खोल रखी थी पान की दुकान, चलˈ रहा था गजब का खेल, पुलिस जब मौके पर पहुंची, उड़ गए होशˌ

खोल रखी थी पान की दुकान, चलˈ रहा था गजब का खेल, पुलिस जब मौके पर पहुंची, उड़ गए होशˌ
खोल रखी थी पान की दुकान, चलˈ रहा था गजब का खेल, पुलिस जब मौके पर पहुंची, उड़ गए होशˌ

मुंबई. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पुलिस की विक्रोली यूनिट ने पान दुकान की आड़ में ड्रग्स बेचने वाले दुकानदार को रफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपी के पास से करीब 1.84 लाख रुपए की एमडी ड्रग्स बरामद की है. पुलिस ने यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की. गिरफ्तार आरोपी की पहचान मनवर जमीरुल्ला अंसारी (48) के रूप में हुई है, जो मुंबई के विक्रोली इलाके स्थित टैगोर नगर में पान दुकान चलाता है. पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी अपनी दुकान से मादक पदार्थ एमडी (मेथाम्फेटामाइन) बेच रहा है. सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस ने ड्रग्स बेचते हुए आरोपी दुकानदार को रंगे हाथों पकड़ लिया.

तलाशी के दौरान उसके पास से कुल 92 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद की गई, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 1.84 लाख रुपए बताई जा रही है. विक्रोली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अब आगे की जांच में जुट गई है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी को यह मादक पदार्थ कहां से मिल रहा था और वह कितने समय से इस अवैध धंधे में लिप्त था. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या उसका किसी बड़े गिरोह से संपर्क था या वह अकेले ही यह धंधा चला रहा था.

पान की दुकान की आड़ में खतरनाक खेल

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से अपनी पान दुकान की आड़ में यह गैरकानूनी काम कर रहा था, लेकिन अब उसे रंगे हाथों पकड़ लिया गया है. जांच में यह भी सामने आ सकता है कि वह किन-किन लोगों को यह ड्रग्स बेचता था. इस कार्रवाई के बाद इलाके में हलचल मच गई है. अधिकारियों का कहना है कि नशे के खिलाफ यह मुहिम आगे भी जारी रहेगी.

ड्रग तस्‍करी का नया तरीका

कर्नाटक के मैसूर में पकड़ी गई 434 करोड़ रुपए की ड्रग्स फैक्ट्री के मामले में मुंबई की साकीनाका पुलिस ने जांच के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. इस मामले में महाराष्ट्र तक ड्रग्स की तस्करी के लिए एक अनोखा और बेहद गुप्त तरीका अपनाया गया था. पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में शर्ट की फोटो को कोडवर्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था. जांच में सामने आया कि ड्रग्स की सप्लाई और निर्माण की प्रक्रिया दो अलग-अलग गिरोहों द्वारा अंजाम दी जा रही थी. सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इन दोनों गैंग के सदस्य एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे. यही इस पूरे ऑपरेशन की सबसे खतरनाक और शातिर मॉडस ओपेरेंडी थी. इस तरह की व्यवस्था से नेटवर्क की परतें खोलना बेहद मुश्किल हो जाता है.

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