 5 जबरदस्त फायदे जो आपकी सेहत पूरी तरह बदल सकते हैं

    जमीन पर बैठकर खाना खाने की पुरानीˈ आदत को मत समझो मामूली! छिपे हैं इसमें ऐसे 5 जबरदस्त फायदे जो आपकी सेहत पूरी तरह बदल सकते हैं

    जमीन पर बैठकर भोजन “नीचे बैठकर खाना!! ना बाबा ना, कितना आउटडेटेड और असभ्य सा तरीका है…..” जब कभी कोई आपको नीचे बैठकर खाने के लिए कहता है तो आपके दिमाग में यही शब्द घूमते होंगे कि कहीं किसी ने आपको नीचे बैठकर खाना खाते हुए देख लिया तो ये आपके लिए कितना शर्मिंदगी भरा होगा।लाइस्टाइल बदलने के कारण लोगों का भोजन खाने से लेकर काम करने के तौर तरीके तक सब कुछ बदल गया है। पुराने समय में लोग जमीन पर बैठ कर भोजन खाया करते थे, जिसके कारण वह स्वस्थ रहते थे। 

    इन लोगों में घुटनों की समस्या बहुत कम देखने को मिलती थी लेकिन अब तो पांच में से हर तीसरे में यह समस्या देखी जा रही है क्योंकि अब लोग डाइनिंग टेबल पर भोजन करना अच्छा समझते हैं। 

    आज हम आपको बताएंगे कि जमीन पर बैठ कर खाना से किन-किन शारीरिक समस्याओं से बचा जा सकता है? जिसे जानने के बाद आप जरूर नीचे बैठ कर भोजन करना शुरू करेंगे।

    1. वजन को रखें कंट्रोल: भोजन करने के लिए जमीन पर बैठना और फिर उठने से एक तरह का अर्ध पद्मासन हो जाता है। ये आसन धीरे-धीरे भोजन खाने और अच्छी तरह भोजन पचाने में मदद करता है। इससे वसा के कारण बढ़ने वाला वजन कंट्रोल में रहता है।

    2. पाचन क्रिया में सुधार: नीचे बैठकर भोजन खाते वक्त बार-बार प्लेट की तरफ झुकना पड़ता है और फिर पीछे होने से पेट की मांसपेशियां निरंतर कार्य करती है। जिससे पाचन क्रिया में सुधार आता है।

    3. दिल होगा मजबूत: सही तरीके से जमीन पर बैठ कर भोजन करने से शरीर में रक्त का संचार ठीक रहता है और साथ ही में नाड़ियों में कम दबाव महसूस होता है। पाचन क्रिया को सही रखने के लिए हृदय का भी खास काम होता है। इसलिए जब खाना आसानी से जल्दी पच जाएगा तो हृदय भी आसानी से अपना काम करेगा।

    4. मासपेशियों में खिचाव: भोजन करने के लिए जब आप नीचे बैठते हैं, तब आपके पेट, पीठ के निचले हिस्से और कूल्हे की मांसपेशियों में खिचाव आता है। जिससे दर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है। मासपेशियों में लगातार खिचाव बना रहने से स्वस्थ में सुधार आएगा।

    5. घुटनों का व्यायाम: जमीन पर बैठकर भोजन करने के लिए घुटनों को मोड़ना पड़ता है। इससे घुटनों की बढ़िया एक्सरसाइज होती है। उनमें लचक बरकरार रहती है। जिसके कारण घुटनों की समस्या से बचा सकता है।

  • महालक्ष्मी जी का एक ऐसा मंदिर, जहांˈ प्रसाद के रूप में मिलते हैं सोने चांदी

    महालक्ष्मी जी का एक ऐसा मंदिर, जहांˈ प्रसाद के रूप में मिलते हैं सोने चांदी

    महालक्ष्मी जी का एक ऐसा मंदिर, जहांˈ प्रसाद के रूप में मिलते हैं सोने चांदी

    हमारा भारत वर्ष बहुत ही धार्मिक देश है यहां पर भिन्न भिन्न प्रकार की जातियों के लोग मौजूद हैं परंतु यह सभी भाई चारे से एक साथ रहते हैं और यह अपने अपने धर्म के अनुसार अपने-अपने देवताओं की पूजा करते हैं वैसे देखा जाए तो जब हम मंदिरों में भगवान की पूजा करने जाते हैं तब हम अपने साथ भेंट के रूप में भगवान के लिए सोना चांदी हीरे जवाहरात आदि ले जाते हैं और उनके चरणों में अर्पण करते हैं 

    इसके अलावा लोग मन्नत भी मांगते हैं जब मंदिर से हम निकलते हैं तो हमको आमतौर पर प्रसाद के रूप में मिश्री मखाने लड्डू नारियल या कोई खाने वाली चीज मिलती है परंतु भारत में एक ऐसा मंदिर है जहां भक्तजनों को प्रसाद के रूप में सोने चांदी के आभूषण दिए जाते हैं जी हां, आप बिल्कुल सही सुन रहे हैं आप बेशक इस बात को सुनकर आश्चर्यचकित हो गए हो परंतु यह बात बिल्कुल सही है और इसे लेने के लिए भक्त दूर-दूर से इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं यह बात सुनकर अब आपके मन में भी विचार आने लगा होगा कि आखिर ऐसा कौन सा मंदिर है जहां पर प्रसाद के रूप में सोने के आभूषण मिलते हैं।

    दरअसल, मध्य प्रदेश के रतलाम में एक ऐसा महालक्ष्मी मंदिर है जहां पर प्रसाद के रूप में भक्तों को सोने, चांदी के आभूषण और जेवर दिए जाते हैं इस मंदिर के अंदर पूरे साल लोगों की भारी भीड़ लगी रहती है इस मंदिर के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और यहां अपनी भक्ति भाव से माता के चरणों में भेंट अर्पित करते हैं लेकिन साल के कुछ दिन के लिए ही इस मंदिर में कुबेर का दरबार लगता है यहां आकर भक्त लाखों करोड़ों रुपए के जेवर और नगदी अर्पित करते हैं खासतौर पर दीपावली के समय या धनतेरस के दिन माता का दरबार सोने चांदी और नोटों की मालाओं से सजा हुआ नजर आता है इस समय के दौरान जो भी भक्त यहां पर माता के दर्शन करने आता है वह कभी भी खाली हाथ लौटकर नहीं जाता है।

    महालक्ष्मी जी के इस मंदिर की परंपरा काफी पुरानी है यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है इस मंदिर में लोग दूर-दूर से माता के दर्शन करने के लिए आते हैं और इनको भेंट अर्पित करते हैं और खास बात यह है कि जब यह माता के दर्शन करने के बाद वापस जाते हैं तो इनको प्रसाद के रूप में सोने चांदी का प्रसाद दिया जाता है और दीपावली के समय कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं जाता है दीपावली के बाद दर्शन को जाने वाले भक्तों के चढ़ावे में आया हुआ रुपया और सोना चांदी प्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है इसीलिए यहां पर दीपावली के समय आप भक्तों की लंबी कतार देख सकते हैं दूर-दूर से लोग यहां पर दर्शन के लिए आते हैं और यहां का प्रसाद ग्रहण करते हैं प्रसाद के रूप में मिलने वाले यहां के सोने चांदी को लोग बहुत ही शुभ मानते हैं और उनको बेचते या खर्च नहीं करते हैं।

    सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर के चढ़ावे का पूरा हिसाब किताब रखा जाता है ताकि सभी भक्तों को उनका पैसा वापस मिल पाए सुरक्षा के लिए यहां पर सीसीटीवी कैमरे के साथ पुलिस का सख्त पहरा होता है।